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Donald Trump बोले—ईरान पर कार्रवाई जंग नहीं, आगे की रणनीति के दिए संकेत

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका की ओर से की गई इस कार्रवाई को वह “जंग” के रूप में नहीं देखते। उनका कहना है कि यह सीमित सैन्य ऑपरेशन है, जिसका उद्देश्य खास लक्ष्यों को निष्क्रिय करना है।

White House में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि Iran की सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उनके मुताबिक, ईरान की नौसेना और वायुसेना कमजोर हो चुकी है और उसकी ड्रोन निर्माण क्षमता में भारी गिरावट आई है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम प्रभावी रूप से निष्क्रिय कर दिया गया है और अब वह समझौते की दिशा में बढ़ सकता है।

भारत-पाकिस्तान का भी किया जिक्र

ट्रंप ने अपने बयान में India और Pakistan के संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने दोनों देशों के बीच तनाव कम करने में भूमिका निभाई और आर्थिक उपायों, जैसे टैरिफ़, का इस्तेमाल कर संभावित टकराव को रोकने की कोशिश की।

ट्रंप के अनुसार, उन्होंने कई वैश्विक विवादों को सुलझाने में योगदान दिया है और कई देशों ने इसके लिए उनका आभार भी जताया है।

ईरान की अर्थव्यवस्था पर असर

राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि अमेरिका की सख्त नीति आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी (naval blockade) का असर दिखाई दे रहा है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।

ट्रंप का मानना है कि लगातार बढ़ते इस दबाव के चलते ईरान को भविष्य में समझौते की राह अपनानी पड़ सकती है।

निष्कर्ष

ट्रंप के बयान से साफ है कि अमेरिका इस स्थिति को पूर्ण युद्ध के बजाय रणनीतिक सैन्य कार्रवाई के रूप में पेश कर रहा है। हालांकि, क्षेत्रीय तनाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया को देखते हुए आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

Health News:60 के बाद हेल्दी लाइफ का मंत्र: सही डाइट से रखें दिल, किडनी और लिवर फिट

जैसे-जैसे उम्र 60 के पार पहुंचती है, शरीर की जरूरतें बदलने लगती हैं। मेटाबॉलिज्म धीमा होता है, मांसपेशियां कमजोर पड़ती हैं और दिल, किडनी व लिवर जैसे अंगों पर दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली अपनाकर न सिर्फ बीमारियों से बचा जा सकता है, बल्कि लंबी और स्वस्थ उम्र भी पाई जा सकती है।

60 के बाद शरीर में होने वाले बदलाव

इस उम्र में भूख कम लगना, ऊर्जा स्तर गिरना, शरीर में पानी की कमी, हाई बीपी और शुगर का खतरा बढ़ना आम बात है। इसलिए कम मात्रा में लेकिन पोषक तत्वों से भरपूर भोजन लेना जरूरी होता है।

दिल को स्वस्थ रखने के उपाय

दिल को मजबूत रखने के लिए संतुलित आहार और नियमित गतिविधि बेहद जरूरी है।

  • तला-भुना और ज्यादा नमक वाला भोजन कम करें
  • ओमेगा-3 युक्त चीजें जैसे अखरोट, अलसी और मछली शामिल करें
  • फल, सब्जियां और साबुत अनाज खाएं
  • रोज 20–30 मिनट टहलें
  • धूम्रपान से पूरी तरह दूरी रखें

किडनी की देखभाल कैसे करें

Kidney Disease से बचाव के लिए खानपान पर विशेष ध्यान जरूरी है।

  • प्रोसेस्ड और ज्यादा नमक वाले भोजन से बचें
  • रोज 7–10 गिलास पानी पिएं
  • बिना डॉक्टर की सलाह दवा न लें
  • ब्लड प्रेशर और डायबिटीज कंट्रोल में रखें
  • सेब, नाशपाती और हरी सब्जियां डाइट में शामिल करें

लिवर को स्वस्थ रखने के टिप्स

Liver Disease से बचाव के लिए सही आदतें अपनाना जरूरी है।

  • शराब से दूरी बनाए रखें
  • मीठा और फैटी फूड कम करें
  • वजन संतुलित रखें
  • पालक, मेथी, दालें, हल्दी वाला दूध और नींबू पानी लें

60 के बाद का आदर्श डेली डाइट प्लान

  • सुबह: गुनगुना पानी या नींबू पानी, फिर दलिया/ओट्स/फल
  • दोपहर: 2–3 रोटी, दाल या पनीर, हरी सब्जियां और सलाद
  • शाम: हल्का नाश्ता जैसे फल, भुना चना या नट्स
  • रात: हल्का, कम तेल और कम मसाले वाला भोजन

