Home Blog Page 10

Backward Walking: पीछे की ओर चलने से घुटनों के दर्द में मिल सकती है राहत? जानें फायदे और सावधानियां

घुटनों में दर्द अब केवल बढ़ती उम्र की समस्या नहीं रह गई है। लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी, बढ़ता वजन और मांसपेशियों की कमजोरी जैसी वजहों से कम उम्र के लोगों में भी घुटनों से जुड़ी परेशानियां देखने को मिल रही हैं। दर्द से राहत पाने के लिए लोग अलग-अलग तरह की एक्सरसाइज और घरेलू तरीकों को आजमाते हैं।

इन्हीं में Backward Walking यानी पीछे की ओर चलना इन दिनों काफी चर्चा में है। इसे लेकर सवाल उठता है कि क्या उल्टी दिशा में चलने से वास्तव में घुटनों के दर्द में राहत मिल सकती है या फिर यह सिर्फ एक नया फिटनेस ट्रेंड है। कुछ शोधों में इसके संभावित फायदे सामने आए हैं, लेकिन इसे हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त व्यायाम नहीं माना जा सकता।

पीछे चलने से घुटनों पर क्या असर पड़ता है?

सामान्य तरीके से चलते समय घुटने के जोड़ पर एक खास तरह का दबाव पड़ता है। पीछे की ओर चलने पर चलने का पैटर्न बदल जाता है, जिससे घुटने के कुछ हिस्सों पर पड़ने वाला भार भी अलग तरीके से वितरित होता है।

यह गतिविधि उन मांसपेशियों को सक्रिय कर सकती है, जिनका सामान्य वॉकिंग के दौरान अपेक्षाकृत कम इस्तेमाल होता है। खास तौर पर घुटने को सहारा देने वाली मांसपेशियों की सक्रियता बढ़ने से संतुलन और पैरों की कार्यक्षमता में सुधार हो सकता है।

कुछ लोगों में, विशेषकर घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस या घुटने के सामने वाले हिस्से में परेशानी होने पर, नियंत्रित तरीके से किया गया बैकवर्ड वॉकिंग दर्द और असहजता कम करने में मदद कर सकता है।

क्या इससे घुटने का दर्द पूरी तरह ठीक हो जाता है?

यह समझना जरूरी है कि पीछे की ओर चलना घुटने के दर्द का कोई स्थायी या अकेला इलाज नहीं है। घुटनों में दर्द होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे शरीर का अधिक वजन, मांसपेशियों की कमजोरी, चोट, जोड़ में घिसाव या उम्र से संबंधित बदलाव।

इसलिए केवल बैकवर्ड वॉकिंग पर निर्भर रहने के बजाय जरूरत के अनुसार स्ट्रेंथ एक्सरसाइज, वजन को नियंत्रित रखना, मांसपेशियों की फ्लेक्सिबिलिटी बनाए रखना और रोजमर्रा की गतिविधियों में सुधार करना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।

बैकवर्ड वॉकिंग के संभावित फायदे

पीछे की ओर चलने को सही तरीके और सुरक्षित परिस्थितियों में किया जाए, तो इसके कई संभावित फायदे हो सकते हैं।

घुटनों पर दबाव में बदलाव: पीछे चलने से सामान्य वॉकिंग की तुलना में घुटने पर लगने वाला भार अलग तरीके से वितरित हो सकता है।

क्वाड्रिसेप्स की मजबूती: यह एक्सरसाइज जांघ के सामने मौजूद क्वाड्रिसेप्स मांसपेशियों को सक्रिय करने में मदद कर सकती है, जो घुटने को सपोर्ट देती हैं।

संतुलन बेहतर करने में मदद: उल्टी दिशा में चलने के दौरान शरीर को अपने मूवमेंट पर अधिक ध्यान देना पड़ता है, जिससे बैलेंस और कोऑर्डिनेशन पर काम हो सकता है।

घुटने की कार्यक्षमता में सुधार: नियमित और नियंत्रित अभ्यास कुछ लोगों में पैरों की ताकत और घुटने की कार्यक्षमता को बेहतर करने में मदद कर सकता है।

दर्द में संभावित राहत: घुटने के कुछ खास प्रकार के दर्द में यह सहायक एक्सरसाइज के तौर पर उपयोगी हो सकती है।

