स्थानीय पार्क में ओपन जिम और बेंच लगवाने का दिया आश्वासन, क्षेत्रवासियों को भेंट की ‘मैं हूँ सरोजनीनगर’ की प्रति
डॉ. राजेश्वर सिंह ने दो नए व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का किया उद्घाटन; सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की
‘स्थानीय उद्यमों के विस्तार से युवाओं को मिलेंगे नए अवसर’: राजधानी में नए संस्थानों के शुभारंभ पर बोले डॉ. राजेश्वर सिंह
लखनऊ: सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने क्षेत्र व राजधानी की बढ़ती आर्थिक गतिविधियों, स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहन और व्यापारिक विस्तार के क्रम में दो नवीन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का मुख्य अतिथि के रूप में फीता काटकर भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रतिष्ठान के संचालकों, उनके परिजनों व उपस्थित क्षेत्रवासियों को हार्दिक बधाई देते हुए स्थानीय विकास, रोजगार सृजन और जनसरोकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
‘रियागा फाइन ज्वेलरी’ का भव्य शुभारंभ: सेक्टर-6, वृंदावन योजना स्थित ‘रियागा फाइन ज्वेलरी’ के उद्घाटन समारोह में सम्मिलित होकर डॉ. राजेश्वर सिंह ने आभूषणों की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और सुंदरता के संकल्प की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह नवीन प्रतिष्ठान न केवल ग्राहकों को उत्कृष्ट सेवा व शुद्धता का भरोसा प्रदान करेगा, बल्कि स्थानीय व्यापार को भी नई गति देगा। इस अवसर पर डॉ. सिंह ने प्रतिष्ठान के मुख्य संचालक श्री प्रियम राज, श्री अंकुर रस्तोगी, श्री आदर्श वैश सहित श्री कमलेश रस्तोगी, श्री विजय वैश, श्रीमती प्रियम राज, श्री प्रणव अग्निहोत्री, श्री प्रशांत रस्तोगी, श्री शिवम् राज एवं श्री आसार वैश को नए व्यावसायिक सफर की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।
‘वरदान स्वीट्स एंड रेस्टोरेंट’ का उद्घाटन एवं जनसंवाद: इसके उपरांत डॉ. राजेश्वर सिंह ने शहीद नगर, बिजनौर रोड स्थित ‘वरदान स्वीट्स एंड रेस्टोरेंट’ का विधिवत उद्घाटन किया। प्रतिष्ठान के स्वामीगण श्री महेश सिंह, श्री मानवेन्द्र सिंह, श्री योगेंद्र सिंह एवं सुश्री महिमा सिंह को बधाई देते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि स्थानीय उद्यमशीलता किसी भी क्षेत्र की आर्थिक उन्नति का मूल आधार है, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होते हैं।
समारोह के दौरान डॉ. राजेश्वर सिंह ने स्थानीय नागरिकों एवं सोसायटी निवासियों से आत्मीय संवाद किया। क्षेत्रवासियों की सुविधा, स्वास्थ्य और सुंदरीकरण को ध्यान में रखते हुए उन्होंने स्थानीय पार्क में ओपन जिम (Open Gym) स्थापित कराने तथा नागरिकों के बैठने हेतु बेंच लगवाने का आश्वासन दिया।
इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित सभी नागरिकों व सोसायटी वासियों को सरोजनीनगर के विकास और जनसेवा की संकल्प-पुस्तिका ‘मैं हूँ सरोजनीनगर’ की प्रति भी भेंट की। कार्यक्रम में आर.के. सिंह, जी.एस. सिंह, एस.एस. चौधरी, आर.सी. वर्मा, मनोज कुमार सिंह, प्रदीप यादव, राम नारायण एवं के.के. मिश्रा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य जन उपस्थित रहे।
श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन-पूजन: कार्यक्रमों के उपरांत आयोजकों एवं क्षेत्रवासियों के विशेष अनुरोध पर डॉ. राजेश्वर सिंह ने शहीद नगर स्थित प्रसिद्ध श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर पहुँचकर भगवान भोलेनाथ का विधि-विधान से दर्शन-पूजन एवं जलाभिषेक किया। उन्होंने देवाधिदेव महादेव के चरणों में शीश नवाकर सरोजनीनगर परिवार सहित समस्त प्रदेशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य, सुख, शांति और समृद्धि की मंगलकामना की।
