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पीएम ई-विद्या के राष्ट्रीय मिशन को जन-जन तक पहुँचाने में सिद्धार्थनगर निभाएगा अहम भूमिका : एससीईआरटी प्रशिक्षण के बाद जनपद में शुरू होगी डिजिटल शिक्षा की एडवोकेसी ; धर्मेंद्र सिंह व प्रियंका वर्मा को मिली महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

सिद्धार्थनगर/लखनऊ : गुणवत्तापूर्ण एवं समान शिक्षा को प्रत्येक विद्यार्थी तक पहुँचाने के उद्देश्य से संचालित भारत सरकार के महत्वाकांक्षी पीएम ई-विद्या अभियान के प्रचार-प्रसार में सिद्धार्थनगर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एससीईआरटी, उत्तर प्रदेश द्वारा एनसीईआरटी के केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान (CIET) एवं BISAG-N के सहयोग से आयोजित पाँच दिवसीय प्रशिक्षण के बाद जनपद में पीएम ई-विद्या की एडवोकेसी को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है।

जनपद से धर्मेंद्र सिंह, असिस्टेंट टीचर (गणित), शिवपति इंटर कॉलेज, शोहरतगढ़ तथा प्रियंका वर्मा, सहायक अध्यापिका, प्राथमिक विद्यालय फूलपुर, बांसी ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण में डिजिटल कंटेंट, शैक्षिक वीडियो निर्माण, स्टूडियो प्रस्तुतीकरण, गुणवत्ता मूल्यांकन तथा डिजिटल शिक्षण के प्रभावी उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल डिजिटल कंटेंट तैयार करना ही नहीं, बल्कि उसकी पहुँच विद्यालयों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों तक सुनिश्चित करना भी है। पीएम ई-विद्या के माध्यम से विद्यार्थी निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक सामग्री डीटीएच चैनलों, यूट्यूब और अन्य डिजिटल माध्यमों से प्राप्त कर सकते हैं। इससे कठिन विषयों को समझने, छूटे हुए पाठों की भरपाई और स्व-अध्ययन में विशेष सहायता मिलती है।

अब सिद्धार्थनगर में विद्यालय स्तर पर शिक्षक अभिमुखीकरण, अभिभावक जागरूकता एवं सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से पीएम ई-विद्या के व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी इस राष्ट्रीय डिजिटल शिक्षा अभियान से लाभान्वित हो सकें।

ट्रंप के नए बर्थराइट सिटीजनशिप आदेश से भारतीयों की बढ़ी टेंशन, जानें किन बच्चों पर पड़ेगा असर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बर्थराइट सिटीजनशिप और अमेरिका में बच्चे को जन्म देने के उद्देश्य से की जाने वाली यात्राओं को लेकर नए कार्यकारी आदेश जारी किए हैं। इन फैसलों के बाद अमेरिका में रहने वाले भारतीयों के साथ-साथ अमेरिका जाने की योजना बना रहे भारतीय परिवारों के बीच भी चिंता बढ़ गई है।

हालांकि, नए आदेश का असर सभी भारतीयों पर एक जैसा नहीं पड़ेगा। खासतौर पर अमेरिका में वैध वीजा पर रहने वाले भारतीय पेशेवरों और केवल बच्चे की नागरिकता हासिल करने के उद्देश्य से अमेरिका जाने वाले लोगों के मामलों में बड़ा अंतर है।

ट्रंप ने जारी किए दो नए आदेश

ट्रंप प्रशासन के नए कदमों को मुख्य रूप से दो हिस्सों में समझा जा सकता है। पहला आदेश अमेरिका में तथाकथित ‘बर्थ टूरिज्म’ पर रोक लगाने से जुड़ा है, जबकि दूसरा कुछ विशेष परिस्थितियों में अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को नागरिकता देने के नियमों को सीमित करने की कोशिश करता है।

बर्थ टूरिज्म पर बढ़ेगी सख्ती

अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, बर्थ टूरिज्म उस स्थिति को कहा जाता है जब कोई गर्भवती महिला मुख्य रूप से अपने बच्चे को अमेरिका में जन्म देने और उसके लिए अमेरिकी नागरिकता हासिल करने के उद्देश्य से अमेरिका की यात्रा करती है।

