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लखनऊ में दिल्ली निवासी पीड़िता से बीते दिनों हुई मारपीट और जान से मारने की धमकी की FIR के बाद भी आरोपी प्रेम कुमार सिंह ‘विपिन’ के साथ विभूतिखंड पुलिस की कथित नजदीकी? पीड़िता का गंभीर आरोप- “कार्रवाई के बजाय आरोपी के साथ बैठकर चाय पी रही पुलिस”

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में महिला सुरक्षा और पुलिस की कार्यशैली से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। विभूतिखंड थाने में एक युवती के साथ कथित मारपीट और जान से मारने की धमकी के आरोप में FIR दर्ज होने के बावजूद पीड़िता ने पुलिस पर ही गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पीड़िता का आरोप है कि जिस व्यक्ति के खिलाफ उसने गंभीर आरोप लगाए और जिसके खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया, उसके खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई करने के बजाय पुलिस कथित रूप से उसी के प्रति नरमी बरत रही है।

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि पुलिस आरोपी प्रेम कुमार सिंह उर्फ विपिन के साथ उठ-बैठ रही है, उसके साथ चाय पी रही है और उसे वह कार्रवाई नहीं झेलनी पड़ रही है जिसकी एक गंभीर आपराधिक शिकायत के बाद उम्मीद की जाती है।

यदि पीड़िता द्वारा लगाए गए ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो मामला केवल एक महिला के साथ कथित हिंसा का नहीं रहेगा, बल्कि पुलिस की निष्पक्षता, आरोपी को कथित संरक्षण और महिला की शिकायत को नजरअंदाज किए जाने का भी गंभीर मामला बन सकता है।

19 जुलाई 2026 को दर्ज हुई FIR, BNS की दो गंभीर धाराओं में मुकदमा

उपलब्ध FIR की प्रति के अनुसार मामला थाना विभूतिखंड, कमिश्नरेट लखनऊ का है। FIR संख्या 0247 दिनांक 19 जुलाई 2026 को दर्ज की गई। FIR में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 115(2) और 351(3) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

पुलिस दस्तावेज में मामले की जांच SI गौरव कुमार को सौंपी गई है। FIR में आरोपी के तौर पर प्रेम कुमार सिंह उर्फ विपिन का नाम दर्ज है। पीड़िता ने SI गौरव के खिलाफ भी आरोपी से मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए हैं।

दस्तावेज के मुताबिक पुलिस को घटना की सूचना 19 जुलाई 2026 को रात 8:29 बजे मिली और उसी समय से संबंधित जनरल डायरी प्रविष्टि भी दर्ज की गई।

यानी यह कोई केवल मौखिक शिकायत या सोशल मीडिया पर लगाया गया आरोप नहीं है, बल्कि पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज FIR के रूप में मामला आधिकारिक रूप से दर्ज है।

मां तक पहुंची बेटी की परेशानी, सामने आया रिश्ते के भीतर कथित हिंसा का मामला

FIR में दर्ज तहरीर के अनुसार शिकायतकर्ता ने अपनी बेटी से संबंधित गंभीर आरोप पुलिस के सामने रखे हैं। दस्तावेज में बताया गया है कि युवती आरोपी प्रेम कुमार सिंह उर्फ विपिन के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी।

शिकायत के अनुसार युवती ने अपनी मां को फोन कर अपनी स्थिति बताई और आरोप लगाया कि उसके साथ मारपीट की जा रही है तथा उसे जान से मारने की धमकी दी जा रही है।

यहां मामला इसलिए संवेदनशील हो जाता है क्योंकि कथित हिंसा किसी सार्वजनिक विवाद में नहीं, बल्कि एक निजी रिश्ते के भीतर होने का आरोप है। ऐसे मामलों में पीड़िता कई बार परिवार, समाज और आरोपी के दबाव के बीच अपनी बात सामने नहीं रख पाती।

यही कारण है कि जब किसी महिला की ओर से घरेलू अथवा निजी रिश्ते के भीतर हिंसा और धमकी की शिकायत सामने आती है तो उसकी सुरक्षा और स्वतंत्र इच्छा को प्राथमिकता देना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

