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Health News:खाना खाते ही क्यों आने लगती है नींद? जानिए दोपहर में शरीर में क्या होता है

दोपहर का भोजन करने के कुछ देर बाद अगर आंखें भारी होने लगें, शरीर सुस्त महसूस हो और काम पर ध्यान लगाना मुश्किल हो जाए, तो यह अनुभव काफी सामान्य है। इसे पोस्ट-मील स्लीपिनेस (Post Meal Sleepiness) कहा जाता है। कई लोगों को खाना खाने के बाद थोड़ी देर के लिए नींद या आलस महसूस होता है।

आमतौर पर यह किसी बीमारी का सीधा संकेत नहीं होता। इसके पीछे शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी, नींद की कमी, भोजन की मात्रा और खाने में शामिल चीजों समेत कई कारण एक साथ जिम्मेदार हो सकते हैं।

दोपहर में क्यों आने लगती है ज्यादा नींद?

हमारे शरीर में 24 घंटे के चक्र के अनुसार चलने वाली एक प्राकृतिक घड़ी होती है, जिसे सर्केडियन रिदम कहा जाता है। दिन के बीच में इस रिदम के कारण जागने और सतर्क रहने की क्षमता में कुछ समय के लिए स्वाभाविक कमी आ सकती है।

यही वजह है कि कई लोगों को बिना खाना खाए भी दोपहर के समय हल्की सुस्ती महसूस होती है। जब इसी दौरान भोजन कर लिया जाता है, तो शरीर में होने वाले पाचन संबंधी बदलाव इस एहसास को और बढ़ा सकते हैं।

ज्यादा खाना बढ़ा सकता है सुस्ती

दोपहर में अगर भोजन जरूरत से ज्यादा मात्रा में किया गया हो या खाना बहुत भारी हो, तो नींद और थकान ज्यादा महसूस हो सकती है।

बहुत अधिक कैलोरी वाले भोजन, तली-भुनी चीजें और ज्यादा मीठे या रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थ कुछ लोगों में खाने के बाद सुस्ती बढ़ा सकते हैं।

भोजन के बाद शरीर में पाचन से जुड़ी कई प्रक्रियाएं सक्रिय होती हैं। इस दौरान रक्त में ग्लूकोज और दूसरे पोषक तत्वों के स्तर में बदलाव होता है। साथ ही शरीर से मिलने वाले अलग-अलग संकेत दिमाग की जागरूकता और नींद से जुड़े तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं।

इन सभी प्रक्रियाओं का संयुक्त प्रभाव खाने के बाद नींद जैसा एहसास पैदा कर सकता है।

क्या खाने के बाद सारा खून पेट में चला जाता है?

खाने के बाद नींद आने को लेकर अक्सर कहा जाता है कि पाचन के लिए शरीर का सारा खून पेट की तरफ चला जाता है और दिमाग तक खून कम पहुंचने लगता है। इसी कारण नींद आती है।

हालांकि, इसे इस समस्या की पूरी या सही वजह नहीं माना जाता। भोजन के बाद आने वाली सुस्ती सिर्फ खून के पेट की ओर जाने से नहीं होती। इसके पीछे सर्केडियन रिदम, पाचन प्रक्रिया, भोजन की मात्रा और शरीर में होने वाले कई जैविक बदलाव मिलकर भूमिका निभाते हैं।

रात की नींद कम होने पर बढ़ सकती है परेशानी

दोपहर में खाने के बाद आने वाली सुस्ती का संबंध पिछली रात की नींद से भी हो सकता है। अगर रात में पर्याप्त नींद नहीं हुई है या नींद बार-बार टूटती रही है, तो दिन के समय शरीर ज्यादा थका हुआ महसूस कर सकता है।

जितनी देर तक व्यक्ति जागता रहता है, शरीर में नींद की जरूरत भी बढ़ती जाती है। ऐसे में दोपहर के भोजन के बाद प्राकृतिक सुस्ती और नींद की कमी का असर एक साथ महसूस हो सकता है।

इसलिए दिन में एक्टिव और सतर्क रहने के लिए रात में पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाली नींद लेना जरूरी है।

खाने के बाद नींद कम करने के लिए क्या करें?

