लखनऊ/प्रयागराज। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) नैनी, प्रयागराज में आयोजित वार्षिक/अखिल भारतीय व्यावसायिक परीक्षा के कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए सॉल्वर गैंग के सदस्यों, संस्थान के प्रिंसिपल तथा अनुदेशकों समेत कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
STF के अनुसार, यह गिरोह परीक्षार्थियों से मोटी रकम लेकर उनकी जगह सॉल्वर बैठाकर परीक्षा पास कराने का संगठित खेल चला रहा था। सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई में सभी आरोपियों को राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान नैनी परिसर स्थित कौशल विकास भवन से गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार अभियुक्तों में शामिल हैं:
शिवम कुमार पुत्र जटाशंकर बिंद (सॉल्वर), निवासी बरवां शुक्लपुर, थाना मेजा, प्रयागराज।
रणविजय सिंह (सॉल्वर)
जय सिंह (सॉल्वर)
जितेन्द्र पटेल (सॉल्वर)
दिलीप कुमार पटेल (सॉल्वर)
अशोक कुमार (प्रिंसिपल)
रवि प्रकाश (परीक्षा प्रभारी/अनुदेशक)
फूल प्रकाश (अनुदेशक)
धीरज कुमार शर्मा (अनुदेशक)
राजेश कुमार (अनुदेशक)
राजकुमार मौर्य
कार्रवाई के दौरान STF ने आरोपियों के कब्जे से परीक्षा से संबंधित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज तथा परीक्षार्थियों से परीक्षा पास कराने के एवज में वसूली गई ₹5.10 लाख नकद बरामद किए हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह सुनियोजित तरीके से अभ्यर्थियों की जगह सॉल्वर बैठाकर परीक्षा पास कराने का काम कर रहा था, जिसमें संस्थान के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की भी भूमिका सामने आई है।
फिलहाल STF सभी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसी इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तथा इससे पहले कराई गई परीक्षाओं में संभावित गड़बड़ियों की भी जांच कर रही है। मामले में आगे की विधिक कार्रवाई जारी है।
लखनऊ, 28 जुलाई 2026। उत्तर प्रदेश के युवाओं को सिर्फ सरकारी योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति-निर्माण का सक्रिय साझेदार बनाने की दिशा में सरोजिनी नगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने बड़ी पहल की है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक विस्तृत नीति-पत्र भेजकर ‘मुख्यमंत्री युवा सलाहकार समिति (Chief Minister’s Youth Advisory Council–CM-YAC)’ के गठन का प्रस्ताव रखा है।
प्रस्ताव का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं और मुख्यमंत्री कार्यालय के बीच एक स्थायी एवं संस्थागत संवाद व्यवस्था तैयार करना है, जिसके माध्यम से युवाओं के अनुभव, सुझाव, नवाचार और भविष्य से जुड़ी चिंताओं को सीधे शासन और नीति-निर्माण तक पहुंचाया जा सके।
31 सदस्यीय समिति बनाने का प्रस्ताव
डॉ. राजेश्वर सिंह ने लगभग 31 सदस्यीय मुख्यमंत्री युवा सलाहकार समिति गठित करने का सुझाव दिया है। प्रस्ताव के मुताबिक समिति की अध्यक्षता मुख्यमंत्री द्वारा की जाए और इसमें 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के करीब 20 प्रतिभाशाली युवाओं को योग्यता एवं पारदर्शी चयन प्रक्रिया के आधार पर शामिल किया जाए।
समिति में UPSC और UPPSC के सफल अभ्यर्थियों, IIT-JEE और NEET के उत्कृष्ट प्रतिभागियों, IIT, IIM, AIIMS और NLU के विद्यार्थियों एवं पूर्व छात्रों के साथ-साथ ऑक्सफोर्ड, हार्वर्ड, कैम्ब्रिज, MIT और स्टैनफोर्ड जैसे वैश्विक संस्थानों के पूर्व छात्रों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है।
इसके अलावा युवा वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप उद्यमियों, नवप्रवर्तकों, राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों, युवा किसानों और आकांक्षी जिलों के प्रतिनिधियों को भी समिति में स्थान देने की बात कही गई है। प्रस्ताव में कम से कम 40 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की अनुशंसा भी की गई है।
