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‘नागिन’ की होगी सिल्वर स्क्रीन पर एंट्री, एकता कपूर ने किया फिल्म का ऐलान; नई नागिन कौन बनेगी?

मुंबई। टीवी की चर्चित फ्रैंचाइजी ‘नागिन’ अब छोटे पर्दे से निकलकर सिनेमाघरों तक पहुंचने की तैयारी में है। कई सालों से दर्शकों का मनोरंजन कर रही इस फ्रैंचाइजी को अब फिल्म के रूप में पेश किया जाएगा। एकता कपूर ने नाग पंचमी के अवसर पर इस प्रोजेक्ट की घोषणा की है।

हालांकि, फिल्म को लेकर अभी कई अहम जानकारियां सामने नहीं आई हैं। नई ‘नागिन’ का किरदार कौन निभाएगा, फिल्म की कहानी क्या होगी और इसे कब रिलीज किया जाएगा, इन सवालों के जवाब फिलहाल सामने नहीं आए हैं।

11 साल का सफर अब फिल्मों तक पहुंचा

एकता कपूर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें ‘नागिन’ के अलग-अलग सीजन की झलक देखने को मिली। वीडियो के जरिए फ्रैंचाइजी के टीवी सफर को याद किया गया और इसके बाद इसे बड़े पर्दे पर लाने की घोषणा की गई।

एकता कपूर ने अपने पोस्ट में बताया कि करीब 11 साल तक छोटे पर्दे पर दर्शकों का मनोरंजन करने के बाद अब बालाजी टेलीफिल्म्स इस फ्रैंचाइजी को एक नए माध्यम में लेकर जाने की तैयारी कर रहा है।

नाग पंचमी के मौके पर किए गए इस ऐलान के बाद शो के प्रशंसकों में फिल्म को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।

सबसे बड़ा सवाल- कौन बनेगी नई नागिन?

फिल्म की घोषणा होते ही दर्शकों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि मुख्य भूमिका किस अभिनेत्री को मिलेगी। मेकर्स ने अभी तक लीड एक्ट्रेस के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म के लिए किसी लोकप्रिय बॉलीवुड अभिनेत्री को चुना जाता है या फिर टीवी की किसी चर्चित कलाकार को बड़े पर्दे पर नागिन के रूप में पेश किया जाता है।

मौनी रॉय से शुरू हुआ था सफर

‘नागिन’ फ्रैंचाइजी की शुरुआत 2015 में हुई थी। पहले सीजन में मौनी रॉय ने मुख्य किरदार निभाकर खूब लोकप्रियता हासिल की थी। उनके साथ अर्जुन बिजलानी भी अहम भूमिका में नजर आए थे।

शो की सफलता के बाद इसके नए सीजन लगातार आते रहे और हर बार नागिन के किरदार में अलग-अलग अभिनेत्रियों को देखने का मौका मिला। दूसरे सीजन में भी मौनी रॉय ने यह भूमिका निभाई। इसके बाद सुरभि ज्योति, निया शर्मा, सुरभि चंदना और तेजस्वी प्रकाश जैसी अभिनेत्रियां इस फ्रैंचाइजी का हिस्सा बनीं।

सातवें सीजन में भी दिखे कई चर्चित चेहरे

फ्रैंचाइजी के सातवें सीजन में प्रियंका चाहर चौधरी, ईशा सिंह, नमिक पॉल और कनिका मान समेत कई कलाकार नजर आए। इस सीजन का प्रसारण 2025 में शुरू हुआ था और जून 2026 में इसका सफर समाप्त हुआ।

अब टीवी पर लंबे सफर के बाद ‘नागिन’ की कहानी को फिल्म के रूप में पेश किए जाने की तैयारी है।

कास्ट और रिलीज डेट का इंतजार

फिलहाल मेकर्स की ओर से फिल्म के टाइटल के अलावा मुख्य कलाकारों, कहानी और रिलीज डेट को लेकर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है। इसलिए नई नागिन कौन होगी, यह अभी सस्पेंस बना हुआ है।

