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सारनाथ बना उत्तर प्रदेश का चौथा UNESCO विश्व धरोहर स्थल और भारत का 45वां : बौद्ध सर्किट को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय पर्यटन की नई रफ्तार

लखनऊ, 25 जुलाई 2026 : भगवान बुद्ध की प्रथम धर्मदेशना की पावन स्थली सारनाथ ने शनिवार को इतिहास रच दिया। करीब 28 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद सारनाथ को UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया गया। दक्षिण कोरिया के बुसान में चल रहे UNESCO विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। UNESCO के अनुसार यह सत्र 19 से 29 जुलाई 2026 तक बुसान में आयोजित हो रहा है।

सारनाथ के विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के साथ ही यह भारत का 45वां और उत्तर प्रदेश का चौथा UNESCO विश्व धरोहर स्थल बन गया है। इससे पहले उत्तर प्रदेश की UNESCO विश्व धरोहर पहचान मुख्य रूप से आगरा के ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी तक सीमित थी। सारनाथ के जुड़ने से प्रदेश की विश्व विरासत का दायरा पूर्वांचल तक पहुंच गया है और उत्तर प्रदेश की समृद्ध बौद्ध विरासत को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिली है।

सारनाथ को वर्ष 1998 में UNESCO की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया गया था। करीब तीन दशक तक चली प्रक्रिया के बाद मिली यह मान्यता न केवल वाराणसी और उत्तर प्रदेश, बल्कि भारत की बौद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए भी ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।

जहां बुद्ध ने पहली बार घुमाया था धर्मचक्र

सारनाथ केवल प्राचीन स्मारकों का समूह नहीं, बल्कि बौद्ध धर्म के इतिहास की वह पवित्र भूमि है जहां ज्ञान प्राप्ति के बाद भगवान बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश दिया और धर्मचक्र प्रवर्तन की शुरुआत की। इसी स्थान पर उन्होंने अपने पांच प्रथम शिष्यों को मध्यम मार्ग, करुणा और शांति का संदेश दिया तथा बौद्ध संघ की स्थापना की परंपरा आगे बढ़ी।

करीब ढाई हजार वर्षों से अधिक समय से सारनाथ बौद्ध आस्था, दर्शन और तीर्थ परंपरा का प्रमुख केंद्र रहा है। प्राचीन ग्रंथों में इसे ऋषिपत्तन सहित विभिन्न नामों से वर्णित किया गया है। यहां मौजूद प्राचीन स्थापत्य, स्तूप, विहारों के अवशेष और कलात्मक धरोहर बौद्ध धर्म के विकास की लंबी ऐतिहासिक यात्रा के साक्षी हैं।

चौखंडी स्तूप से धामेक स्तूप तक-इतिहास का जीवंत दस्तावेज

UNESCO की मान्यता में सारनाथ के महत्वपूर्ण पुरातात्विक अवशेष शामिल हैं। इनमें चौखंडी स्तूप और प्रमुख पुरातात्विक परिसर विशेष महत्व रखते हैं। चौखंडी स्तूप भगवान बुद्ध और उनके पांच प्रथम शिष्यों के मिलन की स्मृति से जुड़ा है।

वहीं सारनाथ के पुरातात्विक परिसर में धामेक स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, प्राचीन विहारों के अवशेष और अशोक स्तंभ जैसे महत्वपूर्ण अवशेष मौजूद हैं। ये स्मारक मिलकर यह बताते हैं कि किस तरह सारनाथ सदियों से बौद्ध धर्म, स्थापत्य, कला और आध्यात्मिक चिंतन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

जयवीर सिंह बोले- 28 वर्षों की प्रतीक्षा का मिला ऐतिहासिक प्रतिफल

उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने सारनाथ को UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने को प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उत्तर प्रदेश की बहुआयामी सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत विरासत को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के निरंतर प्रयासों का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध और रामायण की पावन भूमि उत्तर प्रदेश में जैन, सूफी और अन्य आध्यात्मिक परंपराओं की भी समृद्ध विरासत मौजूद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार सभी आस्था और विरासत स्थलों के संरक्षण एवं विकास को प्राथमिकता दे रही है।

जयवीर सिंह के मुताबिक, 28 वर्षों के इंतजार के बाद सारनाथ को मिली UNESCO की मान्यता उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट को वैश्विक स्तर पर नई पहचान और गति प्रदान करेगी। इससे प्रदेश की शांति, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक समावेशिता का संदेश दुनिया के व्यापक समुदाय तक पहुंचेगा।

