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36 घंटे की मूसलाधार बारिश से रावलपिंडी जलमग्न, सड़क से घरों तक भरा पानी

पाकिस्तान के रावलपिंडी में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। करीब 36 घंटे तक हुई बारिश के बाद शहर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति गंभीर हो गई। प्रमुख सड़कें, बाजार, रिहायशी इलाके और कई इमारतें पानी से घिर गईं।

रावलपिंडी-इस्लामाबाद एक्सप्रेसवे समेत कई प्रमुख मार्गों पर पानी जमा होने से यातायात प्रभावित हुआ। कुछ स्थानों पर पानी की गहराई इतनी बढ़ गई कि लोगों को घुटनों से लेकर कमर तक पानी के बीच आवाजाही करनी पड़ी।

140 मिलीमीटर के करीब बारिश

पाकिस्तान के मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार रावलपिंडी में लगभग 36 घंटे के दौरान करीब 140 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। लगातार बारिश के कारण शहर की जल निकासी व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ा और कई इलाकों में पानी सड़कों से निकलकर घरों और दुकानों तक पहुंच गया।

न्यू लालाजार क्षेत्र में पानी भरने के कारण कई वाहन फंस गए। कुछ स्थानों पर लोगों को पानी में उतरकर अपने वाहनों को निकालने की कोशिश करते देखा गया।

कैंट क्षेत्र में भी जलभराव

रावलपिंडी कैंट के कई इलाकों में भी भारी जलभराव की सूचना है। शेर जमान कॉलोनी, राजा अकरम कॉलोनी, शाली घाटी और पीपल्स कॉलोनी जैसे इलाकों में पानी भरने से लोगों की परेशानी बढ़ गई।

कुछ जगहों पर पानी घरों के अंदर तक पहुंच गया। निचले इलाकों में स्थित मकानों के भूतल के डूबने की भी खबरें सामने आई हैं।

राजा बाजार में तेज बहाव

शहर के राजा बाजार इलाके में भी बारिश के बाद पानी का तेज बहाव देखने को मिला। सड़कों पर जमा पानी अपने साथ कचरा और डस्टबिन जैसी चीजें बहाकर ले जाता दिखाई दिया।

नाला लाई में पानी का बहाव भी तेज हो गया। लगातार बारिश के बीच नाले का जलस्तर बढ़ने से आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।

टेंच भट्टा में भी हालात खराब

टेंच भट्टा इलाके में भी जलभराव की स्थिति गंभीर बताई गई। कुछ स्थानों पर इमारतों के निचले हिस्से पानी में डूब गए और सड़कों पर पानी का बहाव तेज रहा।

बारिश का असर रावलपिंडी से सटे इस्लामाबाद में भी देखने को मिला। राजधानी के कुछ पॉश इलाकों और प्रमुख सेक्टरों में सड़कों पर पानी जमा होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

सेना के मुख्यालय वाला शहर भी जलभराव से परेशान

रावलपिंडी पाकिस्तान का प्रमुख सैन्य शहर माना जाता है और यहां पाकिस्तानी सेना का मुख्यालय स्थित है। बड़ी संख्या में सैन्य अधिकारी और उनके परिवार भी शहर में रहते हैं।

इसके बावजूद भारी बारिश के दौरान शहर की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। लंबे समय तक बारिश होने पर निचले इलाकों में पानी जमा होना रावलपिंडी के लिए बड़ी चुनौती बनता रहा है।

WASA की व्यवस्था पर उठे सवाल

शहर में नालों की सफाई, जल निकासी और बारिश के पानी को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी वाटर एंड सैनिटेशन एजेंसी यानी WASA की है।

लगातार बारिश के बाद कई इलाकों में पानी जमा होने से एजेंसी की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं। शहर की ड्रेनेज व्यवस्था पर अत्यधिक बारिश का दबाव पड़ने के कारण हालात कई जगह नियंत्रण से बाहर होते नजर आए।

लोगों की बढ़ी मुश्किलें

लगातार बारिश और जलभराव के कारण कई क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित हुआ। स्थानीय लोगों को अपने घरों और वाहनों को सुरक्षित रखने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।