पीछे चलते समय सबसे ज्यादा जरूरी है सुरक्षा

बैकवर्ड वॉकिंग का सबसे बड़ा जोखिम गिरने का है। पीछे चलते समय व्यक्ति को सामने की जमीन साफ दिखाई नहीं देती। ऐसे में रास्ते में कोई गड्ढा, सीढ़ी, पत्थर या दूसरी बाधा होने पर चोट लग सकती है।

इसलिए इसे सड़क, सीढ़ियों या ऊबड़-खाबड़ जमीन पर करने से बचना चाहिए। शुरुआत किसी सपाट और सुरक्षित जगह पर करनी बेहतर होती है। जरूरत पड़ने पर किसी फिटनेस एक्सपर्ट या फिजियोथेरेपिस्ट की निगरानी में इसे शुरू किया जा सकता है।

शुरुआत में कुछ मिनट ही पीछे चलें और शरीर की प्रतिक्रिया के अनुसार धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। अगर अभ्यास के दौरान दर्द बढ़े, चक्कर आए या असहजता महसूस हो तो तुरंत रुक जाना चाहिए।

किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?

अगर घुटने में गंभीर दर्द, हाल की चोट, सूजन, संतुलन की समस्या या चलने में पहले से परेशानी है, तो बिना विशेषज्ञ की सलाह के बैकवर्ड वॉकिंग शुरू नहीं करनी चाहिए।

घुटने के दर्द की सही वजह पता करना भी जरूरी है। हर तरह के दर्द में एक ही एक्सरसाइज काम नहीं करती। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेकर ऐसा व्यायाम चुना जाना चाहिए जो आपकी स्थिति के लिए सुरक्षित हो।

निष्कर्ष: बैकवर्ड वॉकिंग कुछ लोगों के लिए घुटनों की ताकत, संतुलन और दर्द प्रबंधन में उपयोगी हो सकती है। हालांकि, इसे घुटने के दर्द का पूरा इलाज नहीं माना जाना चाहिए। बेहतर परिणाम के लिए इसे उचित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, वजन नियंत्रण और स्वस्थ जीवनशैली के साथ अपनाना ज्यादा प्रभावी हो सकता है।

Sports Update:लॉर्ड्स टेस्ट में बाबर आजम का फिर निराशाजनक प्रदर्शन, दूसरी पारी में 6 रन बनाकर लौटे पवेलियन

इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट में पाकिस्तान के स्टार बल्लेबाज बाबर आजम का खराब दौर जारी है। मैच की दूसरी पारी में भी वह बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे और केवल 6 रन बनाकर आउट हो गए। पहली पारी में बाबर ने 8 रन बनाए थे। इस तरह पूरे टेस्ट मैच में उनके बल्ले से सिर्फ 14 रन निकले।

इंग्लैंड ने पाकिस्तान के सामने जीत के लिए 389 रन का लक्ष्य रखा है। लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तान को शुरुआत में ही कुछ झटके लगे, जिसमें बाबर आजम का विकेट भी शामिल रहा।

सिर्फ 8 गेंदों में खत्म हुई बाबर की पारी

दूसरी पारी में बाबर आजम ने 8 गेंदों का सामना किया और 6 रन बनाए। उनकी पारी का अंत तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर ने किया। आर्चर की गेंद पर बाबर विकेट के पीछे जॉर्डन कॉक्स के हाथों कैच आउट हुए।

इससे पहले पहली पारी में भी बाबर बड़ी पारी नहीं खेल पाए थे और महज 8 रन बनाकर अपना विकेट गंवा बैठे थे। टेस्ट क्रिकेट में उनका आखिरी शतक 2022 में न्यूजीलैंड के खिलाफ आया था। इसके बाद से वह इस फॉर्मेट में शतक लगाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

पाकिस्तान की शुरुआत भी रही खराब

389 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान की शुरुआत अच्छी नहीं रही। अजान अवैस केवल 6 रन बनाकर ओली रॉबिन्सन की गेंद पर आउट हुए।

इसके बाद अब्दुल्ला शफीक भी ज्यादा देर क्रीज पर नहीं टिक सके। वह बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। ओली रॉबिन्सन ने एक ही ओवर में अवैस और शफीक दोनों को आउट कर पाकिस्तान को शुरुआती झटके दिए।

इंग्लैंड की दूसरी पारी 208 रन पर सिमटी

इससे पहले इंग्लैंड की टीम अपनी दूसरी पारी में 208 रन बनाकर ऑलआउट हो गई थी। मेजबान टीम के लिए डेन लॉरेंस ने सबसे ज्यादा 54 रन बनाए। उन्होंने 70 गेंदों का सामना किया।

