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यूक्रेन के नेतृत्व पर हमला नहीं करेगा रूस? पुतिन बोले- शांति के लिए बातचीत जरूरी

रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी युद्ध को खत्म करने की कोशिशों के बावजूद अभी तक कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया है। इस बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यह स्पष्ट किया है कि रूस यूक्रेन के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व को निशाना बनाने से फिलहाल क्यों बच रहा है।

बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के बाद पत्रकारों से बातचीत में पुतिन ने कहा कि यूक्रेन के शीर्ष नेतृत्व पर हमला नहीं करना रूस की सोची-समझी नीति का हिस्सा है। उनके मुताबिक, अगर भविष्य में कीव बातचीत के लिए तैयार होता है तो शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए यूक्रेन की ओर से कुछ लोगों की जरूरत होगी।

बातचीत के लिए संपर्क जरूरी है: पुतिन

पुतिन ने कहा कि रूस को बातचीत के लिए ऐसे लोगों की जरूरत है जो इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकें। उन्होंने संकेत दिया कि यदि यूक्रेनी अधिकारी उन गतिविधियों को जारी रखते हैं, जिन्हें मॉस्को आतंकवादी कार्रवाई के तौर पर देखता है, तो रूस की ओर से जवाब दिया जाएगा।

रूसी राष्ट्रपति के मुताबिक, यदि कुछ नए लोग बातचीत की प्रक्रिया में वास्तविक और सकारात्मक योगदान देने की क्षमता रखते हैं, तो मॉस्को शांति वार्ता का दायरा बढ़ाने के लिए तैयार है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा समय में बातचीत की प्रक्रिया काफी हद तक ठहर गई है।

भरोसेमंद लोगों के साथ काम करना चाहता है रूस

पुतिन ने कहा कि रूस ऐसे लोगों के साथ बातचीत को प्राथमिकता देता है जिन्हें वह पहले से जानता है और जिन पर उसे भरोसा है। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी राजदूत स्टीव विटकोफ और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर का उदाहरण दिया।

पुतिन ने दोनों को ईमानदार और बातचीत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए गंभीर बताया। उनके बयान से संकेत मिलता है कि रूस युद्ध समाप्त करने के लिए परिचित और भरोसेमंद मध्यस्थों की भूमिका को महत्वपूर्ण मानता है।

सिर्फ युद्ध रोकना नहीं, पूरी तरह खत्म करना चाहते हैं

यूक्रेन संघर्ष को रोकने के लिए जुलाई में कजाख राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव की ओर से दिए गए प्रस्ताव पर भी पुतिन ने प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा कि रूस निश्चित तौर पर युद्ध को रोकना चाहता है, लेकिन उसका लक्ष्य केवल लड़ाई को अस्थायी रूप से रोकना नहीं है। पुतिन के अनुसार, मॉस्को यूक्रेन और यूरोप में लंबे समय तक कायम रहने वाली और व्यापक शांति चाहता है।

रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष के बीच पुतिन का यह बयान ऐसे समय आया है जब युद्ध को समाप्त करने के लिए संभावित बातचीत और मध्यस्थता को लेकर लगातार चर्चा चल रही है।

Janmashtami Special: द्वारका ट्रिप का बना रहे हैं प्लान तो जानें Train और Flight से पहुंचने का सबसे आसान तरीका

जन्माष्टमी का त्योहार देशभर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। इस खास मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मथुरा, वृंदावन और द्वारका जैसे धार्मिक स्थलों का रुख करते हैं। अगर इस बार आप भी जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के साथ एक छोटी और यादगार यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो गुजरात की द्वारका आपके लिए शानदार विकल्प हो सकती है।

द्वारका को भगवान श्रीकृष्ण की नगरी माना जाता है और यहां स्थित प्रसिद्ध द्वारकाधीश मंदिर में जन्माष्टमी के दौरान विशेष धार्मिक आयोजन और भारी भीड़ देखने को मिलती है। खास बात यह है कि द्वारका में मंदिरों के अलावा समुद्र तट और कई अन्य घूमने वाली जगहें भी हैं। दिल्ली से 2 से 3 दिन की यात्रा में आप यहां धार्मिक स्थलों के साथ कई पर्यटन स्थलों को भी कवर कर सकते हैं।

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द्वारका में किन जगहों पर जाएं?

