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300 से अधिक मंदिरों का कायाकल्प : करोड़ों की परियोजनाओं से संवरेंगे प्रमुख आस्था केंद्र; विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह सरोजनीनगर में अब ‘श्याम रथ’ शुरू करने की तैयारी में

लखनऊ। सरोजनीनगर में विकास का दायरा अब सड़क, बिजली, जल निकासी और आधुनिक आधारभूत सुविधाओं से आगे बढ़कर धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तक पहुंच रहा है। क्षेत्र के मंदिरों और प्रमुख आस्था केंद्रों के सौंदर्यीकरण, जीर्णोद्धार तथा श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार को लेकर व्यापक स्तर पर कार्य किए जाने की जानकारी सामने आई है। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के प्रयासों से क्षेत्र के 300 से अधिक मंदिरों में CSR के माध्यम से विभिन्न विकास एवं सौंदर्यीकरण कार्य कराए जाने का दावा किया गया है।

इन मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हैंडपंप, सोलर लाइट, बैठने की व्यवस्था, फर्श निर्माण और स्वच्छता संबंधी कार्यों के साथ रंगाई-पुताई भी कराई गई है। इन पहलों का उद्देश्य मंदिर परिसरों को स्वच्छ, सुंदर, सुरक्षित और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाना बताया गया है।

300 से अधिक मंदिरों में सुविधाओं का विस्तार

सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में धार्मिक स्थलों के संरक्षण और विकास के तहत 300 से अधिक मंदिरों में CSR के माध्यम से सुविधाओं का विस्तार कराया गया है। मंदिरों की स्थानीय जरूरतों के अनुसार बुनियादी सुविधाएं विकसित करने के साथ उनके सौंदर्यीकरण पर भी जोर दिया गया है।

इस पहल के तहत मंदिर परिसरों में सोलर लाइट और हैंडपंप जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था, फर्श निर्माण, स्वच्छता संबंधी कार्य और रंगाई-पुताई कराई गई है। इससे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों के स्वरूप में बदलाव के साथ श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलने का दावा किया गया है।

डॉ. राजेश्वर सिंह का कहना है कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना के स्थल नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। ऐसे में इनका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।

प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए करोड़ों की परियोजनाएं

सरोजनीनगर के प्रमुख और प्राचीन धार्मिक स्थलों के व्यापक विकास के लिए शासन स्तर से भी कई परियोजनाओं को वित्तीय स्वीकृति मिलने की जानकारी दी गई है। इन परियोजनाओं के जरिए मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार, सौंदर्यीकरण और श्रद्धालु सुविधाओं का विस्तार किया जाना प्रस्तावित है।

प्रमुख परियोजनाओं में-

  • प्राचीन रेतेश्वर महादेव मंदिर के विकास एवं सौंदर्यीकरण के लिए ₹5.30 करोड़
  • हरौनी स्थित झाड़ेश्वर महादेव मंदिर के लिए ₹1.05 करोड़
  • परवर पश्चिम स्थित श्री महादेव जल साईं नाथ शिवधाम महादेवन मंदिर के लिए ₹98 लाख
  • कबीर पंथी दाता साई संत आश्रम के लिए ₹1 करोड़
  • परवर पश्चिम स्थित श्री महादेव झलकारी नाथ मंदिर के लिए ₹98 लाख

की वित्तीय स्वीकृति शामिल है।

इन परियोजनाओं के माध्यम से धार्मिक स्थलों की मूल संरचना और सांस्कृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए उन्हें अधिक सुव्यवस्थित और श्रद्धालु-अनुकूल बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

झाड़ेश्वर महादेव मंदिर में एक किलो चांदी का मुकुट अर्पित

धार्मिक स्थलों के संरक्षण और विकास के साथ व्यक्तिगत आस्था से जुड़े कार्य भी किए गए हैं। प्रेस नोट के अनुसार, डॉ. राजेश्वर सिंह ने हरौनी स्थित झाड़ेश्वर महादेव मंदिर में ₹1.11 लाख की लागत से एक किलोग्राम चांदी का मुकुट अर्पित किया है।

यह पहल धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के प्रति व्यक्तिगत समर्पण के रूप में प्रस्तुत की गई है।

