HomeHEALTHHealth Update:सफदरजंग अस्पताल में पहली रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सफल, जानिए कितनी हो...

Health Update:सफदरजंग अस्पताल में पहली रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सफल, जानिए कितनी हो सकती है लागत और मुफ्त इलाज की पात्रता

दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में आधुनिक ऑर्थोपेडिक इलाज की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। VMMC और सफदरजंग अस्पताल के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्थोपेडिक्स में पहली बार रोबोट-असिस्टेड टोटल नी रिप्लेसमेंट सफलतापूर्वक की गई। यह सर्जरी 22 अगस्त को 75 वर्षीय आर्थिक रूप से कमजोर मरीज की हुई। खास बात यह रही कि आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीज का इलाज बिना किसी भुगतान के किया गया।

रोबोटिक नी सर्जरी क्या होती है?

रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट में सर्जन की मदद के लिए विशेष रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें ऑपरेशन रोबोट अपने आप नहीं करता, बल्कि पूरी प्रक्रिया डॉक्टर के नियंत्रण में रहती है। रोबोटिक सिस्टम सर्जन को घुटने के क्षतिग्रस्त हिस्से की पहचान और सर्जरी के दौरान अधिक सटीकता हासिल करने में मदद करता है।

इस तकनीक का इस्तेमाल खास तौर पर घुटने के रिप्लेसमेंट को अधिक सटीक बनाने के उद्देश्य से किया जाता है। मरीज की स्थिति के आधार पर इससे बेहतर मूवमेंट और रिकवरी में मदद मिल सकती है।

रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट में कितना खर्च आता है?

निजी अस्पतालों में रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट की अनुमानित लागत करीब 2.10 लाख से 4.20 लाख रुपये प्रति घुटना हो सकती है। हालांकि यह कोई तय कीमत नहीं है।

अस्पताल, सर्जन की फीस, इस्तेमाल होने वाले इंप्लांट, मरीज की स्वास्थ्य स्थिति और अस्पताल में रहने की अवधि के अनुसार कुल खर्च अलग-अलग हो सकता है। इसलिए सर्जरी से पहले अस्पताल से पैकेज और अतिरिक्त खर्चों की पूरी जानकारी लेना जरूरी है।

किन वजहों से बढ़ सकता है खर्च?

रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण की कुल लागत कई चीजों पर निर्भर करती है।

  • इस्तेमाल होने वाले इंप्लांट का प्रकार और ब्रांड
  • सर्जन और मेडिकल टीम की फीस
  • अस्पताल में भर्ती रहने का खर्च
  • ऑपरेशन से पहले होने वाली जांच
  • इमेजिंग और अन्य मेडिकल टेस्ट
  • मरीज को पहले से मौजूद अन्य स्वास्थ्य समस्याएं
  • सर्जरी के बाद फिजियोथेरेपी और रिकवरी से जुड़ी सेवाएं

विदेशी या प्रीमियम इंप्लांट का चयन करने पर खर्च और बढ़ सकता है।

सफदरजंग में मरीज का इलाज मुफ्त कैसे हुआ?

सफदरजंग अस्पताल में जिस 75 वर्षीय मरीज की रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट की गई, वह आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से संबंधित थे। उन्हें आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज की सुविधा मिली। इसके चलते इस प्रक्रिया के लिए मरीज को अपनी जेब से भुगतान नहीं करना पड़ा।

यह कदम सरकारी अस्पतालों में अत्याधुनिक ऑर्थोपेडिक तकनीक को जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आयुष्मान भारत के तहत कौन करा सकता है इलाज?

अगर कोई मरीज आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज की सुविधा लेना चाहता है, तो सबसे पहले अपनी पात्रता की पुष्टि करना जरूरी है। अस्पताल में मौजूद आयुष्मान भारत डेस्क पर जाकर यह पता किया जा सकता है कि संबंधित मरीज और उसकी बीमारी के लिए कौन-कौन सी सेवाएं योजना के अंतर्गत उपलब्ध हैं।

यह भी जरूरी है कि किसी खास रोबोटिक प्रक्रिया की उपलब्धता और योजना के तहत उसका कवरेज अस्पताल से पहले ही सुनिश्चित कर लिया जाए।

रोबोटिक सर्जरी के संभावित फायदे

रोबोट-असिस्टेड नी रिप्लेसमेंट का प्रमुख उद्देश्य सर्जरी के दौरान अधिक सटीकता हासिल करना है। मरीज की स्थिति के अनुसार इसके संभावित लाभों में बेहतर घुटना मूवमेंट, कम दर्द और रिकवरी में मदद जैसी बातें शामिल हो सकती हैं।

कुछ मरीजों को अस्पताल में कम समय रहने और रोजमर्रा की गतिविधियों में अपेक्षाकृत जल्दी लौटने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि हर मरीज का परिणाम समान नहीं होता। उम्र, शरीर की स्थिति, घुटने की गंभीरता और अन्य बीमारियां रिकवरी को प्रभावित कर सकती हैं।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट की जरूरत, संभावित लाभ, जोखिम और लागत मरीज की स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है। इलाज का निर्णय ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही लें।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments