Home Blog Page 1155

इजरायल-हिजबुल्ला सीजफायर के बाद अमेरिका और भारत का अहम बयान, जानें दोनों देशों ने क्या कहा?

वाशिंगटन/नई दिल्लीः इजरायल-हिजबुल्लाह के बीच सीज फायर (युद्ध विराम) का ऐलान होने के बाद अमेरिका और भारत का बड़ा बयान सामने आया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि “हम इजरायल और हिजबुल्लाह में हुए शांति समझौते का स्वागत करते हैं। हम हमेशा हमलों में वृद्धि को रखने शांति स्थापित करने और बातचीत के रास्ते पर लौटने की पक्षधर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि इस फैसले से पूरे क्षेत्र में शांति और स्थिरता आएगी। “

वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन नेकहाकि इजरायल और लेबनान के हिज्बुल्ला ने अमेरिकी मध्यस्थता वाले शांति समझौते को स्वीकार कर लिया है, जिसे दोनों पक्षों के बीच शत्रुता की ‘‘स्थायी समाप्ति’’ के उद्देश्य से तैयार किया गया है। बाइडेन ने इजरायल और हिज्बुल्ला के बीच हुए युद्धविराम समझौते को ‘‘अच्छी खबर’’ बताया और उम्मीद जताई कि 13 महीने से अधिक समय से जारी लड़ाई में विराम गाजा में युद्ध को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

बाइडेन ने कहा-समझौता तोड़ने पर इजरायल को फिर सैन्य कार्रवाई का अधिकार

बाइडेन ने को व्हाइट हाउस (अमेरिका के राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) के रोज गार्डन में अपने संबोधन में कहा कि अगर हिज्बुल्ला युद्ध विराम की शर्तों को तोड़ता है तो इजरायल को लेबनान में तुरंत सैन्य अभियान फिर से शुरू करने का अधिकार है। इजरायल के सुरक्षा मंत्रिमंडल द्वारा समझौते को मंजूरी देने के तुरंत बाद बाइडेन ने कहा कि संघर्ष विराम के तहत, इजरायल अगले 60 दिनों में धीरे-धीरे लेबनान से अपने सैनिकों को वापस बुला लेगा। रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरक्षा मंत्रिमंडल के समक्ष एक समझौता प्रस्तुत किया था, जिसका उद्देश्य गाजा संघर्ष के बाद इजरायल और ईरान समर्थित हिज्बुल्ला के बीच महीनों से जारी लड़ाई को समाप्त करना है।

बाइडेन ने इजरायल और लेबनान के प्रधानमंत्री से की बात

इजरायल-हिजबुल्लाह युद्ध में अब तक सैकड़ों लोग मारे गए हैं और हजारों विस्थापित हुए हैं। बाइडेन ने कहा कि उन्होंने नेतन्याहू और लेबनान के प्रधानमंत्री नजीब मिकाती से बात की। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि दोनों देशों की सरकारों ने इजरायल और हिज्बुल्ला के बीच विनाशकारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए अमेरिका के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। मैं इस समझौते को निर्णायक मोड़ तक पहुंचाने में भागीदारी के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को धन्यवाद देना चाहता हूं। ‘‘मैंने अपनी टीम को इजरायल और लेबनान की सरकारों के साथ मिलकर काम करने का निर्देश दिया है। ताकि इजरायल और हिज्बुल्ला के बीच लड़ाई को समाप्त करने के लिए संघर्ष विराम कराया जा सके।’

संयुक्त राष्ट्र ने भी किया समझौते का स्वागत

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटरेस ने भी संघर्ष विराम की घोषणा का स्वागत किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इससे इजरायल और लेबनान के लोग जिस हिंसा, विनाश और कष्ट का सामना कर रहे हैं, वह खत्म हो जाएगा। लेबनान के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष समन्वयक जीनिन हेनिस-प्लास्चर्ट ने भी इसी प्रकार की भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा, ‘‘यह समझौता एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया का प्रारंभिक बिंदु है, जो संकल्प 1701 (2006) के पूर्ण कार्यान्वयन पर आधारित है, ताकि दोनों ओर के नागरिकों को वह सुरक्षा और संरक्षा बहाल की जा सके जिसके वे हकदार हैं।’’ सीनेट में बहुमत के नेता चक शूमर ने इस समझौते को इजराय0ल और क्षेत्र के लिए एक अच्छा समझौता बताया। उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि जब आतंकवादियों को सैन्य और दृढ़ कूटनीति दोनों के माध्यम से हराया जाता है, तो शांति की संभावना बढ़ जाती है।

