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IVF जर्नी पर अनुष्का रंजन ने खोले राज, बोलीं- हमेशा से दो बच्चों की मां बनना चाहती थी

एक्टर आदित्य सील और अनुष्का रंजन इन दिनों अपनी पेरेंटहुड जर्नी को लेकर चर्चा में हैं। शादी के करीब पांच साल बाद दोनों जुड़वां बेटियों के माता-पिता बने हैं। कपल ने परिवार बढ़ाने के लिए IVF की मदद ली थी। अब अनुष्का ने एक पॉडकास्ट में अपनी IVF जर्नी, उससे जुड़ी परेशानियों और इस दौरान मिले लोगों के सुझावों के बारे में विस्तार से बात की है।

2023 में परिवार बढ़ाने का लिया फैसला

अनुष्का रंजन और आदित्य सील ने 21 नवंबर 2021 को शादी की थी। अनुष्का ने बताया कि साल 2023 में दोनों ने परिवार शुरू करने का फैसला किया।

उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्होंने बिना किसी मेडिकल प्रक्रिया के गर्भधारण की कोशिश की। इसके लिए वे एक बड़े अस्पताल में डॉक्टर से भी मिले। डॉक्टर ने उन्हें कुछ समय तक नेचुरली कोशिश करने और ओव्यूलेशन पीरियड पर ध्यान देने की सलाह दी थी।

हालांकि, अनुष्का को लगा कि वह इस प्रक्रिया में ज्यादा समय नहीं लगाना चाहतीं। उनका कहना था कि वह अपनी उम्र को देखते हुए जल्द परिवार शुरू करने को लेकर स्पष्ट थीं।

‘मैं हमेशा से दो बच्चे चाहती थी’

अनुष्का ने बताया कि वह लंबे समय से दो बच्चों की मां बनना चाहती थीं। उनके मुताबिक, भाई-बहन के रिश्ते की अहमियत को देखते हुए उनके मन में हमेशा से दो बच्चों का विचार था।

उन्होंने इसी वजह से फैमिली प्लानिंग को ज्यादा समय तक टालने के बजाय आगे बढ़ने का फैसला किया।

IUI के बाद IVF की ओर बढ़ीं

परिवार शुरू करने की कोशिश के दौरान अनुष्का ने एक अन्य डॉक्टर से भी सलाह ली। डॉक्टर ने उन्हें IUI यानी Intrauterine Insemination आजमाने की सलाह दी।

अनुष्का के मुताबिक, IUI के दौरान उन्हें कई दवाइयां और इंजेक्शन लेने पड़े, जिसके कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि 2025 में उन्होंने दो बार IUI की कोशिश की, लेकिन दोनों प्रयास सफल नहीं हुए।

डॉक्टर ने एक और IUI साइकिल आजमाने की सलाह दी थी। हालांकि, अनुष्का ने महसूस किया कि अगर दवाइयों और इंजेक्शन की प्रक्रिया आगे भी जारी रखनी है, तो IVF पर विचार करना बेहतर हो सकता है।

इसके बाद उन्होंने और आदित्य ने IVF की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया।

नवंबर 2025 में पहली IVF साइकिल हुई सफल

अनुष्का के मुताबिक, कपल ने नवंबर 2025 में पहली बार IVF प्रक्रिया कराई। यह प्रयास सफल रहा और वह प्रेग्नेंट हुईं।

बाद में उन्हें पता चला कि वह जुड़वां बच्चों की मां बनने वाली हैं। हाल ही में अनुष्का और आदित्य ने अपनी जुड़वां बेटियों का स्वागत किया है।

लोगों की अनचाही सलाह से परेशान थीं अनुष्का

अनुष्का ने IVF के दौरान मिलने वाली अनचाही सलाह का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस दौरान कई लोग उन्हें अलग-अलग तरह के धार्मिक और दूसरे उपाय करने की सलाह देते थे।

एक्ट्रेस ने कहा कि वह खुद हनुमान चालीसा सुनना पसंद करती हैं और इससे उन्हें मानसिक शांति मिलती है, लेकिन उन्हें दूसरों की ओर से बिना मांगी गई सलाह देना पसंद नहीं था।