मौसम की स्थिति को देखते हुए निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए सतर्क रहना जरूरी है। भारी बारिश के दौरान तेज बहाव वाले रास्तों और जलभराव वाली सड़कों से गुजरना जोखिम भरा हो सकता है।

भारत-बांग्लादेश रिश्तों में क्यों बढ़ा तनाव? जानें, क्या अब दूरियां होंगी कम

भारत और बांग्लादेश के रिश्ते इस समय एक जटिल दौर से गुजर रहे हैं। दोनों देशों के बीच कई मुद्दों को लेकर मतभेद सामने आए हैं, लेकिन इसके बावजूद संवाद के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। हाल में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश का जिक्र करते हुए कहा गया कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा को यादगार बनाने की इच्छा है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में बांग्लादेश की संभावित भागीदारी और तारिक रहमान की भारत यात्रा को लेकर असमंजस बना हुआ है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिश शुरू हो गई है या यह सिर्फ सामान्य राजनयिक संदेश है?

तारिक रहमान की भारत यात्रा पर क्यों बनी हुई है अनिश्चितता?

तारिक रहमान को भारत की ओर से दो स्तरों पर आमंत्रण दिए जाने की बात सामने आई है। पहला द्विपक्षीय बातचीत के लिए और दूसरा BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए।

बांग्लादेश की ओर से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण समेत कुछ मुद्दों को लेकर भारत से अपेक्षाएं रखी गई हैं। ढाका का कहना है कि दोनों देशों के बीच बेहतर माहौल तैयार किए जाने की जरूरत है।

भारत ने शेख हसीना से जुड़े प्रत्यर्पण अनुरोध के मिलने की पुष्टि की है। हालांकि, नई दिल्ली का रुख रहा है कि दोनों देशों के बीच संबंध आपसी हित और पारस्परिकता के आधार पर आगे बढ़ने चाहिए।

इस बीच भारत की ओर से यह संकेत दिया गया है कि बातचीत और उच्चस्तरीय संपर्क के रास्ते खुले हैं।

आखिर रिश्तों में तनाव की वजह क्या है?

भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों में हाल के वर्षों में कई स्तरों पर बदलाव देखने को मिले हैं। राजनीतिक घटनाक्रम, सीमा प्रबंधन, जल बंटवारा और क्षेत्रीय रणनीति जैसे मुद्दे दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित कर रहे हैं।

1. शेख हसीना को लेकर बढ़ा मतभेद

शेख हसीना के भारत में रहने और उनकी ओर से बांग्लादेश की राजनीति को लेकर दिए गए बयानों पर ढाका ने कई बार नाराजगी जताई है।

बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था और भारत में हसीना की मौजूदगी दोनों देशों के बीच संवेदनशील मुद्दा बन चुके हैं। भारत ने स्पष्ट किया है कि हसीना से जुड़े राजनीतिक बयानों में उसकी सरकार की कोई भूमिका नहीं है।

2. सीमा पर तनाव

भारत-बांग्लादेश सीमा पर सीमा प्रबंधन, अवैध आवाजाही और लोगों को सीमा पार भेजे जाने के आरोपों को लेकर भी समय-समय पर विवाद सामने आता रहा है।

दोनों देशों की सीमा सुरक्षा एजेंसियों के बीच बातचीत और समन्वय के बावजूद कुछ घटनाएं राजनीतिक बहस का विषय बन जाती हैं। सीमा पर होने वाली हिंसा और नागरिकों की मौतों को लेकर बांग्लादेश की ओर से चिंता जताई जाती रही है।

भारत का पक्ष रहा है कि सीमा पर अपराध और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए प्रभावी सीमा प्रबंधन जरूरी है।

3. तीस्ता और गंगा जल बंटवारा

जल बंटवारा दोनों देशों के बीच लंबे समय से लंबित मुद्दों में शामिल है। खासतौर पर तीस्ता नदी के पानी को लेकर कई वर्षों से बातचीत होती रही है, लेकिन स्थायी समझौता नहीं हो पाया है।

गंगा जल संधि भी अपने अगले चरण को लेकर महत्वपूर्ण है। ऐसे में आने वाले समय में दोनों देशों को जल संसाधनों से जुड़े पुराने मुद्दों पर फिर बातचीत करनी होगी।

