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वैश्विक सहकारिता के मंच पर भारत का परचम : ICA ग्लोबल बोर्ड में दिलीप संघाणी निर्वाचित ; पनामा में हुए चुनाव में मिली महत्वपूर्ण सफलता पर इफको कोरडेट फूलपुर के निदेशक राजदत्त पाण्डेय ने दी बधाई

लखनऊ/फूलपुर : भारतीय सहकारिता जगत के लिए गौरव, उत्साह और ऐतिहासिक उपलब्धि का क्षण है। देश के शीर्ष सहकारी नेताओं में शुमार, पूर्व सांसद एवं पूर्व मंत्री तथा इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी को अंतर्राष्ट्रीय सहकारी संघ (ICA) के ग्लोबल बोर्ड में निदेशक निर्वाचित किया गया है। पनामा में हुए चुनाव में मिली इस महत्वपूर्ण सफलता से भारतीय सहकारिता आंदोलन की वैश्विक पहचान को नई मजबूती मिली है।

दिलीप संघाणी के निर्वाचन पर इफको कोरडेट, फूलपुर के निदेशक राजदत्त पाण्डेय ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि इफको के साथ-साथ पूरे भारतीय सहकारिता परिवार के लिए गौरव का विषय है।

राजदत्त पाण्डेय ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सहकारी संघ जैसे वैश्विक मंच के ग्लोबल बोर्ड में भारत का प्रतिनिधित्व मिलना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय सहकारिता आज विश्व पटल पर अपनी मजबूत पहचान बना चुकी है। श्री संघाणी का निर्वाचन देश के करोड़ों किसानों, सहकारी संस्थाओं और सहकारिता से जुड़े लोगों के लिए भी गौरव का विषय है।

उन्होंने कहा कि दिलीप संघाणी का व्यक्तित्व और उनका सहकारिता के प्रति समर्पण भारतीय सहकारिता आंदोलन की महत्वपूर्ण शक्ति है। लंबे समय से उन्होंने किसानों, सहकारी संस्थाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों को मजबूती के साथ आगे बढ़ाया है। उनके अनुभव, दूरदर्शी सोच और नेतृत्व क्षमता ने सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

विश्व मंच पर और बुलंद होगी भारतीय सहकारिता की आवाज

राजदत्त पाण्डेय ने कहा कि ICA ग्लोबल बोर्ड में श्री संघाणी की मौजूदगी से वैश्विक सहकारी मंच पर भारत की आवाज और अधिक प्रभावी ढंग से उठेगी। भारतीय सहकारिता के अनुभव, किसानों की जरूरतों और ग्रामीण विकास के मॉडल को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर साझा करने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने कहा कि भारत में सहकारिता केवल आर्थिक गतिविधि का माध्यम नहीं, बल्कि गांव, किसान और ग्रामीण समाज को आत्मनिर्भर बनाने की एक मजबूत व्यवस्था है। आज जब सहकारिता को देश के आर्थिक और सामाजिक विकास से जोड़ा जा रहा है, ऐसे समय में भारतीय सहकारी नेतृत्व का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचना विशेष महत्व रखता है।

‘सहकार से समृद्धि’ के भारतीय संकल्प की वैश्विक गूंज

राजदत्त पाण्डेय ने कहा कि ‘सहकार से समृद्धि’ का भारतीय संकल्प अब वैश्विक सहकारी मंच पर अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज करा रहा है। श्री दिलीप संघाणी का ICA ग्लोबल बोर्ड में निर्वाचन इसी बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक चुनावी सफलता नहीं, बल्कि भारतीय सहकारिता की सामूहिक शक्ति, किसानों के विश्वास और सहकारी आंदोलन की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रतीक है।

राजदत्त पाण्डेय ने कहा कि श्री संघाणी के नेतृत्व और अनुभव से अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता जगत में भारत की भूमिका को और विस्तार मिलेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि श्री संघाणी वैश्विक मंच पर भारतीय सहकारिता की उपलब्धियों, किसानों के हितों और सहकारिता आधारित विकास की अवधारणा को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाएंगे।

