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ईरानी खतरे के बीच ट्रंप की गुप्त उड़ान, तुर्किए से एयरफोर्स वन छोड़ दूसरे विमान में हुए रवाना

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने तुर्किए से वापसी के दौरान ट्रंप ने अपने आधिकारिक एयरफोर्स वन के बजाय एक गुप्त सैन्य विमान से उड़ान भरी थी। माना जा रहा है कि यह फैसला ईरान की ओर से सामने आए कथित जान के खतरे को देखते हुए लिया गया था।

दिलचस्प बात यह रही कि राष्ट्रपति की असली यात्रा को गुप्त रखने के लिए एक तरह की सुरक्षा रणनीति अपनाई गई। व्हाइट हाउस की ओर से पहले संकेत दिया गया था कि ट्रंप अपने आधिकारिक विमान से ही रवाना होंगे, लेकिन असल में उन्हें दूसरे विमान में स्थानांतरित कर दिया गया।

तुर्किए से निकलते वक्त बदली गई पूरी योजना

डोनाल्ड ट्रंप नाटो सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए तुर्किए की राजधानी अंकारा पहुंचे थे। यात्रा के दौरान उन्होंने कतर की ओर से उपलब्ध कराए गए और हाल ही में अपग्रेड किए गए विमान का इस्तेमाल किया था।

लेकिन वापसी के समय सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह बदल दी गई। ईरान के साथ बढ़ते तनाव और राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर चिंता के बीच ट्रंप को आधिकारिक विमान से अलग कर एक छोटे सैन्य विमान में पहुंचाया गया।

इस पूरी कवायद को इस तरह अंजाम दिया गया कि बाहर से देखने वालों को यही लगे कि राष्ट्रपति पुराने एयरफोर्स वन से ही यात्रा कर रहे हैं।

कैटरिंग ट्रक की आड़ में बदला विमान

राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए अपनाई गई रणनीति काफी गोपनीय रखी गई थी। ट्रंप को एयरपोर्ट पर कैटरिंग ट्रक की आड़ में छोटे सैन्य विमान Air Force C-32A तक पहुंचाया गया।

वहीं दूसरी ओर ट्रंप के पुराने एयरफोर्स वन को ही उनकी वास्तविक उड़ान के रूप में पेश किया गया। इससे वहां मौजूद पत्रकारों और व्हाइट हाउस के कई कर्मचारियों को भी यह पता नहीं चल पाया कि राष्ट्रपति असल में किस विमान में हैं।

यात्रा के दौरान पत्रकारों को विमान की खिड़कियों के पर्दे बंद रखने के लिए भी कहा गया था। इससे विमान के अंदर और बाहर की गतिविधियों को देखने की संभावना और कम हो गई।

ट्रंप ने पत्रकारों से किया मजाक

बाद में जब ट्रंप से इस पूरी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने संकेत दिया कि यह यात्रा जोखिम भरी हो सकती थी और अगर उनके साथ कुछ हो जाता तो विमान में मौजूद अन्य लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती थी।

सुरक्षा योजना के तहत ट्रंप गुप्त विमान से ब्रिटेन के RAF Mildenhall एयरबेस पहुंचे। उनके वहां पहुंचने के कुछ ही समय बाद पत्रकारों को लेकर पुराना एयरफोर्स वन भी वहां पहुंच गया।

इसके बाद ट्रंप दोबारा अपने मुख्य विमान में लौटे और एयरबेस पर मौजूद अमेरिकी सैनिकों से मुलाकात की।

पहले भी अपनाई जा चुकी है ऐसी रणनीति

राष्ट्रपति को सुरक्षा कारणों से असली विमान से अलग विमान में भेजने की रणनीति अमेरिकी इतिहास में नई नहीं है। इससे पहले साल 2000 में तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पाकिस्तान यात्रा के दौरान भी ऐसी ही एक रणनीति अपनाए जाने की जानकारी सामने आई थी।

उस समय भी राष्ट्रपति की वास्तविक उड़ान को छिपाने के लिए एक वैकल्पिक विमान का इस्तेमाल किया गया था। इसका उद्देश्य संभावित सुरक्षा खतरों के बीच राष्ट्रपति की सही लोकेशन और यात्रा की जानकारी को गुप्त रखना था।

