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Health Tips:PCSK9 दवा कैसे घटाती है बैड कोलेस्ट्रॉल? स्टैटिन से कितनी अलग है नई Oral Therapy, जानें पूरा तरीका

शरीर में बढ़ा हुआ LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल दिल और रक्त वाहिकाओं के लिए खतरा बढ़ा सकता है। इसे नियंत्रित करने के लिए लंबे समय से स्टैटिन जैसी दवाओं का इस्तेमाल किया जाता रहा है। लेकिन कुछ लोगों में मौजूदा उपचार के बावजूद LDL का स्तर पर्याप्त कम नहीं हो पाता या दवाओं को सहन करना मुश्किल होता है।

ऐसे मरीजों के लिए कोलेस्ट्रॉल कम करने की दवाओं में एक नया विकल्प सामने आया है। जुलाई 2026 में अमेरिकी FDA ने Lipfendra (enlicitide) को मंजूरी दी। यह PCSK9 को ब्लॉक करने वाली पहली FDA-approved ओरल दवा है, जिसे रोजाना टैबलेट के रूप में लिया जाता है। इसे डाइट और एक्सरसाइज के साथ हाई कोलेस्ट्रॉल वाले वयस्कों में LDL-C कम करने के लिए मंजूरी दी गई है।

स्टैटिन और PCSK9 दवा में क्या अंतर है?

स्टैटिन दवाएं शरीर में कोलेस्ट्रॉल बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करके LDL को कम करती हैं। वहीं PCSK9 इनहिबिटर एक अलग रास्ते से काम करते हैं।

लिवर की सतह पर मौजूद LDL रिसेप्टर्स खून से LDL को पकड़कर लिवर के अंदर ले जाने में मदद करते हैं। PCSK9 नाम का प्रोटीन इन रिसेप्टर्स को कम करने में भूमिका निभाता है। जब PCSK9 को रोका जाता है, तो लिवर की सतह पर अधिक LDL रिसेप्टर्स उपलब्ध रहते हैं और वे खून से ज्यादा LDL को हटाने में मदद करते हैं।

यानी आसान भाषा में कहें तो यह दवा शरीर में LDL को हटाने की लिवर की क्षमता को बढ़ाने का काम करती है।

पहली बार गोली के रूप में PCSK9 इनहिबिटर

PCSK9 को टारगेट करने वाली दवाएं पहले से उपलब्ध थीं, लेकिन वे इंजेक्शन के रूप में दी जाती थीं। Lipfendra की खासियत यह है कि इसे दिन में एक बार मुंह से लिया जाता है। FDA के मुताबिक यह पहली ओरल PCSK9 inhibitor therapy है।

इस बदलाव से उन मरीजों के लिए उपचार का विकल्प बढ़ सकता है जिन्हें LDL को और कम करने की जरूरत है और जो इंजेक्शन आधारित उपचार नहीं लेना चाहते।

शरीर में किस तरह काम करती है PCSK9 दवा?

इस पूरी प्रक्रिया को समझने के लिए लिवर के LDL रिसेप्टर्स को समझना जरूरी है।

खून में मौजूद LDL को लिवर के ये रिसेप्टर्स पकड़ते हैं और उसे रक्तप्रवाह से हटाने में मदद करते हैं। लेकिन PCSK9 प्रोटीन इन रिसेप्टर्स के सामान्य पुनर्चक्रण को प्रभावित करता है, जिससे लिवर की LDL हटाने की क्षमता कम हो सकती है।

Enlicitide PCSK9 से जुड़कर उसके LDL रिसेप्टर के साथ होने वाले इंटरैक्शन को रोकती है। इससे अधिक LDL रिसेप्टर्स उपलब्ध रहते हैं और खून से LDL-C हटाने में मदद मिलती है।

ट्रायल में LDL कितना कम हुआ?

