Home Blog Page 16

मनुस्मृति पर प्रहार, शाह बानो पर अधिकारों का संहार- कांग्रेस का महिला सम्मान दोहरा क्यों ? : डॉ. राजेश्वर सिंह

लखनऊ : कांग्रेस के मनुस्मृति और महिला अधिकारों से जुड़े हालिया बयानों पर सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस पर महिला अधिकारों, समानता और संवैधानिक मूल्यों के मुद्दे पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए उसके राजनीतिक इतिहास पर सवाल उठाए।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि महिला सम्मान, समानता और संवैधानिक अधिकारों की बात करने से पहले कांग्रेस को अपने राजनीतिक इतिहास और उन फैसलों का जवाब देना चाहिए, जिनको लेकर आज भी महिला अधिकारों के संदर्भ में सवाल उठते हैं।

शाह बानो मामले को लेकर कांग्रेस पर सवाल

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि 1985-86 का शाह बानो मामला कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है। उनके अनुसार, तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के शाह बानो को गुजारा भत्ता दिए जाने के फैसले के बाद मुस्लिम महिला (तलाक अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 1986 पारित किया, जिससे उस फैसले का प्रभाव सीमित हुआ।

उन्होंने सवाल उठाया कि महिला अधिकारों के मुद्दे पर राजनीतिक दबाव के सामने कांग्रेस सरकार को पीछे क्यों हटना पड़ा? क्या राजनीतिक हित और वोट बैंक की राजनीति महिला के अधिकारों से ऊपर रखी गई?

तीन तलाक कानून पर भी उठाया सवाल

डॉ. राजेश्वर सिंह ने 2019 के तीन तलाक कानून का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को तत्काल तीन तलाक की प्रथा से कानूनी संरक्षण देने के लिए कानून बनाया।

उन्होंने कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब तीन तलाक के खिलाफ कानून संसद में लाया गया, तब कांग्रेस ने इसके प्रमुख प्रावधानों का विरोध क्यों किया? यदि महिला सम्मान और अधिकार वास्तव में कांग्रेस की प्राथमिकता हैं, तो मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के सवाल पर उसका रुख अलग क्यों रहा?

समान नागरिक संहिता पर कांग्रेस से जवाब मांगा

सरोजनीनगर विधायक ने संविधान के अनुच्छेद 44 का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य को समान नागरिक संहिता की दिशा में प्रयास करने की बात संविधान में कही गई है। उन्होंने सवाल किया कि दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने इस दिशा में ठोस पहल क्यों नहीं की।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों और समानता की बात करने वाली राजनीतिक पार्टियों के लिए यह आवश्यक है कि व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े विषयों पर भी समानता के सिद्धांत को एक समान दृष्टिकोण के साथ लागू करने की बात करें।

हिंदू कानूनों में सुधार और पर्सनल लॉ पर सवाल

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि स्वतंत्र भारत में 1955-56 के दौरान हिंदू व्यक्तिगत कानूनों में व्यापक सुधार किए गए। इसके साथ उन्होंने मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े सुधारों को लेकर कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाया।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों और समानता के मामले में अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग मानदंड नहीं होने चाहिए। उनके अनुसार, महिला के अधिकार उसकी धार्मिक या सामुदायिक पहचान से तय नहीं होने चाहिए, बल्कि समानता और गरिमा के संवैधानिक सिद्धांतों के आधार पर होने चाहिए।

“मनुस्मृति को लेकर Selective Outrage क्यों?”

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कांग्रेस पर “Selective Outrage” का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस के नेता मनुस्मृति और हिंदू धार्मिक परंपराओं से जुड़े ग्रंथों में महिलाओं से संबंधित कथित भेदभावपूर्ण प्रावधानों को लेकर सवाल उठाते हैं, लेकिन अन्य धार्मिक या पवित्र ग्रंथों में महिलाओं से जुड़े विवादित प्रावधानों पर समान मुखरता दिखाई नहीं देती।

उन्होंने सवाल किया कि यदि उद्देश्य वास्तव में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना है, तो विरोध और आलोचना का पैमाना धर्म के आधार पर अलग-अलग क्यों होना चाहिए?

