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PM मोदी की उपलब्धि पर ट्रंप ने जताई खुशी, दोनों देशों के मजबूत संबंधों की सराहना की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार निर्वाचित नेतृत्व के 12 साल पूरे होने और रिकॉर्ड कायम करने पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें बधाई दी है। इस मौके पर ट्रंप ने पीएम मोदी को “मजबूत और समझदार नेता” बताते हुए उनके नेतृत्व की सराहना की।

ट्रंप ने अपने संदेश में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने की उपलब्धि पर बधाई के पात्र हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी एक बेहतरीन नेता हैं और भविष्य में उन्हें और भी बड़ी सफलताएं मिलेंगी।


पीएम मोदी ने दिया जवाब

ट्रंप की शुभकामनाओं पर पीएम मोदी ने धन्यवाद देते हुए कहा कि वे भारत-अमेरिका के बीच व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने को तैयार हैं। उन्होंने दोनों देशों के संबंधों को वैश्विक हित में महत्वपूर्ण बताया।


लगातार नेतृत्व का रिकॉर्ड

पीएम मोदी ने 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री पद संभाला था और 2019 तथा 2024 में लगातार दूसरी और तीसरी बार जनादेश हासिल किया। इस तरह वे लगातार सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं।

इससे पहले इंदिरा गांधी का कुल कार्यकाल लंबा रहा था, लेकिन वह लगातार नहीं था। वहीं जवाहरलाल नेहरू का भी लंबा कार्यकाल रहा, लेकिन लगातार निर्वाचित कार्यकाल के मामले में यह रिकॉर्ड अब पीएम मोदी के नाम है।


एनडीए बैठक में पीएम मोदी का संबोधन

दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एनडीए नेताओं की बैठक में पीएम मोदी ने सरकार की उपलब्धियों को गिनाया और विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले देश में विकास को धीमा मान लिया गया था, जिसे बदलकर एनडीए सरकार ने तेज गति से आगे बढ़ाया।

उन्होंने कांग्रेस सरकारों पर आरोप लगाते हुए कहा कि पहले शासन, नीति और निर्णय लेने की कमी के कारण विकास की रफ्तार प्रभावित रही, लेकिन एनडीए सरकार ने इसे बदलने का काम किया।


निष्कर्ष

पीएम मोदी के 12 साल पूरे होने पर जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें बधाई मिल रही है, वहीं देश में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। इस मौके ने एक बार फिर भारत की राजनीति और वैश्विक कूटनीति दोनों में चर्चा को बढ़ा दिया है।

NFHS-6 के आंकड़ों ने खोली दिल्ली की स्वास्थ्य चुनौतियां, मोटापा घटा पर कई बीमारियां बढ़ीं।

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) 2023-24 की रिपोर्ट ने दिल्ली की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर मिश्रित तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार जहां एक ओर मोटापे के मामलों में गिरावट दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर डायबिटीज, कुपोषण और बच्चों के पोषण से जुड़ी समस्याओं में बढ़ोतरी देखने को मिली है।


दिल्ली में मोटापे में गिरावट

रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में पुरुषों में मोटापे की दर घटकर 34.8 प्रतिशत रह गई है, जो पहले NFHS-5 में 38 प्रतिशत थी। महिलाओं में भी कुछ हद तक सुधार देखा गया है और दिल्ली उन राज्यों में शामिल है जहां महिला मोटापा दर में कमी आई है।

पहली नजर में यह बदलाव सकारात्मक लग सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे सिर्फ बेहतर स्वास्थ्य नहीं, बल्कि अन्य कारण भी हो सकते हैं।


डायबिटीज के मामलों में तेज बढ़ोतरी

रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक पहलू डायबिटीज के मामलों में बढ़ोतरी है।

  • महिलाओं में डायबिटीज की दवा लेने वालों का प्रतिशत 12% से बढ़कर 19% हो गया है।
  • पुरुषों में यह आंकड़ा 14% से बढ़कर 22% तक पहुंच गया है।

यह संकेत देता है कि जीवनशैली संबंधी बीमारियों का खतरा राजधानी में बढ़ रहा है।


कुपोषण भी बढ़ा

दिल्ली में कुपोषण के मामलों में भी वृद्धि दर्ज की गई है।

  • महिलाओं में कुपोषण 10% से बढ़कर 12%
  • पुरुषों में यह 9% से बढ़कर लगभग 15% तक पहुंच गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति संतुलित आहार की कमी और बिगड़ती जीवनशैली का संकेत हो सकती है।


बच्चों के पोषण पर भी असर

रिपोर्ट में बच्चों के पोषण से जुड़े आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं।

  • जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराने की दर 51.2% से घटकर 45.1% रह गई।
  • छह महीने तक केवल स्तनपान कराने की दर 64.3% से घटकर 48.3% हो गई।
  • 6–23 महीने के बच्चों को पर्याप्त पूरक आहार देने की दर भी 16% से घटकर 11.2% रह गई।

विशेषज्ञों की राय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापा कम होना हमेशा अच्छी सेहत का संकेत नहीं होता। कई बार यह खराब पोषण, असंतुलित आहार और अन्य बीमारियों का भी परिणाम हो सकता है।


