
लखनऊ। सरोजनीनगर में विकास का दायरा अब सड़क, बिजली, जल निकासी और आधुनिक आधारभूत सुविधाओं से आगे बढ़कर धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तक पहुंच रहा है। क्षेत्र के मंदिरों और प्रमुख आस्था केंद्रों के सौंदर्यीकरण, जीर्णोद्धार तथा श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार को लेकर व्यापक स्तर पर कार्य किए जाने की जानकारी सामने आई है। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के प्रयासों से क्षेत्र के 300 से अधिक मंदिरों में CSR के माध्यम से विभिन्न विकास एवं सौंदर्यीकरण कार्य कराए जाने का दावा किया गया है।

इन मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हैंडपंप, सोलर लाइट, बैठने की व्यवस्था, फर्श निर्माण और स्वच्छता संबंधी कार्यों के साथ रंगाई-पुताई भी कराई गई है। इन पहलों का उद्देश्य मंदिर परिसरों को स्वच्छ, सुंदर, सुरक्षित और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाना बताया गया है।
300 से अधिक मंदिरों में सुविधाओं का विस्तार
सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में धार्मिक स्थलों के संरक्षण और विकास के तहत 300 से अधिक मंदिरों में CSR के माध्यम से सुविधाओं का विस्तार कराया गया है। मंदिरों की स्थानीय जरूरतों के अनुसार बुनियादी सुविधाएं विकसित करने के साथ उनके सौंदर्यीकरण पर भी जोर दिया गया है।
इस पहल के तहत मंदिर परिसरों में सोलर लाइट और हैंडपंप जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था, फर्श निर्माण, स्वच्छता संबंधी कार्य और रंगाई-पुताई कराई गई है। इससे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों के स्वरूप में बदलाव के साथ श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलने का दावा किया गया है।
डॉ. राजेश्वर सिंह का कहना है कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना के स्थल नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। ऐसे में इनका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।
प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए करोड़ों की परियोजनाएं
सरोजनीनगर के प्रमुख और प्राचीन धार्मिक स्थलों के व्यापक विकास के लिए शासन स्तर से भी कई परियोजनाओं को वित्तीय स्वीकृति मिलने की जानकारी दी गई है। इन परियोजनाओं के जरिए मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार, सौंदर्यीकरण और श्रद्धालु सुविधाओं का विस्तार किया जाना प्रस्तावित है।
प्रमुख परियोजनाओं में-
- प्राचीन रेतेश्वर महादेव मंदिर के विकास एवं सौंदर्यीकरण के लिए ₹5.30 करोड़
- हरौनी स्थित झाड़ेश्वर महादेव मंदिर के लिए ₹1.05 करोड़
- परवर पश्चिम स्थित श्री महादेव जल साईं नाथ शिवधाम महादेवन मंदिर के लिए ₹98 लाख
- कबीर पंथी दाता साई संत आश्रम के लिए ₹1 करोड़
- परवर पश्चिम स्थित श्री महादेव झलकारी नाथ मंदिर के लिए ₹98 लाख
की वित्तीय स्वीकृति शामिल है।
इन परियोजनाओं के माध्यम से धार्मिक स्थलों की मूल संरचना और सांस्कृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए उन्हें अधिक सुव्यवस्थित और श्रद्धालु-अनुकूल बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
झाड़ेश्वर महादेव मंदिर में एक किलो चांदी का मुकुट अर्पित
धार्मिक स्थलों के संरक्षण और विकास के साथ व्यक्तिगत आस्था से जुड़े कार्य भी किए गए हैं। प्रेस नोट के अनुसार, डॉ. राजेश्वर सिंह ने हरौनी स्थित झाड़ेश्वर महादेव मंदिर में ₹1.11 लाख की लागत से एक किलोग्राम चांदी का मुकुट अर्पित किया है।
यह पहल धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के प्रति व्यक्तिगत समर्पण के रूप में प्रस्तुत की गई है।
‘राम रथ’ से करीब 9 हजार श्रद्धालुओं ने किए श्रीरामलला के दर्शन
सरोजनीनगर में धार्मिक यात्राओं के माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रमुख तीर्थस्थलों के दर्शन कराने का अभियान भी जारी है। सितंबर 2022 में शुरू की गई ‘रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा’ के तहत अब तक 62 बार 150 से अधिक निःशुल्क बसों का संचालन कर लगभग 9 हजार श्रद्धालुओं को अयोध्या में श्रीरामलला के दर्शन कराए जाने का दावा किया गया है।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को उनके घर से लाने और दर्शन के बाद वापस पहुंचाने की व्यवस्था के साथ भोजन, जलपान एवं स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
इसके अतिरिक्त 41 सिख श्रद्धालुओं को अमृतसर-करतारपुर साहिब दर्शन यात्रा भी कराई गई।
राम रथ के बाद अब ‘श्याम रथ’ की तैयारी
आस्था और सेवा के इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए सरोजनीनगर से अब ‘श्याम रथ’ शुरू करने की तैयारी है। जारी जानकारी के अनुसार आगामी 15 और 30 सितंबर को सरोजनीनगर के विभिन्न मंडलों से श्रद्धालुओं के लिए ‘श्याम रथ’ का शुभारंभ किया जाएगा।
इसके पहले चरण में 120 से अधिक श्रद्धालुओं को खाटू श्याम बाबा के दर्शन कराने की योजना है।
आस्था, संस्कृति और सेवा को विकास से जोड़ने की पहल
सरोजनीनगर में मंदिरों के सौंदर्यीकरण और धार्मिक स्थलों के विकास की इन पहलों के जरिए आस्था, संस्कृति और जनसेवा को क्षेत्रीय विकास के साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। 300 से अधिक मंदिरों में CSR के माध्यम से सुविधाओं का विस्तार और प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए करोड़ों रुपये की परियोजनाओं को स्वीकृति मिलने से क्षेत्र की धार्मिक विरासत को नया स्वरूप देने की दिशा में काम आगे बढ़ने की बात कही गई है।
डॉ. राजेश्वर सिंह के अनुसार, धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण केवल वर्तमान पीढ़ी की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी भी है। इसी सोच के साथ सरोजनीनगर में मंदिरों के सौंदर्यीकरण, जीर्णोद्धार, संरक्षण और श्रद्धालु सुविधाओं के विस्तार का अभियान आगे बढ़ाया जा रहा है।


