द्वारका को केवल मंदिरों की नगरी समझना सही नहीं होगा। यहां धार्मिक महत्व वाली जगहों के साथ समुद्र, बीच और ऐतिहासिक स्थल भी देखने को मिलते हैं।

द्वारकाधीश मंदिर के अलावा आप नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, बेट द्वारका, रुक्मिणी देवी मंदिर और शिवराजपुर बीच को अपनी ट्रिप में शामिल कर सकते हैं।

सबसे पहले करें द्वारकाधीश मंदिर के दर्शन

द्वारका पहुंचने के बाद होटल में चेक-इन करने और थोड़ा आराम करने के बाद आप सबसे पहले द्वारकाधीश मंदिर के दर्शन के लिए जा सकते हैं। इसे जगत मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण भगवान श्रीकृष्ण के पोते वज्रनाभ ने कराया था। मंदिर ऊंचाई पर स्थित है और यहां पहुंचने के लिए 50 से ज्यादा सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।

आम तौर पर मंदिर में दर्शन का समय सुबह 7 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक और शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक बताया जाता है। हालांकि जन्माष्टमी के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है, इसलिए दर्शन के समय और व्यवस्था में बदलाव संभव है। यात्रा से पहले आधिकारिक जानकारी जरूर जांच लें।

द्वारकाधीश मंदिर में क्या देखें?

दर्शन के साथ मंदिर की वास्तुकला और आसपास के क्षेत्र को भी एक्सप्लोर किया जा सकता है।

  • द्वारकाधीश के रूप में भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन करें।
  • मंदिर के ऊंचे शिखर और बारीक नक्काशी को करीब से देखें।
  • परिसर और आसपास मौजूद छोटे मंदिरों के दर्शन करें।
  • अरब सागर के आसपास के मनोरम दृश्य का आनंद लें।
  • गोमती क्रीक के पास स्थित सुदामा सेतु भी देखा जा सकता है।

दिल्ली से द्वारका कैसे पहुंचे?

दिल्ली से द्वारका की दूरी काफी अधिक है, इसलिए यात्रा का माध्यम पहले से तय करना बेहतर रहेगा। आपके पास ट्रेन, फ्लाइट और रोड ट्रिप जैसे विकल्प मौजूद हैं।

ट्रेन से यात्रा

अगर आप कम बजट में यात्रा करना चाहते हैं, तो ट्रेन एक अच्छा विकल्प हो सकता है। दिल्ली से द्वारका की दूरी करीब 1325 से 1335 किलोमीटर के आसपास है। ट्रेन के रूट और सेवा के आधार पर सफर में लगभग 23 से 24 घंटे लग सकते हैं।

जन्माष्टमी के दौरान यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना रहती है, इसलिए टिकट काफी पहले बुक करना बेहतर होगा।

फ्लाइट से कैसे जाएं?

द्वारका का अपना कमर्शियल एयरपोर्ट नहीं है। यहां पहुंचने के लिए जामनगर या पोरबंदर एयरपोर्ट का विकल्प लिया जा सकता है।

पोरबंदर एयरपोर्ट द्वारका से करीब 136 किलोमीटर दूर है, जबकि जामनगर एयरपोर्ट की दूरी लगभग 105 किलोमीटर है। एयरपोर्ट पहुंचने के बाद बस, टैक्सी या कैब के जरिए द्वारका पहुंचा जा सकता है।