उनके मुताबिक, ऐसे संवेदनशील दौर में व्यक्ति को अपनी पसंद और मानसिक स्थिति के अनुसार चीजों को संभालने की आजादी मिलनी चाहिए।

बहन की शादी के दौरान बिगड़ी थी तबीयत

अनुष्का ने अपनी बहन आकांक्षा रंजन की शादी के समय की एक घटना भी साझा की। उन्होंने बताया कि उस दौरान उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई थी और उन्हें तेज बुखार हो गया था।

हालात को देखते हुए उन्हें अस्पताल ले जाकर स्कैन भी करवाना पड़ा था। IVF जर्नी के दौरान ऐसी परिस्थितियों ने उनके लिए पूरा अनुभव और चुनौतीपूर्ण बना दिया था।

ऐसे शुरू हुई थी आदित्य और अनुष्का की लव स्टोरी

आदित्य सील और अनुष्का रंजन की पहली मुलाकात एक कार्यक्रम के दौरान हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच दोस्ती बढ़ी और करीब चार साल तक उन्होंने एक-दूसरे को डेट किया।

आदित्य ने अनुष्का को उनके जन्मदिन के मौके पर पेरिस में प्रपोज किया था। इसके बाद दोनों ने शादी कर ली।

अब शादी के करीब पांच साल बाद कपल ने अपनी जिंदगी में दो नए सदस्यों का स्वागत किया है। अनुष्का और आदित्य अपनी जुड़वां बेटियों वीरा और माही के माता-पिता बन चुके हैं।

नेपाल की तबाही के संकेत महीनों पहले मिल चुके थे, ग्लेशियर पिघलने की चेतावनी के बावजूद नहीं जागा सिस्टम

नेपाल और तिब्बत से लगे हिमालयी इलाके में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। तेज बहाव और मलबे की चपेट में कई इलाके आ गए, जबकि बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत एवं बचाव अभियान जारी है और प्रभावित परिवार अपनों के सुरक्षित लौटने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

पहली नजर में यह आपदा अचानक आई प्राकृतिक घटना लग सकती है, लेकिन हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते ग्लेशियर पिघलने और उससे जुड़े खतरों को लेकर वैज्ञानिक पहले ही चेतावनी देते रहे हैं। करीब दो महीने पहले जारी रिपोर्टों में भी ग्लेशियरों के तेजी से सिकुड़ने और अचानक बाढ़ के खतरे को लेकर चिंता जताई गई थी।

तेजी से पिघल रहे हिमालय के ग्लेशियर

हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र को लेकर जारी एक वैज्ञानिक आकलन में बताया गया था कि ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार पिछले कुछ दशकों में तेजी से बढ़ी है। खासतौर पर वर्ष 2000 के बाद ग्लेशियरों के सिकुड़ने की गति में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

रिपोर्ट के मुताबिक छोटे और अपेक्षाकृत कमजोर ग्लेशियर सबसे तेजी से अपना बर्फीला क्षेत्र खो रहे हैं। इसका सीधा असर ऊंचाई वाले इलाकों में मौजूद ग्लेशियर झीलों पर पड़ सकता है। ऐसी झीलों के अचानक टूटने या उनमें पानी का स्तर तेजी से बढ़ने पर निचले इलाकों में फ्लैश फ्लड का खतरा पैदा हो जाता है।

वैज्ञानिक आकलन के अनुसार 1975 के बाद से इस क्षेत्र के ग्लेशियरों की बर्फ की मोटाई में करीब 27 मीटर तक की कमी देखी गई है।

नेपाल-चीन सीमा पर बाढ़ ने मचाई भारी तबाही

नेपाल और चीन की सीमा से लगे इलाके में आई बाढ़ के बाद बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान की खबर सामने आई है। अब तक करीब 475 लोगों की मौत की पुष्टि होने और लगभग 1,000 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।

आपदा के बाद विशेषज्ञ यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में पानी और मलबा इतनी तेजी से नीचे कैसे आया। शुरुआती आकलन में ऊंचाई वाले क्षेत्र से बर्फ, चट्टानों और मलबे के खिसकने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है।

ग्लेशियर के नीचे का हिस्सा टूटने से आया मलबा?

