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ट्रंप का ईरान को सख्त संदेश, ‘तबाही और मौत का देना होगा मुआवजा’; वार्ता से पहले नई शर्त

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय लगातार नए मोड़ लेता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को एक बार फिर सख्त संदेश देते हुए ईरान से मुआवजे की मांग की है। ट्रंप का आरोप है कि मध्य पूर्व के कई हिस्सों में हुई तबाही और बड़ी संख्या में लोगों की मौत के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

ट्रंप ने संकेत दिया कि भविष्य में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत होती है तो मुआवजे का मुद्दा भी चर्चा का अहम हिस्सा होगा। उन्होंने लेबनान, सीरिया, यमन और गाजा में हुई हिंसा और नुकसान का जिक्र करते हुए ईरान पर जिम्मेदारी तय करने की बात कही।

ट्रंप बोले- ईरान से हम भी मांगेंगे मुआवजा

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि ईरान अब अमेरिका से मुआवजे की मांग कर रहा है, लेकिन पहले हुई बातचीत या बैठकों में तेहरान ने इस विषय को उनके सामने नहीं उठाया था।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह भी ईरान से उन लोगों के लिए मुआवजा मांग रहे हैं, जिन्हें उनके मुताबिक ईरान से जुड़े संघर्षों में जान गंवानी पड़ी या गंभीर चोटें आईं।

ट्रंप ने खास तौर पर यूएसएस कोल पर हुए हमले में मारे गए लोगों के परिवारों और दूसरे संघर्षों में जान गंवाने वाले लोगों का उल्लेख किया।

ईरान में मारे गए प्रदर्शनकारियों का भी मुद्दा उठाया

ट्रंप ने अपनी मांग को सिर्फ मध्य पूर्व में हुए संघर्षों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने कहा कि ईरान को पिछले कई दशकों के दौरान वहां मारे गए प्रदर्शनकारियों के परिवारों के लिए भी मुआवजा देना चाहिए।

उन्होंने हाल के महीनों में मारे गए हजारों लोगों का भी जिक्र किया और दावा किया कि करीब 52 हजार लोगों के परिवारों को मुआवजा मिलना चाहिए।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को भविष्य में ईरान के साथ होने वाली किसी भी बातचीत में इस मांग को शामिल करने का निर्देश दिया है।

होर्मुज को लेकर दोनों देशों की अलग-अलग मांग

ट्रंप की ताजा मांग ऐसे समय सामने आई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है।

ईरान की ओर से पहले संकेत दिया गया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य को सामान्य रूप से खोलने से पहले अमेरिका को कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी। इनमें कथित नुकसान का मुआवजा, प्रतिबंधों से राहत और सैन्य दबाव में कमी जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं।

अब ट्रंप ने भी बातचीत से पहले मुआवजे की मांग सामने रख दी है। इससे दोनों देशों के बीच किसी संभावित समझौते की राह और मुश्किल हो सकती है।

ईरान ने भी बढ़ाई अपनी सैन्य तैयारी

इसी बीच ईरान की ओर से सैन्य क्षमता और सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। ईरानी नेतृत्व ने देश की सेना और बासिज बलों की रक्षात्मक क्षमताओं को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

ईरान का लक्ष्य संभावित पारंपरिक और आधुनिक सुरक्षा खतरों का तेजी से और प्रभावी तरीके से जवाब देने की क्षमता विकसित करना बताया गया है।

इसके साथ ही सैन्य कमान से जुड़े प्रमुख संस्थानों के बीच समन्वय और एकीकरण को मजबूत करने की दिशा में भी काम किए जाने की बात सामने आई है। इसमें सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ और खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना शामिल है।

क्या बातचीत की राह और मुश्किल होगी?

