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Egg Freezing कराना चाहती हैं? सही उम्र से लेकर जरूरी सावधानियों तक जानें अहम बातें

आज के समय में कई महिलाएं करियर, निजी परिस्थितियों या भविष्य में परिवार बढ़ाने की योजना को ध्यान में रखते हुए एग फ्रीजिंग का विकल्प चुन रही हैं। इस प्रक्रिया में महिला के अंडों को ओवरी से निकालकर बेहद कम तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है, ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल किया जा सके।

हालांकि, एग फ्रीजिंग को भविष्य में गर्भधारण की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए। इसके नतीजे महिला की उम्र, फ्रीज किए गए अंडों की संख्या और उनकी गुणवत्ता समेत कई दूसरे कारकों पर निर्भर करते हैं।

अंडे फ्रीज कराने के लिए सही उम्र क्या है?

महिला की उम्र बढ़ने के साथ अंडों की संख्या और गुणवत्ता में बदलाव आता है। आमतौर पर कम उम्र में फ्रीज किए गए अंडों की गुणवत्ता बेहतर रहने की संभावना होती है। इसी वजह से एग फ्रीजिंग का फैसला जितना पहले किया जाए, उतना बेहतर विकल्प हो सकता है।

30 साल की उम्र के आसपास अंडे फ्रीज कराने पर अपेक्षाकृत बेहतर परिणाम मिलने की संभावना हो सकती है। 35 वर्ष के बाद भी यह प्रक्रिया कराई जा सकती है, लेकिन उस समय व्यक्तिगत स्थिति और ओवरी रिजर्व जैसे कारकों का मूल्यांकन अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।

40 वर्ष की उम्र के आसपास भी एग फ्रीजिंग संभव हो सकती है, लेकिन अच्छे और पर्याप्त संख्या में अंडे मिलने की संभावना कम हो सकती है। इसलिए केवल उम्र देखकर फैसला लेने के बजाय डॉक्टर से व्यक्तिगत जांच और सलाह लेना जरूरी है।

क्या एग फ्रीजिंग के दौरान एक्सरसाइज कर सकते हैं?

एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया में दवाओं की मदद से ओवरी में एक से अधिक अंडों को विकसित किया जाता है। इस दौरान ओवरी सामान्य स्थिति की तुलना में कुछ समय के लिए बड़ी और संवेदनशील हो सकती हैं।

ऐसे में डॉक्टर आमतौर पर बहुत ज्यादा मेहनत वाली गतिविधियों से बचने की सलाह दे सकते हैं। तेज दौड़ना, ज्यादा कूदना, भारी वजन उठाना या शरीर को तेजी से मोड़ने वाली एक्सरसाइज कुछ समय के लिए रोकनी पड़ सकती हैं।

हल्की वॉक जैसी गतिविधियां कई महिलाओं के लिए ठीक हो सकती हैं, लेकिन यह व्यक्ति की स्थिति और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है। अंडे निकालने की प्रक्रिया के आसपास शरीर को पर्याप्त आराम देना भी महत्वपूर्ण होता है।

एग फ्रीजिंग से पहले किन बातों का रखें ध्यान?

सबसे जरूरी बात यह है कि अंडे फ्रीज करा लेने का मतलब भविष्य में गर्भधारण निश्चित होना नहीं है। फ्रीज किए गए सभी अंडे बाद में सफलतापूर्वक इस्तेमाल हो पाएं, यह भी जरूरी नहीं होता।

अंडों की उम्र और गुणवत्ता, कितने अंडे फ्रीज किए गए हैं और भविष्य में उनकी मदद से होने वाली प्रजनन प्रक्रिया जैसे कई पहलू अंतिम परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।

इसलिए एग फ्रीजिंग को केवल उम्र बढ़ने से पहले अंडे सुरक्षित रखने की प्रक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य की प्रेग्नेंसी प्लानिंग से जुड़ा एक व्यक्तिगत फैसला समझना चाहिए।

डॉक्टर से सलाह लेना क्यों जरूरी है?