“महिला अधिकार राजनीतिक सुविधा का विषय नहीं”

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई केवल भाषणों और सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं होनी चाहिए। वास्तविक प्रतिबद्धता का अर्थ है कि हर महिला के अधिकार, सम्मान, गरिमा और समानता के लिए बिना किसी राजनीतिक या वोट बैंक के दबाव के समान रूप से आवाज उठाई जाए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने तीन तलाक जैसी प्रथा के खिलाफ कानून बनाकर मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और गरिमा की रक्षा की। महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल राजनीतिक नारे लगाना नहीं, बल्कि प्रत्येक महिला को समान अधिकार, सम्मान और न्याय उपलब्ध कराना है।

“कांग्रेस अपने राजनीतिक इतिहास का आईना देखे”

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि कांग्रेस को मनुस्मृति पर दूसरों को उपदेश देने से पहले शाह बानो से लेकर तीन तलाक तक अपने राजनीतिक इतिहास और महिला अधिकारों के मुद्दे पर अपनाए गए रुख का जवाब देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मनुस्मृति से लेकर समान नागरिक संहिता तक, यदि सिद्धांत समानता है तो उसका पैमाना भी समान होना चाहिए। महिला अधिकार किसी राजनीतिक दल की सुविधा या वोट बैंक की राजनीति का विषय नहीं, बल्कि संवैधानिक समानता, महिला गरिमा और न्याय का विषय हैं।

RSS के न्यूयॉर्क कार्यक्रम के समर्थन में उतरीं मैरी मिलबेन, मेयर ममदानी पर साधा निशाना

न्यूयॉर्क में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। इसी बीच अमेरिकी सिंगर और अभिनेत्री मैरी मिलबेन कार्यक्रम के समर्थन में सामने आई हैं। उन्होंने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी और कार्यक्रम का विरोध करने वाले अन्य लोगों पर निशाना साधा है।

मैरी मिलबेन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि ममदानी और उनके साथ कार्यक्रम का विरोध करने वाले लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के प्रति अपने विरोध के कारण मोहन भागवत के कार्यक्रम के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।

मैरी मिलबेन ने आलोचकों को दिया जवाब

मैरी ने अपने पोस्ट में समाजवादी विचारधारा को लेकर भी आलोचकों पर टिप्पणी की। उनका कहना है कि अगर किसी समूह को मैडिसन स्क्वायर गार्डन में होने वाले कार्यक्रम से आपत्ति है, तो उसे अपनी ओर से अलग कार्यक्रम आयोजित करने के लिए जगह बुक करनी चाहिए।

उन्होंने तर्क दिया कि मैडिसन स्क्वायर गार्डन एक व्यावसायिक आयोजन स्थल है और जिसे वहां कार्यक्रम करना है, वह इसके लिए भुगतान करके आयोजन कर सकता है। उन्होंने विरोध करने वालों से अपने विचारों के समर्थन में अलग रैली आयोजित करने की बात भी कही।

PM मोदी के कार्यक्रम में राष्ट्रगान गा चुकी हैं मैरी

मैरी मिलबेन भारत और भारतीय संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों में पहले भी नजर आ चुकी हैं। साल 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे के दौरान वॉशिंगटन में उनके कार्यक्रम से पहले मैरी ने भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया था।

वह भारत में ‘ओम जय जगदीश हरे’ की प्रस्तुति के लिए भी जानी जाती हैं। भारतीय संस्कृति और हिंदू समुदाय से जुड़े मुद्दों पर वह पहले भी अपनी राय सार्वजनिक रूप से रख चुकी हैं।

‘वननेस’ थीम को लेकर कही ये बात

मैरी ने RSS के न्यूयॉर्क कार्यक्रम की थीम ‘वननेस’ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्हें कार्यक्रम का यह शीर्षक पसंद आया और इसे एक परिवार की भावना से जोड़कर देखा।

उन्होंने उम्मीद जताई कि कार्यक्रम के दौरान भारत में धार्मिक स्वतंत्रता जैसे विषयों पर भी सार्थक चर्चा हो सकती है। उनके मुताबिक अलग-अलग समुदायों और धर्मों के बीच संवाद को बढ़ावा देना जरूरी है।

29 अगस्त को न्यूयॉर्क में कार्यक्रम

कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी के अनुसार, मोहन भागवत 29 अगस्त को मैनहट्टन में आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में संबोधन दे सकते हैं। कार्यक्रम को ‘यूनिवर्सल वननेस’ की थीम पर आयोजित किया जा रहा है।