इफको परिवार में खुशी का माहौल

दिलीप संघाणी के ICA ग्लोबल बोर्ड में निदेशक निर्वाचित होने पर इफको परिवार और सहकारिता जगत में खुशी का माहौल है। राजदत्त पाण्डेय ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर श्री दिलीप संघाणी को व्यक्तिगत रूप से तथा समस्त इफको परिवार एवं देश के सहकारिता जगत को हार्दिक बधाई दी।

उन्होंने कहा कि यह सफलता आने वाले समय में भारतीय सहकारिता को वैश्विक स्तर पर नई संभावनाओं और नई जिम्मेदारियों से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त करेगी।

समस्त सहकारिता परिवार और खासतौर से True News UP परिवार की तरफ से दिलीप संघाणी जी को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं।

हर बच्चे को सम्मान, स्नेह और आगे बढ़ने का अवसर मिले: दृष्टि के विशेष बच्चों के बीच पहुंचे डॉ. राजेश्वर सिंह ; ₹20 लाख की सहायता की प्रतिबद्धता, Digital TV और Sound System देने का संकल्प; 150 साड़ियों से सेवाकर्मियों का सम्मान

  • दृष्टि सामाजिक संस्थान में वर्तमान में 265 बच्चे निवासरत।
  • 143 कर्मचारियों की टीम बच्चों की सेवा और देखभाल में जुटी।
  • डॉ. राजेश्वर सिंह ने ₹20 लाख सहायता की प्रतिबद्धता जताई।
  • बच्चों के लिए Digital TV और Sound System देने का संकल्प।
  • भविष्य के शैक्षणिक एवं मनोरंजक भ्रमण में बस व्यवस्था में सहयोग का भरोसा।
  • सेवाकर्मियों के सम्मान में 150 साड़ियां प्रदान कीं।
  • CSR, ट्रस्टों और समाजसेवियों से संस्था से जुड़ने की अपील।

लखनऊ : सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने मंगलवार को वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रमुख समाजसेवी शरद प्रधान के साथ जानकीपुरम विस्तार स्थित दृष्टि सामाजिक संस्थान पहुंचकर विशेष देखभाल की आवश्यकता वाले बच्चों के साथ आत्मीय समय बिताया। इस दौरान उन्होंने बच्चों को फल और चॉकलेट वितरित किए, उनसे संवाद किया और संस्था में बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, देखभाल एवं पुनर्वास से जुड़ी व्यवस्थाओं और आवश्यकताओं की जानकारी ली।

दृष्टि सामाजिक संस्थान में पहुंचकर डॉ. राजेश्वर सिंह ने बच्चों के साथ समय बिताते हुए उनके बीच अपनापन और स्नेह का भाव साझा किया। उन्होंने कहा कि समाज की वास्तविक संवेदनशीलता और प्रगति का आकलन इस बात से किया जा सकता है कि वह उन बच्चों के लिए कितना खड़ा होता है, जिन्हें सामान्य बच्चों की तुलना में अधिक सहयोग, देखभाल और अवसरों की आवश्यकता होती है।

₹20 लाख की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता

डॉ. राजेश्वर सिंह ने दृष्टि सामाजिक संस्थान को ट्रस्ट के माध्यम से ₹20 लाख की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बच्चों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए संस्था को हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

बच्चों की शिक्षा, मनोरंजन और सामूहिक गतिविधियों को और बेहतर बनाने के लिए उन्होंने Digital TV और Sound System उपलब्ध कराने का संकल्प भी व्यक्त किया। इसके साथ ही भविष्य में बच्चों के शैक्षणिक एवं मनोरंजक भ्रमण के लिए आवश्यकता के अनुसार बसों की व्यवस्था में सहयोग का भरोसा दिया।

विशेष बच्चों की दिन-रात निःस्वार्थ सेवा में जुटे कर्मचारियों और सहयोगियों के योगदान को सम्मान देते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने 150 साड़ियां प्रदान कर सेवाकर्मियों का सम्मान भी किया।

265 बच्चों के लिए ‘दृष्टि’ बना घर और परिवार

वर्ष 1990 में स्वर्गीय श्रीमती नीता बहादुर द्वारा स्थापित दृष्टि सामाजिक संस्थान पिछले 35 वर्षों से निराश्रित, दिव्यांग, बहु-दिव्यांग एवं विशेष बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, देखभाल और पुनर्वास के लिए कार्य कर रहा है।