अगर कोई महिला एग फ्रीजिंग पर विचार कर रही है तो पहले अपनी उम्र, ओवरी रिजर्व, भविष्य की फैमिली प्लानिंग और अन्य प्रजनन संबंधी पहलुओं की जानकारी लेना जरूरी है।

फर्टिलिटी या IVF विशेषज्ञ जांच के बाद यह समझने में मदद कर सकते हैं कि एग फ्रीजिंग आपके लिए कितना उपयुक्त विकल्प हो सकता है और कितने अंडे सुरक्षित करना उचित रहेगा।

Disclaimer: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। एग फ्रीजिंग से जुड़े फैसले हर महिला की व्यक्तिगत स्थिति के आधार पर अलग हो सकते हैं। किसी भी मेडिकल प्रक्रिया से पहले योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ या फर्टिलिटी विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।

शबाना आजमी के ‘मुस्लिम हीरो’ बयान पर राजकुमार संतोषी ने दी प्रतिक्रिया, बोले- ‘मेरी समझ से परे है ये बात’

सनी देओल और राजकुमार संतोषी की फिल्म ‘बंटवारा 1947’ बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी। फिल्म को लेकर दर्शकों और समीक्षकों की प्रतिक्रिया ठीक रही, लेकिन कमाई के मामले में यह फिल्म खास असर नहीं छोड़ पाई। फिल्म के कमजोर बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन की वजहों पर अभिनेत्री शबाना आजमी ने एक खास बात कही थी, जिस पर अब निर्देशक राजकुमार संतोषी ने अपनी असहमति जाहिर की है।

शबाना आजमी ने फिल्म में सनी देओल के मुस्लिम किरदार को दर्शकों की प्रतिक्रिया से जोड़ते हुए सवाल उठाया था। अब संतोषी ने इस सोच पर सवाल खड़े किए हैं।

‘मुझे समझ नहीं आता कि ऐसा क्यों कहा जा रहा है’

राजकुमार संतोषी ने एक हालिया इंटरव्यू में शबाना आजमी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें यह तर्क समझ नहीं आता।

उन्होंने अमिताभ बच्चन की फिल्मों का उदाहरण देते हुए कहा कि हिंदी सिनेमा में पहले भी ऐसे कई किरदार देखने को मिले हैं, जिनमें अलग धर्म से जुड़े नायक नजर आए हैं। उन्होंने ‘कुली’ का उदाहरण देते हुए कहा कि अमिताभ बच्चन ने उस फिल्म में मुस्लिम किरदार निभाया था।

संतोषी ने सवाल उठाया कि क्या अब समाज इतना बदल गया है कि लोग दूसरे समुदाय से जुड़े किसी अभिनेता या किरदार को स्वीकार करने में भी असहज होने लगे हैं। उनके मुताबिक, दर्शकों को फिल्म के विषय और उसके पीछे फिल्मकार की मंशा को समझने की कोशिश करनी चाहिए।

‘आज हम पहले से कम सहनशील हो गए हैं’

निर्देशक ने कहा कि मौजूदा दौर में समाज में सहनशीलता और एक-दूसरे को स्वीकार करने की भावना पहले की तुलना में कम होती दिखाई दे रही है।

उन्होंने अपनी व्यक्तिगत धार्मिक आस्था का जिक्र करते हुए कहा कि वह हिंदू हैं और मंदिर जाते हैं। उनके बेटे का नाम राम है, लेकिन वह किसी दूसरे धर्म के खिलाफ नहीं हैं। उनका मानना है कि हर धर्म में मौजूद सकारात्मक और मानवीय मूल्यों को अपनाया जाना चाहिए।

संतोषी ने कहा कि धार्मिक शिक्षाओं में बराबरी और इंसानियत जैसे मूल्यों पर जोर दिया गया है। उनके मुताबिक, धर्म का उद्देश्य लोगों को अलग करना नहीं बल्कि उन्हें साथ लेकर चलना होना चाहिए।

शबाना आजमी ने क्या कहा था?

