Home Blog Page 14

Sports News:Test Cricket में भी मिले Free Hit? टीम इंडिया के बॉलिंग कोच ने बताया क्यों हो सकता है फायदेमंद

कोलंबो: टेस्ट क्रिकेट में नो-बॉल की समस्या से निपटने के लिए फ्री हिट का नियम लागू करने का सुझाव सामने आया है। भारत और श्रीलंका के बीच खेले जा रहे दूसरे टेस्ट के दौरान भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच साईराज बहुतुले ने इस विचार का समर्थन किया। उनका मानना है कि टेस्ट क्रिकेट में भी अगर नो-बॉल के बाद बल्लेबाज को फ्री हिट मिले, तो गेंदबाज अतिरिक्त रन और अतिरिक्त गेंद देने से बचने के लिए ज्यादा सावधानी बरतेंगे।

भारत के स्पिनर्स ने की कई नो-बॉल

भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो में चल रहे मुकाबले में भारतीय स्पिन गेंदबाजों की नो-बॉल चर्चा का विषय बनी हुई हैं। मैच के दौरान भारतीय स्पिनर्स अब तक 10 नो-बॉल कर चुके हैं।

पिछले पांच वर्षों के टेस्ट आंकड़ों में किसी एक मुकाबले में स्पिनर्स द्वारा की गई नो-बॉल की यह सबसे बड़ी संख्या बताई जा रही है। इस सूची में अफगानिस्तान 14 नो-बॉल के साथ सबसे ऊपर है।

बहुतुले ने माना, नो-बॉल चिंता की बात

चौथे दिन का खेल समाप्त होने के बाद पत्रकारों से बातचीत में साईराज बहुतुले ने माना कि नो-बॉल एक ऐसी समस्या है जिस पर टीम लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जब गेंदबाज विकेट हासिल करने के लिए अपना पूरा जोर लगाता है, तो कभी-कभी अतिरिक्त प्रयास के कारण उसका पैर क्रीज से आगे निकल जाता है।

बहुतुले ने साफ किया कि ज्यादा प्रयास करना नो-बॉल का बहाना नहीं हो सकता। गेंदबाजों को अपनी तकनीक और रन-अप पर नियंत्रण रखना जरूरी है।

जडेजा और सारांश जैन के साथ हो रहा काम

भारतीय गेंदबाजी कोच ने बताया कि रविंद्र जडेजा और सारांश जैन के साथ नो-बॉल की समस्या पर विशेष तौर पर काम किया जा रहा है।

उनके मुताबिक, गेंद डालते समय गेंदबाज का टेक-ऑफ प्वाइंट सही होना बेहद महत्वपूर्ण है। कभी-कभी किसी खास डिलीवरी पर ज्यादा ताकत लगाने के प्रयास में गेंदबाज निर्धारित स्थान से आगे निकल जाता है। टीम को उम्मीद है कि अभ्यास के जरिए इस कमी को दूर किया जाएगा।

टेस्ट में फ्री हिट से कम हो सकती हैं नो-बॉल?

नो-बॉल पर फ्री हिट दिए जाने के विचार को लेकर बहुतुले ने एक दिलचस्प सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अगर टेस्ट क्रिकेट में भी सीमित ओवरों की तरह नो-बॉल के बाद फ्री हिट का नियम लागू किया जाता है, तो इससे गेंदबाजों पर अतिरिक्त सावधानी बरतने का दबाव रहेगा।

उनका तर्क है कि कोई भी टीम जानबूझकर ऐसी स्थिति पैदा नहीं करना चाहेगी जिसमें विपक्षी बल्लेबाज को अतिरिक्त रन के साथ अगली गेंद पर बिना जोखिम के बड़ा शॉट खेलने का मौका मिल जाए।

हालांकि, बहुतुले ने यह सुझाव हल्के-फुल्के अंदाज में दिया और साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि वह क्रिकेट के नियम तय करने वाले व्यक्ति नहीं हैं। फिर भी उनके इस विचार ने टेस्ट क्रिकेट में नो-बॉल के नियम को लेकर एक नई बहस जरूर छेड़ दी है।