रोजगार, शिक्षा और AI समेत इन मुद्दों पर होगी चर्चा
नीति-पत्र में युवाओं से जुड़े उन मुद्दों को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया गया है, जो तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था और तकनीक के दौर में उनके भविष्य को प्रभावित कर रहे हैं।
इनमें-
रोजगार और बदलता जॉब मार्केट
शिक्षा और उच्च शिक्षा
भर्ती परीक्षाएं
कौशल विकास
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
स्टार्टअप एवं उद्यमिता
मानसिक स्वास्थ्य
खेल
डिजिटल सुरक्षा और डिजिटल भविष्य
जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल हैं।
डॉ. सिंह का मानना है कि AI और तकनीकी बदलाव के साथ रोजगार की प्रकृति तेजी से बदल रही है। ऐसे में सरकार और युवाओं के बीच संवाद केवल किसी योजना या कार्यक्रम तक सीमित न होकर वर्षभर चलने वाली संस्थागत प्रक्रिया बनना चाहिए।
हर तीन महीने में बैठक और सालाना ‘मुख्यमंत्री युवा संवाद’
प्रस्ताव में समिति की हर तीन महीने में बैठक आयोजित करने का सुझाव दिया गया है। इसके साथ ही वर्ष में एक बार मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में ‘मुख्यमंत्री युवा संवाद’ आयोजित करने की बात कही गई है।
इसके अलावा प्रदेश के युवाओं को डिजिटल माध्यम से सीधे अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए ‘युवा सेतु–यूपी’ नाम से एक डिजिटल पोर्टल स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
इस पोर्टल के माध्यम से प्रदेश का कोई भी युवा अपने सुझाव, समस्याएं और नीतिगत विचार सरकार तक पहुंचा सकेगा।
हर साल जारी होगी ‘उत्तर प्रदेश युवा स्थिति रिपोर्ट’
प्रस्ताव के मुताबिक समिति हर वर्ष ‘उत्तर प्रदेश युवा स्थिति रिपोर्ट’ तैयार कर सकती है। इसके साथ मुख्यमंत्री कार्यालय को नियमित ‘Youth Pulse Report’ उपलब्ध कराने का भी सुझाव है।
इन रिपोर्टों के माध्यम से रोजगार, शिक्षा, कौशल विकास, भर्ती परीक्षाओं, मानसिक स्वास्थ्य, स्टार्टअप, AI, खेल और डिजिटल सुरक्षा जैसे विषयों पर युवाओं की वास्तविक स्थिति और प्राथमिकताओं का अध्ययन कर डेटा एवं प्रमाण आधारित नीति-सुझाव दिए जा सकेंगे।
विभागों को 60 दिन में जवाब देने का सुझाव
डॉ. राजेश्वर सिंह ने समिति की अनुशंसाओं को प्रभावी बनाने के लिए एक जवाबदेही व्यवस्था का भी सुझाव दिया है। इसके तहत संबंधित विभागों को समिति की सिफारिशों पर 60 दिनों के भीतर अपना उत्तर देने की व्यवस्था किए जाने की बात कही गई है।
जरूरत पड़ने पर समिति प्रदेश के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, ITI, कौशल विकास संस्थानों, कोचिंग केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर व्यापक युवा संवाद भी कर सकेगी।
‘युवा लाभार्थी नहीं, नीति-निर्माण के भागीदार बनें’
डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने प्रस्ताव में कहा कि किसी भी विकसित राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसके युवा होते हैं। युवाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी बनाए रखने के बजाय यदि उन्हें नीति-निर्माण का भागीदार बनाया जाए तो शासन अधिक उत्तरदायी, संवेदनशील और भविष्य-दृष्टि वाला बन सकता है।
उन्होंने कहा कि सहभागी शासन लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है और युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा तथा नवाचार को नीति-निर्माण से जोड़ना उत्तर प्रदेश के विकास को नई दिशा दे सकता है।
उत्तर प्रदेश के बाद केंद्र में भी राष्ट्रीय युवा सलाहकार परिषद का प्रस्ताव
डॉ. राजेश्वर सिंह ने इस पहल को केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रखा है। उन्होंने प्रस्ताव की एक प्रति केंद्रीय शिक्षा मंत्री, भारत सरकार को भी भेजी है।
केंद्र सरकार के स्तर पर ‘राष्ट्रीय युवा सलाहकार परिषद (National Youth Advisory Council–NYAC)’ के गठन पर विचार करने का अनुरोध किया गया है, ताकि देशभर के प्रतिभाशाली युवाओं को राष्ट्रीय नीति-निर्माण में भी संस्थागत भागीदारी का अवसर मिल सके।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री स्तर पर युवाओं को नीति-निर्माण से जोड़ने की दिशा में एक नया संस्थागत मॉडल तैयार हो सकता है, जिसे आगे अन्य राज्यों और केंद्र सरकार के स्तर पर भी अपनाया जा सकेगा।
