Home Blog Page 9

सरोजनीनगर में ‘चाय पर चर्चा’: 98 जनसमस्याओं के आवेदन मिले ; शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और संस्कृति पर डॉ. राजेश्वर सिंह ने गिनाए विकास कार्य, 170+ तारा शक्ति केंद्र, 2,000+ मेधावी बच्चों को लैपटॉप-साइकिल, 70+ स्कूलों में स्मार्ट क्लास और 150+ पार्कों में ओपन जिम का उल्लेख

लखनऊ | 1 सितंबर 2026। सरोजनीनगर दक्षिण द्वितीय मंडल में आयोजित ‘चाय पर चर्चा’ कार्यक्रम के दौरान सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने संगठन पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ क्षेत्र की जनसमस्याओं, विकास कार्यों तथा जनहित से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से संवाद किया। कार्यक्रम में 21 सेक्टरों के सेक्टर संयोजकों एवं बूथ अध्यक्षों से प्राप्त सुझावों और समस्याओं पर चर्चा हुई।

इस दौरान सड़क-नाली, आर्थिक सहयोग, सीवर एवं जलभराव, बिजली, सोलर और स्ट्रीट लाइट, पेयजल, पेंशन, आवास, रोजगार और शिक्षा समेत विभिन्न जनसमस्याओं से संबंधित कुल 98 आवेदन प्राप्त हुए। इन आवेदनों को शीघ्र निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को अग्रसारित किया गया।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि ‘चाय पर चर्चा’ केवल संवाद का कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं को समझने, आवेदन प्राप्त करने और उनके समाधान की दिशा में प्रभावी कदम बढ़ाने का माध्यम है।

उन्होंने कहा कि सरोजनीनगर के विकास में जनता, भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारियों, मंडल अध्यक्षों, सेक्टर संयोजकों, बूथ अध्यक्षों और कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। संगठन और जनता से मिलने वाले सुझावों के आधार पर अनेक जनहितकारी कार्यों को गति मिली है।

4 से बढ़कर 170+ हुए तारा शक्ति केंद्र

मातृशक्ति के सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि तारा शक्ति केंद्रों की शुरुआत केवल 4 केंद्रों से हुई थी, लेकिन आज सरोजनीनगर में 170 से अधिक तारा शक्ति केंद्र स्थापित हो चुके हैं और लगातार नए केंद्र विकसित किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि इन केंद्रों के माध्यम से अब तक 2,000 से 2,500 सिलाई मशीनों का वितरण किया जा चुका है। तारा शक्ति केंद्रों से जुड़ी महिलाओं ने अपने हुनर और परिश्रम के माध्यम से अब तक 1 लाख से अधिक भारतीय जनता पार्टी के झंडे, 50,000 से अधिक बच्चों के स्कूल बैग और 1 लाख से अधिक राष्ट्रीय ध्वज तैयार किए हैं।

डॉ. सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज निर्माण के क्षेत्र में 5 लाख का लक्ष्य लेकर कार्य किया जा रहा है। इससे महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर मिलने के साथ उनके कौशल को भी सम्मान मिल रहा है।

2,000+ मेधावी बच्चों को लैपटॉप और साइकिल से सम्मान

बच्चों की शिक्षा और भविष्य को प्राथमिकता बताते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि परिवार में बच्चों का भविष्य सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसी सोच के साथ सरोजनीनगर में अब तक 2,000 से अधिक मेधावी बच्चों को लैपटॉप एवं साइकिल प्रदान कर सम्मानित और प्रोत्साहित किया गया है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा के संसाधन बच्चों तक पहुंचाने के लिए 70 से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की गई हैं। इन सुविधाओं से लगभग 32,000 बच्चों और बेटियों को आधुनिक एवं तकनीक आधारित शिक्षा का लाभ मिल रहा है।

विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति और पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाने के उद्देश्य से 100 से अधिक विद्यालयों में सीएसआर के माध्यम से झूले भी स्थापित कराए गए हैं।

डिजिटल शिक्षा और AI के प्रति बच्चों को जागरूक करना जरूरी

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि वर्तमान समय तकनीक और डिजिटल शिक्षा का है। बच्चों को केवल मोबाइल और मनोरंजन तक सीमित रखने के बजाय उन्हें कंप्यूटर, डिजिटल शिक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उभरती तकनीकों के प्रति जागरूक करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को बदलती तकनीकी दुनिया के अनुरूप तैयार करना प्राथमिकता है, ताकि बच्चे नई तकनीकों को समझ सकें, उनका प्रभावी उपयोग कर सकें और भविष्य की प्रतिस्पर्धा के लिए स्वयं को तैयार कर सकें।