हैरी ब्रूक ने 34 रन और एमिलियो गे ने 31 रन का योगदान दिया। कप्तान जो रूट 24 रन बनाकर आउट हुए।

पाकिस्तान की ओर से मोहम्मद अब्बास सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने 57 रन देकर 5 विकेट अपने नाम किए। खुर्रम शहजाद और मोहम्मद अली को 2-2 सफलताएं मिलीं।

पहली पारी में भी पाकिस्तान का बुरा हाल

मैच की पहली पारी में इंग्लैंड ने 290 रन बनाए थे। जवाब में पाकिस्तान की बल्लेबाजी पूरी तरह लड़खड़ा गई और टीम सिर्फ 110 रन पर सिमट गई।

इस तरह इंग्लैंड को पहली पारी में 180 रन की बड़ी बढ़त हासिल हुई थी। इसके बाद दूसरी पारी में 208 रन बनाने के बाद इंग्लैंड ने पाकिस्तान के सामने 389 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा।

गौरतलब है कि टेस्ट सीरीज के पहले मुकाबले में भी इंग्लैंड ने पाकिस्तान को बड़ी शिकस्त दी थी। पहले टेस्ट में मेजबान टीम ने पाकिस्तान को एक पारी और 103 रन से हराया था।

Sports News:मोहम्मद शमी ने रचा बड़ा इतिहास, 900 प्रोफेशनल विकेट पूरे करने वाले छठे भारतीय बने

मोहम्मद शमी ने दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल मुकाबले में एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। ईस्ट जोन की ओर से खेलते हुए शमी ने सेंट्रल जोन के खिलाफ मैच के पहले दिन दो विकेट हासिल किए और इसी के साथ उनके प्रोफेशनल क्रिकेट में 900 विकेट पूरे हो गए।

शमी यह आंकड़ा छूने वाले भारत के सिर्फ छठे गेंदबाज बने हैं। उनके ये विकेट फर्स्ट क्लास, लिस्ट ए और टी20 क्रिकेट को मिलाकर हैं।

ईस्ट जोन के लिए खेल रहे हैं शमी

दलीप ट्रॉफी का सेमीफाइनल मुकाबला ईस्ट जोन और सेंट्रल जोन के बीच शुरू हुआ। ईस्ट जोन ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया।

ईस्ट जोन के नियमित कप्तान ईशान किशन चोट की वजह से मैच के पहले दिन मैदान पर मौजूद नहीं रहे। उनकी अनुपस्थिति में टीम की कमान 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने संभाली। वैभव को टूर्नामेंट के लिए टीम का उपकप्तान बनाया गया है।

वैभव ने कप्तानी के दौरान एक अहम फैसला लेते हुए रिव्यू भी लिया, जो टीम के पक्ष में गया। आर्यन जुयाल को अंपायर ने नॉट आउट दिया था, लेकिन वैभव के रिव्यू लेने के बाद फैसला बदला गया और जुयाल 46 रन बनाकर आउट हो गए।

266 रन पर ऑलआउट हुआ सेंट्रल जोन

पहले बल्लेबाजी करने उतरी सेंट्रल जोन की पारी 266 रन पर समाप्त हुई। टीम की ओर से रिंकू सिंह ने 60 रनों की उपयोगी पारी खेली और स्कोर को सम्मानजनक स्थिति तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

आर्यन जुयाल ने 46 रन बनाए, जबकि बाकी बल्लेबाज बड़ी पारी खेलने में सफल नहीं रहे। ईस्ट जोन की तरफ से मुकेश कुमार और अभिजीत सरकार ने तीन-तीन विकेट अपने नाम किए। मोहम्मद शमी और कुनैन कुरैशी को दो-दो सफलताएं मिलीं।

सेंट्रल जोन का आखिरी विकेट गिरते ही पहले दिन का खेल भी समाप्त हो गया।

दो विकेट लेते ही 900 विकेट का आंकड़ा पार

मोहम्मद शमी ने पारी में अपना पहला विकेट यश राठौड़ का लिया। इसके बाद उन्होंने अरशद खान को महज 1 रन के स्कोर पर पवेलियन भेज दिया।

अरशद का विकेट हासिल करते ही शमी के करियर के कुल प्रोफेशनल विकेटों की संख्या 900 पहुंच गई। इस तरह उन्होंने फर्स्ट क्लास, लिस्ट ए और टी20 क्रिकेट को मिलाकर यह ऐतिहासिक आंकड़ा हासिल किया।