FDA के अनुसार Lipfendra की प्रभावशीलता का मूल्यांकन दो बड़े रैंडमाइज्ड क्लिनिकल ट्रायल में किया गया, जिनमें कुल 3,207 वयस्क शामिल थे। इनमें हाई कोलेस्ट्रॉल वाले मरीजों के साथ HeFH यानी आनुवंशिक रूप से बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल वाले मरीज भी शामिल थे।

पहले अध्ययन में 24वें सप्ताह पर Lipfendra लेने वाले मरीजों में प्लेसिबो की तुलना में LDL-C में औसतन 56% की कमी दर्ज की गई।

दूसरे अध्ययन में HeFH वाले मरीजों में इसी अवधि पर LDL-C में औसतन 59% की कमी देखी गई।

किन मरीजों के लिए हो सकती है उपयोगी?

यह दवा हर व्यक्ति के लिए सामान्य कोलेस्ट्रॉल की पहली पसंद नहीं है। FDA ने इसे हाई कोलेस्ट्रॉल वाले वयस्कों में डाइट और एक्सरसाइज के साथ LDL-C कम करने के लिए मंजूरी दी है, जिसमें HeFH वाले मरीज भी शामिल हैं।

खास तौर पर उन मरीजों में यह एक अतिरिक्त विकल्प हो सकती है जिन्हें मौजूदा उपचार के बावजूद LDL को और कम करने की जरूरत होती है।

क्या इसके साइड इफेक्ट भी हैं?

किसी भी दवा की तरह Lipfendra के इस्तेमाल के दौरान भी प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं। FDA के अनुसार एक ट्रायल में साइड इफेक्ट की दर दवा और प्लेसिबो समूह में लगभग समान थी। HeFH वाले मरीजों के अध्ययन में दस्त और चक्कर आना ऐसे साइड इफेक्ट थे जो दवा लेने वाले समूह में अपेक्षाकृत अधिक देखे गए।

इसलिए इसे डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू करना उचित नहीं है।

क्या यह स्टैटिन की जगह लेगी?

जरूरी नहीं। PCSK9 दवाएं स्टैटिन से अलग तरीके से काम करती हैं और कुछ मरीजों में अतिरिक्त LDL-C कमी हासिल करने के लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं। FDA ने भी Lipfendra को मौजूदा उपचारों के साथ LDL कम करने के एक अतिरिक्त विकल्प के तौर पर मंजूरी दी है।

किस मरीज को स्टैटिन, PCSK9 inhibitor या किसी अन्य दवा की जरूरत है, यह उसके LDL स्तर, हृदय रोग के जोखिम, पहले से चल रहे इलाज और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों को देखकर डॉक्टर तय करते हैं।

जरूरी बात

नई दवा को देखकर खुद से अपनी मौजूदा कोलेस्ट्रॉल की दवा बंद या बदलने की कोशिश न करें। हाई LDL का इलाज व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री और हृदय संबंधी जोखिम के आधार पर तय किया जाता है।

नेपाल में बाढ़ के बीच सुरंग में फंसे लोगों को बचाया गया, मलबे और कीचड़ के बीच सेना ने चलाया रेस्क्यू

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। बाढ़ और मलबे की वजह से कई इलाकों में हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। नेपाली सेना और स्थानीय सुरक्षा बल प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित निकालने में जुटे हैं।

इसी अभियान के दौरान रसुवा जिले में अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से लोगों को बाहर निकालने का एक बेहद मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन सामने आया है। सुरंग के भीतर भारी मात्रा में कीचड़ और मलबा भर गया था। बचाए गए लोगों को बेहद संकरे और मुश्किल रास्ते से रेंगते हुए बाहर निकलना पड़ा, जबकि सुरक्षाकर्मी उन्हें एक-एक करके सुरक्षित स्थान तक पहुंचाते नजर आए।

