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ईरान ने UAE की तरफ दागीं दो मिसाइलें, दुबई में जारी हुआ इमरजेंसी अलर्ट

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) तक भी पहुंचता नजर आ रहा है। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि ईरान की ओर से देश की दिशा में दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। इसके बाद यूएई के एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय किया गया और दुबई के लोगों के मोबाइल फोन पर आपातकालीन मिसाइल चेतावनी भेजी गई।

लोगों से अपील की गई कि वे घबराने के बजाय अधिकारियों की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

एयर डिफेंस ने मिसाइलों को किया इंटरसेप्ट

यूएई के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, देश की ओर बढ़ रहे मिसाइल खतरे का पता एयर डिफेंस सिस्टम ने लगाया। मंत्रालय ने बताया कि इस दौरान सुनाई दी तेज आवाजें मिसाइलों को हवा में ही रोकने की कार्रवाई से जुड़ी थीं।

सरकार ने कहा कि उसकी सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे से निपटने और देश की संप्रभुता, सुरक्षा तथा स्थिरता की रक्षा करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

कुछ समय बाद दूसरा अलर्ट जारी किया गया, जिसमें लोगों को बताया गया कि तत्काल खतरा टल गया है और स्थिति नियंत्रण में है।

एक मिसाइल समुद्री सीमा के बाहर गिरी

यूएई के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि ईरान से दो बैलिस्टिक मिसाइलें उसकी दिशा में लॉन्च की गई थीं। अधिकारियों के अनुसार, इनमें से एक मिसाइल यूएई की समुद्री सीमा से बाहर जाकर गिरी, जबकि दूसरी मिसाइल देश की सीमा के अंदर गिरी।

फिलहाल इस घटना में किसी बड़े नुकसान या हताहत की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। अधिकारियों की ओर से हालात पर नजर रखी जा रही है।

ट्रंप बोले- ईरान से कोई बातचीत नहीं

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की खबरों से इनकार किया है। ट्रंप के मुताबिक, दोनों देशों के बीच फिलहाल कोई वार्ता नहीं चल रही है और न ही किसी बातचीत की योजना बनाई गई है।

ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का भी जिक्र किया और दावा किया कि यह समुद्री मार्ग जहाजों की आवाजाही के लिए खुला है। उन्होंने यह भी कहा कि समुद्र में मौजूद माइंस को हटा दिया गया है।

ईरान के रुख से बढ़ी चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक तनाव के साथ सैन्य गतिविधियों को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच अस्थायी युद्धविराम खत्म होने और बातचीत में गतिरोध के बाद ईरान की ओर से अधिक आक्रामक सैन्य रुख अपनाए जाने के संकेत मिले हैं।

बढ़ते तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। पश्चिम एशिया में स्थिति बिगड़ने की आशंका के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और शेयर बाजारों में दबाव देखने को मिल रहा है।

अगर तनाव और बढ़ता है तो इसका असर ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच अगले कदम पर टिकी हुई है।

Delhi to Agra Trip: मानसून में ताजमहल, आगरा फोर्ट और बेबी ताज घूमें, ऐसे बनाएं एक दिन का शानदार प्लान

अगर दिल्ली की रोजमर्रा की भागदौड़ से थोड़ा ब्रेक लेना चाहते हैं और आपके पास सिर्फ एक दिन की छुट्टी है, तो आगरा एक शानदार विकल्प हो सकता है। दिल्ली से आसानी से पहुंचा जा सकने वाला यह शहर इतिहास, वास्तुकला, खूबसूरत नजारों और स्वादिष्ट खाने के लिए जाना जाता है।

मानसून के दौरान मौसम सुहावना होने पर आगरा की ऐतिहासिक इमारतों का नजारा और भी आकर्षक लग सकता है। अगर समय को सही तरीके से मैनेज किया जाए तो एक दिन में आगरा की कई प्रमुख जगहें देखी जा सकती हैं।

