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Health News:H1N1 में ILI और SARI के लक्षणों में क्या फर्क? इन संकेतों को समझना है बेहद जरूरी

मौसम में बदलाव के साथ बुखार, खांसी, गले में खराश और थकान जैसी समस्याएं अक्सर देखने को मिलती हैं। H1N1 फ्लू में भी इसी तरह के लक्षण सामने आ सकते हैं। हालांकि, हर मरीज में संक्रमण की गंभीरता समान नहीं होती।

फ्लू और सांस से जुड़ी बीमारियों की स्थिति समझने के लिए डॉक्टर अक्सर ILI (Influenza Like Illness) और SARI (Severe Acute Respiratory Infection) जैसे मेडिकल टर्म का इस्तेमाल करते हैं। दोनों स्थितियों में कुछ लक्षण समान हो सकते हैं, लेकिन SARI में सांस संबंधी समस्या अधिक गंभीर रूप ले सकती है।

ILI में दिखाई देते हैं फ्लू जैसे लक्षण

ILI यानी Influenza Like Illness में व्यक्ति को सामान्य तौर पर फ्लू जैसे लक्षण महसूस होते हैं। अचानक बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द और थकान इसकी आम शिकायतों में शामिल हैं।

कुछ लोगों को नाक बहने या नाक बंद होने की समस्या भी हो सकती है। हालांकि, ILI के लक्षण होने का यह मतलब नहीं है कि व्यक्ति को H1N1 ही है। कई अन्य वायरल संक्रमणों में भी इसी तरह के लक्षण देखने को मिल सकते हैं।

SARI में सांस की परेशानी हो सकती है गंभीर

SARI यानी Severe Acute Respiratory Infection में संक्रमण के साथ सांस से जुड़ी दिक्कत ज्यादा गंभीर हो सकती है। बुखार और खांसी के अलावा सांस फूलना, सांस लेने में परेशानी या ऑक्सीजन लेवल कम होना जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं।

अगर सांस से जुड़ी समस्या तेजी से बढ़ रही हो या मरीज की हालत बिगड़ रही हो, तो इंतजार करने के बजाय जल्द मेडिकल सहायता लेना जरूरी है।

ILI और SARI में मुख्य अंतर

दोनों के बीच सबसे बड़ा अंतर सांस से जुड़ी परेशानी की गंभीरता का है।

ILI में फ्लू जैसे लक्षण प्रमुख होते हैं और हर मरीज की स्थिति गंभीर हो, यह जरूरी नहीं है। वहीं SARI में सांस लेने से जुड़ी गंभीर समस्या सामने आ सकती है, जिसके लिए चिकित्सकीय जांच और निगरानी की जरूरत पड़ सकती है।

आसान भाषा में समझें तो ILI को फ्लू जैसे लक्षणों की स्थिति के तौर पर देखा जाता है, जबकि SARI में संक्रमण के साथ गंभीर श्वसन संबंधी परेशानी हो सकती है।

H1N1 में इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

अगर बुखार और खांसी के साथ सांस लेने में दिक्कत, सांस फूलना, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी या तेजी से बिगड़ती तबीयत जैसे संकेत दिखाई दें, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।

बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों में फ्लू से गंभीर जटिलताओं का जोखिम अधिक हो सकता है। ऐसे मामलों में लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

केवल लक्षणों से H1N1 की पुष्टि नहीं होती

ILI या SARI जैसे लक्षण देखकर खुद से यह तय नहीं किया जा सकता कि व्यक्ति को H1N1 है या कोई अन्य संक्रमण। अलग-अलग वायरल और सांस संबंधी बीमारियों में मिलते-जुलते लक्षण हो सकते हैं।

जरूरत पड़ने पर डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार जांच या अन्य टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। इसलिए तेज बुखार, लगातार खांसी या सांस लेने में परेशानी होने पर खुद दवा लेने के बजाय उचित मेडिकल सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित है।

Sports News:35 रन पर ढेर हुई ऑस्ट्रिया की टीम, 8 बल्लेबाज रहे शून्य पर; तुर्की ने 33 गेंद में जीता मैच

2026 महिला कॉन्टिनेंटल कप का आगाज ही एकतरफा मुकाबले से हुआ। तुर्की और ऑस्ट्रिया के बीच खेले गए मैच में ऑस्ट्रिया की बल्लेबाजी पूरी तरह बिखर गई और पूरी टीम महज 35 रन पर ऑलआउट हो गई। हैरानी की बात यह रही कि टीम की 8 बल्लेबाज अपना खाता तक नहीं खोल सकीं।