दोपहर के भोजन के बाद ज्यादा सुस्ती महसूस होती है तो कुछ सामान्य आदतों में बदलाव मददगार हो सकता है।

  • जरूरत से ज्यादा भोजन करने से बचें।
  • भोजन में संतुलित मात्रा में प्रोटीन, फाइबर और दूसरे पोषक तत्व शामिल करें।
  • बहुत ज्यादा तली-भुनी और अत्यधिक मीठी चीजों का सेवन सीमित रखें।
  • भोजन के बाद कुछ मिनट हल्की वॉक कर सकते हैं।
  • दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।
  • रात में पर्याप्त और नियमित नींद लेने की कोशिश करें।

कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

कभी-कभार खाना खाने के बाद हल्की नींद आना सामान्य हो सकता है। लेकिन अगर हर दिन बहुत ज्यादा नींद, चक्कर, कमजोरी या असामान्य थकान महसूस होती है और इसका असर रोजमर्रा के काम पर पड़ रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

लगातार अत्यधिक नींद या थकान कभी-कभी नींद से जुड़ी समस्या, एनीमिया, थायरॉइड में गड़बड़ी या ब्लड शुगर से संबंधित परेशानी के साथ भी दिखाई दे सकती है।

इसलिए अगर समस्या लगातार बनी हुई है या समय के साथ बढ़ रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर उचित जांच कराना बेहतर रहेगा।

ईरान की इस शर्त से बदलेगा ट्रंप का प्लान? होर्मुज को लेकर रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता आसान नहीं दिख रहा है। कई हफ्तों तक ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के बाद अब अमेरिकी प्रशासन ऐसा विकल्प तलाश रहा है, जिससे संघर्ष को खत्म करने का रास्ता निकले और साथ ही अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई को सफल भी बता सके।

इसी बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तत्काल किसी नए समझौते पर जोर देने के बजाय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नौवहन को पूरी तरह सामान्य कराने को युद्ध से बाहर निकलने के संभावित रास्ते के तौर पर देख सकते हैं।

हालांकि, ईरान की ओर से इस रास्ते को आसान नहीं बनाया गया है। तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने के बदले अमेरिका के सामने कई मांगें रखी हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच बातचीत और भी जटिल हो सकती है।

युद्ध से बाहर निकलने की कोशिश में ट्रंप के सामने चुनौती

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन पिछले कई सप्ताह से संघर्ष को खत्म करने के संभावित विकल्पों पर विचार कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति कथित तौर पर अपने वरिष्ठ सहयोगियों के साथ इस संभावना पर चर्चा कर चुके हैं कि बिना किसी नए परमाणु समझौते के भी युद्ध को समाप्त करने का रास्ता निकाला जा सकता है।

लेकिन अब इस विकल्प के सामने भी बड़ी बाधा खड़ी हो गई है।

ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए खोलने के बदले कई शर्तें रख दी हैं। इनमें वित्तीय भुगतान, अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों में बदलाव और क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी जैसी मांगें शामिल बताई जा रही हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है। इसके जरिए बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचती है।

ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य तनाव बढ़ने के दौरान इस जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने लगी। मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे के चलते कई वाणिज्यिक जहाजों के लिए इस रास्ते से गुजरना जोखिम भरा हो गया।

इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा। तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमतों में तेजी का दबाव देखने को मिला।

यही वजह है कि होर्मुज जलडमरूमध्य का पूरी तरह खुलना अमेरिका ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ट्रंप के दावे पर क्यों उठे सवाल?