रोड ट्रिप का भी है विकल्प

अगर आपको लंबी ड्राइव पसंद है, तो दिल्ली से द्वारका के लिए रोड ट्रिप भी प्लान की जा सकती है। हालांकि यह यात्रा काफी लंबी और थकाऊ हो सकती है। सड़क मार्ग से दूरी करीब 1450 से 1460 किलोमीटर तक हो सकती है।

बेट द्वारका जरूर जाएं

द्वारकाधीश मंदिर के बाद बेट द्वारका को अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं। समुद्र के बीच स्थित इस द्वीप का धार्मिक महत्व काफी अधिक है।

मान्यता है कि बेट द्वारका का संबंध भगवान श्रीकृष्ण के निवास से रहा है। यहां विष्णु, शिव, लक्ष्मी-नारायण और हनुमान समेत कई देवी-देवताओं के मंदिर हैं।

यहां घूमने के लिए समय का ध्यान रखना जरूरी है। शाम देर से पहुंचने के बजाय दिन में ही यात्रा पूरी करने की योजना बनाएं और वापसी के साधन को पहले से सुनिश्चित कर लें।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के करें दर्शन

द्वारका यात्रा के दौरान नागेश्वर ज्योतिर्लिंग भी जरूर जा सकते हैं। इसे भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल माना जाता है।

नागेश्वर मंदिर के आसपास गोपी तालाब तीर्थ भी स्थित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसका संबंध भगवान श्रीकृष्ण और गोपियों से जोड़ा जाता है। धार्मिक पर्यटन पसंद करने वाले यात्रियों के लिए यह जगह काफी खास हो सकती है।

रुक्मिणी देवी मंदिर

द्वारका में रुक्मिणी देवी मंदिर भी प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। मंदिर की बाहरी दीवारों पर देवी-देवताओं और विभिन्न आकृतियों की सुंदर नक्काशी देखने को मिलती है।

मान्यता है कि यह मंदिर काफी प्राचीन है और इसका संबंध करीब 12वीं शताब्दी से माना जाता है। इसलिए धार्मिक महत्व के साथ-साथ इसकी वास्तुकला भी पर्यटकों को आकर्षित करती है।

शिवराजपुर बीच पर उठाएं समुद्र का मजा

अगर धार्मिक स्थलों के अलावा आप समुद्र और एडवेंचर का आनंद लेना चाहते हैं, तो शिवराजपुर बीच जा सकते हैं। यह द्वारका से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

यहां मौसम और संचालन की अनुमति के अनुसार स्नॉर्कलिंग, बनाना राइड और स्कूबा डाइविंग जैसी गतिविधियों का आनंद लिया जा सकता है।

बताए गए विवरण के अनुसार यहां घूमने का समय सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक है और प्रवेश के लिए करीब 30 रुपये का टिकट बताया जाता है। हालांकि यात्रा से पहले मौजूदा समय और शुल्क की जानकारी जरूर जांच लें।

जन्माष्टमी पर होटल पहले से बुक करें

जन्माष्टमी के दौरान द्वारका में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ सकती है। ऐसे में होटल की बुकिंग आखिरी समय तक टालना परेशानी पैदा कर सकता है।

कोशिश करें कि मंदिर के आसपास या ऐसी जगह होटल लें जहां से द्वारकाधीश मंदिर और दूसरे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक आसानी से पहुंचा जा सके। पहले से होटल बुक करने पर विकल्प भी ज्यादा मिल सकते हैं।

द्वारका में क्या खाएं?