कीचड़ और मलबे के बीच रास्ता तलाशना बना चुनौती

नेपाली सेना के मुताबिक सुरंग के अंदर और आसपास भारी मात्रा में मलबा जमा होने के कारण बचाव अभियान बेहद कठिन हो गया था। सुरंग के प्रवेश और निकास वाले हिस्सों तक पहुंचना भी आसान नहीं था।

बचाव दल को पहले सुरक्षित रास्ता तलाशना पड़ा और उसके बाद अंदर मौजूद लोगों तक पहुंचकर उन्हें बाहर निकालने का काम किया गया। जवानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि किसी भी समय मलबा खिसक सकता था और रास्ता दोबारा बंद हो सकता था।

सेना ने अभियान के दौरान फंसे लोगों को प्राथमिकता के आधार पर बाहर निकालने पर ध्यान केंद्रित किया।

दुर्गम इलाकों में राहत कार्य मुश्किल

नेपाल की भौगोलिक स्थिति ने राहत और बचाव कार्य को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। पहाड़ी इलाकों में कई जगह सड़क और संपर्क मार्ग बाढ़ और मलबे की वजह से प्रभावित हुए हैं।

इस कारण राहत टीमों को प्रभावित लोगों की सही लोकेशन तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। कई इलाकों में सामान्य रास्ते पूरी तरह बाधित हो चुके हैं, जिससे बचाव दल को वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

भीषण बाढ़ में अब तक बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक हजार से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। राहत एजेंसियां लगातार प्रभावित क्षेत्रों में खोज और बचाव अभियान चला रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय मदद की भी अपील

नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा की गंभीरता को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है। मानवीय सहायता से जुड़े संगठनों ने प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल राहत और बचाव सहायता उपलब्ध कराने की अपील की है।

विशेषज्ञों और राहत संगठनों का कहना है कि कई परिवारों ने इस आपदा में अपने घर और जरूरी सामान गंवा दिए हैं। ऐसे समय में भोजन, मेडिकल सहायता, सुरक्षित ठिकाने और खोज-बचाव संसाधनों की सबसे ज्यादा जरूरत है।

नेपाल के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती दूरदराज के उन इलाकों तक मदद पहुंचाना है, जहां बाढ़ और भूस्खलन के कारण संपर्क मुश्किल हो गया है।

कई किलोमीटर तक तबाही के निशान

प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों के मुताबिक बाढ़ का बहाव इतना तेज था कि कुछ ही समय में घर, सड़कें और दूसरी संरचनाएं पानी और मलबे की चपेट में आ गईं।

कई जगह मुख्य सड़क का बड़ा हिस्सा बह जाने की जानकारी सामने आई है। कुछ इलाकों में करीब 30 से 35 किलोमीटर तक सड़क और आसपास का क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित बताया जा रहा है।

तबाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा, जबकि कुछ इलाकों में अभी भी लोग अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं।

नेपाल में फिर बढ़ा बाढ़ का खतरा

पहले से बाढ़ प्रभावित इलाकों के बीच नेपाल के सामने एक और खतरा पैदा हो गया है। तिब्बत सीमा के पास ग्यिरोंग बॉर्डर पोर्ट के ऊपरी हिस्से में मौजूद एक प्राकृतिक जलाशय या बैरियर लेक के किनारे को नुकसान पहुंचने की सूचना है।

अगर वहां जमा पानी अचानक नीचे की ओर बहता है तो आसपास के क्षेत्रों में दोबारा तेज बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। इसी वजह से संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई जा रही है।

राहत अभियान के बीच नई चुनौती

नेपाल में जारी रेस्क्यू ऑपरेशन ने एक बार फिर दिखाया है कि पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक आपदा के बाद बचाव कार्य कितना कठिन हो सकता है। एक तरफ सेना और स्थानीय सुरक्षा बल सुरंगों और मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ नए बाढ़ के खतरे ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

फिलहाल प्रभावित क्षेत्रों में सबसे ज्यादा ध्यान लापता लोगों की तलाश, फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने और संभावित नए खतरे वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने पर है।

