भारत ने समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अमेरिका के साथ एक अहम समझौता किया है। भारतीय नौसेना अगले ढाई साल तक दो MQ-9B SeaGuardian ड्रोन लीज पर इस्तेमाल करेगी। यह समझौता ऐसे समय हुआ है, जब पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रम लगातार चर्चा में हैं।
रक्षा मंत्रालय और अमेरिकी कंपनी General Atomics Aeronautical Systems के बीच सोमवार, 17 अगस्त को दिल्ली के कर्तव्य भवन में समझौता हुआ। इस लीज की अवधि करीब 30 महीने होगी और सौदे की कीमत लगभग 1,943 करोड़ रुपये बताई गई है।
हिंद महासागर में लगातार निगरानी
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक MQ-9B SeaGuardian आधुनिक सेंसर, निगरानी उपकरण और विभिन्न पेलोड से लैस है। लंबे समय तक हवा में रहने की क्षमता के कारण यह ड्रोन समुद्र के बड़े हिस्से पर लगातार नजर रखने में मदद कर सकता है।
भारतीय नौसेना इन ड्रोन का इस्तेमाल समुद्री क्षेत्र में गतिविधियों की निगरानी, जानकारी जुटाने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कर रही है। भारत ने वर्ष 2020 से लीज के जरिए MQ-9B सिस्टम का इस्तेमाल शुरू किया था।
नए समझौते से हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की Maritime Domain Awareness क्षमता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
भारत पहले ही कर चुका है 31 MQ-9B का बड़ा सौदा
भारत और अमेरिका के बीच MQ-9B ड्रोन को लेकर इससे पहले भी बड़ा समझौता हो चुका है। अक्टूबर 2024 में भारत ने अमेरिका से 31 MQ-9B ड्रोन खरीदने का करार किया था।
इनमें से 15 SeaGuardian भारतीय नौसेना के लिए और 16 SkyGuardian थलसेना तथा वायुसेना के लिए प्रस्तावित हैं। SkyGuardian का इस्तेमाल मुख्य रूप से जमीन और सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी के लिए किया जाएगा, जबकि SeaGuardian समुद्री क्षेत्र पर नजर रखने में अहम भूमिका निभाएगा।
इन प्रणालियों की मदद से भारत को सीमावर्ती इलाकों से लेकर हिंद महासागर तक लंबी दूरी की निगरानी क्षमता हासिल होगी।
MQ-9B ड्रोन क्यों है खास?
MQ-9B को सामान्य छोटे ड्रोन से अलग श्रेणी में रखा जाता है। यह एक बड़ा Remotely Piloted Aircraft System (RPAS) है, जिसे जमीन पर मौजूद ऑपरेटर नियंत्रित करते हैं।
इसकी सबसे बड़ी खूबियों में लंबे समय तक लगातार उड़ान भरने की क्षमता शामिल है। इसके कारण किसी इलाके की लंबे समय तक निगरानी की जा सकती है और ऑपरेशन के दौरान लगातार जानकारी हासिल की जा सकती है।
SeaGuardian को विशेष रूप से समुद्री निगरानी अभियानों के लिए तैयार किया गया है। इसमें समुद्री क्षेत्र में जहाजों और दूसरी गतिविधियों की पहचान एवं निगरानी के लिए आधुनिक सेंसर सिस्टम लगाए जा सकते हैं।
चीन के लिए क्यों अहम है भारत की यह क्षमता?
हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की नौसैनिक गतिविधियां पिछले कुछ वर्षों में भारत के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा चिंता बनी हैं। ऐसे में लंबी दूरी तक लगातार निगरानी करने वाले ड्रोन भारतीय नौसेना के लिए रणनीतिक रूप से उपयोगी हो सकते हैं।
इनकी मदद से समुद्री इलाकों में संदिग्ध जहाजों, नौसैनिक गतिविधियों और अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों पर दूर से नजर रखी जा सकती है। इससे भारतीय सेना और नौसेना को किसी संभावित चुनौती पर तेजी से प्रतिक्रिया देने में मदद मिल सकती है।
पश्चिम एशिया के तनाव के बीच ड्रोन पर चर्चा
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच MQ-9 ड्रोन की भूमिका भी चर्चा में रही है। ईरान की ओर से अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को नुकसान पहुंचाने के दावे किए गए हैं। हालांकि ऐसे दावों से जुड़े आंकड़ों को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावे हैं और सभी आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
MQ-9 जैसे महंगे और बड़े ड्रोन आधुनिक युद्ध में निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने के लिए महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म बन चुके हैं।
भारत के लिए दो SeaGuardian ड्रोन की नई लीज डील तत्काल निगरानी क्षमता बढ़ाने का एक व्यावहारिक कदम है। वहीं 31 MQ-9B की पहले से तय खरीद पूरी होने के बाद भारत की लंबी दूरी की निगरानी क्षमता और व्यापक हो सकती है।


