गुजरात की यात्रा हो और स्थानीय खाने का स्वाद न लिया जाए, ऐसा कैसे हो सकता है। द्वारका में आप गुजराती थाली के साथ खमण, जलेबी-फाफड़ा और कई अन्य स्थानीय व्यंजनों का स्वाद ले सकते हैं।

अगर आप जन्माष्टमी के दौरान व्रत रखते हैं, तो होटल और स्थानीय भोजनालयों में फलाहार के विकल्प भी तलाश सकते हैं। हालांकि व्रत के भोजन की उपलब्धता पहले से पूछ लेना बेहतर रहेगा।

यात्रा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

  • जन्माष्टमी के दौरान द्वारकाधीश मंदिर में काफी भीड़ हो सकती है, इसलिए समय से पहले पहुंचने की कोशिश करें।
  • ट्रेन और फ्लाइट की टिकट पहले से बुक करें।
  • होटल की बुकिंग भी यात्रा से काफी पहले करा लें।
  • बेट द्वारका जाने से पहले वापसी के साधन की व्यवस्था सुनिश्चित कर लें।
  • समुद्र तट पर स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करें।
  • गर्मी और उमस को देखते हुए पर्याप्त पानी साथ रखें।
  • मंदिर में दर्शन के दौरान भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े निर्देशों का पालन करें।

2-3 दिन में ऐसे पूरा कर सकते हैं ट्रिप

अगर आपके पास केवल 2 से 3 दिन हैं, तो पहले दिन द्वारकाधीश मंदिर और आसपास के धार्मिक स्थलों को कवर किया जा सकता है। दूसरे दिन नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, बेट द्वारका और रुक्मिणी देवी मंदिर की यात्रा की जा सकती है। समय मिलने पर शिवराजपुर बीच को भी ट्रिप में शामिल किया जा सकता है।

इस तरह जन्माष्टमी के धार्मिक उत्सव के साथ आप द्वारका की आध्यात्मिक विरासत, समुद्र तट और स्थानीय संस्कृति का भी आनंद ले सकते हैं।

Operation Sindoor के बाद चर्चा में रहा J-10 अब उज्बेकिस्तान पहुंचा, पहली खेप में आए 6 फाइटर जेट

चीन के J-10 लड़ाकू विमान को लेकर पाकिस्तान और चीन की ओर से किए गए दावों के बीच अब उज्बेकिस्तान ने भी इस फाइटर जेट को अपने सैन्य बेड़े में शामिल कर लिया है। उज्बेकिस्तान ने हाल ही में अपनी वायुसेना में शामिल किए गए J-10CE विमानों की पहली खेप को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया।

1 सितंबर को उज्बेकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रसारित एक विशेष कार्यक्रम में पहली बार इन चीनी लड़ाकू विमानों की तस्वीरें और वीडियो सामने आए। बताया गया कि छह J-10CE विमान उज्बेकिस्तान के एक एयरबेस पर पहुंचे, जहां सैन्य परंपरा के तहत उन्हें वॉटर-कैनन सैल्यूट दिया गया।

उज्बेकिस्तान ने कितने J-10 खरीदे?

रिपोर्टों के मुताबिक, उज्बेकिस्तान ने चीन से कुल 24 J-10CE फाइटर जेट खरीदने का समझौता किया है। इस डील की अनुमानित कीमत करीब 1 अरब डॉलर बताई जा रही है।

अगर पूरी डील की रकम को केवल विमानों की संख्या से जोड़कर देखा जाए तो प्रति विमान लागत करीब 250 करोड़ रुपये से कम बैठती है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस पैकेज में मिसाइल, स्पेयर पार्ट्स, प्रशिक्षण और अन्य सैन्य उपकरण भी शामिल हैं या नहीं। इसलिए केवल कुल कीमत के आधार पर विमान की वास्तविक यूनिट कॉस्ट तय करना सही नहीं होगा।

उज्बेकिस्तान पाकिस्तान के बाद चीन के J-10 लड़ाकू विमान को खरीदने वाला दूसरा विदेशी देश बताया जा रहा है।

पाकिस्तान पहले ही कर चुका है J-10 का इस्तेमाल

पाकिस्तान ने वर्ष 2021 में चीन से J-10CE लड़ाकू विमानों की खरीद की थी। इसके बाद इन विमानों को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव के दौरान काफी चर्चा हुई।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान और चीन से जुड़े कुछ मीडिया नैरेटिव में दावा किया गया कि J-10 लड़ाकू विमान ने भारतीय रफाल को मार गिराया था। हालांकि, ऐसे दावों को लेकर सार्वजनिक रूप से निर्णायक और स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया।

चीनी सरकारी मीडिया के कुछ हिस्सों ने भी उस दौरान रफाल को नुकसान पहुंचाने से जुड़े दावे किए थे। बाद में इन दावों को लेकर रिपोर्टिंग और आधिकारिक बयानों में बदलाव भी देखने को मिला।

J-10CE की क्या है खासियत?

