देश में अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने और ऑर्गन ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। सोमवार को 16वें भारतीय अंगदान दिवस के अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कई नई योजनाओं और डिजिटल पहलों की शुरुआत की।
कार्यक्रम के दौरान सरकार ने ‘जुग जुग जियो अभियान’ शुरू करने के साथ-साथ ‘ई-प्रत्यारोपण’ डिजिटल प्लेटफॉर्म और NOTTO मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया। इसके अलावा आयुष्मान भारत योजना के तहत किडनी ट्रांसप्लांट को शामिल किए जाने की जानकारी भी दी गई।
भारत बना दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑर्गन ट्रांसप्लांट देश
केंद्र सरकार के मुताबिक भारत में पिछले कुछ वर्षों के दौरान अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ है।
2013 में देश में करीब 4,990 ऑर्गन ट्रांसप्लांट हुए थे। यह संख्या 2025 में बढ़कर 20,138 तक पहुंच गई। इस वृद्धि के साथ भारत कुल अंग प्रत्यारोपण के मामले में अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है।
सरकार का कहना है कि अंगदान को लेकर लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील से लोगों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ी है।
5 लाख से ज्यादा लोगों ने ली अंगदान की शपथ
राष्ट्रीय डिजिटल अंगदान पोर्टल की शुरुआत 2023 में की गई थी। सरकार के अनुसार, इसके बाद से अब तक 5 लाख से ज्यादा लोगों ने आधार सत्यापन के साथ अंगदान की शपथ ली है।
हालांकि, सरकार के सामने अब भी सबसे बड़ी चुनौती अंगों की मांग और उपलब्धता के बीच मौजूद अंतर को कम करना है।
मृत अंगदाताओं से ट्रांसप्लांट में भी बढ़ोतरी
अंगदान के क्षेत्र में सिर्फ कुल ट्रांसप्लांट की संख्या ही नहीं बढ़ी है, बल्कि मृत अंगदाताओं से होने वाले प्रत्यारोपण में भी वृद्धि दर्ज की गई है।
2013 में मृत अंगदाताओं से 837 ट्रांसप्लांट हुए थे। 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर 3,526 हो गया।
सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में अंगदान की प्रक्रिया को और मजबूत बनाना तथा जरूरतमंद मरीजों तक समय पर अंग उपलब्ध कराना है।
शुरू हुआ ‘जुग जुग जियो’ अभियान
भारतीय अंगदान दिवस के मौके पर केंद्र सरकार ने ‘जुग जुग जियो अभियान’ की शुरुआत की है। यह एक साल तक चलने वाला राष्ट्रीय जागरूकता अभियान होगा।
इस अभियान का मकसद देश के ग्रामीण और दूरदराज इलाकों तक अंगदान का संदेश पहुंचाना है। सरकार लोगों को अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने और जरूरतमंद मरीजों की जिंदगी बचाने में योगदान देने के लिए प्रेरित करेगी।
एक प्लेटफॉर्म पर आएंगे मरीज, अस्पताल और डॉक्टर
सरकार ने ‘ई-प्रत्यारोपण’ नाम का डिजिटल प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य अंग प्रत्यारोपण से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को एक डिजिटल सिस्टम के माध्यम से जोड़ना है।
इस प्लेटफॉर्म पर अस्पताल, डॉक्टर, मरीज, अंगदाता और संबंधित संस्थाओं को एक नेटवर्क से जोड़े जाने की योजना है। इससे रजिस्ट्रेशन, मरीजों की वेटिंग लिस्ट, अंग आवंटन और ट्रांसप्लांट से जुड़ी अन्य प्रक्रियाओं को ज्यादा व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।
इसके साथ ही NOTTO मोबाइल ऐप भी शुरू किया गया है। इसके जरिए आम लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों को अंगदान एवं प्रत्यारोपण से जुड़ी जरूरी जानकारी और सेवाएं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी।
ब्रेन स्टेम डेथ और स्वैप ट्रांसप्लांट के लिए नई गाइडलाइन
कार्यक्रम के दौरान ब्रेन स्टेम डेथ सर्टिफिकेशन और स्वैप ट्रांसप्लांटेशन से संबंधित राष्ट्रीय दिशा-निर्देश भी जारी किए गए।
इन गाइडलाइंस का उद्देश्य देशभर में अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और एक समान बनाना है।
स्वैप ट्रांसप्लांट की व्यवस्था खासतौर पर उन मामलों में उपयोगी हो सकती है, जहां मरीज का इच्छुक जीवित अंगदाता सीधे तौर पर मरीज के साथ संगत नहीं होता। ऐसी परिस्थितियों में दूसरे डोनर के साथ अंगदान की अदला-बदली संभव होती है।
आयुष्मान भारत में किडनी ट्रांसप्लांट भी शामिल
कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण जानकारियों में से एक यह रही कि आयुष्मान भारत योजना के तहत किडनी ट्रांसप्लांट को भी शामिल किया गया है।
इसका फायदा खासतौर पर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को मिल सकता है, जिन्हें किडनी ट्रांसप्लांट जैसी महंगी चिकित्सा प्रक्रिया का खर्च उठाने में परेशानी होती है।
सरकार राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम के तहत राज्यों को अंग संरक्षण, परिवहन, इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरी जरूरी सुविधाओं के लिए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करा रही है।
अंगदान को लेकर भ्रांतियां दूर करने पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने लोगों से अंगदान को लेकर मौजूद गलत धारणाओं से बाहर आने की अपील की। उन्होंने कहा कि मानव जीवन बचाने और जरूरतमंद की मदद करने का भाव सभी धर्मों में महत्वपूर्ण माना गया है।
सरकार का जोर अब जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ अंगों की उपलब्धता, अस्पतालों के इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रांसप्लांट सिस्टम को मजबूत करने पर है।
Disclaimer: यह खबर सरकारी कार्यक्रम में बताई गई योजनाओं और जानकारियों पर आधारित है। आयुष्मान भारत के तहत किडनी ट्रांसप्लांट की पात्रता, कवरेज और उपलब्ध अस्पताल की जानकारी के लिए संबंधित आधिकारिक पोर्टल या अधिकृत अस्पताल से पुष्टि करें।


