फिल्म की कम कमाई पर बात करते हुए शबाना आजमी ने कहा था कि संभव है कि दर्शकों के एक वर्ग को सनी देओल का मुस्लिम किरदार स्वीकार करने में परेशानी हुई हो।

उन्होंने अमिताभ बच्चन की फिल्मों का उदाहरण देते हुए कहा था कि अभिनेता पहले भी मुस्लिम किरदार निभा चुके हैं और दर्शकों ने उन्हें स्वीकार किया है। उन्होंने ‘कुली’ और ‘दीवार’ जैसी फिल्मों का जिक्र करते हुए कहा था कि हिंदी सिनेमा में धार्मिक पहचान से जुड़े किरदारों को पहले भी दर्शकों का समर्थन मिला है।

शबाना ने यह भी कहा था कि उन्हें इस बात पर हैरानी है कि कुछ दर्शकों ने फिल्म देखने के बाद भी सनी देओल के किरदार को गलत तरीके से समझा। उनके मुताबिक, फिल्म में सनी देओल ने जिस किरदार को निभाया है, उसे लेकर लोगों के बीच भ्रम पैदा हुआ।

बॉक्स ऑफिस पर कैसी रही फिल्म की कमाई?

‘बंटवारा 1947’ की कमाई की बात करें तो उपलब्ध बॉक्स ऑफिस आंकड़ों के मुताबिक फिल्म ने रिलीज के 16 दिनों में दुनियाभर में करीब 54.03 करोड़ रुपये का कारोबार किया।

इसमें विदेशों से लगभग 9.05 करोड़ रुपये की कमाई शामिल रही, जबकि भारत में फिल्म का नेट कलेक्शन करीब 37.93 करोड़ रुपये बताया गया।

फिल्म की कमाई उसके अनुमानित बजट के मुकाबले कमजोर रही और इसी वजह से इसे बॉक्स ऑफिस पर सफल फिल्मों की श्रेणी में जगह नहीं मिल सकी।

उज्बेक राष्ट्रपति ने की PM मोदी की तारीफ, बोले- ‘आपके नेतृत्व में भारत ने हासिल की नई ऊंचाइयां’

उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका की जमकर सराहना की है। रविवार को ताशकंद में दोनों देशों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की अहम बैठक हुई। इस दौरान मिर्जियोयेव ने भारत की आर्थिक प्रगति, तकनीकी विकास और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री मोदी की नेतृत्व क्षमता की तारीफ की।

मिर्जियोयेव ने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उनके मुताबिक, देश की आर्थिक विकास दर को मजबूत बनाए रखने के साथ-साथ भारत बड़े स्तर की परियोजनाओं को भी प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा रहा है।

डिजिटल से लेकर अंतरिक्ष तक भारत की प्रगति की तारीफ

उज्बेक राष्ट्रपति ने भारत की तकनीकी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश डिजिटल तकनीक, सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक मंच पर भारत की आवाज पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावशाली हुई है। मिर्जियोयेव ने भारत की इन उपलब्धियों पर खुशी जाहिर करते हुए दोनों देशों के बीच मजबूत दोस्ती का भी उल्लेख किया।

‘भारत की तरक्की आपके नेतृत्व से जुड़ी है’

मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री मोदी को एक अनुभवी और दूरदर्शी नेता बताया। उन्होंने कहा कि मोदी को भारत में जनता का व्यापक समर्थन और सम्मान प्राप्त है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी मजबूत पहचान बनी है।

उज्बेक राष्ट्रपति के मुताबिक, हाल के वर्षों में भारत ने जिस गति से विकास किया है और वैश्विक मामलों में अपनी स्थिति मजबूत की है, उसमें प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

उन्होंने कहा कि भारत के आधुनिकीकरण के लिए लागू की गई नीतियों और योजनाओं का असर देश के विभिन्न क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। उन्होंने भारत की उपलब्धियों पर खुशी जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री मोदी को बधाई भी दी।

