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Sonu Nigam: कॉपीराइट विवाद पर पहली बार खुलकर बोले सिंगर, दावा- T-Series और Zee Music ने काम करना किया था बंद

बॉलीवुड के मशहूर सिंगर सोनू निगम ने अपने करियर के मुश्किल दौर को याद करते हुए म्यूजिक इंडस्ट्री से जुड़ा एक बड़ा खुलासा किया है। अपनी आवाज से लंबे समय तक दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले सोनू निगम ने बताया कि जब उन्होंने सिंगर्स के कॉपीराइट और रॉयल्टी राइट्स के मुद्दे को उठाया, तो उन्हें इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ा। सिंगर के मुताबिक, इस मुद्दे पर आवाज उठाने के बाद बड़े म्यूजिक लेबल्स ने उनके साथ काम करना बंद कर दिया था।

सोनू निगम ने बताया क्यों बंद हुआ था काम

कोमल नाहटा के पॉडकास्ट ‘गेम चेंजर्स’ में बातचीत के दौरान सोनू निगम ने अपने करियर के उतार-चढ़ाव पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा था जब वह अपने करियर के शिखर पर थे। उनके एल्बम खूब लोकप्रिय होते थे और उनकी जबरदस्त फैन फॉलोइंग थी। हालांकि, कॉपीराइट और रॉयल्टी को लेकर अपनी आवाज बुलंद करने के बाद उनके लिए परिस्थितियां बदलने लगीं।

सोनू निगम के मुताबिक, इस मुद्दे को उठाने के बाद टी-सीरीज ने उनके साथ काम करना बंद कर दिया था। इसके अलावा जी म्यूजिक से भी उन्हें काम मिलना बंद हो गया। सिंगर ने बताया कि उन्हें यह महसूस कराया गया कि वह एक कलाकार से ज्यादा एक्टिविस्ट की भूमिका में आ गए हैं।

उन्होंने कहा कि उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी कि इस तरह उनके लिए काम के रास्ते बंद हो जाएंगे। उन्हें लगता था कि बातचीत के जरिए इस विवाद का कोई समाधान निकल आएगा, लेकिन समय के साथ परिस्थितियां और मुश्किल होती चली गईं।

‘गाने रोक सकते हैं, स्टेज पर आने से नहीं’

सोनू निगम ने बताया कि जब उन्होंने देखा कि धीरे-धीरे उनके लिए म्यूजिक इंडस्ट्री में काम के अवसर कम किए जा रहे हैं, तब उन्होंने अपने करियर को एक अलग दिशा में आगे बढ़ाने का फैसला किया।

उनके मुताबिक, म्यूजिक कंपनियां भले ही उन्हें गाने देने से रोक सकती थीं, लेकिन लाइव स्टेज पर परफॉर्म करने से उन्हें कोई नहीं रोक सकता था। यही वजह रही कि उन्होंने कॉन्सर्ट और लाइव परफॉर्मेंस को अपने करियर का अहम हिस्सा बनाया।

‘आज हालात पूरी तरह बदल गए हैं’

सोनू निगम का कहना है कि समय के साथ म्यूजिक इंडस्ट्री में काफी बदलाव आया है। उनके अनुसार, जिन कंपनियों के साथ कभी कॉपीराइट और रॉयल्टी को लेकर मतभेद हुए थे, आज वही कंपनियां सिंगर्स को रॉयल्टी दे रही हैं।

उन्होंने बताया कि अब उनके और म्यूजिक कंपनियों के बीच रिश्ते भी बेहतर हैं। आज वे एक-दूसरे से मिलते हैं, साथ बैठते हैं और पहले की तरह सामान्य तरीके से बातचीत करते हैं। सिंगर का मानना है कि इस बदलाव के लिए किसी न किसी को शुरुआत करनी ही थी।