‘राम रथ’ से करीब 9 हजार श्रद्धालुओं ने किए श्रीरामलला के दर्शन

सरोजनीनगर में धार्मिक यात्राओं के माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रमुख तीर्थस्थलों के दर्शन कराने का अभियान भी जारी है। सितंबर 2022 में शुरू की गई ‘रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा’ के तहत अब तक 62 बार 150 से अधिक निःशुल्क बसों का संचालन कर लगभग 9 हजार श्रद्धालुओं को अयोध्या में श्रीरामलला के दर्शन कराए जाने का दावा किया गया है।

यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को उनके घर से लाने और दर्शन के बाद वापस पहुंचाने की व्यवस्था के साथ भोजन, जलपान एवं स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

इसके अतिरिक्त 41 सिख श्रद्धालुओं को अमृतसर-करतारपुर साहिब दर्शन यात्रा भी कराई गई।

राम रथ के बाद अब ‘श्याम रथ’ की तैयारी

आस्था और सेवा के इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए सरोजनीनगर से अब ‘श्याम रथ’ शुरू करने की तैयारी है। जारी जानकारी के अनुसार आगामी 15 और 30 सितंबर को सरोजनीनगर के विभिन्न मंडलों से श्रद्धालुओं के लिए ‘श्याम रथ’ का शुभारंभ किया जाएगा।

इसके पहले चरण में 120 से अधिक श्रद्धालुओं को खाटू श्याम बाबा के दर्शन कराने की योजना है।

आस्था, संस्कृति और सेवा को विकास से जोड़ने की पहल

सरोजनीनगर में मंदिरों के सौंदर्यीकरण और धार्मिक स्थलों के विकास की इन पहलों के जरिए आस्था, संस्कृति और जनसेवा को क्षेत्रीय विकास के साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। 300 से अधिक मंदिरों में CSR के माध्यम से सुविधाओं का विस्तार और प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए करोड़ों रुपये की परियोजनाओं को स्वीकृति मिलने से क्षेत्र की धार्मिक विरासत को नया स्वरूप देने की दिशा में काम आगे बढ़ने की बात कही गई है।

डॉ. राजेश्वर सिंह के अनुसार, धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण केवल वर्तमान पीढ़ी की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी भी है। इसी सोच के साथ सरोजनीनगर में मंदिरों के सौंदर्यीकरण, जीर्णोद्धार, संरक्षण और श्रद्धालु सुविधाओं के विस्तार का अभियान आगे बढ़ाया जा रहा है।

Health Update:नकली या एनालॉग पनीर सुरक्षित? जानिए इसके 5 संभावित नुकसान और असली पनीर की पहचान

पनीर भारतीय खानपान का एक लोकप्रिय हिस्सा है। शाही पनीर से लेकर पनीर टिक्का और कई तरह की सब्जियों तक, इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जाता है। दूध से तैयार पारंपरिक पनीर प्रोटीन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों का स्रोत माना जाता है। लेकिन बाजार में मिलने वाला हर सफेद और मुलायम पनीर जरूरी नहीं कि पारंपरिक दूध से ही तैयार किया गया हो।

इन दिनों एनालॉग पनीर (Analog Paneer) को लेकर खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों और इसकी लेबलिंग पर चर्चा बढ़ी है। कुछ उत्पादों में दूध की जगह वनस्पति वसा, स्टार्च और अन्य गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। समस्या तब पैदा होती है जब ऐसे उत्पाद को स्पष्ट जानकारी दिए बिना असली पनीर के रूप में बेचा जाए।

आइए समझते हैं कि एनालॉग पनीर क्या होता है, इसके सेवन को लेकर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और खरीदारी के समय असली पनीर की पहचान कैसे करें।

क्या होता है एनालॉग पनीर?

एनालॉग पनीर ऐसा पनीर-जैसा उत्पाद है, जिसे पारंपरिक दूध और दूध के ठोस पदार्थों के बजाय अलग-अलग गैर-डेयरी सामग्री से तैयार किया जा सकता है। इसमें वनस्पति वसा, स्टार्च, प्रोटीन और अन्य खाद्य सामग्री का इस्तेमाल उत्पाद के प्रकार के अनुसार किया जा सकता है।

यह दिखने और इस्तेमाल में पनीर जैसा लग सकता है, लेकिन इसकी सामग्री और पोषण संरचना पारंपरिक दूध से बने पनीर से अलग हो सकती है।

इसलिए ग्राहक के लिए यह जानना जरूरी है कि वह वास्तव में डेयरी पनीर खरीद रहा है या कोई पनीर एनालॉग उत्पाद।