ताजमहल से करें सफर की शुरुआत

आगरा की यात्रा ताजमहल देखे बिना अधूरी मानी जाएगी। सफेद संगमरमर से बनी यह ऐतिहासिक इमारत मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में बनवाई थी।

ताजमहल अपनी खूबसूरत वास्तुकला के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध है और इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में भी शामिल किया गया है। मानसून में बादलों से घिरा आसमान और हल्की फुहारें इसके आसपास के माहौल को और खूबसूरत बना सकती हैं।

सुबह जल्दी पहुंचने पर भीड़ से बचने और आराम से घूमने का बेहतर मौका मिल सकता है।

आगरा फोर्ट की सैर जरूर करें

ताजमहल देखने के बाद अगला पड़ाव आगरा फोर्ट रखा जा सकता है। लाल बलुआ पत्थर से बना यह विशाल किला मुगल काल के इतिहास की कई महत्वपूर्ण कहानियां अपने भीतर समेटे हुए है।

किले के परिसर में महल, बड़े आंगन और कई ऐतिहासिक संरचनाएं देखने को मिलती हैं। आगरा फोर्ट भी यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है।

ताजमहल के आसपास होने के कारण एक ही दिन की यात्रा में दोनों जगहों को शामिल करना सुविधाजनक रहता है।

मेहताब बाग से देखें ताजमहल का अलग रूप

अगर भीड़भाड़ से कुछ समय दूर रहकर ताजमहल का खूबसूरत नजारा देखना चाहते हैं, तो मेहताब बाग जा सकते हैं। यमुना नदी के दूसरी ओर स्थित इस ऐतिहासिक उद्यान से ताजमहल का अलग दृश्य दिखाई देता है।

मानसून के दौरान बादलों और हरियाली के बीच ताजमहल का दृश्य फोटोग्राफी पसंद करने वालों के लिए खास हो सकता है।

‘बेबी ताज’ देखना न भूलें

समय बचा हो तो इत्माद-उद-दौला का मकबरा भी देखा जा सकता है, जिसे आमतौर पर ‘बेबी ताज’ के नाम से जाना जाता है।

सफेद संगमरमर, बारीक नक्काशी और खूबसूरत सजावटी डिजाइन इस मकबरे को खास बनाते हैं। यहां आमतौर पर ताजमहल की तुलना में कम भीड़ देखने को मिल सकती है, इसलिए शांत माहौल में ऐतिहासिक वास्तुकला देखने वालों के लिए यह अच्छी जगह है।

एक दिन में ऐसे बनाएं पूरा ट्रैवल प्लान

अगर आप दिल्ली से एक ही दिन में आगरा घूमकर वापस लौटना चाहते हैं, तो यात्रा का समय पहले से तय करना जरूरी है।

सुबह: दिल्ली से आगरा के लिए रवाना हों और पहुंचने के बाद सबसे पहले ताजमहल जाएं।

दोपहर: ताजमहल के बाद आगरा फोर्ट देखें। इसके बाद स्थानीय भोजन का स्वाद लेते हुए कुछ समय आराम करें।

शाम: मेहताब बाग पहुंचकर ताजमहल का अलग दृश्य देखें।

शाम/शाम के बाद: समय और मौसम अनुकूल हो तो इत्माद-उद-दौला यानी बेबी ताज की यात्रा करें।

रात: सभी जगहें देखने के बाद दिल्ली के लिए वापसी शुरू करें।

मानसून ट्रिप में इन बातों का रखें ध्यान

मानसून में आगरा घूमने से पहले मौसम का पूर्वानुमान जरूर देख लें। बारिश होने की स्थिति में यात्रा का समय प्रभावित हो सकता है। आरामदायक कपड़े और ऐसे जूते पहनें जिनमें चलने में परेशानी न हो।