150+ पार्कों में ओपन जिम, 100 नए ओपन जिम को मिली मंजूरी

स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि स्वस्थ समाज ही सशक्त समाज का आधार है। इसी उद्देश्य से पिछले तीन वर्षों में सरोजनीनगर क्षेत्र के 150 से अधिक पार्कों में ओपन जिम स्थापित किए जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त 100 नए ओपन जिम को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की स्वीकृति मिल चुकी है, जिन्हें आगामी तीन महीनों में स्थापित किया जाना प्रस्तावित है।

डॉ. सिंह ने कहा कि इन ओपन जिमों के माध्यम से पार्क अब केवल टहलने की जगह नहीं रह गए हैं, बल्कि स्थानीय नागरिकों के बीच संवाद, सहयोग और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने वाले केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं।

सरोजनीनगर स्पोर्ट्स लीग में 10,000+ बच्चों की भागीदारी

बच्चों को खेलों से जोड़ने के लिए पिछले साढ़े तीन वर्षों से सरोजनीनगर स्पोर्ट्स लीग का आयोजन किया जा रहा है। डॉ. राजेश्वर सिंह ने बताया कि इस खेल आयोजन में अब तक 10,000 से अधिक बच्चे भाग ले चुके हैं।

उन्होंने कहा कि खेलों में भाग लेने वाले प्रत्येक बच्चे को प्रशस्ति पत्र देकर प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि खेल बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ उनके भविष्य के अवसरों का माध्यम भी बन सकें।

300 से अधिक मंदिरों का जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण

सनातन संस्कृति और विरासत के संरक्षण को जनसेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि सरोजनीनगर में मंदिरों के जीर्णोद्धार, पुनरुद्धार और सौंदर्यीकरण का कार्य लगातार किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि अब तक 300 से अधिक मंदिरों का जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण कराया जा चुका है। इन मंदिरों में रंगाई-पुताई के साथ पेयजल के लिए हैंडपंप, श्रद्धालुओं के बैठने के लिए बेंच और सोलर लाइट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

उन्होंने कहा कि इन कार्यों का उद्देश्य केवल मंदिरों को सुंदर बनाना नहीं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा बच्चों और युवाओं को अपनी संस्कृति और विरासत से जोड़ना भी है।

महापुरुषों के सम्मान में चौक और प्रतिमाओं का निर्माण

नई पीढ़ी को महापुरुषों और महान विभूतियों के जीवन से प्रेरणा मिले, इसके लिए सरोजनीनगर में विभिन्न कार्य किए गए हैं। डॉ. राजेश्वर सिंह ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भव्य प्रतिमा स्थापित कर अटल चौक का निर्माण कराया गया है।

इसके अलावा भगवान परशुराम के भव्य चौक एवं प्रतिमा की स्थापना और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हेमू कलानी की प्रतिमा की स्थापना भी कराई गई है।

डॉ. भीमराव अंबेडकर के सम्मान में किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि 30 से अधिक प्रतिमाओं का जीर्णोद्धार, प्रतिमाओं पर शेड की व्यवस्था और उनके प्रेरणादायी संदेशों को प्रदर्शित करने का कार्य किया गया है।

उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर का जीवन शिक्षा, संघर्ष और समानता की प्रेरणा देता है तथा उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है।

तारा शक्ति निःशुल्क रसोई से प्रतिदिन 4,000 लोगों को भोजन

जनसेवा के मानवीय पक्ष पर जोर देते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि विकास कार्यों के साथ जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर सहायता पहुंचाना भी जनप्रतिनिधि के दायित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने बताया कि पिछले साढ़े तीन वर्षों से तारा शक्ति निःशुल्क रसोई संचालित की जा रही है, जिसके माध्यम से प्रतिदिन लगभग 4,000 लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

लोकबंधु अस्पताल में संचालित तारा शक्ति निःशुल्क रसोई केंद्र के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 2,000 लोगों को भोजन कराया जा रहा है। इससे अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को कठिन समय में भोजन की सुविधा उपलब्ध हो रही है।

14,000+ पत्रों के माध्यम से जनसमस्याओं के समाधान का प्रयास

जनसमस्याओं के समाधान की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने बताया कि अब तक 14,000 से अधिक पत्रों के माध्यम से जनता की समस्याओं को संबंधित विभागों और अधिकारियों तक पहुंचाया गया है।

इनमें 2,500 से अधिक पत्र उपचार से संबंधित रहे हैं। इन प्रयासों के माध्यम से 1,700 से अधिक जरूरतमंद लोगों को उपचार के लिए लगभग 27 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने में सफलता मिली है।

उन्होंने कहा कि जनसेवा का मूल उद्देश्य यह होना चाहिए कि कोई जरूरतमंद व्यक्ति केवल आर्थिक संसाधनों के अभाव में इलाज से वंचित न रह जाए।

“सरोजनीनगर का हर परिवार हमारी प्राथमिकता”