लखनऊ। महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने और महिला खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करने की दिशा में महिला प्रो वॉलीबॉल लीग (WPVL) एक महत्वपूर्ण पहल है।
यह लीग बेटियों को खेल के क्षेत्र में नई पहचान बनाने और सफलता की ऊंचाइयां हासिल करने का सशक्त मंच प्रदान करेगी। यह बात सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने महिला प्रो वॉलीबॉल लीग के लिए आयोजित खिलाड़ियों की नीलामी एवं ट्रॉफी अनावरण समारोह में कही।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि खिलाड़ी समाज के श्रेष्ठ नागरिक होते हैं। खेल न केवल शारीरिक और मानसिक विकास में सहायक हैं, बल्कि अनुशासन, टीम भावना, धैर्य, नेतृत्व और जिम्मेदारी जैसे महत्वपूर्ण गुण भी विकसित करते हैं। खिलाड़ियों का परिश्रम, समर्पण और संघर्ष समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है।
खेलों से मिलती है अनुशासन और सामूहिक सफलता की सीख
वॉलीबॉल के इतिहास का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि वर्ष 1895 में विलियम जी. मॉर्गन द्वारा शुरू किया गया यह खेल आज पूरी दुनिया में लोकप्रिय है। उन्होंने वर्ष 1964 के टोक्यो ओलंपिक में जापान की महिला वॉलीबॉल टीम की ऐतिहासिक उपलब्धि का जिक्र करते हुए कहा कि टीम ने कोच हिरोफुमी दाइमात्सु के मार्गदर्शन में सोवियत संघ को 3-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता था। यह उपलब्धि बताती है कि अनुशासन, कठिन परिश्रम और सामूहिक प्रयास के बल पर बड़ी से बड़ी सफलता प्राप्त की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि खेलों में सफलता केवल व्यक्तिगत प्रतिभा पर निर्भर नहीं करती, बल्कि साथियों पर विश्वास, निरंतर अभ्यास और कठिन परिस्थितियों में दोबारा खड़े होने के साहस से भी मिलती है। महिला खिलाड़ियों को बेहतर अवसर और प्रोत्साहन उपलब्ध कराना उनके आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
बेटियों को अवसर देना ही महिला सशक्तीकरण का वास्तविक स्वरूप
डॉ. सिंह ने कहा कि महिला सशक्तीकरण का अर्थ केवल संकल्प लेना नहीं, बल्कि बेटियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, पहचान बनाने और आगे बढ़ने के लिए उचित अवसर उपलब्ध कराना है। महिला प्रो वॉलीबॉल लीग इसी सोच को साकार करने की दिशा में सार्थक प्रयास है। इससे महिला खिलाड़ियों को अपनी खेल प्रतिभा निखारने और बेहतर भविष्य बनाने का अवसर मिलेगा।
समारोह में मेधज ग्रुप के चेयरमैन श्री समीर त्रिपाठी, WPVL की संचालिका एवं उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती ऋतु शाही, WPVL के संचालक डॉ. बुख़रत अहमद, डॉ. आर. पी. सिंह, श्रीमती सूर्यांशी पांडेय तथा पूर्व पहलवान एवं लीग के ब्रांड एंबेसडर श्री संग्राम सिंह सहित कई गणमान्यजन उपस्थित रहे।
पढ़ाई के साथ खेलों को भी दें पर्याप्त समय
डॉ. राजेश्वर सिंह ने युवाओं से पढ़ाई के साथ खेल गतिविधियों को भी पर्याप्त समय देने की अपील की। उन्होंने विश्वास जताया कि महिला प्रो वॉलीबॉल लीग देश की बेटियों को अपनी प्रतिभा साबित करने, नई पहचान बनाने और राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करेगी।
उन्होंने कहा कि सशक्त महिलाएं, अनुशासित युवा और टीम भावना से प्रेरित समाज ही विकसित भारत की मजबूत नींव हैं। खेलों को प्रोत्साहन देकर न केवल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाया जा सकता है, बल्कि एक स्वस्थ, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार समाज का निर्माण भी किया जा सकता है।
लखनऊ। आस्था जब जनसेवा से जुड़ती है, तो वह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि लोगों के विश्वास और भावनाओं को साकार करने का माध्यम बन जाती है। सरोजनीनगर में संचालित राम रथ यात्रा इसी भावना का उदाहरण बनकर निरंतर आगे बढ़ रही है। सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल पर संचालित इस सेवा अभियान के अंतर्गत 65वीं राम रथ यात्रा के माध्यम से 60 श्रद्धालु अयोध्या धाम पहुंचे और प्रभु श्रीराम के दर्शन कर भावविभोर हो उठे। इस बार ग्राम पान खेड़ा, शिवरी और खुशहालगंज मंडल के श्रद्धालुओं को रामलला के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