हिमालयी आपदाओं पर काम करने वाले विशेषज्ञों के मुताबिक इस घटना में संभव है कि ग्लेशियर के नीचे मौजूद आधार चट्टान का एक हिस्सा टूटकर अलग हो गया हो। इसके बाद बर्फ और चट्टानों का भारी मलबा तेजी से नीचे की घाटी की तरफ आया और बाढ़ के पानी के साथ बहता चला गया।

इस तरह के मलबे के नदी में जमा होने से आगे एक नई समस्या पैदा हो सकती है। नदी का रास्ता रुकने पर अस्थायी बांध जैसी स्थिति बन सकती है, जिसके पीछे पानी जमा होने लगता है। यदि यह प्राकृतिक अवरोध कमजोर पड़ता है और अचानक टूट जाता है, तो नीचे के इलाकों में दोबारा तेज बाढ़ आ सकती है।

अगले कुछ दिनों में फिर बढ़ सकता है खतरा

विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि मलबे के कारण बने अस्थायी जलाशय में अगले कुछ दिनों तक पानी बढ़ सकता है। अगर जलस्तर तेजी से बढ़ा और प्राकृतिक अवरोध कमजोर हुआ, तो आसपास के इलाकों में एक और अचानक बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।

हालांकि, एक दूसरा संभावित परिदृश्य यह भी है कि पानी धीरे-धीरे प्राकृतिक अवरोध से बाहर निकल जाए और अचानक बड़ी बाढ़ की स्थिति न बने। इसलिए प्रभावित घाटी और नदी के आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बेहद जरूरी मानी जा रही है।

चमोली जैसी घटना से मिलती है समानता

विशेषज्ञों ने इस घटना की तुलना फरवरी 2021 में उत्तराखंड के चमोली में हुई आपदा से भी की है। उस घटना में ऊंचाई वाले इलाके से बड़ी मात्रा में मलबा नीचे आया था और कुछ समय के लिए ऋषिगंगा नदी का प्रवाह बाधित हो गया था।

ऐसी घटनाओं में पानी और मलबे का मिश्रित तेज बहाव निचले इलाकों में बहुत कम समय में भारी नुकसान पहुंचा सकता है। यही वजह है कि मौजूदा हालात में नदी घाटियों और निचले इलाकों पर विशेष नजर रखने की जरूरत बताई जा रही है।

नेपाल ने जारी की नई बाढ़ चेतावनी

पहले से प्रभावित इलाके में पानी का स्तर दोबारा बढ़ने के बाद नेपाल प्रशासन ने नए सिरे से बाढ़ की चेतावनी जारी की है। स्थानीय लोगों को संवेदनशील इलाकों से दूर रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बचाव अभियान के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्र में जलस्तर और मलबे से बने अवरोधों की लगातार निगरानी करना जरूरी है।

38 ग्लेशियरों के अध्ययन से सामने आई चिंता

हिंदू कुश हिमालय के ग्लेशियरों पर किए गए 2026 के आकलन में 38 ग्लेशियरों से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन किया गया। इसमें पाया गया कि वर्ष 2000 के बाद ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार पहले की तुलना में करीब दोगुनी हो गई है।

हालांकि, अध्ययन में हिमालयी ग्लेशियरों की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई। 38 ग्लेशियरों में केवल सात ही ऐसे पाए गए जो वैश्विक निगरानी मानकों के अनुरूप पर्याप्त डेटा उपलब्ध करा रहे थे।

काराकोरम, सिक्किम, जांस्कर और भूटान जैसे महत्वपूर्ण ग्लेशियर क्षेत्रों में निगरानी का नेटवर्क अभी भी पर्याप्त नहीं माना जा रहा है।

वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती निगरानी की कमी

विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालय तेजी से बदल रहा है, लेकिन उसके साथ तालमेल बिठाने के लिए निगरानी व्यवस्था उतनी तेजी से विकसित नहीं हुई है।

ग्लेशियरों के आकार, बर्फ की मोटाई, झीलों के जलस्तर और मलबे की गतिविधियों पर लगातार नजर रखना बेहद जरूरी है। यदि इन बदलावों की समय रहते पहचान नहीं हो पाती, तो किसी बड़े खतरे की जानकारी तब मिलती है जब नुकसान शुरू हो चुका होता है।

पूर्वी हिमालयी इलाकों में तेजी से घट रही बर्फ

अध्ययन में पूर्वी हेंगडुआन शान क्षेत्र के ग्लेशियरों में तेजी से हो रहे बदलाव को भी रेखांकित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले तीन दशकों में कुछ हिस्सों में ग्लेशियरों की बर्फ में करीब 33 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है।

सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी घाटियां इस बदलाव से विशेष रूप से प्रभावित हैं। इन तीनों नदी घाटियों में हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र के 74 प्रतिशत से अधिक ग्लेशियर मौजूद हैं।

चेतावनी अब सिर्फ भविष्य की नहीं, वर्तमान की भी है

नेपाल की मौजूदा बाढ़ ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियरों के तेजी से बदलते स्वरूप को लेकर चेतावनियों को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है।

बाढ़ का वास्तविक कारण और इस आपदा में ग्लेशियर या मलबे की भूमिका पूरी वैज्ञानिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। लेकिन ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने, ग्लेशियर झीलों के बढ़ते खतरे और कमजोर निगरानी व्यवस्था को देखते हुए विशेषज्ञ हिमालयी क्षेत्रों में बेहतर पूर्व चेतावनी प्रणाली और लगातार निगरानी की जरूरत पर जोर दे रहे हैं।

Health Update:क्या ज्यादा Screenshot लेने से कमजोर हो सकती है याददाश्त? रिसर्च में सामने आया चौंकाने वाला असर

आज के डिजिटल दौर में स्क्रीनशॉट लेना हमारी रोजमर्रा की आदत बन चुका है। कोई जरूरी मैसेज हो, ऑनलाइन पेमेंट की जानकारी, कोई तस्वीर या फिर काम से जुड़ा नोट—हम अक्सर उसे याद रखने के लिए तुरंत स्क्रीनशॉट ले लेते हैं। लगता है कि फोन में जानकारी सेव है तो जरूरत पड़ने पर कभी भी देख लेंगे।

लेकिन एक हालिया शोध ने इस आदत के एक दिलचस्प पहलू की ओर ध्यान खींचा है। रिसर्च में पाया गया कि किसी चीज को रिकॉर्ड करने पर हमारा दिमाग उस जानकारी को याद रखने के लिए उतनी मेहनत नहीं करता, जितनी सिर्फ ध्यान से देखने के दौरान कर सकता है। वैज्ञानिकों ने इसे Photo-Taking Impairment Effect से जोड़ा है।

अमेरिका की यूनिवर्सिटी में किया गया अध्ययन

यह अध्ययन अमेरिका की बिंघैमटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया। रिसर्च का उद्देश्य यह समझना था कि किसी दृश्य को कैमरे में कैद करने और उसे बिना रिकॉर्ड किए देखने के बीच याददाश्त में क्या अंतर आता है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि जब लोग किसी चीज को फोटो लेने या रिकॉर्ड करने की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते हैं, तो उनका ध्यान उस चीज को समझने और याद रखने से हटकर उसे कैप्चर करने की प्रक्रिया पर जा सकता है।

इसका मतलब यह नहीं है कि हर बार स्क्रीनशॉट लेने से आपकी याददाश्त कमजोर हो जाएगी। बल्कि शोध इस बात की ओर इशारा करता है कि किसी जानकारी को सिर्फ डिजिटल रूप से सेव कर लेने से उसे याद रखने की हमारी मानसिक कोशिश कम हो सकती है।