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि सरोजनीनगर में किए जा रहे प्रत्येक कार्य के केंद्र में परिवार की भावना है। बच्चों को बेहतर शिक्षा और भविष्य के अवसर मिलें, माताएं-बहनें आत्मनिर्भर बनें, वरिष्ठ नागरिक स्वस्थ और प्रसन्न रहें तथा जरूरतमंदों को समय पर सहायता मिले- इसी उद्देश्य से विकास और जनसेवा के कार्य किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि विकास का यह अभियान किसी जाति, वर्ग या राजनीतिक भेदभाव से प्रेरित नहीं है। सभी को साथ लेकर चलना और प्रत्येक व्यक्ति के सम्मान एवं अधिकार को सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।

डॉ. सिंह ने कहा कि उनका संकल्प सरोजनीनगर के हर परिवार की खुशहाली, बच्चों के उज्ज्वल भविष्य, मातृशक्ति के सम्मान, वरिष्ठजनों की सुविधा और जरूरतमंदों को सहारा सुनिश्चित करना है।

कार्यक्रम में भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति

‘चाय पर चर्चा’ कार्यक्रम में सरोजनीनगर दक्षिण द्वितीय मंडल अध्यक्ष विनोद कुमार मौर्य, मंडल उपाध्यक्ष कार्तिकेय दीक्षित, अशोक कुमार चौधरी, हनुमान प्रसाद, वीरेन्द्र सिंह, सुभाष चन्द्र जैतली और रमाशंकर दुबे, मंडल महामंत्री अखिलेश कुमार त्रिपाठी और नितेश कुमार वार्ष्णेय सहित विभिन्न पदाधिकारी उपस्थित रहे।

इसके अलावा मंडल मंत्री इंजीनियर अरविंद पाण्डेय, मुकेश मौर्य, पूनम यादव, राजकुमारी कोरी, रमेश शर्मा और राजीव कुमार मिश्रा, मंडल कोषाध्यक्ष रीतू सिंह, मंडल सोशल मीडिया प्रभारी आशीष पटेल, वरिष्ठ भाजपा नेता शंकरी सिंह और रमाशंकर त्रिपाठी, पार्षद के.एन. सिंह सहित अनेक पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. राजेश्वर सिंह ने सभी सेक्टर संयोजकों, बूथ अध्यक्षों, पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को उनके सक्रिय सहयोग, विश्वास और संगठन को मजबूत करने में योगदान के लिए धन्यवाद दिया।

उन्होंने कहा कि जनता से सीधा संवाद और समस्याओं का समयबद्ध समाधान ही जनसेवा की सबसे मजबूत नींव है।

डॉ.राजेश्वर सिंह का संकल्प: हर बच्चे को मिले सपने देखने और उन्हें साकार करने का अवसर ; सुदूर गांवों के विद्यालयों से लेकर डिजिटल कक्षाओं तक, बच्चों का भविष्य संवार रहे सरोजनीनगर विधायक

लखनऊ | 1 सितंबर 2026। सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के लिए शिक्षा केवल जनप्रतिनिधि के दायित्वों का हिस्सा नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य को सशक्त बनाने का एक दीर्घकालिक संकल्प है। उनका निरंतर प्रयास है कि गरीबी, संसाधनों की कमी या भौगोलिक दूरी किसी भी बच्चे की प्रतिभा और उसके सपनों के मार्ग में बाधा न बन सके।

कॉलेज के कार्यक्रम हों, ध्वजारोहण समारोह हो अथवा किसी शोकाकुल परिवार से मिलने के लिए सुदूर गांव की यात्रा—डॉ. राजेश्वर सिंह हर अवसर को शिक्षा और शिक्षण संस्थानों को सशक्त बनाने के माध्यम के रूप में देखते हैं। यही कारण है कि उनके प्रयास शहर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों से लेकर सरोजनीनगर के दूरस्थ गांवों में संचालित छोटे विद्यालयों तक दिखाई देते हैं।

अवध गर्ल्स डिग्री कॉलेज की कंप्यूटर लैब के लिए ₹10 लाख की घोषणा

31 अगस्त को अवध गर्ल्स डिग्री कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम के दौरान डॉ. राजेश्वर सिंह ने छात्राओं की डिजिटल शिक्षा को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कॉलेज की कंप्यूटर लैब के आधुनिकीकरण हेतु सीएसआर के माध्यम से ₹10 लाख की सहायता प्रदान करने की घोषणा की।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल कौशल और वित्तीय साक्षरता से सशक्त बनाना आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण की अनिवार्य शर्त है। आधुनिक समय में डिजिटल तकनीक शिक्षा और रोजगार दोनों का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है, ऐसे में छात्राओं को बेहतर तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराना भविष्य के लिए निवेश है।

प्रियंका सिंह की स्मृति में विद्यालय के लिए ₹10 लाख की सहायता

डॉ. राजेश्वर सिंह की शिक्षा के प्रति संवेदनशीलता लोगों के कठिन समय में भी दिखाई देती है। स्वर्गीय प्रियंका सिंह के असामयिक निधन की जानकारी मिलने पर उन्होंने उनके पति एवं पत्रकार प्रभात सिंह से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की।