संस्था में वर्तमान में 265 बच्चे निवास कर रहे हैं, जिनकी देखभाल और सेवा के लिए 143 कर्मचारियों की टीम दिन-रात समर्पित है। संस्था से जुड़े अनेक बच्चों के लिए दृष्टि केवल एक सामाजिक संस्था नहीं, बल्कि उनका अपना घर और परिवार बन चुका है।

संस्था की व्यवस्थाओं और सेवाभाव को देखकर डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा, “सच्ची समाजसेवा क्या होती है, इसे समझने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को एक बार दृष्टि आकर इन बच्चों और उनकी सेवा में जुटे लोगों से अवश्य मिलना चाहिए।”

35 वर्षों की सेवा-साधना को डॉ. सिंह ने किया नमन

डॉ. राजेश्वर सिंह ने दृष्टि की संस्थापिका स्वर्गीय श्रीमती नीता बहादुर के सेवा-संकल्प को नमन करते हुए संस्था के अध्यक्ष धीरेश बहादुर, अथर्व बहादुर, शालू बहादुर, मैनेजर रोहित सहित पूरी टीम के समर्पण की सराहना की।

उन्होंने कहा कि लगातार 35 वर्षों तक विशेष बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और देखभाल की जिम्मेदारी निभाना सामान्य सेवा नहीं, बल्कि करुणा, संवेदना और मानवता की प्रेरणादायी साधना है।

उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थानों को केवल आर्थिक मदद की ही नहीं, बल्कि समाज के व्यापक सहयोग और सहभागिता की भी आवश्यकता होती है। सक्षम नागरिकों, सामाजिक संस्थाओं, ट्रस्टों और Corporate CSR संगठनों को आगे आकर इन बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में योगदान देना चाहिए।

‘सहयोग केवल धन से नहीं, समय और स्नेह से भी होता है’

डॉ. राजेश्वर सिंह ने सामाजिक संस्थाओं, ट्रस्टों, समाजसेवियों, सक्षम नागरिकों और Corporate CSR संगठनों से दृष्टि सामाजिक संस्थान के साथ जुड़ने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, “सहयोग केवल धन से नहीं होता- कोई शिक्षा दे सकता है, कोई स्वास्थ्य सुविधा, कोई संसाधन और कोई अपना समय व स्नेह। दृष्टि आइए, बच्चों से मिलिए और उनकी मुस्कान का हिस्सा बनिए।”

उन्होंने कहा कि संस्था की वर्तमान एवं दीर्घकालिक आवश्यकताओं की Consolidated Requirement List तैयार कर ट्रस्टों, CSR संगठनों और समाजसेवियों के साथ साझा करने का प्रयास किया जाएगा, जिससे संस्था को मिलने वाला सहयोग निरंतर, व्यवस्थित और आवश्यकता के अनुरूप हो सके।

‘कोई बच्चा स्नेह और अवसर से वंचित न रहे’

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति केवल आर्थिक विकास या भौतिक संसाधनों से तय नहीं होती, बल्कि इस बात से तय होती है कि समाज अपने उन बच्चों के लिए कितना संवेदनशील है, जिन्हें सबसे अधिक सहयोग की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, “किसी समाज की वास्तविक प्रगति इस बात से तय होती है कि वह अपने सबसे अधिक सहयोग की आवश्यकता वाले बच्चों को कितना सम्मान, सुरक्षा और अवसर देता है। जिम्मेदार नागरिक वही है, जो अपने परिवार के साथ समाज के बच्चों के भविष्य की भी चिंता करे।”

उन्होंने सभी से आह्वान किया कि सामूहिक प्रयासों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी बच्चा स्नेह, सम्मान, सुरक्षा और आगे बढ़ने के अवसर से वंचित न रहे।

अंसल होमबायर्स को ऐतिहासिक राहत : सरोजनी नगर विधायक की पहल पर सुशांत गोल्फ सिटी के LDA टेकओवर को कैबिनेट की मंजूरी ; डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का जताया आभार

लखनऊ। अंसल सुशांत गोल्फ सिटी के हजारों होमबायर्स को बड़ी राहत देते हुए माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने सुशांत गोल्फ सिटी को LDA द्वारा टेकओवर किए जाने तथा ₹2,912 करोड़ की Seed Capital उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है।

सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी का हृदय से आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने होमबायर्स की वर्षों पुरानी समस्या को गंभीरता से समझते हुए उनके हितों की रक्षा और न्यायोचित समाधान का आश्वासन दिया था। आज कैबिनेट की यह निर्णायक स्वीकृति मुख्यमंत्री जी की संवेदनशीलता, दृढ़ इच्छाशक्ति और जवाबदेह शासन का प्रमाण है।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने इस गंभीर विषय को लेकर 21 अगस्त 2026 को माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से व्यक्तिगत रूप से भेंट कर हजारों पीड़ित परिवारों की वेदना उनके समक्ष रखी थी और उनके अधिकारों एवं जीवनभर की कमाई की सुरक्षा के लिए प्रभावी समाधान का आग्रह किया था।

NCLT की अनुमति के पश्चात LDA योजना का टेकओवर करेगा। इस निर्णय से लगभग 5,000 होमबायर्स के हित सुरक्षित होंगे तथा वैध आवंटियों को नियमानुसार उनके भवन एवं भूखंड उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त होगा। वर्षों से अधूरी पड़ी सड़कें, पेयजल, सीवरेज, drainage, parks, railway overbridge और power substations जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी पूरा किया जाएगा। अकेले अधूरे development works पर लगभग ₹2,216.91 करोड़ व्यय होने का अनुमान है।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि सरोजनीनगर के अंसल होमबायर्स उनके लिए केवल आवंटी नहीं, बल्कि उनके अपने लोग और परिवार का हिस्सा हैं। उनके अधिकारों, जीवनभर की कमाई और आशियाने की रक्षा के लिए वे पहले भी पूरी शक्ति के साथ उनके साथ खड़े रहे हैं, आज भी खड़े हैं और अंतिम परिवार को न्याय एवं उसका वैध अधिकार मिलने तक निरंतर उनके साथ खड़े रहेंगे।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय केवल एक township के takeover तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हजारों परिवारों के विश्वास, अधिकार और भविष्य की रक्षा की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि आम नागरिक के हित, उसके अधिकार और उसकी मेहनत की कमाई की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

महासमाधि दिवस पर यूपी पर्यटन की बड़ी पहल : नीब करोरी बाबा के नाम से बना नया आध्यात्मिक सर्किट

  • नीब करोरी बाबा की विरासत को बड़ा सम्मान, यूपीएसटीडीसी ने शुरू किए 5 प्रकार के खास टूर पैकेज
  • दिल्ली-लखनऊ से चलेंगे बाबा नीब करोरी के विशेष टूर…2, 3 और 5 दिन के पैकेज शुरू
  • ₹12.93 करोड़ से संवरेंगे बाबा नीब करोरी से जुड़े स्थल, पर्यटन विभाग ने तैयार किया आध्यात्मिक ट्रेल
  • नीब करोरी बाबा की विरासत को संरक्षित कर देश-दुनिया तक पहुंचा रही सरकार: जयवीर सिंह

लखनऊ, 10 सितंबर 2026: श्रद्धेय संत नीब करोरी बाबा के ‘महासमाधि दिवस’ पर उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने उनकी आध्यात्मिक विरासत को देश-दुनिया के श्रद्धालुओं तक पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नीब करोरी बाबा के जीवन और विरासत से जुड़े प्रमुख स्थलों को जोड़कर आध्यात्मिक पर्यटन का नया सर्किट विकसित किया जा रहा है। इसी अवसर पर उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए ‘बाबा नीब करोरी’ के पांच विशेष टूर पैकेज भी शुरू किए हैं। इसके साथ ही फिरोजाबाद और फर्रुखाबाद में पर्यटन सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के विकास पर लगभग 12.93 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