निष्कर्ष

60 साल के बाद सेहत का राज सिर्फ ज्यादा खाना नहीं, बल्कि सही और संतुलित खाना है। थोड़ी-सी सावधानी, नियमित व्यायाम और संतुलित डाइट से आप लंबे समय तक फिट और एक्टिव रह सकते हैं।

Disclaimer: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी नई डाइट या एक्सरसाइज शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

अमेरिकी वैज्ञानिक Charles Lieber की चीन में नई ब्रेन-कंप्यूटर लैब, पुराने विवादों ने फिर पकड़ी रफ्तार

अमेरिका के चर्चित वैज्ञानिक Charles Lieber एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उन्होंने Shenzhen में अपनी नई रिसर्च लैब स्थापित की है, जहां वह ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) जैसी उन्नत तकनीक पर काम कर रहे हैं। यह वही तकनीक है, जिसमें इंसान के दिमाग में इलेक्ट्रॉनिक चिप लगाकर मशीनों से सीधे संवाद स्थापित करने की संभावना तलाश की जाती है।

लाइबर पहले Harvard University में प्रोफेसर रह चुके हैं, लेकिन उन्हें चीन से मिले फंड और संबंधों को लेकर गलत जानकारी देने के मामले में दोषी ठहराया गया था। अब वे चीन में उस तकनीक पर काम कर रहे हैं, जिसे वहां की सरकार रणनीतिक प्राथमिकता मानती है।

क्या है ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस तकनीक?

ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) एक ऐसी तकनीक है, जो मानव मस्तिष्क और कंप्यूटर के बीच सीधा कनेक्शन स्थापित करती है। इससे लकवाग्रस्त मरीजों को दोबारा चलने-फिरने में मदद मिल सकती है और Amyotrophic Lateral Sclerosis जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।

हालांकि, इस तकनीक के सैन्य उपयोग को लेकर भी चिंताएं जताई जा रही हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, People’s Liberation Army के वैज्ञानिक इस तकनीक को “सुपर सोल्जर” तैयार करने के दृष्टिकोण से भी परख रहे हैं, जिससे सैनिकों की मानसिक क्षमता और निर्णय लेने की गति बढ़ाई जा सके।

लाइबर पर लगे थे ये आरोप

साल 2021 में Charles Lieber को अमेरिकी अदालत ने दोषी पाया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने चीनी सरकारी टैलेंट प्रोग्राम से अपने संबंधों और एक चीनी यूनिवर्सिटी से मिले भुगतान की जानकारी छिपाई थी। इसके अलावा टैक्स से जुड़े मामलों में भी वे दोषी पाए गए।

उन्हें दो दिन की जेल, छह महीने की नजरबंदी और जुर्माना भुगतना पड़ा। साथ ही उन्हें टैक्स एजेंसी को मुआवजा देने का भी आदेश दिया गया। उन्होंने अपने बचाव में स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला दिया था।

चीन में नई भूमिका और फंडिंग

रिपोर्ट्स के अनुसार, लाइबर अब चीन के सरकारी फंड से चलने वाले प्रोजेक्ट “i-Brain” से जुड़े हैं। यह लैब Shenzhen Medical Academy of Research and Translation का हिस्सा है, जहां उन्हें अत्याधुनिक नैनोफैब्रिकेशन उपकरण और प्राइमेट (बंदरों) पर रिसर्च की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

यह प्रोजेक्ट उन बड़े सरकारी प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है, जिनका उद्देश्य वैश्विक स्तर के वैज्ञानिकों को चीन में आकर्षित करना और उन्नत तकनीकों में बढ़त हासिल करना है।

निष्कर्ष

चार्ल्स लाइबर का चीन में सक्रिय होना विज्ञान, राजनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच जटिल संबंधों को उजागर करता है। जहां एक ओर यह तकनीक चिकित्सा क्षेत्र में क्रांति ला सकती है, वहीं इसके संभावित सैन्य उपयोग को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस भी तेज हो रही है।

लखनऊ : DGP राजीव कृष्ण ने 27 पुलिस परिवारों को सौंपे 41.60 करोड़ के चेक, पुलिस सैलरी पैकेज का 3 साल के लिए नवीनीकरण, ड्यूटी के दौरान आगरा में दोनों पैर गंवाने वाले सिपाही की पत्नी को भी सौंपा डेढ़ करोड़ रूपए का चेक

