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How to Reduce Uric Acid: इन आदतों से बढ़ सकता है यूरिक एसिड, कंट्रोल करने के लिए अपनाएं ये आसान तरीके

 यूरिक एसिड शरीर में बनने वाला एक अपशिष्ट पदार्थ है, जो प्यूरिन के टूटने की प्रक्रिया के दौरान बनता है। आमतौर पर किडनी इसे फिल्टर करके पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकाल देती है। लेकिन जब शरीर में इसका उत्पादन ज्यादा होने लगे या किडनी इसे पर्याप्त मात्रा में बाहर न निकाल पाए, तो खून में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ सकता है।

लगातार हाई यूरिक एसिड की स्थिति में कुछ लोगों को पैरों के अंगूठे, घुटने या दूसरे जोड़ों में अचानक दर्द, लालिमा और सूजन जैसी समस्या हो सकती है। इसे नजरअंदाज करने पर गाउट जैसी परेशानी का खतरा बढ़ सकता है।

किन वजहों से बढ़ सकता है यूरिक एसिड?

यूरिक एसिड बढ़ने के पीछे सिर्फ खान-पान ही जिम्मेदार नहीं होता। वजन, शराब का सेवन, कुछ दवाएं, किडनी की कार्यक्षमता और कुछ स्वास्थ्य स्थितियां भी इसकी वजह बन सकती हैं।

1. ज्यादा रेड मीट और ऑर्गन मीट

रेड मीट और खासकर लीवर, किडनी जैसे ऑर्गन मीट में प्यूरिन की मात्रा अधिक होती है। शरीर प्यूरिन को तोड़ता है और इससे यूरिक एसिड बनता है। इसलिए ऐसे खाद्य पदार्थों का ज्यादा सेवन कुछ लोगों में यूरिक एसिड बढ़ा सकता है।

2. कुछ सी-फूड का अधिक सेवन

कुछ समुद्री खाद्य पदार्थों में भी प्यूरिन अधिक होता है। यदि पहले से यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है, तो ऐसे खाद्य पदार्थों की मात्रा को सीमित रखना फायदेमंद हो सकता है।

3. मीठे पेय और फ्रुक्टोज

कोल्ड ड्रिंक, मीठे पैकेज्ड ड्रिंक और फ्रुक्टोज से भरपूर पेय यूरिक एसिड बढ़ने से जुड़े हो सकते हैं। इसलिए रोजाना ऐसे पेय लेने की आदत को कम करना बेहतर है।

4. शराब का सेवन

शराब, खासकर बीयर, यूरिक एसिड की समस्या को बढ़ा सकती है। शराब का सेवन शरीर में यूरिक एसिड के स्तर और उसके बाहर निकलने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

5. पानी कम पीना

पर्याप्त पानी नहीं पीने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है और किडनी के लिए यूरिक एसिड को पेशाब के रास्ते बाहर निकालना मुश्किल हो सकता है। इसलिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है।

6. वजन बढ़ना और कम शारीरिक गतिविधि

अधिक वजन और निष्क्रिय जीवनशैली भी हाई यूरिक एसिड से जुड़ी हो सकती है। नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ वजन बनाए रखना यूरिक एसिड को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।

यूरिक एसिड कम करने के लिए क्या करें?

खान-पान में करें बदलाव

अगर यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है तो ज्यादा प्यूरिन वाले खाद्य पदार्थों की मात्रा कम करने पर ध्यान दें। रेड मीट और ऑर्गन मीट का सेवन सीमित करें। संतुलित आहार में सब्जियां, फल, साबुत अनाज और कम वसा वाले डेयरी विकल्प शामिल किए जा सकते हैं।

मीठे ड्रिंक्स से बनाएं दूरी

कोल्ड ड्रिंक और ज्यादा चीनी वाले पैकेज्ड पेय की जगह सादा पानी जैसे बेहतर विकल्प चुनें। मीठे पेय का नियमित सेवन कम करना यूरिक एसिड मैनेजमेंट के लिए उपयोगी हो सकता है।

पर्याप्त पानी पिएं

दिनभर पानी पीते रहें। हालांकि पानी की जरूरत हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। अगर किसी व्यक्ति को किडनी, हृदय या अन्य बीमारी है और डॉक्टर ने पानी की मात्रा सीमित करने को कहा है, तो उनकी सलाह को प्राथमिकता दें।