एक दिन की यात्रा में बहुत ज्यादा जगहें शामिल करने के बजाय कुछ प्रमुख स्थानों पर पर्याप्त समय देना बेहतर रहेगा। साथ ही स्मारकों के प्रवेश समय और टिकट संबंधी जानकारी यात्रा से पहले जांच लेना समझदारी होगी।

अगर आप दिल्ली से कम समय में इतिहास, वास्तुकला और खूबसूरत नजारों का आनंद लेना चाहते हैं, तो आगरा की यह वन-डे ट्रिप मानसून के मौसम में एक यादगार विकल्प बन सकती है।

‘बहुत लंबे हो, एक्टिंग नहीं आती’, अमिताभ बच्चन ने सुनाए अपने संघर्ष के दिनों के कड़वे अनुभव

मुंबई। आज बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारों में शुमार अमिताभ बच्चन ने अपने करियर की शुरुआत आसान परिस्थितियों में नहीं की थी। इंडस्ट्री में जगह बनाने के दौरान उन्हें भी रिजेक्शन और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। हाल ही में ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के 18वें सीजन में उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि शुरुआती दौर में लोग उनकी लंबाई और अभिनय क्षमता को लेकर भी सवाल उठाते थे।

‘तुम्हें एक्टिंग नहीं आती, बहुत लंबे हो’

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की गोल्ड मेडलिस्ट लवलीना बोरगोहेन, जसवंत कुमार, शर्मिला धनकर और अस्मिता डे के साथ बातचीत के दौरान शो में एक सवाल ने अमिताभ बच्चन को अपने शुरुआती करियर की याद दिला दी।

अस्मिता डे ने उनसे पूछा कि जिस तरह खेल के मैदान में गलती करने पर खिलाड़ियों को कोच से डांट सुननी पड़ती है, क्या फिल्म सेट पर कलाकारों को भी निर्देशक की फटकार का सामना करना पड़ता है?

इस पर अमिताभ बच्चन ने अपने संघर्ष के दिनों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि करियर के शुरुआती समय में उन्हें ऐसी बातें सुनने को मिलीं कि उन्हें अभिनय नहीं आता और वह अभिनेता बनने के लिए बहुत लंबे हैं।

उनके मुताबिक, लोगों ने यहां तक कह दिया था कि ‘तुम्हें एक्टिंग-वैक्टिंग कुछ आता ही नहीं, बहुत लंबे हो, अपने घर जाओ।’

देर से पहुंचने पर फिल्म से निकाल दिया गया

अमिताभ बच्चन ने यह भी बताया कि जब उन्हें काम मिलना शुरू हुआ, तब भी मुश्किलें खत्म नहीं हुई थीं। उन्होंने अपने एक पुराने अनुभव को याद करते हुए कहा कि एक बार वह शूटिंग पर पहुंचने में देर हो गए थे।

उन्होंने बताया कि उस समय उनके पास अपनी गाड़ी नहीं थी और वह किसी दूसरे की कार से सेट पर पहुंचे थे। जब वह वहां पहुंचे तो निर्देशक सेट के बाहर मौजूद थे। देरी से पहुंचने पर निर्देशक ने उन्हें फिल्म से ही बाहर कर दिया।

यह किस्सा बताता है कि शुरुआती दौर में अमिताभ बच्चन को काम हासिल करने के साथ-साथ अपनी जगह बनाए रखने के लिए भी कई मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।

आज भी फिल्मों में सक्रिय हैं बिग बी

अमिताभ बच्चन ने अपने लंबे करियर में एक के बाद एक कई यादगार किरदार निभाए और हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। 83 वर्ष की उम्र में भी वह फिल्मों और टेलीविजन से जुड़े हुए हैं।

उन्हें पिछली बार नाग अश्विन की साइंस-फिक्शन फिल्म ‘कल्कि 2898 एडी’ में देखा गया था। फिल्म में प्रभास, दीपिका पादुकोण और कमल हासन भी अहम भूमिकाओं में थे।

