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एजाज खान की पत्नी को गिरफ्तार किया गया: कस्टम विभाग ने घर से 130 ग्राम मारिजुआना जब्त किया

बिग बॉस सीजन 7 फेम एजाज खान की पत्नी को लेकर हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। एक्टर के ऑफिस के बाद अब उनके घर पर कस्टम विभाग ने छापेमारी की है और इस मामले में एजाज खान की पत्नी फॉलन गुलीवाला को कस्टम डिपार्टमेंट ने ड्रग केस में गिरफ्तार कर लिया है। उनके घर से 130 ग्राम मारिजुआना बरामद हुआ है। उन पर ड्रग्स की तस्करी का आरोप है। उन्हें जोगेश्वरी स्थित उनके घर से रेड के बाद कस्टम पुलिस ने गिरफ्तार किया। यहां जानें क्या है पूरा माजरा…

ड्रग्स तस्करी में फंसी एजाज खान की पत्नी

कस्टम विभाग ने एजाज खान और फॉलन गुलीवाला के जोगेश्वरी स्थित घर पर छापेमारी की, जहां से कस्टम अधिकारियों ने नशीले पदार्थ जब्त किए थे। फॉलन की गिरफ्तारी एजाज खान के ऑफिस स्टाफ सदस्य सूरज गौड़ की गिरफ्तारी के बाद हुई है, जिसे 8 अक्टूबर को यूरोपीय कूरियर के जरिए 100 ग्राम मेफेड्रोन (एमडी) की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। ANI के अनुसार, गौड़ ने ड्रग का ऑर्डर दिया था और इसे एजाज खान के अंधेरी ऑफिस में डिलीवर करवाया था। इतना ही नहीं, छापेमारी के बाद से ही एक्टर गायब हैं, कस्टम डिपार्टमेंट उनकी तलाश कर रही है।

26 महीने जेल में बिता चुके एजाज खान

साल 2021 में एजाज खान को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने गिरफ्तार किया था। जब एक्टर के पास 31 अल्प्राजोलम की गोलियां मिली थीं, जिसके बाद करीब 26 महीने जेल में बिताने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में मिली हार

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में एजाज खान को सिर्फ 155 वोट मिले थे। एक्टर ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 की बहुचर्चित सीटों में से एक वर्सोवा सीट से चुनाव लड़ा था। आजाद समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले एजाज को नोटा से भी कम वोट मिले थे। वहीं शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के उम्मीदवार हारून खान ने 65,396 वोटों के साथ सीट जीती थी। एजाज खान के इंस्टाग्राम पर मिलियन में फॉलोवर हैं, लेकिन उन्हें महज 155 वोट मिले हैं। इसके चलते उन्हें खूब ट्रोल भी किया गया था।

IND vs AUS: दूसरे टेस्ट से बाहर हुआ स्टार खिलाड़ी, टीम को बड़ा झटका लगा

India vs Australia 2nd Test: भारतीय टीम इस समय ऑस्ट्रेलिया दौरे पर बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी खेल रही है। पहला मुकाबला टीम इंडिया ने 295 रनों से जीता था और सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली थी। अब दोनों टीमों के बीच दूसरा मुकाबला 6 दिसंबर से एडिलेड ओवल के मैदान पर खेला जाएगा, जो पिंक बॉल टेस्ट होगा। लेकिन इससे पहले ही ऑस्ट्रेलियाई टीम को तगड़ा झटका लगा है और तेज गेंदबाज जोश हेजलवुड बाहर हो गए हैं।

हेजलवुड के रिप्लेसमेंट का हुआ ऐलान

ESPNक्रिकइंफो के मुताबिक जोश हेजलवुड साइड स्ट्रेन की वजह से डे-नाइट टेस्ट मैच से बाहर हो गए हैं और उनकी जगह सीन एबॉट और ब्रेंडन डॉगेट को ऑस्ट्रेलिया की टीम में शामिल किया गया है। लेकिन दोनों का ही प्लेइंग इलेवन में खेलना मुश्किल लग रहा है, क्योंकि स्क्वाड में स्कॉट बोलैंड पहले से ही शामिल हैं। भारत के खिलाफ पहले टेस्ट मुकाबले में हेजलवुड ने कमाल की गेंदबाजी की थी। तब उन्होंने पहली पारी में चार विकेट और दूसरी पारी में एक विकेट हासिल किया था। अब उनके ना होने से टीम के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

पहला टेस्ट मुकाबला हारने के बाद ऑस्ट्रेलियाई को टीम की हर जगह आलोचना हुई है। अब जोश हेजलवुड के चोटिल होने की वजह से ऑस्ट्रेलियाई टीम का संकट और बढ़ गया है। दूसरी तरफ वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने के लिहाज से दूसरा टेस्ट मैच उनके लिए बहुत ही अहम है। WTC प्वाइंट्स टेबल में ऑस्ट्रेलियाई टीम इस समय दूसरे नंबर पर है। टीम ने 13 मुकाबले खेले हैं, जिसमें से 8 में जीत हासिल की है और चार मुकाबले हारे हैं।