लखनऊ। औरंगाबाद स्थित ओमेक्स सिटी के मनिपाल डिलाइट में आज जन संवाद एवं ‘चाय पर चर्चा’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिकों एवं स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। बैठक में क्षेत्रीय विधायक द्वारा कराए गए विकास कार्यों पर चर्चा के साथ-साथ स्थानीय समस्याओं और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से सुना गया।
कार्यक्रम का आयोजन बहन विभाग त्रिवेदी जी द्वारा किया गया। इस दौरान क्षेत्रवासियों ने सड़क, मूलभूत सुविधाओं सहित विभिन्न स्थानीय समस्याओं को सामने रखा। उपस्थित लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उनके समाधान के लिए आवश्यक प्रयास किए जाने का आश्वासन दिया गया।
आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बूथ सशक्तिकरण पर चर्चा
जन संवाद के दौरान आगामी विधानसभा चुनाव के संदर्भ में बूथ सशक्तिकरण को लेकर भी चर्चा हुई। जिन लोगों के अभी तक वोटर कार्ड नहीं बने हैं, उनके वोटर कार्ड बनवाने की प्रक्रिया में सहयोग करने तथा उन्हें मतदाता सूची में शामिल कराने पर जोर दिया गया।
लोगों को चुनावी प्रक्रिया में उनकी भूमिका और लोकतांत्रिक व्यवस्था में सक्रिय भागीदारी के महत्व के बारे में भी अवगत कराया गया। बैठक में बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने तथा अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने पर चर्चा हुई।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत हुआ वृक्षारोपण
कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत वृक्षारोपण भी किया गया। उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण और अधिक से अधिक पौधे लगाने का संकल्प लिया।
वरिष्ठ नागरिक का किया गया सम्मान
कार्यक्रम में ‘वरिष्ठ नागरिक सम्मान’ के तहत समिति के सबसे वरिष्ठ नागरिक को सम्मानित किया गया। इस दौरान वरिष्ठ नागरिकों के अनुभवों और सुझावों को समाज एवं क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
कार्यक्रम का वातावरण आत्मीय, सौहार्दपूर्ण और संवादपरक रहा। बैठक में लोकेश पांडेय, गौरव पाल, संजय कुमार, रविंद्र कुमार, संतोष यादव, सुमित, राजेश शेखावत, अशोक कुमार यादव, संजय कुमार यादव, दीपक सिंह, राणा मधुरेंद्र, विष्णु सिंह, मनोज सिंह, रागिनी, पुनीत बाजपेई, प्रिया सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के माध्यम से जहां स्थानीय लोगों को अपनी समस्याएं सीधे रखने का अवसर मिला, वहीं क्षेत्रीय विकास, मतदाता जागरूकता, बूथ सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर भी सामूहिक रूप से संवाद हुआ।
लखनऊ/बहराइच, 25 जुलाई 2026। वन्यजीव संरक्षण के साथ महिला सशक्तिकरण और वनकर्मियों की सुविधाओं को बढ़ावा देने की दिशा में सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने शनिवार को कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य में कई महत्वपूर्ण पहल कीं। इको अवेयरनेस सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने ‘Environment Warriors’ की आधिकारिक वेबसाइट का शुभारंभ किया। इसी दौरान उत्तर प्रदेश में पहली बार सात महिला वनकर्मियों को इलेक्ट्रिक स्कूटर सौंपे गए तथा वन प्रहरियों को मानसून और रात्रिकालीन गश्त के लिए 100 रेनकोट और 100 टैक्टिकल टॉर्च वितरित किए गए।
कार्यक्रम का आयोजन कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के DFO अपूर्व दीक्षित, IFS के मार्गदर्शन में Environment Warriors के तत्वावधान तथा श्री पीताम्बरा बगलामुखी सिद्ध पीठ उत्तराखंड ट्रस्ट, लखनऊ के सहयोग से किया गया।
‘जंगल की बेटियों’ को मिली ई-स्कूटर की ताकत