Sports News:2026 एशियन गेम्स में भारत भेजेगा कौन-सी टीम? टेंट में ड्रेसिंग रूम और दूर वॉशरूम से बढ़ी BCCI की चिंता

जापान के आइची-नागोया में होने वाले 2026 एशियन गेम्स की तैयारियां अंतिम दौर में पहुंच चुकी हैं। 19 सितंबर से शुरू होने वाले इस बड़े खेल आयोजन में क्रिकेट भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगा। क्रिकेट प्रतियोगिता की शुरुआत 24 सितंबर से होगी और भारतीय टीम पर सभी की खास नजर रहेगी।

हालांकि, एशियन गेम्स में भारतीय क्रिकेट टीम की तैयारियों को लेकर एक नई चिंता सामने आई है। जापान में खिलाड़ियों के लिए किए गए इंतजामों को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI संतुष्ट नहीं बताया जा रहा है। इसी वजह से भारतीय बोर्ड की ओर से वहां एक पर्यवेक्षक भेजे जाने की संभावना जताई गई है।

टेंट में तैयार किया गया ड्रेसिंग रूम

रिपोर्ट के मुताबिक, आयोजन स्थल पर खिलाड़ियों के लिए स्थायी ड्रेसिंग रूम की जगह टेंट लगाए गए हैं। इतना ही नहीं, इन ड्रेसिंग रूम से वॉशरूम की दूरी भी काफी ज्यादा बताई गई है।

जानकारी के अनुसार खिलाड़ियों को ड्रेसिंग रूम से करीब 500 मीटर दूर स्थित टॉयलेट का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। भारतीय क्रिकेट अधिकारियों ने आयोजन से जुड़े प्रतिनिधियों के सामने इन व्यवस्थाओं को लेकर अपनी चिंता भी जाहिर की है।

होटल के कमरों को लेकर भी परेशानी

सिर्फ मैदान की व्यवस्था ही नहीं, खिलाड़ियों के ठहरने की जगह को लेकर भी सवाल उठे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार होटल के कमरे अपेक्षाकृत छोटे हैं, जिसे टीम के लिए एक अतिरिक्त समस्या माना जा रहा है।

एक बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में खिलाड़ियों को आराम, रिकवरी और तैयारी के लिए बेहतर सुविधाएं मिलना जरूरी होता है। ऐसे में BCCI इन व्यवस्थाओं को लेकर आयोजकों के साथ बातचीत कर रहा है।

क्या भारत एशियन गेम्स में B टीम भेजेगा?

व्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी सामने आने के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि BCCI शायद एशियन गेम्स के लिए अपनी दूसरी श्रेणी की टीम भेज सकता है। हालांकि बोर्ड से जुड़े सूत्रों ने इस तरह की संभावना को खारिज किया है।

BCCI की चिंता व्यवस्थाओं को लेकर जरूर है, लेकिन खराब इंतजाम के कारण B टीम भेजने की खबर को सही नहीं माना जा रहा है। फिलहाल टीम में किसी बड़े बदलाव की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

भारत की टीम पहले ही घोषित

एशियन गेम्स के लिए भारतीय क्रिकेट टीम का स्क्वॉड पहले ही घोषित किया जा चुका है। टीम की कप्तानी श्रेयस अय्यर को सौंपी गई है, जबकि तिलक वर्मा उपकप्तान की भूमिका में होंगे।

भारत का संभावित स्क्वॉड

  • श्रेयस अय्यर — कप्तान
  • संजू सैमसन — विकेटकीपर
  • अभिषेक शर्मा
  • ईशान किशन — विकेटकीपर
  • शिवम दुबे
  • तिलक वर्मा — उपकप्तान
  • अक्षर पटेल
  • वॉशिंगटन सुंदर
  • नीतीश कुमार रेड्डी
  • वरुण चक्रवर्ती
  • रवि बिश्नोई
  • हर्षित राणा
  • अर्शदीप सिंह
  • वैभव सूर्यवंशी
  • जसप्रीत बुमराह