शमी के नाम फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 379 विकेट हैं। लिस्ट ए मुकाबलों में उन्होंने 283 विकेट लिए हैं, जबकि टी20 क्रिकेट में उनके खाते में 280 विकेट दर्ज हैं।

इंटरनेशनल क्रिकेट में भी शानदार रिकॉर्ड

मोहम्मद शमी भारतीय टीम के प्रमुख तेज गेंदबाजों में शामिल रहे हैं। उन्होंने भारत के लिए अब तक 64 टेस्ट, 108 वनडे और 25 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेले हैं।

टेस्ट क्रिकेट में शमी ने 229 विकेट हासिल किए हैं। वनडे में उनके नाम 206 विकेट हैं, जबकि टी20 इंटरनेशनल में वह 27 विकेट ले चुके हैं।

शमी 3 सितंबर को अपना 36वां जन्मदिन मनाएंगे। दलीप ट्रॉफी में 900 प्रोफेशनल विकेट पूरे करना उनके लंबे और सफल क्रिकेट करियर की एक और बड़ी उपलब्धि बन गई है।

कब्ज और गैस से परेशान हैं? ये 3 आयुर्वेदिक ड्रिंक्स पाचन को बेहतर बनाने में कर सकती हैं मदद

खराब खानपान और अनियमित लाइफस्टाइल का असर सिर्फ वजन पर नहीं पड़ता, बल्कि पाचन तंत्र भी इससे प्रभावित हो सकता है। कम पानी पीना, फाइबर की कमी, ज्यादा प्रोसेस्ड फूड खाना और शारीरिक गतिविधि कम होना जैसी आदतों के कारण गैस, ब्लोटिंग और कब्ज जैसी परेशानियां हो सकती हैं।

ऐसे में पर्याप्त पानी, संतुलित डाइट और नियमित एक्सरसाइज के साथ कुछ पारंपरिक पेय भी डाइट का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। जीरा, अदरक और सौंफ से तैयार ड्रिंक्स पाचन को सपोर्ट करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, लगातार कब्ज या पेट की समस्या रहने पर सिर्फ घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

1. जीरा पानी

जीरा भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाला एक लोकप्रिय मसाला है। इससे तैयार पानी को पारंपरिक रूप से भोजन के बाद होने वाली भारीपन, गैस और अपच जैसी परेशानियों के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है।

जीरे में मौजूद कुछ प्राकृतिक यौगिक पाचन प्रक्रिया को सपोर्ट कर सकते हैं। इसे संतुलित डाइट और पर्याप्त पानी के साथ लिया जाए तो यह पेट को हल्का महसूस कराने में मदद कर सकता है।

कैसे तैयार करें?

  • 1 छोटा चम्मच जीरा
  • 1 गिलास पानी

एक पैन में पानी और जीरा डालकर कुछ मिनट तक उबालें। जब पानी थोड़ा कम हो जाए तो गैस बंद कर दें। इसे हल्का गुनगुना होने दें और फिर छानकर पी सकते हैं।

2. अदरक की चाय

अदरक का इस्तेमाल लंबे समय से पाचन से जुड़ी छोटी-मोटी परेशानियों में किया जाता रहा है। इसमें जिंजरोल जैसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं, जिन पर पाचन और सूजन से जुड़े संभावित प्रभावों को लेकर अध्ययन हुए हैं।

अदरक की हल्की चाय कुछ लोगों में पेट की असहजता और मितली जैसी समस्या को कम करने में मदद कर सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति पर इसका असर एक जैसा नहीं होता।

बनाने का तरीका

इसके लिए आपको चाहिए:

  • करीब 1 इंच अदरक
  • 2 कप पानी
  • थोड़ी चायपत्ती, अगर चाहें

अदरक को कूटकर या कद्दूकस करके पानी में डालें। इसे करीब 6-7 मिनट तक धीमी आंच पर उबालें। चाहें तो थोड़ी चायपत्ती भी डाल सकते हैं। इसके बाद पेय को छानकर गर्म या हल्का गुनगुना सेवन करें।

3. सौंफ की चाय

खाने के बाद सौंफ चबाने की परंपरा भारत में काफी पुरानी है। सौंफ में फाइबर और कई तरह के पौधों से मिलने वाले एंटीऑक्सीडेंट यौगिक मौजूद होते हैं। इसका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से पाचन को आराम देने के लिए किया जाता है।

सौंफ की चाय को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से कुछ लोगों को पेट फूलने या भारीपन जैसी हल्की पाचन संबंधी परेशानियों में आराम महसूस हो सकता है। कब्ज की समस्या में हालांकि पर्याप्त फाइबर और पानी लेना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

सौंफ की चाय कैसे बनाएं?