J-10 को चीन के Chengdu Aircraft Industry Group ने विकसित किया है। इसे चीन की वायुसेना में लंबे समय से इस्तेमाल किया जा रहा है। J-10CE इसका निर्यात संस्करण है।

यह एक सिंगल-इंजन मल्टीरोल फाइटर विमान है, जिसे हवा से हवा और हवा से जमीन पर विभिन्न प्रकार के मिशनों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

विमान में आधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और डेटा-लिंक जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। इसके साथ PL-10 जैसी शॉर्ट-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल और PL-15E जैसी बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल को जोड़े जाने की जानकारी सामने आती रही है।

रफाल की तुलना में कितना सस्ता है J-10?

J-10CE की कीमत को लेकर इसकी तुलना अक्सर पश्चिमी देशों के आधुनिक फाइटर जेट से की जाती है। खास तौर पर भारतीय रफाल और यूरोपीय यूरोफाइटर टाइफून के मुकाबले J-10 को कम लागत वाला विकल्प माना जाता है।

भारत ने फ्रांस से 36 रफाल विमानों की खरीद के लिए करीब 59 हजार करोड़ रुपये का समझौता किया था। हालांकि इस पैकेज में केवल विमान ही नहीं, बल्कि हथियार, प्रशिक्षण, रखरखाव और अन्य संबंधित व्यवस्थाएं भी शामिल थीं। इसलिए रफाल की कीमत की सीधी तुलना किसी दूसरे देश की विमान खरीद डील से करना पूरी तरह समान तुलना नहीं होगी।

रफाल की एक प्रमुख विशेषता इसकी मल्टीरोल क्षमता और लंबी दूरी के हथियारों के साथ ऑपरेशन करने की क्षमता है। इसे भारत की वायुसेना के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में शामिल किया जाता है।

बांग्लादेश भी J-10 में दिखा रहा दिलचस्पी

J-10CE को लेकर सिर्फ उज्बेकिस्तान ही चर्चा में नहीं है। बांग्लादेश की ओर से भी चीन के इस लड़ाकू विमान में रुचि दिखाए जाने की खबरें सामने आती रही हैं।

अगर बांग्लादेश भी इस विमान की खरीद करता है, तो दक्षिण और मध्य एशिया में चीन के J-10 प्लेटफॉर्म का प्रभाव और बढ़ सकता है।

भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों पर क्या असर?

उज्बेकिस्तान के चीन से J-10 खरीदने के बावजूद भारत और उज्बेकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंध सामान्य रूप से जारी हैं। दोनों देशों के बीच आर्थिक, सांस्कृतिक, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग होता रहा है।

हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौतों और सहयोग से जुड़े करारों पर चर्चा हुई। इनमें यूरेनियम, आर्थिक सहयोग, खनन, शिक्षा, संस्कृति और आयुर्वेद जैसे क्षेत्र शामिल रहे।

ऐसे में उज्बेकिस्तान की चीन से लड़ाकू विमान खरीद को सीधे भारत-विरोधी कदम के तौर पर देखना उचित नहीं होगा। किसी देश के रक्षा सौदे के पीछे कीमत, उपलब्ध तकनीक, सप्लाई टाइमलाइन, राजनीतिक संबंध और सैन्य जरूरत जैसे कई कारण हो सकते हैं।