24 सितंबर से शुरू होगा क्रिकेट मुकाबला

2026 एशियन गेम्स का आयोजन 19 सितंबर से जापान के आइची-नागोया में होगा। क्रिकेट टूर्नामेंट की शुरुआत 24 सितंबर से प्रस्तावित है।

भारतीय टीम के लिए टूर्नामेंट से पहले सबसे अहम मुद्दा अब मैदान और खिलाड़ियों के रहने की सुविधाओं का है। BCCI की नजर इन व्यवस्थाओं पर बनी हुई है और जरूरत पड़ने पर बोर्ड की ओर से अधिकारी भेजकर हालात का जायजा लिया जा सकता है।

Health Tips:Shingles Vaccine से दिल की बीमारियों का खतरा कम? नई स्टडी में सामने आया चौंकाने वाला संबंध

शिंगल्स यानी दाद से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाली वैक्सीन को लेकर एक नई स्टडी ने दिल की सेहत से जुड़ा महत्वपूर्ण संकेत दिया है। शोध में पाया गया कि शिंगल्स की नई वैक्सीन लेने वाले बुजुर्गों में कुछ हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों का जोखिम पुरानी वैक्सीन लेने वालों की तुलना में कम रहा।

रिसर्च के मुताबिक, नई वैक्सीन लेने वाले लोगों में हार्ट डिजीज, हार्ट फेल्योर और एट्रियल फिब्रिलेशन जैसी स्थितियों के मामले कम देखने को मिले। पुरुषों में इस्केमिक स्ट्रोक का जोखिम भी कुछ कम पाया गया। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक इन नतीजों को वैक्सीन से सीधे होने वाला फायदा नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह शोध पहले से मौजूद स्वास्थ्य रिकॉर्ड के विश्लेषण पर आधारित है।

7 साल तक किया गया हेल्थ रिकॉर्ड का विश्लेषण

इस रिसर्च में अमेरिका के 60 से ज्यादा स्वास्थ्य केंद्रों के बड़े डेटाबेस का इस्तेमाल किया गया। इस नेटवर्क में 10 करोड़ से अधिक लोगों से जुड़े स्वास्थ्य रिकॉर्ड मौजूद थे।

मुख्य विश्लेषण में 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 72,000 से ज्यादा लोगों को दो समान समूहों में बांटकर तुलना की गई। एक समूह में पुरानी शिंगल्स वैक्सीन लेने वाले लोग थे, जबकि दूसरे समूह में नई वैक्सीन लेने वाले लोगों को शामिल किया गया।

शोधकर्ताओं ने दोनों समूहों की उम्र, पहले से मौजूद बीमारियों और दवाओं जैसी कई स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों को ध्यान में रखा। इसके बाद करीब सात वर्षों तक उनके स्वास्थ्य परिणामों का विश्लेषण किया गया।

नई वैक्सीन वाले समूह में कुल हृदय जोखिम कम

अध्ययन में नई शिंगल्स वैक्सीन लेने वाले लोगों में सात साल की अवधि के दौरान हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों का संयुक्त जोखिम लगभग 9 प्रतिशत कम पाया गया।

हालांकि, यह अंतर पूरे अध्ययन काल में एक जैसा नहीं रहा। शुरुआती वर्षों में अंतर ज्यादा दिखाई दिया और समय बीतने के साथ इसका प्रभाव कम होता गया।

शोधकर्ताओं ने यह भी जांचने की कोशिश की कि कहीं दूसरे कारणों की वजह से तो परिणाम प्रभावित नहीं हुए। अलग-अलग परिस्थितियों में डेटा का दोबारा विश्लेषण करने के बाद भी मुख्य निष्कर्षों में बहुत बड़ा बदलाव नहीं आया।