अमेरिका और ईरान पहले से ही कई गंभीर मुद्दों पर आमने-सामने हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य, सैन्य गतिविधियां, प्रतिबंध, क्षेत्रीय संघर्ष और अब मुआवजे की मांग—इन सभी मुद्दों ने संभावित बातचीत को बेहद जटिल बना दिया है।

ट्रंप की नई शर्त से यह संकेत जरूर मिलता है कि अगर दोनों देशों के बीच वार्ता दोबारा शुरू होती है तो इस बार चर्चा सिर्फ परमाणु कार्यक्रम या युद्धविराम तक सीमित नहीं रहने वाली। अमेरिका पुराने संघर्षों और कथित नुकसान की भरपाई को भी बातचीत के एजेंडे में शामिल करना चाहता है।

ऐसे में अब निगाहें तेहरान की प्रतिक्रिया पर हैं कि वह ट्रंप की मुआवजे की मांग को लेकर क्या रुख अपनाता है और क्या दोनों देशों के बीच किसी समझौते की संभावना आगे बढ़ पाती है।

लखनऊ में हनी ट्रैप चरम पर : प्यार का जाल, FIR और फिर समझौते के नाम पर वसूली? South Zone के गोसाईगंज थाने का वायरल वीडियो उठा रहा गंभीर सवाल

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में प्रेम संबंधों, आपसी विवाद और कानूनी कार्रवाई के बाद कथित तौर पर समझौते के नाम पर धन के लेनदेन का एक मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मामला गोसाईगंज थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है, जहां एक युवक को पहले कथित रूप से प्रेम संबंध में फंसाने, उसके बाद मुकदमा दर्ज कराने और फिर सुलह-समझौते के नाम पर पैसे के लेनदेन के आरोप सामने आए हैं।

वायरल वीडियो में कथित तौर पर कुछ लोग आपसी समझौते और पैसों के लेनदेन को लेकर बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि वीडियो उस युवक के साथ मौजूद एक व्यक्ति ने बनाया, जो पूरे घटनाक्रम का प्रत्यक्षदर्शी था। मामले में युवती का नाम पूजा कश्यप बताया जा रहा है। हालांकि, वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

क्या प्रेम संबंध बनाकर कानून का डर दिखाकर वसूली का खेल चल रहा है?

मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि यदि किसी व्यक्ति को जानबूझकर प्रेम संबंध में उलझाकर, बाद में मुकदमे या पुलिस कार्रवाई का भय दिखाकर धन की मांग की जाती है, तो यह केवल दो लोगों के निजी विवाद का मामला नहीं रह जाता। ऐसी गतिविधियां कानून की प्रक्रिया और वास्तविक पीड़ितों के अधिकारों—दोनों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

किसी महिला या पुरुष द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न, दुष्कर्म या अन्य गंभीर आरोपों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। लेकिन यदि जांच के बाद यह सामने आता है कि कानून का इस्तेमाल किसी को डराने, दबाव बनाने या आर्थिक लाभ लेने के लिए किया गया, तो ऐसे मामलों में भी निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई जरूरी है।

महिलाओं की आजादी नहीं, कानून के दुरुपयोग पर सवाल

इस तरह के मामलों को महिलाओं की स्वतंत्रता पर प्रश्नचिह्न लगाने के तौर पर देखना उचित नहीं होगा। महिलाओं को अपनी पसंद से संबंध बनाने और कानून की मदद लेने का पूरा अधिकार है। सवाल तब खड़ा होता है जब किसी भी लिंग का व्यक्ति-महिला हो या पुरुष-कानूनी प्रावधानों का कथित रूप से दुरुपयोग करके किसी दूसरे व्यक्ति पर दबाव बनाने या धन वसूलने की कोशिश करे।

अगर किसी युवक को झूठे मुकदमे के डर से पैसे देने के लिए मजबूर किया जाता है, तो यह उतना ही गंभीर विषय है जितना किसी महिला को झूठे आरोपों या समझौते के लिए दबाव में डालना।