रविंद्र जडेजा के नाम दर्ज हुआ अनचाहा रिकॉर्ड, लगातार 22 DRS हुए फेल

कोलंबो: क्रिकेट में DRS यानी Decision Review System कई बार टीम के लिए गेम चेंजर साबित होता है, लेकिन भारतीय ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा के लिए पिछले कुछ समय से रिव्यू का नतीजा लगातार निराशाजनक रहा है। श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट में भी जडेजा की गेंद पर लिया गया रिव्यू भारत के पक्ष में नहीं गया।

इस मुकाबले में जडेजा ने श्रीलंकाई बल्लेबाज केषरा नुवांता के खिलाफ विकेट की अपील की थी। मैदानी अंपायर ने अपील को खारिज कर दिया। इसके बाद कप्तान शुभमन गिल ने LBW के लिए DRS का सहारा लिया।

थर्ड अंपायर ने जब रिप्ले की जांच की तो सामने आया कि गेंद बल्लेबाज के पैड से टकराने से पहले ही बल्ले का किनारा ले चुकी थी। ऐसे में मैदानी फैसला बरकरार रहा और भारतीय टीम का रिव्यू भी चला गया। इसके साथ ही जडेजा की गेंद पर लिया गया रिव्यू एक बार फिर सफल नहीं हो सका।

तीन साल से नहीं मिला DRS में सफलता का स्वाद

आंकड़ों के मुताबिक, टेस्ट क्रिकेट में जडेजा के नाम पिछले तीन वर्षों में लगातार 22 ऐसे रिव्यू हो चुके हैं, जिनसे गेंदबाजी पर लिया गया फैसला भारत के पक्ष में नहीं बदला।

इन 22 मौकों में 18 बार रिव्यू पूरी तरह असफल रहा, जबकि 4 मामलों में अंपायर कॉल के कारण मैदानी फैसला बरकरार रहा। अंपायर कॉल वाले मामलों में टीम का रिव्यू बच गया, लेकिन जडेजा की गेंद पर विकेट हासिल करने में कामयाबी नहीं मिली।

आखिरी बार जुलाई 2023 में सफल हुआ था रिव्यू

टेस्ट क्रिकेट में जडेजा की गेंद पर लिया गया आखिरी सफल DRS जुलाई 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ आया था। उसके बाद से उनके गेंदबाजी रिव्यू का आंकड़ा लगातार खराब होता गया।

दिलचस्प बात यह है कि उस आखिरी सफल रिव्यू के समय जडेजा के नाम टेस्ट क्रिकेट में 271 विकेट थे। अब वह 350 से ज्यादा टेस्ट विकेट हासिल कर चुके हैं, लेकिन इस दौरान उनकी गेंद पर लिया गया कोई भी रिव्यू सफलता में नहीं बदल पाया।

यानी आखिरी सफल DRS के बाद जडेजा 82 विकेट और हासिल कर चुके हैं, लेकिन उनके गेंदबाजी फैसले को बदलने वाला रिव्यू नहीं आया।

शानदार रहा है जडेजा का टेस्ट करियर

रविंद्र जडेजा भारत के सबसे सफल टेस्ट ऑलराउंडर्स में शामिल हैं। दूसरे टेस्ट को छोड़कर वह अब तक 90 टेस्ट मैच खेल चुके हैं। इन मुकाबलों की 169 पारियों में गेंदबाजी करते हुए उन्होंने 25 से ज्यादा की औसत से 352 विकेट हासिल किए हैं।

टेस्ट क्रिकेट में उनका सर्वश्रेष्ठ मैच प्रदर्शन 10 विकेट पर 110 रन रहा है। गेंद के साथ-साथ बल्ले से भी जडेजा ने भारत के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