ट्रंप के मामले में ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच इस तरह की सुरक्षा व्यवस्था ने एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज कर दी है। हालांकि, ट्रंप की यात्रा के दौरान सुरक्षा खतरे की वास्तविक प्रकृति और उसकी गंभीरता को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

Sports News:जीत में सबसे ज्यादा शतक लगाने वालों की लिस्ट में कोहली नंबर-1, सचिन और पोंटिंग भी पीछे

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शतकों का जिक्र हो तो सबसे पहले सचिन तेंदुलकर का नाम आता है। भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाज सचिन ने अपने लंबे करियर में कुल 100 इंटरनेशनल सेंचुरी लगाकर ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जिसे आज भी सबसे बड़ी व्यक्तिगत उपलब्धियों में गिना जाता है। हालांकि, जब बात टीम की जीत में लगाए गए शतकों की होती है तो तस्वीर थोड़ी अलग नजर आती है।

इस खास आंकड़े में विराट कोहली ने सचिन तेंदुलकर समेत कई दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है। कोहली ने अपनी टीम की जीत में अब तक 59 शतक लगाए हैं और इस मामले में वह दुनिया के सबसे आगे बल्लेबाज हैं।

जीत में शतक लगाने के मामले में कोहली सबसे आगे

विराट कोहली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाजों की ओवरऑल सूची में सचिन तेंदुलकर के बाद दूसरे स्थान पर हैं। कोहली के नाम फिलहाल 85 इंटरनेशनल सेंचुरी दर्ज हैं।

लेकिन जब सिर्फ उन शतकीय पारियों को देखा जाता है, जिनमें उनकी टीम को जीत मिली, तो कोहली नंबर-1 पर पहुंच जाते हैं। उन्होंने जीत वाले मुकाबलों में 59 शतक लगाए हैं।

इस सूची में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग 55 शतकों के साथ दूसरे स्थान पर हैं। सचिन तेंदुलकर ने टीम की जीत में 53 शतक लगाए और वह तीसरे नंबर पर हैं।

भारत के कप्तान रह चुके रोहित शर्मा 41 शतकों के साथ चौथे स्थान पर हैं, जबकि दक्षिण अफ्रीका के पूर्व बल्लेबाज हाशिम अमला 40 शतकों के साथ टॉप-5 में शामिल हैं।

जीत में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले टॉप-5 बल्लेबाज

  1. विराट कोहली (भारत) – 59* शतक
  2. रिकी पोंटिंग (ऑस्ट्रेलिया) – 55 शतक
  3. सचिन तेंदुलकर (भारत) – 53 शतक
  4. रोहित शर्मा (भारत) – 41* शतक
  5. हाशिम अमला (दक्षिण अफ्रीका) – 40 शतक

विराट कोहली और रोहित शर्मा अभी सक्रिय खिलाड़ियों में शामिल हैं, जबकि बाकी तीन बल्लेबाज अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं।

क्या सचिन के 100 शतकों का रिकॉर्ड तोड़ पाएंगे कोहली?

विराट कोहली के पास सचिन तेंदुलकर के 100 अंतरराष्ट्रीय शतकों के रिकॉर्ड तक पहुंचने का अभी भी मौका है। 85 सेंचुरी के साथ कोहली इस रिकॉर्ड के सबसे करीब पहुंचने वाले सक्रिय बल्लेबाज हैं।

हालांकि, उनके लिए यह चुनौती आसान नहीं होगी। कोहली ने 2024 में टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया था और 2025 में टेस्ट क्रिकेट से भी संन्यास ले लिया। अब वह सिर्फ वनडे क्रिकेट में खेल रहे हैं।

37 साल की उम्र में केवल एक फॉर्मेट खेलते हुए 100 इंटरनेशनल शतकों तक पहुंचने के लिए उन्हें 15 और सेंचुरी की जरूरत है। ऐसे में सचिन का रिकॉर्ड तोड़ना उनके लिए काफी मुश्किल चुनौती हो सकती है।

जो रूट भी कोहली के पीछे

सक्रिय खिलाड़ियों में विराट कोहली के बाद इंग्लैंड के स्टार बल्लेबाज जो रूट का नाम आता है। रूट अब तक 61 अंतरराष्ट्रीय शतक लगा चुके हैं। हालांकि, कोहली से वह काफी पीछे हैं।

