अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय लगातार नए मोड़ लेता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को एक बार फिर सख्त संदेश देते हुए ईरान से मुआवजे की मांग की है। ट्रंप का आरोप है कि मध्य पूर्व के कई हिस्सों में हुई तबाही और बड़ी संख्या में लोगों की मौत के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
ट्रंप ने संकेत दिया कि भविष्य में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत होती है तो मुआवजे का मुद्दा भी चर्चा का अहम हिस्सा होगा। उन्होंने लेबनान, सीरिया, यमन और गाजा में हुई हिंसा और नुकसान का जिक्र करते हुए ईरान पर जिम्मेदारी तय करने की बात कही।
ट्रंप बोले- ईरान से हम भी मांगेंगे मुआवजा
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि ईरान अब अमेरिका से मुआवजे की मांग कर रहा है, लेकिन पहले हुई बातचीत या बैठकों में तेहरान ने इस विषय को उनके सामने नहीं उठाया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह भी ईरान से उन लोगों के लिए मुआवजा मांग रहे हैं, जिन्हें उनके मुताबिक ईरान से जुड़े संघर्षों में जान गंवानी पड़ी या गंभीर चोटें आईं।
ट्रंप ने खास तौर पर यूएसएस कोल पर हुए हमले में मारे गए लोगों के परिवारों और दूसरे संघर्षों में जान गंवाने वाले लोगों का उल्लेख किया।
ईरान में मारे गए प्रदर्शनकारियों का भी मुद्दा उठाया
ट्रंप ने अपनी मांग को सिर्फ मध्य पूर्व में हुए संघर्षों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने कहा कि ईरान को पिछले कई दशकों के दौरान वहां मारे गए प्रदर्शनकारियों के परिवारों के लिए भी मुआवजा देना चाहिए।
उन्होंने हाल के महीनों में मारे गए हजारों लोगों का भी जिक्र किया और दावा किया कि करीब 52 हजार लोगों के परिवारों को मुआवजा मिलना चाहिए।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को भविष्य में ईरान के साथ होने वाली किसी भी बातचीत में इस मांग को शामिल करने का निर्देश दिया है।
होर्मुज को लेकर दोनों देशों की अलग-अलग मांग
ट्रंप की ताजा मांग ऐसे समय सामने आई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है।
ईरान की ओर से पहले संकेत दिया गया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य को सामान्य रूप से खोलने से पहले अमेरिका को कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी। इनमें कथित नुकसान का मुआवजा, प्रतिबंधों से राहत और सैन्य दबाव में कमी जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं।
अब ट्रंप ने भी बातचीत से पहले मुआवजे की मांग सामने रख दी है। इससे दोनों देशों के बीच किसी संभावित समझौते की राह और मुश्किल हो सकती है।
ईरान ने भी बढ़ाई अपनी सैन्य तैयारी
इसी बीच ईरान की ओर से सैन्य क्षमता और सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। ईरानी नेतृत्व ने देश की सेना और बासिज बलों की रक्षात्मक क्षमताओं को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
ईरान का लक्ष्य संभावित पारंपरिक और आधुनिक सुरक्षा खतरों का तेजी से और प्रभावी तरीके से जवाब देने की क्षमता विकसित करना बताया गया है।
इसके साथ ही सैन्य कमान से जुड़े प्रमुख संस्थानों के बीच समन्वय और एकीकरण को मजबूत करने की दिशा में भी काम किए जाने की बात सामने आई है। इसमें सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ और खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना शामिल है।
क्या बातचीत की राह और मुश्किल होगी?
अमेरिका और ईरान पहले से ही कई गंभीर मुद्दों पर आमने-सामने हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य, सैन्य गतिविधियां, प्रतिबंध, क्षेत्रीय संघर्ष और अब मुआवजे की मांग—इन सभी मुद्दों ने संभावित बातचीत को बेहद जटिल बना दिया है।
ट्रंप की नई शर्त से यह संकेत जरूर मिलता है कि अगर दोनों देशों के बीच वार्ता दोबारा शुरू होती है तो इस बार चर्चा सिर्फ परमाणु कार्यक्रम या युद्धविराम तक सीमित नहीं रहने वाली। अमेरिका पुराने संघर्षों और कथित नुकसान की भरपाई को भी बातचीत के एजेंडे में शामिल करना चाहता है।
ऐसे में अब निगाहें तेहरान की प्रतिक्रिया पर हैं कि वह ट्रंप की मुआवजे की मांग को लेकर क्या रुख अपनाता है और क्या दोनों देशों के बीच किसी समझौते की संभावना आगे बढ़ पाती है।


