वह टेस्ट के अलावा दूसरे फॉर्मेट में भी हजारों रन बना चुके हैं। उनकी बल्लेबाजी में छह शतक और 28 अर्धशतक शामिल हैं। ऐसे में DRS का यह लगातार खराब रिकॉर्ड उनके शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर से जुड़ा एक बेहद असामान्य आंकड़ा बन गया है।

Health News:ऑफिस के Stress और Burnout से रहना है दूर? रोज अपनाएं 25 मिनट का Pomodoro Formula, बढ़ेगा Focus

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में ऑफिस का काम, लगातार आती डेडलाइन और निजी जिम्मेदारियां मानसिक दबाव बढ़ा सकती हैं। जब बिना ब्रेक लंबे समय तक काम किया जाता है, तो धीरे-धीरे थकान बढ़ने लगती है और काम में मन लगाना भी मुश्किल हो जाता है। यही स्थिति आगे चलकर तनाव और Burnout की वजह बन सकती है।

अगर आपको भी काम के दौरान ध्यान लगाने में परेशानी होती है या घंटों काम करने के बाद भी जरूरी काम पूरे नहीं हो पाते, तो Pomodoro Technique आजमाई जा सकती है। यह एक आसान टाइम-मैनेजमेंट तरीका है, जिसमें काम को छोटे हिस्सों में बांटकर बीच-बीच में ब्रेक लिया जाता है।

क्या है Pomodoro Technique?

Pomodoro Technique समय को व्यवस्थित तरीके से इस्तेमाल करने की एक लोकप्रिय पद्धति है। इसे इटली के Francesco Cirillo ने विकसित किया था। ‘Pomodoro’ इटालियन शब्द है, जिसका अर्थ टमाटर होता है। Cirillo ने पढ़ाई के दौरान टमाटर के आकार वाले किचन टाइमर का इस्तेमाल किया था, इसी वजह से इस तकनीक का यह नाम पड़ा।

इस तरीके में आमतौर पर 25 मिनट तक लगातार एक काम पर फोकस किया जाता है और उसके बाद छोटा ब्रेक लिया जाता है। इसका उद्देश्य एक साथ कई काम करने के बजाय एक समय में एक काम पर पूरा ध्यान केंद्रित करना है।

कैसे करें Pomodoro Technique का इस्तेमाल?

इसे अपनाने के लिए किसी खास उपकरण की जरूरत नहीं है। मोबाइल का टाइमर या साधारण घड़ी भी पर्याप्त है।

1. कामों की लिस्ट बनाएं
दिन में पूरे किए जाने वाले जरूरी काम पहले लिख लें। इससे प्राथमिकता तय करने में आसानी होगी।

2. 25 मिनट का टाइमर लगाएं
एक ऐसा काम चुनें जिसे इस अवधि में पूरा करने या उसके किसी हिस्से पर काम करने का लक्ष्य रखें।

3. केवल उसी काम पर ध्यान दें
25 मिनट तक सोशल मीडिया, अनावश्यक फोन नोटिफिकेशन और दूसरे कामों से दूरी बनाए रखें।

4. पांच मिनट का ब्रेक लें
टाइमर खत्म होते ही काम रोककर करीब 5 मिनट आराम करें। इस दौरान थोड़ा चलना, पानी पीना या आंखों को आराम देना बेहतर हो सकता है।

5. चार सेशन के बाद लंबा ब्रेक
चार 25-मिनट के सेशन पूरे होने के बाद करीब 15 से 30 मिनट का लंबा ब्रेक लिया जा सकता है। इसके बाद जरूरत के अनुसार अगला चक्र शुरू करें।

Burnout से बचने में कैसे मदद कर सकती है?