अब बड़ा सवाल यही है कि क्या विराट कोहली अपने करियर के बचे हुए समय में 15 और शतक लगाकर सचिन तेंदुलकर के 100 इंटरनेशनल शतकों के ऐतिहासिक रिकॉर्ड की बराबरी या उसे पार कर पाएंगे। क्रिकेट फैंस की नजरें आने वाले वनडे मुकाबलों में उनके प्रदर्शन पर टिकी रहेंगी।

Travel Update:Vrindavan Prem Mandir जाने से पहले जान लें ये 3 Rules, लापरवाही पड़ सकती है भारी

वृंदावन का प्रेम मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक और दर्शनीय स्थलों में शामिल है। अपनी भव्य वास्तुकला, खूबसूरत नक्काशी और आकर्षक रोशनी के कारण यह मंदिर श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों के बीच भी काफी लोकप्रिय है। यहां भारत के अलग-अलग हिस्सों के अलावा विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

अगर आप भी आने वाले दिनों में प्रेम मंदिर जाने का प्लान बना रहे हैं तो दर्शन से पहले वहां के नियम और मर्यादा जरूर जान लें। धार्मिक स्थल होने के कारण परिसर में अनुशासन और स्वच्छता बनाए रखना जरूरी है। नियमों की अनदेखी करने पर मंदिर प्रबंधन की ओर से कार्रवाई की जा सकती है और कुछ मामलों में जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

1. मंदिर परिसर में गंदगी न फैलाएं

प्रेम मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में परिसर की साफ-सफाई बनाए रखना बेहद जरूरी है। कई बार लोग पानी की बोतल, प्लास्टिक पैकेट, खाने का रैपर या अन्य कचरा इधर-उधर छोड़ देते हैं।

ऐसा करने से मंदिर की स्वच्छता प्रभावित होती है और नियमों के तहत कार्रवाई की स्थिति बन सकती है। कुछ जगहों पर गंदगी फैलाने पर जुर्माने का प्रावधान होने की जानकारी भी सामने आती है, इसलिए किसी भी तरह का कचरा खुले में फेंकने से बचें।

क्या करें?

मंदिर परिसर में रखे डस्टबिन का इस्तेमाल करें। पूजा सामग्री, बोतल, पैकेट या खाने-पीने से जुड़ा कोई भी कचरा निर्धारित स्थान पर ही डालें। मंदिर परिसर को साफ रखने में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

2. प्रतिबंधित सामान लेकर न पहुंचें

प्रेम मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों पर कुछ वस्तुओं को लेकर प्रवेश से जुड़े नियम हो सकते हैं। इसलिए मंदिर जाने से पहले यह जरूर पता कर लें कि कौन-कौन सी चीजें परिसर के अंदर ले जाने की अनुमति है और किन सामानों पर रोक है।

खाने-पीने की वस्तुओं और अन्य प्रतिबंधित सामान को लेकर नियमों का पालन करना जरूरी है। कैमरा या प्रोफेशनल फोटोग्राफी से जुड़े नियम भी अलग हो सकते हैं। बिना अनुमति फोटो या वीडियो बनाने की कोशिश करने पर परेशानी हो सकती है।

अगर कोई व्यक्ति प्रतिबंधित सामान छिपाकर परिसर में ले जाने की कोशिश करता है तो सुरक्षा जांच के दौरान उसे रोका जा सकता है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में सामान जमा कराने या प्रवेश से रोकने जैसी कार्रवाई भी संभव है।

क्या करें?

मंदिर जाने से पहले जरूरी सामान की ही जांच करके साथ जाएं। मोबाइल, पर्स और आवश्यक व्यक्तिगत वस्तुओं को निर्धारित नियमों के अनुसार लेकर जाएं। किसी वस्तु को लेकर संदेह हो तो प्रवेश से पहले मंदिर प्रशासन या सुरक्षा कर्मचारियों से जानकारी ले लें।

3. रील और वीडियो बनाते समय सावधानी बरतें

आज के समय में धार्मिक स्थलों पर फोटो और वीडियो बनाने का चलन काफी बढ़ गया है। कई लोग सोशल मीडिया के लिए रील शूट करने लगते हैं। लेकिन धार्मिक स्थल पर ऐसा करते समय वहां की गरिमा और नियमों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

मंदिर परिसर में डांस रील, अशोभनीय वीडियो या ऐसी गतिविधि करने से बचें जिससे दूसरे श्रद्धालुओं को परेशानी हो। अगर किसी स्थान पर फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी प्रतिबंधित है तो वहां कैमरा या मोबाइल का इस्तेमाल न करें।

क्या करें?

