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कम बजट की ‘हनुमान अंश’ ने किया शानदार प्रदर्शन, तीसरे हफ्ते में अचानक बढ़ी कमाई

कम बजट में बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए दर्शकों को हैरान कर दिया है। शुरुआत धीमी रहने के बावजूद फिल्म को दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया का फायदा मिला और तीसरे हफ्ते में इसकी कमाई में जबरदस्त उछाल देखने को मिला।

31 जुलाई को रिलीज हुई इस फिल्म का निर्देशन और लेखन विशाल चतुर्वेदी ने किया है। फिल्म में शोभिनव सत्य, विहान एस. हेगड़े, चंदन आनंद और पूर्णिमा तिवारी समेत कई कलाकार नजर आए हैं।

तीसरे हफ्ते में बदली फिल्म की रफ्तार

फिल्म की शुरुआत बॉक्स ऑफिस पर खास नहीं रही थी। पहले सप्ताह में इसे करीब 200 स्क्रीन पर रिलीज किया गया और इस दौरान फिल्म ने लगभग 89 लाख रुपये का नेट कलेक्शन किया।

दूसरे सप्ताह में स्क्रीन की संख्या घटकर करीब 40 रह गई। इसके चलते फिल्म की कमाई भी गिर गई और पूरे हफ्ते में करीब 46 लाख रुपये ही जुटाए जा सके।

हालांकि तीसरे सप्ताह में कहानी पूरी तरह बदल गई। फिल्म को लगभग 400 स्क्रीन मिलीं और इस दौरान 3.20 करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ। इसके साथ फिल्म की कुल नेट कमाई करीब 4.55 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

रविवार को सबसे ज्यादा कमाई

तीसरे सप्ताह के दौरान फिल्म की कमाई में लगातार बढ़ोतरी देखी गई। शुक्रवार को करीब 15 लाख रुपये की कमाई हुई, जबकि शनिवार को यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 87 लाख रुपये पहुंच गया।

रविवार को फिल्म ने सबसे शानदार प्रदर्शन किया और करीब 2.18 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। यानी तीसरे हफ्ते का बड़ा हिस्सा रविवार की कमाई से आया।

सकारात्मक प्रतिक्रिया बनी फिल्म की ताकत

ट्रेड जानकारों के मुताबिक फिल्म को शुरुआती दिनों में कम दर्शक मिले थे, लेकिन दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया धीरे-धीरे आगे बढ़ी। फिल्म की चर्चा बढ़ने के साथ सिनेमाघरों में दर्शकों की संख्या भी बढ़ी।

यही वजह रही कि कम स्क्रीन से शुरुआत करने वाली फिल्म को तीसरे सप्ताह में ज्यादा स्क्रीन मिलीं और इसका सीधा असर बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर दिखाई दिया।

बजट के मुकाबले शानदार मुनाफे का दावा

उपलब्ध जानकारी के अनुसार फिल्म का अनुमानित बजट करीब 1.8 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। वहीं करीब 4.55 करोड़ रुपये की नेट कमाई के आधार पर फिल्म ने लागत के मुकाबले अच्छी बढ़त बनाई है।

हालांकि फिल्म के आधिकारिक बजट और वास्तविक मुनाफे के आंकड़े निर्माताओं की ओर से स्पष्ट रूप से जारी नहीं किए गए हैं। इसलिए 152.78 प्रतिशत प्रॉफिट का आंकड़ा अनुमानित आंकड़ों पर आधारित माना जाना चाहिए।

नीम करोली बाबा की आध्यात्मिक यात्रा पर आधारित कहानी

‘हनुमान अंश’ की कहानी उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव से जुड़े लक्ष्मण नारायण शर्मा के जीवन से प्रेरित बताई जाती है, जिन्हें आगे चलकर नीम करोली बाबा के नाम से प्रसिद्धि मिली।

फिल्म में उनके जीवन और आध्यात्मिक यात्रा को दिखाने की कोशिश की गई है। यह भी बताया जा रहा है कि कहानी को कई हिस्सों में पेश किया जाएगा और ‘हनुमान अंश’ इस सीरीज का पहला भाग है।

बॉक्स ऑफिस पर बड़े बजट की कई फिल्मों के बीच ‘हनुमान अंश’ का प्रदर्शन इसलिए खास माना जा रहा है, क्योंकि सीमित बजट और शुरुआती धीमी रफ्तार के बावजूद फिल्म ने तीसरे सप्ताह में अपनी पकड़ मजबूत कर ली।

सर्जियो गोर के दावे पर भारत की प्रतिक्रिया, ट्रंप के रवैये को लेकर क्यों बरती गई सावधानी?