दोनों देशों के रिश्तों में आया नया मुकाम

बैठक के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। मिर्जियोयेव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा और दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत के परिणामस्वरूप द्विपक्षीय संबंधों को और व्यापक रणनीतिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ाया गया है।

उन्होंने इसे दोनों देशों के रिश्तों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उनके अनुसार, भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सहयोग को नए स्तर तक ले जाने में दोनों देशों के नेतृत्व की अहम भूमिका रही है।

‘आज का दिन ऐतिहासिक है’

उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों के संबंधों के विकास के लिहाज से यह दिन बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक सहयोग आने वाले समय में और मजबूत होगा।

मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री मोदी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संबंधों को नई दिशा देने में उनका व्यक्तिगत योगदान भी महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने दोनों देशों के बीच दोस्ती और सहयोग को भविष्य में और विस्तार देने पर जोर दिया।

आपका विधायक-आपके द्वार: नीलमथा के विकास का नया रोडमैप तैयार, 187 जनसमस्याओं पर कार्रवाई का संकल्प ; 181वें सप्ताह में विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह ने गिनाईं जनसेवा की उपलब्धियां

लखनऊ। सरोजिनी नगर विधानसभा क्षेत्र में जनसमस्याओं के समाधान और विकास कार्यों को लेकर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह का साप्ताहिक जनसंवाद अभियान “आपका विधायक, आपके द्वार” लगातार जारी है। अभियान के 181वें सप्ताह का आयोजन रविवार को नीलमथा स्थित JVR Resort में किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी शामिल हुए। इस दौरान जनसुनवाई के साथ मातृशक्ति, वीर नारियों, वरिष्ठ नागरिकों और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का सम्मान किया गया तथा 20 विद्यार्थियों को साइकिल और युवाओं को स्पोर्ट्स किट वितरित की गईं।

कार्यक्रम के दौरान नीलमथा, पंडित खेड़ा, गौली और बदाली खेड़ा सहित आसपास के क्षेत्रों की विकास आवश्यकताओं पर विस्तार से चर्चा हुई। जनता की ओर से 187 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें सड़क, नाली, जलनिकासी, अतिक्रमण और अन्य स्थानीय समस्याएं शामिल रहीं। डॉ. राजेश्वर सिंह ने सभी प्रार्थना पत्रों पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराने का आश्वासन दिया।

नीलमथा के लिए बनेगी वृहद विकास योजना

जनसंवाद के दौरान डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में नीलमथा क्षेत्र में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में क्षेत्र में जितनी सड़कें बनी हैं, उतनी पिछले दस वर्षों में नहीं बनीं, लेकिन बढ़ती आबादी और तेजी से हो रही बसावट के कारण अभी भी कई नई चुनौतियां सामने हैं।

उन्होंने कहा कि सड़क, नाली और तालाबों पर अतिक्रमण जलनिकासी तथा यातायात से जुड़ी समस्याओं का बड़ा कारण है। नीलमथा के समग्र विकास के लिए एक वृहद विकास योजना तैयार करने को लेकर मुख्य नगर अधिकारी और LDA के VC से बातचीत की जा चुकी है।

डॉ. सिंह ने कहा कि क्षेत्र की समस्याओं के स्थायी और व्यापक समाधान के लिए मुख्यमंत्री से विशेष फंड उपलब्ध कराने का भी प्रयास किया जाएगा। उनका उद्देश्य केवल अलग-अलग समस्याओं का समाधान कराना नहीं, बल्कि नीलमथा के भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुनियोजित विकास की दिशा तय करना है।

181 सप्ताह से लगातार जनता के बीच पहुंच रहा अभियान

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि “आपका विधायक, आपके द्वार” अभियान लगातार 181 सप्ताह से प्रत्येक रविवार आयोजित हो रहा है। अभियान के माध्यम से गांव-गांव और क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में जाकर जनता की समस्याएं सीधे सुनी जाती हैं।

