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Travel Tips: Ha Long Bay से Da Nang तक, भारतीयों के बीच क्यों बढ़ रहा वियतनाम घूमने का क्रेज?

विदेश घूमने का प्लान बना रहे भारतीय यात्रियों के बीच वियतनाम तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। खूबसूरत समुद्र तट, पहाड़, ऐतिहासिक जगहें, स्वादिष्ट खाना और समृद्ध संस्कृति के साथ यहां घूमने के कई विकल्प मिलते हैं। खास बात यह है कि दूसरे कई विदेशी डेस्टिनेशन की तुलना में वियतनाम में भारतीय पर्यटकों को यात्रा का खर्च अपेक्षाकृत कम महसूस हो सकता है।

अगर आप पहली बार वियतनाम जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो यात्रा से पहले कुछ जरूरी बातों की जानकारी आपके लिए काफी उपयोगी हो सकती है।

भारतीयों के लिए ई-वीजा की सुविधा

वियतनाम जाने वाले भारतीय यात्रियों के लिए ऑनलाइन ई-वीजा की सुविधा उपलब्ध है। इसके चलते आवेदन प्रक्रिया काफी सुविधाजनक हो सकती है और यात्रियों को वीजा के लिए बार-बार कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ती।

आवेदन करते समय पासपोर्ट से जुड़ी जानकारी, फोटो और अन्य जरूरी व्यक्तिगत विवरण मांगे जा सकते हैं। यात्रा की तारीख नजदीक आने तक इंतजार करने के बजाय पहले से आवेदन करना बेहतर रहता है, ताकि किसी तरह की तकनीकी या दस्तावेज संबंधी परेशानी होने पर उसे समय रहते ठीक किया जा सके।

बजट में घूमने का मौका

वियतनाम की मुद्रा वियतनामी डोंग (VND) है। इसकी एक यूनिट की कीमत भारतीय रुपये के मुकाबले काफी कम है, हालांकि वास्तविक विनिमय दर रोज बदलती रहती है।

यही वजह है कि भारतीय यात्रियों को स्थानीय परिवहन, भोजन, स्ट्रीट फूड और कई रोजमर्रा के खर्च अपेक्षाकृत किफायती लग सकते हैं। हालांकि होटल, फ्लाइट और पर्यटन गतिविधियों का खर्च आपके शहर, सीजन और यात्रा के स्तर पर काफी निर्भर करता है।

इसलिए यात्रा से पहले सिर्फ करेंसी की वैल्यू देखकर बजट तय करने के बजाय होटल, फ्लाइट, स्थानीय ट्रांसपोर्ट और घूमने वाली जगहों की टिकटों का खर्च भी जोड़ना चाहिए।

Ha Long Bay की प्राकृतिक खूबसूरती

वियतनाम की यात्रा में Ha Long Bay को शामिल करना शानदार अनुभव हो सकता है। समुद्र के बीच उभरती चूना-पत्थर की विशाल चट्टानें और आसपास का प्राकृतिक नजारा इसे देश के सबसे चर्चित पर्यटन स्थलों में शामिल करते हैं।

यहां नाव या क्रूज के जरिए आसपास के इलाकों को देखने का अनुभव लिया जा सकता है। प्रकृति और फोटोग्राफी पसंद करने वाले यात्रियों के लिए यह जगह खास आकर्षण रखती है।

Da Nang में बीच और एडवेंचर

Da Nang समुद्र किनारे छुट्टियां बिताने वालों के लिए बेहतरीन विकल्प है। यहां खूबसूरत बीच के अलावा आसपास कई प्राकृतिक और दर्शनीय स्थल भी हैं।

यात्रियों को यहां समुद्र के किनारे आराम करने के साथ-साथ आसपास के पर्यटन स्थलों को एक्सप्लोर करने का मौका मिलता है। अगर आप रिलैक्सेशन और एडवेंचर दोनों का मजा लेना चाहते हैं तो Da Nang को अपनी ट्रिप में शामिल कर सकते हैं।

Hanoi में करीब से समझें वियतनामी संस्कृति

वियतनाम की राजधानी Hanoi देश की संस्कृति और इतिहास को करीब से जानने का मौका देती है। पुराने इलाकों की गलियां, स्थानीय बाजार, पारंपरिक खान-पान और ऐतिहासिक स्थलों के कारण यहां का अनुभव बाकी पर्यटन शहरों से अलग हो सकता है।