अयोध्या धाम में रामलला के दर्शन के साथ श्रद्धालुओं की लंबे समय से संजोई अभिलाषा पूरी हुई। अपने आराध्य के सम्मुख पहुंचने की खुशी, मंदिर में दर्शन की अनुभूति और मन में उपजे आत्मिक संतोष ने इस यात्रा को उनके लिए यादगार बना दिया। श्रद्धालुओं ने इस पहल के लिए डॉ. राजेश्वर सिंह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि निःशुल्क यात्रा की सुविधा से उन लोगों को भी प्रभु श्रीराम के दर्शन का अवसर मिल रहा है, जिनके लिए स्वयं अयोध्या पहुंचने की व्यवस्था करना कठिन होता है।
65वीं यात्रा, लगभग 9 हजार श्रद्धालुओं ने किए रामलला के दर्शन
27 सितंबर 2022 को शुरू हुई राम रथ यात्रा अब सरोजनीनगर में धार्मिक आस्था और जनसेवा की एक निरंतर पहल के रूप में आगे बढ़ रही है। इस अभियान के माध्यम से अब तक लगभग 9 हजार श्रद्धालु अयोध्या धाम पहुंचकर प्रभु श्रीराम के दर्शन कर चुके हैं। 65वीं यात्रा के साथ यह सिलसिला आगे बढ़ा है, जो क्षेत्र के अलग-अलग गांवों और मंडलों के श्रद्धालुओं को रामलला के दर्शन का अवसर उपलब्ध करा रहा है।
इस पहल की विशेषता यह है कि श्रद्धालुओं को अयोध्या आने-जाने के लिए निःशुल्क यात्रा, भोजन और प्रभु श्रीराम के दर्शन की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। इससे आर्थिक या व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण अपनी धार्मिक यात्रा पूरी नहीं कर पाने वाले लोगों को भी अपने आराध्य के दर्शन का अवसर मिलता है।
आस्था को सुविधा से जोड़ने की पहल
राम रथ यात्रा का उद्देश्य केवल श्रद्धालुओं को अयोध्या पहुंचाना नहीं, बल्कि उनकी आस्था को साकार करने में सहयोग देना भी है। यात्रा की व्यवस्था से लेकर भोजन तक की सुविधा श्रद्धालुओं के लिए इस अनुभव को सहज बनाती है। सरोजनीनगर के विभिन्न गांवों के लोगों को इस माध्यम से रामलला के दर्शन का अवसर मिल रहा है।
श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने का माध्यम नहीं, बल्कि उनकी धार्मिक भावनाओं, विश्वास और वर्षों से संजोई इच्छा की पूर्ति का अवसर है। रामलला के दर्शन के बाद उनके चेहरों पर दिखाई देने वाली प्रसन्नता और इस सुविधा के लिए व्यक्त किया गया आभार इस पहल के मानवीय पक्ष को सामने लाता है।
जनसेवा के साथ जुड़ रही श्रद्धा की डोर
डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल पर संचालित राम रथ यात्रा के माध्यम से सरोजनीनगर के श्रद्धालुओं को निरंतर अयोध्या धाम की यात्रा का अवसर मिल रहा है। 65वीं यात्रा में 60 श्रद्धालुओं के रामलला के दर्शन करने और अब तक लगभग 9 हजार लोगों के इस सुविधा का लाभ उठाने का आंकड़ा इस अभियान के निरंतर विस्तार को दर्शाता है।
राम रथ यात्रा के जरिए सरोजनीनगर से अयोध्या तक आस्था की डोर मजबूत हो रही है। प्रभु श्रीराम के जयकारों के बीच पूरी हुई यह यात्रा श्रद्धालुओं के लिए भक्ति, संतोष और कृतज्ञता का अनुभव बनी, वहीं निःशुल्क यात्रा, भोजन और दर्शन की सुविधा ने जनसेवा के उस भाव को रेखांकित किया, जिसमें लोगों की आस्था और उनकी जरूरतों को महत्व दिया जाता है।
लखनऊ : सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने महिला-सम्मान, महिला आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर कांग्रेस एवं समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकारों और सशक्तीकरण की बात करने वाले राजनीतिक दलों को अपने आचरण और निर्णयों से भी अपनी प्रतिबद्धता साबित करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राजनीतिक दल महिलाओं के वोट और समर्थन की अपेक्षा करते हैं, तो उन्हें अधिकार, सम्मान और निर्णय-प्रक्रिया में उचित भागीदारी देने के सवाल पर पीछे क्यों हटते हैं?