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल के हफ्तों में कई बार दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए पूरी तरह खुला है। हालांकि, जमीनी घटनाक्रम ने इन दावों पर सवाल खड़े किए।

ईरान की ओर से संयुक्त अरब अमीरात से जुड़े एक जहाज को मिसाइल हमले में निशाना बनाए जाने की घटना के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। इसके बाद ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी की ओर से जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने के लिए कई शर्तें रखे जाने की बात सामने आई।

इस घटनाक्रम से साफ है कि तेहरान होर्मुज को बातचीत में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक मुद्दे के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

ईरान की मांगों से मुश्किल में अमेरिका

ईरान की ओर से रखी गई शर्तों में कथित तौर पर अमेरिका से आर्थिक भुगतान, अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी जैसी गतिविधियों को खत्म करना और क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी जैसी मांगें शामिल हैं।

अगर अमेरिका इन शर्तों को स्वीकार करता है तो ट्रंप के लिए युद्ध समाप्त करने का रास्ता खुल सकता है, लेकिन इसके बदले वॉशिंगटन को ईरान को महत्वपूर्ण रियायतें देनी पड़ सकती हैं।

दूसरी तरफ, अगर अमेरिका इन मांगों को स्वीकार नहीं करता है तो होर्मुज में तनाव जारी रहने का खतरा बना रहेगा। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और बाजारों पर भी दबाव पड़ सकता है।

परमाणु समझौते के बिना युद्ध खत्म करने की कोशिश?

ट्रंप प्रशासन के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी नए समझौते के बिना संघर्ष खत्म किया जा सकता है।

अगर अमेरिका होर्मुज में नौवहन बहाल होने को युद्ध की समाप्ति का आधार बनाता है, तो ट्रंप इसे अपनी सैन्य रणनीति की सफलता के रूप में पेश कर सकते हैं। हालांकि, ईरान की मांगें इस रास्ते को बेहद मुश्किल बना रही हैं।

फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिशों के बावजूद कई अहम मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर होने वाली बातचीत यह तय कर सकती है कि अमेरिका और ईरान संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ते हैं या पश्चिम एशिया में तनाव का एक और दौर देखने को मिलता है।

Health Update:मसूड़ों से बार-बार आता है खून तो न करें नजरअंदाज, दिल की सेहत से भी हो सकता है संबंध

मसूड़ों से ब्रश करते समय या खाना खाते वक्त खून आना आम समस्या समझकर कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर यह समस्या बार-बार हो रही है तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। मसूड़ों से जुड़ी बीमारी सिर्फ मुंह और दांतों तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि शरीर में होने वाली सूजन और हृदय स्वास्थ्य के बीच भी संबंध देखा गया है।

डेंटिस्ट डॉ. मार्क बुरहेन ने एक मामले का उदाहरण साझा करते हुए बताया कि करीब 40 साल की एक महिला को मसूड़ों से लगातार खून आने की शिकायत थी। महिला को सामान्य तौर पर स्वस्थ माना जाता था, लेकिन कुछ समय बाद उसे हार्ट अटैक आया। हालांकि, डॉक्टर ने यह स्पष्ट किया कि इस घटना के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि मसूड़ों की बीमारी सीधे हार्ट अटैक का कारण बनी।

दरअसल, मसूड़ों की बीमारी और हृदय संबंधी समस्याओं के बीच संभावित जैविक संबंध को लेकर लंबे समय से अध्ययन होते रहे हैं।

मसूड़ों की बीमारी और दिल के बीच क्या संबंध है?