नए आदेश के बाद ऐसे मामलों में विजिटर वीजा की जांच ज्यादा सख्त हो सकती है। यदि कांसुलर अधिकारी को यह संदेह होता है कि अमेरिका जाने का वास्तविक उद्देश्य बच्चे को जन्म देना है, तो वीजा आवेदन पर अतिरिक्त जांच हो सकती है और उसे अस्वीकार या लंबित भी रखा जा सकता है।

यात्रियों से उनकी यात्रा के उद्देश्य, आर्थिक स्थिति, अमेरिका में ठहरने की योजना और गर्भावस्था से संबंधित परिस्थितियों के बारे में अतिरिक्त जानकारी मांगी जा सकती है।

किन बच्चों की नागरिकता पर सवाल उठाया गया है?

दूसरे आदेश में कुछ विशेष परिस्थितियों को बर्थराइट सिटीजनशिप से अलग करने की कोशिश की गई है। इनमें कुछ विशेष श्रेणियों में आने वाले लोगों के अमेरिका में जन्मे बच्चों को शामिल किया गया है।

इनमें मुख्य रूप से ऐसे मामले बताए गए हैं—

  • विदेशी राजनयिकों और कुछ दूतावास कर्मचारियों के बच्चे।
  • ऐसे लोगों के बच्चे जिन्हें अमेरिकी कानून के तहत ‘एलियन एनिमी’ की श्रेणी में रखा गया हो।
  • आतंकवादी संगठनों से संबंधित व्यक्तियों के बच्चे।
  • विदेशी सरकारों के लिए लॉबिंग करने वाले कुछ व्यक्तियों के बच्चे।
  • धोखाधड़ी के जरिए नागरिकता हासिल करने से जुड़े मामलों में आने वाले बच्चे।
  • व्यावसायिक व्यवस्था के तहत अमेरिका में बच्चे को जन्म देने से जुड़े कुछ मामले।
  • अमेरिका के ऐसे क्षेत्रों में जन्मे बच्चे जहां संघीय कानून के तहत स्वतः अमेरिकी नागरिकता नहीं मिलती।

ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि ये प्रावधान सभी बच्चों की नागरिकता खत्म करने के बजाय सीमित और विशेष परिस्थितियों पर लागू किए जा रहे हैं।

पहले के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

बर्थराइट सिटीजनशिप को लेकर ट्रंप प्रशासन पहले भी बड़ा कदम उठा चुका है। पिछले आदेश में अमेरिका में अवैध रूप से या अस्थायी स्थिति में रह रहे विदेशी नागरिकों के अमेरिका में जन्मे बच्चों की नागरिकता को सीमित करने की कोशिश की गई थी।

इस मामले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के प्रयास को बड़ा कानूनी झटका दिया। अदालत की बहुमत राय में अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन में मौजूद नागरिकता के प्रावधानों को महत्वपूर्ण माना गया।

14वें संशोधन की लंबे समय से ऐसी व्याख्या की जाती रही है कि अमेरिकी जमीन पर जन्म लेने वाले अधिकांश बच्चे जन्म के साथ अमेरिकी नागरिकता हासिल करते हैं।

बर्थराइट सिटीजनशिप से जुड़ा 1898 का सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला भी इस बहस में अहम माना जाता है। उस मामले में अदालत ने अमेरिका में जन्मे एक बच्चे की नागरिकता को मान्यता दी थी, जबकि उसके माता-पिता चीनी मूल के अप्रवासी थे।

भारतीयों पर कितना असर पड़ेगा?

भारतीय नागरिकों पर नए आदेशों का प्रभाव उनकी अमेरिका में मौजूदगी और वहां जाने के उद्देश्य पर निर्भर करेगा। इसे तीन प्रमुख परिस्थितियों में समझा जा सकता है।

1. H-1B, L-1 और F-1 जैसे वैध वीजा वाले भारतीय

अमेरिका में कानूनी तौर पर काम या पढ़ाई कर रहे भारतीयों के लिए स्थिति अलग है।

H-1B, L-1, O-1 या F-1/OPT जैसी वैध इमिग्रेशन स्थिति में अमेरिका में रह रहे भारतीयों के बच्चों पर नए बर्थ टूरिज्म नियमों का वही असर नहीं होगा जो केवल बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से अमेरिका जाने वालों पर पड़ सकता है।

