अगर आप ऐसी जगह घूमने का प्लान बना रहे हैं, जहां प्राकृतिक खूबसूरती के साथ रोमांच और इतिहास का अनोखा मेल देखने को मिले, तो मध्य प्रदेश का भेड़ाघाट आपके लिए शानदार विकल्प हो सकता है। जबलपुर के पास स्थित यह पर्यटन स्थल नर्मदा नदी, विशाल संगमरमर की चट्टानों और धुआंधार जलप्रपात के लिए जाना जाता है। यहां की खूबसूरत वादियां और नदी के बीच खड़ी सफेद चट्टानें पर्यटकों को अलग ही अनुभव देती हैं।
100 फीट ऊंची संगमरमर की चट्टानों का नजारा
भेड़ाघाट की सबसे खास पहचान नर्मदा नदी के दोनों किनारों पर मौजूद ऊंची संगमरमर की चट्टानें हैं। कई जगहों पर ये चट्टानें करीब 100 फीट तक ऊंची दिखाई देती हैं। नदी के बहाव ने लंबे समय में इनके बीच एक शानदार घाटी का निर्माण किया है।
दिन के समय सूर्य की रोशनी पड़ने पर सफेद और अलग-अलग रंगों वाली चट्टानों का नजारा बेहद आकर्षक लगता है। वहीं रात में चांदनी के बीच इनका रूप और भी खूबसूरत दिखाई देता है। नर्मदा में नाव की सवारी करते हुए इन चट्टानों को करीब से देखने का अनुभव पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है।
करोड़ों साल पुराने भूगर्भीय रहस्यों से जुड़ा इलाका
भेड़ाघाट सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि भूगर्भीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। नर्मदा घाटी का यह क्षेत्र लंबे समय में हुए प्राकृतिक बदलावों का प्रमाण देता है। यहां मिलने वाली संगमरमर की चट्टानों ने इस इलाके को एक अलग पहचान दी है।
जबलपुर और आसपास के नर्मदा घाटी क्षेत्र में प्राचीन जीवाश्मों से जुड़े प्रमाण भी मिल चुके हैं। मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में डायनासोर के अंडों और जीवाश्मों की खोज ने इस पूरे क्षेत्र को वैज्ञानिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी खास बना दिया है।
धुआंधार फॉल्स की गूंजती आवाज
भेड़ाघाट की यात्रा धुआंधार जलप्रपात देखे बिना अधूरी मानी जाती है। यहां नर्मदा नदी का पानी चट्टानों के बीच से तेज रफ्तार के साथ नीचे गिरता है। पानी की बूंदें हवा में इस तरह फैलती हैं कि दूर से धुएं जैसा एहसास होता है। इसी वजह से इसका नाम धुआंधार पड़ा।
बारिश के मौसम में जब नदी का जलस्तर बढ़ता है, तब झरने का स्वरूप और भी ज्यादा प्रभावशाली नजर आता है। पानी की तेज आवाज और आसपास की चट्टानों का दृश्य इसे बेहद खास बना देता है।
फिल्मों की शूटिंग के लिए भी पसंदीदा जगह
भेड़ाघाट की खूबसूरती ने फिल्म निर्माताओं को भी लंबे समय से आकर्षित किया है। यहां बॉलीवुड की कई फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। शाहरुख खान और तापसी पन्नू की फिल्म ‘डंकी’ में भी इस क्षेत्र के खूबसूरत दृश्य नजर आए थे।
इसके अलावा ‘मोहेंजो दारो’, ‘बॉबी’, ‘प्राण जाए पर वचन न जाए’ और ‘जिस देश में गंगा बहती है’ जैसी फिल्मों में भी इस इलाके के दृश्य देखने को मिले हैं।
चौंसठ योगिनी मंदिर भी जरूर देखें
भेड़ाघाट के आसपास घूमने के दौरान चौंसठ योगिनी मंदिर भी देखा जा सकता है। यह नर्मदा नदी के पास ऊंचाई पर स्थित एक ऐतिहासिक मंदिर है। मंदिर परिसर में देवी की विभिन्न योगिनी स्वरूपों की प्रतिमाएं स्थापित हैं और बीच में भगवान शिव की प्रतिमा भी मौजूद है।
यह स्थान धार्मिक महत्व के साथ-साथ आसपास के प्राकृतिक नजारों के लिए भी जाना जाता है।
बैलेंसिंग रॉक्स का अनोखा नजारा
जबलपुर क्षेत्र में मौजूद बैलेंसिंग रॉक्स भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। बड़ी-बड़ी चट्टानों का एक-दूसरे के ऊपर इस तरह संतुलित दिखाई देना अपने आप में बेहद दिलचस्प है।
इन प्राकृतिक संरचनाओं को देखकर ऐसा लगता है जैसे इन्हें किसी ने बेहद सोच-समझकर रखा हो, जबकि ये प्राकृतिक भूगर्भीय प्रक्रियाओं का परिणाम हैं।
कैसे पहुंचें भेड़ाघाट?
भेड़ाघाट जबलपुर शहर से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जबलपुर रेलवे स्टेशन से सड़क मार्ग के जरिए यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। हवाई यात्रा करने वाले लोग जबलपुर एयरपोर्ट तक पहुंचने के बाद टैक्सी या अन्य साधनों से भेड़ाघाट जा सकते हैं।
यहां नर्मदा बोटिंग, धुआंधार फॉल्स, संगमरमर की घाटी, चौंसठ योगिनी मंदिर और आसपास के प्राकृतिक स्थलों को एक ही ट्रिप में देखा जा सकता है। अगर आपको प्रकृति, इतिहास और रोमांच तीनों का अनुभव एक साथ चाहिए, तो भेड़ाघाट एक यादगार यात्रा साबित हो सकता है।


