रोज करें हल्की एक्सरसाइज

नियमित वॉकिंग, साइकिलिंग या अन्य उपयुक्त शारीरिक गतिविधि वजन और मेटाबॉलिक हेल्थ को बेहतर रखने में मदद कर सकती है। अचानक बहुत ज्यादा या बेहद कठिन एक्सरसाइज शुरू करने के बजाय धीरे-धीरे एक्टिविटी बढ़ाना बेहतर है।

शराब से दूरी रखना बेहतर

अगर यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है या गाउट की समस्या है, तो शराब से बचना बेहतर विकल्प हो सकता है। खासकर बीयर का सेवन सीमित या बंद करने की सलाह दी जाती है।

क्या सिर्फ डाइट से यूरिक एसिड कंट्रोल हो जाएगा?

हर व्यक्ति में ऐसा जरूरी नहीं है। कुछ लोगों में खान-पान और जीवनशैली में बदलाव से मदद मिलती है, लेकिन अगर यूरिक एसिड काफी बढ़ा हुआ है या बार-बार गाउट के अटैक हो रहे हैं, तो डॉक्टर दवा की सलाह दे सकते हैं।

इसलिए सिर्फ घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट और चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।

इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

अगर पैर के अंगूठे या किसी अन्य जोड़ में अचानक तेज दर्द, सूजन, लालिमा या गर्माहट महसूस हो, खासकर रात में अचानक दर्द शुरू हो जाए, तो डॉक्टर से सलाह लें।

बार-बार ऐसी समस्या होने पर यूरिक एसिड और किडनी की कार्यक्षमता की जांच की जरूरत पड़ सकती है। बिना डॉक्टर की सलाह के यूरिक एसिड की दवा शुरू या बंद नहीं करनी चाहिए।

Disclaimer: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। यूरिक एसिड या गाउट की समस्या होने पर सही जांच और इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह लें।

Monday Box Office: ‘स्पाइडर-मैन’ की बादशाहत कायम, ‘जना नायकन’ और ‘धमाल 4’ का कैसा रहा हाल?

Monday Box Office Collection: सिनेमाघरों में चल रही फिल्मों के लिए सोमवार का दिन एक बार फिर परीक्षा लेकर आया। वीकेंड के मुकाबले वीकडे शुरू होते ही ज्यादातर फिल्मों की कमाई में गिरावट देखने को मिली। हालांकि, कई फिल्मों ने धीमी रफ्तार के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर अपनी पकड़ बनाए रखी।

सोमवार की कमाई में ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ सबसे आगे रहा। इसके अलावा ‘जना नायकन’, ‘द ओडिसी’ और ‘धमाल 4’ की कमाई में भी सोमवार को गिरावट दर्ज की गई।

‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ ने सोमवार को कितने कमाए?

‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ भारतीय बॉक्स ऑफिस पर लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रही है। रिलीज के शुरुआती दिनों में शानदार कमाई करने के बाद फिल्म की रफ्तार सोमवार को जरूर धीमी हुई, लेकिन इसके बावजूद यह बाकी फिल्मों से काफी आगे रही।

आपके दिए शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, फिल्म ने अपने पांचवें दिन यानी पहले सोमवार को 23.80 करोड़ रुपये नेट कमाए। इस कमाई के साथ भारत में फिल्म का कुल नेट कलेक्शन 281.75 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

सोमवार को भी फिल्म ने सिनेमाघरों में दर्शकों को आकर्षित किया और बॉक्स ऑफिस पर अपना दबदबा बनाए रखा।

‘जना नायकन’ की कमाई में आई गिरावट

थलपति विजय की फिल्म ‘जना नायकन’ के लिए दूसरा सोमवार अपेक्षाकृत धीमा रहा। रिलीज के 12वें दिन फिल्म ने करीब 3.85 करोड़ रुपये नेट का कारोबार किया।

इसके साथ भारत में फिल्म का कुल नेट कलेक्शन 179.45 करोड़ रुपये और कुल ग्रॉस कलेक्शन 209.35 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

फिल्म ने विदेशी बाजार में भी कमाई जारी रखी। 12वें दिन विदेशों से करीब 1 करोड़ रुपये की कमाई हुई, जिसके बाद इसका ओवरसीज ग्रॉस कलेक्शन करीब 92 करोड़ रुपये बताया गया।

भारत और विदेशों की कमाई को मिलाकर फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन करीब 301.35 करोड़ रुपये हो गया।

‘द ओडिसी’ ने तीसरे सोमवार कितना कमाया?