J-10CE की उज्बेकिस्तान को बिक्री से इतना जरूर स्पष्ट होता है कि चीन अपने लड़ाकू विमानों के लिए विदेशी बाजार का विस्तार करने की कोशिश कर रहा है। वहीं, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सामने आए विभिन्न दावों ने इस विमान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा जरूर बढ़ा दी थी।

Health Update:AIIMS की नई तकनीक से एक डोनर की आंखों से कई मरीजों को मिलेगी रोशनी, जानिए क्या है ‘एक डोनर-कई मरीज’ मॉडल

दिल्ली स्थित AIIMS ने कॉर्निया की कमी से जूझ रहे मरीजों के लिए एक अहम पहल शुरू की है। एम्स के डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंटर फॉर ऑप्थैल्मिक साइंसेज के राष्ट्रीय नेत्र बैंक (NEB) में अब नई मेम्ब्रेन पीलिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तकनीक की मदद से एक डोनर से प्राप्त कॉर्निया के अलग-अलग हिस्सों को कई मरीजों के इलाज में इस्तेमाल किया जा सकेगा।

इस पहल का उद्देश्य एक ही डोनर के कॉर्नियल टिश्यू का अधिकतम उपयोग करना है, जिससे लैमेलर कॉर्नियल ट्रांसप्लांट और एलोजेनिक स्टेम सेल जैसी प्रक्रियाओं के लिए कई मरीजों को टिश्यू उपलब्ध कराया जा सके।

61 साल में 38 हजार से ज्यादा कॉर्निया जुटाए

राष्ट्रीय नेत्र बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 61 वर्षों में 38 हजार से अधिक कॉर्निया एकत्र किए जा चुके हैं। इनकी मदद से कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से प्रभावित 28 हजार से ज्यादा मरीजों का कॉर्निया प्रत्यारोपण किया गया है।

इसी अवधि में 500 से अधिक नेत्र विशेषज्ञों को कॉर्निया ट्रांसप्लांट से जुड़ी आधुनिक तकनीकों की ट्रेनिंग भी दी गई है। इससे देश में कॉर्नियल सर्जरी की विशेषज्ञता को बढ़ाने में मदद मिली है।

2025 में 2,167 कॉर्निया किए गए कलेक्ट

राष्ट्रीय नेत्र बैंक ने वर्ष 2025 में कुल 2,167 कॉर्निया प्राप्त किए। इनमें से 1,775 कॉर्निया यानी करीब 81.9 प्रतिशत हॉस्पिटल कॉर्नियल रिट्रीवल प्रोग्राम (HCRP) के माध्यम से मिले।

एम्स-दिल्ली का HCRP मॉडल अस्पतालों में होने वाली मृत्यु की सूचना और कॉर्नियल टिश्यू रिट्रीवल की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से जोड़ता है, जिससे जरूरतमंद मरीजों के लिए प्रत्यारोपण योग्य कॉर्नियल टिश्यू उपलब्ध कराया जा सके।

एम्स के अनुसार, राष्ट्रीय नेत्र बैंक लगातार चौथे साल 1,300 से अधिक कॉर्निया ट्रांसप्लांट करने में सफल रहा। वर्ष 2025 में 1,775 मरीजों का कॉर्निया प्रत्यारोपण किया गया और कॉर्निया उपयोग की दर लगभग 82 प्रतिशत रही।

‘एक डोनर, कई मरीज’ मॉडल पर जोर

कॉर्नियल टिश्यू की उपलब्धता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय नेत्र बैंक ने इस साल कई अस्पतालों के साथ सहयोग बढ़ाया है। इसके तहत अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एवं डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल, इंदिरा गांधी अस्पताल द्वारका और नॉर्दर्न रेलवे सेंट्रल अस्पताल के साथ समझौते किए गए हैं।

इसके अलावा बच्चों के कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए दूसरे आई बैंकों से टिश्यू उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। RayMed Ltd. के सहयोग से चल रही एक परियोजना इसी उद्देश्य से जुड़ी है।

