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Travel Tips:Dhuandhar Falls और संगमरमर की चट्टानों का जादू, भेड़ाघाट में छिपे हैं करोड़ों साल पुराने रहस्य

अगर आप ऐसी जगह घूमने का प्लान बना रहे हैं, जहां प्राकृतिक खूबसूरती के साथ रोमांच और इतिहास का अनोखा मेल देखने को मिले, तो मध्य प्रदेश का भेड़ाघाट आपके लिए शानदार विकल्प हो सकता है। जबलपुर के पास स्थित यह पर्यटन स्थल नर्मदा नदी, विशाल संगमरमर की चट्टानों और धुआंधार जलप्रपात के लिए जाना जाता है। यहां की खूबसूरत वादियां और नदी के बीच खड़ी सफेद चट्टानें पर्यटकों को अलग ही अनुभव देती हैं।

100 फीट ऊंची संगमरमर की चट्टानों का नजारा

भेड़ाघाट की सबसे खास पहचान नर्मदा नदी के दोनों किनारों पर मौजूद ऊंची संगमरमर की चट्टानें हैं। कई जगहों पर ये चट्टानें करीब 100 फीट तक ऊंची दिखाई देती हैं। नदी के बहाव ने लंबे समय में इनके बीच एक शानदार घाटी का निर्माण किया है।

दिन के समय सूर्य की रोशनी पड़ने पर सफेद और अलग-अलग रंगों वाली चट्टानों का नजारा बेहद आकर्षक लगता है। वहीं रात में चांदनी के बीच इनका रूप और भी खूबसूरत दिखाई देता है। नर्मदा में नाव की सवारी करते हुए इन चट्टानों को करीब से देखने का अनुभव पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है।

करोड़ों साल पुराने भूगर्भीय रहस्यों से जुड़ा इलाका

भेड़ाघाट सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि भूगर्भीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। नर्मदा घाटी का यह क्षेत्र लंबे समय में हुए प्राकृतिक बदलावों का प्रमाण देता है। यहां मिलने वाली संगमरमर की चट्टानों ने इस इलाके को एक अलग पहचान दी है।

जबलपुर और आसपास के नर्मदा घाटी क्षेत्र में प्राचीन जीवाश्मों से जुड़े प्रमाण भी मिल चुके हैं। मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में डायनासोर के अंडों और जीवाश्मों की खोज ने इस पूरे क्षेत्र को वैज्ञानिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी खास बना दिया है।

धुआंधार फॉल्स की गूंजती आवाज

भेड़ाघाट की यात्रा धुआंधार जलप्रपात देखे बिना अधूरी मानी जाती है। यहां नर्मदा नदी का पानी चट्टानों के बीच से तेज रफ्तार के साथ नीचे गिरता है। पानी की बूंदें हवा में इस तरह फैलती हैं कि दूर से धुएं जैसा एहसास होता है। इसी वजह से इसका नाम धुआंधार पड़ा।

बारिश के मौसम में जब नदी का जलस्तर बढ़ता है, तब झरने का स्वरूप और भी ज्यादा प्रभावशाली नजर आता है। पानी की तेज आवाज और आसपास की चट्टानों का दृश्य इसे बेहद खास बना देता है।

फिल्मों की शूटिंग के लिए भी पसंदीदा जगह

भेड़ाघाट की खूबसूरती ने फिल्म निर्माताओं को भी लंबे समय से आकर्षित किया है। यहां बॉलीवुड की कई फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। शाहरुख खान और तापसी पन्नू की फिल्म ‘डंकी’ में भी इस क्षेत्र के खूबसूरत दृश्य नजर आए थे।

इसके अलावा ‘मोहेंजो दारो’, ‘बॉबी’, ‘प्राण जाए पर वचन न जाए’ और ‘जिस देश में गंगा बहती है’ जैसी फिल्मों में भी इस इलाके के दृश्य देखने को मिले हैं।

चौंसठ योगिनी मंदिर भी जरूर देखें

भेड़ाघाट के आसपास घूमने के दौरान चौंसठ योगिनी मंदिर भी देखा जा सकता है। यह नर्मदा नदी के पास ऊंचाई पर स्थित एक ऐतिहासिक मंदिर है। मंदिर परिसर में देवी की विभिन्न योगिनी स्वरूपों की प्रतिमाएं स्थापित हैं और बीच में भगवान शिव की प्रतिमा भी मौजूद है।

यह स्थान धार्मिक महत्व के साथ-साथ आसपास के प्राकृतिक नजारों के लिए भी जाना जाता है।

बैलेंसिंग रॉक्स का अनोखा नजारा

जबलपुर क्षेत्र में मौजूद बैलेंसिंग रॉक्स भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। बड़ी-बड़ी चट्टानों का एक-दूसरे के ऊपर इस तरह संतुलित दिखाई देना अपने आप में बेहद दिलचस्प है।

इन प्राकृतिक संरचनाओं को देखकर ऐसा लगता है जैसे इन्हें किसी ने बेहद सोच-समझकर रखा हो, जबकि ये प्राकृतिक भूगर्भीय प्रक्रियाओं का परिणाम हैं।

कैसे पहुंचें भेड़ाघाट?

