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सावन में उज्जैन जाएं तो महाकाल के साथ इन 5 जगहों को भी करें एक्सप्लोर

सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दौरान देशभर से श्रद्धालु शिव मंदिरों और ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए निकलते हैं। मध्य प्रदेश का उज्जैन भी इस समय भक्तों से गुलजार रहता है। यहां स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है और सावन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचते हैं।

हालांकि, उज्जैन की खूबसूरती केवल महाकाल मंदिर तक सीमित नहीं है। शहर और उसके आसपास कई ऐसे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल हैं, जहां आपको अध्यात्म के साथ पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी।

अगर आप इस सावन उज्जैन जाने की तैयारी कर रहे हैं तो महाकाल दर्शन के साथ इन पांच जगहों को अपनी ट्रैवल लिस्ट में शामिल कर सकते हैं।

1. मंगलनाथ मंदिर

उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे स्थित मंगलनाथ मंदिर धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि यह स्थान मंगल ग्रह की जन्मस्थली है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, मंगल दोष या मांगलिक दोष से जुड़े लोग यहां विशेष पूजा-अनुष्ठान करवाते हैं। मंदिर में भात पूजा और मंगल शांति जैसे अनुष्ठान भी कराए जाते हैं।

महाकाल मंदिर से मंगलनाथ मंदिर जाने के लिए ऑटो, ई-रिक्शा या कैब का सहारा लिया जा सकता है।

2. चिंतामन गणेश मंदिर

उज्जैन के प्रमुख धार्मिक स्थलों में प्राचीन चिंतामन गणेश मंदिर का नाम भी शामिल है। यह मंदिर भगवान गणेश को समर्पित है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से चिंतामन गणेश के दर्शन करने से भक्तों की चिंताएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। कई लोग नए काम की शुरुआत या कोई नया वाहन खरीदने के बाद भगवान गणेश का आशीर्वाद लेने यहां पहुंचते हैं।

महाकाल मंदिर से यहां जाने के लिए स्थानीय ई-रिक्शा और अन्य साधन आसानी से मिल सकते हैं।

3. सांदीपनि आश्रम का गोमती कुंड

उज्जैन की धार्मिक यात्रा में महर्षि सांदीपनि आश्रम को भी शामिल किया जा सकता है। आश्रम परिसर में मौजूद गोमती कुंड का संबंध भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं से बताया जाता है।

मान्यता के अनुसार, गुरु सांदीपनि की सेवा और उनकी इच्छा पूरी करने के लिए श्रीकृष्ण ने विभिन्न पवित्र नदियों का जल यहां एकत्र किया था। इसी वजह से गोमती कुंड को धार्मिक रूप से पवित्र माना जाता है।

यह स्थान धार्मिक वातावरण के साथ उज्जैन के प्राचीन इतिहास और पौराणिक परंपराओं को समझने का भी अवसर देता है।

4. इस्कॉन मंदिर

अगर आप उज्जैन में शांत और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव करना चाहते हैं तो इस्कॉन मंदिर जा सकते हैं। मंदिर परिसर में भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की भव्य प्रतिमाएं स्थापित हैं।

संगमरमर से बने मंदिर की वास्तुकला आकर्षक है। परिसर में हरियाली और शांत वातावरण मन को सुकून देता है। शाम के समय होने वाली आरती और भजन-कीर्तन का माहौल श्रद्धालुओं को खास तौर पर आकर्षित करता है।

महाकाल मंदिर से इस्कॉन मंदिर तक कैब या स्थानीय परिवहन से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

5. चार धाम मंदिर

उज्जैन में महाकाल मंदिर के आसपास घूमने के लिए चार धाम मंदिर भी एक अच्छा विकल्प है। इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां देश के चार प्रमुख धामों से जुड़ी धार्मिक अनुभूति एक ही स्थान पर मिलती है।

मंदिर परिसर में बद्रीनाथ, द्वारका, जगन्नाथ पुरी और रामेश्वरम से संबंधित प्रतिमाएं स्थापित हैं। इसके अलावा परिसर में वैष्णो देवी की गुफा की तर्ज पर बनाई गई गुफा भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है।

जो लोग किसी कारणवश चारों धाम की यात्रा नहीं कर पाते, उनके लिए यह जगह विशेष धार्मिक महत्व रखती है।

उज्जैन कैसे पहुंचें?