ट्रंप के प्रतिनिधि की ओर से आया ये संदेश 

फ्लोरिडा के प्रतिनिधि माइक वाल्ट्ज ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘राष्ट्रपति ट्रंप की वजह से हर कोई बातचीत की मेज पर आ रहा है।’’ वाल्ट्ज राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में ट्रंप की पसंद हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ट्रंप की शानदार जीत ने बाकी दुनिया को एक स्पष्ट संदेश दिया है कि अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मैं पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने से खुश हूं।

दक्षिण कोरिया में भयंकर बर्फीला तूफान, सैकड़ों उड़ानें रद्द।

सियोलः दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में हुई भीषण बर्फबारी ने जन-जीवन को बेहाल कर दिया है। इस खतरनाक बर्फीले तूफान को देखकर आपकी भी रूह कांप उठेगी। भयानक बर्फबारी के चलते बुधवार को सैकड़ों उड़ानें रद्द कर दी गईं। हवाई के अलावा रेल और सड़क यातायात भी काफी ज्यादा बाधित हो गया है।

बता दें कि दक्षिण कोरिया में नवंबर के महीने में इस तूफान ने दस्तक थी। इस बर्फीले तूफान को पिछले 50 वर्ष से भी ज्यादा समय में आए तूफानों में सबसे भयावह बताया जा रहा है। दक्षिण कोरिया की मौसम एजेंसी ने बताया कि सियोल के उत्तरी और आस-पास के इलाकों में 20 सेंटीमीटर बर्फ गिरी। एजेंसी के मुताबिक, यह सियोल में 52 वर्षों में आया सबसे भयानक बर्फीला तूफान था। सियोल में 28 नवंबर 1972 को आए तूफान में 12 सेंटीमीटर बर्फ गिरी थी।

दक्षिण कोरिया के ज्यादातर सभी हिस्से चपेट में 

इस बर्फीले तूफान ने देश के अधिकतर हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया। देश के मध्य, पूर्वी और दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्रों में लगभग 10 से 23 सेंटीमीटर बर्फबारी हुई। देश भर के हवाई अड्डों पर कम से कम 220 उड़ानें रद्द कर दी गईं या उड़ान में विलंब हुआ। अधिकारियों ने लगभग 90 नौकाओं को बंदरगाह पर ही रहने का आदेश दिया। सियोल में सड़कों पर बर्फ जमा होने की वजह से सुबह आवाजाही धीमी रही जबकि देश भर में आपात स्थिति से निपटने वाले कर्मचारी सड़कों पर गिरे हुए पेड़ों, संकेत बोर्डों और अन्य सुरक्षा जोखिमों को दूर करने के लिए कार्य में जुटे रहे। मौसम एजेंसी ने बताया कि बृहस्पतिवार दोपहर तक देश के अधिकतर हिस्सों में बर्फबारी जारी रहेगी।

पाकिस्तान में पीटीआई के विरोध प्रदर्शन के बीच 4 लोगों की मौत, 50 से ज्यादा घायल।

इस्लामाबाद: पाकिस्तान में जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पीटीआई के विरोध प्रदर्शन के थमने से पहले 4 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। बता दें कि सरकार की सख्ती के बाद पीटीआई ने बुधवार को औपचारिक रूप से अपना विरोध प्रदर्शन बंद करने का ऐलान कर दिया। मगर इससे पहले आधी रात को पुलिस और प्रदर्शनकारियों की झड़प के बीच 4 लोगों की मौत हो गई। पीटीआई ने इसके लिए अधिकारियों की कार्रवाई को जिम्मेदार ठहराया।

इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने इससे पहले दावा किया था कि सुरक्षा कर्मियों के साथ हुईं हिंसक झड़पों में सैंकड़ों लोगों की मौत हुई है। इस्लामाबाद तक मार्च का नेतृत्व करने वालीं खान की पत्नी बुशरा बीबी और खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर के ठिकाने के बारे में चिंताओं के बीच पार्टी ने कहा कि वे दोनों खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत के एबटाबाद के पास मनसेहरा शहर में हैं। अधिकारियों ने सड़कें फिर से खोलनी शुरू कर दीं और उन स्थानों की सफाई शुरू कर दी है, जहां पीटीआई के तीन दिन के विरोध प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ हुई थी।