क्रिस्टोफर नोलन की ‘द ओडिसी’ ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर अब तक अच्छा प्रदर्शन किया है। हालांकि नई रिलीज ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ के आने के बाद इसकी कमाई की गति कुछ प्रभावित हुई है।

फिल्म के 18वें दिन यानी तीसरे सोमवार को कलेक्शन में एक बार फिर गिरावट देखने को मिली। उपलब्ध शुरुआती आंकड़ों के अनुसार ‘द ओडिसी’ ने सोमवार को करीब 2.36 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया।

इसके साथ भारत में फिल्म की 18 दिनों की कुल नेट कमाई करीब 151.85 करोड़ रुपये हो गई है।

‘धमाल 4’ की सोमवार की कमाई लाखों में सिमटी

अजय देवगन स्टारर ‘धमाल 4’ लंबे समय से सिनेमाघरों में दर्शकों का मनोरंजन कर रही है। चौथे वीकेंड पर फिल्म ने अपनी कमाई में कुछ सुधार दिखाया था।

फिल्म ने चौथे शनिवार को करीब 1.65 करोड़ रुपये, जबकि रविवार को 2.35 करोड़ रुपये कमाए थे। हालांकि सोमवार आते ही इसकी रफ्तार फिर धीमी हो गई।

रिलीज के 25वें दिन यानी चौथे सोमवार को ‘धमाल 4’ ने करीब 60 लाख रुपये का कारोबार किया। इसके साथ भारत में फिल्म का कुल कलेक्शन 161.65 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

सोमवार को किस फिल्म का रहा दबदबा?

सोमवार के शुरुआती आंकड़ों को देखें तो ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ बाकी फिल्मों से स्पष्ट रूप से आगे रही। फिल्म ने अकेले सोमवार को 20 करोड़ रुपये से ज्यादा का नेट कलेक्शन किया।

वहीं ‘जना नायकन’, ‘द ओडिसी’ और ‘धमाल 4’ की कमाई में वीकडे शुरू होने के साथ गिरावट देखने को मिली। अब इन फिल्मों की नजर आने वाले दिनों और अगले वीकेंड पर होगी, जहां कमाई में दोबारा उछाल आने की उम्मीद रहती है।

Ayushman Bharat Kidney Transplant:आयुष्मान भारत में अब किडनी ट्रांसप्लांट भी शामिल, सरकार ने शुरू किया ‘जुग जुग जियो’ अभियान

 देश में अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने और ऑर्गन ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। सोमवार को 16वें भारतीय अंगदान दिवस के अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कई नई योजनाओं और डिजिटल पहलों की शुरुआत की।

कार्यक्रम के दौरान सरकार ने ‘जुग जुग जियो अभियान’ शुरू करने के साथ-साथ ‘ई-प्रत्यारोपण’ डिजिटल प्लेटफॉर्म और NOTTO मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया। इसके अलावा आयुष्मान भारत योजना के तहत किडनी ट्रांसप्लांट को शामिल किए जाने की जानकारी भी दी गई।

भारत बना दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑर्गन ट्रांसप्लांट देश

केंद्र सरकार के मुताबिक भारत में पिछले कुछ वर्षों के दौरान अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ है।

2013 में देश में करीब 4,990 ऑर्गन ट्रांसप्लांट हुए थे। यह संख्या 2025 में बढ़कर 20,138 तक पहुंच गई। इस वृद्धि के साथ भारत कुल अंग प्रत्यारोपण के मामले में अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है।

सरकार का कहना है कि अंगदान को लेकर लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील से लोगों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ी है।

5 लाख से ज्यादा लोगों ने ली अंगदान की शपथ

राष्ट्रीय डिजिटल अंगदान पोर्टल की शुरुआत 2023 में की गई थी। सरकार के अनुसार, इसके बाद से अब तक 5 लाख से ज्यादा लोगों ने आधार सत्यापन के साथ अंगदान की शपथ ली है।

हालांकि, सरकार के सामने अब भी सबसे बड़ी चुनौती अंगों की मांग और उपलब्धता के बीच मौजूद अंतर को कम करना है।