इस दौरान डॉ. सिंह को जानकारी मिली कि स्वर्गीय प्रियंका सिंह गांव के बच्चों को शिक्षित करने के उद्देश्य से कक्षा पांच तक एक विद्यालय संचालित करती थीं। शिक्षा के प्रति उनके समर्पण और सेवा भावना को आगे बढ़ाने के लिए डॉ. राजेश्वर सिंह ने उनकी स्मृति में विद्यालय में अतिरिक्त कक्षों के निर्माण हेतु तत्काल ₹10 लाख की सहायता देने की घोषणा की।

इस पहल से न केवल विद्यालय की आधारभूत सुविधाएं मजबूत होंगी, बल्कि शिक्षा के प्रति स्वर्गीय प्रियंका सिंह का संकल्प भी आने वाली पीढ़ियों तक जीवित रहेगा।

सुदूर गांव के छोटे विद्यालय को भी मिला नया संबल

इसी प्रकार सरोजनीनगर के एक अत्यंत सुदूर गांव में राम रईस रावत के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे डॉ. राजेश्वर सिंह की दृष्टि वहां संचालित एक छोटे विद्यालय पर पड़ी।

यह विद्यालय सीमित संसाधनों और झोपड़ियों से शुरू होकर धीरे-धीरे एक छोटे भवन तक पहुंचा था। डॉ. सिंह को जानकारी मिली कि श्री रावत के पुत्र श्रवण कुमार रावत पूरे समर्पण के साथ विद्यालय का संचालन कर रहे हैं और गांव के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।

विद्यालय की स्थिति और बच्चों के भविष्य को देखते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के लिए विधायक निधि से तत्काल ₹10 लाख देने की घोषणा की। यह पहल उन दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों के लिए नई संभावनाएं लेकर आएगी, जहां बेहतर शैक्षणिक संसाधनों तक पहुंच आज भी एक बड़ी चुनौती है।

मेधावी बच्चों को प्रोत्साहन देने पर विशेष जोर

डॉ. राजेश्वर सिंह का मानना है कि सही समय पर मिला प्रोत्साहन किसी बच्चे के पूरे जीवन की दिशा बदल सकता है। यही सोच उनके विभिन्न शैक्षिक और सामाजिक कार्यक्रमों में दिखाई देती है।

एक ध्वजारोहण कार्यक्रम के दौरान उन्होंने गांव के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित कराया और छह प्रतिभाशाली बच्चों को साइकिलें प्रदान कीं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को आगे की शिक्षा के लिए प्रेरित करना और उनकी उपलब्धियों को समाज के सामने सम्मान देना था।

वहीं, के.आर. मंगलम स्कूल के विद्यार्थियों के साथ संवाद के दौरान एक छात्रा ने डॉ. सिंह को बताया कि उसने 85 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं और वह भविष्य में नीट की तैयारी करना चाहती है। छात्रा के लक्ष्य और प्रतिभा को देखते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने उसी क्षण उसे लैपटॉप उपहार में प्रदान किया।

करीब 2,000 मेधावी विद्यार्थी हो चुके हैं सम्मानित

ये पहल केवल व्यक्तिगत स्तर की सहायता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में चल रहे व्यापक शैक्षिक अभियान का हिस्सा हैं।

अब तक करीब 2,000 मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप, कंप्यूटर और साइकिल प्रदान कर सम्मानित एवं प्रोत्साहित किया जा चुका है। इन प्रयासों का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनमें आगे बढ़ने और बड़े लक्ष्य निर्धारित करने का आत्मविश्वास पैदा करना है।

इसके अतिरिक्त, क्षेत्र के 70 से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित कर हजारों बच्चों को आधुनिक और तकनीक आधारित शिक्षा से जोड़ा गया है।

डिजिटल शिक्षा के विस्तार से विशेष रूप से उन विद्यार्थियों को लाभ मिल रहा है, जिनके लिए निजी संसाधनों के माध्यम से आधुनिक तकनीक तक पहुंच आसान नहीं थी।

विद्यालय पीढ़ियों का निर्माण करते हैं- डॉ. राजेश्वर सिंह

शिक्षा को अपनी प्राथमिकताओं में सर्वोच्च स्थान देने के पीछे की सोच स्पष्ट करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा,

“सड़कें कुछ वर्षों के लिए बनती हैं, लेकिन विद्यालय पीढ़ियों का निर्माण करते हैं और राष्ट्र की दिशा बदलते हैं। सड़कें स्थानों को जोड़ती हैं, जबकि शिक्षा बच्चों को अवसरों से और देश को उसके उज्ज्वल भविष्य से जोड़ती है। इसीलिए मेरी प्राथमिकताएं बिल्कुल स्पष्ट हैं- अधिकतम संभव संसाधन विद्यालयों, डिजिटल शिक्षा और बच्चों के भविष्य पर खर्च किए जाने चाहिए।”