भेड़ाघाट जबलपुर शहर से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जबलपुर रेलवे स्टेशन से सड़क मार्ग के जरिए यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। हवाई यात्रा करने वाले लोग जबलपुर एयरपोर्ट तक पहुंचने के बाद टैक्सी या अन्य साधनों से भेड़ाघाट जा सकते हैं।

यहां नर्मदा बोटिंग, धुआंधार फॉल्स, संगमरमर की घाटी, चौंसठ योगिनी मंदिर और आसपास के प्राकृतिक स्थलों को एक ही ट्रिप में देखा जा सकता है। अगर आपको प्रकृति, इतिहास और रोमांच तीनों का अनुभव एक साथ चाहिए, तो भेड़ाघाट एक यादगार यात्रा साबित हो सकता है।

योगी सरकार का बड़ा फैसला : MBBS इंटर्न का स्टाइपेंड ₹12 हजार से बढ़कर ₹25 हजार, सरोजनी नगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने जताया आभार

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS इंटर्न के लिए योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने MBBS इंटर्न का मासिक स्टाइपेंड ₹12,000 से बढ़ाकर ₹25,000 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे प्रदेश के युवा चिकित्सकों के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने इस निर्णय पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि स्टाइपेंड में यह वृद्धि सरकार की युवा हितैषी सोच और प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने पहले उठाया था मुद्दा

डॉ. राजेश्वर सिंह ने 10 जुलाई 2026 को पत्र संख्या RS/5022/MIN/26 के माध्यम से मुख्यमंत्री के समक्ष MBBS इंटर्न के स्टाइपेंड में वृद्धि का विषय उठाया था।

अपने पत्र में उन्होंने MBBS इंटर्नशिप की कठिन एवं जिम्मेदारीपूर्ण प्रकृति, लगातार बढ़ती महंगाई और अस्पतालों में इंटर्न की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए स्टाइपेंड बढ़ाने का अनुरोध किया था।

अब कैबिनेट द्वारा स्टाइपेंड बढ़ाने के निर्णय के बाद डॉ. सिंह ने इसे युवाओं और प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था के लिए सकारात्मक कदम बताया है।

हजारों युवा चिकित्सकों को मिलेगी आर्थिक राहत

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि ₹12,000 से ₹25,000 की वृद्धि से प्रदेश के हजारों MBBS इंटर्न को महत्वपूर्ण आर्थिक राहत मिलेगी। इससे उनका मनोबल बढ़ेगा और वे अपने चिकित्सकीय प्रशिक्षण के साथ-साथ मरीजों की सेवा पर अधिक प्रभावी ढंग से ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।

उन्होंने कहा कि मेडिकल इंटर्न अस्पतालों में मरीजों की देखभाल, चिकित्सकीय प्रक्रियाओं और स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप सम्मानजनक स्टाइपेंड मिलना आवश्यक है।

‘युवा चिकित्सकों को सशक्त बनाना स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश’

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि युवा चिकित्सकों को सशक्त बनाना केवल उन्हें आर्थिक राहत देना नहीं, बल्कि मजबूत और स्वस्थ उत्तर प्रदेश के निर्माण में महत्वपूर्ण निवेश है।

उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से चिकित्सा क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं को प्रोत्साहन मिलेगा और प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को भी इसका सकारात्मक लाभ मिलेगा।

स्टाइपेंड में दोगुने से अधिक की यह वृद्धि प्रदेश के MBBS इंटर्न के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।

ट्रंप का मुनीर को फोन, तेहरान पहुंचकर ईरान को फिर बातचीत की मेज पर लाने की अपील

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की तेहरान यात्रा को काफी अहम माना जा रहा है। 24 अगस्त 2026 को ईरान पहुंचे मुनीर की इस यात्रा से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनसे फोन पर बातचीत की थी। रिपोर्टों के मुताबिक ट्रंप ने मुनीर से ईरान को दोबारा बातचीत के रास्ते पर लाने में मदद करने को कहा था।

मुनीर से ट्रंप ने क्यों की बात?