मसूड़ों में संक्रमण या सूजन होने पर मुंह में मौजूद बैक्टीरिया और सूजन से जुड़े पदार्थ शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुंच सकते हैं। लंबे समय तक शरीर में बनी रहने वाली सूजन को हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी कई समस्याओं के जोखिम से जोड़ा गया है।

कुछ शोधों में मसूड़ों की बीमारी और धमनियों में बनने वाले प्लाक के बीच भी संबंध पाया गया है। धमनियों में प्लाक जमा होने से उनका रास्ता संकरा और कठोर हो सकता है, जिससे हृदय तक रक्त पहुंचने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

यही वजह है कि विशेषज्ञ अब ओरल हेल्थ को शरीर के बाकी हिस्सों की सेहत से अलग करके देखने के बजाय इसे समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा मानने पर जोर देते हैं।

हार्ट फेलियर और अनियमित धड़कन से भी जुड़ा है संबंध

मसूड़ों की बीमारी और हृदय स्वास्थ्य के बीच संबंध को लेकर वर्षों से रिसर्च जारी है। कुछ अध्ययनों में मसूड़ों की बीमारी को हृदय की धड़कन में अनियमितता और हार्ट फेलियर जैसी स्थितियों के साथ भी जोड़ा गया है।

हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि संबंध होना और सीधे कारण होना एक ही बात नहीं है। मसूड़ों की बीमारी वाले हर व्यक्ति को हार्ट अटैक या हृदय रोग होगा, ऐसा नहीं कहा जा सकता।

हृदय रोग के पीछे उम्र, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, मोटापा, धूम्रपान, खान-पान और शारीरिक गतिविधि जैसे कई जोखिम कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मसूड़ों से खून आने पर क्या करें?

मसूड़ों को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना ओरल हाइजीन पर ध्यान देना जरूरी है। इसके लिए कुछ आसान आदतों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है।

  • दिन में कम से कम दो बार सही तरीके से ब्रश करें।
  • दांतों के बीच फंसी गंदगी साफ करने के लिए फ्लॉस या इंटरडेंटल क्लीनिंग का इस्तेमाल करें।
  • नियमित अंतराल पर डेंटिस्ट से दांतों और मसूड़ों की जांच कराएं।
  • अगर मसूड़ों से लगातार खून आ रहा है, सूजन है या ब्रश करते समय दर्द होता है तो जांच कराएं।
  • बहुत ज्यादा मीठे खाद्य पदार्थ और पेय का सेवन सीमित रखें।
  • धूम्रपान और तंबाकू से दूरी बनाए रखें।

सिर्फ दांतों की सफाई से दिल की बीमारी नहीं रुकेगी

ओरल हेल्थ को बेहतर रखना जरूरी है, लेकिन सिर्फ ब्रश और फ्लॉस करने से हृदय रोग का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता।

दिल को स्वस्थ रखने के लिए ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना, ब्लड शुगर की निगरानी, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और धूम्रपान से बचना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

अगर मसूड़ों से लंबे समय तक खून आता है या उनके साथ सूजन, दर्द, मुंह से दुर्गंध अथवा दांतों के हिलने जैसी समस्या भी हो रही है, तो डेंटिस्ट से सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। समय पर इलाज कराने से मसूड़ों की बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है और ओरल हेल्थ बेहतर रखी जा सकती है।

Sports Update:2011 में भारत को वर्ल्ड कप जिताने वाला दिग्गज अब श्रीलंका के साथ, टीम इंडिया के खिलाफ बना रहा रणनीति

भारत और श्रीलंका के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला मुकाबला 15 अगस्त से गॉल इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में शुरू होने जा रहा है। टेस्ट सीरीज से पहले भारतीय टीम ने श्रीलंका इलेवन के खिलाफ तीन दिवसीय अभ्यास मैच खेला, जिसमें टीम इंडिया ने 6 विकेट से जीत हासिल की।

अभ्यास मैच के तीसरे दिन भारत के सामने 207 रन का लक्ष्य था। भारतीय बल्लेबाजों ने दिन का खेल खत्म होने से पहले ही लक्ष्य हासिल कर लिया। इस मुकाबले को देखने के लिए श्रीलंका के मौजूदा हेड कोच और भारत को 2011 में वर्ल्ड कप जिताने वाले पूर्व कोच गैरी कर्स्टन भी मैदान पर मौजूद थे।