वायरल वीडियो की पुलिस जांच जरूरी

गोसाईगंज थाना क्षेत्र से सामने आए इस कथित वीडियो की पुलिस द्वारा तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए। वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान, बातचीत का वास्तविक संदर्भ, पैसों के लेनदेन की सत्यता, FIR में लगाए गए आरोप और उसके बाद हुए कथित समझौते-सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि यदि समझौते के नाम पर वास्तव में धन लिया गया है, तो पैसा किसने लिया, किसके कहने पर लिया गया और उसके पीछे वास्तविक कारण क्या था।

पूरे देश के लिए चेतावनी

प्रेम संबंधों में विवाद नई बात नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया और डिजिटल संचार के दौर में कथित ब्लैकमेलिंग, फर्जी पहचान, झूठे मुकदमे की धमकी और समझौते के नाम पर धन मांगने जैसे मामलों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।

युवाओं को भी ऐसे मामलों में सावधान रहने की जरूरत है। किसी भी व्यक्ति के साथ निजी मुलाकात, पैसे के लेनदेन या विवाद की स्थिति में उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित रखना चाहिए और धमकी अथवा ब्लैकमेलिंग की स्थिति में तत्काल पुलिस अथवा कानूनी सहायता लेनी चाहिए।

गोसाईगंज के इस कथित मामले में वायरल वीडियो सच क्या है और आरोपों के पीछे वास्तविक कहानी क्या है, इसका फैसला जांच के बाद ही हो सकेगा। लेकिन एक बात स्पष्ट है-कानून किसी के खिलाफ हथियार नहीं, बल्कि न्याय का माध्यम है। उसका इस्तेमाल यदि दबाव या कथित वसूली के लिए किया जाता है, तो ऐसे मामलों पर भी उतनी ही गंभीरता से कार्रवाई होनी चाहिए।

Sports News:श्रीलंका टेस्ट सीरीज से पहले टीम इंडिया में बड़ा बदलाव, सरफराज खान की हुई वापसी; BCCI ने किया ऐलान

श्रीलंका के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज से पहले भारतीय टीम में बड़ा बदलाव हुआ है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने चोटिल साई सुदर्शन की जगह सरफराज खान को टेस्ट टीम में शामिल करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। साई सुदर्शन पैर की चोट के कारण पूरी टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए हैं।

28 वर्षीय सरफराज लंबे समय बाद भारतीय टेस्ट टीम में वापसी कर रहे हैं। उन्होंने भारत के लिए अपना पिछला टेस्ट मुकाबला नवंबर 2024 में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था। इसके बाद से वह लगातार टीम में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे थे।

गॉल में खेले जाएंगे दोनों टेस्ट

भारतीय टीम इस समय श्रीलंका में मौजूद है। टीम ने हाल ही में श्रीलंका इलेवन के खिलाफ अभ्यास मैच खेला। अब भारतीय खिलाड़ी गॉल के लिए रवाना होंगे, जहां 15 अगस्त से पहला टेस्ट खेला जाना है।

मुकाबला गॉल इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में होगा। BCCI के अनुसार, सरफराज खान गॉल के लिए टीम के रवाना होने से पहले भारतीय कैंप में शामिल हो जाएंगे।

साई सुदर्शन की चोट पर BCCI ने दिया अपडेट

BCCI ने साई सुदर्शन की फिटनेस को लेकर भी जानकारी साझा की है। बोर्ड के मुताबिक सुदर्शन फिलहाल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) में हैं और दाहिने पैर के अंगूठे में हुए स्ट्रेस रिएक्शन से उबर रहे हैं।

उनकी रिकवरी में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है। मेडिकल टीम उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है।

2024 में किया था टेस्ट डेब्यू

सरफराज खान ने 2024 में भारतीय टेस्ट टीम में पदार्पण किया था। उस साल उन्होंने कुल 6 टेस्ट मुकाबले खेले और 11 पारियों में 371 रन बनाए थे।

इस दौरान सरफराज के बल्ले से एक शतक और तीन अर्धशतक निकले। उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ नवंबर 2024 में अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला था। इसके बाद टीम के संयोजन में उनकी जगह नहीं बन सकी।