लखनऊ, 30 अप्रैल 2026: उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए आज का दिन संवेदनशीलता और कल्याणकारी पहल का प्रतीक रहा। पुलिस महानिदेशक ने आकस्मिक दुर्घटनाओं में मृत और दिव्यांग पुलिस कर्मियों के परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान किया।

जिसके तहत कुल 41 करोड़ 60 लाख रुपये के चेक वितरित किए। इस सहायता का लाभ 22 मृत पुलिस कर्मियों के परिजनों और 5 दिव्यांग पुलिस कर्मियों सहित कुल 27 लोगों को मिला।

इस दौरान और के बीच पुलिस सैलरी पैकेज (PSP) के नवीनीकरण हेतु 3 वर्षों के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए गए, जो पुलिस कर्मियों के कल्याण को नई मजबूती देगा।

खास तौर पर जीआरपी गोंडा में तैनात आरक्षी आकाश सिंह का मामला भावुक कर देने वाला रहा, जो एक अभियुक्त को पकड़ने के दौरान ट्रेन की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए और उनके दोनों पैर कट गए। इस दुखद घटना के बाद पुलिस सैलरी पैकेज के तहत उन्हें 1 करोड़ 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई, जिसे DGP ने स्वयं उनकी पत्नी को सौंपा।

जीआरपी गोंडा में तैनात आरक्षी आकाश सिंह के लिए विभिन्न विभागों और संस्थाओं द्वारा मिलकर कुल 1 करोड़ 80 लाख 35 हजार 152 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। इस सहायता में द्वारा 1 लाख रुपये, पुलिस अधीक्षक रेलवे गोरखपुर द्वारा 10 लाख 88 हजार रुपये, पुलिस अधीक्षक रेलवे लखनऊ द्वारा 5 लाख 19 हजार 200 रुपये, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मेरठ द्वारा 13 लाख 25 हजार 952 रुपये तथा द्वारा 1 करोड़ 50 लाख रुपये की बड़ी सहायता राशि शामिल है। यह आर्थिक सहयोग गंभीर दुर्घटना के बाद आरक्षी और उनके परिवार को संबल देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान DGP राजीव कृष्ण ने सभी प्रभावित परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और हर संभव सहायता का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि यह पहल पुलिस कर्मियों और उनके परिवारों की वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

नवीनीकृत MoU के तहत पुलिस कर्मियों को लगभग 2.30 करोड़ रुपये तक का बीमा कवर मिलेगा, जिसमें आकस्मिक मृत्यु और दिव्यांगता की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। साथ ही, इस बार सेवानिवृत्त पुलिस कर्मियों और उनके आश्रितों (फैमिली पेंशनर्स) को भी दुर्घटना संबंधी विशेष सुविधाएं देने का प्रावधान शामिल किया गया है।

इस अवसर पर पुलिस विभाग और बैंक ऑफ बड़ौदा के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। यह पहल न केवल पुलिस बल के मनोबल को बढ़ाएगी, बल्कि उनके परिवारों को भी कठिन समय में आर्थिक संबल प्रदान करेगी।

ISC और ICSE रिजल्ट में लखनऊ का दबदबा कायम: CMS के छात्रों ने बोर्ड परीक्षाओं में रचा नया इतिहास, 99.80% तक अंक, 62 छात्र 99% क्लब में शामिल

लखनऊ, 30 अप्रैल 2026: राजधानी लखनऊ एक बार फिर पूरे देश में अपनी शैक्षिक उत्कृष्टता के लिए चर्चा में है। सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (सीएमएस) के छात्रों ने आई.एस.सी. (कक्षा-12) और आई.सी.एस.ई. (कक्षा-10) बोर्ड परीक्षाओं में इस वर्ष ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसने न केवल पिछले रिकॉर्ड तोड़े हैं बल्कि यह भी साबित किया है कि लखनऊ अब देश के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में मजबूती से स्थापित हो चुका है।

इस वर्ष आई.एस.सी. बोर्ड परीक्षा में सीएमएस के चार मेधावी छात्रों- ओशीन अग्रवाल, संस्कृति चंदेल, जैनब फातिमा और छवि मिश्रा- ने 99.75 प्रतिशत अंक हासिल कर शीर्ष उपलब्धि दर्ज की। वहीं आई.सी.एस.ई. (कक्षा-10) में वैवस्वत नारायण दुबे ने 99.80 प्रतिशत अंक प्राप्त कर स्कूल ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का परचम लहराया।