गैरी कर्स्टन ने मैच के दौरान भारतीय खिलाड़ियों पर खास नजर रखी। दिलचस्प बात यह है कि कभी उनकी कोचिंग में खेलने वाले गौतम गंभीर अब भारतीय टीम के हेड कोच हैं और दूसरी तरफ कर्स्टन श्रीलंकाई टीम की कमान संभालने वाले कोचिंग स्टाफ का हिस्सा हैं।

जिस कोच की अगुवाई में भारत ने जीता था 2011 वर्ल्ड कप

गैरी कर्स्टन का नाम भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कोचों में गिना जाता है। उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय टीम ने 2011 में 28 साल के लंबे इंतजार के बाद वनडे वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया था।

कर्स्टन के कार्यकाल में टीम इंडिया ने टेस्ट क्रिकेट में भी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। दिसंबर 2009 में मुंबई में श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट जीतने के बाद भारत पहली बार आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में नंबर-1 टीम बना था।

अब वही गैरी कर्स्टन श्रीलंका की टीम के साथ हैं और उनकी नजर भारतीय टीम की कमजोरियों को समझने पर होगी। ऐसे में भारत-श्रीलंका टेस्ट सीरीज में उनका अनुभव श्रीलंकाई टीम के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है।

भारत का अभ्यास मैच देखने पहुंचे गैरी कर्स्टन

रविवार को गैरी कर्स्टन को एनसीसी ग्राउंड में देखा गया, जहां भारतीय टीम अपना अभ्यास मुकाबला खेल रही थी। वह बाउंड्री लाइन के पास खड़े होकर मैच पर नजर रखते दिखाई दिए।

इस दौरान उन्होंने कुछ भारतीय खिलाड़ियों से बातचीत भी की। उनकी मौजूदगी ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया, क्योंकि कुछ साल पहले तक वह खुद भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम का हिस्सा थे।

अब उनकी भूमिका अलग है और वह श्रीलंका को भारतीय टीम के खिलाफ बेहतर प्रदर्शन कराने की रणनीति तैयार कर रहे हैं।

बतौर कोच गैरी कर्स्टन का शानदार रिकॉर्ड

गैरी कर्स्टन ने 2008 से 2011 तक भारतीय टीम के हेड कोच के रूप में काम किया। उनके कार्यकाल में भारत ने टेस्ट क्रिकेट में नंबर-1 रैंकिंग हासिल करने के अलावा 2011 वनडे वर्ल्ड कप भी जीता।

उनकी कोचिंग में भारतीय टीम ने कई महत्वपूर्ण सीरीज में शानदार प्रदर्शन किया। न्यूजीलैंड की धरती पर टेस्ट सीरीज जीतना भी उस दौर की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा।

इसके बाद कर्स्टन ने 2011 से 2013 तक दक्षिण अफ्रीका की राष्ट्रीय टीम के कोच की जिम्मेदारी संभाली। उनके कार्यकाल में दक्षिण अफ्रीका ने टेस्ट क्रिकेट में मजबूत प्रदर्शन किया।

कर्स्टन आईपीएल में भी कोचिंग कर चुके हैं। उन्होंने दिल्ली और बेंगलुरु की फ्रेंचाइजी के साथ अलग-अलग भूमिकाओं में काम किया है। इसके अलावा वह बिग बैश लीग में भी कोचिंग अनुभव हासिल कर चुके हैं।

WTC के लिहाज से भी बेहद अहम है सीरीज

भारत और श्रीलंका के बीच होने वाली यह टेस्ट सीरीज आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

भारतीय टीम फिलहाल अंक तालिका में पांचवें स्थान पर है और उसकी कोशिश दोनों टेस्ट मैच जीतकर टॉप-4 में पहुंचने की होगी। दूसरी तरफ श्रीलंका भी अगर सीरीज के दोनों मुकाबले जीत लेता है तो वह शीर्ष चार में जगह बनाने की स्थिति में आ सकता है।