उन्होंने कहा कि शिक्षा पर किया गया निवेश वास्तव में देश के भविष्य पर किया गया निवेश है।

“हमारे द्वारा निर्मित प्रत्येक कक्षा, उपलब्ध कराया गया प्रत्येक कंप्यूटर और प्रोत्साहित किया गया प्रत्येक मेधावी बच्चा भारत के भविष्य में किया गया निवेश है। मेरा संकल्प है कि संसाधनों के अभाव में किसी भी प्रतिभाशाली बच्चे का सपना अधूरा न रहे।”

हर बच्चे तक अवसर पहुंचाने का संकल्प

डॉ. राजेश्वर सिंह का ध्येय स्पष्ट है कि शहर के प्रतिष्ठित कॉलेज से लेकर सरोजनीनगर के सबसे सुदूर गांव में संचालित छोटे विद्यालय तक, प्रत्येक बच्चे को सीखने, आगे बढ़ने और अपने सपनों को साकार करने का समान अवसर मिलना चाहिए।

उनकी शैक्षिक पहलों का केंद्र केवल भवन निर्माण या संसाधनों का वितरण नहीं है, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें प्रतिभा को संसाधनों की कमी के कारण पीछे न रहना पड़े।

हर विद्यालय सशक्त बने, हर प्रतिभा को प्रोत्साहन मिले और हर बच्चे को अपने सपनों को साकार करने का अवसर प्राप्त हो- इसी संकल्प के साथ डॉ. राजेश्वर सिंह सरोजनीनगर में शिक्षा और डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं।

सुख हो या दुःख, क्षेत्रवासियों के बीच पहुंच रहे सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह: शोक संतप्त परिवारों से मिलकर जताई संवेदना, जरूरतमंदों की मदद का दिया भरोसा

लखनऊ। सरोजनी नगर विधानसभा क्षेत्र में जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी सक्रियता और क्षेत्रवासियों से निरंतर संवाद को लेकर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह लगातार चर्चा में रहते हैं। क्षेत्र में सुख-दुःख के हर अवसर पर लोगों के बीच पहुंचना, उनकी समस्याओं को सुनना और जरूरत के अनुसार सहायता का भरोसा देना उनकी कार्यशैली की विशेष पहचान बनता जा रहा है।

इसी क्रम में विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों में पहुंचकर दिवंगत लोगों के शोकाकुल परिवारजनों से भेंट की, उन्हें सांत्वना दी और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। कई स्थानों पर स्थानीय समस्याओं की जानकारी मिलने पर विधायक ने आवश्यक सहायता और विकास कार्यों के लिए भी पहल का आश्वासन दिया।

मकदूमपुर कैथी में ग्राम प्रधान मनोज लोधी के परिवार से मिले

ग्राम मकदूमपुर कैथी के ग्राम प्रधान मनोज लोधी की पूज्य माताजी स्वर्गीय शांति देवी के निधन की सूचना मिलने पर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह उनके आवास पहुंचे। उन्होंने शोकाकुल परिवारजनों से भेंट कर गहरी संवेदना व्यक्त की और दिवंगत पुण्यात्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

इस अवसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेश सिंह चौहान, मंडल अध्यक्ष विवेक राजपूत, मंडल अध्यक्ष मोहित तिवारी, पार्षद के.एन. सिंह, बूथ अध्यक्ष मेड़ीलाल रावत, मुकेश, सेक्टर संयोजक राधे श्याम तिवारी, मुनेश रावत, पूर्व प्रधान रूप चंद, मेहीलाल रावत, एहमामऊ के पूर्व प्रधान तेज नारायण, राघवेंद्र सिंह, भूतपूर्व प्रधान गंगाराम रावत सहित बड़ी संख्या में स्थानीय कार्यकर्ता और गणमान्यजन उपस्थित रहे।

ग्राम औरावा में वरिष्ठ पत्रकार प्रभात सिंह के परिवार को दी सांत्वना

ग्राम औरावा निवासी वरिष्ठ पत्रकार प्रभात सिंह की धर्मपत्नी स्वर्गीय प्रियंका सिंह के निधन पर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने उनके परिवार से भेंट कर गहरी संवेदना व्यक्त की।

विधायक ने इस कठिन समय में परिवार को ढांढस बंधाया और दिवंगत पुण्यात्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।

मनोज सिंह के पुत्र अनुज उर्फ शिंटू के निधन पर परिवार से की मुलाकात

ग्राम औरावा में ही विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने मनोज सिंह के पुत्र स्वर्गीय अनुज सिंह उर्फ शिंटू के निधन के बाद उनके परिवारजनों से भेंट की। विधायक ने शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