उनके अलावा जहरा फातिमा और अनय अग्रवाल ने 99.60 प्रतिशत अंक हासिल किए, जबकि अफशान अहमद, दिव्यांश कुशवाहा और फरहीन खान ने 99.40 प्रतिशत अंक प्राप्त कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि इस वर्ष सीएमएस के कुल 62 छात्रों ने 99 प्रतिशत से अधिक अंक अर्जित किए, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इनमें 42 छात्र आई.एस.सी. और 20 छात्र आई.सी.एस.ई. के शामिल हैं। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि विद्यालय में केवल टॉपर्स ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में छात्र उच्च स्तर की शैक्षिक गुणवत्ता हासिल कर रहे हैं।

अगर समग्र परिणाम की बात करें तो इस वर्ष सीएमएस से कुल 7030 छात्रों ने बोर्ड परीक्षाओं में भाग लिया। इनमें से 3709 छात्रों (लगभग 52.8%) ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए, जो किसी भी संस्थान के लिए बेहद बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। इसके अलावा 1441 छात्रों (20.5%) ने 95 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए, जो यह दर्शाता है कि यहां उत्कृष्टता केवल कुछ छात्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यापक शैक्षणिक संस्कृति का हिस्सा है।

और भी खास बात यह है कि 1013 छात्रों ने एक या अधिक विषयों में पूरे 100 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। यह उपलब्धि इस ओर संकेत करती है कि छात्रों की विषयों पर पकड़ कितनी गहरी और मजबूत है।

सीएमएस की संस्थापिका-निदेशिका ने इस शानदार सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि छात्रों की कड़ी मेहनत, शिक्षकों की समर्पित शिक्षण शैली और अभिभावकों के निरंतर सहयोग का संयुक्त परिणाम है। उन्होंने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक दिलाना नहीं, बल्कि छात्रों के समग्र व्यक्तित्व का विकास करना है।

वहीं विद्यालय की प्रबंधक ने बताया कि सीएमएस में पारंपरिक रटने की पद्धति के बजाय ‘समझ आधारित शिक्षा’ (Conceptual Learning) और ‘क्षमता आधारित मूल्यांकन’ (Competency-Based Assessment) को प्राथमिकता दी जाती है। पिछले चार वर्षों में अपनाई गई इस आधुनिक शिक्षण पद्धति का ही यह परिणाम है कि छात्र न केवल अच्छे अंक ला रहे हैं, बल्कि विषयों की गहराई को भी समझ रहे हैं।

सीएमएस के हेड कम्युनिकेशन्स ने जानकारी दी कि इन मेधावी छात्रों को सम्मानित करने के लिए 2 मई को गोमती नगर एक्सटेंशन कैंपस के ऑडिटोरियम में एक भव्य ‘सम्मान समारोह’ आयोजित किया जाएगा। इस समारोह में 3709 छात्रों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने 90 प्रतिशत से लेकर 99.80 प्रतिशत तक अंक प्राप्त किए हैं।

इस अवसर पर 19 टॉपर्स को, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर उच्च स्थान प्राप्त किया है, एक-एक लाख रुपये का नगद पुरस्कार दिया जाएगा। इसके अलावा 43 अन्य छात्रों को, जिन्होंने 99 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं, 21,000 रुपये की पुरस्कार राशि से सम्मानित किया जाएगा। इस प्रकार कुल 62 अति-मेधावी छात्रों को मिलाकर 28 लाख रुपये की पुरस्कार राशि वितरित की जाएगी।

कार्यक्रम से पहले, 2 मई की सुबह 7:45 बजे टॉपर छात्र ‘विक्ट्री मार्च’ निकालेंगे। यह मार्च मकदूमपुर पुलिस स्टेशन से शुरू होकर सीएमएस गोमती नगर एक्सटेंशन कैंपस ऑडिटोरियम तक पहुंचेगा। इस मार्च का उद्देश्य छात्रों की उपलब्धियों का उत्सव मनाने के साथ-साथ अन्य विद्यार्थियों को भी प्रेरित करना है।

कुल मिलाकर, सीएमएस के इस अभूतपूर्व परिणाम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि शिक्षा में गुणवत्ता, अनुशासन और आधुनिक पद्धतियों का समावेश किया जाए, तो छात्र राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। लखनऊ का यह संस्थान एक बार फिर देशभर के स्कूलों के लिए प्रेरणा बनकर उभरा है।