डॉ. सिंह ने कहा कि महिला-सशक्तीकरण की असली परीक्षा नारों, भाषणों और प्रतीकों से नहीं, बल्कि महिलाओं की गरिमा, स्वतंत्रता, समान अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी के प्रति राजनीतिक दलों के वास्तविक रुख से होती है। उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी से सवाल किया कि उनकी राजनीति वास्तव में नारी-शक्ति के साथ खड़ी है या वोट-बैंक के हितों को प्राथमिकता देती है।
शिव-शक्ति पर कांग्रेस के रुख को लेकर उठाए सवाल
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक ओर शिव-शक्ति में विश्वास जताना और दूसरी ओर मुंबई के मंच से शक्ति से लड़ने की बात कहना राजनीतिक विरोधाभास को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि नारी-शक्ति और धार्मिक प्रतीकों का उल्लेख राजनीतिक सुविधा के अनुसार नहीं होना चाहिए। महिलाओं के सम्मान और स्वतंत्रता के प्रति प्रतिबद्धता शब्दों में ही नहीं, बल्कि व्यवहार में भी दिखाई देनी चाहिए।
उन्होंने एक महिला सांसद के विरुद्ध मौलाना की आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में कांग्रेस नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठाए। डॉ. सिंह ने कहा कि महिलाओं के सम्मान से जुड़े मामलों में राजनीतिक दलों का रुख स्पष्ट और समान होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में मुखर प्रतिक्रिया देना और दूसरे मामलों में अपेक्षित स्पष्टता नहीं दिखाना चयनात्मक संवेदना का उदाहरण है।
उन्होंने मई 2026 में कांग्रेस सांसद गेनीबेन ठाकोर से जुड़े मामले में राहुल गांधी की प्रतिक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि महिला-सम्मान के मुद्दे पर किसी भी दल को अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार अलग-अलग मानदंड नहीं अपनाने चाहिए। महिलाओं की गरिमा का सवाल दलगत सीमाओं से ऊपर होना चाहिए।
शाह बानो प्रकरण और तीन तलाक पर भी कांग्रेस को घेरा
डॉ. सिंह ने शाह बानो प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1986 में तत्कालीन राजीव गांधी सरकार द्वारा बनाए गए कानून ने गुज़ारा भत्ते के अधिकार को लेकर व्यापक बहस खड़ी की थी। इस मुद्दे पर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान ने इस्तीफा भी दिया था।
उन्होंने तीन तलाक के मुद्दे पर कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और न्याय से जुड़े मामलों में राजनीतिक दलों को वोट-बैंक की राजनीति से ऊपर उठना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय का वास्तविक अर्थ धर्म या समुदाय के आधार पर भेदभाव किए बिना प्रत्येक महिला को उसके अधिकार, सम्मान और न्याय सुनिश्चित करना है।
डॉ. सिंह ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों पर राजनीतिक दलों की प्रतिबद्धता किसी विशेष समुदाय या चुनावी समीकरण तक सीमित नहीं होनी चाहिए। महिला चाहे किसी भी धर्म, जाति या सामाजिक पृष्ठभूमि से आती हो, उसे समान गरिमा और न्याय मिलना चाहिए।
महिला आरक्षण पर कांग्रेस-सपा समेत विपक्षी दलों से मांगा जवाब
महिला आरक्षण के मुद्दे पर डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि विधायिकाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने की मांग लंबे समय से उठती रही है। महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाना लोकतंत्र को अधिक समावेशी और प्रतिनिधिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने 17 अप्रैल 2026 को महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पर हुई संसदीय कार्यवाही का उल्लेख करते हुए कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो राजनीतिक दल सार्वजनिक मंचों पर महिला सशक्तीकरण की बात करते हैं, उन्हें महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने से जुड़े विधायी प्रस्तावों पर अपने रुख का स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
डॉ. सिंह ने कहा कि महिलाओं को केवल मतदाता के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है। उन्हें नीति-निर्माण, कानून बनाने और राजनीतिक निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। महिला आरक्षण पर राजनीतिक दलों का रुख उनकी वास्तविक प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण पैमाना है।