यदि कोई भारतीय प्रोफेशनल वैध इमिग्रेशन स्टेटस के साथ अमेरिका में रह रहा है और वहीं उसके बच्चे का जन्म होता है, तो मौजूदा संवैधानिक और कानूनी व्यवस्था के तहत बच्चे की नागरिकता का सवाल अलग तरीके से देखा जाता है।

इसलिए H-1B या अन्य वैध वीजा पर अमेरिका में रहने वाले भारतीय परिवारों के लिए यह कहना सही नहीं होगा कि नए आदेश के कारण उनके बच्चों की अमेरिकी नागरिकता अपने आप खत्म हो जाएगी।

2. B1/B2 वीजा पर अमेरिका जाने वाले भारतीय

सबसे ज्यादा सावधानी उन लोगों को बरतनी होगी जो विजिटर वीजा पर अमेरिका जाने की योजना बना रहे हैं।

अगर किसी गर्भवती महिला की यात्रा का मुख्य उद्देश्य अमेरिका में बच्चे को जन्म देना और बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाना है, तो नए नियमों के बाद वीजा जांच ज्यादा कड़ी हो सकती है।

कांसुलर अधिकारी यात्रा के उद्देश्य को लेकर सवाल पूछ सकते हैं और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त दस्तावेज भी मांगे जा सकते हैं।

इसका मतलब यह नहीं है कि हर गर्भवती महिला का B1/B2 वीजा स्वतः खारिज हो जाएगा। असली सवाल यात्रा के उद्देश्य और संबंधित परिस्थितियों का होगा।

3. बर्थ टूरिज्म की योजना बनाने वाले परिवार

ट्रंप प्रशासन की कार्रवाई का सीधा निशाना इसी श्रेणी पर है।

जो लोग खासतौर पर अमेरिका में बच्चे को जन्म देने और बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के मकसद से यात्रा करना चाहते हैं, उनके लिए भविष्य में वीजा हासिल करना और अमेरिका में प्रवेश करना पहले की तुलना में मुश्किल हो सकता है।

अमेरिकी अधिकारियों द्वारा यात्रा के उद्देश्य की जांच अधिक गंभीरता से किए जाने की संभावना है।

क्या भारतीय परिवारों के बच्चों की नागरिकता खत्म हो जाएगी?

यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नए आदेश को अमेरिका में रहने वाले हर भारतीय परिवार के बच्चे की नागरिकता खत्म करने वाला फैसला समझना सही नहीं होगा।

कानूनी तौर पर अमेरिका में रहने वाले भारतीयों और विशेष रूप से वैध वीजा या इमिग्रेशन स्टेटस वाले परिवारों की स्थिति बर्थ टूरिज्म के मामलों से अलग है।

सबसे बड़ा विवाद उन मामलों को लेकर है जहां कोई व्यक्ति अमेरिका में मुख्य रूप से बच्चे को जन्म देने और नागरिकता हासिल करने के उद्देश्य से प्रवेश करता है।

इसके अलावा, नए आदेशों की संवैधानिक वैधता पर भी सवाल उठ सकते हैं। यदि अदालतों में इन्हें चुनौती दी जाती है तो अंतिम स्थिति न्यायिक फैसलों पर निर्भर करेगी।

क्या नए आदेश भी अदालत में चुनौती दिए जा सकते हैं?

बर्थराइट सिटीजनशिप का मुद्दा पहले से ही अमेरिकी अदालतों में गंभीर संवैधानिक विवाद का विषय रहा है। इसलिए नए आदेशों के खिलाफ भी कानूनी चुनौती की संभावना बनी हुई है।

आलोचकों का तर्क है कि राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश के जरिए संविधान में दिए गए नागरिकता के अधिकार को सीमित नहीं किया जा सकता। वहीं ट्रंप प्रशासन का कहना है कि नए आदेश व्यापक रूप से जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने के बजाय कुछ विशेष और सीमित परिस्थितियों को नियंत्रित करते हैं।

यही अंतर आने वाले समय में अदालतों के सामने मुख्य कानूनी सवाल बन सकता है।

भारतीय परिवारों को क्या समझना चाहिए?