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के उस दावे पर भारत की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जी-7 के दौरान हुई मुलाकात को लेकर एक खास बात कही थी। गोर के मुताबिक, भारतीय पक्ष ने बैठक के बाद मीडिया से सवाल न पूछे जाने की इच्छा जताई थी।

भारत सरकार से जुड़े सूत्रों ने इस मामले में कहा कि ट्रंप के साथ मुलाकात के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल उनके अप्रत्याशित व्यवहार को ध्यान में रखते हुए सावधानी बरतता है। सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप की दक्षिण अफ्रीका और यूक्रेन के राष्ट्रपतियों के साथ बातचीत के दौरान भी ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, इसलिए भारतीय पक्ष पहले से सतर्क रहता है।

सर्जियो गोर ने क्या दावा किया?

ET वर्ल्ड लीडर्स फोरम में बातचीत के दौरान सर्जियो गोर ने दावा किया कि मोदी और ट्रंप की मुलाकात के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से सवाल-जवाब नहीं कराने का अनुरोध किया गया था।

गोर के मुताबिक, बैठक से पहले पर्दे के पीछे उन्होंने ट्रंप से भारतीय पक्ष की संभावित प्राथमिकताओं को लेकर चर्चा की थी। ट्रंप ने उनसे पूछा था कि भारत किन मुद्दों को उठाना चाहता है और क्या उसकी कोई विशेष मांग है।

गोर ने दावा किया कि भारतीय पक्ष की ओर से मीडिया को बैठक के बाद मौजूद रखने पर सहमति थी, लेकिन सवाल न पूछे जाने की बात कही गई थी। उनके अनुसार, उन्होंने यह बात ट्रंप को बताई और अमेरिकी राष्ट्रपति ने उस समय इस पर सहमति जताई थी।

गोर का कहना है कि मुलाकात खत्म होने के बाद ट्रंप ने कैमरों की तरफ देखकर पत्रकारों से सवाल लेने की इच्छा जताई और कथित तौर पर पहले हुई सहमति को याद नहीं रखा।

मोदी-ट्रंप मुलाकात में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई बातचीत में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई थी। इनमें भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंध, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दे शामिल थे।

बातचीत के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी।

इस पर ट्रंप ने भारत के साथ खड़े रहने की बात कही। उन्होंने संकेत दिया कि यदि भारत पर हमला होता है तो अमेरिका उसका समर्थन करेगा। हालांकि, उन्होंने भविष्य में नेतृत्व बदलने की स्थिति को लेकर अलग टिप्पणी भी की।

भारत की ओर से क्यों बरती जाती है सावधानी?

सरकारी सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ बैठकों में भारतीय प्रतिनिधिमंडल पहले से संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखता है। इसकी वजह ट्रंप का बातचीत के दौरान अचानक रुख बदलना या अप्रत्याशित टिप्पणी करना बताया गया है।

भारत का कहना है कि यह किसी एक बैठक तक सीमित विषय नहीं है। ट्रंप के दूसरे विदेशी नेताओं के साथ संवाद में भी इस तरह के व्यवहार के उदाहरण देखने को मिले हैं। इसलिए संवेदनशील बैठकों में भारतीय पक्ष पहले से रणनीति और बातचीत के संभावित परिणामों को ध्यान में रखता है।

Sports News:नाइट क्लब की घटना के बाद ब्रायडन कार्स पर एक्शन, पाकिस्तान टेस्ट से हुए बाहर; सॉनी बेकर को मौका

इंग्लैंड के तेज गेंदबाज ब्रायडन कार्स को डर्बी में हुई एक घटना के बाद पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे टेस्ट के लिए टीम से रिलीज कर दिया गया है। कार्स 22 अगस्त की रात डर्बी शहर के एक नाइट क्लब के बाहर हथकड़ी पहने दिखाई दिए थे। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया।

इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने मामले की जांच पूरी होने तक कार्स को दूसरे टेस्ट की चयन प्रक्रिया से बाहर रखने का फैसला किया है। उनकी जगह युवा तेज गेंदबाज सॉनी बेकर को इंग्लैंड की टीम में शामिल किया गया है।