सारनाथ की पहचान स्मारकों से कहीं आगे

सारनाथ के UNESCO नामांकन की तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली संरक्षण वास्तु विशेषज्ञ आभा नारायण लांबा के अनुसार सारनाथ की वैश्विक महत्ता केवल यहां मौजूद स्मारकों तक सीमित नहीं है।

सारनाथ वह स्थल है जहां भगवान बुद्ध ने प्रथम धर्मदेशना दी, बौद्ध संघ की स्थापना हुई और बौद्ध स्थापत्य की प्रारंभिक परंपराओं का विकास हुआ। सदियों से चली आ रही बौद्ध तीर्थ परंपरा यहां की जीवंत सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत को विशिष्ट बनाती है।

वैश्विक बौद्ध पर्यटन के नक्शे पर और मजबूत होगा UP

पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने इसे उत्तर प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि सारनाथ को मिली UNESCO मान्यता प्रदेश के पर्यटन स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों का परिणाम है।

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश को वैश्विक बौद्ध तीर्थाटन केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए फैम ट्रिप, ट्रैवल ट्रेड सहभागिता, बौद्ध उत्सवों और पर्यटक सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर दिया गया है। सारनाथ की UNESCO मान्यता इन प्रयासों को नई गति दे सकती है।

अमृत अभिजात ने कहा कि अक्टूबर 2025 में लखनऊ को UNESCO की ‘क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी’ की मान्यता मिलने के बाद सारनाथ की विश्व धरोहर सूची में एंट्री उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को और व्यापक बनाती है।

पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा लाभ

सारनाथ को UNESCO विश्व धरोहर का दर्जा मिलने का असर केवल सांस्कृतिक पहचान तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। इसकी वैश्विक ब्रांडिंग से विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ने, पर्यटकों के ठहराव की अवधि बढ़ने और वाराणसी-सारनाथ को उत्तर प्रदेश के व्यापक बौद्ध सर्किट से जोड़ने के अवसर बढ़ सकते हैं।

इसका लाभ स्थानीय होटल, गाइड, परिवहन, हस्तशिल्प, खान-पान और अन्य पर्यटन आधारित व्यवसायों तक पहुंचने की संभावना है। साथ ही, विश्व धरोहर का दर्जा सारनाथ के संरक्षण, प्रबंधन और पर्यटन सुविधाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप और मजबूत करने की जिम्मेदारी भी बढ़ाता है।

सारनाथ की नई पहचान, उत्तर प्रदेश की विरासत का विस्तार

सारनाथ का UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल होना वस्तुतः केवल एक ऐतिहासिक स्थल को मिली अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं है। यह भगवान बुद्ध के शांति, करुणा और मानवता के संदेश को वैश्विक मंच पर और मजबूती से पहुंचाने का अवसर भी है।

आगरा के ताजमहल से लेकर वाराणसी के सारनाथ तक उत्तर प्रदेश की विश्व विरासत यात्रा अब एक नए पड़ाव पर पहुंच गई है। 28 साल के इंतजार के बाद सारनाथ की वैश्विक पहचान ने उत्तर प्रदेश के विरासत और बौद्ध पर्यटन मानचित्र को नई ऊंचाई दे दी है।

सुंदरकांड पाठ के भव्य आयोजन से पत्रकार हितों की नई पहल : NUJ-UP की बैठक में स्वास्थ्य बीमा से लेकर धार्मिक यात्रा तक लिए गए कई अहम फैसले, संरक्षक अजय जायसवाल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर पत्रकारों व उनके परिजनों के लिए स्वास्थ्य बीमा की मांग उठाने का रखा प्रस्ताव

लखनऊ : पत्रकारों के हितों, आपसी सहयोग और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में सक्रिय पत्रकारों का संगठन “नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट- उत्तर प्रदेश” (NUJ-UP) की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक लखनऊ में आयोजित हुई।

संगठन के संरक्षक एवं वरिष्ठ पत्रकार अजय जायसवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में हाल ही में आयोजित सुंदरकांड पाठ के सफल आयोजन के लिए सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों का आभार व्यक्त किया गया। साथ ही कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए संगठन की आगामी गतिविधियों और पत्रकार हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा हुई।

