अमेरिका के चर्चित वैज्ञानिक Charles Lieber एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उन्होंने Shenzhen में अपनी नई रिसर्च लैब स्थापित की है, जहां वह ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) जैसी उन्नत तकनीक पर काम कर रहे हैं। यह वही तकनीक है, जिसमें इंसान के दिमाग में इलेक्ट्रॉनिक चिप लगाकर मशीनों से सीधे संवाद स्थापित करने की संभावना तलाश की जाती है।
लाइबर पहले Harvard University में प्रोफेसर रह चुके हैं, लेकिन उन्हें चीन से मिले फंड और संबंधों को लेकर गलत जानकारी देने के मामले में दोषी ठहराया गया था। अब वे चीन में उस तकनीक पर काम कर रहे हैं, जिसे वहां की सरकार रणनीतिक प्राथमिकता मानती है।
क्या है ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस तकनीक?
ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) एक ऐसी तकनीक है, जो मानव मस्तिष्क और कंप्यूटर के बीच सीधा कनेक्शन स्थापित करती है। इससे लकवाग्रस्त मरीजों को दोबारा चलने-फिरने में मदद मिल सकती है और Amyotrophic Lateral Sclerosis जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।
हालांकि, इस तकनीक के सैन्य उपयोग को लेकर भी चिंताएं जताई जा रही हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, People’s Liberation Army के वैज्ञानिक इस तकनीक को “सुपर सोल्जर” तैयार करने के दृष्टिकोण से भी परख रहे हैं, जिससे सैनिकों की मानसिक क्षमता और निर्णय लेने की गति बढ़ाई जा सके।
लाइबर पर लगे थे ये आरोप
साल 2021 में Charles Lieber को अमेरिकी अदालत ने दोषी पाया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने चीनी सरकारी टैलेंट प्रोग्राम से अपने संबंधों और एक चीनी यूनिवर्सिटी से मिले भुगतान की जानकारी छिपाई थी। इसके अलावा टैक्स से जुड़े मामलों में भी वे दोषी पाए गए।
उन्हें दो दिन की जेल, छह महीने की नजरबंदी और जुर्माना भुगतना पड़ा। साथ ही उन्हें टैक्स एजेंसी को मुआवजा देने का भी आदेश दिया गया। उन्होंने अपने बचाव में स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला दिया था।
चीन में नई भूमिका और फंडिंग
रिपोर्ट्स के अनुसार, लाइबर अब चीन के सरकारी फंड से चलने वाले प्रोजेक्ट “i-Brain” से जुड़े हैं। यह लैब Shenzhen Medical Academy of Research and Translation का हिस्सा है, जहां उन्हें अत्याधुनिक नैनोफैब्रिकेशन उपकरण और प्राइमेट (बंदरों) पर रिसर्च की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
यह प्रोजेक्ट उन बड़े सरकारी प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है, जिनका उद्देश्य वैश्विक स्तर के वैज्ञानिकों को चीन में आकर्षित करना और उन्नत तकनीकों में बढ़त हासिल करना है।
निष्कर्ष
चार्ल्स लाइबर का चीन में सक्रिय होना विज्ञान, राजनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच जटिल संबंधों को उजागर करता है। जहां एक ओर यह तकनीक चिकित्सा क्षेत्र में क्रांति ला सकती है, वहीं इसके संभावित सैन्य उपयोग को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस भी तेज हो रही है।


