फिरोजाबाद के अकबरपुर को बाबा नीब करोरी की जन्मस्थली के रूप में विकसित किया जा रहा है। फेज-1 के तहत पर्यटन सुविधाओं के विकास पर 8.65 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके अलावा 2.22 करोड़ रुपये की फेज-2 परियोजना का 60 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है और इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। अकबरपुर में 55.44 लाख रुपये की ग्रामीण पर्यटन परियोजना भी जल्द शुरू की जाएगी। वहीं फर्रुखाबाद स्थित नीब करोरी आश्रम के विकास पर 1.51 करोड़ रुपये की परियोजना पूरी हो चुकी है। इन सभी कार्यों का उद्देश्य बाबा से जुड़े स्थलों को बेहतर सुविधाओं के साथ एक व्यवस्थित आध्यात्मिक पर्यटन अनुभव में बदलना है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि नीब करोरी बाबा का ‘महासमाधि दिवस’ ऐसे संत को याद करने का अवसर है, जिनका आस्था, सादगी और सेवा का संदेश आज भी भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के लोगों को प्रेरित करता है। उन्होंने बताया वर्ष 2017 से पहले बाबा के जीवन और विरासत से जुड़े स्थलों की पर्यटन क्षमता पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार अब उनकी विरासत को संरक्षित करने और व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने का काम कर रही है। पर्यटन परियोजनाओं, बेहतर सुविधाओं और विशेष रूप से तैयार पर्यटन अनुभवों के माध्यम से बाबा की विरासत को जीवंत रखने के साथ प्रदेश में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के नए अवसर भी तैयार किए जा रहे हैं।

अकबरपुर में पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। यहां बहुद्देशीय सभागार, सांस्कृतिक ब्लॉक और बाबा के जीवन एवं आध्यात्मिक यात्रा पर आधारित आधुनिक प्रदर्शनी हॉल बनाया जा रहा है। इसके अलावा डाइनिंग हॉल, 50 लोगों की क्षमता वाली कैफेटेरिया, रसोई, शौचालय और करीब 60 लोगों के ठहरने के लिए डॉरमेट्री की सुविधा विकसित की जा रही है। फेज-2 में गार्ड रूम, सार्वजनिक उपयोग की सुविधाएं और पत्थर के रास्ते बनाए जा रहे हैं। वहीं ग्रामीण पर्यटन परियोजना के तहत प्रवेश द्वार, साइनेज, म्यूरल वॉल और पर्यटक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। फर्रुखाबाद के नीब करोरी आश्रम में भी यात्रियों के ठहरने के लिए भवन, मुख्य द्वार और सार्वजनिक उपयोग की सुविधाएं विकसित की जा चुकी हैं।

बाबा की आध्यात्मिक यात्रा से जुड़े प्रमुख स्थलों को अब ‘नीब करोरी बाबा सर्किट’ के रूप में जोड़ा जा रहा है। इस सर्किट में वृंदावन स्थित समाधि मंदिर शामिल है, जहां वर्ष 1973 में बाबा ने महासमाधि ली थी। इसके साथ फिरोजाबाद का अकबरपुर गांव, फर्रुखाबाद का नीब करोरी बाबा आश्रम धाम मंदिर और लखनऊ का प्रसिद्ध हनुमान सेतु मंदिर भी सर्किट का हिस्सा हैं। मान्यता है कि फर्रुखाबाद स्थित आश्रम में बाबा ने भूमिगत गुफा में करीब 12 वर्ष साधना की थी। इस तरह जन्मस्थली से लेकर समाधि स्थल तक बाबा की आध्यात्मिक यात्रा को एक ही पर्यटन मार्ग में जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

महासमाधि दिवस को खास बनाते हुए यूपीएसटीडीसी ने ‘बाबा नीब करोरी’ के पांच विशेष टूर पैकेज* शुरू किए हैं। जिसमें 5 दिन, 3 दिन और 2 दिन की यात्राएं शामिल हैं। पर्यटकों की मांग के आधार पर इन पैकेजों का संचालन दिल्ली और लखनऊ से किया जाएगा। इसका उद्देश्य देश और दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बाबा से जुड़े प्रमुख स्थलों की यात्रा को आसान बनाना है। टूर पैकेज की जानकारी के लिए पर्यटक +91 91490 99890 पर संपर्क कर सकते हैं या यूपीएसटीडीसी की वेबसाइट upstdc.co.in पर जानकारी ले सकते हैं।

अपर मुख्य सचिव एवं पर्यटन महानिदेशक अमृत अभिजात ने बताया कि नया ‘नीब करोरी बाबा सर्किट’ उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध आध्यात्मिक पर्यटन सर्किटों में एक महत्वपूर्ण नया आयाम जोड़ेगा। बाबा से जुड़े प्रमुख स्थलों को एक साथ जोड़ने से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए इन स्थानों तक पहुंच आसान होगी और उन्हें बाबा की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक तथा स्थानीय विरासत को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। उन्होंने बताया कि महासमाधि दिवस पर शुरू किए गए विशेष टूर पैकेज इस पहल को और उपयोगी बनाएंगे तथा बाबा की विरासत को भारत के साथ दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले लोगों तक पहुंचाने में मदद करेंगे।