कॉपीराइट की लड़ाई को माना जिंदगी का मकसद

सोनू निगम ने कहा कि उन्हें हमेशा लगता रहा कि कॉपीराइट और रॉयल्टी के लिए उनकी लड़ाई सिर्फ उनके निजी हित से जुड़ी नहीं थी, बल्कि यह उनके जीवन के एक बड़े उद्देश्य का हिस्सा थी।

सिंगर ने अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्हें ऐसा महसूस होता था कि उन्हें यह जिम्मेदारी मिली है। उन्होंने इस संदर्भ में दिग्गज गायिका लता मंगेशकर का भी जिक्र किया और कहा कि उन्होंने इस दिशा में पहल की थी, लेकिन इसे पूरी तरह आगे नहीं ले जा सकीं।

सोनू निगम ने बताया कि वह इस मुद्दे के लिए अपना करियर तक दांव पर लगाने के लिए तैयार थे। उन्हें लगता था कि अगर उन्होंने आवाज नहीं उठाई, तो शायद कोई दूसरा कलाकार भी आगे आकर ऐसा करने का जोखिम नहीं उठाएगा।

कानून बदलने के बाद बदला म्यूजिक इंडस्ट्री का नजरिया

सोनू निगम के मुताबिक, कानून में बदलाव के बाद म्यूजिक इंडस्ट्री को भी यह समझ आया कि कॉपीराइट और रॉयल्टी को लेकर उनकी मांगें गलत नहीं थीं। धीरे-धीरे इंडस्ट्री का नजरिया बदला और म्यूजिक कंपनियों के साथ उनके रिश्ते भी फिर से सामान्य होने लगे।

आज स्थिति यह है कि सोनू निगम और म्यूजिक लेबल्स के बीच पहले की तरह विवाद नहीं है और दोनों पक्षों के बीच अच्छे संबंध हैं।

‘रिवोल्यूशन’ कॉन्सर्ट की तैयारी में सोनू निगम

वर्कफ्रंट की बात करें तो सोनू निगम इन दिनों अपने आगामी कॉन्सर्ट ‘रिवोल्यूशन’ की तैयारियों में व्यस्त हैं। वह 23 अगस्त 2026 को OVO एरीना, वेम्बली में परफॉर्म करने वाले हैं।

इसके बाद सिंगर का ‘रिवोल्यूशन इंडिया टूर 2026’ अक्टूबर 2026 से शुरू होगा। इस टूर के दौरान सोनू निगम बेंगलुरु, पुणे, सूरत, इंदौर, भोपाल, नागपुर, लखनऊ, चंडीगढ़ और जोधपुर समेत देश के कई शहरों में लाइव परफॉर्मेंस देंगे। यह म्यूजिक टूर मार्च 2027 तक चलने वाला है।

Kids Health Tips: बरसात के मौसम में बच्चों की इम्युनिटी मजबूत करने के लिए दें ये 4 पौष्टिक चीजें

मानसून का मौसम बच्चों को खूब पसंद आता है। बारिश में खेलना और मौसम का आनंद लेना उन्हें अच्छा लगता है, लेकिन इस दौरान वातावरण में नमी बढ़ने के साथ कई तरह के संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है। बच्चों की इम्यूनिटी पूरी तरह विकसित न होने के कारण वे सर्दी-जुकाम, वायरल संक्रमण और पेट से जुड़ी समस्याओं की चपेट में जल्दी आ सकते हैं। ऐसे में उनकी डाइट में पौष्टिक और संतुलित खाद्य पदार्थ शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।

बारिश के मौसम में बच्चों को स्वादिष्ट चीजों के साथ पोषण देने के लिए इन 4 विकल्पों को उनकी डाइट में शामिल किया जा सकता है।

1. घर पर बना गर्मागर्म सूप

मानसून में बच्चों को घर पर तैयार किया हुआ गर्म सूप दिया जा सकता है। यह हल्का होने के कारण आसानी से पच जाता है और शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में भी मदद कर सकता है। आप बच्चों के लिए टमाटर, मिक्स वेजिटेबल, कॉर्न या चिकन सूप तैयार कर सकते हैं। अलग-अलग सब्जियों का इस्तेमाल करने से सूप में कई जरूरी पोषक तत्व भी शामिल हो जाते हैं।