फिल्म की आधिकारिक कास्ट सामने आने के बाद ही यह साफ होगा कि एकता कपूर की इस लोकप्रिय फ्रैंचाइजी का सिनेमाई रूप दर्शकों के लिए कितना अलग और खास होने वाला है।

Blue Space Therapy: पानी के पास समय बिताने से कम हो सकता है तनाव, जानें क्या है यह तरीका

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में काम का दबाव, लगातार स्क्रीन पर समय बिताना, नींद की कमी और बदलती जीवनशैली के कारण तनाव और मानसिक थकान आम होती जा रही है। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए केवल दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय व्यायाम, मेडिटेशन और प्रकृति के संपर्क जैसी गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जाता है। इन्हीं में से एक अवधारणा है Blue Space Therapy, जिसमें समुद्र, नदी, झील या अन्य जल स्रोतों के आसपास समय बिताने को मानसिक स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना जाता है।

हालांकि, इसे डिप्रेशन या किसी मानसिक बीमारी का स्थापित इलाज समझना सही नहीं है। गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या होने पर विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

क्या है Blue Space Therapy?

‘Blue Space’ का मतलब ऐसे प्राकृतिक स्थानों से है जहां पानी मौजूद हो, जैसे समुद्र, झील, नदी या तालाब। इन जगहों पर समय बिताना, पानी को देखना, उसके आसपास टहलना या शांत वातावरण में कुछ समय गुजारना तनाव और मानसिक थकान कम करने में मदद कर सकता है।

शोध में प्राकृतिक वातावरण और पानी के संपर्क को बेहतर मूड, कम तनाव और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कुछ सकारात्मक प्रभावों से जोड़ा गया है। हालांकि, इसका असर हर व्यक्ति पर एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है।

पानी के आसपास रहने से क्यों मिल सकता है सुकून?

पानी का शांत वातावरण व्यक्ति को कुछ समय के लिए रोजमर्रा के शोर और डिजिटल दुनिया से दूरी बनाने का अवसर देता है। समुद्र की लहरों की आवाज, नदी का बहाव या झील का शांत वातावरण मन को रिलैक्स करने में मदद कर सकता है।

इसके साथ अगर व्यक्ति कुछ समय मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों से दूरी बनाकर प्रकृति में बिताता है, तो मानसिक थकान कम करने में अतिरिक्त मदद मिल सकती है।

‘Blue Mind’ किताब से मिली चर्चा

Blue Space की अवधारणा को लोकप्रिय बनाने में मरीन बायोलॉजिस्ट वालेस जे. निकोलस की किताब Blue Mind का भी योगदान रहा है। किताब में पानी के आसपास रहने और इंसानी दिमाग तथा भावनाओं के बीच संबंध पर चर्चा की गई है।

इस अवधारणा के अनुसार पानी के संपर्क में रहने से व्यक्ति अधिक शांत और सकारात्मक महसूस कर सकता है। तनाव से जुड़े हार्मोन और शरीर की तनाव प्रतिक्रिया पर भी प्रकृति के शांत वातावरण का प्रभाव पड़ सकता है, हालांकि इसे किसी बीमारी के सीधे इलाज के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

पानी के अंदर की गतिविधियों का भी बढ़ रहा इस्तेमाल

Blue Space से जुड़ी गतिविधियां केवल पानी के किनारे समय बिताने तक सीमित नहीं हैं। कुछ जगहों पर स्कूबा डाइविंग, फ्री-डाइविंग, तैराकी, ब्रीदवर्क और मेडिटेशन जैसी गतिविधियों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल किया जाता है।

पानी में शरीर को हल्केपन या लगभग भारहीनता जैसा अनुभव मिल सकता है। इससे कुछ लोगों को शारीरिक और मानसिक रूप से आराम महसूस हो सकता है। हालांकि, पानी के अंदर की गतिविधियां प्रशिक्षित लोगों की निगरानी और उचित सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही करनी चाहिए।

क्या डिप्रेशन का इलाज है Blue Space Therapy?