जो लोग सिर्फ समुद्र तट पर छुट्टियां बिताने के बजाय स्थानीय जीवन और संस्कृति को समझना चाहते हैं, उनके लिए Hanoi अच्छा विकल्प है।

Ho Chi Minh City में शॉपिंग और नाइटलाइफ

Ho Chi Minh City वियतनाम के सबसे व्यस्त और आधुनिक शहरों में से एक है। यहां शॉपिंग, स्थानीय बाजार, कैफे, स्ट्रीट फूड और शहर की नाइटलाइफ का अनुभव लिया जा सकता है।

यहां घूमते समय स्थानीय बाजारों में खरीदारी करते हुए कीमतों की तुलना करना और सामान खरीदने से पहले मोलभाव करना भी उपयोगी हो सकता है।

एक ही ट्रिप में अलग-अलग अनुभव

वियतनाम की खासियत यह है कि एक ही देश में यात्रियों को समुद्र, पहाड़, गुफाएं, नदियां, ऐतिहासिक स्थल और आधुनिक शहर देखने को मिल जाते हैं।

आप अपनी रुचि के हिसाब से Ha Long Bay, Hanoi, Da Nang और Ho Chi Minh City जैसे अलग-अलग डेस्टिनेशन को यात्रा कार्यक्रम में शामिल कर सकते हैं।

यात्रा से पहले मौसम, वीजा नियम, उड़ानों की कीमत और स्थानीय परिवहन की जानकारी जरूर जांच लें। करेंसी की विनिमय दर भी यात्रा के समय दोबारा चेक करें, क्योंकि इसमें लगातार बदलाव होता रहता है।

Health Update:एंग्जायटी लेवल 3 क्या होता है? जानिए GAD-7 स्कोर का मतलब और भारत समेत दुनिया में कितने लोग प्रभावित

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में काम का दबाव, रिश्तों से जुड़ी परेशानियां, आर्थिक चिंता और भविष्य को लेकर असुरक्षा जैसी कई वजहों से लोग तनाव और बेचैनी महसूस करते हैं। लेकिन हर व्यक्ति में चिंता की तीव्रता एक जैसी नहीं होती। इसे समझने के लिए डॉक्टर अक्सर GAD-7 (Generalized Anxiety Disorder-7) जैसे स्क्रीनिंग टूल का इस्तेमाल करते हैं।

GAD-7 में सात सवाल होते हैं और इनके जवाबों के आधार पर 0 से 21 तक स्कोर मिलता है। स्कोर बढ़ने के साथ चिंता के लक्षणों की गंभीरता भी बढ़ती मानी जाती है।

GAD-7 में स्कोर के चार स्तर

  • 0 से 4: न्यूनतम चिंता
  • 5 से 9: हल्की चिंता
  • 10 से 14: मध्यम स्तर की चिंता
  • 15 से 21: गंभीर स्तर की चिंता

इसलिए अगर किसी व्यक्ति का स्कोर 10 से 14 के बीच आता है, तो उसे मध्यम स्तर की एंग्जायटी की श्रेणी में रखा जाता है। इस स्तर पर चिंता रोजमर्रा के काम, पढ़ाई, नौकरी या व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित कर सकती है।

हालांकि, केवल GAD-7 स्कोर के आधार पर किसी व्यक्ति को एंग्जायटी डिसऑर्डर होने की पुष्टि नहीं की जा सकती। सही स्थिति जानने के लिए डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ का मूल्यांकन जरूरी होता है।

एंग्जायटी लेवल 3 का क्या मतलब है?

आम बोलचाल में जिस स्थिति को कई लोग ‘एंग्जायटी लेवल 3’ कहते हैं, वह GAD-7 की 10-14 स्कोर वाली मध्यम श्रेणी से संबंधित हो सकती है।

इस दौरान व्यक्ति को बार-बार चिंता होना, बेचैनी, किसी अनहोनी की आशंका, ध्यान लगाने में परेशानी, चिड़चिड़ापन या आराम करने में कठिनाई जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। कुछ लोगों में इनका असर दैनिक गतिविधियों पर भी पड़ने लगता है।

यह जरूरी नहीं कि 10-14 का स्कोर आते ही व्यक्ति को GAD हो। यह एक स्क्रीनिंग स्कोर है, अंतिम चिकित्सकीय निदान नहीं।

दुनिया में कितने लोग एंग्जायटी से प्रभावित हैं?