मृत अंगदाताओं से ट्रांसप्लांट में भी बढ़ोतरी

अंगदान के क्षेत्र में सिर्फ कुल ट्रांसप्लांट की संख्या ही नहीं बढ़ी है, बल्कि मृत अंगदाताओं से होने वाले प्रत्यारोपण में भी वृद्धि दर्ज की गई है।

2013 में मृत अंगदाताओं से 837 ट्रांसप्लांट हुए थे। 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर 3,526 हो गया।

सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में अंगदान की प्रक्रिया को और मजबूत बनाना तथा जरूरतमंद मरीजों तक समय पर अंग उपलब्ध कराना है।

शुरू हुआ ‘जुग जुग जियो’ अभियान

भारतीय अंगदान दिवस के मौके पर केंद्र सरकार ने ‘जुग जुग जियो अभियान’ की शुरुआत की है। यह एक साल तक चलने वाला राष्ट्रीय जागरूकता अभियान होगा।

इस अभियान का मकसद देश के ग्रामीण और दूरदराज इलाकों तक अंगदान का संदेश पहुंचाना है। सरकार लोगों को अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने और जरूरतमंद मरीजों की जिंदगी बचाने में योगदान देने के लिए प्रेरित करेगी।

एक प्लेटफॉर्म पर आएंगे मरीज, अस्पताल और डॉक्टर

सरकार ने ‘ई-प्रत्यारोपण’ नाम का डिजिटल प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य अंग प्रत्यारोपण से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को एक डिजिटल सिस्टम के माध्यम से जोड़ना है।

इस प्लेटफॉर्म पर अस्पताल, डॉक्टर, मरीज, अंगदाता और संबंधित संस्थाओं को एक नेटवर्क से जोड़े जाने की योजना है। इससे रजिस्ट्रेशन, मरीजों की वेटिंग लिस्ट, अंग आवंटन और ट्रांसप्लांट से जुड़ी अन्य प्रक्रियाओं को ज्यादा व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।

इसके साथ ही NOTTO मोबाइल ऐप भी शुरू किया गया है। इसके जरिए आम लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों को अंगदान एवं प्रत्यारोपण से जुड़ी जरूरी जानकारी और सेवाएं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी।

ब्रेन स्टेम डेथ और स्वैप ट्रांसप्लांट के लिए नई गाइडलाइन

कार्यक्रम के दौरान ब्रेन स्टेम डेथ सर्टिफिकेशन और स्वैप ट्रांसप्लांटेशन से संबंधित राष्ट्रीय दिशा-निर्देश भी जारी किए गए।

इन गाइडलाइंस का उद्देश्य देशभर में अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और एक समान बनाना है।

स्वैप ट्रांसप्लांट की व्यवस्था खासतौर पर उन मामलों में उपयोगी हो सकती है, जहां मरीज का इच्छुक जीवित अंगदाता सीधे तौर पर मरीज के साथ संगत नहीं होता। ऐसी परिस्थितियों में दूसरे डोनर के साथ अंगदान की अदला-बदली संभव होती है।

आयुष्मान भारत में किडनी ट्रांसप्लांट भी शामिल

कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण जानकारियों में से एक यह रही कि आयुष्मान भारत योजना के तहत किडनी ट्रांसप्लांट को भी शामिल किया गया है।

इसका फायदा खासतौर पर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को मिल सकता है, जिन्हें किडनी ट्रांसप्लांट जैसी महंगी चिकित्सा प्रक्रिया का खर्च उठाने में परेशानी होती है।

सरकार राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम के तहत राज्यों को अंग संरक्षण, परिवहन, इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरी जरूरी सुविधाओं के लिए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करा रही है।

अंगदान को लेकर भ्रांतियां दूर करने पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने लोगों से अंगदान को लेकर मौजूद गलत धारणाओं से बाहर आने की अपील की। उन्होंने कहा कि मानव जीवन बचाने और जरूरतमंद की मदद करने का भाव सभी धर्मों में महत्वपूर्ण माना गया है।

सरकार का जोर अब जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ अंगों की उपलब्धता, अस्पतालों के इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रांसप्लांट सिस्टम को मजबूत करने पर है।

Disclaimer: यह खबर सरकारी कार्यक्रम में बताई गई योजनाओं और जानकारियों पर आधारित है। आयुष्मान भारत के तहत किडनी ट्रांसप्लांट की पात्रता, कवरेज और उपलब्ध अस्पताल की जानकारी के लिए संबंधित आधिकारिक पोर्टल या अधिकृत अस्पताल से पुष्टि करें।