ऑस्ट्रिया की ओर से सिर्फ तीन बल्लेबाज ही रन बना सकीं, लेकिन इनमें से कोई भी दहाई के आंकड़े तक नहीं पहुंची। टीम के बल्ले से कुल 16 रन आए, जबकि 19 रन अतिरिक्त के रूप में मिले।

8.1 ओवर में 35 रन पर सिमटी ऑस्ट्रिया

टॉस जीतकर तुर्की ने पहले गेंदबाजी चुनी। ऑस्ट्रिया की शुरुआत बेहद खराब रही और विकेट लगातार गिरते रहे। टीम 8.1 ओवर में सिर्फ 35 रन बनाकर पवेलियन लौट गई।

श्रीया रेड्डी ने 19 गेंदों पर 8 रन बनाकर टीम की ओर से सबसे ज्यादा रन बनाए। शीतल भारद्वाज ने 13 गेंदों में 5 रन बनाए, जबकि विकेटकीपर हादिया सिद्दीकी के बल्ले से 3 रन निकले।

इन तीनों के अलावा बाकी बल्लेबाज रन बनाने में नाकाम रहीं। ऑस्ट्रिया की पूरी पारी में एक भी बाउंड्री नहीं लगी।

एक्स्ट्रा से आए बल्लेबाजों से ज्यादा रन

ऑस्ट्रिया की पारी में बल्लेबाजों से ज्यादा रन एक्स्ट्रा के जरिए आए। टीम को अतिरिक्त के रूप में 19 रन मिले, जिसमें 14 रन वाइड के थे।

तुर्की की गेंदबाज हासेर सेलिक सबसे सफल रहीं। उन्होंने 2 ओवर में सिर्फ 6 रन देकर 4 विकेट झटके। कप्तान कुबरा कनावरसी ने 2 ओवर में 5 रन देकर 3 विकेट हासिल किए, जबकि एजगी नूर किलिच को एक सफलता मिली।

33 गेंद में तुर्की ने हासिल किया लक्ष्य

35 रन के छोटे लक्ष्य का पीछा करने उतरी तुर्की ने शुरुआत में ही मुकाबले पर पकड़ बना ली। टीम ने सिर्फ 5.3 ओवर यानी 33 गेंदों में 2 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया।

जेहरा एंडर ने नाबाद 13 रन बनाए, जिसमें दो चौके शामिल थे। वहीं मेलिके बायराम ने एक छक्के की मदद से नाबाद 11 रन बनाए। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए सिर्फ 15 गेंदों में 27 रन की तेज साझेदारी कर टीम को जीत तक पहुंचाया।

तुर्की की कप्तान कुबरा कनावरसी बिना खाता खोले आउट हुईं, जबकि सुजान तुरान ने एक चौके की मदद से 9 रन बनाए।

ऑस्ट्रिया की ओर से एम. पथिरानेहेलागे ने तुर्की के दो विकेट हासिल किए, लेकिन वह अपनी टीम को बेहद आसान लक्ष्य का बचाव करने से नहीं बचा सकीं।

नेपाल में जलप्रलय के बाद चीन भी एक्शन में, शी जिनपिंग ने राहत-बचाव तेज करने के दिए निर्देश

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद चीन ने भी राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दक्षिण-पश्चिम चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित ग्यिरोंग बॉर्डर पोर्ट पर प्रभावित लोगों की मदद के लिए व्यापक अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

बताया जा रहा है कि 26 अगस्त की सुबह नेपाल की तरफ अचानक भूस्खलन की घटना हुई थी। इसके बाद कई लोग हताहत हुए और बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की सूचना सामने आई। स्थिति को देखते हुए शी जिनपिंग ने लापता लोगों की तलाश तेज करने, घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने पर जोर दिया।

बचाव दल को सावधानी से काम करने का निर्देश

चीनी राष्ट्रपति ने राहत एवं बचाव टीमों को पूरी सावधानी के साथ अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बचाव कार्य के दौरान उचित तकनीक और सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल किया जाए, ताकि राहतकर्मियों की जान को भी खतरा न हो।

चीन में इस समय बाढ़ और तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बना हुआ है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन को संभावित गंभीर परिस्थितियों से निपटने के लिए पहले से तैयारी रखने और लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए हैं।