एंग्जायटी डिसऑर्डर दुनिया की बड़ी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल हैं। अलग-अलग वर्षों और शोध पद्धतियों के आधार पर इसके आंकड़ों में अंतर देखने को मिलता है।

उपलब्ध वैश्विक अध्ययनों में करोड़ों लोगों के एंग्जायटी डिसऑर्डर से प्रभावित होने का अनुमान लगाया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों में भी दुनिया भर में करोड़ों लोगों के एंग्जायटी से प्रभावित होने की बात सामने आई है।

इन आंकड़ों को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि ‘एंग्जायटी महसूस करना’ और ‘एंग्जायटी डिसऑर्डर होना’ एक ही बात नहीं है। रोजमर्रा की जिंदगी में कभी-कभार चिंता होना सामान्य अनुभव हो सकता है, जबकि डिसऑर्डर में लक्षण लंबे समय तक बने रह सकते हैं और कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं।

भारत में एंग्जायटी की स्थिति

भारत में एंग्जायटी से जुड़े आंकड़े अलग-अलग अध्ययनों में अलग दिखाई देते हैं। कुछ पुराने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में देश में करोड़ों लोगों के एंग्जायटी डिसऑर्डर से प्रभावित होने का अनुमान लगाया गया है।

युवा आबादी में पढ़ाई, नौकरी, आर्थिक दबाव, सामाजिक अपेक्षाओं और व्यक्तिगत रिश्तों से जुड़ी चिंताएं मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं। महिलाओं और पुरुषों में भी एंग्जायटी की दर अलग-अलग अध्ययनों में अलग पाई गई है।

हालांकि, किसी व्यक्ति को केवल किसी आंकड़े या इंटरनेट पर मौजूद टेस्ट के आधार पर खुद को मानसिक बीमारी से ग्रस्त नहीं मानना चाहिए।

पाकिस्तान में क्या स्थिति है?

पाकिस्तान में एंग्जायटी को लेकर भारत की तरह व्यापक और लगातार अपडेट होने वाला राष्ट्रीय डेटा सीमित है। अलग-अलग अस्पतालों और स्थानीय स्तर पर हुए अध्ययनों में एंग्जायटी के लक्षणों की मौजूदगी दर्ज की गई है, लेकिन इन्हें पूरे देश की आबादी का प्रतिनिधि आंकड़ा मानना सही नहीं होगा।

इसलिए पाकिस्तान में एंग्जायटी से प्रभावित लोगों की सटीक संख्या बताना मुश्किल है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

अगर चिंता या बेचैनी:

  • लगातार बनी रहती है,
  • नींद और आराम को प्रभावित करती है,
  • पढ़ाई या नौकरी में परेशानी पैदा करती है,
  • परिवार या रिश्तों पर असर डालती है,
  • बार-बार घबराहट या डर महसूस कराती है,

तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है।

ध्यान रखें: एंग्जायटी एक आम और उपचार योग्य समस्या है। GAD-7 जैसे टेस्ट स्थिति को समझने में मदद कर सकते हैं, लेकिन इसका इस्तेमाल खुद से बीमारी का निदान करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

वरुण धवन ने खरीदी नई जमीन, बोले- ‘ये मेरे लिए बेहद खास उपलब्धि है’; वीडियो में दिखाई खेत की झलक

बॉलीवुड अभिनेता वरुण धवन ने अपनी जिंदगी में एक नई उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए बताया कि उन्होंने अपना खेत खरीदा है। अभिनेता ने खेत की झलक भी फैंस के साथ साझा की और बताया कि इस नई जगह को लेकर वह काफी उत्साहित हैं।

वीडियो में वरुण खेत में खड़े नजर आए। हाथ में चाय का कप लिए अभिनेता ने इस नई खरीदारी को अपनी जिंदगी की खास उपलब्धियों में से एक बताया।

वरुण धवन ने दिखाई खेत की झलक

वीडियो में वरुण धवन कहते नजर आए कि वह अपने फैंस के साथ एक खास खबर साझा करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने एक खेत खरीदा है और यहां बैठकर चाय-बिस्किट के साथ मौसम का आनंद लेना उन्हें काफी पसंद आ रहा है।

अभिनेता इस दौरान कैजुअल अंदाज में दिखाई दिए। उन्होंने शर्ट-पैंट के साथ बूट्स पहने हुए थे। वीडियो सामने आने के बाद उनके फैंस ने कमेंट सेक्शन में उन्हें इस नई शुरुआत के लिए बधाई दी।

वरुण ने अपनी पोस्ट के जरिए यह भी संकेत दिया कि उनके लिए यह खरीदारी सिर्फ एक प्रॉपर्टी लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी भावनाएं भी उनके लिए काफी खास हैं।