छात्रों पर किया गया प्रयोग

अध्ययन के दौरान छात्रों को अलग-अलग कलाकृतियां दिखाई गईं। इनमें पेंटिंग और स्केच जैसी तस्वीरें शामिल थीं।

कुछ तस्वीरों को छात्रों से कैमरे या स्क्रीनशॉट के जरिए रिकॉर्ड करने के लिए कहा गया, जबकि दूसरी तस्वीरों को केवल ध्यान से देखने के लिए कहा गया।

बाद में छात्रों से इन तस्वीरों से संबंधित कई सवाल पूछे गए। इसमें तस्वीरों के छोटे-छोटे विवरणों को पहचानना भी शामिल था।

रिसर्च के परिणामों में देखा गया कि जिन तस्वीरों को छात्रों ने रिकॉर्ड किया था, उनसे जुड़ी कुछ जानकारियां उन्हें उन तस्वीरों की तुलना में कम याद रहीं जिन्हें उन्होंने बिना रिकॉर्ड किए देखा था।

फोटो लेने के बाद दिमाग में क्या होता है?

विशेषज्ञ इस प्रभाव को समझाने के लिए Cognitive Offloading की अवधारणा का इस्तेमाल करते हैं। इसका मतलब है कि जब हम किसी जानकारी को बाहरी माध्यम में सुरक्षित कर लेते हैं, तो दिमाग उस जानकारी को खुद याद रखने की जिम्मेदारी कम कर सकता है।

उदाहरण के लिए, जब किसी व्यक्ति को पता होता है कि जरूरी नंबर फोन में सेव है, तो उसे वही नंबर याद करने की जरूरत कम महसूस होती है।

इसी तरह जब हम किसी जानकारी का स्क्रीनशॉट लेकर यह सोच लेते हैं कि जरूरत पड़ने पर फोन में दोबारा देख लेंगे, तो संभव है कि उस समय हमारा दिमाग उसे गहराई से याद करने पर कम ध्यान दे।

स्क्रीनशॉट लेते समय ध्यान क्यों भटक सकता है?

किसी चीज की तस्वीर लेने में सिर्फ कैमरा खोलना ही शामिल नहीं होता। फोन निकालना, कैमरा सेट करना, सही एंगल चुनना और तस्वीर सेव होने की पुष्टि करना भी प्रक्रिया का हिस्सा है।

इस दौरान हमारा ध्यान उस जानकारी से हटकर उसे रिकॉर्ड करने की गतिविधि पर चला जाता है। अगर किसी चीज को याद रखने के लिए उस पर पूरा ध्यान देना जरूरी है, तो इस तरह का ध्यान बंटना याददाश्त को प्रभावित कर सकता है।

यही वजह है कि किसी महत्वपूर्ण जानकारी को सिर्फ सेव करने के बजाय उसे समझना और दोहराना याद रखने के लिए ज्यादा प्रभावी हो सकता है।

क्या डायरी में लिखना बेहतर विकल्प है?

अगर कोई जानकारी लंबे समय तक याद रखनी है, तो उसे अपने शब्दों में लिखना एक उपयोगी तरीका हो सकता है। लिखते समय व्यक्ति जानकारी को दोबारा प्रोसेस करता है और उसे समझने की कोशिश करता है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि स्क्रीनशॉट लेना पूरी तरह गलत आदत है। जरूरी दस्तावेज, रसीद, पता, टिकट या किसी महत्वपूर्ण जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए स्क्रीनशॉट बेहद उपयोगी है।

समस्या तब हो सकती है जब हम हर जानकारी को सिर्फ इसलिए सेव करते जाएं क्योंकि हमें लगता है कि बाद में उसे याद करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

फोन में हजारों फोटो, लेकिन याद कितनी?