FIR के बाद पीड़िता ने पुलिस पर ही लगाए गंभीर आरोप

मामले में सबसे गंभीर और चिंताजनक पहलू FIR से आगे सामने आया है।

पीड़िता का आरोप है कि पुलिस आरोपी के खिलाफ यथोचित कार्रवाई नहीं कर रही है। इसके विपरीत उसका आरोप है कि पुलिस का व्यवहार आरोपी के प्रति बेहद नरम है और पुलिसकर्मी कथित तौर पर आरोपी के साथ उठ-बैठ रहे हैं तथा उसके साथ चाय पी रहे हैं। जोकि सामान्य आरोप नहीं है।

अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ महिला से मारपीट और जान से मारने की धमकी जैसे आरोपों में FIR दर्ज है और उसी मामले की पीड़िता यह आरोप लगाए कि पुलिस आरोपी के साथ सामान्य से भी अधिक घनिष्ठ व्यवहार कर रही है, तो इस आरोप की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।

क्योंकि यदि पुलिस और आरोपी के बीच कथित नजदीकी की बात गलत है तो पुलिस के पास तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करने का पूरा अधिकार है। लेकिन यदि जांच में पीड़िता के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि एक दर्ज मुकदमे के आरोपी के साथ पुलिस का ऐसा व्यवहार क्यों था?

क्या आरोपी को पुलिस से मिल रहा है कथित संरक्षण?

पीड़िता के आरोपों का सबसे गंभीर हिस्सा यही है। एक तरफ FIR में आरोपी के खिलाफ मारपीट और गंभीर धमकी के आरोप दर्ज हैं, दूसरी तरफ पीड़िता पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या आरोपी के खिलाफ जांच उतनी ही निष्पक्षता से आगे बढ़ रही है जितनी किसी अन्य आरोपी के मामले में बढ़नी चाहिए?

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सिर्फ FIR दर्ज होने से कोई व्यक्ति दोषी साबित नहीं हो जाता और गिरफ्तारी भी हर मामले में स्वतः अनिवार्य नहीं होती। आरोपी के खिलाफ कार्रवाई कानून और जांच में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए।

लेकिन दूसरी तरफ, अगर पीड़िता लगातार यह शिकायत कर रही है कि उसे खतरा है और पुलिस आरोपी के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रही, तो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा मामले की निगरानी और पीड़िता की सुरक्षा का स्वतंत्र मूल्यांकन बेहद जरूरी हो जाता है।

‘चाय पीने’ का आरोप क्यों बना गंभीर सवाल?

पहली नजर में किसी पुलिसकर्मी के किसी व्यक्ति से बातचीत करना या चाय पीना अपने आप में अपराध नहीं है। लेकिन किसी दर्ज आपराधिक मामले के आरोपी और जांच कर रही पुलिस के बीच कथित नजदीकी को लेकर पीड़िता सवाल उठा रही हो, तो उस व्यवहार की परिस्थितियों को जांचना जरूरी हो जाता है।

मसलन-

  • आरोपी से पुलिसकर्मी की मुलाकात कब और कहां हुई?
  • मुलाकात किस उद्देश्य से हुई?
  • क्या उस समय आरोपी से पूछताछ या जांच संबंधी कोई प्रक्रिया चल रही थी?
  • क्या कोई अन्य पुलिसकर्मी या स्वतंत्र व्यक्ति वहां मौजूद था?
  • क्या आरोपी को थाने अथवा अन्य स्थान पर बुलाया गया था?
  • क्या पीड़िता की शिकायत के बावजूद आरोपी के साथ पुलिस का असामान्य व्यवहार हुआ?
  • क्या जांच अधिकारी को इस संपर्क की जानकारी थी?

इन सवालों का जवाब वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।

महिला सुरक्षा का असली सवाल: पीड़िता खुद पुलिस पर भरोसा क्यों नहीं कर पा रही?