सिर्फ उन्हीं स्थानों पर फोटो और वीडियो बनाएं जहां इसकी अनुमति हो। किसी भी तरह की रील बनाते समय मंदिर की धार्मिक मर्यादा और वहां मौजूद श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखें।

मंदिर की नक्काशी और संपत्ति को न पहुंचाएं नुकसान

प्रेम मंदिर की खूबसूरती का बड़ा हिस्सा इसकी शानदार नक्काशी और स्थापत्य कला है। यहां आने वाले पर्यटकों को मंदिर की दीवारों, खंभों और सजावटी हिस्सों को नुकसान पहुंचाने से पूरी तरह बचना चाहिए।

दीवार पर कुछ लिखना, नक्काशी को खरोंचना, सजावटी वस्तुओं को छूकर नुकसान पहुंचाना या मंदिर की किसी संपत्ति को खराब करना गंभीर लापरवाही मानी जा सकती है। ऐसी स्थिति में मंदिर प्रबंधन या संबंधित अधिकारियों की ओर से कार्रवाई की जा सकती है।

प्रेम मंदिर जाते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • मंदिर परिसर में कूड़ा न फैलाएं।
  • प्रतिबंधित वस्तुएं लेकर जाने से बचें।
  • फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के नियमों का पालन करें।
  • धार्मिक स्थल पर डांस या अशोभनीय रील न बनाएं।
  • मंदिर की दीवारों, नक्काशी और दूसरी संपत्तियों को नुकसान न पहुंचाएं।
  • किसी भी नियम को लेकर भ्रम हो तो मंदिर प्रशासन से जानकारी लें।

नोट: मंदिर के नियम, फोटोग्राफी की अनुमति और जुर्माने से जुड़े प्रावधान समय के साथ बदल सकते हैं। यात्रा से पहले स्थानीय मंदिर प्रशासन से ताजा जानकारी लेना बेहतर रहेगा।

Health Update:Best Before, Use By और Expiry Date में क्या फर्क? तारीख निकलने के बाद कौन सा खाना खाएं और कौन सा तुरंत फेंकें

फ्रिज से दूध का पैकेट निकालते ही अगर आपकी नजर सबसे पहले उस पर लिखी तारीख पर जाती है और तारीख बीतने पर आप उसे तुरंत फेंक देते हैं, तो ऐसा करने वाले आप अकेले नहीं हैं। पैकेट पर छपी अलग-अलग तारीखों को लेकर अक्सर लोगों में भ्रम रहता है। बहुत से लोग मान लेते हैं कि किसी भी तारीख के गुजरने के बाद खाद्य पदार्थ खाना सुरक्षित नहीं रहता।

लेकिन Best Before, Use By, Sell By और Expiry Date का मतलब एक जैसा नहीं होता। कुछ तारीखें मुख्य रूप से खाने की गुणवत्ता से जुड़ी होती हैं, जबकि कुछ खाद्य सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। इसलिए किसी प्रोडक्ट की तारीख देखकर उसे फेंकने से पहले लेबल का सही मतलब समझना जरूरी है।

Best Before का मतलब क्या होता है?

Best Before आम तौर पर प्रोडक्ट की गुणवत्ता से संबंधित तारीख होती है। इसका अर्थ यह है कि उस तारीख तक खाद्य पदार्थ अपने बेहतर स्वाद, खुशबू, रंग और बनावट में रहने की उम्मीद होती है।

इस तारीख के गुजरने का मतलब यह जरूरी नहीं कि खाना उसी समय खराब या जहरीला हो गया। सही तरीके से स्टोर किए गए कई पैकेज्ड और कम नमी वाले खाद्य पदार्थ Best Before डेट के बाद भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

हालांकि, समय बीतने के साथ उनकी गुणवत्ता में बदलाव आ सकता है। उदाहरण के लिए बिस्किट की कुरकुराहट कम हो सकती है, चिप्स नरम पड़ सकते हैं या किसी प्रोडक्ट का स्वाद पहले जैसा नहीं रह सकता।

इसलिए Best Before को गुणवत्ता की सीमा समझना चाहिए, न कि हर स्थिति में सुरक्षा की अंतिम तारीख।

Use By या Expiry Date क्यों ज्यादा महत्वपूर्ण है?