फिलहाल भारतीय परिवारों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि ट्रंप के नए आदेश को सभी भारतीयों के बच्चों की नागरिकता खत्म करने के फैसले के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

अमेरिका में वैध रूप से रह रहे भारतीय परिवार और केवल बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से अमेरिका जाने वाले परिवार दो अलग-अलग श्रेणियां हैं।

पहली श्रेणी के मामलों में मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था महत्वपूर्ण सुरक्षा देती है, जबकि दूसरी श्रेणी यानी बर्थ टूरिज्म पर ट्रंप प्रशासन की कार्रवाई का सीधा असर पड़ सकता है।

अंतिम कानूनी स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि नए आदेशों को अमेरिकी अदालतों में किस तरह चुनौती दी जाती है और अदालतें संविधान के 14वें संशोधन तथा मौजूदा नागरिकता कानूनों की व्याख्या किस तरह करती हैं।

Sports News:श्रीलंका XI के बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों को किया परेशान, स्पिनर्स ने संभाली टीम की कमान

कोलंबो में खेले जा रहे अभ्यास मैच के पहले दिन श्रीलंका XI के बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों के सामने शानदार प्रदर्शन किया। भारतीय तेज गेंदबाजों को शुरुआती सफलता नहीं मिल सकी और मोहम्मद सिराज तथा प्रसिद्ध कृष्णा पूरे दिन विकेट के लिए तरसते रहे। हालांकि, बाद के सत्रों में भारतीय स्पिनरों ने मोर्चा संभालते हुए टीम को मुश्किल स्थिति से बाहर निकाला।

श्रीलंका XI ने पहले दिन का खेल खत्म होने तक कई महत्वपूर्ण साझेदारियां कीं। भारत की ओर से रविंद्र जडेजा, कुलदीप यादव और मानव सुथार ने दो-दो विकेट हासिल किए, जबकि गुरनूर बरार को एक सफलता मिली।

भारतीय टीम की फील्डिंग भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। कप्तान शुभमन गिल की गैरमौजूदगी में टीम की अगुवाई कर रहे केएल राहुल से स्लिप में एक आसान कैच छूट गया। ऐसे में स्पिन गेंदबाजों की वापसी भारत के लिए काफी अहम साबित हुई।

श्रीलंका XI ने टॉस जीतकर चुनी बल्लेबाजी

एनसीसी ग्राउंड, कोलंबो में खेले जा रहे इस अभ्यास मुकाबले में श्रीलंका XI के कप्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम को उम्मीद थी कि सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा नई गेंद से जल्दी विकेट निकालेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

श्रीलंका XI के सलामी बल्लेबाज निशान फर्नांडो और रविन्दु रसंथा ने भारतीय तेज गेंदबाजों का डटकर सामना किया। दोनों ने पहले विकेट के लिए 110 रन की शानदार साझेदारी की।

निशान फर्नांडो ने 66 रन बनाए, जबकि रविन्दु रसंथा ने 71 रन की पारी खेली। फर्नांडो का विकेट रन आउट के रूप में गिरा और इसी के साथ भारत को पहली सफलता मिली।

रसंथा ने फिर पासिंदो के साथ जोड़े 61 रन

पहला विकेट गिरने के बाद भी श्रीलंका XI के बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा। रसंथा ने पासिंदो सूरियाबंदर के साथ मिलकर दूसरे विकेट के लिए 61 रन जोड़ दिए।

इस साझेदारी को रविंद्र जडेजा ने तोड़ा। उन्होंने पासिंदो को 35 रन के निजी स्कोर पर बोल्ड कर दिया।

इसके बाद मानव सुथार ने रविन्दु रसंथा को आउट करके भारत को बड़ी सफलता दिलाई। रसंथा ने अपनी 71 रन की पारी में 6 चौके और 1 छक्का लगाया।

पवन रत्नायके और कप्तान सोनल ने भी दिखाया दम

श्रीलंका XI की पारी को आगे बढ़ाने में पवन रत्नायके का भी योगदान रहा। उन्होंने 39 रन बनाए और अपनी पारी के दौरान दो छक्के लगाए। उन्हें तेज गेंदबाज गुरनूर बरार ने कैच आउट कराया।

इसके बाद श्रीलंका XI के कप्तान सोनल दिनशा ने मोर्चा संभाला। छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे सोनल ने भारतीय गेंदबाजों का सामना करते हुए शानदार अर्धशतक पूरा किया।