इस दौरान ब्लॉक प्रमुख सुनील रावत, पूर्व जिला पंचायत सदस्य राजेश सिंह, मंडल अध्यक्ष विवेक राजपूत, मंडल महामंत्री प्रियम सिंह, पूर्व प्रधान अजय सिंह, पूर्व सभासद प्रत्याशी अनूप सिंह सज्जन, बूथ अध्यक्ष विजय सिंह सहित क्षेत्र के अनेक कार्यकर्ता और गणमान्यजन उपस्थित रहे।

ग्राम काकोहा में शोक संवेदना के साथ जरूरतमंद बुजुर्ग के इलाज का भरोसा

ग्राम काकोहा में विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने पूर्व ब्लॉक प्रमुख राकेश रावत के पूज्य बड़े भाई एवं रामचंद्र के पूज्य पिताजी स्वर्गीय देशराज के निधन पर परिवारजनों से भेंट कर संवेदना व्यक्त की।

उन्होंने परिवार के बसंत, मोती, राहुल, विशाल, रोहित, करन और नितिन सहित अन्य परिजनों से मुलाकात कर इस दुखद समय में परिवार को सांत्वना दी।

ग्राम प्रवास के दौरान विधायक को एक बुजुर्ग व्यक्ति के स्वास्थ्य और उपचार संबंधी समस्या की जानकारी मिली। इस पर उन्होंने बुजुर्ग के इलाज में आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया। वहीं स्थानीय आवश्यकताओं को देखते हुए 2 सोलर लाइट, 5 स्ट्रीट लाइट और 1 हैंडपंप की व्यवस्था के लिए आवश्यक पहल करने का भी भरोसा दिलाया।

इस अवसर पर पूर्व जिला मंत्री आशु शुक्ला, भगवती प्रसाद, राहुल रावत और सुभाष पासी सहित स्थानीय कार्यकर्ता एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।

रहीमनगर पड़ियाना में कार्यकर्ता प्रताप रावत के परिवार से आत्मीय संवाद

अपने अन्य कार्यक्रमों के दौरान मार्ग में विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह रहीमनगर पड़ियाना के सेक्टर संयोजक प्रताप रावत और उनके परिवारजनों से भी आत्मीयता के साथ मिले।

उन्होंने परिवार का कुशलक्षेम जाना और बच्चों आयुष, दिव्यांशी एवं तन्वी से स्नेहपूर्वक संवाद करते हुए उनकी पढ़ाई और भविष्य से जुड़े विषयों पर बातचीत की। क्षेत्र के कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों के साथ विधायक का यह निरंतर आत्मीय संवाद उनके जनसंपर्क और क्षेत्रवासियों से जीवंत जुड़ाव को दर्शाता है।

श्रवण रावत के परिवार से भी मिले विधायक

विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने श्रवण रावत के चाचा स्वर्गीय राम रईस रावत के निधन के बाद उनके शोकाकुल परिवारजनों से भी भेंट की।

इस दौरान उन्होंने रश्मि देवी, अरविंद कुमार, धर्मेंद्र कुमार, प्रताप, विजय प्रताप, तेज प्रताप, रंजना देवी, मीशो देवी, आशी, आरव, श्रवण कुमार, राम प्रसाद और सिया दुलारी सहित अन्य परिवारजनों से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की।

क्षेत्र में चर्चा: जनप्रतिनिधि नहीं, हर सुख-दुःख में साथ खड़े होने वाले विधायक

सरोजनी नगर विधानसभा क्षेत्र में विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की सक्रियता और जनसंपर्क की चर्चा आमजनमानस में लगातार बनी रहती है। चाहे किसी परिवार के घर खुशी का अवसर हो, कोई सामाजिक आयोजन हो या फिर किसी परिवार पर दुःख का पहाड़ टूटा हो, विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह स्वयं लोगों के बीच पहुंचने का प्रयास करते हैं।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि विधायक केवल औपचारिक मुलाकात तक सीमित नहीं रहते, बल्कि लोगों की समस्याओं को सुनकर उनके समाधान और जरूरतमंदों की यथोचित सहायता के लिए भी पहल करते हैं। काकोहा में बुजुर्ग के इलाज में सहयोग का आश्वासन और गांव की बुनियादी जरूरतों के लिए सोलर लाइट, स्ट्रीट लाइट तथा हैंडपंप की व्यवस्था की पहल इसका उदाहरण है।

डॉ. राजेश्वर सिंह की यही कार्यशैली- जनता के सुख में सहभागी और दुःख में संवेदनशील साथी बनने की भावना– उन्हें सरोजनी नगर के लोगों से लगातार जोड़े हुए है।

ईश्वर सभी दिवंगत पुण्यात्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें और शोक संतप्त परिवारों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति दें।

ॐ शांति। 🙏

Megalophobia क्या है? विशाल इमारतों से लेकर पहाड़ों तक, जानें डर के लक्षण और इलाज