रिपोर्ट के अनुसार, मुनीर से संपर्क करने की पहल अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से हुई थी। यह बातचीत सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आई थी। हालांकि, व्हाइट हाउस की ओर से इस फोन कॉल और उसमें हुई बातचीत को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई।

ट्रंप का फोन ऐसे समय आया जब अमेरिका ईरान पर दबाव बढ़ा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि ईरान को आर्थिक मदद या समर्थन देने वाले देशों को गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। दूसरी ओर ईरान ने भी दबाव बढ़ने की स्थिति में फारस की खाड़ी से होने वाले तेल निर्यात को बाधित करने की धमकी दी है।

ईरानी नेतृत्व के करीबियों से मुलाकात

असीम मुनीर के साथ पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी तेहरान पहुंचे। पाकिस्तानी सेना ने यात्रा की पुष्टि करते हुए इसे क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम करने की कोशिश बताया।

मुनीर की मुलाकात ईरानी नेतृत्व से जुड़े वरिष्ठ रणनीतिकारों से होने की उम्मीद है। बातचीत में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने, क्षेत्रीय सुरक्षा और हालिया घटनाक्रम जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

इसके अलावा ईरान समर्थित हूती संगठन और पाकिस्तान के करीबी सहयोगी सऊदी अरब के बीच हुए हालिया तनाव को लेकर भी दोनों देशों के बीच बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

अमेरिका-ईरान के बीच भरोसे की कमी

रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच इस समय सबसे बड़ी समस्या आपसी विश्वास की कमी है। जून 2026 में दोनों देशों के बीच अंतरिम शांति समझौते की कोशिश हुई थी, लेकिन बाद में दोबारा तनाव बढ़ने से यह प्रक्रिया कमजोर पड़ गई।

पाकिस्तानी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि मुनीर की यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच बनी दूरी को कम करना और बातचीत के लिए रास्ता तैयार करना है।

छह महीने में चौथी बार तेहरान पहुंचे मुनीर

असीम मुनीर की यह छह महीने से भी कम अवधि में चौथी तेहरान यात्रा बताई जा रही है। लगातार हो रही यात्राओं से पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका की अहमियत का अंदाजा लगाया जा रहा है।

ईरानी पक्ष की प्राथमिक मांग बताई जा रही है कि अमेरिका पहले उन प्रतिबद्धताओं को पूरा करे, जिन पर दोनों देशों के बीच हुए समझौते के दौरान सहमति बनी थी। ऐसे में मुनीर का यह दौरा अमेरिका-ईरान के बीच भविष्य की बातचीत के लिए माहौल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Global Firepower रैंकिंग में भारत चौथे पायदान पर, पाकिस्तान 14वें स्थान पर

दुनिया की सैन्य शक्तियों से जुड़ी 2026 की ग्लोबल फायरपावर रैंकिंग में भारत ने एक बार फिर मजबूत स्थिति दर्ज की है। 145 देशों की सूची में भारत को चौथा स्थान मिला है। इस सूची में अमेरिका सबसे ऊपर है, जबकि रूस दूसरे और चीन तीसरे पायदान पर है। पाकिस्तान को 14वें स्थान पर रखा गया है।

रैंकिंग के मुताबिक भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य शक्ति के आकलन में 10 स्थान का अंतर है। हालांकि यह रैंकिंग किसी युद्ध के संभावित नतीजे का सीधा अनुमान नहीं लगाती, बल्कि विभिन्न सैन्य और रणनीतिक संसाधनों के आधार पर देशों की क्षमता का आकलन करती है।

60 से ज्यादा मानकों पर तैयार होती है रैंकिंग

ग्लोबल फायरपावर की रैंकिंग तैयार करने में 60 से अधिक अलग-अलग कारकों को शामिल किया जाता है। इनमें सक्रिय सैन्यकर्मियों की संख्या, रिजर्व बल, टैंक, लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर, युद्धपोत, रक्षा बजट, लॉजिस्टिक्स क्षमता, प्राकृतिक संसाधन और भौगोलिक स्थिति जैसे पहलू शामिल हैं।

इस आकलन में पावर इंडेक्स स्कोर का इस्तेमाल किया जाता है। इस स्कोर का मूल्य जितना कम होता है, उस देश की सैन्य क्षमता उतनी ही मजबूत मानी जाती है।

अमेरिका सबसे ऊपर, रूस और चीन भी टॉप पर

2026 की सूची में अमेरिका 0.0741 के पावर इंडेक्स के साथ पहले स्थान पर है। अमेरिका की ताकत में उसकी बड़ी वायुसेना, आधुनिक नौसैनिक बेड़ा, उन्नत सैन्य तकनीक और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सैन्य मौजूदगी अहम भूमिका निभाती है।