2. भुट्टा और स्वीट कॉर्न

बारिश के मौसम में भुट्टा खाना बच्चों को काफी पसंद आता है। इसे उबालकर या भूनकर बच्चों को दिया जा सकता है। स्वाद बढ़ाने के लिए ऊपर से थोड़ा नींबू और हल्का काला नमक लगाया जा सकता है। मकई में फाइबर के साथ कई विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो संतुलित डाइट का हिस्सा बनने पर पाचन और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

3. ताजे और मौसमी फल

बच्चों की डाइट में मौसमी फलों को जरूर शामिल करना चाहिए। मानसून के दौरान सेब, नाशपाती, अनार, आलूबुखारा और चेरी जैसे फल विकल्प हो सकते हैं। फलों को बच्चों को देने से पहले साफ पानी से अच्छी तरह धोना जरूरी है। वहीं सड़क किनारे पहले से कटे हुए फल देने से बचना बेहतर है, क्योंकि साफ-सफाई का स्तर सुनिश्चित करना मुश्किल हो सकता है।

4. हल्दी वाला गर्म दूध

बच्चों को रात में सोने से पहले हल्का गर्म दूध दिया जा सकता है। चाहें तो दूध में थोड़ी मात्रा में हल्दी मिलाई जा सकती है। हल्दी में करक्यूमिन जैसे यौगिक पाए जाते हैं और इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। हालांकि, हल्दी वाला दूध किसी बीमारी का इलाज नहीं है और इसे बच्चों की संतुलित डाइट के विकल्प के रूप में नहीं लेना चाहिए।

बच्चों की डाइट में रखें संतुलन का ध्यान

मानसून में बच्चों की इम्यूनिटी को बेहतर बनाए रखने के लिए केवल किसी एक सुपरफूड पर निर्भर रहने के बजाय उनकी डाइट में अलग-अलग तरह के पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करना जरूरी है। फल, सब्जियां, दालें, अनाज, दूध या अन्य पौष्टिक विकल्पों के साथ पर्याप्त पानी देना भी महत्वपूर्ण है। खाने से पहले हाथ धोने और फलों-सब्जियों की अच्छी तरह सफाई जैसी आदतें भी बच्चों को संक्रमण से बचाने में मदद कर सकती हैं।

Commonwealth Games: भारत ने जीते कुल 39 पदक, बॉक्सिंग में 7 गोल्ड के साथ खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 39 मेडल अपने नाम किए। भारतीय खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल जीते। इस बार भारतीय बॉक्सरों का प्रदर्शन सबसे ज्यादा चर्चा में रहा, जिन्होंने 7 गोल्ड समेत कुल 10 पदक जीतकर इतिहास रच दिया।

2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने 50 से ज्यादा पदक जीते थे, लेकिन इस बार भारतीय दल 50 पदकों के आंकड़े तक नहीं पहुंच सका। हालांकि, केवल पदकों की संख्या के आधार पर इस प्रदर्शन का आकलन करना सही नहीं होगा। एथलेटिक्स, बॉक्सिंग और अन्य खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने कई यादगार उपलब्धियां हासिल कीं। इसके अलावा इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स के कार्यक्रम से कई लोकप्रिय खेलों को बाहर रखा गया था।

भारत के लिए यादगार रहे कई पल

भारत के लिए पहला मेडल पैरा पावरलिफ्टिंग में झंडू कुमार ने जीता। उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल हासिल कर भारत का पदक खाता खोला। इसके बाद मीराबाई चानू ने भारत को पहला गोल्ड दिलाया। इस जीत के साथ उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरी बार गोल्ड मेडल जीतने की उपलब्धि भी हासिल की।