ऑस्ट्रेलिया के लिए खेले तीनों फॉर्मेट

जोश हेजलवुड ने ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए साल 2014 में टेस्ट में डेब्यू किया था। इसके बाद से उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए 71 टेस्ट मैचों में कुल 278 विकेट अपने नाम किए हैं। वहीं वनडे में उनके नाम पर 138 विकेट और टी20 इंटरनेशनल में कुल 67 विकेट दर्ज हैं।

नाइजीरिया में दुखद घटना: नौका पलटने से 27 लोगों की मौत, 100 से ज्यादा लोग अब भी लापता

अबुजा: उत्तरी नाइजीरिया में नाइजर नदी में एक नौका पलट जाने के बाद अब तक 27 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कम से कम 100 लोग लापता बताए जा रहे हैं। अधिकारियों ने इस हादसे के बारे में जानकारी दी है। नाव किस वजह से डूबी इस बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। राहत और बचाव का काम जारी है।

नाव में सवार थे व्यापारी

राष्ट्रीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (NIWA) के प्रवक्ता मकामा सुलेमान ने बताया कि नाव में मुख्य रूप से मध्य कोगी राज्य के मिसा समुदाय के व्यापारी सवार थे, जो पड़ोसी नाइजर राज्य में साप्ताहिक बाजार जा रहे थे। सुलेमान ने बताया कि बचाव अभियान अभी चल रहा है, लेकिन मृतकों की सही संख्या का पता नहीं चल पाया है। उन्होंने बताया कि किसी भी यात्री ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी हुई थी, जिससे मृत्यु का जोखिम काफी बढ़ गया।

अक्सर होते हैं हादसे

एक स्थानीय टीवी चैनल ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया कि घटनास्थल पर कम से कम 27 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है, जबकि स्थानीय गोताखोर अन्य लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे थे। बताया जा रहा है कि नाव में ज्‍यादातर महिलाएं सवार थीं। नाव में 200 से अधिक यात्री सवार थे। पश्चिमी अफ्रीकी देश में नाव पलटने की दुर्घटनाएं अक्सर होती हैं। आमतौर पर इन घटनाओं के लिए ओवरलोडिंग, प्रतिकूल मौसम की स्थिति और परिचालन संबंधी त्रुटियों जैसे कारकों को जिम्मेदार बताया जाता है।

कुम्भलगढ़ पर्यटन स्थल: राजस्थान का एक प्रमुख ऐतिहासिक किला, जो अपनी भव्यता और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के लिए जाना जाता है

राजस्थान का कुम्भलगढ़ किला भारतीय इतिहास और स्थापत्य कला का एक अद्वितीय उदाहरण है। यह किला राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित है और यह भारतीय किलों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। कुम्भलगढ़ किला अपनी विशाल दीवारों, भव्य वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के कारण प्रसिद्ध है। यह किला केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि राजस्थान की शाही धरोहर का प्रतीक भी है। कुम्भलगढ़ को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में भी मान्यता प्राप्त है। आइए, जानते हैं कुम्भलगढ़ के प्रमुख आकर्षण और इसके महत्व के बारे में।

1. कुम्भलगढ़ किला

कुम्भलगढ़ किला, जिसे ‘राजस्थान का ग्रेट वॉल’ भी कहा जाता है, कुम्भलगढ़ पहाड़ी पर स्थित है। यह किला 15वीं शताब्दी में राणा कुम्भा द्वारा बनवाया गया था और यह किला मेवाड़ साम्राज्य का एक महत्वपूर्ण किला था। किले की दीवारें लगभग 36 किलोमीटर लंबी हैं, जो इसे दुनिया की दूसरी सबसे लंबी किलावाली दीवार बनाती हैं, केवल चीन की दीवार के बाद। कुम्भलगढ़ किले का किला परिसर बहुत विशाल है और इसमें कई महल, मंदिर और जलाशय हैं। किले की दीवारों पर चढ़कर आप कुम्भलगढ़ और आसपास के क्षेत्र का शानदार दृश्य देख सकते हैं।

2. बड़ी सीढ़ियाँ (Ramparts)

कुम्भलगढ़ किले की विशाल दीवारों के आसपास बड़ी सीढ़ियाँ हैं, जिन पर चढ़ते हुए पर्यटक किले के विभिन्न हिस्सों को देख सकते हैं। इन सीढ़ियों से किले के भीतर के अन्य महलों और संरचनाओं का दृश्य अद्भुत होता है। किले की दीवारों पर बनी मजबूत संरचना यह दर्शाती है कि किले का निर्माण युद्ध की दृष्टि से बहुत ही मजबूत और प्रभावशाली था।

3. कुम्भलगढ़ किला के महल

कुम्भलगढ़ किले में कई महल स्थित हैं, जिनमें सबसे प्रमुख महल राणा कुम्भा महल है। इस महल का वास्तुशिल्प राजपूत शैली का अद्भुत उदाहरण है। इस महल में राजपूत शाही परिवार के लिए शानदार कक्ष, जलाशय और स्विमिंग पूल भी बनाए गए थे। महल के अंदर एक संग्रहालय भी है, जहाँ कुम्भलगढ़ किले के इतिहास और यहां रहने वाले शासकों के बारे में जानकारी मिलती है।