अब साई सुदर्शन के चोटिल होने के बाद एक बार फिर उन्हें टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। ऐसे में सरफराज के पास खुद को साबित करने का महत्वपूर्ण मौका होगा।

श्रीलंका सीरीज के लिए भारत की अपडेटेड टेस्ट टीम

भारतीय टीम में सरफराज खान के शामिल होने के बाद टेस्ट स्क्वॉड इस प्रकार है:

  • शुभमन गिल (कप्तान)
  • केएल राहुल (उप-कप्तान)
  • यशस्वी जायसवाल
  • ऋषभ पंत (विकेटकीपर)
  • ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर)
  • रवींद्र जडेजा
  • कुलदीप यादव
  • मानव सुथार
  • मोहम्मद सिराज
  • प्रसिद्ध कृष्णा
  • गुरनूर बरार
  • देवदत्त पडिक्कल
  • सारांश जैन
  • आकिब नबी
  • सरफराज खान

भारत-श्रीलंका टेस्ट सीरीज का पूरा शेड्यूल

भारत और श्रीलंका के बीच दो टेस्ट मैच खेले जाएंगे। सीरीज का पहला मुकाबला 15 अगस्त से गॉल इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में शुरू होगा।

इसके बाद दूसरा टेस्ट 23 अगस्त से सिंहली स्पोर्ट्स क्लब क्रिकेट ग्राउंड पर खेला जाएगा। दोनों मुकाबले भारतीय समयानुसार सुबह 10 बजे शुरू होंगे।

मैचों का लाइव प्रसारण सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के चैनलों पर किया जाएगा, जबकि ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग SonyLIV ऐप और वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगी।

सरफराज खान की वापसी से भारतीय टीम के मध्यक्रम को एक अतिरिक्त विकल्प मिला है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उन्हें प्लेइंग इलेवन में मौका मिलता है या टीम मैनेजमेंट दूसरे बल्लेबाजी संयोजन के साथ मैदान पर उतरता है।

गाजा पर ट्रंप की शांति योजना से नेतन्याहू नाखुश, बोले- हमास के हथियार खत्म होने तक नहीं हटेगी IDF

गाजा में जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रस्तावित शांति योजना को लेकर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। नेतन्याहू ने संकेत दिया है कि इजरायल गाजा से अपनी सेना हटाने के फैसले पर तब तक सहमत नहीं होगा, जब तक हमास पूरी तरह हथियार नहीं डाल देता।

अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से गाजा में शांति स्थापित करने के लिए 15 सूत्रीय ‘बोर्ड ऑफ पीस’ योजना का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि, इस योजना के सभी पहलुओं पर इजरायल की सहमति नहीं बनी है।

हमास के पूरी तरह निरस्त्रीकरण पर अड़ा इजरायल

इजरायली मीडिया में सामने आई जानकारी के अनुसार, नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि हमास के हथियार पूरी तरह खत्म होने तक इजरायली सेना गाजा से पीछे नहीं हटेगी।

इजरायली प्रधानमंत्री का कहना है कि केवल हमास की सैन्य क्षमता को कमजोर करना पर्याप्त नहीं होगा। इजरायल चाहता है कि संगठन की हथियारबंद क्षमता का वास्तविक और पूर्ण अंत हो।

नेतन्याहू ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ बातचीत जारी है। ट्रंप प्रशासन की कुछ योजनाओं और प्रस्तावों को इजरायल स्वीकार करता है, जबकि कुछ बिंदुओं पर दोनों देशों के बीच अभी सहमति नहीं बनी है।

बोर्ड ऑफ पीस के अधिकारी से हुई थी नेतन्याहू की मुलाकात

गाजा को लेकर अमेरिकी नेतृत्व में बनाए गए बोर्ड ऑफ पीस के डायरेक्टर निकोले म्लानदेनोव और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच पिछले सप्ताह बैठक हुई थी।