Use By या Expiry Date को लेकर ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। ये तारीखें खासकर जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों के मामले में महत्वपूर्ण होती हैं।

दूध, कुछ डेयरी उत्पाद, ताजा मांस, मछली और अन्य जल्दी खराब होने वाली चीजों में समय और तापमान के साथ हानिकारक सूक्ष्मजीव बढ़ सकते हैं। समस्या यह है कि हर बार खराब भोजन का पता केवल देखकर या सूंघकर नहीं लगाया जा सकता।

इसलिए अगर किसी जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थ पर Use By या Expiry Date दी गई है, तो उसे तारीख निकलने के बाद खाने का जोखिम नहीं लेना चाहिए।

Sell By का क्या मतलब है?

Sell By मुख्य रूप से दुकानदारों और रिटेल स्टोर के लिए इस्तेमाल होने वाली तारीख हो सकती है। इसका उद्देश्य यह बताना होता है कि प्रोडक्ट को बिक्री के लिए कितने समय तक डिस्प्ले किया जाना चाहिए।

यह तारीख अपने आप में यह साबित नहीं करती कि उस दिन के बाद खाद्य पदार्थ तुरंत खराब हो गया है। हालांकि, ग्राहक को हमेशा प्रोडक्ट के दूसरे लेबल, स्टोरेज निर्देश और वास्तविक स्थिति को भी ध्यान में रखना चाहिए।

Freeze By किसलिए लिखा होता है?

कुछ उत्पादों पर Freeze By जैसी तारीख भी देखने को मिल सकती है। इसका संबंध आमतौर पर प्रोडक्ट की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उसे कब तक फ्रीज करना बेहतर रहेगा, इससे होता है।

ऐसी तारीख को भी Use By या Expiry Date के बराबर नहीं समझना चाहिए। प्रोडक्ट पर दिए गए स्टोरेज निर्देशों का पालन करना सबसे जरूरी है।

Manufacturing Date क्या बताती है?

Manufacturing Date या निर्माण की तारीख यह बताती है कि उत्पाद कब तैयार किया गया था। इससे ग्राहक को प्रोडक्ट की उम्र समझने में मदद मिलती है।

लेकिन केवल निर्माण की तारीख देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि कोई खाद्य पदार्थ अभी सुरक्षित है या नहीं। इसके लिए Best Before, Use By या Expiry Date और स्टोरेज निर्देशों को भी देखना चाहिए।

Best Before निकल गया है तो क्या खाना फेंक दें?

हर बार ऐसा करना जरूरी नहीं है। अगर किसी पैकेज्ड खाद्य पदार्थ पर Best Before डेट निकल गई है, तो पहले यह देखें कि उसे निर्माता के निर्देश के मुताबिक रखा गया था या नहीं।

पैकेट सही स्थिति में है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण है। अगर पैकेज फटा हुआ है, उसमें नमी चली गई है, फफूंद दिखाई दे रही है, असामान्य बदबू आ रही है या भोजन की स्थिति संदिग्ध लग रही है तो उसे इस्तेमाल न करें।

लेकिन केवल Best Before तारीख गुजर जाने से यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं कि खाद्य पदार्थ उसी क्षण असुरक्षित हो गया।

किन खाद्य पदार्थों में ज्यादा सावधानी जरूरी है?

जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों के मामले में तारीख और स्टोरेज को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इनमें आम तौर पर शामिल हैं:

  • ताजा मांस और चिकन
  • मछली और समुद्री खाद्य पदार्थ
  • कुछ डेयरी उत्पाद
  • दूध और ताजा खाद्य पदार्थ
  • तैयार करके रखे गए जल्दी खराब होने वाले भोजन

इन चीजों को सही तापमान पर रखना बेहद जरूरी है। अगर लेबल पर Use By या Expiry Date दी गई है तो उसके बाद इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

क्या सिर्फ सूंघकर खराब खाना पहचाना जा सकता है?