कांग्रेस शासित राज्यों में महिला राजनीतिक भागीदारी पर उठाए सवाल
डॉ. सिंह ने कांग्रेस शासित राज्यों में महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कर्नाटक के मंत्रिमंडल में महिलाओं की अनुपस्थिति और हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार में महिला मंत्री नहीं होने का उल्लेख करते हुए कहा कि महिला सशक्तीकरण का दावा करने वाले दलों को सत्ता में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के सवाल पर भी जवाबदेह होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि महिलाओं से समर्थन मांगना और उन्हें राजनीतिक निर्णय-प्रक्रिया में उचित स्थान नहीं देना विरोधाभासी स्थिति है। महिलाओं को केवल चुनावी अभियानों, जनसभाओं और राजनीतिक नारों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उन्हें शासन, प्रशासन और नीति-निर्माण में भी अपनी क्षमता के अनुरूप भूमिका मिलनी चाहिए।
डॉ. सिंह ने कहा कि महिला सशक्तीकरण का वास्तविक अर्थ महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी बनाना नहीं, बल्कि उन्हें नेतृत्व करने, निर्णय लेने और राजनीतिक व्यवस्था को दिशा देने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना है।
समाजवादी पार्टी के इतिहास पर निशाना, अखिलेश यादव से मांगा जवाब
समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि महिला-सम्मान की बात करने वाली सपा का राजनीतिक अतीत भी कई गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने बलात्कार के मामलों में पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की विवादास्पद टिप्पणी, वर्ष 2019 में लोकसभा में तत्कालीन पीठासीन महिला सांसद रमा देवी के प्रति आजम खान की अशोभनीय टिप्पणी और महिला आरक्षण के प्रति पार्टी के ऐतिहासिक विरोध का उल्लेख किया।
उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से सवाल किया कि उनकी पार्टी महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और राजनीतिक भागीदारी के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करे।
डॉ. सिंह ने कहा कि महिलाओं के सम्मान का प्रश्न किसी राजनीतिक दल की विचारधारा, सत्ता की स्थिति या चुनावी रणनीति के आधार पर नहीं तय किया जा सकता। महिलाओं की गरिमा और समान अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था के बुनियादी मूल्य हैं। इन पर किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की बेटियों को यह जानने का अधिकार है कि राजनीतिक दल उनके सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा और नेतृत्व के अवसरों को लेकर क्या ठोस प्रतिबद्धता रखते हैं।
अफगानिस्तान और हमास की घटनाओं का उल्लेख, महिलाओं की स्वतंत्रता पर दिया जोर
डॉ. राजेश्वर सिंह ने अंतरराष्ट्रीय संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा लड़कियों की शिक्षा और महिलाओं के रोजगार पर लगाए गए प्रतिबंधों के विरुद्ध आवाज उठाना आवश्यक है। इसी तरह, 7 अक्टूबर के हमास हमले के दौरान महिलाओं के विरुद्ध यौन हिंसा और उन्हें बंधक बनाए जाने की घटनाओं पर भी मानवाधिकारों के प्रति समान रूप से मुखर रुख अपनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की स्वतंत्रता, सुरक्षा और गरिमा के सवाल पर चयनात्मक दृष्टिकोण नहीं अपनाया जाना चाहिए। किसी महिला को बुर्का या हिजाब पहनने के लिए बाध्य करना गलत है, तो उसकी व्यक्तिगत पसंद और स्वतंत्रता को दबाना भी अनुचित है। महिलाओं के पहनावे, शिक्षा, रोजगार और जीवन से जुड़े निर्णयों में उनकी इच्छा और स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए।
डॉ. सिंह ने कहा कि धार्मिक या राजनीतिक दबाव के नाम पर महिलाओं के अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए। महिलाओं को अपनी जिंदगी के फैसले लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए और समाज तथा शासन-व्यवस्था को उनके अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए।
महिला-सम्मान पर एक समान मानदंड अपनाने की जरूरत