हार्ट फेल्योर और एट्रियल फिब्रिलेशन में भी अंतर

अध्ययन में कोरोनरी हार्ट डिजीज का जोखिम नई वैक्सीन वाले समूह में लगभग 10 प्रतिशत कम पाया गया। वहीं हार्ट फेल्योर के मामलों में करीब 12 प्रतिशत की कमी देखी गई।

इसके अलावा एट्रियल फिब्रिलेशन यानी दिल की धड़कन के अनियमित होने की स्थिति का जोखिम भी लगभग 7 प्रतिशत कम पाया गया।

इन परिणामों में पुरुषों और महिलाओं के बीच बहुत बड़ा अंतर नहीं दिखा। हालांकि, हर प्रकार की हृदय या रक्त वाहिका संबंधी बीमारी के मामले में वैक्सीन लेने वाले समूह को समान फायदा नहीं मिला।

पुरुषों में स्ट्रोक का जोखिम कम दिखा

इस्केमिक स्ट्रोक यानी मस्तिष्क तक रक्त पहुंचाने वाली नस में रुकावट के मामलों को देखें तो दोनों समूहों के बीच कुल मिलाकर कोई बड़ा अंतर नहीं मिला।

लेकिन जब पुरुषों और महिलाओं के आंकड़ों को अलग-अलग देखा गया, तो पुरुषों में इस्केमिक स्ट्रोक का जोखिम लगभग 12 प्रतिशत कम पाया गया।

शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि इसका मतलब यह नहीं है कि शिंगल्स वैक्सीन हर पुरुष में स्ट्रोक का खतरा 12 प्रतिशत घटाती है। यह केवल अध्ययन में दिखाई दिया एक सांख्यिकीय संबंध है, जिसे पक्का साबित करने के लिए आगे नियंत्रित शोध की जरूरत होगी।

वैक्सीन और दिल की सेहत के बीच संबंध क्यों हो सकता है?

शोधकर्ताओं के मुताबिक इसका एक संभावित कारण शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली और सूजन से जुड़ी प्रक्रियाएं हो सकती हैं।

शिंगल्स वैक्सीन शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया को सक्रिय करती है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इससे शरीर में कुछ ऐसी सूजन संबंधी प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता है, जिन्हें हृदय रोगों के जोखिम से जोड़ा जाता है।

हालांकि, यह अभी एक संभावित वैज्ञानिक व्याख्या है। अध्ययन से यह साबित नहीं हुआ है कि वैक्सीन इसी प्रक्रिया के जरिए हृदय रोगों को रोकती है।

अध्ययन की कुछ सीमाएं भी हैं

इस रिसर्च की सबसे महत्वपूर्ण सीमा यह है कि यह वास्तविक दुनिया में मौजूद स्वास्थ्य रिकॉर्ड पर आधारित अध्ययन है। इसलिए शोधकर्ता सभी ऐसे कारकों को पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सकते जो किसी व्यक्ति के हृदय रोग के जोखिम को प्रभावित करते हैं।

उदाहरण के लिए खान-पान, शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान, शराब का सेवन, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और जीवनशैली से जुड़ी सभी जानकारियां रिकॉर्ड में समान स्तर पर उपलब्ध नहीं थीं।

यही वजह है कि इस अध्ययन के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि शिंगल्स वैक्सीन सीधे तौर पर हार्ट अटैक या स्ट्रोक से बचाती है।

क्या शिंगल्स वैक्सीन को हार्ट की दवा माना जा सकता है?