यह समझना जरूरी है कि Blue Space Therapy को डिप्रेशन, एंग्जायटी या ट्रॉमा का विकल्प या निश्चित इलाज नहीं माना जाना चाहिए। प्रकृति और पानी के आसपास समय बिताना तनाव कम करने और मानसिक स्वास्थ्य को सपोर्ट करने वाली गतिविधि हो सकती है, लेकिन गंभीर लक्षण होने पर मनोचिकित्सक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से उचित उपचार लेना जरूरी है।

अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक उदासी, अत्यधिक चिंता, नींद में लगातार परेशानी, रोजमर्रा के कामों में रुचि खत्म होना या खुद को नुकसान पहुंचाने जैसे विचार आते हैं, तो केवल किसी थेरेपी या लाइफस्टाइल बदलाव पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत पेशेवर मदद लेनी चाहिए।

Sports Update:कैमरा घूमते ही दिखा टीम इंडिया का रणनीति बोर्ड, गंभीर के प्लान पर उठे सवाल; जानें क्या था लिखा

गॉल। भारत और श्रीलंका के बीच खेले जा रहे टेस्ट मुकाबले के चौथे दिन एक वीडियो ने क्रिकेट फैंस का ध्यान खींच लिया। मैच के दौरान टीवी कैमरा ड्रेसिंग रूम के आसपास के हिस्से की ओर गया, जहां भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर नजर आए। उनके पास रखा एक व्हाइटबोर्ड भी कैमरे में दिखाई दिया, जिस पर टीम से जुड़ी कुछ अहम जानकारियां लिखी नजर आईं।

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई कि क्या टीम की रणनीति से जुड़ी जानकारी इस तरह कैमरे के सामने आनी चाहिए।

व्हाइटबोर्ड पर क्या दिखाई दिया?

कैमरे से रिकॉर्ड हुए फुटेज में व्हाइटबोर्ड पर लिखी पूरी जानकारी स्पष्ट रूप से पढ़ी नहीं जा सकी। हालांकि, कुछ खिलाड़ियों के नाम या उनके संक्षिप्त रूप और स्कोर जैसी जानकारियां दिखाई देती हैं।

ऐसा भी नजर आया कि कुछ खिलाड़ियों के आउट होने के स्कोर को नोट किया गया था। हालांकि, बोर्ड पर लिखी सभी चीजें स्पष्ट नहीं होने के कारण उसके आधार पर टीम की पूरी रणनीति के बारे में निश्चित तौर पर कुछ कहना मुश्किल है।

फुटेज सामने आने के बाद यह सवाल जरूर उठ रहा है कि टीम के अंदर इस्तेमाल होने वाले रणनीतिक नोट्स को कैमरे की पहुंच से दूर रखना चाहिए। खासकर टेस्ट मैच जैसे मुकाबलों में विपक्षी टीम को किसी भी तरह की अतिरिक्त जानकारी मिलने से बचाने के लिए ऐसी चीजों की गोपनीयता महत्वपूर्ण होती है।

चौथे दिन भारत ने श्रीलंका को दिया 372 रन का लक्ष्य

मैच की बात करें तो चौथे दिन भारतीय टीम अपनी दूसरी पारी में 193 रन पर सिमट गई। विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत ने 66 रन की अहम पारी खेली और भारत की ओर से दूसरी पारी में सबसे ज्यादा रन बनाए।

भारत ने पहली पारी के प्रदर्शन के आधार पर श्रीलंका के सामने 372 रन का लक्ष्य रखा।

लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम ने दिन का खेल समाप्त होने तक 4 विकेट पर 84 रन बना लिए थे। कप्तान धनंजय डी सिल्वा 31 रन और सोनल दिनुशा 25 रन बनाकर नाबाद रहे।

भारत की ओर से मानव सुथार ने दो विकेट हासिल किए, जबकि मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा को एक-एक सफलता मिली।

अब भारत को जीत के लिए चाहिए 6 विकेट

श्रीलंका को मुकाबला जीतने के लिए आखिरी दिन अभी 288 रन बनाने होंगे, जबकि भारतीय टीम को जीत दर्ज करने के लिए श्रीलंका के छह विकेट हासिल करने हैं।

ऐसे में टेस्ट का आखिरी दिन बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है। श्रीलंका के सामने बड़ा लक्ष्य है और भारत के पास जीत हासिल करने के लिए छह विकेट लेने का मौका। अब मुकाबले का परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि श्रीलंकाई बल्लेबाज भारतीय गेंदबाजों का कितना सामना कर पाते हैं।