जूडो में अस्मिता डे ने इतिहास रचते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय जूडो एथलीट बनने का गौरव हासिल किया। वहीं बॉक्सिंग में 22 वर्षीय जादूमणि सिंह ने सिल्वर मेडल जीता। उनके प्रदर्शन ने भारतीय बॉक्सिंग में आने वाली नई प्रतिभाओं की मजबूत तस्वीर पेश की।

एथलेटिक्स में सबसे ज्यादा पदक

भारत को सबसे ज्यादा 16 मेडल एथलेटिक्स में मिले। हालांकि गोल्ड मेडल के मामले में बॉक्सिंग सबसे आगे रही। प्रतियोगिता जैसे-जैसे आगे बढ़ी, भारतीय खिलाड़ियों का पदक अभियान भी तेज होता गया।

1 अगस्त भारत के लिए खास दिन रहा। इस दिन भारतीय एथलीटों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 16 पदक अपने नाम किए। एक ही दिन में इतने पदक जीतना भारतीय दल के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के सबसे यादगार पलों में शामिल रहा।

कई बड़े खेल प्रतियोगिता से रहे बाहर

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कई प्रमुख खेलों को शामिल नहीं किया गया था। शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया शहर को इन खेलों की मेजबानी करनी थी, लेकिन 2023 में वहां की सरकार ने आयोजन की अनुमानित लागत को लेकर चिंता जताई। बताया गया कि आयोजन पर खर्च 6 से 7 बिलियन डॉलर से भी अधिक हो सकता था।

इसके बाद ग्लासगो ने अपेक्षाकृत कम समय में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की जिम्मेदारी संभाली। कम समय में आयोजन की तैयारियां पूरी करने और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की चुनौती के चलते क्रिकेट, रेसलिंग और हॉकी जैसे कई खेलों को इस बार कार्यक्रम में जगह नहीं मिल सकी।

किस खेल में भारत ने कितने पदक जीते?

  • एथलेटिक्स: 16 मेडल — 3 गोल्ड, 7 सिल्वर, 6 ब्रॉन्ज
  • बॉक्सिंग: 10 मेडल — 7 गोल्ड, 3 सिल्वर
  • वेटलिफ्टिंग: 8 मेडल — 1 गोल्ड, 6 सिल्वर, 1 ब्रॉन्ज
  • जूडो: 4 मेडल — 2 गोल्ड, 1 सिल्वर, 1 ब्रॉन्ज
  • पैरा पावरलिफ्टिंग: 1 मेडल — 1 ब्रॉन्ज

कुल मिलाकर भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 39 पदक जीते। पदकों की संख्या भले ही पिछले संस्करणों की तुलना में कम रही हो, लेकिन बॉक्सिंग में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा और कई एथलीटों की ऐतिहासिक उपलब्धियां इस अभियान को लंबे समय तक यादगार बनाए रखेंगी।

Health Update: पुरुषों में गुस्सा और महिलाओं में उदासी, जानें दोनों में अलग क्यों नजर आते हैं डिप्रेशन के संकेत

डिप्रेशन को आमतौर पर लोग लंबे समय तक रहने वाली उदासी, रोने की इच्छा या अकेलापन महसूस करने से जोड़कर देखते हैं। हालांकि, यह मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी एक गंभीर स्थिति है, जो व्यक्ति की भावनाओं के साथ-साथ उसके व्यवहार, सोचने के तरीके और रोजमर्रा की गतिविधियों को भी प्रभावित कर सकती है। लंबे समय तक उदास रहना या उन चीजों में रुचि खत्म हो जाना, जो पहले पसंद थीं, इसके प्रमुख संकेतों में शामिल हो सकता है।

डिप्रेशन पुरुषों और महिलाओं दोनों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन इसके लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। कई बार महिलाओं में उदासी, चिंता और भावनात्मक बदलाव अधिक स्पष्ट दिखाई देते हैं, जबकि पुरुषों में यही समस्या चिड़चिड़ेपन, गुस्से या व्यवहार में बदलाव के रूप में सामने आ सकती है। यही अंतर कई बार डिप्रेशन को पहचानना मुश्किल बना देता है।

महिलाओं में कैसे दिखाई देते हैं डिप्रेशन के लक्षण?