एनालॉग पनीर के 5 संभावित नुकसान

1. पाचन संबंधी परेशानी

एनालॉग पनीर में इस्तेमाल होने वाली वसा, स्टार्च और अन्य सामग्री हर व्यक्ति के लिए समान रूप से आसानी से पचने वाली हो, यह जरूरी नहीं है।

अधिक मात्रा में सेवन करने पर कुछ लोगों को पेट भारी लगना, गैस, पेट फूलना, अपच या एसिडिटी जैसी परेशानी हो सकती है। खासकर जब इसे बहुत ज्यादा तले हुए या मसालेदार भोजन के साथ खाया जाए, तो पाचन संबंधी असुविधा बढ़ सकती है।

2. कैलोरी और वसा की मात्रा अधिक हो सकती है

कुछ एनालॉग पनीर उत्पादों में वनस्पति वसा का इस्तेमाल किया जाता है। उत्पाद में इस्तेमाल की गई सामग्री और उसकी मात्रा के आधार पर इसकी कुल कैलोरी और वसा अलग-अलग हो सकती है।

अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक अधिक कैलोरी और वसा वाले ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करता है, तो उसकी कुल दैनिक कैलोरी खपत बढ़ सकती है। इसलिए पैकेट खरीदते समय Nutrition Facts और Ingredients List देखना जरूरी है।

3. पारंपरिक पनीर जैसा पोषण जरूरी नहीं

दूध से बने पनीर में प्रोटीन, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व मिलते हैं। दूसरी ओर, एनालॉग पनीर का पोषण पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि उसे बनाने में किन सामग्रियों और कितनी मात्रा का इस्तेमाल किया गया है।

इसलिए हर एनालॉग पनीर को पारंपरिक डेयरी पनीर के बराबर पोषण वाला मानना सही नहीं होगा।

4. दिल की सेहत को लेकर सावधानी जरूरी

एनालॉग पनीर में इस्तेमाल होने वाली वसा का प्रकार उत्पाद के हिसाब से अलग हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति की पूरी डाइट में पहले से ही संतृप्त वसा अधिक है और वह नियमित रूप से अधिक वसा वाले खाद्य पदार्थ खाता है, तो लंबे समय में यह उसकी समग्र हृदय-स्वास्थ्य के लिए अच्छा विकल्प नहीं माना जाता।

इसलिए सिर्फ पनीर का नाम देखकर नहीं, बल्कि उसकी कुल वसा और संतृप्त वसा की मात्रा देखकर सेवन का फैसला करना बेहतर है।

5. गलत लेबलिंग और खाद्य सुरक्षा का जोखिम

सबसे बड़ी चिंता तब होती है जब किसी पनीर-जैसे उत्पाद की वास्तविक सामग्री के बारे में ग्राहक को स्पष्ट जानकारी न दी जाए।

गलत तरीके से तैयार, पैक या स्टोर किए गए खाद्य पदार्थों में खराब होने या दूषित होने का जोखिम भी बढ़ सकता है। इसलिए बिना लेबल, संदिग्ध गुणवत्ता या अज्ञात स्रोत से मिलने वाले पनीर को खरीदने से बचना बेहतर है।

असली पनीर खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?

अगर आप पैकेट वाला पनीर खरीद रहे हैं तो केवल उसकी कीमत या दिखावट पर भरोसा न करें। पैकेट पर मौजूद Ingredients, Nutrition Information, Manufacturing Date, Expiry/Best Before Date और FSSAI से संबंधित विवरण जरूर देखें।

अगर किसी उत्पाद की लेबलिंग स्पष्ट नहीं है या विक्रेता उसके बारे में सही जानकारी नहीं दे पा रहा है, तो उसे खरीदने से बचना बेहतर है।

क्या एनालॉग पनीर हर व्यक्ति के लिए नुकसानदायक है?