चीनी पीएम ली कियांग ने भी दिए निर्देश

नेपाल में हुई आपदा को लेकर चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग ने भी संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने लापता लोगों की वास्तविक संख्या का पता लगाने और नेपाल के संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने को कहा है।

वहीं, उप प्रधानमंत्री झांग गुओकिंग राहत और बचाव अभियान की स्थिति का जायजा लेने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रभावित क्षेत्र में पहुंचे हैं। स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियां लापता लोगों की तलाश और घायलों की सहायता में जुटी हुई हैं।

नेपाल में फ्लैश फ्लड ने मचाई भारी तबाही

नेपाल में अचानक आई फ्लैश फ्लड और भूस्खलन से कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ है। अब तक बड़ी संख्या में शव बरामद किए जाने और सैकड़ों लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। लापता लोगों में भारतीय नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं।

आपदा के बाद भारत ने भी नेपाल की मदद के लिए राहत अभियान शुरू किया है। भारतीय वायुसेना का C-130J विमान जरूरी राहत सामग्री और मेडिकल सामान लेकर नेपाल पहुंचाया जा रहा है।

आगे भी जरूरत के मुताबिक C-17 और C-130 विमानों के जरिए राहत सामग्री भेजने की तैयारी है। इसके अलावा प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हेलीकॉप्टरों को भी तैयार रखा गया है।

नेपाल में लगातार जारी राहत और बचाव अभियान के बीच भारत और चीन दोनों की ओर से सहायता पहुंचाई जा रही है। अधिकारियों की प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना और जरूरी राहत उपलब्ध कराना है।

Health Tips:स्वाइन फ्लू का टीका कब लगवाना चाहिए? H1N1 वैक्सीन को लेकर जानें 10 जरूरी बातें

दिल्ली-NCR समेत कई इलाकों में H1N1 यानी इन्फ्लूएंजा को लेकर लोगों की चिंता बढ़ जाती है, खासकर जब फ्लू के मामले बढ़ने लगते हैं। ऐसे में सबसे आम सवाल यही होता है कि फ्लू की वैक्सीन कब लगवानी चाहिए और क्या H1N1 के लिए अलग टीका जरूरी है?

दरअसल, H1N1 अब मौसमी इन्फ्लूएंजा का ही हिस्सा माना जाता है। इसलिए इसके लिए अलग से कोई विशेष वैक्सीन तलाशने की जरूरत नहीं होती। सीजनल इन्फ्लूएंजा वैक्सीन में H1N1 सहित कुछ प्रमुख फ्लू स्ट्रेन के खिलाफ सुरक्षा शामिल हो सकती है।

आइए जानते हैं फ्लू वैक्सीन से जुड़े जरूरी सवालों के जवाब।

1. क्या H1N1 के लिए अलग वैक्सीन होती है?

आम तौर पर H1N1 के नाम से अलग वैक्सीन लेने की जरूरत नहीं होती। मौसमी इन्फ्लूएंजा वैक्सीन में उस समय फैलने वाले प्रमुख वायरस स्ट्रेन को ध्यान में रखा जाता है, जिसमें H1N1 भी शामिल हो सकता है।

हालांकि, वैक्सीन की संरचना समय और मौसम के अनुसार अपडेट की जाती है। इसलिए टीका लगवाने से पहले डॉक्टर या वैक्सीनेशन सेंटर से उपलब्ध वैक्सीन के बारे में जानकारी लेना बेहतर है।

2. भारत में फ्लू का टीका कब लगवाना सही है?

फ्लू वायरस के फैलने का समय भारत के अलग-अलग हिस्सों में अलग हो सकता है। इसी वजह से सभी राज्यों के लिए टीकाकरण का एक ही समय जरूरी नहीं है।

ठंडे उत्तरी क्षेत्रों में फ्लू का मौसम सर्दियों के दौरान ज्यादा सक्रिय हो सकता है, इसलिए यहां मौसम शुरू होने से पहले टीका लगवाने की सलाह दी जा सकती है। वहीं देश के दूसरे हिस्सों में टीकाकरण का समय स्थानीय फ्लू पैटर्न के अनुसार अलग हो सकता है।

3. क्या अक्टूबर में टीका लगवाना बेहतर है?