स्थानीय स्तर पर समाधान योग्य समस्याओं का तत्काल निस्तारण कराने का प्रयास किया जाता है, जबकि शासन या विभागीय स्तर से जुड़ी समस्याओं को संबंधित विभागों और शासन के समक्ष भेजा जाता है। उन्होंने बताया कि अब तक 14 हजार से अधिक पत्र जनसमस्याओं के समाधान के लिए भेजे जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि निरंतर जनसंपर्क और जनसेवा की यह पहल सरोजिनी नगर की पहचान बन चुकी है और उनका प्रयास है कि जनता को अपनी समस्या के समाधान के लिए कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, बल्कि समाधान उनके द्वार तक पहुंचे।

मातृशक्ति और वीर नारियों का सम्मान

कार्यक्रम में मातृशक्ति के सम्मान के तहत पूर्व पार्षद जमुना देवी, भागीरथी धामी, मीनू रावत, किरण सिंह, रामेश्वरी, रेनू रावत, रंजू झा, शकुंतला, तारा सिंह और किरण रानी को सम्मानित किया गया।

वहीं वरिष्ठ एवं विशिष्टजनों को भी शॉल पहनाकर सम्मानित किया गया। इनमें शौर्य चक्र से सम्मानित चंचल सिंह दशेला सहित परमानंद त्रिपाठी, महावीर अग्रवाल, दिनेश अग्रवाल, राम कुमार चौहान, के.पी. शर्मा, कैलाश नाथ अवस्थी, अरुण मिश्रा, वी.एन. राय, सुग्रीव सिंह राघव, सरदार रंजीत सिंह, रमेश बिष्ट, मंजू गुप्ता, दुर्गा प्रसाद, आर.पी. सैनी, एस.के. पांडेय, उदय प्रताप सिंह, सुधीर राजपाल, मंजू सिंह, पी.पी. पंत, भवानी भट्ट और मुकेश नादान शामिल रहे।

कार्यक्रम में वीर नारियों आनंदी देवी, दुर्गा देवी और उमा सिंह को भी सम्मानित किया गया। उनके पतियों ने भारतीय सेना में सेवा करते हुए देश के लिए अपना योगदान दिया। आनंदी देवी के पति स्वर्गीय नायक सूबेदार दर्शन पाल ने ऑपरेशन पराक्रम, दुर्गा देवी के पति लांस नायक ज्ञान सिंह रावत ने कारगिल युद्ध में 3 गढ़वाल राइफल्स के साथ तथा उमा सिंह के पति हवलदार उदय प्रताप सिंह ने ऑपरेशन रक्षक में राष्ट्रसेवा की थी।

शिक्षा को लेकर बड़ा फोकस, 20 विद्यार्थियों को साइकिल

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि शिक्षा उनके प्रमुख विकास एजेंडे में शामिल है। उनका प्रयास है कि विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ कंप्यूटर शिक्षा और आधुनिक तकनीक के संसाधन भी उपलब्ध हों।

उन्होंने बताया कि सरोजिनी नगर में अब तक 70 स्कूलों में Digital Library और Smart Class स्थापित कराई गई हैं तथा 500 से अधिक कंप्यूटर उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा लगभग 2,000 मेधावी विद्यार्थियों को कंप्यूटर, टैबलेट और साइकिल उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।

नीलमथा कार्यक्रम में शिवानी राजपूत, नितिन सिंह, मुस्कान विश्वकर्मा, लोकेश, अंजू रावत, लक्ष्मी रावत, रिद्धिमा, खुशी पाल, आयुषी गुसाईं, कशिश, अपेक्षा, अनुष्का कुमारी, वंदना रावत, समीर, कोमल सिंह, दीपिका प्रसाद, रामबाबू कुमार, श्रेया राजपूत, सूर्य प्रकाश सिंह चौहान और जाह्नवी साहू सहित 20 विद्यार्थियों को साइकिल वितरित की गई।

डॉ. सिंह ने अभिभावकों और वरिष्ठ नागरिकों से बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रोत्साहित करने की अपील की।

गोल्ड मेडलिस्ट और राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों का सम्मान