ऐसा कहना सही नहीं होगा कि हर एनालॉग पनीर खाने से निश्चित रूप से बीमारी होगी। इसका प्रभाव मुख्य रूप से उत्पाद में इस्तेमाल सामग्री, उसकी गुणवत्ता, मात्रा और व्यक्ति की पूरी डाइट पर निर्भर करता है।

सबसे जरूरी बात यह है कि एनालॉग उत्पाद को असली दूध से बने पनीर के रूप में छिपाकर नहीं बेचा जाना चाहिए और ग्राहक को उत्पाद की सही जानकारी मिलनी चाहिए।

निष्कर्ष

पनीर खरीदते समय सिर्फ उसका रंग, स्वाद या बनावट देखकर उसकी गुणवत्ता तय करना मुश्किल है। अगर आप नियमित रूप से पनीर खाते हैं, तो भरोसेमंद स्रोत से खरीदारी करें और पैकेट पर दी गई सामग्री व पोषण संबंधी जानकारी जरूर पढ़ें।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य और खाद्य-सुरक्षा संबंधी जानकारी के लिए है। किसी विशेष बीमारी, हृदय संबंधी जोखिम या डाइट से जुड़ी समस्या के लिए योग्य डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लें।

‘बंटवारा 1947’ पर मेकर्स का बड़ा ऑफर, मंगलवार को सिर्फ 99 रुपये में देख सकेंगे सनी देओल की फिल्म

सनी देओल स्टारर फिल्म ‘बंटवारा 1947’ रिलीज के बाद से ही चर्चा में बनी हुई है। 14 अगस्त को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली इस फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। हालांकि बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की रफ्तार अभी औसत बनी हुई है। ऐसे में दर्शकों को सिनेमाघरों तक लाने के लिए मेकर्स ने मंगलवार के लिए खास ऑफर पेश किया है।

99 रुपये में मिलेगी फिल्म की टिकट

फिल्म के प्रोडक्शन हाउस की ओर से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर दर्शकों को ऑफर की जानकारी दी गई। इसके मुताबिक मंगलवार को ‘बंटवारा 1947’ की टिकट महज 99 रुपये में बुक की जा सकेगी।

मेकर्स ने दर्शकों से मंगलवार को फिल्म देखने की अपील करते हुए इसे खास तरीके से प्रमोट किया है। सनी देओल के फैंस के लिए यह ऑफर फिल्म को बड़े पर्दे पर देखने का एक सस्ता मौका हो सकता है।

शुरुआती दिनों में कैसी रही कमाई?

फिल्म ने रिलीज के पहले दिन करीब 5.75 करोड़ रुपये का कारोबार किया। इसके बाद दूसरे दिन कमाई में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली और फिल्म ने लगभग 13.50 करोड़ रुपये जुटाए।

तीसरे दिन फिल्म का कलेक्शन करीब 7.25 करोड़ रुपये रहा। इस तरह शुरुआती तीन दिनों में फिल्म की भारत में कमाई लगभग 26.50 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है, जबकि इसका निर्माण आमिर खान ने किया है। कहानी में भारत के विभाजन से जुड़े दौर और उसके मानवीय पहलुओं को प्रमुखता दी गई है।

फिल्म में सनी देओल के साथ प्रीति जिंटा, शबाना आजमी और करण देओल भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। प्रीति जिंटा ने लंबे समय के बाद बड़े पर्दे पर वापसी की है, जबकि शबाना आजमी के अभिनय को भी दर्शकों की ओर से सराहना मिल रही है।

हेमा मालिनी ने भी की फिल्म की तारीफ

फिल्म देखने के बाद अभिनेत्री और सांसद हेमा मालिनी ने भी इसकी तारीफ की। उन्होंने फिल्म के संदेश को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आज समाज को नफरत और विभाजन से ज्यादा इंसानियत, सम्मान और भाईचारे की जरूरत है।

उनके मुताबिक फिल्म दर्शकों को सकारात्मक सोच अपनाने और आपसी प्रेम एवं सद्भाव को महत्व देने का संदेश देती है।

ऐसे में मंगलवार का 99 रुपये वाला ऑफर फिल्म के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन को बेहतर करने में कितना कामयाब होता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।

Sports News :गॉल टेस्ट जीतने के लिए भारत को लेना होगा बड़ा फैसला, बारिश भी बन सकती है सबसे बड़ी चुनौती

भारत और श्रीलंका के बीच गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले जा रहे टेस्ट मुकाबले में भारतीय टीम ने मजबूत स्थिति बना ली है। मैच के तीन दिन पूरे हो चुके हैं और दोनों टीमें अपनी पहली पारी खेल चुकी हैं। भारत ने पहली पारी में 462 रन बनाए, जबकि श्रीलंका की टीम जवाब में 284 रन पर सिमट गई।