आरपी सेंटर में ‘एक डोनर, कई मरीज’ मॉडल को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत कॉर्निया के अलग-अलग हिस्सों को जरूरत के मुताबिक अलग-अलग उपचार प्रक्रियाओं में इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है।

कॉर्निया प्रिजर्वेशन पर भी हो रहा काम

कॉर्निया को लंबे समय तक सुरक्षित और उपयोग योग्य बनाए रखने के लिए प्रिजर्वेशन मीडिया पर भी काम किया जा रहा है।

राष्ट्रीय अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम के सहयोग से आरपी सेंटर का ऑक्यूलर फार्माकोलॉजी विभाग ‘ExStorSol’ नामक कॉर्नियल प्रिजर्वेशन मीडिया तैयार कर रहा है।

वर्ष 2025-26 में इसके 4,652 से अधिक वायल देश के 24 राज्यों में मौजूद 130 आई बैंकों को उपलब्ध कराए गए।

ऑनलाइन सिस्टम से नेत्रदान की प्रक्रिया होगी तेज

एम्स में मृत्यु की सूचना देने के लिए 100 प्रतिशत ऑनलाइन सिस्टम भी शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य नेत्रदान से जुड़े काउंसलर और तकनीशियनों को समय रहते संबंधित परिवार तक पहुंचने में मदद करना है।

राष्ट्रीय नेत्र बैंक और ORBO ने नेत्रदान की प्रतिज्ञा के लिए ऑनलाइन सुविधा भी उपलब्ध कराई है। एम्स के अनुसार, पिछले एक साल में 100 लोगों ने राष्ट्रीय नेत्र बैंक के माध्यम से मृत्यु के बाद नेत्रदान करने की प्रतिज्ञा की।

नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों, कॉलेजों और रिहायशी इलाकों में भी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी अभियान के तहत 25 अगस्त 2026 को एम्स परिसर में ‘वॉक फॉर आई डोनेशन’ का आयोजन किया गया।

DMEK तकनीक से प्रभावित परत का ही ट्रांसप्लांट

आरपी सेंटर में स्यूचरलेस डेसमेट मेम्ब्रेन एंडोथीलियल केराटोप्लास्टी यानी DMEK जैसी आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

इस प्रक्रिया में पूरे कॉर्निया को बदलने के बजाय केवल उसकी प्रभावित कार्यात्मक परत का प्रत्यारोपण किया जाता है। इससे उपयुक्त मरीजों में अधिक लक्षित तरीके से उपचार किया जा सकता है।

केंद्र में केराटोकोनस और फुच्स एंडोथीलियल कॉर्नियल डिस्ट्रॉफी जैसी कॉर्नियल बीमारियों से जुड़े आनुवंशिक और सूजन संबंधी कारणों पर भी शोध किया जा रहा है।

Vision-Aid के साथ पांच साल की साझेदारी

वर्ष 2026 में एम्स ने Vision-Aid के साथ पांच साल की साझेदारी भी की है। इसके तहत दिल्ली-एनसीआर में 10 इंटीग्रेटेड विजन सेंटर स्थापित करने की योजना है।

इसके साथ ही बच्चों में सेरेब्रल विजुअल इम्पेयरमेंट (CVI) से जुड़ी जरूरतों के लिए एक रिसोर्स सेंटर विकसित करने की भी योजना बनाई गई है।

एम्स की इन पहलों का उद्देश्य केवल अधिक कॉर्निया जुटाना ही नहीं, बल्कि उपलब्ध कॉर्नियल टिश्यू का बेहतर इस्तेमाल, आधुनिक ट्रांसप्लांट तकनीकों को बढ़ावा देना और जरूरतमंद मरीजों तक आंखों के इलाज की सुविधाएं पहुंचाना है।