भारत का रुख रहा है कि साझा नदियों से संबंधित विषयों को दोनों देशों के बीच संस्थागत बातचीत के माध्यम से हल किया जाना चाहिए।

4. चीन के साथ बांग्लादेश की बढ़ती नजदीकी

बांग्लादेश के चीन के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंध भी भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं। ढाका में बुनियादी ढांचे, उद्योग, ऊर्जा और रक्षा से जुड़े क्षेत्रों में चीन की भूमिका बढ़ी है।

चीन के साथ बांग्लादेश की बढ़ती आर्थिक साझेदारी को भारत क्षेत्रीय रणनीति के नजरिए से भी देखता है। हालांकि, बांग्लादेश का चीन के साथ आर्थिक सहयोग अपने आप में भारत से दूरी का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

फिर रिश्तों में सुधार की उम्मीद क्यों है?

तनाव के बावजूद भारत और बांग्लादेश के बीच कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां सहयोग लगातार जारी है।

1. मोदी सरकार की बातचीत पर जोर

भारत की ओर से लगातार यह संकेत दिया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच मतभेदों का समाधान बातचीत के जरिए होना चाहिए।

दिनेश त्रिवेदी की ओर से प्रधानमंत्री मोदी के संदेश का उल्लेख इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है। भारत ने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को अपनी विदेश नीति में महत्वपूर्ण स्थान दिया है।

2. ऊर्जा सहयोग अभी भी जारी

दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग एक महत्वपूर्ण कड़ी है। भारत से बांग्लादेश को डीजल की आपूर्ति और सीमा पार ऊर्जा परियोजनाएं दोनों देशों की परस्पर निर्भरता को दिखाती हैं।

ऐसे समय में जब बांग्लादेश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की कोशिश कर रहा है, भारत के साथ सहयोग उसके लिए भी महत्वपूर्ण है।

3. वीजा व्यवस्था में सुधार

दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बनाए रखने में वीजा व्यवस्था की अहम भूमिका है। राजनीतिक तनाव के बावजूद पर्यटक और अन्य श्रेणियों के वीजा संचालन में सुधार की दिशा में कदम सकारात्मक संकेत माने जा सकते हैं।

लोगों के बीच संपर्क बढ़ना किसी भी द्विपक्षीय रिश्ते को सामान्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

4. नए उच्चायुक्त की नियुक्ति

भारत की ओर से बांग्लादेश में उच्चस्तरीय राजनयिक नियुक्ति भी यह संकेत देती है कि नई दिल्ली ढाका के साथ संवाद बनाए रखना चाहती है।

किसी पड़ोसी देश के साथ तनाव के बावजूद राजनयिक चैनल को सक्रिय रखना दोनों देशों के हित में होता है। यही चैनल कठिन मुद्दों पर बातचीत का रास्ता भी तैयार करता है।

क्या अब सच में पिघलेगी बर्फ?

भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में फिलहाल पूरी तरह गर्मजोशी लौट आई है, ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। दोनों देशों के सामने शेख हसीना, सीमा प्रबंधन, जल बंटवारा और क्षेत्रीय रणनीति जैसे संवेदनशील मुद्दे मौजूद हैं।

लेकिन दूसरी तरफ ऊर्जा सहयोग, व्यापार, लोगों के बीच संपर्क और राजनयिक संवाद जैसे क्षेत्र दोनों देशों को जोड़े हुए हैं।

भारत और बांग्लादेश के बीच लंबी सीमा, साझा नदियां, ऐतिहासिक संबंध और सांस्कृतिक समानताएं ऐसी वास्तविकताएं हैं जिन्हें नजरअंदाज करना आसान नहीं है। इसलिए दोनों देशों के लिए तनाव कम करना और बातचीत को आगे बढ़ाना व्यावहारिक रूप से भी जरूरी है।

अगर आने वाले महीनों में उच्चस्तरीय बैठकें होती हैं और संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत शुरू होती है, तो रिश्तों में जमी कूटनीतिक बर्फ धीरे-धीरे पिघल सकती है। फिलहाल संकेत मिले-जुले हैं—मतभेद गंभीर हैं, लेकिन संवाद के दरवाजे अभी खुले हैं।