कार्यक्रम में बाबा साहब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में BBA ऑनर्स के गोल्ड मेडलिस्ट वेंकटेश नारायण प्रसाद शुक्ला तथा डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय में साइबर लॉ की गोल्ड मेडलिस्ट शिवानी शुक्ला को सम्मानित किया गया।

इसके साथ ही जूडो-कराटे की नेशनल चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतने वाली इंद्रवीरा सिंह बिष्ट और जुनाली सिंह बिष्ट का भी सम्मान किया गया। खेल शिक्षक अनुराग चतुर्वेदी को उनकी उल्लेखनीय सेवाओं के लिए प्रोत्साहित किया गया।

250 से अधिक मंदिरों का जीर्णोद्धार

धार्मिक स्थलों से जुड़े प्राप्त प्रार्थना पत्रों पर भी डॉ. राजेश्वर सिंह ने आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि सरोजिनी नगर में अब तक 250 से अधिक मंदिरों का जीर्णोद्धार और पुनरोद्धार कराया गया है।

मंदिरों में Solar Lights, रंगाई-पुताई, बैठने के लिए benches और hand pumps जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उन्होंने रेतेश्वर महादेव मंदिर, झाड़ेश्वर महादेव मंदिर और जल साईनाथ मंदिर के लिए सरकार से करोड़ों रुपये की धनराशि उपलब्ध होने का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों के विकास और सौंदर्यीकरण का कार्य आगे भी जारी रहेगा।

खेलों के लिए 300 से अधिक Sports Clubs

युवाओं और बच्चों को खेलों से जोड़ने के उद्देश्य से सरोजिनी नगर में 300 से अधिक Sports Clubs स्थापित किए जाने की जानकारी दी गई। इन क्लबों को निःशुल्क Sports Kits भी उपलब्ध कराई गई हैं।

डॉ. सिंह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत उन्हें अवसर और संसाधन उपलब्ध कराने की है। उन्होंने बेटियों की खेलों में भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया और कहा कि बेटियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए सुरक्षित वातावरण और बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए।

170 से अधिक तारा शक्ति केंद्र, 2,500 सिलाई मशीनें

महिला सशक्तिकरण को लेकर डॉ. राजेश्वर सिंह ने बताया कि सरोजिनी नगर में अब तक 170 से अधिक तारा शक्ति केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। लगभग 2,500 सिलाई मशीनें मातृशक्ति को उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि महिलाएं रोजगार और स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बन सकें।

नीलमथा कार्यक्रम में प्राप्त आवेदन के आधार पर एक और तारा शक्ति केंद्र स्थापित करने की घोषणा की गई। उन्होंने कहा कि जरूरत के अनुसार भविष्य में भी नए केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

जनसेवा के साथ सामाजिक एकजुटता पर जोर

डॉ. सिंह ने कहा कि सरोजिनी नगर की सबसे बड़ी ताकत यहां के लोगों में आपसी सहयोग, सम्मान और समर्पण की भावना है। उन्होंने रक्त की आवश्यकता जैसे आपात मामलों में Team Rajeshwar और क्षेत्रवासियों द्वारा तत्काल सहायता के लिए आगे आने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सामाजिक एकजुटता क्षेत्र की विशिष्ट पहचान बन चुकी है।

स्वास्थ्य, शिक्षा और कनेक्टिविटी में तेजी से बढ़ रहा सरोजनीनगर

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि लगातार विकास कार्यों के बावजूद बढ़ती आबादी के साथ नई आवश्यकताएं सामने आती रहती हैं। इसलिए भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लगातार नई विकास योजनाएं तैयार करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि सरोजनीनगर स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। क्षेत्र में लोक बंधु अस्पताल, Max Hospital, Apollo Hospital, Wilson Hospital और Tender Palm Hospital जैसे प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान मौजूद हैं।