महिला सुरक्षा का अर्थ केवल मुकदमा दर्ज करना नहीं है। जब कोई महिला पुलिस के पास जाती है तो उसे उम्मीद होती है कि पुलिस उसकी बात सुनेगी, उसे सुरक्षित महसूस कराएगी और यदि उसके साथ अपराध हुआ है तो निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई करेगी। लेकिन इस मामले में पीड़िता खुद पुलिस की भूमिका पर सवाल उठा रही है।

यह स्थिति इसलिए गंभीर है क्योंकि अगर किसी महिला को कथित हिंसा के बाद आरोपी से खतरे के साथ-साथ पुलिस की निष्पक्षता पर भी संदेह होने लगे, तो उसके लिए न्याय की प्रक्रिया और भी कठिन हो सकती है।

ऐसे में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी सिर्फ आरोपी के खिलाफ जांच तक सीमित नहीं रह जाती। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि पीड़िता को किसी दबाव, धमकी या प्रतिशोध का सामना न करना पड़े और वह स्वतंत्र रूप से अपना पक्ष रख सके।

पुलिस की जांच में इन सवालों का जवाब मिलना बेहद जरूरी

इस पूरे मामले में अब जांच केवल FIR में लगाए गए आरोपों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यदि पीड़िता ने पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं तो उन आरोपों की भी जांच आवश्यक है।

जांच में यह देखा जा सकता है कि-

1. युवती के साथ कथित मारपीट कब-कब हुई?
क्या यह एक घटना थी या कथित तौर पर लंबे समय से ऐसा हो रहा था?

2. चोटों के कोई चिकित्सकीय साक्ष्य हैं या नहीं?
यदि चोट लगी थी तो मेडिकल परीक्षण और उसकी रिपोर्ट महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकती है।

3. फोन कॉल और डिजिटल साक्ष्य क्या कहते हैं?
पीड़िता, आरोपी और परिवार के बीच हुई बातचीत, मैसेज, रिकॉर्डिंग अथवा अन्य उपलब्ध डिजिटल साक्ष्य मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

4. घटनास्थल के CCTV फुटेज की जांच हुई या नहीं?
यदि कथित घटना किसी ऐसे स्थान पर हुई जहां CCTV कैमरे मौजूद हैं तो फुटेज महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकता है।

5. पड़ोसियों अथवा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान लिए गए या नहीं?

6. आरोपी ने पीड़िता को कथित तौर पर धमकी क्यों दी और किस परिस्थिति में दी?

7. सबसे महत्वपूर्ण-पीड़िता द्वारा पुलिस पर लगाए गए आरोपों की जांच कौन करेगा?

वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में जांच क्यों जरूरी?

जब किसी FIR के आरोपी के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पीड़िता स्वयं स्थानीय पुलिस पर सवाल उठाती है, तो निष्पक्षता का भरोसा कायम करने के लिए मामले की निगरानी किसी वरिष्ठ अधिकारी द्वारा किया जाना महत्वपूर्ण हो जाता है।

ऐसे में लखनऊ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को चाहिए कि वे पीड़िता की शिकायत को गंभीरता से लें और FIR की जांच, आरोपी के साथ पुलिस के कथित संपर्क और पीड़िता की सुरक्षा-तीनों पहलुओं की अलग-अलग समीक्षा करें।

यदि पुलिस पर लगाए गए आरोप निराधार हैं तो तथ्य सामने आ जाएंगे।

और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

अब सवाल सिर्फ आरोपी से नहीं, पुलिस से भी

इस पूरे मामले में अब कई सवाल लखनऊ पुलिस के सामने हैं-

  • क्या आरोपी प्रेम कुमार सिंह उर्फ विपिन के खिलाफ FIR के बाद नियमानुसार कार्रवाई हुई?
  • क्या पीड़िता की सुरक्षा का स्वतंत्र आकलन किया गया?
  • क्या पीड़िता द्वारा पुलिस पर लगाए गए गंभीर आरोपों की जांच की गई?
  • क्या पुलिस और आरोपी के बीच कथित नजदीकी की जांच होगी?
  • क्या मामले की जांच वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में कराई जाएगी?

और सबसे महत्वपूर्ण-

अगर जांच में यह सामने आता है कि आरोपी को पुलिसकर्मियों की ओर से किसी तरह का अनुचित संरक्षण या विशेष सुविधा दी गई, तो क्या संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी विभागीय और कानूनी कार्रवाई होगी?

अब देखना यह है-आरोपी पर कार्रवाई या पुलिस की कथित मेहरबानी?