Donald Trump on Iran: ईरान पर फिर बरसे डोनाल्ड ट्रंप, बोले- ‘बातचीत के लिए मांगते हैं भीख, लेकिन मानते नहीं’

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय लगातार बयानबाजी तेज होती जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को तेहरान के साथ संभावित बातचीत को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान बातचीत की इच्छा जताता है, लेकिन सार्वजनिक रूप से बातचीत से इनकार करता है।

ट्रंप ने एक बार फिर यह भी स्पष्ट किया कि उनके मुताबिक ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी ईरान को चेतावनी दी।

ट्रंप बोले- ईरान बातचीत के लिए करता है गुहार

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि ईरानी नेतृत्व अमेरिका के साथ बैठक की इच्छा जताता है। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच बातचीत की प्रक्रिया शुरू होती है, लेकिन इसके बाद ईरान की ओर से सार्वजनिक तौर पर इससे अलग बयान दिए जाने लगते हैं।

ट्रंप ने ईरानी नेताओं के रुख को विरोधाभासी बताते हुए कहा कि एक तरफ बातचीत की कोशिश की जाती है और दूसरी तरफ ईरान यह दावा करता है कि अमेरिका के साथ किसी तरह की चर्चा नहीं हो रही है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर पुराने रुख पर भी निशाना साधा।

होर्मुज को लेकर ट्रंप की सख्त चेतावनी

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से इसका रणनीतिक महत्व काफी ज्यादा है।

ट्रंप ने दावा किया कि इस क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की मजबूत मौजूदगी है। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए अमेरिका अपनी सैन्य क्षमता का इस्तेमाल कर सकता है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि जब तक कोई समझौता नहीं होता या ईरान अमेरिकी शर्तों को स्वीकार नहीं करता, तब तक उस पर दबाव जारी रह सकता है।

‘ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होगा’

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी दो टूक रुख अपनाया।

ट्रंप ने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने ईरान पर लंबे समय से क्षेत्रीय तनाव पैदा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिका इस समस्या का समाधान चाहता है।

इस बयान से साफ है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर मतभेद अभी भी गंभीर बने हुए हैं।

ईरान ने अमेरिका से बातचीत के दावे को किया खारिज

दूसरी ओर ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति के बातचीत संबंधी दावे को खारिज कर दिया है।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि फिलहाल अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान की ओर से किसी अमेरिकी प्रतिनिधि के स्वागत या वार्ता के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजने की कोई योजना नहीं है।

इससे दोनों देशों के बयानों में बड़ा अंतर साफ दिखाई देता है। जहां ट्रंप ईरान की ओर से बातचीत की इच्छा जताए जाने का दावा कर रहे हैं, वहीं तेहरान किसी मौजूदा बातचीत से इनकार कर रहा है।

ईरान ने अमेरिका-इजरायल की कार्रवाई पर उठाए सवाल

ईरानी प्रवक्ता ने अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने इसे केवल ईरान के खिलाफ कार्रवाई न बताते हुए पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए खतरा बताया।

ईरान का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ सकती है।

होर्मुज को लेकर ईरान-ओमान संपर्क जारी

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के मुद्दे पर ईरानी पक्ष ने कहा कि ईरान और ओमान के बीच इस बात को लेकर कोई मूलभूत मतभेद नहीं है कि इस समुद्री मार्ग से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही कैसे सुनिश्चित की जाए।

ईरान के अनुसार दोनों देशों के बीच संपर्क का एक अहम उद्देश्य होर्मुज से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए अस्थायी व्यवस्था तैयार करना है।

इस तरह अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर जहां एक तरफ ट्रंप के तीखे बयान सामने आए हैं, वहीं दूसरी तरफ तेहरान ने किसी प्रत्यक्ष वार्ता से इनकार कर दिया है। दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तनाव आने वाले दिनों में भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहने की संभावना है।

लखनऊ मंडल की 155 करोड़ रुपये की 64 परियोजनाओं पर मंथन : धार्मिक पर्यटन और ईको टूरिज्म को मिलेगा नया विस्तार