सामग्री:

  • 1 छोटा चम्मच सौंफ
  • 1 गिलास पानी
  • आधा चम्मच शहद, वैकल्पिक

पानी में सौंफ डालकर करीब 5-6 मिनट तक उबालें। इसके बाद इसे छान लें। अगर पसंद हो तो पेय के हल्का गुनगुना होने पर थोड़ी मात्रा में शहद मिला सकते हैं।

सिर्फ इन ड्रिंक्स से नहीं सुधरेगी गट हेल्थ

गैस और कब्ज से बचने के लिए केवल किसी एक ड्रिंक पर निर्भर रहना सही तरीका नहीं है। रोजाना पर्याप्त पानी पीना, खाने में फाइबर वाली चीजें शामिल करना, फल-सब्जियां खाना और नियमित शारीरिक गतिविधि करना भी जरूरी है।

अगर कब्ज लंबे समय तक बना रहे, पेट में तेज दर्द हो, मल में खून दिखाई दे, लगातार उल्टी हो या बिना वजह वजन कम हो रहा हो, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

ध्यान रखें: आयुर्वेदिक या प्राकृतिक होने का मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति के लिए कोई चीज पूरी तरह सुरक्षित ही होगी। अगर आप किसी बीमारी की दवा लेते हैं या कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो नियमित रूप से इनका सेवन शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

ताशकंद में PM मोदी ने लाल बहादुर शास्त्री को किया नमन, बोले- उनकी देशभक्ति आज भी देती है प्रेरणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि अर्पित की। उज्बेकिस्तान के दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन पीएम मोदी शास्त्री स्मारक पहुंचे और उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर देश के इस महान नेता को याद किया।

इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री का देश के प्रति समर्पण और उनकी सेवा की भावना आज भी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती है।

शास्त्री स्मारक पहुंचकर दी श्रद्धांजलि

पीएम मोदी रविवार को मध्य ताशकंद स्थित ग्रीन पार्क क्षेत्र में बने लाल बहादुर शास्त्री के स्मारक पर पहुंचे। यह स्मारक शास्त्री स्ट्रीट पर स्थित है। यहां उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।

प्रधानमंत्री ने शास्त्री जी को याद करते हुए उनकी तस्वीर भी साझा की और उनके सादगीपूर्ण जीवन तथा राष्ट्र के प्रति समर्पण को नमन किया।

लाल बहादुर शास्त्री की स्मृति को सम्मान देने के लिए ताशकंद में एक सड़क का नाम उनके नाम पर रखा गया है। इसी स्थान पर उनकी कांस्य प्रतिमा भी स्थापित की गई है, जो भारत और उज्बेकिस्तान के ऐतिहासिक संबंधों की याद दिलाती है।

‘जय जवान, जय किसान’ आज भी प्रासंगिक

लाल बहादुर शास्त्री का जीवन सादगी, साहस और राष्ट्रसेवा के लिए समर्पण का उदाहरण माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी उन्हें याद करते हुए कहा कि उनका जीवन देश के लिए पूरी निष्ठा से काम करने की प्रेरणा देता है।

शास्त्री जी का प्रसिद्ध नारा ‘जय जवान, जय किसान’ आज भी भारतीय समाज में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह नारा देश की सुरक्षा में सैनिकों और कृषि क्षेत्र में किसानों के योगदान को सम्मान देने का संदेश देता है।

पीएम मोदी और मिर्जियोयेव ने मिलकर लगाया पौधा

शास्त्री स्मारक जाने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव के साथ राष्ट्रपति भवन के परिसर में पौधारोपण भी किया।

दोनों नेताओं ने भारत की ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल और उज्बेकिस्तान के हरित अभियान के तहत पौधा लगाया। इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, हरियाली बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर पर्यावरण तैयार करने की दिशा में लोगों को प्रेरित करना है।

भारत और उज्बेकिस्तान की इन पर्यावरणीय पहलों को दोनों देशों के बीच सहयोग और टिकाऊ विकास की साझा प्रतिबद्धता के तौर पर भी देखा जा रहा है।

भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों के लिए अहम दौरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान व्यापार, तकनीक, विकास और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर बातचीत हुई।

ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि देकर पीएम मोदी ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक जुड़ाव की एक महत्वपूर्ण कड़ी को भी याद किया।