असिस्टेंट डायरेक्टर से बने बॉलीवुड स्टार

वरुण धवन ने फिल्म इंडस्ट्री में सीधे अभिनेता के तौर पर कदम नहीं रखा था। उन्होंने शुरुआत बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर की थी। साल 2010 में उन्होंने करण जौहर की फिल्म माय नेम इज खान में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया।

इसके बाद 2012 में करण जौहर की फिल्म स्टूडेंट ऑफ द ईयर से उन्होंने एक्टिंग डेब्यू किया। फिल्म में उनके साथ आलिया भट्ट और सिद्धार्थ मल्होत्रा भी नजर आए थे। इस फिल्म के बाद वरुण ने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई।

कई हिट फिल्मों में कर चुके हैं काम

अपने करियर में वरुण धवन ने अलग-अलग तरह की फिल्मों में काम किया है। इनमें मैं तेरा हीरो, हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया, बदलापुर, एबीसीडी 2, दिलवाले, जुड़वा 2, बद्रीनाथ की दुल्हनिया, सुई धागा, कलंक, स्ट्रीट डांसर 3डी, जुग जुग जियो, भेड़िया, बवाल और बेबी जॉन जैसी फिल्में शामिल हैं।

उनकी फिल्मों में कॉमेडी, रोमांस, एक्शन और गंभीर भूमिकाओं का अलग-अलग अंदाज देखने को मिला है।

निजी जिंदगी में भी हैं काफी खुश

वरुण धवन ने डिजाइनर नताशा दलाल से शादी की है। दोनों एक बेटी के माता-पिता हैं। वरुण अक्सर सोशल मीडिया पर अपनी प्रोफेशनल लाइफ से जुड़ी झलकियां शेयर करते रहते हैं, जबकि अपनी बेटी की तस्वीरों को सार्वजनिक करने से वह अब तक काफी हद तक बचते रहे हैं।

अब खेत खरीदने की खबर के बाद वरुण के फैंस उनकी इस नई प्रॉपर्टी और वहां बिताए जाने वाले समय को लेकर काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं।

प्रशांत में बढ़ रहा जंग का खतरा? जापान ने क्यों मांगा भारत का साथ, जानें पूरी कहानी

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अब एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भी तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। जापान को आशंका है कि भविष्य में प्रशांत महासागर में भी ऐसी सैन्य परिस्थितियां बन सकती हैं, जिनका असर पूरे एशिया की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा। इसी बीच जापान की ओर से भारत के साथ रणनीतिक और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो के प्रस्तावित भारत दौरे को इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासतौर पर रूस, चीन और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग तथा जापान के इन देशों के साथ अलग-अलग विवादों को देखते हुए भारत की भूमिका अहम हो सकती है।

जापान की चिंता क्यों बढ़ रही है?

जापान ने हाल के वर्षों में अपनी सुरक्षा नीति में बड़ा बदलाव किया है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद टोक्यो को यह चिंता सताने लगी है कि अगर किसी क्षेत्रीय विवाद ने सैन्य संघर्ष का रूप लिया, तो उसका असर जापान और पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर पड़ सकता है।

इसी वजह से जापान ने अपने रक्षा खर्च में भी बढ़ोतरी की है। देश अपनी समुद्री और हवाई सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के साथ-साथ आधुनिक युद्धपोत, ड्रोन और दूसरी सैन्य तकनीक पर निवेश बढ़ा रहा है।

जापान की रणनीति का एक प्रमुख उद्देश्य यह है कि किसी संभावित संकट की स्थिति में वह अपने समुद्री इलाकों और महत्वपूर्ण द्वीपों की सुरक्षा बेहतर तरीके से कर सके।

रूस के साथ तनाव ने बढ़ाई मुश्किल

रूस और जापान के बीच लंबे समय से कुरील द्वीप समूह को लेकर विवाद चला आ रहा है। जापान इन द्वीपों के कुछ हिस्सों पर अपना दावा करता है, जबकि रूस का वहां नियंत्रण है।

रूस की ओर से इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ाए जाने पर जापान कई बार आपत्ति दर्ज करा चुका है। यूक्रेन युद्ध के बाद दोनों देशों के संबंधों में और तनाव आया है।

ऐसे माहौल में जापान के लिए भारत महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि नई दिल्ली और मॉस्को के बीच दशकों पुराने संबंध हैं। भारत रूस के साथ संवाद बनाए रखने में सक्षम है और दोनों देशों के बीच रक्षा तथा ऊर्जा क्षेत्र में भी लंबे समय से सहयोग रहा है।