  • नैमिषारण्य के कॉरिडोर से दुधवा के ईको रिट्रीट तक, पर्यटन विकास का व्यापक खाका तैयार
  • लखनऊ बनेगा पर्यटन का प्रवेश द्वार, नैमिषारण्य से दुधवा तक जुड़ेगा नया टूरिज्म सर्किट
  • बिरजू महाराज कथक संस्थान से राज्य संग्रहालय तक, प्रमुख परियोजनाओं की हुई व्यापक समीक्षा
  • लखनऊ से नैमिषारण्य और दुधवा तक पर्यटन की मजबूत कड़ी बनाने की है तैयारी

लखनऊ, 3 अगस्त 2026: लखनऊ मंडल को धार्मिक, सांस्कृतिक और ईको टूरिज्म का मजबूत केंद्र बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने सोमवार को लखनऊ मंडल की पर्यटन, संस्कृति और धर्मार्थ कार्य विभाग की प्रस्तावित एवं निर्माणाधीन परियोजनाओं की समीक्षा की। बैठक में वर्ष 2026-27 की प्रस्तावित कार्ययोजना के तहत लगभग 155 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली 64 पर्यटन परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इन परियोजनाओं का उद्देश्य लखनऊ को ऐसा पर्यटन प्रवेश द्वार बनाना है, जहां आने वाले पर्यटक नैमिषारण्य, दुधवा राष्ट्रीय उद्यान और मंडल के अन्य प्रमुख धार्मिक एवं प्राकृतिक स्थलों तक आसानी से पहुंच सकें।

इनमें लखनऊ की 22, सीतापुर की 15, हरदोई की 10, लखीमपुर खीरी की 7 तथा उन्नाव और रायबरेली की 5-5 पर्यटन परियोजनाओं की समीक्षा की गई। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि लखनऊ केवल प्रदेश की राजधानी ही नहीं, बल्कि नैमिषारण्य, दुधवा और मंडल के अन्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का प्रमुख प्रवेश द्वार है। उन्होंने निर्देश दिए कि पर्यटन परियोजनाओं का उद्देश्य पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें मंडल के अन्य पर्यटन स्थलों तक आकर्षित करना भी होना चाहिए। बैठक में उपस्थित पर्यटन महानिदेशक डॉ. वेदपति मिश्रा ने कहा कि लखनऊ मंडल की पर्यटन परियोजनाओं का उद्देश्य धार्मिक, सांस्कृतिक और ईको टूरिज्म को एक समग्र पर्यटन अनुभव के रूप में विकसित करना है। उन्होंने कहा कि सभी विभागों के समन्वित प्रयासों से पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही परियोजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता, समयबद्धता और स्थानीय विरासत के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

बैठक में लगभग 8 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित ‘परंपरा वन स्टॉप सेंटर फॉर टूरिज्म एंड कल्चर’ परियोजना पर विशेष चर्चा हुई। इस केंद्र को लखनऊ मंडल की सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन स्थलों और धार्मिक पहचान को एक ही मंच पर प्रस्तुत करने वाले साझा केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके माध्यम से राजधानी आने वाले पर्यटकों को नैमिषारण्य, दुधवा राष्ट्रीय उद्यान और मंडल के अन्य प्रमुख स्थलों की समग्र जानकारी एवं पर्यटन सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा लखनऊ में बुद्धेश्वर महादेव मंदिर, नाका हिंडोला गुरुद्वारा, हनुमंत धाम, राम जानकी मंदिर और भुइयां देवी मंदिर सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास और पर्यटक सुविधाओं के विस्तार के प्रस्तावों की भी समीक्षा की गई।

सीतापुर में नैमिषारण्य के ललिता देवी मंदिर, चक्रतीर्थ और राजघाट को जोड़ने वाले दो नए धार्मिक कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया, जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही और सुविधाएं बेहतर होंगी। इसके अलावा सोनासरी देवी मंदिर, मां संकटा देवी धाम और झारखंडेश्वर महादेव मंदिर के विकास पर भी चर्चा हुई। ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए लखीमपुर खीरी में दुधवा राष्ट्रीय उद्यान के निकट ईको रिट्रीट विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया। वहीं उन्नाव स्थित शहीद चंद्रशेखर आजाद पक्षी विहार के भीतर राही पर्यटन आवास गृह के पुनर्विकास की योजना भी सामने आई, जिससे बर्ड वॉचिंग और नेचर टूरिज्म को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