आयोजकों का कहना है कि इसका उद्देश्य हिंदू-अमेरिकी समुदाय को एक मंच पर लाना और साझा विरासत के साथ विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच संवाद व एकता को बढ़ावा देना है।

बताया गया है कि कार्यक्रम को कई हिंदू-अमेरिकी संगठनों का समर्थन प्राप्त है। वहीं, कार्यक्रम को लेकर कुछ लोगों की ओर से विरोध भी सामने आया है। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी समेत अन्य आलोचकों ने इस आयोजन पर अपनी आपत्ति जताई है।

ऐसे में मोहन भागवत का प्रस्तावित न्यूयॉर्क कार्यक्रम आयोजन से पहले ही राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है। मैरी मिलबेन के समर्थन में सामने आने के बाद इस मुद्दे पर बहस और तेज होने की संभावना है।

नेपाल की भोटेकोशी नदी में बाढ़ का कहर, सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा तबाही से पहले और बाद का मंजर

नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। बाढ़ के बाद इलाके की स्थिति कितनी भयावह हो गई, इसका अंदाजा सैटेलाइट तस्वीरों से लगाया जा सकता है। बाढ़ से पहले और बाद की तस्वीरों में नदी के आसपास के इलाकों में हुए बदलाव और नुकसान साफ नजर आ रहे हैं।

Planet Labs की ओर से जारी सैटेलाइट फुटेज में रसुवा जिले के स्याफ्रुबेसी से लेकर देवीघाट तक के क्षेत्रों की स्थिति दिखाई गई है। तस्वीरों में नदी के किनारे बसे इलाकों में जलभराव, मलबे और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान का असर देखा जा सकता है।

सैटेलाइट तस्वीरों में दिखी बाढ़ की भयावहता

सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए अलग-अलग इलाकों में बाढ़ के प्रभाव को समझा जा सकता है।

देवीघाट: यहां नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद आसपास के तटीय इलाकों में पानी फैल गया। बाढ़ के पानी ने कई जगहों पर बुनियादी ढांचे को भी प्रभावित किया।

बेत्रावती: तेज बहाव ने नदी के आसपास की जमीन का स्वरूप बदल दिया। पानी के साथ मिट्टी और मलबा बहने से सड़क और आसपास के हिस्सों को नुकसान पहुंचा।

हाकुबेसी: इस इलाके में बाढ़ के साथ बड़ी मात्रा में मलबा पहुंचा। इससे रिहायशी क्षेत्रों और कृषि भूमि पर भी असर पड़ा।

स्याफ्रुबेसी: बाढ़ से पहले यह क्षेत्र हरा-भरा दिखाई देता था, लेकिन बाद की तस्वीरों में पानी, मिट्टी और मलबे ने इलाके की पूरी तस्वीर बदल दी।

बाढ़ में 95 लोगों की मौत की पुष्टि

नेपाल के दो मध्य जिलों में आई इस विनाशकारी बाढ़ से अब तक 95 लोगों की मौत की पुष्टि होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग लापता बताए जा रहे हैं।

बाढ़ के बाद भारतीय नागरिकों को लेकर भी चिंता बढ़ी है। जानकारी के अनुसार 105 भारतीयों के लापता होने की बात सामने आई है। प्रभावित लोगों का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयास जारी हैं।

तमिलनाडु के पर्यटकों को लेकर भी चिंता

नेपाल घूमने गया तमिलनाडु के पर्यटकों का एक समूह भी बाढ़ के बाद प्रभावित हुआ है। जानकारी के मुताबिक 57 लोगों के इस दल में से 37 पर्यटकों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है, जबकि 20 लोगों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।

वहीं केरल से नेपाल गया 36 लोगों का एक दल सुरक्षित बताया जा रहा है। यह समूह बाढ़ से प्रभावित इलाकों से दूर है और सभी सदस्य सुरक्षित हैं।

भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने नेपाल के कई हिस्सों में जनजीवन को प्रभावित किया है। सैटेलाइट तस्वीरों में सामने आया नुकसान बताता है कि बाढ़ का असर केवल नदी के आसपास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सड़कों, खेतों, बस्तियों और अन्य बुनियादी ढांचे तक इसका प्रभाव पहुंचा है।

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से मची तबाही, 157 शव मिले; 403 लोग अब भी लापता, 133 भारतीय शामिल