ट्रेन से

उज्जैन देश के कई प्रमुख शहरों से रेल मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। आप ट्रेन के जरिए उज्जैन जंक्शन पहुंच सकते हैं। स्टेशन से शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों तक ऑटो, ई-रिक्शा और कैब मिल जाते हैं।

हवाई मार्ग से

अगर आप फ्लाइट से उज्जैन जाना चाहते हैं तो इंदौर का देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे सुविधाजनक विकल्पों में से एक है। एयरपोर्ट से उज्जैन की दूरी सड़क मार्ग से तय की जा सकती है। इंदौर से बस, टैक्सी या कैब के जरिए उज्जैन पहुंचा जा सकता है।

सावन में उज्जैन जाने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

सावन के दौरान उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। इसलिए यात्रा से पहले होटल और आने-जाने की व्यवस्था कर लेना बेहतर रहेगा। मंदिरों में भीड़ को देखते हुए दर्शन का समय पहले से तय करें और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

महाकाल के दर्शन के साथ अगर आपके पास समय है तो इन पांच धार्मिक स्थलों को अपनी यात्रा में शामिल करके उज्जैन की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से महसूस कर सकते हैं।

‘टॉक्सिक’ में कियारा के इंटीमेट सीन पर बवाल, सिद्धार्थ मल्होत्रा ने दिया पत्नी का साथ; यश ने भी रखी अपनी बात

यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक’ का ट्रेलर सामने आते ही सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा तेज हो गई है। फिल्म में यश के साथ कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत अहम भूमिकाओं में नजर आ रही हैं। ट्रेलर में कलाकारों के लुक और परफॉर्मेंस को लेकर दर्शकों के बीच काफी उत्सुकता देखने को मिल रही है।

हालांकि, ट्रेलर का एक हिस्सा कियारा आडवाणी को लेकर चर्चा का विषय बन गया। फिल्म में उनके और यश के बीच दिखाई गई नजदीकी और इंटीमेट सीन को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। इसी बीच कियारा के पति और अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा की प्रतिक्रिया ने भी लोगों का ध्यान खींचा है।

सिद्धार्थ मल्होत्रा ने कियारा की तारीफ में क्या कहा?

ट्रेलर रिलीज के बाद कियारा आडवाणी की परफॉर्मेंस और फिल्म में उनके किरदार को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हुई। इसी बीच सिद्धार्थ मल्होत्रा ने सोशल मीडिया पर पत्नी कियारा और उनकी फिल्म को लेकर अपना रिएक्शन शेयर किया।

सिद्धार्थ ने कियारा की मेहनत, लगन और जुनून की तारीफ करते हुए उन्हें फिल्म के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने यह भी कहा कि दर्शकों को बड़े पर्दे पर उनकी मेहनत देखने को मिलेगी और यह उनके करियर की बेहतरीन फिल्मों में शामिल हो सकती है।

सिद्धार्थ ने फिल्म की निर्देशक गीतू मोहनदास और पूरी टीम की भी तारीफ की। उन्होंने फिल्म को लेकर अपनी उत्सुकता जाहिर करते हुए इसकी रिलीज का इंतजार करने की बात कही।

उनका यह पोस्ट ऐसे समय में आया जब ट्रेलर के बाद कियारा और यश की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा हो रही थी।

कियारा के सीन पर यश ने भी किया बचाव

कियारा आडवाणी के फिल्म में किए गए इंटीमेट सीन को लेकर ट्रेलर लॉन्च के दौरान यश से भी सवाल किया गया। अभिनेता ने कियारा के काम और उनकी मेहनत की खुलकर तारीफ की।

यश ने कहा कि दर्शकों ने अभी फिल्म में कियारा के काम की केवल एक छोटी सी झलक देखी है। उन्होंने बताया कि कियारा ने अपने किरदार के लिए काफी मेहनत और पूरी लगन के साथ काम किया है।

यश ने कलाकारों के बारे में बात करते हुए कहा कि फिल्म से जुड़े सभी एक्टर्स ने अपने किरदारों में पूरी तरह उतरकर काम किया है। उन्होंने कियारा को अपने फैसलों और अभिनय पर भरोसा बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित भी किया।

अभिनेता के मुताबिक, कलाकार को वही करना चाहिए जिस पर उसे भरोसा हो। उन्होंने संकेत दिया कि फिल्म की टीम ने कुछ ऐसा करने की कोशिश की है जो शायद दर्शकों के लिए अपने समय से आगे की चीज हो।

‘टॉक्सिक’ में कियारा निभा रही हैं कौन सा किरदार?