नहीं। यह मान लेना सुरक्षित नहीं है कि अगर भोजन की खुशबू और रंग सामान्य है तो वह निश्चित रूप से सुरक्षित भी है। कुछ हानिकारक बैक्टीरिया भोजन को देखने, सूंघने या चखने से आसानी से पहचाने नहीं जा सकते।

इसलिए जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों के मामले में सिर्फ अपनी इंद्रियों पर निर्भर रहने के बजाय लेबल, स्टोरेज तापमान और Use By/Expiry Date को प्राथमिकता दें।

खाने की बर्बादी कम करने के आसान तरीके

खाद्य पदार्थों को बेवजह फेंकने से बचने के लिए कुछ आदतें अपनाई जा सकती हैं:

  • खरीदारी से पहले घर में मौजूद सामान की जांच करें।
  • जरूरत के हिसाब से ही खाद्य पदार्थ खरीदें।
  • पुराने पैकेट आगे और नए पैकेट पीछे रखें, ताकि पहले पुराना सामान इस्तेमाल हो।
  • जल्दी खराब होने वाले भोजन को निर्देश के मुताबिक फ्रिज या फ्रीजर में रखें।
  • पैकेट खोलने के बाद उस पर दिए गए स्टोरेज निर्देशों का पालन करें।
  • Best Before और Use By/Expiry Date के बीच का अंतर समझें।
  • संदिग्ध, फफूंद लगे, खराब पैकेज या गलत तरीके से स्टोर किए गए भोजन को खाने का जोखिम न लें।

सबसे जरूरी बात

हर तारीख का मतलब ‘इस दिन के बाद खाना जहरीला हो जाएगा’ नहीं होता। Best Before मुख्य रूप से गुणवत्ता का संकेत हो सकता है, जबकि Use By या Expiry Date खासकर जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों में सुरक्षा से जुड़ी ज्यादा गंभीर चेतावनी हो सकती है।

इसलिए अगली बार किसी पैकेट पर तारीख देखकर उसे तुरंत कूड़ेदान में डालने से पहले यह जरूर देखें कि उस पर Best Before लिखा है या Use By/Expiry। साथ ही प्रोडक्ट की पैकेजिंग, स्टोरेज और स्थिति को भी ध्यान में रखें। वहीं, अगर खाद्य पदार्थ की सुरक्षा को लेकर संदेह हो तो जोखिम लेने के बजाय उसे फेंक देना ही बेहतर है।

नेपाल-बांग्लादेश के बीच भारत की कूटनीतिक सक्रियता तेज, दोनों PM से हुई अहम बातचीत

भारत ने नेपाल और बांग्लादेश के साथ अपने रिश्तों को लेकर एक साथ दो अहम कूटनीतिक कदम उठाए हैं। 10 अगस्त 2026 को काठमांडू में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से मुलाकात की। इसी दिन बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान से बातचीत की।

दोनों मुलाकातें ऐसे समय में हुई हैं, जब भारत के अपने दोनों पड़ोसी देशों के साथ संबंध कई संवेदनशील मुद्दों से गुजर रहे हैं। नेपाल में चीन की बढ़ती मौजूदगी और बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को लेकर भारत और ढाका के बीच पैदा हुई तल्खी के बीच इन बैठकों को खास महत्व दिया जा रहा है।

बालेन शाह से पहली वन-ऑन-वन मुलाकात

काठमांडू में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव और नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के बीच हुई बैठक को खास माना जा रहा है। प्रधानमंत्री बनने के बाद शाह की किसी विदेशी राजनयिक के साथ यह पहली व्यक्तिगत यानी वन-ऑन-वन बैठक बताई जा रही है।

बैठक में भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय संबंधों, आपसी हितों, विकास परियोजनाओं और दोनों देशों के बीच जारी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने मौजूदा साझेदारी को आगे बढ़ाने और सहयोग के नए रास्ते तलाशने पर भी बातचीत की।