प्रदर्शनकारियों ने खाली किया इलाका

आधी रात को हुई कार्रवाई के बाद खान के समर्थकों को राजधानी के डी-चौक और उसके आसपास के इलाकों को खाली करके जाना पड़ा। पीटीआई ने इस कार्रवाई को “फासीवादी सैन्य शासन” के तहत “नरसंहार” करार दिया जबकि पुलिस सूत्रों ने कहा कि कार्रवाई के दौरान लगभग 450 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया। पीटीआई ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर साझा की गई एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “सरकार की क्रूरता और राजधानी को निहत्थे लोगों के लिए बूचड़खाने में तब्दील करने की सरकार की योजना को देखते हुए, (हम) कुछ समय के लिए शांतिपूर्ण विरोध निलंबित करने की घोषणा करते हैं।” पार्टी ने कहा कि खान के निर्देशों के आधार पर अगला कदम उठाया जाएगा। इससे पहले मंगलवार शाम को, पीटीआई समर्थकों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारियों से झड़प हुई, जिसके बाद वे रविवार को शुरू हुए इस्लामाबाद मार्च के तहत डी-चौक पर धरना देने में सफल रहे।

6 सुरक्षाकर्मियों की भी मौत

पुलिस के साथ समर्थकों की झड़प में छह सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हो गये। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर के साथ पेशावर से इस्लामाबाद तक मार्च का नेतृत्व करने वालीं खान की पत्नी बुशरा बीबी ने कहा कि प्रदर्शनकारी तब तक नहीं हटेंगे जब तक खान को जेल से रिहा नहीं किया जाता। हालांकि सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें क्षेत्र से हटाने के अपने प्रयास जारी रखे। डी-चौक के आसपास राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय, संसद और उच्चतम न्यायालय स्थित हैं। आधी रात के आसपास, पुलिस और रेंजर्स ने ब्लू एरिया व्यापार क्षेत्र को खाली करने के लिए एक अभियान चलाया।

इमरान खान ने किया था प्रदर्शन का आह्वान

पिछले वर्ष अगस्त से जेल में बंद 72 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री ने 24 नवंबर को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के लिए ‘‘अंतिम आह्वान’’ किया था। यह आह्वान उन्होंने 13 नवंबर को किया था। खान ने कथित तौर पर जनादेश की चोरी, लोगों की अन्यायपूर्ण गिरफ्तारी और संविधान के 26वें संशोधन के पारित होने की निंदा की थी। संविधान के 26वें संशोधन पर उन्होंने कहा था कि इसने ‘‘तानाशाही शासन’’ को मजबूत करने का काम किया है। खान पिछले साल से रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं और उनकी पार्टी के अनुसार, उन पर 200 से अधिक मामले दर्ज हैं।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय दीक्षान्त समारोह: सीएम योगी ने युवाओं को रिफॉर्म्स के प्रति सकारात्मक रवैया अपनाने का दिया संदेश

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के 136वें दीक्षांत समारोह में युवाओं को संबोधित करते हुए बोले- “समय के साथ कदमताल करें, विरोध से नहीं होगा विकास”

  • सीएम योगी ने समय के साथ बदलाव और सकारात्मक सोच अपनाने का संदेश दिया।
  • युवाओं को विकास के लिए नारेबाजी छोड़कर रचनात्मक कार्यों में लगने की प्रेरणा दी।
  • राष्ट्र धर्म को सर्वोपरि मानते हुए जाति और मजहब की राजनीति को नकारा।
  • वीर सावरकर और रामप्रसाद बिस्मिल को युवाओं के लिए आदर्श बताया।
  • इलाहाबाद विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

प्रयागराज/लखनऊ, 27 नवंबर 2024: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के 136वें दीक्षांत समारोह के दौरान छात्रों को संबोधित करते हुए जीवन में बदलाव के प्रति सकारात्मक सोच अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग नए विचारों और सुधारों का विरोध करते हैं, वे विकास में बाधा उत्पन्न करते हैं। समय के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना ही सफलता की कुंजी है।