Pomodoro Technique का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें लगातार कई घंटों तक काम करने के बजाय काम और आराम के बीच संतुलन बनाया जाता है।

  • छोटे ब्रेक मानसिक थकान को कम करने में मदद कर सकते हैं।
  • एक समय में एक काम करने से ध्यान भटकने की संभावना कम होती है।
  • बड़े और मुश्किल काम छोटे हिस्सों में आसान लगने लगते हैं।
  • काम के दौरान नियमित अंतराल पर आराम मिलने से लंबे समय तक फोकस बनाए रखना आसान हो सकता है।
  • ऑफिस के काम और निजी समय के बीच बेहतर सीमा बनाने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, हर व्यक्ति के लिए 25 मिनट का समय जरूरी नहीं कि सबसे उपयुक्त हो। जरूरत और काम की प्रकृति के अनुसार इस अवधि को थोड़ा बदला भी जा सकता है। अगर लगातार तनाव, अत्यधिक थकान या Burnout जैसी परेशानी बनी रहती है, तो किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी और लाइफस्टाइल संबंधी जानकारी के उद्देश्य से है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। लगातार तनाव, अत्यधिक मानसिक थकान या अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर योग्य डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।

नेपाल बाढ़: तबाही में 469 लोगों की मौत, 977 अब भी लापता; यूपी-बिहार में बढ़ी सतर्कता

काठमांडू: नेपाल-तिब्बत सीमा के नजदीक बुधवार सुबह ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन के बाद आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। तेज पानी और मलबे की चपेट में आने से अब तक 469 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि करीब 977 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में लगभग 290 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।

नेपाल पुलिस के अनुसार, आपदा के बाद बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। प्रभावित इलाकों में कई स्थानों पर पहुंचना मुश्किल बना हुआ है, जिससे लापता लोगों की तलाश में भी चुनौती आ रही है।

तिब्बत में बनी नई झील ने बढ़ाई चिंता

चीन की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, रसुवागढ़ी बॉर्डर से करीब 18 किलोमीटर ऊपर तिब्बत क्षेत्र में ल्हेंदे नदी पर एक नई बैरियर झील बनने की सूचना है। बताया जा रहा है कि इस झील में करीब 200 करोड़ लीटर पानी जमा हो चुका है।

ऐसे में आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ के खतरे को लेकर चिंता बढ़ गई है। पहले से ही प्राकृतिक आपदा से प्रभावित नेपाल में जलस्तर और संभावित नए बहाव पर लगातार नजर रखी जा रही है।

पुल और बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान

बाढ़ के तेज बहाव ने नेपाल के परिवहन और बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचाया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज बह गए हैं। इसके कारण कई इलाकों का सड़क संपर्क टूट गया है और प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाना मुश्किल हो रहा है।

इसके अलावा करीब 13 जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी है। कई वाहन भी बाढ़ के तेज बहाव में बह गए।

राहत अभियान के दौरान नेपाली सेना ने प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चलाकर 250 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोगों के अब भी लापता होने के कारण तलाश अभियान जारी है।

यूपी और बिहार में बढ़ी सतर्कता

नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के बाद भारत के सीमावर्ती राज्यों में भी प्रशासन सतर्क हो गया है। उत्तर प्रदेश और बिहार में संभावित प्रभाव को देखते हुए प्रमुख नदियों के जलस्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है।

प्रशासन की ओर से गंडक, नारायणी और कोसी नदी की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर सहित संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। बिहार के नदी किनारे वाले इलाकों में भी प्रशासन को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।

भारत-नेपाल बस सेवा पर भी पड़ा असर

नेपाल में आई फ्लैश फ्लड का असर दोनों देशों के बीच यातायात पर भी पड़ा है। भारी बारिश और बाढ़ के कारण दिल्ली-काठमांडू मार्ग पर आवाजाही प्रभावित हुई है।

सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दिल्ली परिवहन निगम ने 28 और 29 अगस्त को दिल्ली से काठमांडू जाने वाली भारत-नेपाल मैत्री बस सेवा स्थगित कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, मार्ग की स्थिति सामान्य होने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद सेवा बहाल करने पर फैसला लिया जाएगा।

नेपाल में जारी राहत एवं बचाव अभियान के बीच बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने से चिंता बनी हुई है। वहीं, भारत के सीमावर्ती राज्यों में भी नदी जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है।