इस बैठक के बाद बोर्ड की ओर से भी संकेत दिया गया कि गाजा से इजरायली सैनिकों की वापसी का मुद्दा हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण से जुड़ा हुआ है। यानी इजरायल की सेना की वापसी तभी संभव मानी जा रही है, जब हमास के हथियार पूरी तरह जब्त कर लिए जाएं।

ट्रंप ने शांति योजना में बड़ी प्रगति का किया था दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने गाजा युद्ध समाप्त करने की अपनी योजना में महत्वपूर्ण प्रगति होने का दावा किया था। इस योजना को लेकर इजरायल और हमास के बीच पिछले साल सहमति बनने की बात कही गई थी और इसकी शुरुआत युद्धविराम से हुई थी।

हालांकि, युद्धविराम के बावजूद गाजा में हिंसा और सैन्य कार्रवाई पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी। इजरायल की ओर से गाजा में हमले जारी रहने की खबरें सामने आती रही हैं।

ट्रंप ने यह भी दावा किया था कि हमास हथियार छोड़ने के लिए तैयार हो गया है। हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमला किया था, जिसके बाद गाजा में बड़े पैमाने पर युद्ध शुरू हुआ।

इजरायल-फिलिस्तीन विवाद की पुरानी जड़ें

इजरायल और फिलिस्तीन के बीच विवाद कई दशकों पुराना है। इसमें जमीन, संप्रभुता, सुरक्षा और फिलिस्तीनी राज्य की मांग जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं।

1948 में इजरायल के गठन के दौरान बड़ी संख्या में फिलिस्तीनियों को अपने घरों से विस्थापित होना पड़ा था। ऐतिहासिक घटनाक्रम के दौरान करीब 7 लाख फिलिस्तीनी विस्थापित हुए और इनमें से बड़ी संख्या में लोगों ने गाजा पट्टी में शरण ली।

समय के साथ गाजा इस लंबे संघर्ष का एक प्रमुख केंद्र बन गया। अब ट्रंप की शांति योजना और हमास के निरस्त्रीकरण को लेकर इजरायल के सख्त रुख ने गाजा में स्थायी युद्धविराम की संभावनाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल अमेरिका और इजरायल के बीच प्रस्तावित शांति योजना के अलग-अलग बिंदुओं पर बातचीत जारी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों पक्षों के बीच किन मुद्दों पर सहमति बनती है और क्या हमास के निरस्त्रीकरण को लेकर कोई ठोस रास्ता निकल पाता है।

Sports News:वैभव सूर्यवंशी की उम्र पर ब्रेट ली ने कही बड़ी बात, बोले- उम्र नहीं, इस चीज पर होना चाहिए ध्यान

भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी ने बेहद कम उम्र में अपने आक्रामक खेल से दुनिया भर के क्रिकेट प्रशंसकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। उनकी उम्र को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। अब ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज ब्रेट ली ने इस बहस को ज्यादा महत्व नहीं देने की बात कही है।

ब्रेट ली के मुताबिक, किसी खिलाड़ी की उम्र पर बहस करने के बजाय उसकी प्रतिभा और मैदान पर प्रदर्शन को देखा जाना चाहिए। उन्होंने वैभव के खेल की तारीफ करते हुए कहा कि अगर वह 15 साल के हैं तो यह अपने आप में शानदार उपलब्धि है। वहीं, अगर उनकी उम्र 17 या 18 वर्ष भी होती, तो इससे उनकी क्रिकेट खेलने की क्षमता पर कोई फर्क नहीं पड़ता।

ली ने साफ कहा कि उन्हें वैभव की उम्र से ज्यादा इस बात में दिलचस्पी है कि यह युवा बल्लेबाज मैदान पर क्या कर सकता है।

उन्होंने कहा, “वह अविश्वसनीय है। भारत के बाहर हर कोई पूछता है कि क्या वह वास्तव में 15 साल का है। मुझे उसकी उम्र से कोई फर्क नहीं पड़ता। यह लड़का क्रिकेट खेलना जानता है।”