डॉ. राजेश्वर सिंह ने सात महिला वनकर्मियों को सात इलेक्ट्रिक स्कूटर सौंपते हुए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। पर्यावरण-अनुकूल इन वाहनों से महिला वनरक्षक दुर्गम वन क्षेत्रों में मौन और शून्य-उत्सर्जन गश्त कर सकेंगी। इससे एक ओर वन्यजीव संरक्षण की निगरानी मजबूत होगी, वहीं दूसरी ओर महिला वनकर्मियों को अपने दायित्वों के निर्वहन में अतिरिक्त सुविधा मिलेगी।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि सेवा और संकल्प के मार्ग पर चलते हुए प्रयास है कि समाज के हर वर्ग को सम्मान और सुविधा मिले। उन्होंने कहा कि वन सीमाओं की प्रहरी बेटियों को संसाधन उपलब्ध कराना पर्यावरण संरक्षण के साथ नारी सशक्तिकरण का भी महत्वपूर्ण कदम है।
वन प्रहरियों को 100 रेनकोट और 100 टॉर्च
मानसून और रात के समय जंगलों में गश्त करने वाले वनकर्मियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम में 100 रेनकोट और 100 टैक्टिकल टॉर्च भी वितरित किए गए। डॉ. सिंह ने वनकर्मियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि वर्ष के 300 से अधिक दिन जंगलों में बिताने वाले ये कर्मचारी वास्तव में प्रकृति के सबसे समर्पित प्रहरी हैं।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि जल्द ही पुरुष वनकर्मियों के लिए गश्त हेतु 10 ई-बाइक उपलब्ध कराई जाएंगी।
‘73 प्रतिशत वन्यजीव आबादी में गिरावट मानवता के लिए चेतावनी’
अपने संबोधन में डॉ. राजेश्वर सिंह ने WWF की Living Planet Report 2024 का उल्लेख करते हुए कहा कि 1970 से 2020 के बीच निगरानी की गई वन्यजीव आबादी के औसत आकार में 73 प्रतिशत की गिरावट दर्ज होना पूरी मानवता के लिए गंभीर चेतावनी है।
उन्होंने कहा कि मीठे पानी की प्रजातियों में 85 प्रतिशत, स्थलीय जीवों में 69 प्रतिशत और समुद्री जीवों में 56 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। यह केवल वन्यजीवों का संकट नहीं, बल्कि जल, भोजन, जलवायु संतुलन और मानव सभ्यता के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है।
डॉ. सिंह ने कहा कि कतर्नियाघाट, दुधवा और पीलीभीत जैसे जैव विविधता से समृद्ध क्षेत्रों के संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी भी बेहद आवश्यक है।
सोलर वाटर पंप से लेकर पौधरोपण तक संरक्षण पर जोर
डॉ. राजेश्वर सिंह ने बताया कि दुधवा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में अब तक करीब 10 सोलर वाटर पंप स्थापित किए जा चुके हैं और इस वर्ष कम से कम 25 अतिरिक्त सोलर वाटर पंप लगाए जाएंगे। उन्होंने वन्यजीव-मानव संघर्ष की चुनौती से निपटने के लिए जल स्रोतों और जंगल के भीतर आवश्यक संसाधनों को मजबूत करने पर जोर दिया।
उन्होंने प्रदेश में चलाए गए बड़े पैमाने के पौधरोपण अभियानों और दुधवा, कतर्नियाघाट तथा पीलीभीत जैसे संरक्षित क्षेत्रों के संरक्षण को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
घड़ियाल-मगरमच्छ संरक्षण केंद्र का किया निरीक्षण
कार्यक्रम के बाद डॉ. राजेश्वर सिंह ने कतर्नियाघाट के घड़ियाल, मगरमच्छ एवं कछुआ संरक्षण केंद्र का भ्रमण किया। उन्होंने केंद्र में चल रहे संरक्षण प्रयासों की सराहना करते हुए इसे विश्वस्तरीय संरक्षण मॉडल बताया। इस दौरान उन्होंने मैसेज वॉल पर प्रेरणादायी संदेश लिखकर हस्ताक्षर भी किए।
‘Environment Warriors’ अभियान को मिलेगा व्यापक स्वरूप
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि जैव विविधता की रक्षा और महिला सशक्तिकरण से जुड़े इस अभियान को आगे और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि वन विभाग की आवश्यकताओं को लेकर वन मंत्री और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ निरंतर समन्वय स्थापित कर हर संभव सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि Environment Warriors केवल एक अभियान नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास है। 500 से अधिक साइकिलों, डिजिटल क्लासरूम, महिला सशक्तिकरण की पहलों के बाद अब ई-स्कूटर जैसी सुविधाओं के माध्यम से अभियान को जमीनी स्तर पर और मजबूत किया जा रहा है।