इस मामले में अब निगाहें लखनऊ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों पर हैं।

एक तरफ पुलिस रिकॉर्ड में FIR मौजूद है। दूसरी तरफ महिला सुरक्षा से जुड़े गंभीर आरोप हैं। तीसरी तरफ पीड़िता स्वयं पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रही है।

ऐसे में यह मामला केवल ‘आरोपी गिरफ्तार हुआ या नहीं’ तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

जरूरी यह है कि पीड़िता को यह भरोसा मिले कि पुलिस आरोपी के पक्ष में नहीं, कानून के पक्ष में खड़ी है।

यदि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं तो कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। यदि पीड़िता के आरोपों में तथ्य हैं तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। और यदि पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो उनकी जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है।

True News UP इस मामले में किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं कर रहा है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही होगी। लेकिन एक महिला द्वारा पुलिस की कार्यशैली पर लगाए गए गंभीर आरोपों को नजरअंदाज करना भी उचित नहीं होगा।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है-क्या इस खबर के बाद लखनऊ पुलिस पीड़िता की शिकायत को गंभीरता से लेकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएगी, आरोपी के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई करेगी और पुलिस पर लगे आरोपों की भी जांच कराएगी?

क्योंकि महिला सुरक्षा का भरोसा तभी कायम रहेगा, जब पीड़िता को यह महसूस हो कि कानून की ताकत उसके साथ है—और किसी आरोपी को पुलिस की कथित नजदीकी का सहारा नहीं।

नोट: इस रिपोर्ट में आरोपी के संबंध में लिखी गई बातें FIR में दर्ज आरोपों और पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस समय नहीं हुई है। आरोपी का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

आरडी बर्मन की बायोपिक में राजेश खन्ना का किरदार निभाएंगे अक्षय कुमार? 10 दिन शूट की चर्चा

अक्षय कुमार एक बार फिर किसी चर्चित बायोपिक का हिस्सा बन सकते हैं। खबरों की मानें तो दिग्गज म्यूजिक कंपोजर आरडी बर्मन की जिंदगी पर बन रही फिल्म में अक्षय कुमार एक खास भूमिका निभाते नजर आ सकते हैं। चर्चा है कि उन्हें सुपरस्टार राजेश खन्ना के किरदार के लिए चुना जा सकता है।

अगर ऐसा होता है तो यह भूमिका अक्षय के लिए बेहद खास होगी, क्योंकि राजेश खन्ना उनके ससुर थे और दोनों के बीच पारिवारिक रिश्ता रहा है। हालांकि, अभी तक फिल्म में अक्षय की कास्टिंग को लेकर मेकर्स की तरफ से आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

राजेश खन्ना के किरदार में नजर आ सकते हैं अक्षय

आरडी बर्मन की बायोपिक का निर्देशन नीरज पांडे कर रहे हैं। अक्षय कुमार और नीरज पांडे पहले भी ‘बेबी’ और ‘स्पेशल 26’ जैसी फिल्मों में साथ काम कर चुके हैं। अब दोनों की जोड़ी एक बार फिर बड़े प्रोजेक्ट में नजर आ सकती है।

फिल्म से जुड़ी चर्चाओं के मुताबिक, अक्षय कुमार को राजेश खन्ना की भूमिका के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। आरडी बर्मन और राजेश खन्ना के बीच बेहद खास दोस्ती और प्रोफेशनल बॉन्ड था। ऐसे में फिल्म में दोनों के रिश्ते को अहम जगह मिलने की उम्मीद है।

कहा जा रहा है कि अक्षय की इस भूमिका को लंबे समय तक दिखाने के बजाय एक एक्सटेंडेड कैमियो के रूप में रखा जाएगा। उनकी शूटिंग करीब 10 दिनों में पूरी होने की संभावना है।

इमरान हाशमी निभा सकते हैं महमूद का रोल

आरडी बर्मन की बायोपिक में सिर्फ राजेश खन्ना ही नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी से जुड़े कई दूसरे महत्वपूर्ण किरदार भी दिखाई देने वाले हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिनेता इमरान हाशमी को मशहूर कॉमेडियन और अभिनेता महमूद के किरदार के लिए चुना जा सकता है।