‘टॉक्सिक’ में कियारा आडवाणी नादिया नाम का किरदार निभा रही हैं। फिल्म का निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है। कियारा और गीतू की साथ में यह पहली फिल्म है।

वहीं, यश और कियारा भी पहली बार किसी फिल्म में एक साथ स्क्रीन शेयर कर रहे हैं। फिल्म में नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत जैसे कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे।

फिल्म के ट्रेलर में एक्शन, ड्रामा और ग्लैमर के साथ कलाकारों के बीच रिश्तों की झलक भी दिखाई गई है, जिसने फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा दी है।

कब रिलीज होगी ‘टॉक्सिक’?

‘टॉक्सिक’ को 26 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज किया जाना है। फिल्म की रिलीज पहले 19 मार्च 2026 के लिए निर्धारित थी, लेकिन बाद में इसे आगे बढ़ा दिया गया।

अब रिलीज डेट नजदीक आने के साथ फिल्म का प्रमोशन भी जोर पकड़ रहा है। ट्रेलर में यश के अलावा कियारा आडवाणी की मौजूदगी और दोनों की केमिस्ट्री को लेकर दर्शकों के बीच खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

डॉ. राजेश्वर सिंह के “आपका विधायक, आपके द्वार” अभियान का 178वां सप्ताह: 29 जनसमस्याओं पर कार्रवाई, 3 का तत्काल निस्तारण; 69 जरूरतमंदों को मिलेंगे निःशुल्क चश्मे, 190वें यूथ क्लब का गठन

लखनऊ। सरोजनी नगर विधानसभा क्षेत्र में विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के मार्गदर्शन में संचालित “आपका विधायक, आपके द्वार” अभियान लगातार जनसमस्याओं के समाधान के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल और युवा सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का माध्यम बन रहा है। अभियान के 178वें सप्ताह के तहत रविवार को सरोजनीनगर दक्षिण तृतीय मंडल के दुर्गापुरी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नीलमथा में जनसुनवाई शिविर के साथ विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित किए गए।

जनसुनवाई में कुल 29 प्रार्थना-पत्र प्राप्त हुए। इनमें साइकिल सहायता, आयुष्मान भारत कार्ड, सड़क एवं नाली निर्माण, स्ट्रीट लाइट, विद्युत पोल, ग्रामीण एवं शहरी आवास, बैडमिंटन एवं कैरम बोर्ड, विधवा एवं दिव्यांग पेंशन, बाल सेवा योजना, रोजगार, नाली सफाई, ओपन जिम, सफाई कर्मचारी और आर्थिक सहायता सहित विभिन्न जनहित से जुड़े मामले शामिल रहे। सभी प्रार्थना-पत्रों को आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को भेजा गया। वहीं श्री राजेंद्र शुक्ला, श्री सुरेंद्र कुमार शाही एवं श्रीमती ज्ञान कुमारी थापा के आयुष्मान भारत कार्ड बनवाकर 3 मामलों का तत्काल निस्तारण किया गया।

स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से साईं ऑप्टिकल के सहयोग से निःशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर लगाया गया, जिसमें कुल 70 लोगों की आंखों की जांच की गई। जांच के बाद चिन्हित 69 जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल पर निःशुल्क चश्मे उपलब्ध कराए जाएंगे।

युवाओं को खेलों से जोड़ने और स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर देने के उद्देश्य से नीलमथा में 190वें बॉयज यूथ क्लब का गठन किया गया। क्लब के बच्चों को क्रिकेट एवं वॉलीबॉल किट प्रदान की गईं, जिससे उन्हें खेल प्रतिभा विकसित करने के लिए आवश्यक संसाधन मिल सकें।

इसी क्रम में शिक्षा को प्रोत्साहन देने की पहल के तहत भानु प्रताप मौर्य (74.6%), तन्वी (67.6%), आरुषि त्रिपाठी (80.4%) और रिद्धि (67%) को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए साइकिल प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ उन्हें बेहतर शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है।

“आपका विधायक, आपके द्वार” अभियान के माध्यम से जनसुनवाई के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा, खेल और युवा सशक्तिकरण को एक साथ जोड़कर जनसेवा का व्यापक मॉडल विकसित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य सरोजनी नगर के प्रत्येक नागरिक तक समस्या का समाधान, विकास का अवसर और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है, ताकि क्षेत्र को सशक्त, शिक्षित, स्वस्थ और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रगति सुनिश्चित की जा सके।