रूस 0.0791 के स्कोर के साथ दूसरे स्थान पर है। उसके पास बड़ी संख्या में सैन्यकर्मी, टैंक, मिसाइल और अन्य सैन्य संसाधन हैं।

चीन 0.0919 के पावर इंडेक्स के साथ तीसरे स्थान पर है। चीन पिछले कुछ वर्षों में अपनी नौसेना, वायुसेना, मिसाइल क्षमता और आधुनिक सैन्य तकनीक को तेजी से विकसित कर रहा है।

भारत चौथे पायदान पर

भारत को 0.1346 के पावर इंडेक्स स्कोर के साथ दुनिया की चौथी सबसे मजबूत सैन्य शक्ति माना गया है। देश के पास बड़ी संख्या में सैन्यकर्मी होने के साथ-साथ मजबूत थलसेना, वायुसेना और नौसेना है।

रैंकिंग में भारत के पास करीब 49.58 लाख कुल सैन्यकर्मी बताए गए हैं। इस आंकड़े में सक्रिय सैनिकों के साथ रिजर्व और अन्य संबंधित बलों को भी शामिल किया गया है।

वायु शक्ति की बात करें तो भारत के पास कुल करीब 2,183 विमान बताए गए हैं। इनमें लगभग 476 लड़ाकू विमान और 594 हेलिकॉप्टर शामिल हैं। भारत के बख्तरबंद सैन्य संसाधनों में करीब 3,913 टैंक भी शामिल बताए गए हैं।

भारत की नौसैनिक क्षमता भी उसकी सैन्य ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। देश के पास युद्धपोतों और अन्य नौसैनिक संसाधनों का बड़ा बेड़ा है, जो समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक अभियानों में अहम भूमिका निभाता है।

पाकिस्तान 14वें स्थान पर

पाकिस्तान को इस रैंकिंग में 14वां स्थान दिया गया है। उसका पावर इंडेक्स स्कोर 0.2626 बताया गया है। इस हिसाब से भारत उससे 10 पायदान आगे है।

सैन्य संसाधनों की तुलना करें तो पाकिस्तान के पास करीब 1,397 विमान बताए गए हैं, जबकि भारत के पास 2,183 विमान हैं। पाकिस्तान के पास लगभग 331 लड़ाकू विमान हैं और भारत के पास करीब 476 फाइटर विमान बताए गए हैं।

टैंकों के मामले में भी भारत आगे है। भारत के पास करीब 3,913 टैंक बताए गए हैं, जबकि पाकिस्तान के पास लगभग 2,677 टैंक हैं।

टॉप-10 में कौन से देश?

2026 की सैन्य रैंकिंग में शीर्ष 10 देशों में अमेरिका, रूस, चीन और भारत के बाद दक्षिण कोरिया, फ्रांस, जापान, ब्रिटेन, तुर्किये और इटली शामिल हैं।

इस सूची से साफ है कि एशिया की सैन्य ताकत भी वैश्विक स्तर पर तेजी से प्रभावशाली हो रही है। भारत और चीन पहले चार स्थानों में शामिल हैं, जबकि दक्षिण कोरिया और जापान भी शीर्ष 10 में जगह बनाए हुए हैं।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है चौथा स्थान?

भारत का चौथे स्थान पर रहना देश की सैन्य क्षमता और रणनीतिक संसाधनों की मजबूती को दर्शाता है। बड़ी सैन्य संख्या, लड़ाकू विमान, टैंक, नौसैनिक क्षमता, लॉजिस्टिक्स और रक्षा संसाधन भारत को दुनिया की प्रमुख सैन्य शक्तियों में शामिल करते हैं।

हालांकि, किसी देश की वास्तविक युद्ध क्षमता को केवल एक रैंकिंग से पूरी तरह तय नहीं किया जा सकता। युद्ध की स्थिति में सैन्य प्रशिक्षण, रणनीति, तकनीकी श्रेष्ठता, खुफिया जानकारी, हथियारों की गुणवत्ता, आर्थिक क्षमता, सहयोगी देश और युद्ध की परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण होती हैं।

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि ग्लोबल फायरपावर का पावर इंडेक्स परमाणु हथियारों की वास्तविक युद्ध क्षमता को सीधे तौर पर स्कोर में शामिल नहीं करता। इसलिए इस रैंकिंग को देशों की समग्र सैन्य क्षमता का एक आकलन माना जाना चाहिए, न कि संभावित युद्ध के परिणाम की निश्चित भविष्यवाणी।