महिलाओं में डिप्रेशन के लक्षण कई बार भावनात्मक रूप से स्पष्ट नजर आते हैं। हार्मोनल बदलाव भी कुछ महिलाओं में मूड और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। पीरियड्स के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव, गर्भावस्था, बच्चे के जन्म के बाद का समय और मेनोपॉज जैसे चरणों में मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है।

महिलाओं में डिप्रेशन के दौरान कुछ ऐसे संकेत दिखाई दे सकते हैं:

  • बिना किसी स्पष्ट वजह के बार-बार रोने का मन करना।
  • लगातार चिंता, घबराहट या बेचैनी महसूस होना।
  • लंबे समय तक उदासी या खालीपन महसूस करना।
  • छोटी-बड़ी बातों के लिए खुद को दोषी मानना या अपराधबोध से घिरे रहना।
  • पर्याप्त आराम के बावजूद लगातार थकान महसूस होना।
  • परिवार और दोस्तों से मिलने या बातचीत करने से बचना।
  • पहले पसंद आने वाली गतिविधियों में रुचि कम हो जाना।

पुरुषों में डिप्रेशन के संकेत कैसे अलग हो सकते हैं?

पुरुषों में डिप्रेशन हमेशा उदासी या रोने के रूप में सामने नहीं आता। कई मामलों में मानसिक परेशानी व्यवहार में बदलाव के जरिए दिखाई देती है। व्यक्ति लगातार चिड़चिड़ा रह सकता है, छोटी बातों पर गुस्सा कर सकता है या लोगों से दूरी बनाना शुरू कर सकता है।

पुरुषों में डिप्रेशन के संभावित संकेतों में शामिल हैं:

  • छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन या गुस्सा आना।
  • जरूरत से ज्यादा आक्रामक या हिंसक व्यवहार करना।
  • खुद को लगातार काम में व्यस्त रखना और भावनाओं से बचने की कोशिश करना।
  • शराब, सिगरेट या अन्य नशीले पदार्थों का अधिक इस्तेमाल करना।
  • दोस्तों और परिवार के सदस्यों से दूरी बना लेना।
  • अपनी भावनाओं और परेशानियों के बारे में किसी से बात न करना।
  • सामाजिक गतिविधियों और पहले पसंद आने वाली चीजों से दूर होते जाना।

पुरुषों और महिलाओं में डिप्रेशन अलग क्यों नजर आता है?

डिप्रेशन दोनों में एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है, लेकिन इसे व्यक्त करने का तरीका अलग हो सकता है। कई पुरुष अपनी भावनात्मक परेशानी को उदासी के बजाय गुस्से, चिड़चिड़ेपन या आक्रामक व्यवहार के जरिए व्यक्त करते हैं। इसके कारण परिवार के लोगों को यह समझने में परेशानी हो सकती है कि व्यक्ति अंदर से मानसिक तनाव या डिप्रेशन से गुजर रहा है।

इसके पीछे सामाजिक और पारिवारिक सोच भी एक वजह हो सकती है। पुरुषों को अक्सर बचपन से अपनी भावनाओं को नियंत्रित रखने और हर परिस्थिति में मजबूत बने रहने की सीख दी जाती है। ऐसे में वे अपनी परेशानी दूसरों के साथ साझा करने से बच सकते हैं और मदद लेने में भी देरी कर सकते हैं।

दूसरी ओर, महिलाएं कई बार अपनी भावनाओं, चिंता और उदासी को अधिक खुलकर व्यक्त करती हैं। इससे उनके आसपास के लोगों को समस्या के संकेत जल्दी दिखाई दे सकते हैं। कई महिलाएं मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मदद लेने के लिए भी आगे आती हैं, जिससे समय रहते समस्या की पहचान और उपचार शुरू किया जा सकता है।

हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हर पुरुष में डिप्रेशन केवल गुस्से के रूप में और हर महिला में केवल उदासी के रूप में दिखाई दे। किसी भी व्यक्ति में लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। अगर उदासी, चिड़चिड़ापन, रुचि खत्म होना, सामाजिक दूरी या व्यवहार में बदलाव लंबे समय तक बना रहे और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

Broad Peak News: एवलांच की चपेट में आए निर्मल पुरजा नहीं रहे, रेस्क्यू टीम ने 5,700 मीटर पर बरामद किया शव

मशहूर नेपाली-ब्रिटिश पर्वतारोही निर्मल ‘निम्सदाई’ पुरजा की मौत हो गई है। रविवार (2 अगस्त 2026) को रेस्क्यू टीम ने उनका शव पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में स्थित ब्रॉड पीक से बरामद किया। करीब तीन दिन पहले पुरजा समेत 10 पर्वतारोही पहाड़ पर आए भीषण एवलांच की चपेट में आ गए थे। ब्रॉड पीक दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटियों में शामिल है और यहां चढ़ाई करना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है।

43 वर्षीय निर्मल पुरजा का शव करीब 5,700 मीटर की ऊंचाई पर मिला। वह इस पर्वतारोहण अभियान का नेतृत्व कर रहे थे। रेस्क्यू टीम ने बेहद कठिन परिस्थितियों के बीच उनके शव तक पहुंचने में सफलता हासिल की। ऊंचाई वाले इलाके में लगातार एवलांच का खतरा और खराब मौसम राहत एवं बचाव अभियान को मुश्किल बना रहा है।

ब्रॉड पीक पर हुए इस हादसे में अभियान से जुड़े सभी 10 पर्वतारोहियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। रेस्क्यू टीम को ऊंचाई वाले इलाके में कुछ और शव भी दिखाई दिए हैं, हालांकि उनकी आधिकारिक पहचान अभी नहीं हो पाई है। बचाव दल बरामद किए गए शवों को जापानी कैंप तक पहुंचाने में जुटा है। इसके बाद उन्हें सुरक्षित स्थान तक ले जाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। खड़ी ढलानों, बर्फीले इलाकों और लगातार एवलांच के खतरे के चलते रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा बना हुआ है। खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर से राहत अभियान चलाना भी संभव नहीं हो पा रहा है।

निर्मल पुरजा के नेतृत्व वाले इस अभियान में कुल 10 पर्वतारोही शामिल थे। इनमें नेपाल के पांच, पाकिस्तान का एक, ओमान का एक, अमेरिका का एक और चीन का एक पर्वतारोही शामिल था। हादसे के बाद शुक्रवार को चार पर्वतारोहियों के शव बरामद किए गए थे। इनमें ओमान की नादिरा अहमद अब्दुल्ला अल हर्थी, नेपाल के पुर बहादुर गुरुंग और अमेरिका की मैलोरी गीस की पहचान की गई थी। इन शवों को हेलीकॉप्टर के जरिए स्कार्दू पहुंचाया गया था।

निर्मल पुरजा को पर्वतारोहण की दुनिया में ‘निम्सदाई’ के नाम से भी जाना जाता था। वह दुनिया की सबसे ऊंची और कठिन चोटियों पर कई सफल अभियानों का हिस्सा रहे थे। अपनी उपलब्धियों और साहसिक अभियानों के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खास पहचान बनाई थी। 8,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली कई प्रमुख चोटियों पर चढ़ाई करने वाले पुरजा को बेहद अनुभवी पर्वतारोही माना जाता था।

ब्रॉड पीक पर एवलांच के बाद रेस्क्यू टीम का अभियान लगातार जारी है। ऊंचाई, खराब मौसम, बर्फीली ढलानों और दोबारा एवलांच आने के खतरे के बीच शवों को नीचे लाना बचाव दल के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। निर्मल पुरजा की मौत से पर्वतारोहण की दुनिया में शोक की लहर है। दुनिया की चुनौतीपूर्ण पर्वत चोटियों पर अपनी उपलब्धियों के लिए मशहूर रहे पुरजा का ए