उन्होंने 5 चौकों और 1 छक्के की मदद से 52 रन बनाए। उनकी पारी का अंत मानव सुथार ने किया।

दिन के अंतिम हिस्से में भारतीय गेंदबाजों को लगातार दो सफलताएं मिलीं। इससे पहले रविंद्र जडेजा ने रमेश मेंडिस को अपना शिकार बनाया था।

स्पिनर्स ने बचाई भारत की स्थिति

पहले दिन भारतीय तेज गेंदबाज अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सके। मोहम्मद सिराज ने 13 ओवर में 44 रन दिए, लेकिन उनके खाते में कोई विकेट नहीं आया। प्रसिद्ध कृष्णा ने 8 ओवर में 32 रन खर्च किए और उन्हें भी सफलता नहीं मिली।

स्पिन विभाग में रविंद्र जडेजा ने 15 ओवर में 64 रन देकर 2 विकेट हासिल किए। कुलदीप यादव ने 18 ओवर में 76 रन देकर 2 विकेट झटके।

मानव सुथार भारत के सबसे किफायती गेंदबाजों में रहे। उन्होंने 13 ओवर में सिर्फ 33 रन देकर 2 विकेट हासिल किए। गुरनूर बरार ने 12 ओवर में 49 रन दिए और एक विकेट अपने नाम किया।

सारांश जैन को सफलता नहीं मिली। उन्होंने 11 ओवर की गेंदबाजी में 54 रन खर्च किए।

भारतीय गेंदबाजों का प्रदर्शन

  • रविंद्र जडेजा: 15 ओवर, 64 रन, 2 विकेट
  • कुलदीप यादव: 18 ओवर, 76 रन, 2 विकेट
  • मानव सुथार: 13 ओवर, 33 रन, 2 विकेट
  • गुरनूर बरार: 12 ओवर, 49 रन, 1 विकेट
  • मोहम्मद सिराज: 13 ओवर, 44 रन, 0 विकेट
  • प्रसिद्ध कृष्णा: 8 ओवर, 32 रन, 0 विकेट
  • सारांश जैन: 11 ओवर, 54 रन, 0 विकेट

पहले दिन के प्रदर्शन से साफ है कि भारतीय तेज गेंदबाजों को श्रीलंका XI के बल्लेबाजों ने काफी परेशान किया। हालांकि, स्पिनरों ने लगातार विकेट निकालकर भारत को मैच में बनाए रखा। दूसरे दिन भारतीय टीम की नजरें श्रीलंकाई बल्लेबाजों को जल्द समेटने और इसके बाद अपनी बल्लेबाजी की तैयारी पर होंगी।

गोविंदा के साथ दिखीं कोमल रानी स्वर्णकार, अफेयर की चर्चाओं ने फिर पकड़ा जोर; सुनीता आहूजा का बयान वायरल

बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता गोविंदा एक बार फिर अपनी फिल्मों से ज्यादा निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं। लंबे समय से उनकी पत्नी सुनीता आहूजा के साथ रिश्ते को लेकर तरह-तरह की खबरें सामने आती रही हैं। इसी बीच अभिनेता को उभरती हुई अभिनेत्री कोमल रानी स्वर्णकार के साथ मुंबई एयरपोर्ट पर देखा गया, जिसके बाद दोनों के रिश्ते को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

हालांकि, गोविंदा और कोमल रानी स्वर्णकार की ओर से उनके रिश्ते को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में चल रही बातों को फिलहाल सिर्फ अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है।

एयरपोर्ट पर साथ दिखे गोविंदा और कोमल

गोविंदा और कोमल रानी स्वर्णकार की कुछ तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें दोनों मुंबई एयरपोर्ट पर साथ दिखाई दे रहे हैं। तस्वीरों में कोमल सफेद रंग की ड्रेस, खुले बाल और सनग्लासेस में नजर आ रही हैं।

वहीं गोविंदा कैजुअल आउटफिट और काले चश्मे में दिखाई दिए। दोनों को एक साथ देखकर सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके बीच कथित रिश्ते को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

चार साल से अफेयर की चर्चा?

