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Health Update:भारत में तेजी से बढ़ रही मेटाबॉलिक बीमारियां, डायबिटीज और हाई बीपी बने सबसे बड़े खतरे

भारत में मेटाबॉलिक बीमारियों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है और यह अब एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। हालिया अध्ययन के अनुसार, टाइप 2 डायबिटीज के मामलों और इससे जुड़ी मौतों के मामले में भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पहले स्थान पर पहुंच गया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 1990 में डायबिटीज के सबसे अधिक मामले चीन में थे, जबकि भारत दूसरे स्थान पर था। लेकिन वर्ष 2023 तक स्थिति बदल गई और अब भारत इस सूची में सबसे आगे है।

अध्ययन के मुताबिक, भारत और चीन इस क्षेत्र में पांच प्रमुख मेटाबॉलिक बीमारियों—टाइप 2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ बॉडी मास इंडेक्स, खराब कोलेस्ट्रॉल और फैटी लिवर—का सबसे अधिक बोझ झेल रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से खराब खानपान, फास्ट फूड की बढ़ती आदत और शारीरिक गतिविधि में कमी के कारण हो रही है। यही वजह है कि ये बीमारियां धीरे-धीरे गंभीर रूप ले रही हैं और आगे चलकर हार्ट अटैक, किडनी फेलियर, स्ट्रोक और लिवर की गंभीर समस्याओं का कारण बन रही हैं।

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में भारत में टाइप 2 डायबिटीज के लगभग 2.1 करोड़ से अधिक मामले और करीब 5.8 लाख मौतें दर्ज की गईं। वहीं हाई ब्लड प्रेशर इस पूरे क्षेत्र में सबसे बड़ा स्वास्थ्य बोझ बना हुआ है।

विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि यदि जीवनशैली में बदलाव नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है। अनुमान है कि 2030 तक इन बीमारियों का बोझ और तेजी से बढ़ेगा।

डॉक्टरों के अनुसार, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, वजन नियंत्रण और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच इन बीमारियों से बचाव में बेहद जरूरी हैं।

Health Tips:कुकिंग ऑयल बदल-बदलकर इस्तेमाल करना कितना फायदेमंद? जानिए सेहत पर असर

भारतीय किचन में कुकिंग ऑयल का इस्तेमाल रोजमर्रा का हिस्सा है, लेकिन लंबे समय तक एक ही तरह का तेल इस्तेमाल करना सेहत के लिए सही नहीं माना जाता। समय-समय पर जरूरत और खाना बनाने के तरीके के अनुसार तेल बदलकर इस्तेमाल करना शरीर के लिए कई मायनों में फायदेमंद हो सकता है।

फैटी एसिड का बेहतर संतुलन
अक्सर हम ऐसे तेल ज्यादा इस्तेमाल करते हैं जिनमें ओमेगा-6 फैटी एसिड अधिक होता है, जैसे सूरजमुखी, सोयाबीन या कॉर्न ऑयल। वहीं ओमेगा-3 से भरपूर तेल जैसे अलसी, अखरोट या सरसों का तेल कम उपयोग होते हैं। अलग-अलग तेलों का रोटेशन करने से ओमेगा-3 और ओमेगा-6 का संतुलन बेहतर बना रहता है, जो शरीर के लिए जरूरी है।

शरीर को मिलता है पूरा पोषण
कोई भी एक तेल सभी जरूरी पोषक तत्व नहीं देता। कुछ तेलों में मोनोअनसैचुरेटेड फैट ज्यादा होते हैं, तो कुछ में पॉलीअनसैचुरेटेड या एंटीऑक्सीडेंट्स। जैसे जैतून के तेल में ओलियोकैंथल पाया जाता है, जो सूजन कम करने में मदद कर सकता है। राइस ब्रान ऑयल में गामा-ओरिजैनॉल होता है, जो कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में सहायक माना जाता है। अलग-अलग तेल इस्तेमाल करने से शरीर को विविध पोषक तत्व मिलते हैं।