सरोजनीनगर से शुरू हुई डिजिटल शिक्षा की पहल अब गांव-गांव तक पहुंची : 223 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी का विस्तार प्रस्तावित ; विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह ने सीएम योगी को दिया धन्यवाद

लखनऊ | 8 सितंबर 2026 : सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2022 में शुरू की गई डिजिटल शिक्षा और डिजिटल लाइब्रेरी की पहल अब व्यापक स्तर पर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच रही है। सरोजनीनगर विधायक ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ग्राम पंचायत स्तर तक डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा पहुंचाने की पहल का स्वागत करते हुए इसे ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि सरोजनीनगर में वर्ष 2022 में शुरू की गई डिजिटल शिक्षा की परिकल्पना को आज प्रदेश के गांवों तक विस्तार मिलता देखना अत्यंत संतोषजनक है।

25 जुलाई 2022 को शुरू हुआ था डिजिटल शिक्षा अभियान

विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के अनुसार, सरोजनीनगर में 25 जुलाई 2022 को ‘डिजिटल शिक्षा अभियान’ की शुरुआत की गई थी। इस अभियान के तहत क्षेत्र के 37 विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में 450 से अधिक कंप्यूटर उपलब्ध कराए गए।

इस पहल से 30 हजार से अधिक विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा संसाधनों का लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही सरोजनीनगर क्षेत्र में डिजिटल लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लासरूम और विद्यार्थियों के लिए आधुनिक अध्ययन सुविधाओं को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार प्रयास किए गए।

113 ग्राम पंचायतों में पहुंचीं किताबें और फर्नीचर

डॉ. राजेश्वर सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार अब डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा को ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचाने की दिशा में कार्य कर रही है। वर्तमान में 113 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी के लिए किताबें और फर्नीचर पहुंच चुके हैं, जबकि अगले चरण में आईटी उपकरण उपलब्ध कराए जाने की तैयारी है। डिजिटल लाइब्रेरी विकास योजना के तहत कुल 223 ग्राम पंचायतों को शामिल किए जाने का प्रस्ताव है।

ग्रामीण विद्यार्थियों को मिलेंगे आधुनिक अध्ययन संसाधन

उन्होंने कहा कि डिजिटल लाइब्रेरी केवल पुस्तकों तक सीमित सुविधा नहीं होगी, बल्कि यह ग्रामीण विद्यार्थियों को ऑनलाइन शैक्षणिक सामग्री, डिजिटल संसाधनों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से भी जोड़ेगी।

इससे छात्रों को गांवों में ही गुणवत्तापूर्ण अध्ययन का बेहतर वातावरण मिलेगा और उच्च गुणवत्ता वाले शैक्षणिक संसाधनों के लिए शहरों पर उनकी निर्भरता कम हो सकेगी।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि सरोजनीनगर में वर्ष 2022 में जिस डिजिटल शिक्षा की परिकल्पना को जनसहभागिता के साथ आगे बढ़ाया गया था, आज उसे उत्तर प्रदेश के गांव-गांव तक पहुंचते देखना संतोष का विषय है।

उन्होंने इस पहल को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच और सरकार के प्रयासों से आधुनिक शिक्षा के संसाधन अब ग्रामीण विद्यार्थियों के और करीब पहुंच रहे हैं।

शिक्षा, तकनीक और नवाचार में नए मानदंड स्थापित कर रहा उत्तर प्रदेश

विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश शिक्षा, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में नए मानदंड स्थापित कर रहा है। ग्राम पंचायतों तक डिजिटल लाइब्रेरी का विस्तार ग्रामीण युवाओं को समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि यह पहल ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना के अनुरूप ग्रामीण विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने और उनके भविष्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

डिजिटल लाइब्रेरी के माध्यम से गांवों के विद्यार्थी अब किताबों के साथ-साथ तकनीक, ऑनलाइन शिक्षा और आधुनिक अध्ययन संसाधनों तक भी आसान पहुंच बना सकेंगे।