गोविंदा के साथ कोमल की तस्वीरें सामने आने के बाद एक बार फिर उस कथित रिश्ते की चर्चा होने लगी है, जिसका जिक्र पिछले कुछ समय से अलग-अलग रिपोर्ट्स में किया जाता रहा है।

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि गोविंदा और कोमल कथित तौर पर करीब चार साल से एक-दूसरे के संपर्क में हैं। यह भी चर्चा है कि दोनों हाल ही में उत्तराखंड में आयोजित एक कार्यक्रम में साथ पहुंचे थे।

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और न ही गोविंदा या कोमल ने सार्वजनिक रूप से अपने रिश्ते को लेकर कोई बयान दिया है।

सुनीता आहूजा के पुराने बयान की फिर चर्चा

गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा पहले भी अभिनेता की निजी जिंदगी और कथित एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर को लेकर खुलकर बात कर चुकी हैं। जनवरी 2026 में एक इंटरव्यू के दौरान उनसे ‘कोमल’ नाम को लेकर सवाल किया गया था।

बातचीत के दौरान सुनीता ने इस नाम को लेकर नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने संकेत दिया था कि उनकी जिंदगी में ‘कोमल’ नाम की किसी महिला को लेकर उन्हें आपत्ति रही है। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर उन्हें पति के किसी कथित रिश्ते से जुड़ा कोई पुख्ता सबूत मिलता है तो वह इसे आसानी से माफ नहीं करेंगी।

इसी पुराने बयान को अब गोविंदा और कोमल रानी स्वर्णकार की नई तस्वीरों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि सुनीता के पुराने बयान में जिस ‘कोमल’ का जिक्र था, वह कोमल रानी स्वर्णकार ही थीं या कोई और।

कौन हैं कोमल रानी स्वर्णकार?

कोमल रानी स्वर्णकार मनोरंजन जगत में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही एक नई अभिनेत्री हैं। वह उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखती हैं और जल्द ही बॉलीवुड में अपना डेब्यू करने की तैयारी में हैं।

खबरों के मुताबिक, कोमल फिल्म ‘रूपा’ के जरिए हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने वाली हैं। इस प्रोजेक्ट से गोविंदा का नाम भी जुड़ा हुआ है और उन्हें फिल्म में लॉन्च करने की बात सामने आई है।

फिल्म की घोषणा से जुड़े एक कार्यक्रम में गोविंदा ने कोमल की तारीफ भी की थी। उन्होंने उनके सफल करियर की कामना करते हुए कहा था कि वह उम्मीद करते हैं कि कोमल के साथ कई सफल फिल्मों में काम करने का मौका मिले।

तस्वीरों के बाद फिर गरमाया मामला

गोविंदा और कोमल रानी स्वर्णकार की एयरपोर्ट तस्वीरों के सामने आने के बाद अभिनेता की निजी जिंदगी एक बार फिर सुर्खियों में है। हालांकि, सिर्फ साथ में नजर आने या तस्वीरें सामने आने से किसी रिश्ते की पुष्टि नहीं होती।

फिलहाल गोविंदा और कोमल की तरफ से अफेयर की खबरों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में दोनों के रिश्ते को लेकर चल रही चर्चाओं को तब तक अटकल ही माना जाएगा, जब तक दोनों में से कोई इस बारे में स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं कहता।

Sports News:5000वें वनडे के साथ क्रिकेट ने रचा इतिहास, स्कॉटलैंड और कनाडा की भिड़ंत बनी यादगार; जानिए पहले ODI की कहानी

वनडे क्रिकेट ने एक और बड़ा ऐतिहासिक पड़ाव पार कर लिया है। आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप लीग-2 (2023-27) के तहत स्कॉटलैंड और कनाडा के बीच खेला जा रहा मुकाबला पुरुष वनडे क्रिकेट का 5000वां मैच बन गया है। 7 अगस्त को डंडी के फोर्थिल ग्राउंड पर खेले जा रहे इस मुकाबले के साथ वनडे क्रिकेट के करीब साढ़े पांच दशक लंबे सफर में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया।

ऐतिहासिक मुकाबले में कनाडा ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। दोनों टीमों के लिए यह मुकाबला नियमित लीग मैच होने के बावजूद वनडे क्रिकेट के इतिहास में इसका महत्व काफी खास है।

1971 में हुई थी वनडे क्रिकेट की शुरुआत

वनडे क्रिकेट का पहला आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 5 जनवरी 1971 को ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में खेला गया था।