क्या किसी बहुत बड़ी इमारत, विशाल मूर्ति, ऊंचे पहाड़ या आकार में बेहद बड़ी वस्तु को देखते ही आपके अंदर अचानक डर पैदा हो जाता है? क्या ऐसी चीजों के सामने आते ही बेचैनी, घबराहट या सांस लेने में परेशानी होने लगती है? अगर ऐसा बार-बार होता है, तो यह सामान्य डर के बजाय मेगालोफोबिया (Megalophobia) नामक एक खास तरह का फोबिया हो सकता है।

इस स्थिति में व्यक्ति असामान्य रूप से बड़ी चीजों को देखकर डर या तीव्र बेचैनी महसूस कर सकता है। कुछ लोग ऐसे स्थानों या परिस्थितियों से बचने लगते हैं, जहां उन्हें बड़ी वस्तुओं का सामना करना पड़ सकता है। अगर यह डर रोजमर्रा के काम, यात्रा या सामाजिक जीवन को प्रभावित करने लगे, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी हो जाता है।

किन लोगों में हो सकता है मेगालोफोबिया?

फोबिया किसी भी उम्र में विकसित हो सकता है। बच्चों में शुरू हुआ डर समय के साथ किशोरावस्था या युवावस्था में अधिक स्पष्ट दिखाई दे सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि वयस्कों में यह समस्या नहीं हो सकती।

हर व्यक्ति में किसी फोबिया की वजह और उसकी तीव्रता अलग-अलग हो सकती है। कुछ लोगों को किसी खास घटना के बाद बड़ी वस्तुओं से डर लगने लगता है, जबकि कुछ मामलों में इसके पीछे कोई स्पष्ट कारण पता नहीं चलता।

मेगालोफोबिया के लक्षण कैसे पहचानें?

इस फोबिया से जूझ रहे व्यक्ति में बड़ी वस्तु या उसके बारे में सोचने पर शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं।

इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • अचानक तेज डर या बेचैनी होना
  • दिल की धड़कन बढ़ जाना
  • सांस लेने में परेशानी महसूस होना
  • चक्कर या सिर घूमने जैसा अनुभव
  • जी मिचलाना या असहज महसूस होना
  • शरीर में तनाव या घबराहट बढ़ना
  • बड़ी इमारतों, पहाड़ों या विशाल वस्तुओं के पास जाने से बचना
  • ऐसी जगहों से दूर रहने की कोशिश करना जहां बड़ी वस्तुएं मौजूद हों

लक्षणों की तीव्रता व्यक्ति-दर-व्यक्ति अलग हो सकती है।

आखिर मेगालोफोबिया क्यों होता है?

मेगालोफोबिया का कोई एक निश्चित कारण अभी तक स्थापित नहीं माना जाता। विशेषज्ञों के अनुसार, कई कारक इसके पीछे भूमिका निभा सकते हैं।

अगर किसी व्यक्ति के साथ अतीत में किसी बड़ी वस्तु या उससे जुड़ी घटना के दौरान डरावना या परेशान करने वाला अनुभव हुआ हो, तो वह घटना बाद में फोबिया का कारण बन सकती है।

इसके अलावा, किसी चीज को देखकर अचानक खतरा महसूस करना, पहले से मौजूद एंग्जायटी या किसी डरावने अनुभव की याद भी ऐसी प्रतिक्रिया को बढ़ा सकती है। कुछ मामलों में व्यक्ति को खुद भी पता नहीं होता कि यह डर कब और कैसे विकसित हुआ।

मेगालोफोबिया को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है?

इस समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय इसके लक्षणों को समझना और जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मदद लेना बेहतर होता है। उपचार व्यक्ति की स्थिति और डर की गंभीरता के आधार पर तय किया जाता है।

1. कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी

Cognitive Behavioural Therapy (CBT) फोबिया और एंग्जायटी से जुड़ी समस्याओं में इस्तेमाल की जाने वाली प्रमुख थेरेपी में से एक है। इसमें व्यक्ति को डर पैदा करने वाले विचारों को पहचानने और उन्हें अधिक संतुलित तरीके से समझने में मदद की जाती है।

समय के साथ व्यक्ति अपने डर को बेहतर तरीके से समझना और उससे निपटना सीख सकता है।

2. एक्सपोजर थेरेपी

इस तकनीक में व्यक्ति को उसके डर का सामना अचानक नहीं कराया जाता, बल्कि विशेषज्ञ की निगरानी में धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से उस स्थिति के करीब लाया जाता है।

शुरुआत में तस्वीरों या वीडियो जैसे कम डर पैदा करने वाले माध्यमों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके बाद व्यक्ति की क्षमता और प्रतिक्रिया के अनुसार वास्तविक परिस्थितियों की ओर बढ़ा जाता है। इसका उद्देश्य डर को धीरे-धीरे कम करना और व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ाना होता है।

3. रिलैक्सेशन और ग्राउंडिंग तकनीक

गहरी और नियंत्रित सांस लेना, माइंडफुलनेस तथा ग्राउंडिंग जैसी तकनीकें घबराहट के दौरान शरीर और दिमाग को शांत करने में मदद कर सकती हैं।

