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Health Tips:Shingles Vaccine से दिल की बीमारियों का खतरा कम? नई स्टडी में सामने आया चौंकाने वाला संबंध

शिंगल्स यानी दाद से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाली वैक्सीन को लेकर एक नई स्टडी ने दिल की सेहत से जुड़ा महत्वपूर्ण संकेत दिया है। शोध में पाया गया कि शिंगल्स की नई वैक्सीन लेने वाले बुजुर्गों में कुछ हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों का जोखिम पुरानी वैक्सीन लेने वालों की तुलना में कम रहा।

रिसर्च के मुताबिक, नई वैक्सीन लेने वाले लोगों में हार्ट डिजीज, हार्ट फेल्योर और एट्रियल फिब्रिलेशन जैसी स्थितियों के मामले कम देखने को मिले। पुरुषों में इस्केमिक स्ट्रोक का जोखिम भी कुछ कम पाया गया। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक इन नतीजों को वैक्सीन से सीधे होने वाला फायदा नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह शोध पहले से मौजूद स्वास्थ्य रिकॉर्ड के विश्लेषण पर आधारित है।

7 साल तक किया गया हेल्थ रिकॉर्ड का विश्लेषण

इस रिसर्च में अमेरिका के 60 से ज्यादा स्वास्थ्य केंद्रों के बड़े डेटाबेस का इस्तेमाल किया गया। इस नेटवर्क में 10 करोड़ से अधिक लोगों से जुड़े स्वास्थ्य रिकॉर्ड मौजूद थे।

मुख्य विश्लेषण में 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 72,000 से ज्यादा लोगों को दो समान समूहों में बांटकर तुलना की गई। एक समूह में पुरानी शिंगल्स वैक्सीन लेने वाले लोग थे, जबकि दूसरे समूह में नई वैक्सीन लेने वाले लोगों को शामिल किया गया।

शोधकर्ताओं ने दोनों समूहों की उम्र, पहले से मौजूद बीमारियों और दवाओं जैसी कई स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों को ध्यान में रखा। इसके बाद करीब सात वर्षों तक उनके स्वास्थ्य परिणामों का विश्लेषण किया गया।

नई वैक्सीन वाले समूह में कुल हृदय जोखिम कम

अध्ययन में नई शिंगल्स वैक्सीन लेने वाले लोगों में सात साल की अवधि के दौरान हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों का संयुक्त जोखिम लगभग 9 प्रतिशत कम पाया गया।

हालांकि, यह अंतर पूरे अध्ययन काल में एक जैसा नहीं रहा। शुरुआती वर्षों में अंतर ज्यादा दिखाई दिया और समय बीतने के साथ इसका प्रभाव कम होता गया।

शोधकर्ताओं ने यह भी जांचने की कोशिश की कि कहीं दूसरे कारणों की वजह से तो परिणाम प्रभावित नहीं हुए। अलग-अलग परिस्थितियों में डेटा का दोबारा विश्लेषण करने के बाद भी मुख्य निष्कर्षों में बहुत बड़ा बदलाव नहीं आया।

हार्ट फेल्योर और एट्रियल फिब्रिलेशन में भी अंतर

अध्ययन में कोरोनरी हार्ट डिजीज का जोखिम नई वैक्सीन वाले समूह में लगभग 10 प्रतिशत कम पाया गया। वहीं हार्ट फेल्योर के मामलों में करीब 12 प्रतिशत की कमी देखी गई।

इसके अलावा एट्रियल फिब्रिलेशन यानी दिल की धड़कन के अनियमित होने की स्थिति का जोखिम भी लगभग 7 प्रतिशत कम पाया गया।

इन परिणामों में पुरुषों और महिलाओं के बीच बहुत बड़ा अंतर नहीं दिखा। हालांकि, हर प्रकार की हृदय या रक्त वाहिका संबंधी बीमारी के मामले में वैक्सीन लेने वाले समूह को समान फायदा नहीं मिला।

पुरुषों में स्ट्रोक का जोखिम कम दिखा

इस्केमिक स्ट्रोक यानी मस्तिष्क तक रक्त पहुंचाने वाली नस में रुकावट के मामलों को देखें तो दोनों समूहों के बीच कुल मिलाकर कोई बड़ा अंतर नहीं मिला।

लेकिन जब पुरुषों और महिलाओं के आंकड़ों को अलग-अलग देखा गया, तो पुरुषों में इस्केमिक स्ट्रोक का जोखिम लगभग 12 प्रतिशत कम पाया गया।

शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि इसका मतलब यह नहीं है कि शिंगल्स वैक्सीन हर पुरुष में स्ट्रोक का खतरा 12 प्रतिशत घटाती है। यह केवल अध्ययन में दिखाई दिया एक सांख्यिकीय संबंध है, जिसे पक्का साबित करने के लिए आगे नियंत्रित शोध की जरूरत होगी।

वैक्सीन और दिल की सेहत के बीच संबंध क्यों हो सकता है?

शोधकर्ताओं के मुताबिक इसका एक संभावित कारण शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली और सूजन से जुड़ी प्रक्रियाएं हो सकती हैं।

शिंगल्स वैक्सीन शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया को सक्रिय करती है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इससे शरीर में कुछ ऐसी सूजन संबंधी प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता है, जिन्हें हृदय रोगों के जोखिम से जोड़ा जाता है।

हालांकि, यह अभी एक संभावित वैज्ञानिक व्याख्या है। अध्ययन से यह साबित नहीं हुआ है कि वैक्सीन इसी प्रक्रिया के जरिए हृदय रोगों को रोकती है।

अध्ययन की कुछ सीमाएं भी हैं

इस रिसर्च की सबसे महत्वपूर्ण सीमा यह है कि यह वास्तविक दुनिया में मौजूद स्वास्थ्य रिकॉर्ड पर आधारित अध्ययन है। इसलिए शोधकर्ता सभी ऐसे कारकों को पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सकते जो किसी व्यक्ति के हृदय रोग के जोखिम को प्रभावित करते हैं।

उदाहरण के लिए खान-पान, शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान, शराब का सेवन, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और जीवनशैली से जुड़ी सभी जानकारियां रिकॉर्ड में समान स्तर पर उपलब्ध नहीं थीं।

यही वजह है कि इस अध्ययन के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि शिंगल्स वैक्सीन सीधे तौर पर हार्ट अटैक या स्ट्रोक से बचाती है।

क्या शिंगल्स वैक्सीन को हार्ट की दवा माना जा सकता है?

फिलहाल इसका जवाब नहीं है। अध्ययन में वैक्सीन और हृदय संबंधी बेहतर परिणामों के बीच एक संभावित संबंध जरूर सामने आया है, लेकिन इससे कारण और प्रभाव साबित नहीं होता।

शिंगल्स वैक्सीन का मुख्य उद्देश्य शिंगल्स और उससे जुड़ी जटिलताओं से बचाव करना है। दिल की बीमारी से बचने के लिए ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, वजन, खान-पान और नियमित शारीरिक गतिविधि जैसे स्थापित उपायों पर ध्यान देना जरूरी है।

नई रिसर्च निश्चित तौर पर आगे के वैज्ञानिक अध्ययनों के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा देती है, लेकिन शिंगल्स वैक्सीन को फिलहाल हार्ट अटैक या स्ट्रोक रोकने वाली वैक्सीन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

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