फिल्म अभी प्री-प्रोडक्शन स्टेज में है और मेकर्स इसे सितंबर में फ्लोर पर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, कास्टिंग को लेकर सामने आ रही ज्यादातर जानकारी अभी रिपोर्ट्स और इंडस्ट्री चर्चाओं पर आधारित है।

फरहान अख्तर निभाएंगे आरडी बर्मन की भूमिका

फिल्म में आरडी बर्मन का मुख्य किरदार फरहान अख्तर निभाने वाले हैं। बताया जा रहा है कि अभिनेता ने इस भूमिका के लिए तैयारी भी शुरू कर दी है। आरडी बर्मन भारतीय फिल्म संगीत के सबसे प्रभावशाली संगीतकारों में गिने जाते हैं और उनकी जिंदगी पर बनने वाली यह फिल्म उनके करियर के साथ-साथ निजी रिश्तों पर भी फोकस कर सकती है।

नीरज पांडे और फरहान अख्तर मिलकर इस प्रोजेक्ट को प्रोड्यूस भी कर रहे हैं। नीरज पांडे के करियर में यह दूसरी बड़ी बायोपिक होगी। इससे पहले वह भारतीय क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी की जिंदगी पर फिल्म बना चुके हैं।

मेकर्स आरडी बर्मन की जिंदगी से जुड़े कई अन्य चर्चित लोगों के किरदारों के लिए भी कलाकारों को जोड़ने की तैयारी में हैं। ऐसे में फिल्म की स्टारकास्ट आने वाले समय में और बड़ी हो सकती है।

अक्षय कुमार के पास कई बड़े प्रोजेक्ट

वर्कफ्रंट की बात करें तो अक्षय कुमार लगातार कई फिल्मों पर काम कर रहे हैं। हाल के दिनों में वह ‘भूत बंगला’ और ‘वेलकम टू द जंगल’ जैसी फिल्मों को लेकर चर्चा में रहे हैं।

‘वेलकम टू द जंगल’ में अक्षय के साथ परेश रावल, रवीना टंडन और सुनील शेट्टी समेत कई कलाकार नजर आए। फिल्म का निर्देशन अहमद खान ने किया था और इसमें बड़ी संख्या में कलाकारों की मौजूदगी देखने को मिली।

अब अक्षय कुमार के पास ‘हैवान’, ‘गोलमाल 5’, ‘Vedat Marathe Veer Daudle Saat’ और अनीस बज्मी की एक अनटाइटल्ड फिल्म जैसे कई प्रोजेक्ट बताए जा रहे हैं।

फिलहाल आरडी बर्मन की बायोपिक में अक्षय कुमार की एंट्री को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। अगर वह राजेश खन्ना का किरदार निभाते हैं तो यह फिल्म उनके लिए व्यक्तिगत और सिनेमाई, दोनों लिहाज से खास प्रोजेक्ट साबित हो सकती है।

Sports Update:भारत ने बनाए थे 664 रन, नंबर-8 पर उतरे बल्लेबाज ने ठोका शतक; 11 खिलाड़ियों ने बनाया अनोखा रिकॉर्ड

भारतीय क्रिकेट टीम इन दिनों श्रीलंका के खिलाफ आगामी दो मैचों की टेस्ट सीरीज की तैयारी कर रही है। सीरीज की शुरुआत 15 अगस्त से होनी है। इस बीच क्रिकेट इतिहास के एक ऐसे मुकाबले की याद ताजा करते हैं, जिसमें टीम इंडिया ने इंग्लैंड के खिलाफ पहली पारी में 664 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था। खास बात यह थी कि भारत के नंबर-8 बल्लेबाज ने शतक जमाया और टीम के सभी 11 खिलाड़ियों ने दहाई का आंकड़ा पार किया था।

यह मुकाबला साल 2007 में भारत के इंग्लैंड दौरे के दौरान खेला गया था। दोनों टीमों के बीच तीन टेस्ट मैचों की सीरीज का तीसरा और अंतिम मुकाबला 9 अगस्त से शुरू हुआ था। टॉस के बाद भारतीय टीम पहले बल्लेबाजी करने उतरी और दूसरे दिन उसकी पहली पारी 664 रन पर समाप्त हुई।