डॉ. सिंह ने कहा कि महिला हिंदू हो या मुस्लिम, सत्ता पक्ष की हो या विपक्ष की, उसकी गरिमा, सुरक्षा, शिक्षा, स्वतंत्रता और राजनीतिक भागीदारी के लिए समान मानदंड होने चाहिए। महिलाओं के सम्मान को राजनीतिक लाभ-हानि के तराजू पर नहीं तौला जा सकता।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण का अर्थ केवल नारी-शक्ति का गुणगान करना नहीं, बल्कि महिलाओं को समान अधिकार, बेहतर अवसर, सुरक्षित वातावरण और निर्णय लेने की वास्तविक शक्ति प्रदान करना है। महिलाओं की शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किए बिना सशक्तीकरण का लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं किया जा सकता।
डॉ. सिंह ने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब महिलाओं को निर्णय-प्रक्रिया में उनकी आबादी और क्षमताओं के अनुरूप भागीदारी मिलेगी। राजनीतिक दलों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि महिलाओं का प्रतिनिधित्व केवल प्रतीकात्मक न रहे, बल्कि उन्हें वास्तविक नेतृत्व और निर्णय लेने के अवसर भी प्राप्त हों।
“नारी-शक्ति को अधिकार देना ही असली परीक्षा”
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा, “शिव-शक्ति का नाम लेना आसान है, लेकिन नारी-शक्ति को अधिकार और अवसर देना असली परीक्षा है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को बताना होगा कि उनकी राजनीति महिलाओं के अधिकारों के साथ खड़ी है या वोट-बैंक के हितों के साथ। देश की नारी-शक्ति अब केवल नारे नहीं, बल्कि स्पष्ट जवाब और ठोस प्रतिबद्धता चाहती है।”
उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान, स्वतंत्रता और समान अधिकारों को लेकर राजनीतिक दलों को स्पष्ट, सुसंगत और जवाबदेह रुख अपनाना चाहिए। महिला सशक्तीकरण को चुनावी मुद्दे या राजनीतिक भाषण तक सीमित रखने के बजाय उसे नीतियों, कानूनों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में प्रतिबिंबित करना आवश्यक है।
डॉ. सिंह ने जोर देकर कहा कि महिलाओं को सम्मान देना केवल राजनीतिक दायित्व नहीं, बल्कि एक न्यायपूर्ण और समावेशी समाज के निर्माण की अनिवार्य शर्त है। नारी-शक्ति को वास्तविक अधिकार, अवसर और निर्णय लेने की स्वतंत्रता देकर ही महिला सशक्तीकरण के संकल्प को सार्थक बनाया जा सकता है।
लखनऊ। विजयादशमी के पावन पर्व पर सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने समाज से जातिवाद, सामाजिक वैमनस्य और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति अपमानजनक मानसिकता के विरुद्ध एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विजयादशमी केवल रावण दहन का पर्व नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और अन्याय पर न्याय की विजय का प्रतीक है। यह पर्व हमें समाज में व्याप्त बुराइयों को समाप्त करने और राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना को मजबूत बनाने का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है।
डॉ. सिंह ने कहा कि आज के समय में रावण के प्रतीक केवल पुतलों तक सीमित नहीं हैं। जातिवाद, समाज को बांटने वाली मानसिकता, आपसी वैमनस्य और सनातन परंपराओं के प्रति अनादर भी ऐसी चुनौतियां हैं, जिनका सामना दृढ़ इच्छाशक्ति, वैचारिक स्पष्टता और लोकतांत्रिक चेतना के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सामाजिक एकता को कमजोर करने वाली विचारधाराओं का जवाब हिंसा या वैमनस्य से नहीं, बल्कि संविधान, लोकतंत्र, जनजागरण और जनमत की शक्ति से दिया जाना चाहिए।
सनातन संस्कृति का सम्मान और राष्ट्रीय अस्मिता की रक्षा जरूरी
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि भारत की पहचान उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक परंपराओं और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ी हुई है। भगवान श्रीराम के आदर्श मर्यादा, कर्तव्य, न्याय, त्याग और लोककल्याण का मार्ग दिखाते हैं। ऐसे में विजयादशमी का वास्तविक संदेश तभी सार्थक होगा, जब समाज इन आदर्शों को अपने आचरण में उतारे और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के साथ सामाजिक एकता को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दे।