ECB ने जांच तक उपलब्धता रोकी

इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच तीन मैचों की टेस्ट सीरीज चल रही है। पहला मुकाबला खेला जा चुका है, जबकि दूसरा टेस्ट 27 अगस्त से शुरू होना है।

इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड के मुताबिक क्रिकेट रेगुलेटर डर्बी में शनिवार रात हुई घटना की जांच करेगा। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और मामले से जुड़ी पूरी जानकारी सामने नहीं आती, तब तक कार्स दूसरे टेस्ट के लिए चयन के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगे।

कार्स को गिरफ्तार नहीं किया गया था

इंग्लिश मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, कार्स को इस घटना के सिलसिले में गिरफ्तार नहीं किया गया था। उन्हें बिना किसी आरोप के छोड़ दिया गया था।

बताया गया कि कार्स डर्बी में डरहम की काउंटी चैंपियनशिप में जीत के बाद टीम के साथ जश्न मनाने पहुंचे थे। इसी दौरान नाइट क्लब के बाहर उन्हें हथकड़ी में देखे जाने का वीडियो सामने आया।

फिलहाल घटना की पूरी वजह स्पष्ट नहीं है। क्रिकेट रेगुलेटर की जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।

काउंटी मैच के लिए पहले ही रिलीज हुए थे

कार्स पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए इंग्लैंड के स्क्वॉड का हिस्सा थे। हालांकि पहले टेस्ट से पहले उन्हें डरहम के लिए काउंटी चैंपियनशिप मुकाबला खेलने की अनुमति दी गई थी।

इसी दौरान वह डरहम टीम के साथ थे। सामने आए वीडियो में कार्स अपने साथी क्रिकेटर मैथ्यू पॉट्स के साथ नजर आए। वीडियो के बैकग्राउंड में इंग्लैंड के पूर्व कप्तान बेन स्टोक्स भी दिखाई दे रहे थे।

ऐसा रहा है कार्स का अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड

ब्रायडन कार्स ने इंग्लैंड के लिए अब तक 14 टेस्ट, 30 वनडे और 14 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेले हैं।

टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 58 विकेट हैं। वनडे में उन्होंने 34 विकेट हासिल किए हैं, जबकि टी20 इंटरनेशनल में उनके खाते में 20 विकेट दर्ज हैं।

अब दूसरे टेस्ट से पहले टीम से उनकी गैरमौजूदगी इंग्लैंड के लिए एक अहम बदलाव है। फिलहाल उनकी जगह सॉनी बेकर को शामिल किया गया है और कार्स पर हुई घटना की जांच के नतीजे का इंतजार किया जा रहा है।

Health Update:सफदरजंग अस्पताल में पहली रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सफल, जानिए कितनी हो सकती है लागत और मुफ्त इलाज की पात्रता

दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में आधुनिक ऑर्थोपेडिक इलाज की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। VMMC और सफदरजंग अस्पताल के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्थोपेडिक्स में पहली बार रोबोट-असिस्टेड टोटल नी रिप्लेसमेंट सफलतापूर्वक की गई। यह सर्जरी 22 अगस्त को 75 वर्षीय आर्थिक रूप से कमजोर मरीज की हुई। खास बात यह रही कि आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीज का इलाज बिना किसी भुगतान के किया गया।

रोबोटिक नी सर्जरी क्या होती है?

रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट में सर्जन की मदद के लिए विशेष रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें ऑपरेशन रोबोट अपने आप नहीं करता, बल्कि पूरी प्रक्रिया डॉक्टर के नियंत्रण में रहती है। रोबोटिक सिस्टम सर्जन को घुटने के क्षतिग्रस्त हिस्से की पहचान और सर्जरी के दौरान अधिक सटीकता हासिल करने में मदद करता है।

इस तकनीक का इस्तेमाल खास तौर पर घुटने के रिप्लेसमेंट को अधिक सटीक बनाने के उद्देश्य से किया जाता है। मरीज की स्थिति के आधार पर इससे बेहतर मूवमेंट और रिकवरी में मदद मिल सकती है।

रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट में कितना खर्च आता है?