हर जिला-हर माह रोजगार एवं कौशल मेला आयोजित हो: डॉ. राजेश्वर सिंह

लखनऊ। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने युवाओं के रोजगार, कौशल विकास और employability को बढ़ाने के लिए एकीकृत Government–Industry–Academia आधारित Jobs & Skills Mission शुरू किए जाने का सुझाव दिया है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री को पत्र भेजकर युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए व्यापक स्तर पर रोजगार एवं कौशल मेलों, industry-linked training और reskilling programmes की आवश्यकता पर जोर दिया।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने सुझाव दिया कि उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में अगले छह माह तक प्रत्येक माह एक पूर्व-निर्धारित दिन रोजगार एवं कौशल मेला आयोजित किया जाए। इन मेलों की छह माह की तिथियां पहले से घोषित हों और verified कंपनियां अपनी वास्तविक vacancies के साथ इसमें शामिल हों। कंपनियों द्वारा walk-in interviews तथा जहां संभव हो, on-the-spot selection की व्यवस्था की जाए। सफल परिणाम मिलने पर इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर भी लागू किया जा सकता है।

Industry केवल Talent Hire नहीं, Talent Create भी करे

डॉ. सिंह ने कहा कि Industry की भूमिका केवल तैयार talent को hire करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि युवाओं को train, apprentice, employ, upskill और reskill करने की जिम्मेदारी भी उद्योग जगत को निभानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि CEOs एवं promoters स्वयं fresher hiring और apprenticeship programmes की समीक्षा करें तथा Youth Training & Talent Creation को Boardroom KPI बनाया जाए।

उनका स्पष्ट संदेश है-
“Industry must not just consume talent; it must create talent.”

Universities बनें Lifelong Reskilling Hubs

डॉ. राजेश्वर सिंह ने Universities, Colleges, ITIs और Polytechnics में Upskilling & Reskilling Centres स्थापित करने का सुझाव दिया। इन संस्थानों में Artificial Intelligence, Cybersecurity, Robotics, Electric Vehicles, Semiconductors, Renewable Energy और Advanced Manufacturing जैसे emerging sectors से जुड़े 3, 6 और 12 माह के modular एवं industry-linked courses शुरू किए जाएं।

उन्होंने कहा कि इन courses के curriculum को तैयार करने और समय-समय पर update करने में Industry की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

“Degree once, Learning for Life” की भावना के साथ युवाओं को lifelong learning और reskilling के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।

अगले 3–5 वर्षों की Skill Demand अभी से तय करने पर जोर

विधायक ने केंद्र एवं राज्य स्तर पर Industry Captains, CEOs, Universities और Skill Institutions के साथ नियमित Jobs & Skills Roundtable आयोजित करने का भी सुझाव दिया।

इन बैठकों के माध्यम से अगले 3–5 वर्षों की manpower और skill requirements का आकलन किया जाए। रोजगार मेलों से vacancies, applicants, selections, actual joining और skill gaps से संबंधित डेटा एकत्र कर District-wise Employment & Skill Map तैयार किया जाए।

उन्होंने कहा कि जिन युवाओं का किसी रोजगार मेले में चयन नहीं हो पाता, उन्हें केवल असफल मानकर छोड़ने के बजाय उनके skill gaps की पहचान कर bridge courses, apprenticeship और targeted training से जोड़ा जाए, ताकि वे अगले अवसर के लिए तैयार हो सकें।

“हर Applicant केवल CV या Score नहीं, किसी परिवार की उम्मीद है”

डॉ. राजेश्वर सिंह ने recruitment process में technology के साथ human touch की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा, “हर applicant केवल CV, score या application number नहीं है। वह किसी का बेटा या बेटी है और उसके पीछे एक परिवार की वर्षों की मेहनत, त्याग और उम्मीदें हैं।”

उन्होंने Industry Captains से आग्रह किया कि केवल skill-gap के आधार पर युवाओं को mechanically reject करने के बजाय उनकी learning ability, potential और adaptability को भी महत्व दिया जाए।

उन्होंने “Train before you reject” की भावना के साथ युवाओं को training, mentoring और दूसरा अवसर देने की आवश्यकता बताई।