भारत के खिलाफ श्रीलंका का टेस्ट रिकॉर्ड भी दिलचस्प है। श्रीलंकाई टीम ने भारत के खिलाफ अब तक 7 टेस्ट मुकाबले जीते हैं और ये सभी जीत उसे अपनी घरेलू परिस्थितियों में मिली हैं।

टीम इंडिया के स्क्वॉड में भी हुआ बदलाव

श्रीलंका सीरीज शुरू होने से पहले भारतीय टेस्ट टीम में बदलाव भी हुआ है। BCCI ने बताया कि साई सुदर्शन चोट के कारण पूरी सीरीज से बाहर हो गए हैं। उनकी जगह सरफराज खान को टीम में शामिल किया गया है।

सरफराज ने अपना पिछला टेस्ट मुकाबला नवंबर 2024 में खेला था। अब उनके पास लंबे अंतराल के बाद भारतीय टेस्ट टीम में वापसी का मौका है।

इससे पहले भारतीय टीम में जसप्रीत बुमराह की जगह आकिब नबी को शामिल किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।

शुभमन गिल की फिटनेस से मिली राहत

भारतीय टीम के लिए अच्छी खबर यह रही कि रविवार को अभ्यास मैच में कप्तान शुभमन गिल बल्लेबाजी करने उतरे।

अभ्यास के दौरान चोट लगने के कारण गिल शुरुआती दो दिनों में मैदान पर नजर नहीं आए थे। हालांकि, तीसरे दिन उनके बल्लेबाजी के लिए उतरने से टीम मैनेजमेंट को राहत मिली है।

अब सभी की नजरें 15 अगस्त से शुरू होने वाले पहले टेस्ट पर हैं। एक तरफ भारत की कोशिश श्रीलंका को उसके घर में हराकर WTC अंक तालिका में अपनी स्थिति मजबूत करने की होगी, वहीं श्रीलंकाई टीम गैरी कर्स्टन के अनुभव का फायदा उठाकर भारतीय टीम को कड़ी चुनौती देने की कोशिश करेगी।

PoK में वोटिंग से पहले हिंसा, फायरिंग में 2 की मौत का दावा; कई घायल, चुनाव बहिष्कार का ऐलान

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में लंबे समय से जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच चुनाव से ठीक पहले तनाव और बढ़ गया है। रविवार शाम बाग और हवेली जिलों में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर सुरक्षा बलों की ओर से फायरिंग और आंसू गैस के इस्तेमाल की खबर सामने आई है। घटना में हवेली जिले में दो लोगों की मौत की पुष्टि किए जाने का दावा किया गया है, जबकि 13 से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

PoK में पिछले दो महीनों से अधिक समय से विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। इस दौरान कई क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं प्रभावित रहने की बात भी सामने आई है। सोमवार, 10 अगस्त को बाग और हवेली जिलों की चार विधानसभा सीटों पर मतदान होना है। मतदान से कुछ घंटे पहले हुई हिंसा ने चुनावी माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है।

मतदान से कुछ घंटे पहले हुई फायरिंग

रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार शाम करीब 5 बजे बाग और हवेली जिलों में प्रदर्शन के लिए जुटे लोगों पर पाकिस्तानी रेंजर्स और फ्रंटियर कॉर्प्स के जवानों ने कार्रवाई की। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए।

हवेली में हुई गोलीबारी में दो लोगों की मौत होने का दावा किया गया है। कई अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं।

घटना के दौरान एक घर भी कथित तौर पर गोलीबारी की चपेट में आ गया। बताया गया है कि गोली खिड़की को पार करते हुए घर के अंदर मौजूद 32 वर्षीय व्यक्ति को लगी। घायल व्यक्ति का स्थानीय स्तर पर डॉक्टर की निगरानी में इलाज किए जाने की जानकारी है।

