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‘नेट जीरो सरोजनीनगर’ की दिशा में बढ़ा बड़ा कदम : 60 मेगावाट से अधिक सौर ऊर्जा, 3,000+ सोलर स्ट्रीट लाइटें और 7 EV चार्जिंग स्टेशन ; 8 सामुदायिक सौर ऊर्जा संयंत्र, 5 सोलर ट्री और 3 तालाबों के विकास से स्वच्छ ऊर्जा, जल संरक्षण और हरित विकास को मिल रहा बढ़ावा

लखनऊ : सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र को सुरक्षित, प्रकाशमान, ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में ‘नेट जीरो सरोजनीनगर’ की परिकल्पना को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। इस पहल के तहत स्वच्छ एवं अक्षय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, कार्बन उत्सर्जन में कमी, जल संरक्षण, हरित क्षेत्र और जनभागीदारी को एक साथ जोड़ते हुए सतत विकास की दिशा में विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं।

सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के अनुसार, ‘नेट जीरो सरोजनीनगर’ केवल पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा अभियान नहीं, बल्कि क्षेत्र के भविष्य के लिए दीर्घकालिक विकास दृष्टि है। उनका कहना है कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को समान प्राथमिकता देते हुए स्वच्छ ऊर्जा को स्थानीय विकास का अभिन्न हिस्सा बनाया जा रहा है।

60 मेगावाट से अधिक सौर ऊर्जा क्षमता का विस्तार

सरोजनीनगर में 60 मेगावाट से अधिक सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता विकसित की जा चुकी है। इसके साथ ही ₹1.64 करोड़ की लागत से 8 RWA में सामुदायिक सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए गए हैं। इन संयंत्रों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ ऊर्जा के वैकल्पिक और स्वच्छ स्रोतों को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

इसके अतिरिक्त ₹25.18 लाख की लागत से जोनल पार्क में सोलर पावर प्लांट स्थापित किया गया है। सार्वजनिक स्थलों पर सौर ऊर्जा के उपयोग की दिशा में इसे महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

क्षेत्र में 3,000 से अधिक सौर स्ट्रीट लाइट और 200 से अधिक सौर स्ट्रीट मास्ट भी लगाए गए हैं। इनके माध्यम से गलियों, संपर्क मार्गों, ग्रामीण क्षेत्रों और अन्य आवश्यक सार्वजनिक स्थलों पर प्रकाश व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा, “जहाँ अंधेरा है, वहाँ प्रकाश पहुँचे; जहाँ बिजली पर निर्भरता है, वहाँ सौर ऊर्जा विकल्प बने- यही सुरक्षित, सुगम और नेट जीरो सरोजनीनगर की दिशा में हमारा प्रयास है।”

सोलर ट्री और EV चार्जिंग स्टेशन से स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा

‘नेट जीरो सरोजनीनगर’ की दिशा में सौर ऊर्जा आधारित ढांचे के विस्तार के साथ पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। क्षेत्र में 5 सोलर ट्री और 7 EV चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं।

सौर ऊर्जा आधारित प्रकाश व्यवस्था से पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने, ऊर्जा की बचत करने और अक्षय ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में मदद मिल रही है। वहीं EV चार्जिंग स्टेशन क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

डॉ. सिंह ने कहा कि ऊर्जा संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार केवल पर्यावरणीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाले समय की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकास की नई दिशा भी है।

बेहतर रोशनी का सीधा संबंध सार्वजनिक सुरक्षा से

सरोजनीनगर में सौर स्ट्रीट लाइटों के विस्तार को केवल ऊर्जा बचत तक सीमित नहीं रखा गया है। सार्वजनिक स्थानों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था को नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा से भी जोड़ा जा रहा है।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि बेहतर सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था केवल सुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षा और सम्मान का आधार भी है। पर्याप्त रोशनी से महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और देर शाम आवागमन करने वाले लोगों के लिए सार्वजनिक स्थान अधिक सुगम और सुरक्षित बनते हैं।

उनके अनुसार, “विकास का अर्थ केवल बड़ी परियोजनाएँ नहीं हैं। किसी गली का अंधेरा दूर होना, किसी बेटी का सुरक्षित घर पहुँचना, किसी बुजुर्ग के लिए रास्ता सुगम होना और यह सब ऊर्जा की बचत के साथ संभव होना भी विकास है।”

3 तालाबों के विकास से जल संरक्षण को बढ़ावा

‘नेट जीरो सरोजनीनगर’ की परिकल्पना में केवल सौर ऊर्जा ही नहीं, बल्कि जल संरक्षण को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसके तहत ₹9 करोड़ की लागत से 3 तालाबों के विकास के माध्यम से जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।

इसके साथ ही हरित क्षेत्रों के संरक्षण, वृक्षारोपण, वर्षा जल संचयन और प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है।

पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से 1,400 पौधों का वितरण भी किया गया है। इसका उद्देश्य पौधरोपण को बढ़ावा देने के साथ नागरिकों को पौधों के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करना है।

‘नेट जीरो’ का दायरा सिर्फ पौधरोपण तक सीमित नहीं

डॉ. राजेश्वर सिंह के अनुसार, नेट जीरो का अर्थ केवल अधिक से अधिक पेड़ लगाना नहीं है। इसके अंतर्गत ऊर्जा के उपयोग से होने वाले उत्सर्जन को कम करना, स्वच्छ एवं अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देना, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना और विकास परियोजनाओं को पर्यावरण के अनुकूल बनाना भी शामिल है।

इसी सोच के तहत सरोजनीनगर में सौर ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण, हरित विकास और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

नागरिकों की भागीदारी को भी दिया जा रहा महत्व

डॉ. राजेश्वर सिंह ने नागरिकों से ऊर्जा और जल की बचत करने, एकल-उपयोग प्लास्टिक का कम से कम इस्तेमाल करने, कचरे का उचित प्रबंधन करने और लगाए गए पौधों के संरक्षण को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज और प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही किसी क्षेत्र को दीर्घकालिक रूप से स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल बनाया जा सकता है।

2070 के नेट जीरो लक्ष्य के अनुरूप स्थानीय स्तर पर प्रयास

भारत ने वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी व्यापक राष्ट्रीय दृष्टि के अनुरूप सरोजनीनगर में सौर ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण और हरित विकास को बढ़ावा देते हुए ‘नेट जीरो सरोजनीनगर’ की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा, “आज लिया गया पर्यावरणीय संकल्प आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का संकल्प है। हमारा प्रयास है कि नेट जीरो सरोजनीनगर विकास, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन का प्रेरक मॉडल बने।”

सौर ऊर्जा की बढ़ती क्षमता, हजारों सौर स्ट्रीट लाइटों, सामुदायिक सोलर प्लांट, सोलर ट्री, EV चार्जिंग स्टेशन, तालाबों के विकास और पौध वितरण जैसी पहलों के माध्यम से सरोजनीनगर में विकास को पर्यावरण संरक्षण के साथ जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। आने वाले समय में इन पहलों के माध्यम से क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण और हरित विकास को और गति देने का लक्ष्य रखा गया है।

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