इमरान खान को अस्पताल भेजने के SC के आदेश पर सरकार ने जताई आपत्ति, फैसले को देगी चुनौती

पाकिस्तान में जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के इलाज को लेकर सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच टकराव की स्थिति बनती नजर आ रही है। पाकिस्तान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने का फैसला किया है, जिसमें इमरान खान को जेल से अस्पताल ले जाकर इलाज कराने का निर्देश दिया गया था।

सरकार की ओर से कहा गया है कि अदालत के आदेश में बदलाव की मांग को लेकर कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। पाकिस्तान के कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने भी सरकार के इस रुख की पुष्टि की है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या दिया था आदेश?

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने निर्देश दिया था कि इमरान खान को 48 घंटे के भीतर अदियाला जेल से इस्लामाबाद स्थित शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाया जाए।

अदालत के आदेश के मुताबिक, उन्हें 16 सितंबर तक चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाना था। यह फैसला इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर सामने आई चिंताओं और उनके इलाज से जुड़ी मांगों पर सुनवाई के बाद दिया गया था।

अब सरकार इस आदेश में संशोधन चाहती है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार आदेश के किस हिस्से को बदलने की मांग करेगी।

परिवार और PTI ने जताई थी चिंता

इमरान खान के परिवार और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की ओर से लंबे समय से उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता जताई जाती रही है।

याचिकाओं में दावा किया गया था कि 2023 से जेल में रहने के दौरान उनकी सेहत प्रभावित हुई है। उनकी आंखों से जुड़ी परेशानी का भी उल्लेख किया गया था।

इन्हीं दलीलों के आधार पर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और अदालत ने जेल के बजाय अस्पताल में इलाज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

परिवार से मिलने और बेटों से बात करने की भी अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान के इलाज के अलावा उनके परिवार से संपर्क को लेकर भी निर्देश दिए थे।

अदालत ने उन्हें हर सप्ताह परिवार के सदस्यों से मुलाकात की अनुमति देने और अपने बेटों से फोन पर बातचीत कराने का निर्देश दिया था।

इन निर्देशों के बाद इमरान खान के समर्थकों के बीच उम्मीद जगी थी कि उनकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का बेहतर तरीके से इलाज हो सकेगा।

अब सरकार क्यों कर रही है चुनौती देने की तैयारी?

पाकिस्तान सरकार का कहना है कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश की समीक्षा या उसमें बदलाव के लिए कानूनी रास्ता अपनाएगी। कानून मंत्री आजम नजीर तरार के बयान से संकेत मिलता है कि सरकार अदालत के फैसले को पूरी तरह स्वीकार करने के बजाय उसमें संशोधन चाहती है।

इस कदम से पाकिस्तान में पहले से चल रहे राजनीतिक और न्यायिक तनाव के बीच एक नया विवाद खड़ा हो सकता है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि इमरान खान को अस्पताल भेजने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अमल होगा या सरकार की चुनौती के बाद इसमें कोई बदलाव किया जाएगा।

मामला केवल इमरान खान के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। पाकिस्तान की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में उनके इलाज, जेल में सुविधाओं और परिवार से संपर्क से जुड़े हर फैसले का राजनीतिक असर भी पड़ सकता है। आने वाले दिनों में अदालत में सरकार की ओर से उठाए गए कदम पर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

‘जेलर 2’ ने रचा इतिहास, ₹160 करोड़ में हुई OTT डील; रजनीकांत की फिल्म ने बनाया बड़ा रिकॉर्ड

सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्मों को लेकर फैंस के बीच हमेशा जबरदस्त उत्साह रहता है। अब उनकी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जेलर 2’ रिलीज से पहले ही चर्चा में है। फिल्म को लेकर सामने आई नई रिपोर्ट के मुताबिक, इसके डिजिटल राइट्स करीब ₹160 करोड़ में बिके हैं। अगर यह आंकड़ा सही है तो यह तमिल सिनेमा की सबसे बड़ी नॉन-थिएट्रिकल डील में से एक मानी जा रही है।

