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युवाओं को नीति-निर्माण का साझेदार बनाने की पहल : डॉ. राजेश्वर सिंह ने CM योगी को भेजा “मुख्यमंत्री युवा सलाहकार समिति” का प्रस्ताव ; रोजगार से AI और स्टार्टअप तक युवाओं की आवाज सीधे सरकार तक पहुंचाने की कवायद, 31 सदस्यीय समिति और ‘युवा सेतु-यूपी’ पोर्टल बनाने का सुझाव

लखनऊ, 28 जुलाई 2026। उत्तर प्रदेश के युवाओं को सिर्फ सरकारी योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति-निर्माण का सक्रिय साझेदार बनाने की दिशा में सरोजिनी नगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने बड़ी पहल की है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक विस्तृत नीति-पत्र भेजकर ‘मुख्यमंत्री युवा सलाहकार समिति (Chief Minister’s Youth Advisory Council–CM-YAC)’ के गठन का प्रस्ताव रखा है।

प्रस्ताव का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं और मुख्यमंत्री कार्यालय के बीच एक स्थायी एवं संस्थागत संवाद व्यवस्था तैयार करना है, जिसके माध्यम से युवाओं के अनुभव, सुझाव, नवाचार और भविष्य से जुड़ी चिंताओं को सीधे शासन और नीति-निर्माण तक पहुंचाया जा सके।

31 सदस्यीय समिति बनाने का प्रस्ताव

डॉ. राजेश्वर सिंह ने लगभग 31 सदस्यीय मुख्यमंत्री युवा सलाहकार समिति गठित करने का सुझाव दिया है। प्रस्ताव के मुताबिक समिति की अध्यक्षता मुख्यमंत्री द्वारा की जाए और इसमें 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के करीब 20 प्रतिभाशाली युवाओं को योग्यता एवं पारदर्शी चयन प्रक्रिया के आधार पर शामिल किया जाए।

समिति में UPSC और UPPSC के सफल अभ्यर्थियों, IIT-JEE और NEET के उत्कृष्ट प्रतिभागियों, IIT, IIM, AIIMS और NLU के विद्यार्थियों एवं पूर्व छात्रों के साथ-साथ ऑक्सफोर्ड, हार्वर्ड, कैम्ब्रिज, MIT और स्टैनफोर्ड जैसे वैश्विक संस्थानों के पूर्व छात्रों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है।

इसके अलावा युवा वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप उद्यमियों, नवप्रवर्तकों, राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों, युवा किसानों और आकांक्षी जिलों के प्रतिनिधियों को भी समिति में स्थान देने की बात कही गई है। प्रस्ताव में कम से कम 40 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की अनुशंसा भी की गई है।

रोजगार, शिक्षा और AI समेत इन मुद्दों पर होगी चर्चा

नीति-पत्र में युवाओं से जुड़े उन मुद्दों को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया गया है, जो तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था और तकनीक के दौर में उनके भविष्य को प्रभावित कर रहे हैं।

इनमें-

  • रोजगार और बदलता जॉब मार्केट
  • शिक्षा और उच्च शिक्षा
  • भर्ती परीक्षाएं
  • कौशल विकास
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
  • स्टार्टअप एवं उद्यमिता
  • मानसिक स्वास्थ्य
  • खेल
  • डिजिटल सुरक्षा और डिजिटल भविष्य

जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल हैं।

डॉ. सिंह का मानना है कि AI और तकनीकी बदलाव के साथ रोजगार की प्रकृति तेजी से बदल रही है। ऐसे में सरकार और युवाओं के बीच संवाद केवल किसी योजना या कार्यक्रम तक सीमित न होकर वर्षभर चलने वाली संस्थागत प्रक्रिया बनना चाहिए।

हर तीन महीने में बैठक और सालाना ‘मुख्यमंत्री युवा संवाद’

प्रस्ताव में समिति की हर तीन महीने में बैठक आयोजित करने का सुझाव दिया गया है। इसके साथ ही वर्ष में एक बार मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में ‘मुख्यमंत्री युवा संवाद’ आयोजित करने की बात कही गई है।

इसके अलावा प्रदेश के युवाओं को डिजिटल माध्यम से सीधे अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए ‘युवा सेतु–यूपी’ नाम से एक डिजिटल पोर्टल स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

इस पोर्टल के माध्यम से प्रदेश का कोई भी युवा अपने सुझाव, समस्याएं और नीतिगत विचार सरकार तक पहुंचा सकेगा।

हर साल जारी होगी ‘उत्तर प्रदेश युवा स्थिति रिपोर्ट’

प्रस्ताव के मुताबिक समिति हर वर्ष ‘उत्तर प्रदेश युवा स्थिति रिपोर्ट’ तैयार कर सकती है। इसके साथ मुख्यमंत्री कार्यालय को नियमित ‘Youth Pulse Report’ उपलब्ध कराने का भी सुझाव है।

इन रिपोर्टों के माध्यम से रोजगार, शिक्षा, कौशल विकास, भर्ती परीक्षाओं, मानसिक स्वास्थ्य, स्टार्टअप, AI, खेल और डिजिटल सुरक्षा जैसे विषयों पर युवाओं की वास्तविक स्थिति और प्राथमिकताओं का अध्ययन कर डेटा एवं प्रमाण आधारित नीति-सुझाव दिए जा सकेंगे।

विभागों को 60 दिन में जवाब देने का सुझाव

डॉ. राजेश्वर सिंह ने समिति की अनुशंसाओं को प्रभावी बनाने के लिए एक जवाबदेही व्यवस्था का भी सुझाव दिया है। इसके तहत संबंधित विभागों को समिति की सिफारिशों पर 60 दिनों के भीतर अपना उत्तर देने की व्यवस्था किए जाने की बात कही गई है।

जरूरत पड़ने पर समिति प्रदेश के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, ITI, कौशल विकास संस्थानों, कोचिंग केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर व्यापक युवा संवाद भी कर सकेगी।

‘युवा लाभार्थी नहीं, नीति-निर्माण के भागीदार बनें’

डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने प्रस्ताव में कहा कि किसी भी विकसित राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसके युवा होते हैं। युवाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी बनाए रखने के बजाय यदि उन्हें नीति-निर्माण का भागीदार बनाया जाए तो शासन अधिक उत्तरदायी, संवेदनशील और भविष्य-दृष्टि वाला बन सकता है।

उन्होंने कहा कि सहभागी शासन लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है और युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा तथा नवाचार को नीति-निर्माण से जोड़ना उत्तर प्रदेश के विकास को नई दिशा दे सकता है।

उत्तर प्रदेश के बाद केंद्र में भी राष्ट्रीय युवा सलाहकार परिषद का प्रस्ताव

डॉ. राजेश्वर सिंह ने इस पहल को केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रखा है। उन्होंने प्रस्ताव की एक प्रति केंद्रीय शिक्षा मंत्री, भारत सरकार को भी भेजी है।

केंद्र सरकार के स्तर पर ‘राष्ट्रीय युवा सलाहकार परिषद (National Youth Advisory Council–NYAC)’ के गठन पर विचार करने का अनुरोध किया गया है, ताकि देशभर के प्रतिभाशाली युवाओं को राष्ट्रीय नीति-निर्माण में भी संस्थागत भागीदारी का अवसर मिल सके।

यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री स्तर पर युवाओं को नीति-निर्माण से जोड़ने की दिशा में एक नया संस्थागत मॉडल तैयार हो सकता है, जिसे आगे अन्य राज्यों और केंद्र सरकार के स्तर पर भी अपनाया जा सकेगा।

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