नेपाल में बुधवार, 26 अगस्त को आई अचानक भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी-त्रिशूली नदी बेसिन में पानी के तेज बहाव ने कई बस्तियों, सड़कों, वाहनों और दूसरे बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। रसुवा समेत आसपास के कई जिलों में हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक अब तक 157 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि करीब 403 नेपाली और विदेशी नागरिक लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी पर्यटकों की भी है।

अलग-अलग जिलों से मिले शव

नेपाल पुलिस के मुताबिक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। बरामद शवों में चितवन से 64, धाडिंग से 27, पूर्वी नवलपरासी से 22, गोरखा से 19, नुवाकोट से 13, तनहूं से 9 और रसुवा से 3 शव मिलने की जानकारी सामने आई है।

बाढ़ के खतरे वाले इलाकों से परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। सुरक्षाबलों, स्थानीय प्रशासन और अन्य एजेंसियों की टीमें मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। बाढ़ के कारण बंद हुई सड़कों को भी दोबारा खोलने का काम किया जा रहा है।

403 लोग लापता, 133 भारतीय शामिल

लापता लोगों में 341 विदेशी नागरिक बताए जा रहे हैं। इनमें 133 भारतीय और 47 अमेरिकी नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा 62 नेपाली नागरिकों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है।

बाढ़ के दौरान तैनात कई पुलिसकर्मियों के भी लापता होने की बात कही गई है। बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी राहत और बचाव अभियान में जुटे हुए हैं। वहीं 41 घायल लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।

भूकंप से एवलांच की आशंका

नेपाल के विदेश मंत्री शिसिर खनाल ने शुरुआती जानकारी के आधार पर बताया कि क्षेत्र में आए भूकंप के कारण एवलांच यानी हिमस्खलन जैसी घटना हुई हो सकती है। माना जा रहा है कि इसके बाद नदी में अचानक पानी और मलबे का तेज बहाव आया, जिससे बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो गई।

हालांकि घटना के वास्तविक कारणों और नुकसान का आकलन अभी किया जा रहा है।

PM मोदी ने नेपाली प्रधानमंत्री से की बात

नेपाल में बने गंभीर हालात के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बातचीत की। उन्होंने इस प्राकृतिक आपदा में हुई जनहानि पर दुख जताया और नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।

पीएम मोदी ने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत नेपाल के लोगों के साथ खड़ा है। दोनों देशों की टीमें राहत और बचाव से जुड़े प्रयासों में सहयोग कर रही हैं।

भारत ने भेजी 10 टन राहत सामग्री

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि भारत की ओर से नेपाल के लिए करीब 10 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजी गई है। इसमें जरूरी दवाइयां और राहत से जुड़ी अन्य सामग्री शामिल है।

भारतीय वायुसेना ने भी राहत अभियान में मदद शुरू कर दी है। एक C-130J विमान के जरिए जरूरी सामान और मेडिकल सामग्री नेपाल भेजी गई है। जरूरत के अनुसार आगे भी C-17 और C-130 विमानों से राहत सामग्री पहुंचाने की तैयारी है। बचाव अभियान के लिए हेलीकॉप्टर भी तैयार रखे गए हैं।

नेपाल के निचले इलाकों में अलर्ट

भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणाली में बढ़े पानी को देखते हुए निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है। नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन और गोरखा में बचाव अभियान तेज किया गया है।

नदी का पानी आगे बढ़ने की आशंका को देखते हुए भारत में भी सतर्कता बढ़ाई गई है। बिहार में संभावित बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की जा रही है। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर में भी गंडक-नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन को अलर्ट किया गया है।

नेपाल के पीएम ने बुलाई आपात बैठक

बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने मंत्रिपरिषद के साथ आपात बैठक की। अधिकारियों ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और खतरा बढ़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।

प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टर और सुरक्षाकर्मियों की मदद ली जा रही है।

भारत-नेपाल सीमा पर NDRF की टीमें तैनात

नेपाल से नीचे की ओर आने वाला पानी गंडक नदी तक पहुंचने की आशंका को देखते हुए भारत-नेपाल सीमा के आसपास NDRF की 10 टीमें तैनात की गई हैं। प्रशासन की ओर से नदी के जलस्तर और संभावित बाढ़ के प्रभाव पर लगातार नजर रखी जा रही है।

बिहार में मुख्यमंत्री ने की स्थिति की समीक्षा

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी नेपाल में आई बाढ़ के संभावित असर को लेकर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। अधिकारियों को नेपाल में जलस्तर और नदी की स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बिहार के सीमावर्ती इलाकों में किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके।