Health News:दिल्ली-कर्नाटक में बढ़े H1N1 के मामले, जानें संक्रमण से बचने के लिए क्या करें और किन बातों से रहें दूर

देश के कई हिस्सों में मौसमी इन्फ्लुएंजा के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। दिल्ली और कर्नाटक में H1N1 संक्रमण के आंकड़े बढ़ने के बाद स्वास्थ्य विभागों ने लोगों को सतर्क रहने और संक्रमण से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है। हालांकि, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार मामलों में बढ़ोतरी किसी नए H1N1 स्ट्रेन के कारण नहीं बताई गई है।

दिल्ली में तेजी से बढ़े H1N1 के मामले

नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के आंकड़ों के मुताबिक, 20 अगस्त 2026 तक दिल्ली में H1N1 के 1,777 मामले दर्ज किए गए थे। पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 229 थी। रिपोर्टों के अनुसार, इसके बाद राजधानी में कुल मामलों का आंकड़ा 2,000 के पार पहुंच गया।

मामलों में वृद्धि को देखते हुए दिल्ली के अस्पतालों ने इन्फ्लुएंजा और उससे जुड़ी जटिलताओं वाले मरीजों के इलाज की तैयारियां बढ़ाई हैं। कोलकाता और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी इन्फ्लुएंजा के मामलों में बढ़ोतरी की सूचना सामने आई है।

कर्नाटक में भी हजारों मामले

कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफॉर्मेशन प्लेटफॉर्म (IHIP) पर उपलब्ध निगरानी आंकड़ों के आधार पर 22 अगस्त 2026 तक राज्य के 32 जिलों में लैब से पुष्टि किए गए 4,212 इन्फ्लुएंजा पॉजिटिव मामले दर्ज किए गए।

तुलना करें तो 2025 में कर्नाटक में ऐसे 4,583 मामले सामने आए थे, जबकि 2024 में इनकी संख्या 3,903 थी। स्वास्थ्य विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है।

संक्रमण से बचने के लिए क्या करें?

स्वास्थ्य विभाग की सलाह के अनुसार, इन्फ्लुएंजा से बचाव के लिए रोजमर्रा की कुछ सावधानियां बेहद महत्वपूर्ण हैं।

  • खांसते या छींकते समय नाक और मुंह को ढकें।
  • साबुन और पानी से नियमित रूप से हाथ साफ करें।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थ लेते रहें।
  • फ्लू जैसे लक्षण होने पर दूसरों से दूरी बनाए रखें।
  • संक्रमण की आशंका होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
  • बीमार व्यक्ति को आवश्यकता के अनुसार घर पर अलग रखने की कोशिश करें।

किन गलतियों से बचना चाहिए?

संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए कुछ आदतों से दूरी बनाना भी जरूरी है।

  • आंख, नाक और मुंह को बार-बार हाथ लगाने से बचें।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं न लें।
  • फ्लू के लक्षण होने पर हाथ मिलाने और नजदीकी संपर्क से बचें।
  • इस्तेमाल किए हुए रुमाल या नेपकिन को दोबारा इस्तेमाल न करें।
  • बीमारी के दौरान अनावश्यक रूप से भीड़ वाली जगहों पर न जाएं।

अस्पतालों को तैयार रखने के निर्देश

कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा संस्थानों को इन्फ्लुएंजा से निपटने के लिए जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा है। इनमें PPE किट, N95 मास्क और जरूरत के अनुसार ओसेल्टामिविर जैसी दवाएं शामिल हैं।

स्वास्थ्यकर्मियों को ILI यानी इन्फ्लुएंजा जैसी बीमारी और SARI यानी गंभीर श्वसन संक्रमण की शुरुआती पहचान, मरीज की स्थिति का आकलन और उचित प्रबंधन को लेकर भी सतर्क किया गया है।

निजी अस्पतालों पर भी निगरानी

निजी स्वास्थ्य संस्थानों को H1N1 की जांच, टेस्टिंग और उपचार के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करने की सलाह दी गई है। साथ ही निगरानी व्यवस्था के तहत मामलों की रिपोर्टिंग करने के निर्देश दिए गए हैं।

स्वास्थ्य विभागों का कहना है कि फिलहाल लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। साफ-सफाई का ध्यान रखना, संक्रमण से बचाव के उपाय अपनाना और फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर उचित चिकित्सकीय सलाह लेना सबसे जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्वास्थ्य आंकड़ों और विभागीय सलाह पर आधारित है। इसे व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह न मानें। तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, लगातार खांसी या अन्य गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।