निजी अस्पतालों में रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट की अनुमानित लागत करीब 2.10 लाख से 4.20 लाख रुपये प्रति घुटना हो सकती है। हालांकि यह कोई तय कीमत नहीं है।

अस्पताल, सर्जन की फीस, इस्तेमाल होने वाले इंप्लांट, मरीज की स्वास्थ्य स्थिति और अस्पताल में रहने की अवधि के अनुसार कुल खर्च अलग-अलग हो सकता है। इसलिए सर्जरी से पहले अस्पताल से पैकेज और अतिरिक्त खर्चों की पूरी जानकारी लेना जरूरी है।

किन वजहों से बढ़ सकता है खर्च?

रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण की कुल लागत कई चीजों पर निर्भर करती है।

  • इस्तेमाल होने वाले इंप्लांट का प्रकार और ब्रांड
  • सर्जन और मेडिकल टीम की फीस
  • अस्पताल में भर्ती रहने का खर्च
  • ऑपरेशन से पहले होने वाली जांच
  • इमेजिंग और अन्य मेडिकल टेस्ट
  • मरीज को पहले से मौजूद अन्य स्वास्थ्य समस्याएं
  • सर्जरी के बाद फिजियोथेरेपी और रिकवरी से जुड़ी सेवाएं

विदेशी या प्रीमियम इंप्लांट का चयन करने पर खर्च और बढ़ सकता है।

सफदरजंग में मरीज का इलाज मुफ्त कैसे हुआ?

सफदरजंग अस्पताल में जिस 75 वर्षीय मरीज की रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट की गई, वह आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से संबंधित थे। उन्हें आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज की सुविधा मिली। इसके चलते इस प्रक्रिया के लिए मरीज को अपनी जेब से भुगतान नहीं करना पड़ा।

यह कदम सरकारी अस्पतालों में अत्याधुनिक ऑर्थोपेडिक तकनीक को जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आयुष्मान भारत के तहत कौन करा सकता है इलाज?

अगर कोई मरीज आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज की सुविधा लेना चाहता है, तो सबसे पहले अपनी पात्रता की पुष्टि करना जरूरी है। अस्पताल में मौजूद आयुष्मान भारत डेस्क पर जाकर यह पता किया जा सकता है कि संबंधित मरीज और उसकी बीमारी के लिए कौन-कौन सी सेवाएं योजना के अंतर्गत उपलब्ध हैं।

यह भी जरूरी है कि किसी खास रोबोटिक प्रक्रिया की उपलब्धता और योजना के तहत उसका कवरेज अस्पताल से पहले ही सुनिश्चित कर लिया जाए।

रोबोटिक सर्जरी के संभावित फायदे

रोबोट-असिस्टेड नी रिप्लेसमेंट का प्रमुख उद्देश्य सर्जरी के दौरान अधिक सटीकता हासिल करना है। मरीज की स्थिति के अनुसार इसके संभावित लाभों में बेहतर घुटना मूवमेंट, कम दर्द और रिकवरी में मदद जैसी बातें शामिल हो सकती हैं।

कुछ मरीजों को अस्पताल में कम समय रहने और रोजमर्रा की गतिविधियों में अपेक्षाकृत जल्दी लौटने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि हर मरीज का परिणाम समान नहीं होता। उम्र, शरीर की स्थिति, घुटने की गंभीरता और अन्य बीमारियां रिकवरी को प्रभावित कर सकती हैं।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट की जरूरत, संभावित लाभ, जोखिम और लागत मरीज की स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है। इलाज का निर्णय ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही लें।

Travel Tips: सिक्किम का जुलूक है बेहद खूबसूरत, बादलों के बीच जिग-जैग रास्तों और कंचनजंघा का दिखता है शानदार नजारा

अगर आप पहाड़ों की भीड़ से दूर किसी शांत और खूबसूरत जगह पर घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो सिक्किम का जुलूक (Zuluk) आपके लिए शानदार विकल्प हो सकता है। समुद्र तल से हजारों फीट की ऊंचाई पर बसा यह छोटा-सा गांव अपनी घुमावदार सड़कों, बादलों से घिरी पहाड़ियों और हिमालय के शानदार दृश्यों के लिए जाना जाता है।

अगर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की लोकप्रिय जगहों पर कई बार घूम चुके हैं, तो इस बार सिक्किम की ऑफबीट यात्रा का प्लान बनाया जा सकता है।