उन्होंने श्रीराम मंदिर निर्माण के विरोध, अयोध्या में कारसेवकों पर गोलीबारी की ऐतिहासिक घटना तथा कश्मीरी हिंदुओं पर हुए अत्याचार और उनके विस्थापन जैसे संवेदनशील विषयों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के इतिहास, सांस्कृतिक आस्था और राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक दलों एवं विचारधाराओं की भूमिका का मूल्यांकन तथ्यों, नीतियों और कार्यों के आधार पर होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च है। प्रत्येक नागरिक को यह अधिकार है कि वह राजनीतिक दलों के विचारों, उनके निर्णयों और उनके सार्वजनिक आचरण का मूल्यांकन करे तथा अपने मताधिकार के माध्यम से अपनी राय व्यक्त करे। राष्ट्रहित और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े विषयों पर जागरूक नागरिकों की भूमिका भारतीय लोकतंत्र को और मजबूत बनाती है।
जातिवाद नहीं, सामाजिक समरसता बने समाज की पहचान
विधायक ने कहा कि जातिगत भेदभाव और सामाजिक विभाजन किसी भी राष्ट्र की सामूहिक प्रगति में बाधक हैं। भारत की वास्तविक शक्ति उसकी विविधता, आपसी सद्भाव और एकता में निहित है। समाज को जाति और संकीर्ण स्वार्थों से ऊपर उठकर समान अवसर, परस्पर सम्मान और सामाजिक समरसता के आधार पर आगे बढ़ना होगा।
उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति का मूल भाव सत्य, धर्म, करुणा, कर्तव्य और लोककल्याण है। इन मूल्यों का संरक्षण केवल सांस्कृतिक परंपराओं के माध्यम से नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग के प्रति सम्मान, न्यायपूर्ण व्यवहार और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी से भी सुनिश्चित होता है।
डॉ. सिंह ने जोर दिया कि सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक समरसता एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक सशक्त समाज के दो महत्वपूर्ण आधार हैं। जब समाज जातिवाद और वैमनस्य से ऊपर उठकर साझा राष्ट्रीय लक्ष्यों के लिए आगे बढ़ता है, तभी विकास, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय एकता की नींव मजबूत होती है।
लोकतांत्रिक शक्ति से विभाजनकारी विचारों को दें जवाब
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जागरूक नागरिक और उनका मताधिकार है। समाज को बांटने वाली विचारधाराओं का मुकाबला संवैधानिक मूल्यों, वैचारिक दृढ़ता और जनजागरण के माध्यम से किया जाना चाहिए। जनता को किसी भी राजनीतिक सोच का मूल्यांकन उसके कार्यों और नीतियों के आधार पर करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एक मजबूत भारत का निर्माण तभी संभव है, जब देश अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा रहे, सामाजिक एकता को प्राथमिकता दे और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अपनी आस्था बनाए रखे। विजयादशमी हमें अन्याय के सामने मौन न रहने और सत्य एवं न्याय के पक्ष में दृढ़ता से खड़े होने की प्रेरणा देती है।
विजयादशमी पर मजबूत भारत के निर्माण का संकल्प
डॉ. राजेश्वर सिंह ने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे विजयादशमी के अवसर पर जातिवाद, सामाजिक वैमनस्य और विभाजनकारी मानसिकता को समाप्त करने का संकल्प लें। उन्होंने सनातन संस्कृति के मूल्यों के संरक्षण, सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए भारत को अधिक सशक्त, समृद्ध एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास करने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक विजय केवल प्रतीकात्मक उत्सवों से नहीं, बल्कि उसके चरित्र, विचारों और व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन से सुनिश्चित होती है। रावण दहन का पर्व हमें याद दिलाता है कि अहंकार, अन्याय और अधर्म चाहे किसी भी रूप में सामने आएं, उनका अंत सत्य, विवेक, साहस और धर्म के मार्ग पर चलकर ही संभव है।
विजयादशमी का संदेश स्पष्ट है- जातिवाद से ऊपर उठकर सामाजिक समरसता अपनाएं, सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करें, लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत बनाएं और एक ऐसे भारत के निर्माण में सहभागी बनें, जहां राष्ट्रीय गौरव, सामाजिक सद्भाव और न्याय सर्वोपरि हों।