चार सीटों पर ही हो रहा चुनाव

PoK के पुंछ डिवीजन के चार जिलों—पुंछ, सुधनोती, बाग और हवेली—की कुल 11 सीटों पर सोमवार को मतदान प्रस्तावित था। हालांकि, सुरक्षा स्थिति और राजनीतिक तनाव के कारण बाग और हवेली से जुड़ी केवल चार सीटों पर चुनाव कराए जाने की बात कही गई है।

इनमें बाग-1, बाग-2, बाग-3 और बाग-4 सीटें शामिल हैं।

रविवार को बाग-3 और हवेली जिले से जुड़ी बाग-4 सीट के इलाकों में भी फायरिंग और आंसू गैस के इस्तेमाल की खबरें सामने आई थीं।

सड़कों पर पत्थर रखकर रास्ते बंद करने का दावा

प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को मतदान प्रक्रिया को रोकने के लिए बाग जिले के कई रास्तों पर पत्थर रखकर उन्हें बंद करने की कोशिश की है। साथ ही चारों सीटों पर चुनाव के बहिष्कार का आह्वान किया गया है।

विरोध आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में शामिल सरदार उमर नजीर ने भी मतदान बहिष्कार का समर्थन किया है। उनका आरोप है कि PoK में चुनाव दबाव और सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बीच कराए जा रहे हैं।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति मतदान करना चाहता है तो अवामी एक्शन कमेटी की ओर से उसे रोकने की कोशिश नहीं की जाएगी।

रावलाकोट बना विरोध का प्रमुख केंद्र

पुंछ जिले का रावलाकोट शहर पिछले करीब 62 दिनों से जारी आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। शहर के डी चौक पर 27 जुलाई से प्रदर्शनकारी धरने पर बैठे हैं।

रविवार को इसी स्थान पर सरदार उमर नजीर ने आंदोलन को लेकर दो महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।

उन्होंने कहा कि 13 अगस्त को PoK के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। इन प्रदर्शनों में 7 जून के बाद पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित कार्रवाई का विरोध किया जाएगा।

उन्होंने विदेशों में मौजूद पाकिस्तान के हाई कमीशन के बाहर भी विरोध-प्रदर्शन किए जाने की बात कही।

13 अगस्त को बड़े ऐलान की तैयारी?

सरदार उमर नजीर ने यह भी घोषणा की कि 13 अगस्त को अवामी एक्शन कमेटी की ओर से एक बड़ी मांग और घोषणा सामने रखी जा सकती है।

यह प्रस्ताव 13 अगस्त 1948 के संयुक्त राष्ट्र से जुड़े प्रस्ताव के संदर्भ में होने की बात कही गई है। उस समय जम्मू-कश्मीर की स्थिति को लेकर संयुक्त राष्ट्र आयोग ने संघर्ष खत्म करने और क्षेत्र में शांति स्थापित करने से संबंधित प्रस्ताव रखा था।

आंदोलन से जुड़े नेताओं की ओर से इस ऐतिहासिक संदर्भ का इस्तेमाल अब PoK से पाकिस्तानी सैन्य मौजूदगी हटाने की मांग को मजबूती देने के लिए किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप

प्रदर्शनकारियों का दावा है कि 7 जून से जारी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है। आंदोलन से जुड़े दावों के अनुसार, इस अवधि में पाकिस्तानी रेंजर्स और एफसी की कार्रवाई में 133 लोगों की मौत हुई है।

हालांकि, इन आंकड़ों और घटनाओं से जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

फिलहाल चुनाव से पहले बाग और हवेली में तनाव बना हुआ है। एक तरफ प्रशासन मतदान कराने की तैयारी में है, तो दूसरी ओर प्रदर्शनकारियों ने चुनाव बहिष्कार का आह्वान किया है। ऐसे में सोमवार का मतदान PoK में जारी राजनीतिक असंतोष और सुरक्षा संकट के बीच बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।