इन तकनीकों का नियमित अभ्यास करने से व्यक्ति एंग्जायटी के समय अपनी प्रतिक्रिया को बेहतर तरीके से नियंत्रित करना सीख सकता है।

4. विशेषज्ञ से सलाह लेना

अगर बड़ी वस्तुओं को देखकर होने वाला डर इतना बढ़ गया है कि यात्रा, काम, पढ़ाई या सामान्य जिंदगी प्रभावित होने लगी है, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करना जरूरी है।

काउंसलिंग या थेरेपी के जरिए डर के संभावित कारणों को समझने और उससे निपटने की रणनीति विकसित करने में मदद मिल सकती है।

ध्यान रखें: किसी बड़ी चीज को देखकर कभी-कभार डर या असहज महसूस होना अपने आप में मेगालोफोबिया का प्रमाण नहीं है। फोबिया का आकलन उसकी तीव्रता, बार-बार होने और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने वाले प्रभाव के आधार पर विशेषज्ञ बेहतर तरीके से कर सकते हैं।

उत्तरी साइप्रस के पास समुद्र में पलटी यात्रियों से भरी फेरी, 100+ लोगों का रेस्क्यू; मचा अफरा-तफरी

उत्तरी साइप्रस के तट के पास रविवार दोपहर एक बड़ा समुद्री हादसा हो गया। करीब 270 यात्रियों को लेकर जा रही एक पैसेंजर फेरी अचानक समुद्र में पलट गई। हादसे के बाद यात्रियों के बीच अफरा-तफरी मच गई और बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया।

फिलहाल हादसे में किसी व्यक्ति की मौत हुई है या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बचाव दल ने कई यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है और रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है।

कायरिनिया से तासुकु जा रही थी फेरी

हादसे का शिकार हुई कैटामरन शैली की फेरी उत्तरी साइप्रस के कायरिनिया बंदरगाह से तुर्की के मेर्सिन प्रांत स्थित तासुकु बंदरगाह की ओर जा रही थी।

बताया जा रहा है कि तट से करीब चार मील की दूरी पर पहुंचने के बाद फेरी के अंदर पानी भरना शुरू हुआ। इसके कुछ ही समय बाद जहाज असंतुलित होकर समुद्र में पलट गया।

घटना की सूचना मिलते ही एंबुलेंस और राहत दलों को मौके की ओर भेजा गया। समुद्र में मौजूद यात्रियों को बचाने के लिए तत्काल अभियान शुरू किया गया।

100 से ज्यादा यात्रियों को बचाया गया

उत्तरी साइप्रस के परिवहन मंत्री एरहान अरिकली ने बताया कि हादसे की जानकारी मिलते ही बचाव दल सक्रिय हो गए थे। उन्होंने पुष्टि की कि फेरी पलट चुकी थी और राहतकर्मी घटनास्थल पर पहुंच गए थे।

शुरुआती जानकारी के अनुसार, 100 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित निकालकर कायरिनिया ले जाया जा चुका है। बाकी लोगों की तलाश और बचाव के लिए अभियान जारी है।

अधिकारियों के सामने फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि फेरी में अचानक पानी किस वजह से भरना शुरू हुआ। हादसे के कारणों की तत्काल पुष्टि नहीं हो सकी है।

कायरिनिया और तासुकु के बीच नियमित रूप से कई कंपनियां फेरी सेवाएं संचालित करती हैं। हालांकि, हादसे में शामिल फेरी किस कंपनी की थी, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

लाइफ जैकेट पहने समुद्र में दिखे यात्री

हादसे के बाद सामने आए कुछ दृश्यों में समुद्र के पानी में लाइफ जैकेट पहने लोग तैरते हुए दिखाई दिए। आसपास बचाव नौकाएं भी नजर आईं, जो यात्रियों को सुरक्षित निकालने में जुटी थीं।

हादसे के बाद उत्तरी साइप्रस के स्वास्थ्य और बचाव विभागों को अलर्ट कर दिया गया। घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक तैयारियां की गई हैं।

ट्यूनीशिया में भी नाव पलटने से हादसा

इसी बीच ट्यूनीशिया के दक्षिणी तट के पास भी प्रवासियों को ले जा रही एक नाव के पलटने की घटना सामने आई है। इस हादसे में कम से कम दो लोगों की मौत की जानकारी है, जबकि करीब 12 लोग लापता बताए गए हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, एक व्यक्ति को सुरक्षित बचा लिया गया है। तलाशी अभियान के दौरान दो शव बरामद किए गए, जिन्हें आगे की कार्रवाई के लिए जेरबा द्वीप के अस्पताल भेजा गया।

बताया गया कि नाव पर करीब 15 लोग सवार थे और यह जारजिस तथा बेन गुएड्रेन के बीच के इलाके से रवाना हुई थी। घटना के बाद समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने लापता लोगों की तलाश शुरू कर दी है।