पहाड़ों के बीच खूबसूरत जुलूक

जुलूक सिक्किम के पूर्वी हिस्से में स्थित एक छोटा पहाड़ी इलाका है। करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई पर होने के कारण यहां का मौसम और प्राकृतिक वातावरण काफी अलग अनुभव देता है।

चारों ओर पहाड़, बादलों की आवाजाही और शांत माहौल इसे प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षक बनाते हैं। यहां परिवार, दोस्तों या कपल्स के साथ ट्रिप प्लान की जा सकती है।

पुराने सिल्क रूट से जुड़ा है इतिहास

जुलूक की खूबसूरती के साथ इसका ऐतिहासिक महत्व भी है। यह क्षेत्र पुराने सिल्क रूट का हिस्सा रहा है। कभी यह व्यापारिक मार्ग जेलेप ला दर्रे के रास्ते तिब्बत के ल्हासा क्षेत्र से जुड़ा हुआ था।

आज भी यहां घूमते हुए पुराने व्यापारिक रास्तों और पहाड़ी मार्गों की झलक देखने को मिलती है।

थंबी व्यू पॉइंट से दिखता है कंचनजंघा

जुलूक यात्रा के दौरान थंबी व्यू पॉइंट को अपनी लिस्ट में जरूर शामिल करें। मौसम साफ होने पर यहां से हिमालय की ऊंची चोटियों और कंचनजंघा के शानदार दृश्य दिखाई दे सकते हैं।

सुबह के समय यहां का नजारा खास तौर पर खूबसूरत माना जाता है, जब सूरज की रोशनी पहाड़ों पर पड़ती है।

नाथंग वैली में बादलों के बीच सफर

जुलूक से आगे नाथंग वैली का सफर भी काफी रोमांचक है। ऊंचाई पर स्थित इस इलाके में कई बार बादल इतने करीब नजर आते हैं कि ऐसा महसूस होता है जैसे आप बादलों के बीच चल रहे हों।

प्रकृति और फोटोग्राफी पसंद करने वालों के लिए यह जगह शानदार अनुभव दे सकती है।

एलिफेंट लेक भी देखें

ओल्ड सिल्क रूट पर स्थित एलिफेंट लेक, जिसे कुपुप झील या बिटांग छो के नाम से भी जाना जाता है, यहां के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है।

झील का आकार कुछ हद तक हाथी जैसा दिखाई देता है, जिसकी वजह से इसे एलिफेंट लेक कहा जाता है। पहाड़ों के बीच मौजूद यह झील आसपास के प्राकृतिक दृश्य को और खूबसूरत बना देती है।

जुलूक की पहचान हैं जिग-जैग सड़कें

जुलूक की यात्रा का सबसे रोमांचक हिस्सा यहां की घुमावदार जिग-जैग सड़कें हैं। पहाड़ों पर एक के बाद एक बने मोड़ दूर से बेहद शानदार दिखाई देते हैं।

रोड ट्रिप पसंद करने वालों के लिए यह रास्ता यात्रा को यादगार बना सकता है। हालांकि पहाड़ी इलाका होने के कारण वाहन चलाते समय सावधानी बेहद जरूरी है।

जुलूक घूमने का सही समय

जुलूक की यात्रा के लिए आमतौर पर मार्च से मई और सितंबर से नवंबर के बीच का समय अच्छा माना जाता है। इन महीनों में मौसम अपेक्षाकृत अनुकूल रहता है और साफ मौसम मिलने पर हिमालयी नजारे बेहतर दिखाई दे सकते हैं।

सर्दियों में यहां काफी ठंड पड़ सकती है और बर्फबारी के कारण कुछ रास्तों पर यात्रा प्रभावित भी हो सकती है।

कैसे पहुंचें जुलूक?

अगर आप ट्रेन से यात्रा कर रहे हैं तो न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन (NJP) पहुंच सकते हैं। हवाई यात्रा के लिए बागडोगरा एयरपोर्ट एक प्रमुख विकल्प है।

इसके बाद सड़क मार्ग से गंगटोक और आगे रोंगली होते हुए जुलूक की ओर जाना पड़ता है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यात्रा में समय लग सकता है।

यात्रा से पहले परमिट और सड़क की मौजूदा स्थिति जरूर जांच लें, क्योंकि जुलूक सीमा क्षेत्र के करीब स्थित है और यहां कुछ इलाकों में प्रवेश के लिए अनुमति की आवश्यकता हो सकती है।