Government-Academia-Industry की साझेदारी से बनेगा Employment Dividend

डॉ. सिंह ने कहा कि Government की scale, Academia की knowledge और Industry की leadership, responsibility एवं human touch को एक साथ लाकर भारत के demographic dividend को वास्तविक Employment Dividend में बदला जा सकता है।

उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल अधिक से अधिक degrees प्रदान करना नहीं, बल्कि युवाओं को employable skills, meaningful opportunities और sustainable employment उपलब्ध कराना होना चाहिए।

उन्होंने कहा-

“हर युवा को अवसर, हर Skill-Gap को Training, हर Potential को पहचान और हर कौशल को रोजगार।”

डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल पर CM योगी का बड़ा कदम, अब IAS-IPS-IFS अधिकारी करेंगे विद्यार्थियों से सीधा संवाद : सरोजनी नगर विधायक की मांग के बाद युवाओं के लिए बड़ा फैसला; प्रतियोगी परीक्षाओं से लेकर रोजगार, स्टार्टअप और साइबर सुरक्षा तक मिलेगा मार्गदर्शन

लखनऊ। सरोजनी नगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के सुझाव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे गए उनके पत्र के बाद प्रदेश में युवाओं के लिए एक ऐतिहासिक और दूरगामी महत्व का निर्णय लिया गया है। अब प्रदेश के प्रत्येक जिले में IAS, IPS और IFS अधिकारी हर महीने इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों से सीधे संवाद करेंगे।

इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को अनुभवी प्रशासनिक अधिकारियों के अनुभवों से जोड़ते हुए उन्हें बेहतर करियर विकल्प चुनने, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है।

प्रतियोगी परीक्षाओं से लेकर स्टार्टअप तक मिलेगा मार्गदर्शन

इन संवाद कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को UPSC, UPPSC, JEE, NEET, NDA, SSC सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के संबंध में मार्गदर्शन दिया जाएगा।

इसके साथ ही विद्यार्थियों को-

  • उच्च शिक्षा और बेहतर करियर विकल्पों की जानकारी
  • रोजगार के अवसरों और कौशल विकास की जानकारी
  • स्टार्टअप एवं उद्यमिता की संभावनाओं से परिचय
  • साइबर सुरक्षा और वित्तीय साक्षरता का ज्ञान
  • तनाव प्रबंधन और आत्मविश्वास विकास पर मार्गदर्शन

दिया जाएगा।

कार्यक्रमों में औपचारिक भाषणों के बजाय इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर और संवाद आधारित सत्रों पर विशेष जोर रहेगा, ताकि विद्यार्थी अधिकारियों से सीधे अपने सवाल पूछ सकें और अपने भविष्य से जुड़े विषयों पर व्यावहारिक मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने की थी मुख्यमंत्री युवा सलाहकार समिति की मांग

दरअसल, डॉ. राजेश्वर सिंह ने हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर ‘मुख्यमंत्री युवा सलाहकार समिति (CM-YAC)’ के गठन का प्रस्ताव दिया था।

उन्होंने सुझाव दिया था कि समिति में IAS, IPS, PCS, PPS, IIT और NEET क्वालिफाइड युवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले युवाओं को शामिल किया जाए, ताकि युवाओं को नीति-निर्माण में भागीदारी का अवसर मिल सके और विद्यार्थियों के साथ नियमित संवाद की प्रभावी व्यवस्था विकसित हो।

डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल का मूल उद्देश्य युवाओं को केवल सरकारी योजनाओं का लाभार्थी बनाने के बजाय उन्हें शासन, नीति-निर्माण और प्रदेश के भविष्य का सक्रिय भागीदार बनाना है।

अब प्रशासनिक अधिकारी सीधे पहुंचेंगे विद्यार्थियों के बीच

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस पहल के तहत प्रशासनिक अधिकारियों और विद्यार्थियों के बीच सीधा, नियमित और प्रभावी संवाद स्थापित किया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर को लेकर सही दिशा मिलने के साथ-साथ प्रशासनिक सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों की बेहतर समझ विकसित होगी।

यह पहल प्रदेश के युवाओं में आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और भविष्य के प्रति स्पष्ट दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल से उठी युवाओं को शासन से जोड़ने की आवाज अब विद्यार्थियों तक प्रशासनिक अनुभव पहुंचाने की दिशा में एक नई पहल के रूप में सामने आई है।