नंबर-8 पर उतरे अनिल कुंबले ने जड़ा शतक

भारत के लिए इस पारी का सबसे खास आकर्षण अनिल कुंबले का शतक रहा। टीम में नंबर-8 पर बल्लेबाजी करने आए कुंबले ने 16 चौकों और एक छक्के की मदद से नाबाद 110 रन बनाए।

कुंबले के अलावा भारत की ओर से कई बल्लेबाजों ने अहम पारियां खेलीं। एमएस धोनी 92 रन बनाकर शतक से चूक गए, जबकि दिनेश कार्तिक ने 91 रन बनाए। सचिन तेंदुलकर ने 82 रन की पारी खेली।

राहुल द्रविड़ ने 55 और वीवीएस लक्ष्मण ने 51 रन बनाए। इसके अलावा वसीम जाफर ने 35, सौरव गांगुली ने 37, जहीर खान ने 11, आरपी सिंह ने 11 और एस श्रीसंत ने 35 रन का योगदान दिया।

भारत ने बनाया था बेहद खास रिकॉर्ड

इस पारी की सबसे बड़ी खासियत केवल 664 रन का स्कोर या कुंबले का शतक नहीं था। भारतीय टीम ने एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया था, जो टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में बेहद खास रहा।

भारत की पहली पारी में सभी 11 बल्लेबाजों ने कम से कम 10 रन बनाए थे। यानी किसी भी भारतीय बल्लेबाज का स्कोर सिंगल डिजिट में नहीं रहा। पांच दशक के टेस्ट इतिहास में यह भारतीय टीम की ऐसी पहली पारी थी, जिसमें सभी खिलाड़ियों ने दहाई का आंकड़ा पार किया।

इसी मुकाबले में अनिल कुंबले ने एक और खास उपलब्धि अपने नाम की। 36 साल और 296 दिन की उम्र में शतक लगाने के साथ वह ओवल के मैदान पर टेस्ट शतक बनाने वाले सबसे उम्रदराज एशियाई बल्लेबाज बने थे।

664 रन बनाने के बाद भी जीत नहीं सका भारत

इतना बड़ा स्कोर खड़ा करने के बावजूद भारतीय टीम मैच अपने नाम नहीं कर सकी। 664 रन के जवाब में इंग्लैंड की पहली पारी 345 रन पर सिमट गई।

भारत को पहली पारी में बड़ी बढ़त मिली, जिसके बाद टीम इंडिया ने दूसरी पारी में 6 विकेट खोकर 180 रन बनाए और पारी घोषित कर दी। इंग्लैंड के सामने मुकाबला जीतने के लिए 500 रन का लक्ष्य रखा गया।

इंग्लैंड ने लक्ष्य का पीछा करते हुए मैच के अंत तक 6 विकेट पर 369 रन बनाए। निर्धारित समय तक नतीजा नहीं निकल सका और मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हो गया।

इस मैच में भारतीय टीम जीत से भले ही दूर रही, लेकिन 664 रन की पारी और सभी 11 बल्लेबाजों के दहाई का आंकड़ा पार करने का रिकॉर्ड आज भी इसे टेस्ट क्रिकेट की यादगार पारियों में शामिल करता है।

सिद्धिविनायक मंदिर पहुंचीं प्रियंका चोपड़ा, पिंक सूट में दिखा खूबसूरत देसी अंदाज

बॉलीवुड से हॉलीवुड तक अपनी पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा इन दिनों भारत में हैं। सोमवार को उन्हें मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में देखा गया। प्रियंका यहां भगवान गणेश के दर्शन और आशीर्वाद लेने पहुंची थीं। मंदिर से बाहर निकलते समय उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

मंदिर पहुंचने के दौरान प्रियंका चोपड़ा बेहद सादगी भरे अंदाज में नजर आईं। उन्होंने पिंक कलर का सूट पहना हुआ था। दर्शन के बाद जब वह अपनी कार की ओर बढ़ीं तो वहां मौजूद लोगों और फैंस ने उनकी तस्वीरें और वीडियो बनाए।