बैठक की शुरुआत में सुंदरकांड पाठ के सफल आयोजन में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी सदस्यों एवं पदाधिकारियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी संगठन की सफलता उसके सदस्यों की सामूहिक सहभागिता और एकजुटता से ही संभव होती है। सुंदरकांड पाठ का आयोजन भी इसी सामूहिक भावना का उदाहरण रहा।

पत्रकारों और उनके परिवारों के स्वास्थ्य बीमा की मांग मुख्यमंत्री के समक्ष रखने का प्रस्ताव

बैठक में संगठन के संरक्षक एवं अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार अजय जायसवाल ने पत्रकारों के हित में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि पत्रकार और उनका परिवार समाज के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इस पेशे की चुनौतियों से लगातार जुड़े रहते हैं। ऐसे में पत्रकारों के साथ उनके परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा भी बेहद जरूरी है।

उन्होंने प्रस्ताव रखा कि नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधिमंडल जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर पत्रकारों एवं उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य बीमा की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग रखेगा।

अजय जायसवाल के इस प्रस्ताव का बैठक में मौजूद सदस्यों ने जोरदार स्वागत किया। सदस्यों ने माना कि पत्रकारों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा की व्यवस्था उनके और उनके परिवारों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

काम के तनाव से राहत के लिए पत्रकारों और परिवारों के साथ धार्मिक यात्रा का प्रस्ताव

बैठक में पत्रकारों की व्यस्त दिनचर्या और लगातार बढ़ते काम के दबाव को देखते हुए एक और सकारात्मक पहल का प्रस्ताव रखा गया। अजय जायसवाल ने पत्रकार बंधुओं और उनके परिवारों के लिए धार्मिक यात्रा आयोजित करने का सुझाव दिया, ताकि पत्रकार अपने परिवार के साथ कुछ समय सुकून से बिता सकें और काम के तनाव से बाहर निकलकर नई ऊर्जा प्राप्त कर सकें।

इस प्रस्ताव ने बैठक के माहौल को और भी सकारात्मक बना दिया। पत्रकारों के बीच इस प्रस्ताव को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया और सभी सदस्यों ने करतल ध्वनि के साथ प्रस्ताव का स्वागत करते हुए इसे पारित किया।

बैठक में कहा गया कि पत्रकारिता सिर्फ खबरों और जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं है। पत्रकारों के बीच आपसी आत्मीयता, पारिवारिक जुड़ाव और मानसिक सुकून भी उतना ही जरूरी है। ऐसे आयोजन पत्रकारों को पॉजिटिव एनर्जी देने के साथ संगठनात्मक एकजुटता को भी मजबूत करेंगे।

सदस्यों को वितरित किए गए संगठन के नवीन परिचय पत्र

बैठक के दौरान संगठनात्मक स्तर पर भी महत्वपूर्ण पहल की गई। संगठन के संरक्षक एवं बैठक के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार अजय जायसवाल ने उपस्थित सदस्यों को नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट उत्तर प्रदेश के नवीन परिचय पत्र वितरित किए।

नवीन परिचय पत्र प्राप्त करने वाले सदस्यों में उत्साह दिखाई दिया। इस अवसर पर कहा गया कि परिचय पत्र केवल संगठन की सदस्यता का प्रमाण नहीं, बल्कि पत्रकारों को संगठन से जोड़ने और उनकी संगठनात्मक पहचान को मजबूत करने का माध्यम भी है।

संगठन को मजबूत करने और पत्रकार हितों को प्राथमिकता देने पर जोर

बैठक में संगठन को और अधिक सक्रिय एवं मजबूत बनाने, सदस्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा पत्रकारों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि NUJ उत्तर प्रदेश पत्रकारों के अधिकारों और हितों की आवाज उठाने के साथ-साथ उनके लिए सकारात्मक और स्वस्थ वातावरण तैयार करने के लिए भी निरंतर प्रयास करता रहेगा।

बैठक में यह संदेश भी दिया गया कि संगठन की शक्ति उसके पदाधिकारियों से अधिक उसके सदस्यों की एकजुटता में है। इसलिए हर सदस्य की सहभागिता और सुझाव को महत्व दिया जाएगा।