सीएम योगी ने कहा, “समय बड़ा निर्मम होता है। यदि हम इसके साथ नहीं चलते तो यह हमें पीछे छोड़ देता है। हमें समाज और राष्ट्र के विकास के लिए नए ज्ञान को अंगीकार करना होगा। नारे लगाने और विरोध करने से विकास संभव नहीं है।”

“राष्ट्र धर्म के प्रति समर्पण जरूरी”

मुख्यमंत्री ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि हमारा हर क्षण और प्रयास राष्ट्र धर्म के प्रति समर्पित होना चाहिए। उन्होंने कहा, “जो लोग जाति, मत और मजहब के आधार पर युवाओं को बांटते हैं, वे भारत की ऊर्जा को विभाजित करने का पाप कर रहे हैं। ऐसे लोगों को कभी बढ़ावा नहीं देना चाहिए।”

उन्होंने युवाओं को इतिहास से प्रेरणा लेने की सलाह दी। सीएम ने कहा कि वीर सावरकर, पंडित रामप्रसाद बिस्मिल और महाराणा प्रताप जैसे महानायक युवावस्था में ही देश के लिए अपना जीवन समर्पित कर चुके थे।

समाजवाद पर कटाक्ष, परिवारवाद पर प्रहार

समाजवाद के नाम पर परिवारवाद को बढ़ावा देने वालों पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “सच्चा समाजवादी वह है, जो संपत्ति और संतति से दूर होकर समाज की सेवा करे। डॉ. राम मनोहर लोहिया ने समाजवाद का जो आदर्श स्थापित किया था, उसे आज के परिवारवादी नेता भूल चुके हैं। समाजवाद के नाम पर चाटुकारिता करने वाले कभी आदर्श नहीं बन सकते।”

प्रख्यात कवि कुमार विश्वास को डी.लिट् की उपाधि

इस अवसर पर सीएम योगी ने प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास को इलाहाबाद विश्वविद्यालय की ओर से डी.लिट् की मानद उपाधि प्रदान की। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्तित्व समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

विश्वविद्यालय का पुरातन गौरव लौटाने की प्रतिबद्धता

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय समाज के हर क्षेत्र के लिए प्रतिभाशाली युवाओं को तैयार करता रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि विश्वविद्यालय अपने पुराने गौरव को पुनः प्राप्त करेगा।

दीक्षांत उपदेश और भारतीय परंपरा का महत्व

मुख्यमंत्री ने दीक्षांत उपदेश की महत्ता पर बात करते हुए कहा, “यह केवल शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि एक नए जीवन की शुरुआत है।” उन्होंने तैत्तिरीय उपनिषद के श्लोकों का उल्लेख करते हुए छात्रों को सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

कुंभ पर शोध को प्रोत्साहन

सीएम योगी ने छात्रों से प्रयागराज के कुंभ और माघ मेले पर शोध करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों का धार्मिक, आर्थिक और सामाजिक महत्व है, और इस पर किए गए शोध से छात्रों को एक नया दृष्टिकोण मिलेगा।

आधुनिक प्रौद्योगिकी और प्रगति को अपनाने का आह्वान

मुख्यमंत्री ने तकनीकी प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी तकनीकें जीवन को आसान बना रही हैं। उन्होंने कहा, “विज्ञान और तकनीक के विकास से दूर रहना अपने और समाज के साथ अन्याय होगा।”

पुराने छात्रों को जोड़ने की पहल

सीएम योगी ने विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों को वर्तमान शिक्षा प्रणाली से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इससे विश्वविद्यालय की भौतिक और अकादमिक प्रगति को नई दिशा मिलेगी।

राजनीति में पढ़े-लिखे युवाओं की जरूरत

मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालयों को युवा संसद जैसे मंच तैयार करने चाहिए, जहां छात्र नेता के रूप में समाज को नई दिशा दें। उन्होंने कहा कि राजनीति में पढ़े-लिखे और संवेदनशील युवाओं का आना जरूरी है।

समारोह में उपस्थित गणमान्य

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के अध्यक्ष आशीष कुमार चौहान, कुलपति प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव, जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, महापौर गणेश केशरवानी और अन्य वरिष्ठ नेता एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री के प्रेरक संबोधन ने छात्रों को उनके जीवन के नए चरण के लिए तैयार होने और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने की सीख दी। “समय की गति के साथ कदमताल करना ही सफलता का मूलमंत्र है,” यह संदेश समारोह का मुख्य आकर्षण रहा।