कार्यक्रम में DFO अपूर्व दीक्षित, SDO शिवाकांत शर्मा, रेंज वनाधिकारी आशीष गौड़, अम्बालिका ग्रुप के चेयरमैन अम्बिका मिश्रा, हरीश सिद्धार्थ, डिप्टी रेंजर मयंक पाण्डेय, वन दरोगा राधेश्याम सहित वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
नई दिल्ली/लखनऊ। केंद्र सरकार ने शनिवार को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी में बड़ा बदलाव किया है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को देश का नया शिक्षा मंत्री बनाया गया है। उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। यह जिम्मेदारी उन्हें उनके मौजूदा मंत्रालयों के साथ दी गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार करने के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का प्रभार सौंपा।
प्रह्लाद जोशी फिलहाल उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के साथ नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। अब शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त दायित्व मिलने के बाद उनके पास केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
कौन हैं प्रह्लाद जोशी?
प्रह्लाद वेंकटेश जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा (पूर्व में बीजापुर) में हुआ था। उन्होंने हुबली में स्कूली शिक्षा पूरी की और इसके बाद केएस आर्ट्स कॉलेज, हुबली, जो कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ से संबद्ध है, से कला स्नातक यानी बीए की डिग्री हासिल की। छात्र जीवन से ही उनका झुकाव सामाजिक गतिविधियों और सार्वजनिक मुद्दों की ओर रहा।
सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों के जरिए सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हुए प्रह्लाद जोशी ने भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक स्तर पर अपनी राजनीतिक यात्रा को आगे बढ़ाया। कर्नाटक में पार्टी संगठन को मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
2004 में पहली बार पहुंचे लोकसभा
प्रह्लाद जोशी ने 2004 में धारवाड़ लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर पहली बार संसद में प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने लगातार चुनाव जीतते हुए धारवाड़ का प्रतिनिधित्व जारी रखा। 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 में जीत दर्ज कर वे लगातार पांचवीं बार लोकसभा सांसद बने।
कर्नाटक भाजपा में संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालने के साथ-साथ वे 2014 से 2016 तक पार्टी की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष भी रहे। उनकी पहचान भाजपा के अनुभवी संगठनात्मक नेताओं में होती है।
2019 में पहली बार बने केंद्रीय मंत्री
प्रह्लाद जोशी को 30 मई 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में पहली बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। उन्हें संसदीय कार्य मंत्रालय के साथ कोयला और खान मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई थी। 2024 में मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में उन्हें उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली।
अब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने के साथ प्रह्लाद जोशी के सामने देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को संभालने की जिम्मेदारी होगी। इनमें प्रतियोगी परीक्षाओं में भरोसा बहाल करना, परीक्षा प्रणाली में सुधार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति को आगे बढ़ाना और उच्च शिक्षा से जुड़े सुधार प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं।
पांच बार के सांसद से शिक्षा मंत्रालय तक का सफर
विजयपुरा में जन्मे प्रह्लाद जोशी ने छात्र जीवन से शुरू हुई सामाजिक सक्रियता से लेकर भाजपा संगठन, कर्नाटक की राजनीति और फिर राष्ट्रीय राजनीति तक लंबा सफर तय किया है। 2004 से लगातार धारवाड़ का प्रतिनिधित्व करने वाले जोशी अब देश की शिक्षा व्यवस्था की कमान संभालने वाले केंद्रीय मंत्री के रूप में नई भूमिका में नजर आएंगे।