कोशिकाओं (Cells) पर सकारात्मक प्रभाव
शरीर की हर कोशिका की दीवार फैट से बनी होती है। ऐसे में आप जैसा तेल खाते हैं, उसका असर कोशिकाओं की संरचना पर पड़ता है। अगर लंबे समय तक एक ही प्रकार का तेल लिया जाए, तो इससे सेल्स का संतुलन बिगड़ सकता है। तेल बदल-बदलकर इस्तेमाल करने से कोशिकाओं की संरचना संतुलित रहती है, जिससे इम्यून सिस्टम और हार्मोनल संतुलन बेहतर बना रहता है।

निष्कर्ष
तेल बदलना रोज-रोज जरूरी नहीं है, लेकिन समय-समय पर और जरूरत के हिसाब से अलग-अलग तेलों का इस्तेमाल करना एक बेहतर और संतुलित डाइट की ओर कदम है।

डिस्क्लेमर:
यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या डाइट में बदलाव से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

Royal Challengers Bengaluru vs Gujarat Titans आज आमने-सामने—प्लेइंग 11, पिच रिपोर्ट और किसका पलड़ा भारी?

Indian Premier League 2026 में आज बड़ा मुकाबला होने जा रहा है, जहां Royal Challengers Bengaluru और Gujarat Titans आमने-सामने होंगी। यह मैच बेंगलुरु के M. Chinnaswamy Stadium में खेला जाएगा, जहां फैंस को हाई-स्कोरिंग गेम देखने की उम्मीद है।

इस सीजन में आरसीबी शानदार फॉर्म में दिख रही है। टीम ने अपने 6 में से 4 मुकाबले जीते हैं और पॉइंट्स टेबल में तीसरे स्थान पर बनी हुई है। दूसरी ओर, Shubman Gill की कप्तानी वाली गुजरात टाइटंस 6 में से 3 मैच जीतकर सातवें स्थान पर है।

हेड टू हेड रिकॉर्ड
दोनों टीमों के बीच अब तक 6 मुकाबले खेले गए हैं, जिसमें दोनों ने 3-3 मैच जीते हैं। खास बात यह है कि इन सभी मैचों में लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम को जीत मिली है, जिससे आज के मैच में टॉस की भूमिका अहम हो जाती है।

पिच रिपोर्ट
एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम की पिच बल्लेबाजों के लिए अनुकूल मानी जाती है। यहां चौके-छक्कों की भरमार देखने को मिलती है। इस मैदान पर रन चेज करना आसान रहता है, इसलिए टॉस जीतने वाली टीम आमतौर पर पहले गेंदबाजी करना पसंद करती है।

मैच प्रिडिक्शन
फॉर्म को देखते हुए इस मुकाबले में आरसीबी का पलड़ा थोड़ा भारी नजर आ रहा है। अनुमान के मुताबिक मुकाबला 60-40 का हो सकता है, लेकिन टॉस और पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम की रणनीति मैच का रुख बदल सकती है।

संभावित प्लेइंग-11

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु:
फिल साल्ट, Virat Kohli, देवदत्त पडिक्कल, रजत पाटीदार (कप्तान), जितेश शर्मा (विकेटकीपर), टिम डेविड, रोमारियो शेफर्ड, क्रुणाल पांड्या, भुवनेश्वर कुमार, जोश हेजलवुड, सुयश शर्मा
इम्पैक्ट प्लेयर: रसिख सलाम डार

गुजरात टाइटंस:
साई सुदर्शन, Shubman Gill (कप्तान), जोस बटलर (विकेटकीपर), कुमार कुशाग्र, वाशिंगटन सुंदर, राहुल तेवतिया, जेसन होल्डर, राशिद खान, कगिसो रबाडा, प्रसिद्ध कृष्णा, मोहम्मद सिराज
इम्पैक्ट प्लेयर: आर साई किशोर / मानव सुथार

कुल मिलाकर, मुकाबला रोमांचक होने की पूरी उम्मीद है, जहां छोटे मैदान और मजबूत बल्लेबाजी लाइनअप के चलते बड़े स्कोर देखने को मिल सकते हैं।

सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में 1000 स्थानों पर जरूरतमंद लोगों व पक्षियों के लिए घड़े व जलपात्र किए जाएंगे स्थापित – डॉ.राजेश्वर सिंह

आशियाना, लखनऊ : भीषण गर्मी को देखते हुए सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने माँ पीताम्बरा ट्रस्ट एवं Environment Warriors के सहयोग से एक महत्वपूर्ण जन-सेवा एवं पर्यावरण संरक्षण अभियान का शुभारंभ किया है, आशियाना स्थित विधायक कार्यालय से भाजपा पदाधिकारियों को पानी के घड़े व पक्षियों के लिए जलपात्र उपलब्ध करा शुरू हुआ अभियान।

इस अभियान के अंतर्गत सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में 1000 स्थानों पर जरूरतमंद लोगों के लिए पानी की व्यवस्था तथा 1000 स्थानों पर पक्षियों के लिए जलपात्र स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए 1000 घड़े तथा 1000 पक्षी जलपात्र/ मिट्टी के पात्र पार्टी कार्यकर्ताओं, बूथ अध्यक्षों एवं स्थानीय कार्यकर्ताओं को वितरित किए जाएंगे, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित रूप से पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करें।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि मई और जून की प्रचंड गर्मी में प्यासे राहगीरों, श्रमिकों, जरूरतमंदों और पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करना केवल सेवा नहीं, बल्कि हमारी मानवीय और सांस्कृतिक जिम्मेदारी भी है। यह अभियान सरोजिनी नगर में सेवा, संवेदना और पर्यावरण संरक्षण के भाव को और मजबूत करेगा।

उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लखनऊ में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है और यह एक गंभीर चेतावनी है। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, शहर के कई इलाकों में पिछले 9–10 वर्षों में ही 10–12 मीटर (लगभग 30–40 फीट) तक गिरावट दर्ज की गई है (स्रोत: Hindustan Times)। वहीं विशेषज्ञों के अनुसार, गोमती बेसिन क्षेत्र में भूजल स्तर कई स्थानों पर 30 मीटर तक नीचे चला गया है (स्रोत: Times of India)।

दीर्घकालिक रुझान और अध्ययनों से स्पष्ट है कि पिछले 15–20 वर्षों में लखनऊ के कई हिस्सों में कुल मिलाकर 20–30 मीटर (लगभग 60–100 फीट या उससे अधिक) तक गिरावट देखी गई है, जो अत्यंत चिंताजनक स्थिति है (स्रोत: CWE Journal, TERI Study)।

डॉ. सिंह ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे अपने घरों, पार्कों और संस्थानों में कम लागत वाले वर्षा जल संचयन सिस्टम अवश्य लगाएं, ताकि गिरते हुए भूजल स्तर को रोका जा सके और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षित किया जा सके।

इसके साथ ही उन्होंने लोगों से सोलर पैनल लगाने का भी आग्रह किया, ताकि पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम हो, पर्यावरण की रक्षा हो और राष्ट्रहित में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिले।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि सरोजिनी नगर केवल विकास का नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और सतत भविष्य का भी मॉडल बनेगा। यह अभियान न केवल लोगों और पक्षियों की प्यास बुझाएगा, बल्कि जल संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के प्रति भी व्यापक जन-जागरण का माध्यम बनेगा।

सरोजनीनगर की समस्याओं पर विधायक का सख्त रुख: डॉ.राजेश्वर सिंह ने NHAI को लिखे 3 पत्र, फुट ओवरब्रिज और नालों के अधूरे कार्य पर उठाए गंभीर सवाल

लखनऊ। सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेस-वे निर्माण के चलते उत्पन्न हो रही जनसमस्याओं को लेकर विधायक ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने (NHAI) के चेयरमैन को संबोधित करते हुए लगातार तीन विस्तृत पत्र भेजे हैं, जिनमें क्षेत्र की जमीनी समस्याओं को विस्तार से बताते हुए तत्काल समाधान की मांग की गई है। इन पत्रों में साफ तौर पर यह दर्शाया गया है कि एक्सप्रेस-वे निर्माण के साथ-साथ मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी स्थानीय जनता के लिए भारी परेशानी का कारण बन रही है।