फिलहाल इसका जवाब नहीं है। अध्ययन में वैक्सीन और हृदय संबंधी बेहतर परिणामों के बीच एक संभावित संबंध जरूर सामने आया है, लेकिन इससे कारण और प्रभाव साबित नहीं होता।

शिंगल्स वैक्सीन का मुख्य उद्देश्य शिंगल्स और उससे जुड़ी जटिलताओं से बचाव करना है। दिल की बीमारी से बचने के लिए ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, वजन, खान-पान और नियमित शारीरिक गतिविधि जैसे स्थापित उपायों पर ध्यान देना जरूरी है।

नई रिसर्च निश्चित तौर पर आगे के वैज्ञानिक अध्ययनों के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा देती है, लेकिन शिंगल्स वैक्सीन को फिलहाल हार्ट अटैक या स्ट्रोक रोकने वाली वैक्सीन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

नेपाल बाढ़: ट्रंप ने बढ़ाया मदद का हाथ, बोले- जरूरत पड़ी तो हर संभव सहायता देगा अमेरिका

नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। चीन से सटे नेपाल के प्रभावित इलाकों में प्राकृतिक आपदा के बीच अमेरिका ने मदद का हाथ बढ़ाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि नेपाल को राहत और बचाव के लिए जिस भी सहायता की जरूरत होगी, अमेरिका उसे उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

ट्रंप ने नेपाल में हुए नुकसान को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि अमेरिका पहले ही नेपाल के नेतृत्व के संपर्क में है और आवश्यक सहायता देने की पेशकश कर चुका है। उन्होंने दोनों देशों के बीच अच्छे संबंधों का भी जिक्र किया।

ट्रंप ने कहा- जरूरत बताइए, मदद मिलेगी

ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने नेपाल में आई बाढ़ और उससे हुई तबाही पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रशासन नेपाल के अधिकारियों के संपर्क में है और वहां की जरूरतों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने को तैयार है।

ट्रंप के मुताबिक, नेपाल में बाढ़ का असर इतना व्यापक रहा कि मजबूत इमारतें और दूसरे ढांचे भी तेज पानी के सामने टिक नहीं सके। उन्होंने इस प्राकृतिक आपदा को बेहद भयावह करार दिया।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि नेपाल को राहत कार्यों के लिए जिस तरह की सहायता चाहिए, वह अमेरिका से मांग सकता है। उनका कहना था कि अमेरिका अपनी क्षमता के मुताबिक नेपाल की मदद करेगा।

नेपाल में अमेरिकी नागरिकों को लेकर भी चिंता

बाढ़ के बाद नेपाल में मौजूद अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी अमेरिका में चिंता बढ़ गई है। ट्रंप ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में कई अमेरिकी नागरिक मौजूद थे, लेकिन उस समय सभी लोगों की पूरी जानकारी प्रशासन के पास उपलब्ध नहीं थी।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि नेपाल में मौजूद अमेरिकी नागरिक सुरक्षित होंगे और राहत एवं बचाव अभियान के दौरान उनका पता लगाया जा सकेगा।

90 अमेरिकी नागरिकों से संपर्क नहीं

अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, नेपाल में बाढ़ आने के बाद करीब 90 अमेरिकी नागरिकों से फिलहाल संपर्क नहीं हो सका है। प्रशासन इन लोगों के बारे में जानकारी जुटाने में लगा हुआ है।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अब तक तीन अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। फिलहाल नेपाल में किसी अमेरिकी नागरिक की मौत की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

विदेश विभाग का कहना है कि जिन 90 लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है, उनमें से कुछ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हो सकते हैं। उनकी स्थिति का पता लगाने के लिए स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है।

पहले भी आर्थिक मदद का ऐलान कर चुका है अमेरिका

नेपाल में राहत अभियान के लिए अमेरिका पहले ही सहायता की घोषणा कर चुका है। अमेरिकी प्रशासन ने आपदा से निपटने में सहयोग के लिए एक आपदा प्रतिक्रिया सलाहकार भेजने की जानकारी दी थी।

इसके अलावा नेपाल के राहत और बचाव प्रयासों के लिए अमेरिका की ओर से 5 लाख डॉलर की सहायता देने का भी ऐलान किया गया था।

नेपाल में बाढ़ से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है। ऐसे में अमेरिका की अतिरिक्त सहायता की पेशकश से आपदा प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के प्रयासों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।