नेपाल में जलप्रलय के 36 घंटे बाद भी 30 से अधिक देशों के लोग लापता, सैकड़ों मौतों से बढ़ी चिंता

काठमांडू: तिब्बत में ग्लेशियर टूटने के बाद चीन-नेपाल सीमा के आसपास शुरू हुई प्राकृतिक आपदा ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। अचानक आए बाढ़ के पानी और मलबे ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोगों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

नेपाल और चीन के अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, मृतकों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है और 1,300 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। इनमें नेपाल के नागरिकों के अलावा अलग-अलग देशों से आए पर्यटक और अन्य लोग भी शामिल हैं। कई विदेशी नागरिक ट्रैकिंग के लिए इन इलाकों में पहुंचे थे, जबकि कुछ धार्मिक यात्रा के सिलसिले में नेपाल आए थे।

नेपाल में 359 शव बरामद

नेपाल में राहत और बचाव अभियान के दौरान अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार, गुरुवार शाम तक आठ जिलों से कुल 359 शव मिल चुके थे।

जिलेवार आंकड़ों के अनुसार रसुवा से 17, नुवाकोट से 28, धादिंग से 33, चितवन से 132, गोरखा से 30, तनहुँ से 22, नवलपरासी पूर्व से 82 और नवलपरासी पश्चिम से 15 शव बरामद किए गए हैं।

पुलिस, नेपाली सेना और अन्य राहत एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में लगातार अभियान चला रही हैं। प्राथमिकता बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने और लापता लोगों की तलाश करने की है।

517 विदेशी पर्यटकों का नहीं मिला पता

नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी इस आपदा की चपेट में आए हैं। बोर्ड ने गुरुवार को बताया कि 517 विदेशी पर्यटकों के बारे में अभी तक जानकारी नहीं मिल पाई है।

चीन की ओर से सामने आई जानकारी के मुताबिक, तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में भी आपदा का असर पड़ा है। वहां कम से कम तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 558 लोगों के लापता होने की सूचना है।

चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक नेपाल की तरफ करीब 100 चीनी नागरिकों के लापता होने की जानकारी मिली है।

कई देशों के नागरिकों से संपर्क टूटा

आपदा के बाद कई देशों ने अपने नागरिकों के बारे में जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अमेरिका के 65 नागरिक, मलेशिया के 51 नागरिक और यूक्रेन के 53 नागरिक लापता बताए गए हैं।

इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के 35, ब्रिटेन के 33 और कनाडा के 25 नागरिकों के बारे में भी अब तक पता नहीं चल पाया है। यूक्रेन की ओर से यह भी बताया गया है कि 46 विदेशी पर्यटकों का नेपाली अधिकारियों से संपर्क टूट चुका है।

दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के अधिकारियों ने भी अपने नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी है। बताया गया है कि नेपाल की एक जलविद्युत परियोजना से जुड़े इलाके में काम करने वाले नौ नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाया है।

जर्मनी, रूस और जापान के नागरिक भी शामिल

नेपाल पर्यटन बोर्ड के आंकड़ों में कई अन्य देशों के नागरिकों के लापता होने की जानकारी भी सामने आई है। इनमें सिंगापुर के 8, जर्मनी के 8 और रूस के 8 नागरिक शामिल हैं।

इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका के 6, लातविया के 6 और जापान के 5 नागरिकों के भी लापता होने की जानकारी दी गई है।

राहत अभियान के सामने बड़ी चुनौती

बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित पहाड़ी इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य आसान नहीं है। खराब मौसम, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां और तेज बहाव के कारण बचाव दलों को लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

नेपाल और चीन की संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। बचाव दल लापता लोगों की तलाश के साथ-साथ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक जरूरी सहायता पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

प्राकृतिक आपदा के करीब 36 घंटे बाद भी बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने से स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। आने वाले समय में राहत अभियानों के साथ मृतकों और लापता लोगों का आंकड़ा और बदल सकता है।