Sports News:भारत में होगी पहली महिला चैंपियंस ट्रॉफी, ICC ने किया बड़ा ऐलान; मुंबई और वडोदरा में होंगे मुकाबले

भारत को पहली बार आयोजित होने वाली आईसीसी महिला चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी मिल गई है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने टूर्नामेंट के आयोजन को लेकर आधिकारिक घोषणा कर दी है। महिला क्रिकेट के इस नए टूर्नामेंट का आयोजन अगले साल 14 से 28 फरवरी के बीच किया जाएगा।

आईसीसी महिला चैंपियंस ट्रॉफी के पहले संस्करण में कुल 6 टीमें हिस्सा लेंगी। भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका की टीमें टूर्नामेंट में खेलती नजर आएंगी।

टूर्नामेंट के मुकाबले मुंबई और वडोदरा में आयोजित किए जाएंगे। मुंबई का क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया और वडोदरा इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम इसके प्रमुख आयोजन स्थल होंगे।

राउंड-रॉबिन फॉर्मेट में होगा टूर्नामेंट

महिला चैंपियंस ट्रॉफी का पहला संस्करण राउंड-रॉबिन फॉर्मेट में खेला जाएगा। इसमें सभी 6 टीमें एक-दूसरे के खिलाफ एक-एक मुकाबला खेलेंगी।

लीग चरण समाप्त होने के बाद अंक तालिका में सबसे ज्यादा अंक हासिल करने वाली दो टीमें फाइनल में जगह बनाएंगी। दोनों टीमों के बीच खिताबी मुकाबला 28 फरवरी को खेला जाएगा।

इस टूर्नामेंट में पाकिस्तान की महिला क्रिकेट टीम हिस्सा नहीं लेगी। प्रतियोगिता में शामिल छह टीमों का चयन 6 जुलाई की कट-ऑफ तारीख तक आईसीसी महिला टी20 टीम रैंकिंग में उनकी स्थिति के आधार पर किया गया है।

पहले श्रीलंका को मिली थी मेजबानी

महिला चैंपियंस ट्रॉफी के पहले संस्करण का आयोजन पहले श्रीलंका में होना था। हालांकि, श्रीलंका क्रिकेट में गवर्नेंस से जुड़े सुधारों की प्रक्रिया के चलते मेजबानी भारत को सौंप दी गई है।

आईसीसी ने जुलाई में हुई अपनी वार्षिक कॉन्फ्रेंस के दौरान श्रीलंका क्रिकेट के प्रशासन और गवर्नेंस को लेकर चिंता जताई थी। इसके बाद आईसीसी बोर्ड की बैठकों में श्रीलंका के प्रतिनिधित्व पर भी रोक लगाई गई थी।

ऐसे में अब टूर्नामेंट की मेजबानी भारत करेगा। देश में पहले से मौजूद मजबूत क्रिकेट इंफ्रास्ट्रक्चर और महिला क्रिकेट की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए यह आयोजन भारतीय क्रिकेट के लिए भी खास माना जा रहा है।

जय शाह ने बताया महिला क्रिकेट के लिए नया अध्याय

आईसीसी चेयरमैन जय शाह ने महिला चैंपियंस ट्रॉफी की घोषणा को महिला क्रिकेट के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह टूर्नामेंट महिला क्रिकेट में एक नए और रोमांचक अध्याय की शुरुआत करेगा।

उनके मुताबिक, प्रतियोगिता दुनिया की शीर्ष टीमों को एक मंच पर लाएगी और प्रशंसकों को उच्च स्तर के क्रिकेट मुकाबले देखने को मिलेंगे।

भारत में होने वाले इस टूर्नामेंट से महिला क्रिकेट को देश में और अधिक लोकप्रियता मिलने की उम्मीद है। साथ ही मुंबई और वडोदरा जैसे क्रिकेट केंद्रों में अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट के बड़े मुकाबले देखने का मौका भी प्रशंसकों को मिलेगा।