अब फिल्म के अगले भाग को लेकर भी दर्शकों की उत्सुकता बनी हुई है, जिसमें अमिताभ बच्चन के किरदार को लेकर फैंस काफी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

Health Tips:रनिंग शुरू करने से पहले इन जरूरी बातों का रखें ध्यान, लापरवाही पड़ सकती है भारी

रनिंग को फिटनेस के लिए सबसे आसान और प्रभावी एक्सरसाइज में से एक माना जाता है। नियमित दौड़ने से शरीर सक्रिय रहता है और कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस बेहतर करने में मदद मिल सकती है। लेकिन हर व्यक्ति के लिए एक जैसी गति और दूरी से दौड़ना सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं है। खासकर बिना तैयारी, तेज गर्मी या शरीर की क्षमता से ज्यादा मेहनत करने पर गंभीर समस्या हो सकती है।

हाल ही में देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) में एक कैडेट के दौड़ते समय अचानक बेहोश होने और बाद में मौत की खबर सामने आई थी। रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा के झज्जर निवासी कैडेट निशांत धनखड़ 9 अगस्त को दौड़ के दौरान बेहोश हुए थे। उन्हें पहले अस्पताल ले जाया गया और बाद में गंभीर हालत में दिल्ली रेफर किया गया, जहां 15 अगस्त को उनकी मौत हो गई। हालांकि, उनकी मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या था, इसकी आधिकारिक पुष्टि के बिना इसे केवल रनिंग या गलत तरीके से दौड़ने का परिणाम मानना सही नहीं होगा।

इस घटना से यह जरूर समझ आता है कि रनिंग करते समय शरीर की क्षमता, मौसम और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।

दौड़ने से पहले शरीर को करें तैयार

सुबह उठते ही बिना किसी तैयारी के तेज दौड़ शुरू करना सही तरीका नहीं है। रनिंग से पहले कुछ मिनट हल्की गतिविधि और वॉर्मअप करें। हल्की वॉक, धीमी जॉगिंग और शरीर को धीरे-धीरे सक्रिय करने वाली एक्सरसाइज मददगार हो सकती हैं।

वॉर्मअप का उद्देश्य शरीर को अचानक अधिक मेहनत के लिए तैयार करना है। खासकर लंबे समय तक दौड़ने या तेज रनिंग से पहले अचानक स्पीड बढ़ाने से बचना चाहिए।

खाना और पानी भी है महत्वपूर्ण

बहुत ज्यादा खाना खाने के तुरंत बाद दौड़ना असहजता पैदा कर सकता है। वहीं लंबे समय तक खाली पेट या पर्याप्त ऊर्जा के बिना कठिन रनिंग करना भी हर व्यक्ति के लिए उचित नहीं होता।

हाइड्रेशन का भी ध्यान रखें। गर्मी या ज्यादा पसीना आने वाली परिस्थितियों में शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी हो सकती है। कितनी मात्रा में पानी चाहिए, यह मौसम, रनिंग की अवधि और व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है।

गर्मी और उमस में रहें सावधान

बहुत गर्म या उमस वाले मौसम में तेज गति से दौड़ने पर शरीर का तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है। इसलिए अत्यधिक गर्मी में दौड़ने से बचना और जरूरत पड़ने पर समय, गति या दूरी कम करना बेहतर है।

गर्मी में सुबह जल्दी या अपेक्षाकृत ठंडे समय पर रनिंग करना अधिक आरामदायक हो सकता है। शरीर में कमजोरी, अत्यधिक पसीना, चक्कर या भ्रम जैसी स्थिति महसूस हो तो तुरंत व्यायाम रोकना चाहिए।

शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें

रनिंग के दौरान शरीर कुछ चेतावनी संकेत दे सकता है। सीने में दर्द या दबाव, अचानक चक्कर, बेहोशी जैसा महसूस होना, असामान्य सांस फूलना, भ्रम या अत्यधिक कमजोरी को सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