इस अवसर पर संगठन के संरक्षक एवं वरिष्ठ पत्रकार अजय जायसवाल, कोषाध्यक्ष अनुपम चौहान, प्रदेश सचिव आलोक श्रीवास्तव, लखनऊ इकाई की अध्यक्ष मीनाक्षी मनु वर्मा, महामंत्री श्यामल त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष अभिनव श्रीवास्तव, सदस्य आलोक दीक्षित एवं अविनाश पांडेय के साथ-साथ सदस्य रोलैंड डिसूजा, सुरेन्द्र दुबे, योगेश श्रीवास्तव, संदीप कुमार शुक्ला, दिनेश कुमार त्रिपाठी एवं सिद्धांत सिंह के अलावा लखनऊ इकाई के प्रवक्ता/मीडिया प्रभारी शिव सागर सिंह चौहान भी मौजूद रहे।

बैठक का समापन आपसी सहयोग, संगठन की मजबूती और पत्रकार हितों के लिए एकजुट होकर काम करने के संकल्प के साथ हुआ।

लखनऊ : सरोजनीनगर के अलीनगर खुर्द में पुलिस- प्रशासन की नाक के नीचे RMC प्लांट और ओवरलोड वाहनों से सड़क हुई तबाह! ग्रामीण बोले- बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, करोड़ों की सड़कें टूट रही हैं, जिम्मेदार कौन ?

  • सरोजनी नगर तहसील के अलीनगर खुर्द गांव में RMC प्लांट से भारी वाहन गुजर रहे हैं, बच्चों की पढ़ाई में रोड़ा बना RMC प्लांट
  • ओवरलोड डंपरों से गांव की सड़कें तेजी से टूट रही हैं, राजस्व की भरी क्षति
  • ग्रामीणों का आरोप: करोड़ों की सड़कें गड्ढों में बदल गईं, कैसे बनेंगी अब सड़कें
  • स्कूल जाने वाले बच्चों और मरीजों को आवाजाही में भारी परेशानी हो रही है
  • बरसात के मौसम में भारी ट्रकों की आवाजाही से बने गड्ढों से दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है, पुलिस-प्रशासन के हस्तक्षेप की तरफ ग्रामीणों की नजरें टिकी
  • ग्रामीणों ने जांच और ओवरलोड वाहनों पर रोक के साथ ही RMC प्लांट के जांच की भी मांग की, ग्रामीण बोले – मुश्किल से बनती हैं सड़कें, तोड़ दिया
  • स्थानीय पुलिस और तहसील प्रशासन से RMC प्लांट संचालक और डंपरों के संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के साथ ही त्वरित गति से सड़क मरम्मत करवाने की उठी मांग

लखनऊ, 25 जुलाई 2026 : TRUE NEWS UP : राजधानी लखनऊ के सरोजनीनगर क्षेत्र स्थित अलीनगर खुर्द गांव में संचालित रेडी मिक्स कंक्रीट (RMC) प्लांट से जुड़े भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट में आने-जाने वाले ओवरलोड डंपर और ट्रांजिट मिक्सर गांव की संकरी सड़कों से दिन-रात गुजर रहे हैं, जिससे करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़कें कुछ ही समय में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाती हैं।

सरोजनीनगर के अलीनगर खुर्द गांव में स्थापित RMC प्लांट, ग्रामीणों ने प्लांट को हटाने की मांग की

स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्य मार्गों पर निगरानी होने के कारण भारी वाहन गांव के अंदर से निकलते हैं। परिणामस्वरूप अलीनगर खुर्द से आसपास के गांवों को जोड़ने वाली सड़कें जगह-जगह गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। बरसात के मौसम में इन गड्ढों में पानी भर जाने से दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि कमलापुर जूनियर स्कूल जाने वाले बच्चे रोज इसी सड़क से गुजरते हैं। कई बच्चे और दोपहिया चालक गड्ढों में गिरकर चोटिल हो चुके हैं। पांच मिनट का सफर अब एक घंटे तक का हो गया है। मरीजों, बुजुर्गों और किसानों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सड़क निर्माण पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तो ओवरलोड वाहनों के कारण सड़कें बार-बार टूटने से होने वाले सरकारी नुकसान की भरपाई कौन करेगा? क्या सड़कों को नुकसान पहुंचाने वालों से वसूली की जाएगी या फिर हर बार जनता के टैक्स का पैसा ही खर्च होता रहेगा?

ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि भारी वाहनों के लिए अलग मार्ग निर्धारित है तो गांव के अंदर से इनकी आवाजाही क्यों हो रही है? परिवहन विभाग, पुलिस, लोक निर्माण विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां इस समस्या पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं कर रही हैं?