नवीन श्रीवास्तव ने बैठक के बाद भारत-नेपाल संबंधों को मजबूत और बहुआयामी साझेदारी बताते हुए इसे आगे बढ़ाने को लेकर चर्चा की जानकारी दी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बालेन शाह को शुभकामनाएं भी दीं।

चीन के साथ भी नेपाल का बढ़ रहा संपर्क

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह इससे पहले विदेशी राजदूतों के साथ व्यक्तिगत मुलाकातों की जगह सामूहिक बैठकों को प्राथमिकता देते रहे हैं। ऐसे में भारतीय राजदूत के साथ उनकी पहली वन-ऑन-वन बातचीत को कूटनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि भारतीय राजदूत से मुलाकात के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री की चीन के राजदूत झांग माओमिंग के साथ भी व्यक्तिगत बातचीत का कार्यक्रम बताया गया है।

भारत की ओर से बालेन शाह को पद संभालने के बाद देश आने का न्योता भी दिया जा चुका है। हालांकि, अभी तक उनकी भारत यात्रा नहीं हो पाई है। ऐसे में दोनों देशों के बीच शीर्ष स्तर की कूटनीतिक बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिशों पर नजर बनी हुई है।

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से भी मिले भारतीय उच्चायुक्त

उधर, बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने भी 10 अगस्त को प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की। दोनों के बीच करीब आधे घंटे तक बातचीत हुई।

ढाका में भारत के उच्चायुक्त के रूप में जिम्मेदारी संभालने के छह सप्ताह से ज्यादा समय बाद त्रिवेदी की प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ यह पहली मुलाकात बताई जा रही है।

बैठक में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और आपसी साझेदारी को मजबूत करने से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई। ऐसे समय में यह मुलाकात हुई है जब भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में कई संवेदनशील मुद्दों को लेकर चर्चा जारी है।

तारिक रहमान की भारत यात्रा पर भी नजर

तारिक रहमान के सितंबर में भारत आने को लेकर भी स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। भारत की ओर से उन्हें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण दिए जाने की बात सामने आई है, लेकिन उनके सम्मेलन में शामिल होने को लेकर अभी अटकलें बनी हुई हैं।

दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने की एक प्रमुख वजह पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का भारत में रहना और उनके सार्वजनिक बयानों को लेकर ढाका की नाराजगी भी है।

शेख हसीना ने हाल में मीडिया से बातचीत में संकेत दिया था कि वह तमाम कानूनी जोखिमों के बावजूद बांग्लादेश लौटने और देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने के अपने इरादे पर कायम हैं।

शेख हसीना के बयान पर ढाका ने जताई थी नाराजगी

भारत में शेख हसीना की ओर से मीडिया को दिए गए बयान पर बांग्लादेश सरकार ने आपत्ति जताई थी। ढाका का कहना था कि इस तरह की गतिविधियों से वहां के लोगों की भावनाएं प्रभावित हुई हैं और भारत-बांग्लादेश संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों को नुकसान पहुंच सकता है।

बांग्लादेश ने शेख हसीना पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं और उन्हें देश से बाहर रहने वाली आरोपी के तौर पर पेश किया है।

हालांकि, भारत ने इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि शेख हसीना से जुड़े मीडिया कार्यक्रम के आयोजन में भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं थी। भारतीय पक्ष ने यह भी स्पष्ट किया था कि उस कार्यक्रम में बांग्लादेश सरकार को लेकर कही गई बातों से वह खुद को जोड़कर नहीं देखता।

पड़ोसी देशों पर भारत की नजर

नेपाल और बांग्लादेश में एक ही दिन हुई इन दोनों उच्चस्तरीय मुलाकातों को भारत की पड़ोसी देशों के साथ सक्रिय कूटनीति के तौर पर देखा जा रहा है। एक तरफ नेपाल में चीन का प्रभाव भारत के लिए अहम रणनीतिक मुद्दा है, वहीं बांग्लादेश के साथ राजनीतिक बदलाव के बाद संबंधों को स्थिर करना नई दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण है।

ऐसे में दोनों पड़ोसी देशों के प्रधानमंत्रियों के साथ भारतीय प्रतिनिधियों की बातचीत आने वाले दिनों में क्षेत्रीय कूटनीति और भारत की पड़ोसी नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।