ईको टूरिज्म में उत्तर प्रदेश के बढ़ते कदम से नेपाल के अफसर लेंगे प्रेरणा

उत्तर प्रदेश के ईको टूरिज्म मॉडल से प्रेरणा लेगा नेपाल, मानव-वन्यजीव संघर्ष के समाधान पर जोर।
चूका ईको टूरिज्म स्पॉट पर इंडो-नेपाल को-ऑर्डिनेशन इवेंट में दोनों देशों के अधिकारियों ने लिया हिस्सा।
बॉर्डर क्षेत्र में वन विभाग और एसएसबी चलाएंगे मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए जागरूकता अभियान।
लग्गाबग्गा कॉरिडोर पर टाइगर मूवमेंट और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर दोनों देशों में चर्चा।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भारत-नेपाल साझा गश्त और सूचनाओं के आदान-प्रदान पर करेंगे काम।

लखनऊ, 27 नवंबर 2024: उत्तर प्रदेश में ईको टूरिज्म के क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में पिछले साढ़े सात वर्षों में पर्यटकों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि हुई है। स्थानीय समुदायों को ईको टूरिज्म से जोड़कर न केवल रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए गए हैं, बल्कि प्रदेश की जैव विविधता को भी संरक्षित करने के प्रयास किए गए हैं। इन प्रयासों से प्रेरणा लेने के लिए नेपाल के वन एवं पर्यावरण अधिकारी अब उत्तर प्रदेश की पहल को करीब से समझने का प्रयास कर रहे हैं।

इस क्रम में बुधवार को चूका ईको टूरिज्म स्पॉट पर “इंडो-नेपाल ट्रांस बॉर्डर को-ऑर्डिनेशन इवेंट फॉर बॉयोडायवर्सिटी कंजरवेशन” का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में भारत और नेपाल दोनों देशों के अधिकारियों ने भाग लिया। यह कार्यक्रम बॉर्डर क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और पर्यटन को बढ़ावा देने के साझा प्रयासों के लिए आयोजित किया गया था।

मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए जागरूकता अभियान

उत्तर प्रदेश वन विभाग, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के साथ मिलकर बॉर्डर क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों में जागरूकता अभियान चलाएगा। इसका उद्देश्य न केवल मानव-वन्यजीव संघर्ष को न्यूनतम करना है, बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करना है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने बताया कि दोनों देशों के बीच वन्यजीव मॉनीटरिंग के साथ-साथ जंगली जानवरों की मूवमेंट को ट्रैक करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। खासकर टाइगर, तेंदुआ, हाथी और गैंडे जैसे वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

लग्गाबग्गा कॉरिडोर पर चर्चा

कार्यक्रम में लग्गाबग्गा कॉरिडोर प्रबंधन पर भी विशेष चर्चा हुई, जो टाइगर मूवमेंट के लिए जाना जाता है। भारत और नेपाल के अधिकारियों ने कॉरिडोर में वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सूचनाओं के आदान-प्रदान पर जोर दिया। दोनों देशों के अधिकारियों ने सामुदायिक सहभागिता और संयुक्त गश्त के माध्यम से संरक्षण के उपायों पर चर्चा की।

टूरिज्म को बढ़ावा देने में सहयोग

इवेंट में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों ने एक-दूसरे की सहायता करने पर सहमति जताई। उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयासों को करीब से देखने के बाद नेपाल के अधिकारी इस बात को समझने का प्रयास करेंगे कि किस प्रकार योगी सरकार स्थानीय समुदायों को पर्यटन के साथ जोड़कर रोजगार प्रदान कर रही है।

इवेंट में शामिल प्रमुख अधिकारी

कार्यक्रम में नेपाल की ओर से कंचनपुर के डीएफओ राम बिचारी ठाकुर, शुक्ला फाटा राष्ट्रीय निकुंज के चीफ वार्डन मनोज के शाह, बफर जोन मैनेजमेंट काउंसिल के अध्यक्ष लव विष्ट, एनटीएनसी के संरक्षण अधिकारी लक्ष्मी राज जोशी और भारत की ओर से पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह, डिप्टी कमांडेंट एसएसबी अजय बहादुर सिंह, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सीनियर प्रोजेक्ट ऑफिसर नरेश कुमार, प्रोजेक्ट ऑफिसर देवल कलम, और कृतिका भावे आदि उपस्थित रहे।