उत्तरी भारत के कई ठंडे क्षेत्रों में अक्टूबर फ्लू वैक्सीनेशन के लिए उपयुक्त समय हो सकता है, क्योंकि इसके बाद सर्दियों में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

हालांकि, सही समय व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, स्थानीय संक्रमण की स्थिति और उपलब्ध वैक्सीन पर भी निर्भर करता है।

4. अगर अक्टूबर निकल जाए तो क्या टीका नहीं लगवाना चाहिए?

ऐसा नहीं है। अगर आप निर्धारित समय पर वैक्सीन नहीं लगवा पाए हैं, तो बाद में भी इसे लगवाया जा सकता है।

अगर उस समय फ्लू का प्रसार जारी है और वैक्सीन उपलब्ध है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर टीका लगवाना अभी भी उपयोगी हो सकता है।

5. क्या अगस्त-सितंबर में वैक्सीन लगवा सकते हैं?

अगर आपके इलाके में फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं और आपने अभी तक मौसमी फ्लू का टीका नहीं लिया है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर वैक्सीनेशन कराया जा सकता है।

वैक्सीन के बाद शरीर को सुरक्षा विकसित करने में आमतौर पर करीब दो सप्ताह लग सकते हैं। इसलिए फ्लू के मौसम के चरम से पहले टीका लगवाना फायदेमंद हो सकता है।

6. क्या फ्लू वैक्सीन 100 फीसदी सुरक्षा देती है?

नहीं। कोई भी फ्लू वैक्सीन संक्रमण से 100 प्रतिशत सुरक्षा की गारंटी नहीं देती।

वैक्सीन की प्रभावशीलता कई बातों पर निर्भर करती है, जिसमें वैक्सीन में शामिल वायरस स्ट्रेन और उस समय फैल रहे वायरस के बीच समानता, व्यक्ति की उम्र और उसकी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया शामिल हैं।

फिर भी वैक्सीनेशन से फ्लू के गंभीर रूप लेने, अस्पताल में भर्ती होने और कुछ जटिलताओं का जोखिम कम हो सकता है।

7. हर साल फ्लू का टीका क्यों लगवाना पड़ता है?

इन्फ्लूएंजा वायरस लगातार बदलता रहता है। इसी वजह से समय-समय पर वैक्सीन की संरचना को अपडेट किया जाता है, ताकि वह उस मौसम में फैलने वाले प्रमुख वायरस के ज्यादा करीब हो।

इसके अलावा समय के साथ वैक्सीन से मिलने वाली सुरक्षा भी कम हो सकती है। इसलिए कई लोगों के लिए वार्षिक फ्लू वैक्सीनेशन की सलाह दी जाती है।

8. अगर पहले H1N1 हो चुका है तो क्या वैक्सीन की जरूरत है?

पहले H1N1 संक्रमण हो जाने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति भविष्य में सभी प्रकार के इन्फ्लूएंजा से सुरक्षित हो गया है।

इसलिए पहले संक्रमण हो चुका हो, तब भी डॉक्टर व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर वार्षिक फ्लू वैक्सीन की सलाह दे सकते हैं।

9. हल्की सर्दी-जुकाम होने पर क्या वैक्सीन लग सकती है?

हल्की बीमारी या मामूली सर्दी-जुकाम आम तौर पर वैक्सीनेशन में बड़ी बाधा नहीं होती। लेकिन अगर व्यक्ति को तेज बुखार है या वह मध्यम से गंभीर रूप से बीमार है, तो वैक्सीन लगवाने का सही समय डॉक्टर से पूछना बेहतर है।

10. किन लोगों को फ्लू को लेकर ज्यादा सावधान रहना चाहिए?

फ्लू कुछ लोगों में गंभीर रूप ले सकता है। खासतौर पर बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को फ्लू के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी या तेजी से बिगड़ती तबीयत जैसे लक्षण दिखाई दें तो जल्द चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

ध्यान रखें

H1N1 और दूसरे फ्लू वायरस के लक्षण एक-दूसरे से काफी मिल सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से बीमारी की पुष्टि या इलाज करना सही नहीं है। वैक्सीन कब लगवानी है, यह तय करते समय अपने इलाके में फ्लू की स्थिति, उम्र और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर की सलाह लेना सबसे बेहतर है।

नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही, भारत-चीन तक बढ़ी चिंता; IAF ने भेजी राहत सामग्री, नेपाल ने कहा- शुक्रिया

नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई अचानक भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। रसुवा जिले में 26 अगस्त की सुबह आए तेज सैलाब ने कई बस्तियों, सड़कों, पुलों, वाहनों और अन्य बुनियादी ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया। घटना के बाद नेपाल में बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