इस प्रदर्शन के दम पर भारतीय टीम को पहली पारी में 178 रन की महत्वपूर्ण बढ़त हासिल हुई है। अब मुकाबले का नतीजा काफी हद तक भारत की दूसरी पारी की रणनीति पर निर्भर करेगा।

भारत को तेजी से रन बनाकर पारी घोषित करनी होगी

अगर टीम इंडिया इस टेस्ट को जीतने के इरादे से मैदान पर उतरती है, तो कप्तान शुभमन गिल और कोच गौतम गंभीर को आक्रामक रणनीति अपनानी पड़ सकती है।

भारत के पास पहले से 178 रन की बढ़त है। ऐसे में बल्लेबाजों का लक्ष्य तेजी से रन बनाकर श्रीलंका के सामने बड़ा लक्ष्य रखना होगा। भारत अगर लगभग 250 रन और जोड़ लेता है, तो उसके पास कुल बढ़त 400 से ज्यादा रन की हो सकती है।

इसके बाद भारतीय टीम पारी घोषित करके श्रीलंका को बल्लेबाजी के लिए बुला सकती है। इससे गेंदबाजों को मुकाबला खत्म करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा।

अगर भारत चौथे दिन का बड़ा हिस्सा बल्लेबाजी में ही लगा देता है, तो श्रीलंका के पास मैच बचाने के लिए कम समय में रक्षात्मक बल्लेबाजी करने का बेहतर मौका होगा। ऐसे में भारतीय टीम को समय और रन के बीच सही संतुलन बनाना बेहद जरूरी होगा।

चौथे दिन विकेट लेना होगा अहम

भारत की जीत के लिए सिर्फ बड़ा लक्ष्य बनाना ही पर्याप्त नहीं होगा। टीम के गेंदबाजों को श्रीलंका की दूसरी पारी की शुरुआत में ही दबाव बनाना होगा।

अगर भारतीय गेंदबाज चौथे दिन श्रीलंका के शुरुआती कुछ विकेट हासिल करने में सफल रहते हैं, तो मेजबान टीम पर दबाव काफी बढ़ सकता है। इसके बाद भारतीय गेंदबाजों के पास अंतिम दिन मुकाबला अपने पक्ष में खत्म करने का मौका रहेगा।

बारिश बिगाड़ सकती है पूरा खेल

इस टेस्ट मैच में मौसम पहले ही कई बार परेशानी पैदा कर चुका है। शुरुआती तीन दिनों में बारिश के कारण खेल प्रभावित हुआ है और दूसरे दिन तो काफी कम ओवर का खेल हो पाया था।

अब चौथे और पांचवें दिन भी बारिश की संभावना मुकाबले के नतीजे पर असर डाल सकती है। अगर महत्वपूर्ण समय बारिश की भेंट चढ़ता है, तो भारत के लिए श्रीलंका को दो बार आउट करना मुश्किल हो सकता है।

इसलिए भारतीय टीम के लिए चुनौती सिर्फ रन बनाने की नहीं, बल्कि बचे हुए समय का सही इस्तेमाल करने की भी होगी। कप्तान और टीम मैनेजमेंट को आक्रामक घोषणा और गेंदबाजी के लिए पर्याप्त समय के बीच सही फैसला लेना होगा।

मुकाबला रोमांचक मोड़ पर

भारत के पास फिलहाल पहली पारी की 178 रन की बढ़त है। ऐसे में टीम मजबूत स्थिति में जरूर है, लेकिन जीत के लिए अगले दो दिनों की रणनीति बेहद महत्वपूर्ण होगी। अगर भारत तेजी से रन बनाकर श्रीलंका को पर्याप्त समय के साथ बल्लेबाजी के लिए उतारता है और गेंदबाज शुरुआती विकेट निकाल लेते हैं, तो मुकाबला भारत के पक्ष में जा सकता है।

भारत-अमेरिका की 1,943 करोड़ की ड्रोन डील, हिंद महासागर में और मजबूत होगी नौसेना की निगरानी

भारत ने समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अमेरिका के साथ एक अहम समझौता किया है। भारतीय नौसेना अगले ढाई साल तक दो MQ-9B SeaGuardian ड्रोन लीज पर इस्तेमाल करेगी। यह समझौता ऐसे समय हुआ है, जब पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रम लगातार चर्चा में हैं।

रक्षा मंत्रालय और अमेरिकी कंपनी General Atomics Aeronautical Systems के बीच सोमवार, 17 अगस्त को दिल्ली के कर्तव्य भवन में समझौता हुआ। इस लीज की अवधि करीब 30 महीने होगी और सौदे की कीमत लगभग 1,943 करोड़ रुपये बताई गई है।