निष्कर्ष

NFHS-6 रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली में एक तरफ मोटापे की समस्या कुछ कम हुई है, लेकिन दूसरी तरफ डायबिटीज, कुपोषण और बच्चों के पोषण से जुड़ी चुनौतियां बढ़ रही हैं। यह संकेत है कि राजधानी को अब केवल वजन नहीं, बल्कि समग्र पोषण और जीवनशैली पर ध्यान देने की जरूरत है।

मानसून से पहले सक्रिय हुए डॉ. राजेश्वर सिंह : लखनऊ को जलभराव से बचाने के लिए मंत्री सुरेश खन्ना को लिखा पत्र- लंबित नालों के निर्माण, व्यापक सफाई अभियान, पम्पिंग व्यवस्था और दैनिक निगरानी तंत्र मजबूत करने की मांग

लखनऊ। आगामी वर्षा ऋतु के मद्देनजर राजधानी लखनऊ में संभावित जलभराव की समस्या के स्थायी एवं प्रभावी समाधान के लिए सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना को पत्र लिखकर आवश्यक तैयारियां समय रहते सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान जलभराव की समस्या से लाखों नागरिक प्रभावित होते हैं, इसलिए वर्षा प्रारंभ होने से पहले सभी संबंधित विभागों को समन्वित कार्ययोजना के साथ सक्रिय होना चाहिए।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने पत्र में कहा कि लखनऊ के अनेक क्षेत्रों में प्रत्येक वर्ष मानसून के दौरान जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिससे आम नागरिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सड़कें जलमग्न हो जाती हैं, यातायात प्रभावित होता है, स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, व्यापारियों तथा दैनिक आवागमन करने वाले लोगों को असुविधा झेलनी पड़ती है। कई क्षेत्रों में जलभराव के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है और नागरिक सुविधाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार नागरिक सुविधाओं को सुदृढ़ करने और शहरी अवसंरचना को मजबूत बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। ऐसे में आवश्यक है कि मानसून प्रारंभ होने से पूर्व ही जलभराव की संभावित समस्याओं का आकलन कर सभी जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली जाएं, ताकि नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने पत्र में विशेष रूप से अनुरोध किया है कि जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए लंबित नालों और जल निकासी परियोजनाओं के निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा कराया जाए। इसके साथ ही बड़े एवं छोटे सभी नालों की व्यापक सफाई सुनिश्चित की जाए, ताकि वर्षा का पानी बिना किसी बाधा के निकासी व्यवस्था तक पहुंच सके और शहर में जलभराव की स्थिति उत्पन्न न हो।

उन्होंने यह भी कहा कि जलभराव की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। पूर्व वर्षों में जिन क्षेत्रों में जलभराव की गंभीर समस्या सामने आई थी, वहां अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि ऐसे क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में पम्पिंग सेट उपलब्ध कराए जाएं तथा उनकी कार्यशीलता की नियमित जांच भी की जाए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल जल निकासी की जा सके।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने नगर निगम, लखनऊ विकास प्राधिकरण, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि मानसून अवधि के दौरान एक प्रभावी दैनिक निगरानी एवं समीक्षा तंत्र विकसित किया जाए, जिसके माध्यम से विभिन्न विभागों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। इससे किसी भी क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली समस्या का तत्काल समाधान संभव होगा।

उन्होंने कहा कि जलभराव केवल एक मौसमी चुनौती नहीं है, बल्कि यह नागरिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, आवागमन और आर्थिक गतिविधियों से सीधे जुड़ा हुआ विषय है। यदि समय रहते समुचित तैयारी कर ली जाए तो इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और नागरिकों को राहत प्रदान की जा सकती है।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश सरकार जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक कदम उठाएगी तथा संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश देकर राजधानी लखनऊ को जलभराव की समस्या से राहत दिलाने का प्रभावी प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि समन्वित योजना, नियमित निगरानी और प्रशासनिक तत्परता के माध्यम से लखनऊवासियों को वर्षा ऋतु के दौरान बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं तथा शहर को जलभराव जैसी समस्याओं से काफी हद तक मुक्त बनाया जा सकता है।

Health Update:नाम भूलना आम बात, लेकिन चेहरा पहचानने में दिक्कत हो सकती है गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या का संकेत

कई बार ऐसा होता है कि हम किसी परिचित व्यक्ति को देखते ही पहचान लेते हैं, लेकिन उसका नाम याद नहीं आता। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति सामान्य मानी जाती है। हालांकि यदि किसी परिचित व्यक्ति का चेहरा पहचानने में ही परेशानी होने लगे, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।

मानव मस्तिष्क में नाम और चेहरे को याद रखने के लिए अलग-अलग तंत्र काम करते हैं। किसी व्यक्ति का नाम याद रखना भाषा और स्मृति से जुड़े हिस्सों पर निर्भर करता है, जबकि चेहरे पहचानने की क्षमता मस्तिष्क के विशेष दृश्य पहचान तंत्र से जुड़ी होती है। इसी कारण कई बार चेहरा याद रहता है लेकिन नाम भूल जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव, थकान, मानसिक दबाव, पर्याप्त नींद न मिलना या एक साथ बहुत से लोगों से मिलना नाम भूलने की संभावना बढ़ा सकता है। इसलिए कभी-कभार किसी का नाम याद न आना आमतौर पर चिंता का विषय नहीं माना जाता।