वहीं बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, डॉ. राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय, शकुंतला विश्वविद्यालय और University of Foreign Languages के नए कैंपस क्षेत्र की शैक्षणिक क्षमता को मजबूत कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि Metro, International Airport और चार Expressways से बेहतर कनेक्टिविटी के कारण सरोजिनी नगर में निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

कानून-व्यवस्था और विकास को बताया प्रदेश की ताकत

उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था का उल्लेख करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि प्रदेश में कानून का राज स्थापित हुआ है और अपराधियों तथा माफिया के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की गई है। सुरक्षित वातावरण में महिलाएं और बेटियां शिक्षा, रोजगार तथा अन्य क्षेत्रों में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं।

उन्होंने उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास और कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाए रखने के लिए सरकार को मजबूत करना जरूरी है।

“जनता के काम के लिए 24 घंटे समर्पित”

कार्यक्रम के समापन पर डॉ. राजेश्वर सिंह ने JVR Resort, नीलमथा में बड़ी संख्या में पहुंचकर जनसंवाद में भाग लेने के लिए क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि 187 प्राप्त प्रार्थना पत्रों पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि उनका और उनकी टीम का उद्देश्य केवल विकास योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता की समस्याओं को सुनना, उनका समाधान कराना और जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचाना है।

डॉ. सिंह ने कहा कि जनसेवा का उनका संकल्प स्पष्ट है- जनता की समस्याओं का समाधान उनके द्वार तक पहुंचे, हर वर्ग को सम्मान मिले, विद्यार्थी और युवा आगे बढ़ें, मातृशक्ति आत्मनिर्भर बने और सरोजिनी नगर विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचे।

ऑप्शन 1:नेपाल में बाढ़ का कहर जारी, अमेरिका-चीन की मदद पर सरकार ने बताई पूरी सच्चाई

नेपाल इस समय भीषण बाढ़ और भारी बारिश से जूझ रहा है। कई इलाकों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ने के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने की खबर है, जबकि लापता लोगों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। इस बीच ऐसी खबरें सामने आईं कि नेपाल ने अमेरिका, चीन समेत कुछ मित्र देशों की ओर से भेजी जाने वाली राहत और बचाव टीमों की पेशकश को स्वीकार नहीं किया है।

हालांकि, नेपाल सरकार ने शुक्रवार को इन खबरों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहायता लेने से इनकार नहीं किया है। सरकार का कहना है कि फिलहाल स्थानीय परिस्थितियों और दुर्गम क्षेत्रों की बेहतर जानकारी रखने वाले नेपाली सुरक्षा बलों को बचाव अभियान में प्राथमिकता दी जा रही है।

नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय मदद को लेकर क्या कहा?

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि सरकार ने मित्र देशों या अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मिलने वाली सहायता के दरवाजे बंद नहीं किए हैं। जरूरत पड़ने पर तकनीकी विशेषज्ञता और अन्य जरूरी सहयोग लिया जाएगा।

सरकार का तर्क है कि बाढ़ से प्रभावित कई इलाके बेहद दुर्गम हैं और वहां की भौगोलिक परिस्थितियों से नेपाली सेना तथा पुलिस के जवान अच्छी तरह परिचित हैं। इसलिए शुरुआती राहत और बचाव अभियान में स्थानीय सुरक्षा बलों की अधिकतम तैनाती को प्राथमिकता दी जा रही है।

विदेश मंत्री के मुताबिक, जिस क्षेत्र में अतिरिक्त तकनीकी क्षमता की आवश्यकता महसूस होगी, वहां उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय सहायता का इस्तेमाल किया जा सकता है।

अमेरिका, चीन समेत कई देशों के नागरिक लापता

नेपाल में आई आपदा के बीच कई देशों के नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, मलेशिया और यूक्रेन समेत कई देशों के नागरिक शामिल बताए जा रहे हैं।

ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेपाल को राहत और खोज अभियान में सहयोग देने की पेशकश की गई है। नेपाल सरकार का कहना है कि वह जरूरत के हिसाब से इन प्रस्तावों पर फैसला करेगी।

2015 के भूकंप का अनुभव बना वजह?