फिल्म की रिलीज को लेकर भी हाल में कई तरह की अटकलें सामने आई थीं, लेकिन मेकर्स ने इन्हें खारिज कर दिया है।

तय तारीख पर ही रिलीज होगी ‘जेलर 2’

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि पोस्ट-प्रोडक्शन का काम पूरा होने में देरी के कारण फिल्म की रिलीज आगे बढ़ाई जा सकती है। ऐसी चर्चा थी कि फिल्म को दिवाली तक टाला जा सकता है।

हालांकि, प्रोडक्शन हाउस सन पिक्चर्स ने इन अटकलों को खारिज करते हुए फिल्म की निर्धारित रिलीज को लेकर स्थिति साफ कर दी है। फिल्म 15 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

ट्रेड एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अक्टूबर में रिलीज होने से फिल्म को फायदा मिल सकता है। दिवाली के दौरान रिलीज होने पर इसे नितेश तिवारी की ‘रामायण’ से मुकाबले का सामना करना पड़ता। ऐसे में अक्टूबर रिलीज के साथ ‘जेलर 2’ को ज्यादा स्क्रीन और लंबा थिएट्रिकल रन मिलने की संभावना है।

₹160 करोड़ की OTT डील ने मचाई हलचल

रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘जेलर 2’ के स्ट्रीमिंग राइट्स एक बड़े OTT प्लेटफॉर्म को लगभग ₹160 करोड़ में बेचे गए हैं।

इस डील को तमिल फिल्म इंडस्ट्री की अब तक की सबसे बड़ी नॉन-थिएट्रिकल डील बताया जा रहा है। दावा है कि इस रकम के साथ फिल्म ने विजय की ‘लियो’ से जुड़े पुराने डिजिटल डील रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है।

हालांकि, OTT डील की रकम को लेकर मेकर्स की ओर से आधिकारिक पुष्टि सामने आना बाकी है। इसलिए ₹160 करोड़ के आंकड़े को फिलहाल रिपोर्टेड जानकारी के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

रिलीज से पहले ही शुरू हुई फिल्म की मार्केटिंग

‘जेलर 2’ की मार्केटिंग गतिविधियां भी तेज होने वाली हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म का पहला गाना 21 अगस्त को रिलीज किया जा सकता है।

फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी एक बार फिर अनिरुद्ध रविचंदर ने संभाली है। फिल्म के प्रमोशनल इवेंट को बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी की जा रही है।

रजनीकांत की फिल्मों के बड़े कार्यक्रम अक्सर चेन्नई में आयोजित होते हैं, लेकिन ‘जेलर 2’ के लॉन्च इवेंट की अंतिम जगह को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

फिल्म के टेलीविजन प्रीमियर को लेकर भी सन टीवी से जुड़ी तारीख की चर्चा है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अलग से होना बाकी है।

रजनीकांत के साथ नजर आएंगे कई बड़े सितारे

‘जेलर 2’ का निर्देशन नेल्सन दिलीपकुमार कर रहे हैं, जबकि फिल्म का निर्माण कलानिधि मारन के बैनर सन पिक्चर्स के तहत किया जा रहा है।

फिल्म में रजनीकांत के साथ मिर्ना मेनन, मोहनलाल, योगी बाबू और शिवा राजकुमार जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे।

फिल्म की स्टारकास्ट और ‘जेलर’ की सफलता के बाद बने माहौल को देखते हुए ‘जेलर 2’ से बॉक्स ऑफिस पर बड़ी उम्मीदें हैं। अब देखना होगा कि फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज के बाद दर्शकों और ट्रेड की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।

बांग्लादेश ने भारत से बिजनेस वीजा प्रक्रिया तेज करने की अपील की, कंपनियों को निवेश का न्योता

भारत और बांग्लादेश के बीच राजनीतिक स्तर पर तनाव की खबरों के बीच अब आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिशें तेज होती दिखाई दे रही हैं। बांग्लादेश ने भारत से अपने नागरिकों के लिए बिजनेस वीजा प्रक्रिया में तेजी लाने की अपील की है। ढाका का मानना है कि दोनों देशों के कारोबारियों की आवाजाही आसान होने से व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिल सकता है।

बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने भारत के साथ ऐसी आर्थिक साझेदारी की जरूरत बताई, जिससे दोनों देशों को बराबर फायदा मिले और आम लोगों की जिंदगी पर भी सकारात्मक असर पड़े।

भारतीय कंपनियों को निवेश का न्योता

बांग्लादेश सरकार ने भारतीय कंपनियों से वहां निवेश करने का आह्वान किया है। इसके लिए खास तौर पर रेडीमेड गारमेंट्स, चमड़ा, फार्मास्यूटिकल्स और जूट जैसे क्षेत्रों को महत्वपूर्ण बताया गया है।

शमा ओबैद इस्लाम ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आसान करना जरूरी है। उन्होंने बुनियादी ढांचे से जुड़ी समस्याओं और गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने पर भी जोर दिया।

उनके मुताबिक, दोनों देशों के निजी क्षेत्र के बीच ज्यादा संवाद और कारोबारियों की आसान आवाजाही आर्थिक रिश्तों को नई गति दे सकती है।

भारतीय कारोबारियों के लिए बांग्लादेश ने गिनाए फायदे

बांग्लादेश की ओर से भारतीय कंपनियों को वहां निवेश के लिए कई अवसरों का हवाला दिया गया है। सरकार का कहना है कि देश में बड़ा घरेलू बाजार, उत्पादन क्षमता और पड़ोसी देशों तक पहुंच की भौगोलिक सुविधा मौजूद है।

बांग्लादेश में बनाए गए विशेष आर्थिक क्षेत्र भी भारतीय कंपनियों के लिए मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात का आधार बन सकते हैं।

ढाका खास तौर पर ऐसे निवेश को बढ़ावा देना चाहता है, जिससे नई तकनीक आए, स्थानीय कंपनियों को सप्लाई चेन से जोड़ा जा सके और रोजगार के नए अवसर पैदा हों।

भारतीय उद्योग जगत के साथ बैठक

बांग्लादेश में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेशी कारोबारी प्रतिनिधियों और भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के प्रतिनिधिमंडल के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया।

इस दौरान बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री ने भारत को देश का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में दोनों देशों के बीच कारोबार बढ़ा है, लेकिन मौजूदा व्यापार दोनों देशों की वास्तविक क्षमता से अभी भी काफी नीचे है।

व्यापार बढ़ाने पर दोनों देशों का जोर

बांग्लादेश की ओर से कहा गया है कि भारत और बांग्लादेश को आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। इसके लिए कारोबार से जुड़ी बाधाओं को कम करने, निवेश को आसान बनाने और निजी क्षेत्र के बीच संपर्क बढ़ाने की आवश्यकता है।

बांग्लादेश का मानना है कि भारतीय निवेश से उसके विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिल सकती है, जबकि भारतीय कंपनियों को नए बाजार और क्षेत्रीय सप्लाई चेन तक पहुंच मिल सकती है।

कितना है भारत-बांग्लादेश के बीच कारोबार?

भारत और बांग्लादेश दक्षिण एशिया के महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में फरवरी तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 11.35 अरब डॉलर रहा।

भारत की ओर से बांग्लादेशी उत्पादों को क्षेत्रीय व्यापार समझौतों के तहत व्यापक बाजार पहुंच भी मिलती है। SAFTA व्यवस्था के तहत भारत ने बांग्लादेश के कई उत्पादों को शुल्क संबंधी रियायतें दी हैं।

तनाव के बीच आर्थिक रिश्तों पर फोकस

राजनीतिक मतभेदों के बावजूद दोनों देशों के आर्थिक हित एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। बांग्लादेश के लिए भारत एक बड़ा पड़ोसी बाजार और महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है, वहीं भारत के लिए बांग्लादेश दक्षिण एशिया में एक अहम आर्थिक और रणनीतिक साझेदार है।

ऐसे में बिजनेस वीजा को आसान बनाने, निवेश बढ़ाने और निजी क्षेत्र के बीच संपर्क मजबूत करने की बांग्लादेश की अपील को दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को सामान्य बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।