वहीं चेहरों को पहचानने की क्षमता इंसानी विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। परिवार, मित्रों और परिचित लोगों की पहचान लंबे समय से चेहरे के आधार पर ही होती रही है। यही वजह है कि मस्तिष्क में इसके लिए विशेष नेटवर्क मौजूद होते हैं। यदि इन नेटवर्कों के कामकाज में गड़बड़ी आती है, तो व्यक्ति को परिचित चेहरों को पहचानने में कठिनाई हो सकती है।

कुछ मामलों में चेहरा पहचानने में लगातार परेशानी होना प्रोसोपैग्नोसिया (Face Blindness) जैसी स्थिति से जुड़ा हो सकता है। विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि ऐसी समस्याएं कभी-कभी Alzheimer’s Disease, Frontotemporal Dementia और अन्य न्यूरोलॉजिकल विकारों के शुरुआती संकेतों में शामिल हो सकती हैं।

यदि कोई व्यक्ति अपने परिवार के सदस्यों, करीबी दोस्तों या जीवनसाथी को पहचानने में कठिनाई महसूस करने लगे, या स्मृति संबंधी समस्याएं लगातार बढ़ती जाएं और दैनिक जीवन को प्रभावित करने लगें, तो न्यूरोलॉजिस्ट या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना उचित माना जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार उम्र बढ़ने के साथ हल्की भूलने की आदत सामान्य हो सकती है, लेकिन परिचित चेहरों को पहचानने में बार-बार परेशानी होना ऐसा संकेत है जिस पर समय रहते ध्यान देना जरूरी है।

नोट: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या के लिए योग्य चिकित्सक की सलाह लेना सबसे उचित विकल्प है।

Health Update:गाजियाबाद के सीवेज सैंपल में पोलियो वायरस मिलने से अलर्ट, जानिए कितनी गंभीर है यह स्थिति

गाजियाबाद में सीवेज के एक नमूने में वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियो वायरस टाइप-1 (VDPV-1) मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। हालांकि अब तक किसी बच्चे में पोलियो संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन वायरस की मौजूदगी ने प्रशासन और स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।

क्या है पूरा मामला?

नियमित निगरानी के तहत स्वास्थ्य विभाग शहर और आसपास के क्षेत्रों के सीवेज सैंपल की जांच करता है। हाल ही में डुंडाहेड़ा एसटीपी से लिए गए नमूने में VDPV-1 की पुष्टि हुई। रिपोर्ट सामने आते ही प्रभावित इलाकों में विशेष निगरानी और सर्वे शुरू कर दिया गया है।

इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने 12 शहरी क्षेत्रों में डोर-टू-डोर सर्वे शुरू करने का निर्णय लिया है, जिसमें 100 से अधिक स्वास्थ्य टीमें तैनात की गई हैं।

किन इलाकों में हो रही जांच?

राजनगर, शास्त्री नगर, बुलंदशहर रोड इंडस्ट्रियल एरिया, दौलतपुरा, न्यू पंचवटी कॉलोनी, घुकना, हिंडन विहार, कैला भट्टा, मिर्जापुर, विजय नगर और खैराती नगर जैसे क्षेत्रों में पांच साल तक के बच्चों की जांच की जा रही है। टीमें बच्चों के टीकाकरण रिकॉर्ड और संभावित लक्षणों की भी समीक्षा कर रही हैं।

यह स्थिति कितनी खतरनाक है?

विशेषज्ञों के अनुसार, पोलियो एक गंभीर वायरल संक्रमण है जो मुख्य रूप से तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। गंभीर मामलों में यह स्थायी लकवा या जानलेवा स्थिति का कारण बन सकता है।

हालांकि सीवेज में वायरस का मिलना सीधे किसी बड़े प्रकोप की पुष्टि नहीं करता, लेकिन यह इस बात का संकेत जरूर है कि वायरस किसी स्तर पर समुदाय में मौजूद हो सकता है।

सीवेज निगरानी क्यों जरूरी है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वेस्टवॉटर सर्विलांस (सीवेज जांच) बीमारी फैलने से पहले ही वायरस की मौजूदगी का पता लगाने का एक प्रभावी तरीका है। इससे स्वास्थ्य विभाग को समय रहते सतर्क होकर टीकाकरण और रोकथाम के कदम उठाने में मदद मिलती है।

यदि समय पर निगरानी और टीकाकरण नहीं किया गया, तो वायरस संवेदनशील आबादी में फैलने का खतरा बढ़ सकता है।

गाजियाबाद में मिला यह मामला अभी अलर्ट का संकेत है, न कि संक्रमण का बड़ा प्रकोप। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति टीकाकरण और निगरानी को और मजबूत करने की जरूरत को दर्शाती है, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।