हिंद महासागर में लगातार निगरानी

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक MQ-9B SeaGuardian आधुनिक सेंसर, निगरानी उपकरण और विभिन्न पेलोड से लैस है। लंबे समय तक हवा में रहने की क्षमता के कारण यह ड्रोन समुद्र के बड़े हिस्से पर लगातार नजर रखने में मदद कर सकता है।

भारतीय नौसेना इन ड्रोन का इस्तेमाल समुद्री क्षेत्र में गतिविधियों की निगरानी, जानकारी जुटाने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कर रही है। भारत ने वर्ष 2020 से लीज के जरिए MQ-9B सिस्टम का इस्तेमाल शुरू किया था।

नए समझौते से हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की Maritime Domain Awareness क्षमता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

भारत पहले ही कर चुका है 31 MQ-9B का बड़ा सौदा

भारत और अमेरिका के बीच MQ-9B ड्रोन को लेकर इससे पहले भी बड़ा समझौता हो चुका है। अक्टूबर 2024 में भारत ने अमेरिका से 31 MQ-9B ड्रोन खरीदने का करार किया था।

इनमें से 15 SeaGuardian भारतीय नौसेना के लिए और 16 SkyGuardian थलसेना तथा वायुसेना के लिए प्रस्तावित हैं। SkyGuardian का इस्तेमाल मुख्य रूप से जमीन और सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी के लिए किया जाएगा, जबकि SeaGuardian समुद्री क्षेत्र पर नजर रखने में अहम भूमिका निभाएगा।

इन प्रणालियों की मदद से भारत को सीमावर्ती इलाकों से लेकर हिंद महासागर तक लंबी दूरी की निगरानी क्षमता हासिल होगी।

MQ-9B ड्रोन क्यों है खास?

MQ-9B को सामान्य छोटे ड्रोन से अलग श्रेणी में रखा जाता है। यह एक बड़ा Remotely Piloted Aircraft System (RPAS) है, जिसे जमीन पर मौजूद ऑपरेटर नियंत्रित करते हैं।

इसकी सबसे बड़ी खूबियों में लंबे समय तक लगातार उड़ान भरने की क्षमता शामिल है। इसके कारण किसी इलाके की लंबे समय तक निगरानी की जा सकती है और ऑपरेशन के दौरान लगातार जानकारी हासिल की जा सकती है।

SeaGuardian को विशेष रूप से समुद्री निगरानी अभियानों के लिए तैयार किया गया है। इसमें समुद्री क्षेत्र में जहाजों और दूसरी गतिविधियों की पहचान एवं निगरानी के लिए आधुनिक सेंसर सिस्टम लगाए जा सकते हैं।

चीन के लिए क्यों अहम है भारत की यह क्षमता?

हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की नौसैनिक गतिविधियां पिछले कुछ वर्षों में भारत के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा चिंता बनी हैं। ऐसे में लंबी दूरी तक लगातार निगरानी करने वाले ड्रोन भारतीय नौसेना के लिए रणनीतिक रूप से उपयोगी हो सकते हैं।

इनकी मदद से समुद्री इलाकों में संदिग्ध जहाजों, नौसैनिक गतिविधियों और अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों पर दूर से नजर रखी जा सकती है। इससे भारतीय सेना और नौसेना को किसी संभावित चुनौती पर तेजी से प्रतिक्रिया देने में मदद मिल सकती है।

पश्चिम एशिया के तनाव के बीच ड्रोन पर चर्चा

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच MQ-9 ड्रोन की भूमिका भी चर्चा में रही है। ईरान की ओर से अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को नुकसान पहुंचाने के दावे किए गए हैं। हालांकि ऐसे दावों से जुड़े आंकड़ों को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावे हैं और सभी आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

MQ-9 जैसे महंगे और बड़े ड्रोन आधुनिक युद्ध में निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने के लिए महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म बन चुके हैं।

भारत के लिए दो SeaGuardian ड्रोन की नई लीज डील तत्काल निगरानी क्षमता बढ़ाने का एक व्यावहारिक कदम है। वहीं 31 MQ-9B की पहले से तय खरीद पूरी होने के बाद भारत की लंबी दूरी की निगरानी क्षमता और व्यापक हो सकती है।