मेहंदी लगे हाथ से खाना खाना कितना सही? जानिए सेहत पर क्या पड़ सकता है असर

सावन, त्योहार या शादी-ब्याह के मौकों पर हाथों में मेहंदी लगाना आम बात है। मेहंदी लगने के बाद कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या मेहंदी लगे हाथों से खाना खाने या भोजन बनाने से सेहत पर कोई बुरा असर पड़ सकता है।

आमतौर पर प्राकृतिक और शुद्ध हिना (मेहंदी) को त्वचा पर इस्तेमाल करने से कोई खास स्वास्थ्य जोखिम नहीं माना जाता। लेकिन बाजार में मिलने वाली कुछ मेहंदी में रंग को जल्दी और ज्यादा गहरा करने के लिए केमिकल मिलाए जा सकते हैं। खासतौर पर तथाकथित ब्लैक हिना में PPD (पैराफेनिलीनडायमीन) जैसे रसायन पाए जा सकते हैं, जो त्वचा पर एलर्जी, जलन, लालिमा या छाले जैसी प्रतिक्रिया पैदा कर सकते हैं।

क्या मेहंदी लगे हाथ से खाना खाने से बीमारी हो सकती है?

सिर्फ प्राकृतिक मेहंदी लगी होने के कारण खाना खाने से गंभीर बीमारी होने की आशंका आम तौर पर नहीं होती। असली समस्या हाथों की स्वच्छता से जुड़ी हो सकती है।

मेहंदी के कारण हाथों की त्वचा और उंगलियों के बीच की जगह को ठीक से साफ करना मुश्किल हो सकता है। अगर हाथों पर धूल, गंदगी या हानिकारक बैक्टीरिया मौजूद हैं और बिना अच्छी तरह हाथ साफ किए खाना खाया जाता है, तो संक्रमण या पेट से जुड़ी परेशानी का जोखिम बढ़ सकता है।

इसलिए पेट दर्द, उल्टी या दस्त होने की वजह सीधे मेहंदी को मान लेना सही नहीं होगा। कई मामलों में खराब स्वच्छता इसका कारण हो सकती है।

केमिकल वाली मेहंदी से रहें सावधान

अगर मेहंदी में PPD जैसे रसायन मौजूद हैं, तो इससे त्वचा संबंधी समस्या होने का खतरा रहता है। ऐसे उत्पादों से कुछ लोगों को तेज खुजली, जलन, लाल चकत्ते या सूजन हो सकती है।

इसलिए ऐसी मेहंदी का इस्तेमाल करने से बचना बेहतर है जिसकी सामग्री और गुणवत्ता के बारे में जानकारी न हो। खासतौर पर बहुत जल्दी गहरा रंग देने का दावा करने वाली ब्लैक हिना से सावधानी बरतनी चाहिए।

मेहंदी लगे हाथों से खाना हो तो इन बातों का रखें ध्यान

  • मेहंदी लगवाने से पहले और बाद में हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखें।
  • भोजन करने से पहले हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह साफ करें।
  • उंगलियों के बीच और नाखूनों के आसपास की जगह को भी साफ करें।
  • मेहंदी अगर अभी गीली है या उससे रंग/पेस्ट निकल रहा है, तो सीधे हाथ से खाना खाने से बचें।
  • भोजन बनाने से पहले भी हाथ अच्छी तरह धोएं।
  • त्वचा पर जलन, खुजली, सूजन या लाल चकत्ते दिखाई दें तो मेहंदी का इस्तेमाल बंद करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें।

निष्कर्ष

प्राकृतिक मेहंदी लगी होने से खाना खाना अपने आप में खतरनाक नहीं माना जाता। ज्यादा महत्वपूर्ण है कि हाथ साफ हों और इस्तेमाल की गई मेहंदी में हानिकारक रसायन न हों। अगर मेहंदी लगाने के बाद हाथों में किसी तरह की एलर्जी या असामान्य प्रतिक्रिया दिखाई देती है, तो इसे नजरअंदाज न करें।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। किसी गंभीर लक्षण, एलर्जी या स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में योग्य डॉक्टर से सलाह लें।