बाढ़ की भयावह तस्वीरों में पानी के तेज बहाव के साथ मलबा, पेड़ और चट्टानें बहती नजर आईं। कई स्थानों पर लोगों को सुरक्षित जगहों की ओर भागते देखा गया। कुछ इलाकों में सैलाब इतनी तेजी से पहुंचा कि लोगों को संभलने तक का समय नहीं मिल पाया।

भारत ने नेपाल के लिए भेजी राहत सामग्री

नेपाल में हालात बिगड़ने के बाद सरकार ने भारत और चीन से मदद मांगी। भारत ने तत्काल राहत एवं मानवीय सहायता उपलब्ध कराई है। भारतीय वायुसेना के विमान के जरिए जरूरी राहत सामग्री, मेडिकल सामान और दवाइयां नेपाल भेजी गई हैं।

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत की सहायता के लिए विदेश मंत्री एस. जयशंकर और भारत सरकार का आभार जताया है। भारत की ओर से आगे भी जरूरत के अनुसार राहत सामग्री भेजने की तैयारी की गई है।

PM मोदी ने नेपाली प्रधानमंत्री से की बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बातचीत की। उन्होंने नेपाल में हुई जनहानि और तबाही पर दुख जताते हुए संकट की इस घड़ी में हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।

भारत की एजेंसियां भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। भारत-नेपाल सीमा के आसपास सुरक्षा और आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमों को सतर्क किया गया है।

बिहार में भी बढ़ी चिंता

नेपाल से आने वाले पानी को देखते हुए बिहार में भी प्रशासन अलर्ट मोड पर है। गंडक नदी के किनारे बसे इलाकों में संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए NDRF और SDRF की तैयारियां बढ़ाई गई हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली और केंद्र की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।

भोटेकोशी नदी तिब्बत से निकलकर नेपाल में त्रिशूली नदी प्रणाली से जुड़ती है। आगे चलकर यही नदी तंत्र भारत में गंडक नदी से जुड़ता है। इसलिए नेपाल में अचानक बढ़े जलस्तर का असर भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी पड़ सकता है।

अचानक कैसे आई इतनी भयावह बाढ़?

इस आपदा को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि नदी में अचानक इतना तेज उफान कैसे आया। शुरुआती आकलनों में भूस्खलन या बर्फ और मलबे के नदी में गिरने से अस्थायी अवरोध बनने की संभावना जताई जा रही है।

अगर भारी मात्रा में मलबा नदी के प्रवाह को कुछ समय के लिए रोक देता है, तो पीछे पानी का दबाव बढ़ सकता है। अवरोध टूटने पर पानी अचानक तेज रफ्तार से नीचे की ओर बढ़ सकता है। हालांकि, इस घटना के वास्तविक कारण की पुष्टि विस्तृत वैज्ञानिक जांच के बाद ही हो सकेगी।

तबाही के बाद हर तरफ मलबा

सैलाब गुजरने के बाद प्रभावित इलाकों में कई फीट तक मलबा जमा होने की तस्वीरें सामने आई हैं। जहां पहले बाजार और दूसरी गतिविधियां होती थीं, वहां अब क्षतिग्रस्त इमारतें और कीचड़ नजर आ रहा है।

कई जगहों पर पुल और सड़कें भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। कुछ क्षेत्रों में हेलिपैड तक पानी और मलबे की चपेट में आने की जानकारी सामने आई है, जिससे राहत अभियान में अतिरिक्त मुश्किलें पैदा हो रही हैं।

कई हाइड्रोपावर परियोजनाएं प्रभावित

बाढ़ का असर नेपाल के पावर सेक्टर पर भी पड़ा है। रसुवा और नुवाकोट जिलों में नदी के आसपास बनी कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की जानकारी है।

लांगटांग हाइड्रोपावर परियोजना से जुड़े करीब 60 लोगों के लापता होने की बात भी सामने आई है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव दल लगातार लोगों की तलाश कर रहे हैं।

भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ाई गई निगरानी

नेपाल में जलप्रलय के बाद भारत ने सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। संभावित जलस्तर बढ़ने की स्थिति से निपटने के लिए आपदा राहत टीमों को तैयार रखा गया है।

उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती जिलों में प्रशासन नदी के जलस्तर पर नजर रख रहा है। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता नेपाल में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना है।