तेज गेंदबाजों के खिलाफ भी आक्रामक रहते हैं वैभव

ब्रेट ली ने वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी शैली की खास तौर पर तारीफ की। उन्हें युवा बल्लेबाज का तेज गेंदबाजों के खिलाफ बेखौफ रवैया काफी पसंद आया।

आईपीएल 2026 में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ खेली गई वैभव की 97 रनों की पारी ने ली को खास तौर पर प्रभावित किया था। उस मुकाबले में तेज गेंदबाज लगातार अपनी रफ्तार का इस्तेमाल कर रहे थे, लेकिन वैभव ने शॉर्ट गेंदों के सामने भी अपना आक्रामक रवैया नहीं बदला।

ब्रेट ली के मुताबिक वैभव की खासियत सिर्फ ताकत से गेंद को सीमा रेखा के पार भेजना नहीं है। वह अच्छे क्रिकेटिंग शॉट्स के जरिए भी तेजी से रन बनाने की क्षमता रखते हैं।

युवा बल्लेबाज का यही आत्मविश्वास उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाता है।

बढ़ती लोकप्रियता को संभालना होगी बड़ी चुनौती

ब्रेट ली ने वैभव को लेकर एक महत्वपूर्ण सलाह भी दी। उनका मानना है कि इतनी कम उम्र में अचानक मिली शोहरत और लोगों की बढ़ती उम्मीदों को संभालना वैभव के लिए सबसे बड़ी चुनौती हो सकती है।

ली ने कहा कि उन्हें वैभव की बल्लेबाजी या मौजूदा फॉर्म को लेकर ज्यादा चिंता नहीं है। असली चुनौती उनके लिए मानसिक रूप से मजबूत बने रहना और तेजी से बढ़ती लोकप्रियता को सही तरीके से संभालना होगी।

उन्होंने टीम मैनेजमेंट और वैभव के आसपास मौजूद लोगों से भी अपील की कि युवा खिलाड़ी पर जरूरत से ज्यादा दबाव न बनाया जाए। इस उम्र में उसे सामान्य जीवन जीने और एक बच्चे की तरह अपनी जिंदगी का आनंद लेने का मौका मिलना चाहिए।

अगर वैभव के सामने गेंदबाजी करते तो क्या करते ब्रेट ली?

ब्रेट ली से जब पूछा गया कि अगर अपने क्रिकेट करियर के दौरान उन्हें वैभव के खिलाफ गेंदबाजी करने का मौका मिलता तो वह क्या रणनीति अपनाते, तो पूर्व ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज ने अपनी योजना स्पष्ट कर दी।

उन्होंने कहा कि सबसे पहले वह वैभव की बल्लेबाजी को ध्यान से पढ़ते और उनकी कमजोरियों को समझने की कोशिश करते। इसके बाद वह युवा बल्लेबाज के शरीर को निशाना बनाते हुए तेज बाउंसर डालते।

ली के मुताबिक, अगर वैभव उस बाउंसर पर छक्का भी लगा देते, तब भी वह अपनी रणनीति नहीं बदलते। वह अगली गेंद पर भी उन्हें चुनौती देने के लिए तैयार रहते।

आईपीएल के बाद टीम इंडिया में मिली जगह

वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय टी20 टीम में भी जगह बनाई। इंग्लैंड के खिलाफ उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन इसके बाद जिम्बाब्वे दौरे पर उन्होंने जोरदार वापसी की।

जिम्बाब्वे दौरे पर वैभव ने अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया और प्लेयर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार भी अपने नाम किया।

अब ब्रेट ली जैसे दिग्गज तेज गेंदबाज की तारीफ से वैभव की प्रतिभा पर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, ली की सलाह साफ है—इस युवा खिलाड़ी की उम्र पर बहस करने के बजाय उसके खेल और प्रतिभा को आगे बढ़ने का मौका दिया जाना चाहिए।