Sports News:ऋषभ पंत ने रचा इतिहास, टेस्ट क्रिकेट में 100 छक्के लगाने वाले पहले भारतीय बने

गॉल। श्रीलंका के खिलाफ खेले जा रहे पहले टेस्ट में भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत ने एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। पंत ने मैच में दो छक्के लगाते ही टेस्ट क्रिकेट में 100 छक्के पूरे कर लिए। इसके साथ ही वह टेस्ट इतिहास में इस आंकड़े तक पहुंचने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बन गए हैं।

पंत ने सिर्फ भारतीय क्रिकेट में ही नहीं, बल्कि टेस्ट क्रिकेट के आंकड़ों में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने सबसे कम गेंदों में 100 टेस्ट छक्के पूरे करने का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया।

टेस्ट में 100 छक्के लगाने वाले पहले भारतीय

भारत ने 1932 में टेस्ट क्रिकेट में कदम रखा था, लेकिन करीब नौ दशक के सफर में कोई भी भारतीय बल्लेबाज इस फॉर्मेट में छक्कों का शतक नहीं लगा सका था।

ऋषभ पंत ने इस इंतजार को खत्म कर दिया। उनसे पहले वीरेंद्र सहवाग ने टेस्ट में 91 छक्के लगाए थे, जबकि रोहित शर्मा के नाम 88 छक्के हैं। रवींद्र जडेजा भी 82 छक्कों के साथ इस सूची में शामिल हैं।

भारत के लिए टेस्ट में सबसे ज्यादा छक्के

  1. ऋषभ पंत – 100 छक्के
  2. वीरेंद्र सहवाग – 91 छक्के
  3. रोहित शर्मा – 88 छक्के
  4. रवींद्र जडेजा – 82 छक्के

सबसे कम गेंदों में छक्कों का शतक

पंत की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 100 छक्के सबसे कम गेंदों में पूरे किए हैं। उन्होंने यह आंकड़ा 4,918 गेंदों में हासिल किया।

इस मामले में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज एडम गिलक्रिस्ट दूसरे स्थान पर हैं। उन्होंने 100 टेस्ट छक्के पूरे करने के लिए 6,578 गेंदों का सामना किया था।

100 टेस्ट छक्के पूरे करने में सबसे कम गेंद

  • ऋषभ पंत – 4,918 गेंद
  • एडम गिलक्रिस्ट – 6,578 गेंद
  • बेन स्टोक्स – 9,042 गेंद
  • ब्रेंडन मैक्कुलम – 9,756 गेंद

पंत की आक्रामक बल्लेबाजी शैली को देखते हुए यह रिकॉर्ड उनके खेलने के अंदाज को भी दर्शाता है। वह टेस्ट क्रिकेट में भी जरूरत के मुताबिक बड़े शॉट खेलने के लिए जाने जाते हैं।

विकेटकीपर बल्लेबाज के तौर पर भी बड़ा रिकॉर्ड

ऋषभ पंत का टेस्ट क्रिकेट में प्रदर्शन कई मायनों में खास रहा है। वह भारत की ओर से टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले विकेटकीपर बल्लेबाज भी हैं।

पंत के नाम अब तक टेस्ट क्रिकेट में 8 शतक हैं। इस मामले में पूर्व भारतीय कप्तान और विकेटकीपर बल्लेबाज एमएस धोनी छह शतकों के साथ उनके पीछे हैं।

51 टेस्ट में बना चुके हैं 3,662 रन

पंत ने अपने टेस्ट करियर में अब तक 51 मुकाबले खेले हैं। इन मैचों में उन्होंने 3,662 रन बनाए हैं। उनके नाम आठ शतक के अलावा 20 अर्धशतक भी दर्ज हैं।

टेस्ट क्रिकेट में पंत का आक्रामक अंदाज भारत के लिए कई मौकों पर मैच का रुख बदल चुका है। 100 छक्कों का आंकड़ा हासिल करना उनके इसी आक्रामक खेल की एक और बड़ी मिसाल है।