जन्माष्टमी का त्योहार देशभर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। इस खास मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मथुरा, वृंदावन और द्वारका जैसे धार्मिक स्थलों का रुख करते हैं। अगर इस बार आप भी जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के साथ एक छोटी और यादगार यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो गुजरात की द्वारका आपके लिए शानदार विकल्प हो सकती है।
द्वारका को भगवान श्रीकृष्ण की नगरी माना जाता है और यहां स्थित प्रसिद्ध द्वारकाधीश मंदिर में जन्माष्टमी के दौरान विशेष धार्मिक आयोजन और भारी भीड़ देखने को मिलती है। खास बात यह है कि द्वारका में मंदिरों के अलावा समुद्र तट और कई अन्य घूमने वाली जगहें भी हैं। दिल्ली से 2 से 3 दिन की यात्रा में आप यहां धार्मिक स्थलों के साथ कई पर्यटन स्थलों को भी कवर कर सकते हैं।
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द्वारका में किन जगहों पर जाएं?
द्वारका को केवल मंदिरों की नगरी समझना सही नहीं होगा। यहां धार्मिक महत्व वाली जगहों के साथ समुद्र, बीच और ऐतिहासिक स्थल भी देखने को मिलते हैं।
द्वारकाधीश मंदिर के अलावा आप नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, बेट द्वारका, रुक्मिणी देवी मंदिर और शिवराजपुर बीच को अपनी ट्रिप में शामिल कर सकते हैं।
सबसे पहले करें द्वारकाधीश मंदिर के दर्शन
द्वारका पहुंचने के बाद होटल में चेक-इन करने और थोड़ा आराम करने के बाद आप सबसे पहले द्वारकाधीश मंदिर के दर्शन के लिए जा सकते हैं। इसे जगत मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण भगवान श्रीकृष्ण के पोते वज्रनाभ ने कराया था। मंदिर ऊंचाई पर स्थित है और यहां पहुंचने के लिए 50 से ज्यादा सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।
आम तौर पर मंदिर में दर्शन का समय सुबह 7 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक और शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक बताया जाता है। हालांकि जन्माष्टमी के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है, इसलिए दर्शन के समय और व्यवस्था में बदलाव संभव है। यात्रा से पहले आधिकारिक जानकारी जरूर जांच लें।
द्वारकाधीश मंदिर में क्या देखें?
दर्शन के साथ मंदिर की वास्तुकला और आसपास के क्षेत्र को भी एक्सप्लोर किया जा सकता है।
- द्वारकाधीश के रूप में भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन करें।
- मंदिर के ऊंचे शिखर और बारीक नक्काशी को करीब से देखें।
- परिसर और आसपास मौजूद छोटे मंदिरों के दर्शन करें।
- अरब सागर के आसपास के मनोरम दृश्य का आनंद लें।
- गोमती क्रीक के पास स्थित सुदामा सेतु भी देखा जा सकता है।
दिल्ली से द्वारका कैसे पहुंचे?
दिल्ली से द्वारका की दूरी काफी अधिक है, इसलिए यात्रा का माध्यम पहले से तय करना बेहतर रहेगा। आपके पास ट्रेन, फ्लाइट और रोड ट्रिप जैसे विकल्प मौजूद हैं।
ट्रेन से यात्रा
अगर आप कम बजट में यात्रा करना चाहते हैं, तो ट्रेन एक अच्छा विकल्प हो सकता है। दिल्ली से द्वारका की दूरी करीब 1325 से 1335 किलोमीटर के आसपास है। ट्रेन के रूट और सेवा के आधार पर सफर में लगभग 23 से 24 घंटे लग सकते हैं।
जन्माष्टमी के दौरान यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना रहती है, इसलिए टिकट काफी पहले बुक करना बेहतर होगा।
फ्लाइट से कैसे जाएं?