हरदोई जनपद में महर्षि दधीचि मंदिर और सरस हाट के विकास की योजनाओं की समीक्षा की गई। वहीं रायबरेली में महाराजा महे पासी किला, चंपा देवी मंदिर सहित कई प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता से विकसित करने की योजना पर चर्चा हुई। लखीमपुर खीरी और उन्नाव के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर भी पर्यटक सुविधाओं के विस्तार और आधारभूत ढांचे के विकास के प्रस्तावों पर विचार किया गया, ताकि पूरे मंडल में पर्यटन गतिविधियों को संतुलित रूप से बढ़ावा मिल सके।

संस्कृति विभाग की निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान रायबरेली के डलमऊ स्थित प्राचीन रामलीला स्थल के विकास, विस्तार, जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इसके साथ ही हरदोई के सवायजपुर, बावन और भरखनी, लखनऊ के ऐशबाग, मोहनलालगंज तथा उन्नाव के वृंदावन पार्क स्थित रामलीला स्थलों के विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। रायबरेली के सलोन में अवध केसरी राणा बेनी माधव बक्श सिंह की स्मृति में सभागार एवं पुस्तकालय निर्माण तथा उन्नाव के बदरका स्थित अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की जन्मस्थली पर बहुउद्देशीय हॉल के निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की गई।

साथ ही बैठक में लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश संस्कृति संग्रहालय, भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र, संगीत नाटक अकादमी, भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, बिरजू महाराज कथक संस्थान, राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह तथा राज्य संग्रहालय से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इसके अलावा प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय, लोक कला संग्रहालय, अवध वीथिका, राजभवन कला कक्ष, आधुनिक पुस्तकालय, कैफेटेरिया, ऑडिटोरियम के उन्नयन, आधुनिक स्टोरेज सिस्टम, अग्निशमन व्यवस्था तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए।

धर्मार्थ कार्य विभाग की परियोजनाओं की भी हुई समीक्षा
बैठक में धर्मार्थ कार्य विभाग की पांच परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। इनमें सीतापुर का दधीचि कुंड, लखीमपुर खीरी का लीलानाथ शिव मंदिर, उन्नाव का चंद्रेश्वर महादेव मंदिर तथा रायबरेली के प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास और अनुरक्षण से जुड़े प्रस्ताव शामिल रहे। इसके साथ ही संस्कृति विभाग की कई निर्माणाधीन परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा करें, ताकि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई गति मिल सके।

बैठक में वर्ष 2024 से 2026 के बीच स्वीकृत पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग की परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को नियमित स्थलीय निरीक्षण, निर्माण कार्यों की सतत निगरानी और निर्धारित समय सीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अंतिम कार्ययोजना में शामिल करने से पहले सभी प्रस्तावों का भूमि उपलब्धता, संपर्क मार्ग, पर्यटक आवागमन, संचालन व्यवस्था और दीर्घकालिक अनुरक्षण के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन, ईको टूरिज्म, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक पर्यटक सुविधाओं को एक-दूसरे से जोड़कर लखनऊ मंडल को प्रदेश का एक सशक्त पर्यटन मॉडल बनाया जाएगा।

इस बैठक में बिसवां विधायक निर्मल वर्मा, लखनऊ सदर से विधान परिषद सदस्य अवनीश कुमार सिंह, मोहम्मदी विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह, लखीमपुर सदर विधायक योगेश वर्मा, मिश्रिख विधायक रामकृष्ण भार्गव, संडीला विधायक अलका सिंह अर्कवंशी, गोला विधायक अमन गिरि, लखनऊ उत्तर के विधायक डॉ नीरज बोरा तथा बांगरमऊ विधायक श्रीकांत कटियार समेत अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। इसके अलावा लखनऊ मंडल के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत सहित संबंधित विभागों के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। वहीं मिश्रिख लोकसभा क्षेत्र से सांसद अशोक रावत, कारागार राज्य मंत्री सुरेश राही तथा सरोजिनी नगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल हुए। वहीं मिश्रिख विधायक रामकृष्ण भार्गव ने नैमिषारण्य को सशक्त पर्यटन पहचान दिलाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का स्वागत किया। मोहम्मदी विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह ने पर्यटन एवं सांस्कृतिक विकास के लिए प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की।