सिद्धिविनायक मंदिर में प्रियंका ने किए दर्शन

प्रियंका चोपड़ा इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म ‘वाराणसी’ को लेकर चर्चा में हैं। एसएस राजामौली की इस बड़े बजट की फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में वह भारत आई हैं। इससे पहले उन्हें हैदराबाद में देखा गया था, जहां वह अपने पति निक जोनस और बेटी मालती मैरी के साथ नजर आई थीं।

अब प्रियंका मुंबई पहुंच चुकी हैं और यहां उन्होंने सिद्धिविनायक मंदिर में जाकर गणपति बप्पा के दर्शन किए। इस दौरान उनके साथ निक जोनस या बेटी मालती नजर नहीं आईं। मंदिर से निकलकर कार में बैठने से पहले प्रियंका ने वहां मौजूद फैंस की तरफ हाथ हिलाया और मुस्कुराकर उनका अभिवादन किया।

‘वाराणसी’ में महेश बाबू और पृथ्वीराज के साथ दिखेंगी प्रियंका

प्रियंका चोपड़ा जल्द ही निर्देशक एसएस राजामौली की महत्वाकांक्षी फिल्म ‘वाराणसी’ में नजर आएंगी। फिल्म में साउथ सुपरस्टार महेश बाबू मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। प्रियंका और महेश बाबू के अलावा पृथ्वीराज सुकुमारन भी फिल्म का अहम हिस्सा हैं।

फिल्म का फर्स्ट लुक और इससे जुड़ा वीडियो पहले ही दर्शकों के सामने आ चुका है। फिल्म में प्रियंका का किरदार ‘मंदाकिनी’ बताया गया है, जो एक इतिहासकार की भूमिका में दिखाई देंगी। वहीं महेश बाबू ‘रुद्रा’ के किरदार में नजर आएंगे। पृथ्वीराज सुकुमारन फिल्म में खलनायक ‘कुंभा’ का रोल निभा रहे हैं।

‘वाराणसी’ को बड़े स्तर पर तैयार किया जा रहा है और इसकी कहानी व विजुअल्स को लेकर दर्शकों के बीच अभी से उत्सुकता बनी हुई है। फिल्म की दुनियाभर में रिलीज 7 अप्रैल 2027 को प्रस्तावित है।

निक जोनस के साथ शादी और बेटी मालती

प्रियंका चोपड़ा ने अमेरिकी सिंगर और एक्टर निक जोनस के साथ शादी की है। दोनों की मुलाकात के बाद दोस्ती प्यार में बदली और दिसंबर 2018 में दोनों ने राजस्थान के जोधपुर स्थित उम्मेद भवन पैलेस में शादी की।

प्रियंका और निक की शादी काफी भव्य रही थी। दोनों ने क्रिश्चियन और हिंदू परंपराओं के अनुसार शादी की थी। क्रिश्चियन समारोह में प्रियंका ने Ralph Lauren का डिजाइनर गाउन पहना था, जबकि हिंदू विवाह समारोह में वह सब्यसाची मुखर्जी के डिजाइन किए लाल लहंगे में नजर आई थीं।

शादी के बाद प्रियंका और निक माता-पिता भी बने। दोनों की बेटी का जन्म सरोगेसी के जरिए हुआ, जिसका नाम मालती मैरी चोपड़ा जोनस रखा गया है। प्रियंका ने समय के साथ बेटी का चेहरा भी फैंस के सामने दिखाया है, हालांकि वह अभी भी मालती को ज्यादा सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रखती हैं।

प्रियंका के पास हैं कई बड़े प्रोजेक्ट

प्रियंका चोपड़ा लगातार बॉलीवुड और हॉलीवुड दोनों में काम कर रही हैं। उनकी पिछली फिल्म ‘द ब्लफ’ रही थी। अब उनके खाते में एसएस राजामौली की ‘वाराणसी’ के अलावा दो और अंग्रेजी भाषा की फिल्में हैं।

प्रियंका ‘Amri’ और ‘Judgment Day’ में भी नजर आएंगी। दोनों प्रोजेक्ट फिलहाल पोस्ट-प्रोडक्शन चरण में बताए जा रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में प्रियंका चोपड़ा के फैंस को एक के बाद एक कई इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स में उन्हें देखने का मौका मिलेगा।

मिडिल ईस्ट में US की बड़ी सैन्य घेराबंदी, 20+ वॉरशिप तैनात; ईरान को लेकर ट्रंप का क्या प्लान?

मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिका ने क्षेत्र में 20 से ज्यादा युद्धपोत तैनात किए हैं। इन अमेरिकी नौसैनिक जहाजों को कई अहम सैन्य अभियानों में लगाया गया है, जिनमें ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी को लागू करना भी शामिल है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर बातचीत अभी निर्णायक स्तर तक नहीं पहुंची है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के मुताबिक, समुद्री नाकेबंदी लागू होने के बाद अमेरिकी सेना ने दर्जनों वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को प्रभावित किया है। 9 अगस्त तक कम से कम 55 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदले जाने की बात कही गई है। इसके अलावा दो जहाजों को निष्क्रिय किए जाने और दो अन्य जहाजों पर कार्रवाई किए जाने का भी दावा किया गया है।

मध्य पूर्व में अमेरिकी युद्धपोतों की तैनाती बढ़ी

अमेरिकी नौसेना का युद्धपोत USS Ross भी इस मिशन का हिस्सा है। जहाज पर तैनात अमेरिकी नौसैनिक समुद्री गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं और अमेरिकी आदेशों को लागू कराने में जुटे हैं। क्षेत्र में मौजूद 20 से ज्यादा अमेरिकी युद्धपोतों को अलग-अलग सैन्य अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

अमेरिका की इस तैनाती का सबसे अहम केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य बना हुआ है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया के तेल और गैस व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा इस रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां लंबे समय तक तनाव रहने का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार और ऊर्जा कीमतों पर भी पड़ सकता है।

होर्मुज को लेकर ईरान और अमेरिका आमने-सामने

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपनी शर्तें स्पष्ट कर दी हैं। तेहरान का कहना है कि समुद्री मार्ग को सामान्य रूप से खोलने से पहले अमेरिका को उसकी कुछ प्रमुख मांगों पर सहमति बनानी होगी।

ईरान की मांगों में कथित नुकसान के लिए मुआवजा, प्रतिबंधों को हटाना और सैन्य दबाव तथा धमकियों को खत्म करना शामिल है। ईरान का यह भी कहना है कि इन मुद्दों पर ठोस प्रगति के बिना वह समुद्री रास्ते को लेकर अपनी मौजूदा नीति में बड़ा बदलाव नहीं करेगा।

दूसरी ओर, ईरान ने ओमान के साथ एक संभावित समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के संकेत दिए हैं। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच होर्मुज क्षेत्र में अलग शिपिंग रूट तय किए जाने की संभावना है। हालांकि, इससे अमेरिका और ईरान के बीच मुख्य विवाद पूरी तरह खत्म होता नजर नहीं आ रहा है।

अमेरिका-ईरान के बीच सीधे बातचीत नहीं

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक, फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच सीधे तौर पर बातचीत नहीं हो रही है। उनका कहना है कि जब तक वॉशिंगटन जून में हुए अंतरिम समझौते से जुड़े प्रावधानों का उल्लंघन करता रहेगा, तब तक तेहरान सीधे वार्ता के लिए तैयार नहीं होगा।

हालांकि, दोनों देशों के बीच संपर्क पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। अराघची ने बताया कि मध्यस्थ देशों और अन्य चैनलों के जरिए दोनों पक्षों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी है।

ट्रंप के सामने बड़ी चुनौती

मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और ईरान की सख्त शर्तों के बीच राष्ट्रपति ट्रंप के सामने एक मुश्किल संतुलन कायम करने की चुनौती है। एक तरफ अमेरिका ईरान पर दबाव बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर ट्रंप युद्ध को लंबा खींचने के बजाय किसी समझौते की संभावना तलाशने की बात करते रहे हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी गतिरोध अब केवल अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव का मुद्दा नहीं रह गया है। इस समुद्री मार्ग पर लंबे समय तक किसी भी तरह की रुकावट से वैश्विक तेल आपूर्ति, शिपिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर व्यापक असर पड़ सकता है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत और समुद्री गतिविधियों पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।