एक्सप्रेस-वे बना परेशानी की वजह, सड़क पार करना हुआ जानलेवा

विधायक डॉ. सिंह ने अपने पत्र में बताया कि लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेस-वे का निर्माण जहां विकास का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर इससे जुड़े कुछ जरूरी कार्य अधूरे रहने के कारण आम जनता को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

शांति नगर क्षेत्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि यहां लगभग 30 हजार की आबादी निवास करती है, जिसे एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर आवागमन के लिए कोई सुरक्षित व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। लोग रोजाना जान जोखिम में डालकर सड़क पार कर रहे हैं।

खासतौर पर स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राएं, बुजुर्ग और महिलाएं इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित हैं। ऐसे में हज हाउस के पास फुट ओवरब्रिज का निर्माण अत्यंत आवश्यक बताया गया है, ताकि लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके और दुर्घटनाओं की आशंका कम हो।

दरोगा खेड़ा में 60 हजार आबादी की परेशानी, लंबा चक्कर मजबूरी

अपने दूसरे पत्र में विधायक ने दरोगा खेड़ा क्षेत्र की गंभीर स्थिति का जिक्र किया है। यहां करीब 60 हजार की आबादी एक्सप्रेस-वे के कारण सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है।

स्थानीय लोगों को सड़क के एक ओर से दूसरी ओर जाने के लिए कई किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे समय और संसाधनों दोनों की बर्बादी हो रही है। यह समस्या केवल असुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में भी लोगों के लिए खतरा बन सकती है।

विधायक ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं है, तो निजी भूमि खरीदकर भी फुट ओवरब्रिज का निर्माण कराया जाना चाहिए। उन्होंने इसे जनहित में अत्यंत आवश्यक कदम बताते हुए प्राथमिकता के आधार पर कार्य कराने की मांग की है।

अधूरे नालों से बढ़ रहा जलभराव, बारिश में बिगड़ सकते हैं हालात

तीसरे पत्र में विधायक ने एक्सप्रेस-वे के किनारे बन रहे नालों के अधूरे कार्यों पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि कृष्णा लोक कॉलोनी, दरोगा खेड़ा और रैनियापुर फॉरेंसिक यूनिवर्सिटी मोड़ जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर नालों के “मिसिंग लिंक” अभी तक पूरे नहीं किए गए हैं।

इसका सीधा असर यह हो रहा है कि पानी का निकास बाधित हो रहा है और क्षेत्र में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो रही है। स्थानीय निवासियों के घरों और सड़कों पर पानी भरने से जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

विधायक ने आगाह किया कि यदि बारिश से पहले इन अधूरे कार्यों को पूरा नहीं किया गया, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है, जिससे हजारों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

NHAI से समयबद्ध और प्राथमिकता आधारित कार्रवाई की मांग

विधायक ने से इन सभी मुद्दों पर तत्काल ध्यान देने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि:

  • फुट ओवरब्रिज निर्माण को प्राथमिकता दी जाए
  • जहां आवश्यक हो, वहां भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाए
  • नालों के अधूरे “मिसिंग लिंक” कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूर्ण कराया जाए

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करने का भी अनुरोध किया है, ताकि इन परियोजनाओं में किसी प्रकार की लापरवाही न हो और जनता को जल्द राहत मिल सके।

जनता को राहत दिलाने की दिशा में बड़ा कदम

विधायक की इस पहल को क्षेत्र की जनता के लिए एक बड़ी उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है। यदि NHAI इन मांगों पर जल्द कार्रवाई करता है, तो सरोजनीनगर में लंबे समय से चली आ रही समस्याओं- जैसे सड़क पार करने की असुविधा, ट्रैफिक अव्यवस्था और जलभराव- से काफी हद तक निजात मिल सकती है।

यह पहल न केवल विकास कार्यों को संतुलित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जनप्रतिनिधि क्षेत्र की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए समाधान के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।