स्थानीय लोगों ने संबंधित RMC प्लांट के संचालन और उससे जुड़े भारी वाहनों के संबंध में सक्षम अधिकारियों से जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि प्लांट सभी आवश्यक नियमों, अनुमतियों और पर्यावरणीय मानकों का पालन कर रहा है या नहीं। यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में ओवरलोड वाहनों की नियमित जांच होनी चाहिए, गांव के अंदर भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई जाए और सड़क को नुकसान पहुंचाने वाले वाहनों तथा जिम्मेदार एजेंसियों से क्षतिपूर्ति वसूली जाए। साथ ही सड़क का स्थायी पुनर्निर्माण, जल निकासी की व्यवस्था और स्ट्रीट लाइट को तत्काल चालू कराया जाए।

अब निगाहें प्रशासन पर हैं कि वह ग्रामीणों की शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र में किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं, ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेंगे।

लखनऊ: कांवड़ यात्रा और बाढ़ प्रबंधन पर मुख्यमंत्री योगी सख्त, अधिकारियों को दिए व्यापक निर्देश, श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, फेक न्यूज पर कड़ी कार्रवाई और बाढ़ प्रभावित 44 जिलों में राहत व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में कांवड़ यात्रा की तैयारियों, कानून-व्यवस्था, सोशल मीडिया निगरानी, राजस्व मामलों के निस्तारण तथा बाढ़ और सूखा प्रबंधन को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और सम्मान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कांवड़ संघों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखा जाए और यात्रा मार्गों पर किसी प्रकार की अव्यवस्था न होने दी जाए।

सरोजनीनगर में सम्पन्न हुआ बूथ अध्यक्ष सम्मान समारोह : 652 बूथ अध्यक्षों के सम्मान समारोह में पूर्व प्रदेश महामंत्री ने प्रत्येक बूथ पर 10 नए सदस्य जोड़ने का किया आह्वान, विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह बोले- राष्ट्र की मजबूती, सुशासन और सनातन की रक्षा के लिए भाजपा सरकार आवश्यक

लखनऊ, सरोजनीनगर। सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित भाजपा बूथ अध्यक्ष सम्मान समारोह में विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि राष्ट्र की एकता, सुरक्षा और सशक्त भविष्य के लिए उत्तर प्रदेश और केंद्र—दोनों स्तरों पर भारतीय जनता पार्टी की सरकार आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भाजपा की विचारधारा “राष्ट्र प्रथम” है और यही सोच देश को विकास, सुशासन और सांस्कृतिक मजबूती की दिशा में आगे बढ़ा रही है।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी), विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों तथा क्षेत्रवार असंतुलित जनसंख्या वृद्धि जैसे गंभीर विषयों पर प्रभावी नीति और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था बेहतर हुई है और विकास कार्य तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं, इसलिए सुशासन की इस यात्रा को निरंतर जारी रखना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र को मजबूत बनाए रखने के लिए सनातन संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और राष्ट्रीय चेतना को भी सुदृढ़ करना होगा। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए राज्य और केंद्र दोनों में भाजपा सरकार का होना जरूरी है।

डॉ. सिंह ने सरोजनीनगर के बूथ अध्यक्षों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि संगठन और चुनाव की वास्तविक शक्ति बूथ कार्यकर्ता होता है। उन्होंने कहा कि सरोजनीनगर के बूथ अध्यक्षों ने अनुशासन, समर्पण और अथक परिश्रम से संगठन को मजबूत करने का कार्य किया है, जिसके लिए वे सम्मान के पात्र हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाजपा के पूर्व प्रदेश महामंत्री एवं विधान परिषद सदस्य गोविंद शुक्ला ने प्रत्येक बूथ अध्यक्ष से कम से कम 10 नए सदस्य जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा कराए गए विकास एवं जनकल्याणकारी कार्यों की जानकारी बूथ स्तर पर प्रत्येक परिवार तक पहुंचाई जाए, ताकि संगठन और अधिक सशक्त हो सके।

इस अवसर पर सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र के सभी 652 बूथ अध्यक्षों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में महापौर सुषमा खर्कवाल, भाजपा महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी, जिला अध्यक्ष विजय मौर्य, पूर्व सांसद पूर्णिमा वर्मा, पूर्व विधायक सुरेश तिवारी, पुष्कर शुक्ला, राजेंद्र वाजपेयी, संजय लोधी, रामाशंकर त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।