ऐसी स्थिति में तुरंत दौड़ना रोकें और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय मदद लें। खासतौर पर सीने में दर्द या बेहोशी होने पर तुरंत मेडिकल जांच जरूरी है।

रनिंग के बाद अचानक न रुकें

लंबी या तेज दौड़ के तुरंत बाद एकदम रुकने के बजाय कुछ मिनट धीमी चाल से चलना बेहतर होता है। इससे शरीर को धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आने का समय मिलता है।

रनिंग की दूरी और गति भी धीरे-धीरे बढ़ाएं। अगर आपने लंबे समय से एक्सरसाइज नहीं की है, तो शुरुआत में बहुत ज्यादा दौड़ने की कोशिश न करें।

कुछ लोगों को पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए

अगर किसी व्यक्ति को पहले से हृदय संबंधी समस्या, सांस की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह या कोई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, तो नियमित और हाई-इंटेंसिटी रनिंग शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

इसी तरह लंबे समय से एक्सरसाइज न करने वाले व्यक्ति को भी अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे शुरुआत करनी चाहिए।

ध्यान रखें

रनिंग सामान्य तौर पर स्वस्थ लोगों के लिए फायदेमंद शारीरिक गतिविधि हो सकती है, लेकिन ज्यादा मेहनत हमेशा ज्यादा फायदा नहीं देती। सही वॉर्मअप, पर्याप्त आराम, मौसम का ध्यान, हाइड्रेशन और शरीर के संकेतों को समझना जरूरी है। किसी गंभीर लक्षण को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सहायता लेना सबसे महत्वपूर्ण है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। इसे व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। यदि रनिंग के दौरान सीने में दर्द, बेहोशी, सांस लेने में गंभीर परेशानी या अन्य चिंताजनक लक्षण हों, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

IIT की सीधी मेंटरशिप से बदलेगा सरोजनीनगर के 1,000 छात्रों का भविष्य : विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह की पहल से क्षेत्र के 8 स्कूलों में शुरू हुआ देश का अनूठा मॉडल

लखनऊ। सरोजनीनगर में शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐसा अभिनव प्रयोग शुरू हुआ है, जो विद्यार्थियों को स्कूल की पढ़ाई से आगे बढ़ाकर IIT विशेषज्ञों, तकनीक, नवाचार और आधुनिक करियर मार्गदर्शन से जोड़ रहा है। विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल पर विधानसभा क्षेत्र के 8 विद्यालयों को IIT विशेषज्ञों एवं IIT के पूर्व विद्यार्थियों की मेंटरशिप से जोड़ा गया है। CSR के माध्यम से संचालित इस पहल से करीब 1,000 विद्यार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

इस पहल की खास बात यह है कि IIT विशेषज्ञ सीधे विद्यालयों से जुड़कर विद्यार्थियों को शिक्षा, तकनीक, नवाचार और करियर के विभिन्न आयामों पर मार्गदर्शन दे रहे हैं। इसे भारत में किसी विधानसभा क्षेत्र के विद्यालयों के साथ IIT विशेषज्ञों की प्रत्यक्ष मेंटरशिप का अपनी तरह का पहला मॉडल बताया गया है।

8 विद्यालयों के विद्यार्थियों को मिलेगा IIT विशेषज्ञों का मार्गदर्शन

IIT मेंटरशिप मॉडल से जुड़े विद्यालयों में एसकेडी एकेडमी, मणिपाल पब्लिक स्कूल, रेड रोज पब्लिक स्कूल, भोंवल कॉन्वेंट स्कूल, शक्ति एकेडमी हाई स्कूल, अनुज सिंह मैनेजमेंट नेशनल पब्लिक इंटर कॉलेज, अवध पब्लिक स्कूल और महामना मालवीय विद्या मंदिर शामिल हैं।