भारतीय नागरिकों के लिए हेल्पलाइन जारी

नेपाल में फंसे या प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए भारतीय दूतावास ने आपातकालीन नंबर जारी किए हैं। जरूरत पड़ने पर इन नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है:

+977 985 131 6807
+977 970 910 7500

इन नंबरों के जरिए बचाव और राहत अभियान से जुड़ी जानकारी या सहायता मांगी जा सकती है।

नेपाल में अचानक आई इस बाढ़ ने कई इलाकों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। राहत और बचाव अभियान जारी है और प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना तथा उन्हें जरूरी सहायता पहुंचाना है।

Sports Update:क्रिकेट में वापसी को लेकर अनाया बांगर ने तोड़ी चुप्पी, बोलीं- पात्रता मिली है, टीम में जगह नहीं

क्रिकेट में वापसी को लेकर अनाया बांगर एक बार फिर चर्चा में हैं। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से महिला कम्युनिटी और एलीट क्रिकेट में खेलने की पात्रता मिलने के बाद अनाया ने अपनी भविष्य की योजनाओं पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से दूर रहने के बाद अब वह दोबारा मैदान पर उतरने की तैयारी कर रही हैं।

बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अनाया ने कहा कि उनके लिए यह बेहद खास मौका है। उन्होंने बताया कि कई वर्षों के अंतराल के बाद वह उस खेल में लौटने की तैयारी कर रही हैं, जो उनकी जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

अनाया के मुताबिक, उनका लक्ष्य मार्च 2027 से एलीट महिला क्रिकेट में वापसी करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके लिए उन्हें एक औपचारिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ा है।

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने कई पहलुओं का किया आकलन

अनाया ने बताया कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उनकी पात्रता पर फैसला लेते समय कई पहलुओं को ध्यान में रखा। इसमें उनकी मेडिकल और सर्जिकल हिस्ट्री, हार्मोन और टेस्टोस्टेरोन से जुड़े आंकड़े, क्रिकेट का पिछला अनुभव और मैच फुटेज शामिल थे।

इसके अलावा मैनचेस्टर मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट के साथ हुई वैज्ञानिक और एथलेटिक परफॉर्मेंस टेस्टिंग को भी प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया।

अनाया ने कहा कि वह इस पूरी प्रक्रिया को गंभीरता से लिए जाने की सराहना करती हैं। उनके मुताबिक, ऐसे मामलों का मूल्यांकन किसी स्थापित खेल ढांचे के आधार पर होना चाहिए, न कि केवल लोगों की व्यक्तिगत राय के आधार पर।

‘पात्रता का मतलब टीम में चयन नहीं’

अनाया ने अपनी स्थिति को लेकर एक अहम बात साफ की। उन्होंने कहा कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से खेलने की पात्रता मिलना टीम में चयन की गारंटी नहीं है।

उन्होंने कहा कि अभी उन्हें काफी मेहनत करनी होगी। उन्हें नियमित ट्रेनिंग करनी है, प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेलना है और अपने प्रदर्शन के आधार पर टीम में जगह बनाने का मौका हासिल करना है।

अनाया ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इसी चुनौती के लिए तैयार हैं और अपने प्रदर्शन के दम पर आगे बढ़ना चाहती हैं।

मार्च 2027 में एलीट क्रिकेट खेलने का लक्ष्य

अनाया ने बताया कि वह ऑस्ट्रेलिया में महिला क्रिकेट के माहौल में वापसी की तैयारी कर रही हैं। उनका लक्ष्य मार्च 2027 से एलीट स्तर पर क्रिकेट खेलना है।

अब उनकी नजर ट्रेनिंग, प्रतिस्पर्धी मुकाबलों और प्रदर्शन पर होगी। अगर वह अपने प्रदर्शन के जरिए चयनकर्ताओं को प्रभावित करने में सफल रहती हैं, तो आगे महिला क्रिकेट के बड़े टूर्नामेंटों में खेलने का रास्ता खुल सकता है।

उन्होंने भविष्य में महिला बिग बैश लीग (WBBL) जैसे बड़े मंच पर खेलने की संभावना पर भी बात की है, हालांकि फिलहाल उनका फोकस वापसी की प्रक्रिया और क्रिकेट में खुद को दोबारा स्थापित करने पर है।