आज स्मार्टफोन ने फोटो और स्क्रीनशॉट को सेव करना बेहद आसान बना दिया है। लोग हर दिन बड़ी संख्या में तस्वीरें लेते और अलग-अलग जानकारी के स्क्रीनशॉट सेव करते हैं।

इससे फोन में समय के साथ हजारों फोटो और स्क्रीनशॉट जमा हो जाते हैं। लेकिन किसी जानकारी का फोन में मौजूद होना और उसका हमारे दिमाग में याद रहना दो अलग-अलग बातें हैं।

इसलिए अगर कोई बात वास्तव में याद रखना चाहते हैं, तो सिर्फ उसका स्क्रीनशॉट लेने के बजाय उसे पढ़ना, समझना, अपने शब्दों में लिखना या किसी दूसरे व्यक्ति को समझाना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।

निष्कर्ष

स्क्रीनशॉट लेना अपने आप में याददाश्त के लिए खतरनाक साबित नहीं हुआ है। लेकिन रिसर्च यह संकेत देती है कि किसी जानकारी को लगातार बाहरी डिवाइस पर निर्भर करके रखने से उसे याद रखने की मानसिक प्रक्रिया कम सक्रिय हो सकती है।

इसलिए जरूरी जानकारी के लिए स्क्रीनशॉट जरूर लें, लेकिन अगर किसी चीज को याद भी रखना है, तो उसे ध्यान से पढ़ें, समझें और संभव हो तो अपने शब्दों में लिखें। यही तरीका डिजिटल सुविधा और बेहतर याददाश्त के बीच संतुलन बनाने में मदद कर सकता है।

Sports News:बड़ा उलटफेर! नामीबिया ने दक्षिण अफ्रीका को फिर दी मात, T20 में दूसरी बार दर्ज की ऐतिहासिक जीत

नामीबिया ने एक बार फिर दक्षिण अफ्रीका को हराकर क्रिकेट जगत को चौंका दिया है। ट्राई सीरीज के पहले मुकाबले में नामीबिया ने अफ्रीकी टीम को 18 रन से शिकस्त दी। इस जीत के साथ नामीबिया ने टी20 क्रिकेट में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपनी दूसरी जीत दर्ज की है। खास बात यह है कि पिछले साल भी नामीबिया ने दक्षिण अफ्रीका को मात दी थी।

विंडहोक स्थित नामीबिया क्रिकेट ग्राउंड में खेले गए मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। नामीबिया ने इसका पूरा फायदा उठाते हुए निर्धारित 20 ओवर में 6 विकेट खोकर 163 रन बनाए। लक्ष्य का पीछा करते हुए दक्षिण अफ्रीका की टीम 20 ओवर में 9 विकेट के नुकसान पर 145 रन ही बना सकी।

फ्राइलिंक और स्टीनकैंप ने दिलाई शानदार शुरुआत

पहले बल्लेबाजी करने उतरी नामीबिया को उसके सलामी बल्लेबाजों ने बेहतरीन शुरुआत दी। जान फ्राइलिंक ने 38 गेंदों पर 60 रन की शानदार पारी खेली। उन्होंने अपनी पारी में 6 चौके और 2 छक्के लगाए।

दूसरे छोर पर लॉरेन स्टीनकैंप ने भी आक्रामक बल्लेबाजी की। उन्होंने 3 चौकों और 2 छक्कों की मदद से 41 रन बनाए। दोनों बल्लेबाजों के बीच पहले विकेट के लिए 58 गेंदों में 84 रन की मजबूत साझेदारी हुई।

इस शुरुआत के बाद नामीबिया का स्कोर काफी तेजी से बढ़ रहा था और एक समय टीम के 190 रन के आसपास पहुंचने की उम्मीद नजर आ रही थी। हालांकि बीच के ओवरों में विकेट गिरने के कारण रन गति धीमी हुई और टीम 163 रन तक ही पहुंच सकी।

दक्षिण अफ्रीका की ओर से प्रेनेलन सुब्रायेन सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने तीन विकेट अपने नाम किए।

लक्ष्य का पीछा करते हुए लड़खड़ाया दक्षिण अफ्रीका

164 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी दक्षिण अफ्रीकी टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। महज 19 रन के स्कोर पर उसके दो बल्लेबाज पवेलियन लौट गए। जॉर्डन हरमन 7 रन बनाकर आउट हुए, जबकि लुहान-ड्रे प्रेटोरियस के बल्ले से 9 रन आए।