द्वारका का अपना कमर्शियल एयरपोर्ट नहीं है। यहां पहुंचने के लिए जामनगर या पोरबंदर एयरपोर्ट का विकल्प लिया जा सकता है।
पोरबंदर एयरपोर्ट द्वारका से करीब 136 किलोमीटर दूर है, जबकि जामनगर एयरपोर्ट की दूरी लगभग 105 किलोमीटर है। एयरपोर्ट पहुंचने के बाद बस, टैक्सी या कैब के जरिए द्वारका पहुंचा जा सकता है।
रोड ट्रिप का भी है विकल्प
अगर आपको लंबी ड्राइव पसंद है, तो दिल्ली से द्वारका के लिए रोड ट्रिप भी प्लान की जा सकती है। हालांकि यह यात्रा काफी लंबी और थकाऊ हो सकती है। सड़क मार्ग से दूरी करीब 1450 से 1460 किलोमीटर तक हो सकती है।
बेट द्वारका जरूर जाएं
द्वारकाधीश मंदिर के बाद बेट द्वारका को अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं। समुद्र के बीच स्थित इस द्वीप का धार्मिक महत्व काफी अधिक है।
मान्यता है कि बेट द्वारका का संबंध भगवान श्रीकृष्ण के निवास से रहा है। यहां विष्णु, शिव, लक्ष्मी-नारायण और हनुमान समेत कई देवी-देवताओं के मंदिर हैं।
यहां घूमने के लिए समय का ध्यान रखना जरूरी है। शाम देर से पहुंचने के बजाय दिन में ही यात्रा पूरी करने की योजना बनाएं और वापसी के साधन को पहले से सुनिश्चित कर लें।
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के करें दर्शन
द्वारका यात्रा के दौरान नागेश्वर ज्योतिर्लिंग भी जरूर जा सकते हैं। इसे भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल माना जाता है।
नागेश्वर मंदिर के आसपास गोपी तालाब तीर्थ भी स्थित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसका संबंध भगवान श्रीकृष्ण और गोपियों से जोड़ा जाता है। धार्मिक पर्यटन पसंद करने वाले यात्रियों के लिए यह जगह काफी खास हो सकती है।
रुक्मिणी देवी मंदिर
द्वारका में रुक्मिणी देवी मंदिर भी प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। मंदिर की बाहरी दीवारों पर देवी-देवताओं और विभिन्न आकृतियों की सुंदर नक्काशी देखने को मिलती है।
मान्यता है कि यह मंदिर काफी प्राचीन है और इसका संबंध करीब 12वीं शताब्दी से माना जाता है। इसलिए धार्मिक महत्व के साथ-साथ इसकी वास्तुकला भी पर्यटकों को आकर्षित करती है।
शिवराजपुर बीच पर उठाएं समुद्र का मजा
अगर धार्मिक स्थलों के अलावा आप समुद्र और एडवेंचर का आनंद लेना चाहते हैं, तो शिवराजपुर बीच जा सकते हैं। यह द्वारका से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
यहां मौसम और संचालन की अनुमति के अनुसार स्नॉर्कलिंग, बनाना राइड और स्कूबा डाइविंग जैसी गतिविधियों का आनंद लिया जा सकता है।
बताए गए विवरण के अनुसार यहां घूमने का समय सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक है और प्रवेश के लिए करीब 30 रुपये का टिकट बताया जाता है। हालांकि यात्रा से पहले मौजूदा समय और शुल्क की जानकारी जरूर जांच लें।
जन्माष्टमी पर होटल पहले से बुक करें
जन्माष्टमी के दौरान द्वारका में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ सकती है। ऐसे में होटल की बुकिंग आखिरी समय तक टालना परेशानी पैदा कर सकता है।
कोशिश करें कि मंदिर के आसपास या ऐसी जगह होटल लें जहां से द्वारकाधीश मंदिर और दूसरे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक आसानी से पहुंचा जा सके। पहले से होटल बुक करने पर विकल्प भी ज्यादा मिल सकते हैं।
द्वारका में क्या खाएं?
गुजरात की यात्रा हो और स्थानीय खाने का स्वाद न लिया जाए, ऐसा कैसे हो सकता है। द्वारका में आप गुजराती थाली के साथ खमण, जलेबी-फाफड़ा और कई अन्य स्थानीय व्यंजनों का स्वाद ले सकते हैं।
अगर आप जन्माष्टमी के दौरान व्रत रखते हैं, तो होटल और स्थानीय भोजनालयों में फलाहार के विकल्प भी तलाश सकते हैं। हालांकि व्रत के भोजन की उपलब्धता पहले से पूछ लेना बेहतर रहेगा।
यात्रा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
- जन्माष्टमी के दौरान द्वारकाधीश मंदिर में काफी भीड़ हो सकती है, इसलिए समय से पहले पहुंचने की कोशिश करें।
- ट्रेन और फ्लाइट की टिकट पहले से बुक करें।
- होटल की बुकिंग भी यात्रा से काफी पहले करा लें।
- बेट द्वारका जाने से पहले वापसी के साधन की व्यवस्था सुनिश्चित कर लें।
- समुद्र तट पर स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करें।
- गर्मी और उमस को देखते हुए पर्याप्त पानी साथ रखें।
- मंदिर में दर्शन के दौरान भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े निर्देशों का पालन करें।
2-3 दिन में ऐसे पूरा कर सकते हैं ट्रिप
अगर आपके पास केवल 2 से 3 दिन हैं, तो पहले दिन द्वारकाधीश मंदिर और आसपास के धार्मिक स्थलों को कवर किया जा सकता है। दूसरे दिन नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, बेट द्वारका और रुक्मिणी देवी मंदिर की यात्रा की जा सकती है। समय मिलने पर शिवराजपुर बीच को भी ट्रिप में शामिल किया जा सकता है।
इस तरह जन्माष्टमी के धार्मिक उत्सव के साथ आप द्वारका की आध्यात्मिक विरासत, समुद्र तट और स्थानीय संस्कृति का भी आनंद ले सकते हैं।


