चीन भी जापान की बड़ी चिंता

जापान की सुरक्षा चिंताओं का दूसरा बड़ा कारण चीन है। दोनों देशों के बीच पूर्वी चीन सागर में स्थित सेनकाकू द्वीपों को लेकर विवाद है।

चीन इन द्वीपों को दियाओयू द्वीप कहता है, जबकि जापान इन्हें सेनकाकू द्वीप समूह के रूप में अपना क्षेत्र मानता है। दोनों देशों के बीच समुद्री और हवाई गतिविधियों को लेकर समय-समय पर तनाव देखने को मिलता है।

इसके अलावा चीन और रूस के बीच बढ़ता सैन्य सहयोग भी जापान के लिए चिंता का विषय है। दोनों देश प्रशांत क्षेत्र में संयुक्त सैन्य अभ्यास कर चुके हैं।

उत्तर कोरिया से भी खतरा

जापान के सामने एक और चुनौती उत्तर कोरिया की मिसाइल और परमाणु क्षमता है। उत्तर कोरिया लगातार मिसाइल परीक्षण करता रहा है और इनमें से कुछ मिसाइलें जापान के आसपास के समुद्री क्षेत्र में गिरी हैं।

उत्तर कोरिया के रूस के साथ भी संबंध पिछले कुछ समय में काफी मजबूत हुए हैं। यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस और उत्तर कोरिया के बीच सैन्य सहयोग बढ़ने की खबरें सामने आई हैं।

इस स्थिति में जापान को लगता है कि उसे अपनी सुरक्षा रणनीति को केवल अमेरिका पर निर्भर रखने के बजाय दूसरे भरोसेमंद साझेदारों के साथ भी मजबूत करना चाहिए।

ऐसे में भारत क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत की भूमिका कई वजहों से अहम हो जाती है।

पहली वजह रूस से संबंध: भारत और रूस के बीच लंबे समय से रणनीतिक संबंध हैं। ऐसे में भारत मॉस्को के साथ संवाद बनाए रखने की क्षमता रखता है।

दूसरी वजह चीन: भारत खुद चीन के साथ सीमा विवाद का सामना कर रहा है। दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव के बावजूद आर्थिक और कूटनीतिक संवाद जारी है।

तीसरी वजह जापान से रक्षा सहयोग: भारत और जापान के बीच रक्षा संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देशों की सेनाएं संयुक्त सैन्य अभ्यास करती हैं और नौसेनाएं बहुपक्षीय अभ्यासों में भी हिस्सा लेती हैं।

भारत-जापान की बढ़ती सैन्य साझेदारी

भारत और जापान के बीच धर्म गार्जियन जैसे सैन्य अभ्यास होते हैं। दोनों देशों की नौसेनाएं अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के साथ मालाबार अभ्यास में भी भाग लेती हैं।

इससे चार देशों—भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया—के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग मजबूत हुआ है।

जापान के लिए भारत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत हिंद महासागर और प्रशांत क्षेत्र के बीच एक रणनीतिक स्थिति में मौजूद है।

जापान के रक्षा मंत्री की भारत यात्रा क्यों अहम?

जापानी रक्षा मंत्री का प्रस्तावित भारत दौरा ऐसे समय हो रहा है जब एशिया में कई बड़े शक्ति समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।

एक तरफ रूस और चीन के बीच सहयोग बढ़ रहा है। दूसरी तरफ उत्तर कोरिया रूस के करीब आता दिखाई दे रहा है। जापान चीन और रूस दोनों के साथ अलग-अलग विवादों में उलझा हुआ है।

ऐसे समय में भारत के साथ रक्षा और रणनीतिक सहयोग बढ़ाना जापान की व्यापक इंडो-पैसिफिक रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।

क्या सच में यूक्रेन जैसी जंग शुरू होने वाली है?