शुरुआती झटकों के बाद दक्षिण अफ्रीका लगातार दबाव में दिखाई दी। हालांकि डेवाल्ड ब्रेविस ने एक छोर संभालकर टीम की उम्मीदें बनाए रखीं।

ब्रेविस ने लगाया दमदार अर्धशतक, लेकिन नहीं दिला सके जीत

डेवाल्ड ब्रेविस ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 50 गेंदों में 75 रन बनाए। उनकी पारी में 4 चौके और 5 छक्के शामिल रहे। उन्होंने अंत तक संघर्ष किया, लेकिन दूसरे छोर से पर्याप्त सहयोग नहीं मिलने के कारण उनकी पारी टीम को जीत तक नहीं पहुंचा सकी।

डुआन जानसन ने 25 रन का योगदान दिया। इनके अलावा दक्षिण अफ्रीका के सात बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके। टीम के तीन बल्लेबाज अपना खाता तक नहीं खोल पाए।

नामीबिया के गेंदबाजों ने पलट दिया मैच

नामीबिया की जीत में उसके गेंदबाजों का अहम योगदान रहा। रूबेन ट्रम्पेलमैन और जेजे स्मिथ ने शानदार गेंदबाजी करते हुए तीन-तीन विकेट हासिल किए।

इसके अलावा गेरहार्ड इरास्मस, जैक ब्रासेल और मैक्स हेइन्गो को एक-एक सफलता मिली। नामीबिया के गेंदबाजों ने लगातार विकेट लेकर दक्षिण अफ्रीका को लक्ष्य से दूर रखा और आखिरकार पूरी टीम निर्धारित 20 ओवर में 145 रन ही बना सकी।

T20 में दक्षिण अफ्रीका पर दूसरी जीत

18 रन की इस जीत के साथ नामीबिया ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी20 क्रिकेट में दूसरी बार जीत हासिल की। पिछले साल मिली जीत के बाद एक बार फिर दक्षिण अफ्रीका जैसी मजबूत टीम को हराकर नामीबिया ने अपनी क्षमता का परिचय दिया है।

इस मुकाबले में नामीबिया की बल्लेबाजी ने मजबूत शुरुआत दी और गेंदबाजों ने उस बढ़त को अंत तक कायम रखा। वहीं दक्षिण अफ्रीका के लिए ब्रेविस की शानदार पारी के बावजूद टीम लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी।

Travel Tips: शिमला-मनाली की भीड़ से दूर Jibhi में छिपे हैं ये खूबसूरत ठिकाने, जरूर करें एक्सप्लोर

हिमाचल प्रदेश घूमने का प्लान बनाते ही ज्यादातर लोगों के जेहन में शिमला और मनाली जैसे लोकप्रिय हिल स्टेशन आते हैं। लेकिन अगर आप भीड़भाड़ से दूर शांत वातावरण और प्रकृति के करीब कुछ समय बिताना चाहते हैं, तो हिमाचल की ऑफबीट जगहों का रुख कर सकते हैं।

ऐसी ही एक खूबसूरत जगह है जिभी। शांत माहौल, देवदार के घने जंगल, पहाड़ी झरने और लकड़ी के कॉटेज इस जगह को खास बनाते हैं। अगर आप हिमाचल में कुछ अलग अनुभव करना चाहते हैं, तो जिभी आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकता है।

बंजार घाटी में बसा है जिभी

जिभी हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की बंजार घाटी में स्थित एक खूबसूरत पहाड़ी इलाका है। यह जगह अपने शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है।

यहां शिमला और मनाली जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों की तुलना में अपेक्षाकृत कम भीड़ देखने को मिलती है। जिभी के आसपास देवदार के जंगल, पहाड़ी रास्ते और छोटे-बड़े झरने इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं।