इन विद्यालयों के विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक पाठ्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय उन्हें आधुनिक शिक्षा प्रणाली और विशेषज्ञ मार्गदर्शन से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

24×7 स्मार्ट पढ़ाई से AI आधारित क्विज तक

पहल के तहत विद्यार्थियों को 24×7 स्मार्ट पढ़ाई की सुविधा, AI आधारित प्रश्नोत्तरी, डिजिटल अध्ययन सामग्री और आधुनिक लर्निंग टूल्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को तकनीक के साथ सहज बनाना और पढ़ाई को अधिक इंटरैक्टिव एवं रुचिकर बनाना है।

IIT विशेषज्ञ विद्यार्थियों को कठिन विषयों को समझने, समस्याओं का समाधान खोजने, तकनीकी सोच विकसित करने और भविष्य के करियर विकल्पों को लेकर मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।

परीक्षा परिणाम नहीं, सोच बदलना है लक्ष्य

इस पहल का फोकस केवल विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम बेहतर करने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए उनमें जिज्ञासा, तार्किक चिंतन, समस्या समाधान क्षमता, रचनात्मकता और नवाचार की भावना विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

उद्देश्य यह है कि सरोजनीनगर के विद्यार्थी IIT, रिसर्च, टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप, उद्यमिता और अन्य अग्रणी क्षेत्रों में बड़े लक्ष्य निर्धारित करें और उन्हें हासिल करने के लिए शुरुआती स्तर से ही सही मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें।

डॉ. राजेश्वर सिंह के अनुसार, ये विद्यार्थी केवल परीक्षार्थी नहीं, बल्कि सरोजनीनगर और उत्तर प्रदेश के भविष्य के बदलाव लाने वाले हैं। आने वाले समय में यही विद्यार्थी नवाचारी, पेशेवर, उद्यमी और शोधकर्ता बनकर प्रदेश के विकास में योगदान दे सकते हैं।

37 स्कूल-कॉलेजों में 450+ कंप्यूटर, 30 हजार से अधिक विद्यार्थियों को लाभ

सरोजनीनगर में शिक्षा के आधुनिकीकरण को लेकर अन्य स्तरों पर भी पहल किए जाने की जानकारी दी गई है। क्षेत्र के 37 विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में 450 से अधिक कंप्यूटर उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे 30,000 से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं।

इसके अलावा 44 विद्यालयों में इंटरैक्टिव डिजिटल बोर्ड लगाए गए हैं। बाल सेवा योजना के माध्यम से 550 से अधिक बच्चों को लाभ मिलने की जानकारी भी दी गई है।

शिक्षा के बुनियादी स्तर पर भी सरोजनीनगर ने उपलब्धि हासिल की है। निपुण अभियान के तहत सरोजनीनगर के प्राथमिक विद्यालयों ने लखनऊ जनपद में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

शिक्षा से भविष्य निर्माण तक का मॉडल

सरोजनीनगर में शुरू की गई IIT मेंटरशिप पहल को शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक, विशेषज्ञता और अवसरों के बीच की दूरी कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

डॉ. राजेश्वर सिंह का लक्ष्य शिक्षा को केवल भवन, कंप्यूटर और डिजिटल बोर्ड जैसी आधारभूत सुविधाओं तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों को श्रेष्ठ मार्गदर्शन, तकनीकी ज्ञान, व्यापक अनुभव और बड़े सपने देखने का आत्मविश्वास देना है।

IIT विशेषज्ञों की मेंटरशिप से जुड़े 8 विद्यालयों के करीब 1,000 विद्यार्थियों के लिए यह पहल आने वाले वर्षों में उनके शैक्षिक और करियर सफर को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है। सरोजनीनगर में शिक्षा का यह मॉडल यदि अपेक्षित परिणाम देता है, तो यह अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक प्रभावी उदाहरण बन सकता है।