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि प्रशांत क्षेत्र में यूक्रेन जैसी कोई बड़ी जंग निश्चित रूप से होने वाली है। जापान की सुरक्षा तैयारियां और दूसरे देशों के साथ रक्षा सहयोग को सीधे युद्ध की शुरुआत का संकेत मानना सही नहीं होगा।

दरअसल, देशों की कोशिश अक्सर संभावित संघर्ष को रोकने के लिए अपनी निरोधक क्षमता (deterrence) मजबूत करने की होती है।

यही वजह है कि जापान भारत जैसे देशों के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहा है। अगर भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश आपसी रणनीतिक सहयोग बढ़ाते हैं, तो इसका उद्देश्य केवल सैन्य टकराव की तैयारी नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखना भी हो सकता है।

कुल मिलाकर, जापान के लिए भारत अब केवल एक आर्थिक साझेदार नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक की बदलती भू-राजनीति में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी बन चुका है। रूस, चीन और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ते सहयोग के बीच आने वाले समय में भारत-जापान रक्षा साझेदारी और ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है।

Sports Update:देवदत्त पडिक्कल ने बताया अपना बड़ा लक्ष्य, बोले- टेस्ट क्रिकेट ही मेरी पहली प्राथमिकता

गॉल। श्रीलंका के खिलाफ खेले जा रहे पहले टेस्ट में भारतीय टीम मजबूत स्थिति में पहुंच गई है। टीम इंडिया के युवा बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल ने इस मुकाबले में बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने पहली पारी में 167 रन की बेहतरीन पारी खेली, जबकि दूसरी पारी में भी 44 रन का योगदान दिया। चौथे दिन का खेल समाप्त होने के बाद भारत को जीत के लिए आखिरी दिन छह विकेट की जरूरत है।

मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में पडिक्कल ने अपने करियर के सबसे बड़े लक्ष्य के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने साफ किया कि टेस्ट क्रिकेट में खुद को स्थापित करना उनकी प्राथमिकता है।

‘टेस्ट क्रिकेट मेरा अंतिम लक्ष्य’

पडिक्कल ने कहा कि वह लंबे समय से टेस्ट क्रिकेट को अपने करियर का प्रमुख लक्ष्य मानते आए हैं। इसी वजह से उन्होंने अपनी बल्लेबाजी तकनीक को इस तरह विकसित करने पर ध्यान दिया है, जिससे लाल गेंद के क्रिकेट में आसानी से प्रदर्शन कर सकें।

उनके मुताबिक, जब भी टेस्ट क्रिकेट खेलने का अवसर मिले, वह अपनी मूल तकनीक और मजबूत डिफेंस के साथ मैदान पर उतरने के लिए तैयार रहना चाहते हैं। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट को अपनी पहली प्राथमिकता बताया।

लाल और सफेद गेंद के क्रिकेट में अंतर

कर्नाटक की घरेलू टीम की कप्तानी कर चुके पडिक्कल ने माना कि सीमित ओवरों और टेस्ट क्रिकेट के बीच लगातार बदलाव करना आसान नहीं होता। दोनों फॉर्मेट के लिए बल्लेबाज को अपनी तैयारी और तकनीक में जरूरी बदलाव करने पड़ते हैं।

उन्होंने बताया कि सफेद गेंद के क्रिकेट में वह ज्यादा शॉट खेलने और हाथों को खुला रखने की कोशिश करते हैं। वहीं लाल गेंद के क्रिकेट में उन्हें अपनी तकनीक को अधिक कॉम्पैक्ट रखना पड़ता है और हाथों को शरीर के करीब रखकर बल्लेबाजी करनी होती है।

मानसिक बदलाव भी जरूरी

पडिक्कल के मुताबिक, केवल तकनीकी बदलाव करना ही पर्याप्त नहीं है। फॉर्मेट बदलने के साथ मानसिक रूप से भी खुद को तैयार करना पड़ता है। लगातार सफेद गेंद और लाल गेंद के क्रिकेट के बीच आने-जाने की चुनौती रहती है, लेकिन उन्होंने इस बदलाव को बेहतर तरीके से संभालना सीखा है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में वह दोनों तरह के क्रिकेट के बीच खुद को और बेहतर ढंग से ढाल पाएंगे।

मौका मिला तो प्रदर्शन करना है

साई सुदर्शन के चोटिल होने के बाद पडिक्कल को प्लेइंग इलेवन में जगह मिली। हालांकि, वह भविष्य में कितने टेस्ट मैच खेलेंगे या टीम में तीसरे नंबर पर उनकी जगह कितनी स्थायी होगी, इसे लेकर ज्यादा सोचने के पक्ष में नहीं हैं।

पडिक्कल ने कहा कि जब भी उन्हें खेलने का मौका मिलता है, उनका ध्यान उस अवसर को अच्छी तरह भुनाने और टीम के लिए रन बनाने पर रहता है। उनके शानदार प्रदर्शन ने इस टेस्ट में टीम इंडिया को मजबूत स्थिति में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।