यहां बने लकड़ी के कॉटेज और ट्री हाउस पर्यटकों को पहाड़ी जीवन का अलग अनुभव देते हैं। प्रकृति के बीच कुछ दिन शांति से बिताने की इच्छा रखने वालों के लिए जिभी आकर्षक डेस्टिनेशन बन सकता है।

जिभी के आसपास घूमने लायक जगहें

अगर आप जिभी की यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो यहां रुककर आसपास मौजूद कई खूबसूरत जगहों को भी एक्सप्लोर कर सकते हैं।

रघुपुर किला

जिभी के आसपास घूमने के लिए रघुपुर किला एक शानदार विकल्प है। समुद्र तल से करीब 11,000 फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर स्थित यह ऐतिहासिक स्थल अब काफी हद तक खंडहर में बदल चुका है।

हालांकि, किले की ऐतिहासिक अहमियत के साथ यहां से दिखाई देने वाले पहाड़ी नजारे इसे खास बनाते हैं। ऊंचाई से कुल्लू और मंडी क्षेत्र की पहाड़ियों का खूबसूरत दृश्य देखा जा सकता है।

ट्रैकिंग पसंद करने वाले लोगों के लिए भी यह जगह आकर्षण का केंद्र है।

जालोरी पास

जिभी से लगभग 12 से 14 किलोमीटर की दूरी पर जालोरी पास स्थित है। समुद्र तल से करीब 10,000 फीट की ऊंचाई वाला यह पहाड़ी दर्रा आसपास के शानदार प्राकृतिक दृश्यों के लिए जाना जाता है।

सर्दियों के मौसम में यहां बर्फबारी के बाद पूरा इलाका बेहद खूबसूरत नजर आता है। पहाड़ों, जंगलों और घुमावदार रास्तों के बीच सफर करना अपने आप में एक अलग अनुभव देता है।

श्रृंग ऋषि मंदिर

जिभी के आसपास धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखने वाले स्थानों में श्रृंग ऋषि मंदिर भी शामिल है। यह मंदिर बग्गी गांव में स्थित है और स्थानीय लोगों के लिए इसका विशेष महत्व है।

श्रृंग ऋषि को कुल्लू क्षेत्र के प्रमुख स्थानीय देवताओं में गिना जाता है। मंदिर से जुड़ी स्थानीय मान्यताओं के कारण यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है।

अगर आप जिभी घूमने के साथ हिमाचल की स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को करीब से देखना चाहते हैं, तो इस मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।

सेरोलसर झील

प्रकृति प्रेमियों के लिए सेरोलसर झील जिभी के आसपास घूमने वाली प्रमुख जगहों में से एक है। यह झील जालोरी पास के करीब स्थित है और यहां तक पहुंचने के लिए पहाड़ी रास्ते से ट्रेक करना पड़ता है।

घने जंगलों से घिरी झील का शांत वातावरण पर्यटकों को काफी आकर्षित करता है। स्थानीय स्तर पर इसके पानी को लेकर कई तरह की मान्यताएं भी प्रचलित हैं।

झील के किनारे कुछ समय बैठकर आसपास के प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेना इस ट्रिप को यादगार बना सकता है।

क्यों जाएं जिभी?

अगर आप ऐसी जगह तलाश रहे हैं जहां प्रकृति, शांति और पहाड़ी संस्कृति का अनुभव एक साथ मिल सके, तो जिभी अच्छा विकल्प हो सकता है। यहां आपको बड़े पर्यटन शहरों जैसी भीड़ कम मिलेगी और प्रकृति के करीब समय बिताने का मौका मिलेगा।

लकड़ी के कॉटेज, जंगलों के बीच ट्रेकिंग, झरने, झील और आसपास के पहाड़ी गांव जिभी को एक अलग तरह का ट्रैवल एक्सपीरियंस देते हैं।

Travel Tip: पहाड़ी इलाकों में मौसम तेजी से बदल सकता है। इसलिए यात्रा से पहले मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी जरूर लें। ट्रेकिंग के दौरान स्थानीय गाइड और प्रशासन की सलाह का पालन करना भी बेहतर रहेगा।