यह मुकाबला मौजूदा वनडे क्रिकेट से काफी अलग था। दोनों टीमों को 40-40 ओवर खेलने थे। उस समय एक ओवर में 6 गेंदों की जगह 8 गेंदें फेंकी जाती थीं।

शुरुआती वर्षों में वनडे क्रिकेट में 60-60 ओवर का प्रारूप भी इस्तेमाल किया जाता था। 1975 और 1979 में आयोजित पहले दो पुरुष वनडे वर्ल्ड कप भी 60 ओवर प्रति पारी के प्रारूप में खेले गए थे। बाद में क्रिकेट के इस प्रारूप को 50-50 ओवर तक सीमित कर दिया गया, जो आज वनडे क्रिकेट की पहचान है।

1000वें वनडे तक पहुंचने में लगे 24 साल

वनडे क्रिकेट को अपने शुरुआती 1000 मुकाबले पूरे करने में करीब 24 साल लगे। पुरुष क्रिकेट का 1000वां वनडे 1995 में इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के बीच नॉटिंघम में खेला गया था।

इसके बाद वनडे मुकाबलों की संख्या तेजी से बढ़ी। क्रिकेट कैलेंडर में अधिक अंतरराष्ट्रीय मुकाबले जुड़ने लगे और कुछ ही वर्षों में अगले हजार मैच पूरे हो गए।

2000वां वनडे 2003 में पाकिस्तान और जिम्बाब्वे के बीच शारजाह में खेला गया।

इसके बाद 3000वें और 4000वें वनडे तक पहुंचने में भी पहले की तुलना में काफी कम समय लगा।

1 से 5000वें वनडे तक का ऐतिहासिक सफर

वनडे क्रिकेट के प्रमुख पड़ाव इस तरह रहे—

  • पहला वनडे: ऑस्ट्रेलिया बनाम इंग्लैंड — मेलबर्न, 1971
  • 1000वां वनडे: वेस्टइंडीज बनाम इंग्लैंड — नॉटिंघम, 1995
  • 2000वां वनडे: पाकिस्तान बनाम जिम्बाब्वे — शारजाह, 2003
  • 3000वां वनडे: ऑस्ट्रेलिया बनाम इंग्लैंड — साउथैम्पटन, 2010
  • 4000वां वनडे: हांगकांग बनाम पापुआ न्यू गिनी — हरारे, 2018
  • 5000वां वनडे: कनाडा बनाम स्कॉटलैंड — डंडी, 2026

इस सूची से अंदाजा लगाया जा सकता है कि समय के साथ वनडे क्रिकेट का विस्तार कितनी तेजी से हुआ है।

13 वनडे वर्ल्ड कप भी हो चुके हैं

पुरुष वनडे क्रिकेट के इतिहास में अब तक 13 वनडे विश्व कप आयोजित किए जा चुके हैं। पहला टूर्नामेंट 1975 में खेला गया था।

ऑस्ट्रेलिया इस टूर्नामेंट का सबसे सफल देश है। उसने अब तक 6 बार वनडे वर्ल्ड कप का खिताब जीता है।

भारत ने दो बार विश्व कप ट्रॉफी अपने नाम की है। टीम इंडिया ने पहली बार 1983 में कपिल देव की कप्तानी में खिताब जीता था। इसके 28 साल बाद 2011 में एमएस धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम दोबारा विश्व चैंपियन बनी।

अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें अगले वनडे विश्व कप पर हैं, जिसका आयोजन 2027 में किया जाना है।

5000वां ODI क्यों है खास?

स्कॉटलैंड और कनाडा के बीच खेला जा रहा मुकाबला भले ही विश्व कप या किसी बड़ी द्विपक्षीय सीरीज का हिस्सा नहीं है, लेकिन वनडे क्रिकेट के इतिहास में इसका महत्व हमेशा याद रखा जाएगा।

1971 में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड से शुरू हुआ 50 ओवर के इस प्रारूप का सफर अब 5000 मुकाबलों तक पहुंच चुका है। बदलते नियमों, अलग-अलग ओवर प्रारूपों और क्रिकेट के वैश्विक विस्तार के बीच स्कॉटलैंड और कनाडा की यह भिड़ंत वनडे इतिहास के एक खास मील के पत्थर के तौर पर दर्ज हो गई है।