नेपाल के मौजूदा फैसले के पीछे 2015 में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान का अनुभव भी एक वजह माना जा रहा है।

उस समय दुनिया के कई देशों से बड़ी संख्या में राहत और बचाव दल नेपाल पहुंचे थे। अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय टीमों के बीच तालमेल, संसाधनों के प्रबंधन और राहत अभियान को एक दिशा में संचालित करने को लेकर कई चुनौतियां सामने आई थीं।

नेपाली अधिकारियों का मानना है कि बड़ी संख्या में विदेशी टीमों की मौजूदगी के कारण उस समय समन्वय और प्रशासनिक प्रबंधन मुश्किल हो गया था। इसी अनुभव से सबक लेते हुए इस बार सरकार शुरुआत से ही बचाव अभियान को अपने नियंत्रण में रखना चाहती है।

सेना और पुलिस की भूमिका पर भरोसा

बताया जा रहा है कि नेपाल की सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार को भरोसा दिलाया है कि सेना और पुलिस स्थानीय परिस्थितियों में खोज एवं बचाव अभियान को प्रभावी तरीके से संचालित कर सकती हैं।

इसी वजह से विदेशी बचाव दलों को सीधे नेपाल भेजने के प्रस्तावों को फिलहाल सीमित रखा गया है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि नेपाल दूसरे देशों से किसी भी प्रकार की सहायता नहीं ले रहा है।

सरकार राहत सामग्री, चिकित्सा सहायता और आर्थिक सहयोग जैसे विकल्पों को स्वीकार कर रही है।

भारत से राहत और तकनीकी मदद ले रहा नेपाल

भारत ने नेपाल को राहत और बचाव कार्यों में सहयोग की पेशकश की है और नेपाल की जरूरत के मुताबिक सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर के मुताबिक, नेपाल में कुछ लोगों के सुरंग में फंसे होने की आशंका है। ऐसे में भारत की ओर से टनल रेस्क्यू में विशेषज्ञता रखने वाली टीम भेजने की तैयारी की जा रही है।

इसके अलावा नेपाल को बेली ब्रिज उपलब्ध कराने की भी तैयारी है। इन पुलों को अपेक्षाकृत कम समय में तैयार किया जा सकता है और बाढ़ से क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों को बहाल करने में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।

भारत की ओर से मेडिकल टीम भेजने का विकल्प भी नेपाल को दिया गया है। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीम भी भेजी जा सकती है।

राहत सामग्री लेकर भारत ने भेजे विमान

भारत की ओर से राहत सामग्री लेकर दो विमान नेपाल पहुंच चुके हैं, जबकि एक और विमान भेजे जाने की तैयारी है। इन विमानों के जरिए आपदा प्रभावित लोगों के लिए आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।

इससे स्पष्ट है कि नेपाल विदेशी सहायता के पूरी तरह खिलाफ नहीं है। फिलहाल उसकी प्राथमिकता यह है कि जमीन पर होने वाले खोज और बचाव अभियान में नेपाली सुरक्षा बलों को मुख्य भूमिका दी जाए और जहां विशेषज्ञता या अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत पड़े, वहां अंतरराष्ट्रीय सहयोग लिया जाए।

नेपाल का रुख क्या बताता है?

नेपाल का मौजूदा रुख पूरी तरह विदेशी मदद को अस्वीकार करने के बजाय जरूरत के मुताबिक सहायता लेने पर आधारित दिखाई देता है। सरकार स्थानीय सुरक्षा बलों की क्षमता का इस्तेमाल करते हुए अंतरराष्ट्रीय सहायता को तकनीकी और संसाधन आधारित सहयोग के रूप में लेने पर जोर दे रही है।

बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित इलाकों में हालात लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में अगर बचाव अभियान के लिए अतिरिक्त विशेषज्ञता या संसाधनों की जरूरत पड़ती है, तो नेपाल दूसरे देशों की मदद का दायरा बढ़ा सकता है।