
लखनऊ। देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने की दिशा में सरकार लगातार प्रयास कर रही है। प्रदूषण कम करने और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को लेकर लोगों में भी तेजी से रुचि बढ़ी है। लेकिन इसी बीच लखनऊ में एक इलेक्ट्रिक बाइक की खरीद से जुड़ा मामला सामने आया है, जिसने ईवी ग्राहकों को मिलने वाली बिक्री के बाद की सेवाओं और चार्जिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लखनऊ निवासी उपभोक्ता और पेशे से अधिवक्ता ईशांत प्रताप सिंह सेंगर ने आरोप लगाया है कि उन्होंने 14 अगस्त को इंदिरा नगर स्थित सन मोटर्स के शोरूम से लगभग ₹1.50 लाख की इलेक्ट्रिक बाइक खरीदी थी, जिस पर Hero और Vida की संयुक्त ब्रांडिंग की गई थी। ईशांत के मुताबिक वाहन खरीदने के महज एक सप्ताह के भीतर ही उसका चार्जर खराब हो गया।
चार्जर खराब हुआ तो 15 दिन का समय बताया गया
कस्टमर ईशांत का आरोप है कि चार्जर में खराबी आने के बाद उन्होंने शोरूम और संबंधित लोगों से संपर्क किया। उन्हें चार्जर बदलने के लिए करीब 15 दिन का समय दिया गया। उनका कहना है कि निर्धारित समय के बाद जब उन्हें दूसरा चार्जर उपलब्ध कराया गया और उन्होंने उसे इस्तेमाल किया तो वह भी ठीक से काम नहीं कर रहा था।
मामले को लेकर ईशान ने सवाल उठाया कि यदि किसी ग्राहक से करीब डेढ़ लाख रुपये की इलेक्ट्रिक बाइक खरीदवाई जाती है तो उसके साथ दी जाने वाली मूलभूत चार्जिंग सुविधा और आफ्टर-सेल्स सर्विस इतनी कमजोर क्यों है?
पेड चार्जिंग मेंबरशिप को लेकर भी उठाया सवाल
ईशांत प्रताप सिंह सेंगर ने आरोप लगाया कि चार्जर से जुड़ी समस्या के दौरान उन्हें शोरूम की ओर से पेड चार्जिंग मेंबरशिप लेने की बात बताई गई। ईशान का दावा है कि उन्हें ऐसा लगा कि चार्जर संबंधी समस्या के समाधान के बजाय उन्हें शोरूम की सशुल्क चार्जिंग सुविधा लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
हालांकि, इस पूरे आरोप पर संबंधित शोरूम अथवा कंपनी का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
ईवी के नाम पर ग्राहक सेवा पर सवाल
इस मामले ने इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री के साथ-साथ उनकी आफ्टर-सेल्स सर्विस, वारंटी, चार्जर रिप्लेसमेंट और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
ईवी खरीदने वाले ग्राहक के लिए चार्जर वाहन का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि वाहन खरीदने के कुछ ही दिनों बाद चार्जर खराब हो जाए और उसके रिप्लेसमेंट में लंबा समय लगे, तो ग्राहक के सामने वाहन के इस्तेमाल का संकट पैदा होना स्वाभाविक है।
ईशांत का कहना है कि उन्होंने इस मामले को इसलिए सार्वजनिक करने का निर्णय लिया, ताकि अन्य ग्राहक इलेक्ट्रिक वाहन खरीदते समय केवल वाहन की कीमत और फीचर्स ही नहीं, बल्कि वारंटी, चार्जर की गारंटी, रिप्लेसमेंट प्रक्रिया, सर्विस नेटवर्क और पेड चार्जिंग की शर्तों की भी पूरी जानकारी लें।
सरकार की ईवी नीति के बीच उठी व्यवस्था पर बहस
केंद्र और राज्य सरकारें इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने, प्रदूषण कम करने और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था विकसित करने पर जोर दे रही हैं। ऐसे में ईवी बाजार में ग्राहकों का भरोसा बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
यदि किसी ग्राहक को वाहन खरीदने के बाद चार्जिंग अथवा सर्विस से जुड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है, तो इसका सीधा असर इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति उपभोक्ताओं के विश्वास पर पड़ सकता है।
हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि किसी एक ग्राहक के मामले के आधार पर पूरे इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग या किसी कंपनी की व्यवस्था पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इस मामले में संबंधित कंपनी और शोरूम का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
वीडियो सामने आने के बाद कार्रवाई का इंतजार
ईशांत प्रताप सिंह सेंगर ने मामले को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए संबंधित संस्थान की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अब देखना यह होगा कि मामले से जुड़ा वीडियो और शिकायत सामने आने के बाद संबंधित कंपनी, शोरूम अथवा उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े अधिकारी इस मामले में क्या संज्ञान लेते हैं।
फिलहाल यह मामला ई-व्हीकल खरीदने वाले ग्राहकों के अधिकार, चार्जर की वारंटी, आफ्टर-सेल्स सर्विस और पेड चार्जिंग व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल जरूर खड़ा करता है- क्या ग्राहक को इलेक्ट्रिक वाहन खरीदते समय मिलने वाली सुविधाओं और बाद की सेवाओं की शर्तें पर्याप्त रूप से स्पष्ट की जा रही हैं?


