4. कुम्भलगढ़ के मंदिर

कुम्भलगढ़ किले के भीतर कई मंदिर स्थित हैं, जो किले की ऐतिहासिकता और धार्मिक महत्व को दर्शाते हैं। इनमें से कुछ प्रसिद्ध मंदिरों में लक्ष्मी नारायण मंदिर और सिद्धनाथ मंदिर हैं। इन मंदिरों में प्राचीन मूर्तियों और शिल्पकला का अद्भुत उदाहरण देखने को मिलता है। ये मंदिर दर्शाते हैं कि कुम्भलगढ़ सिर्फ एक किला ही नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण स्थल था।

5. कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य (Kumbhalgarh Wildlife Sanctuary)

कुम्भलगढ़ किले के आसपास स्थित कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य, एक शांतिपूर्ण और प्राकृतिक स्थल है। यहाँ की घने जंगलों में विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु और पक्षी पाए जाते हैं। पर्यटक यहाँ जैव विविधता का आनंद ले सकते हैं और जंगली जीवन के करीब जा सकते हैं। अभयारण्य में ट्रैकिंग और अन्य साहसिक गतिविधियाँ भी उपलब्ध हैं।

6. कुम्भलगढ़ किले का सूर्यास्त

कुम्भलगढ़ किला सूर्यास्त के समय बेहद सुंदर नजर आता है। किले की दीवारों पर चढ़कर सूर्यास्त का दृश्य देखना एक अद्भुत अनुभव होता है। यह दृश्य न केवल मनोहक है, बल्कि यह पर्यटकों को शांति और सुकून का अनुभव भी कराता है।

7. कुम्भलगढ़ में फेस्टिवल्स और इवेंट्स

कुम्भलगढ़ किले में समय-समय पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, महोत्सव और प्रदर्शन आयोजित किए जाते हैं। यहाँ का कुम्भलगढ़ महोत्सव एक प्रमुख उत्सव है, जिसमें राजस्थान की पारंपरिक संगीत, नृत्य और शिल्पकला का प्रदर्शन किया जाता है। यह महोत्सव किले के ऐतिहासिक महत्व को फिर से जीवित करता है और पर्यटकों को एक शानदार सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करता है।

कैसे पहुंचे कुम्भलगढ़?

हवाई मार्ग: कुम्भलगढ़ का निकटतम एयरपोर्ट उदयपुर में स्थित है, जो कुम्भलगढ़ से लगभग 85 किलोमीटर दूर है। उदयपुर से टैक्सी या बस द्वारा कुम्भलगढ़ पहुंचा जा सकता है।

रेल मार्ग: कुम्भलगढ़ का निकटतम रेलवे स्टेशन नाथद्वारा रेलवे स्टेशन है, जो कुम्भलगढ़ से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित है। आप नाथद्वारा स्टेशन से कुम्भलगढ़ के लिए टैक्सी ले सकते हैं।

सड़क मार्ग: कुम्भलगढ़ सड़क मार्ग से भी अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। उदयपुर, राजसमंद और अन्य प्रमुख शहरों से कुम्भलगढ़ के लिए बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं।

सर्वोत्तम समय

कुम्भलगढ़ घूमने का सर्वोत्तम समय अक्टूबर से मार्च के बीच होता है, जब मौसम ठंडा और सुखद रहता है। गर्मियों में यहाँ का तापमान बहुत बढ़ सकता है, इसलिए इस मौसम में यात्रा करने से बचना चाहिए।

कुम्भलगढ़ किला राजस्थान का एक अद्भुत पर्यटन स्थल है, जो ऐतिहासिकता, वास्तुकला, और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है। यहाँ का किला, मंदिर, वन्यजीव अभयारण्य और सूर्यास्त के दृश्य पर्यटकों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करते हैं। कुम्भलगढ़ ना सिर्फ एक ऐतिहासिक स्थल है, बल्कि यह शांति, सुंदरता और रोमांच का भी एक बेहतरीन मिश्रण है। अगर आप राजस्थान की समृद्ध धरोहर को जानने के इच्छुक हैं, तो कुम्भलगढ़ एक बेहतरीन यात्रा स्थल है।

चीन ने इतिहास रचा: कृत्रिम प्रजनन तकनीक के माध्यम से विशाल पांडा की संख्या में वृद्धि की

बीजिंग: कृत्रिम प्रजनन पद्धति के इस्तेमाल के बाद चीन में विशाल पांडा की आबादी बढ़कर लगभग 1,900 हो गई है। आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। भालू के परिवार के ये सदस्य गोल चेहरे, मोटे शरीर और शरीर पर सफेद तथा काले बालों के विशिष्ट निशान के लिए पहचाने जाते हैं। इनकी आबादी बढ़ने के साथ ही ये लुप्तप्राय से संवेदनशील श्रेणी में आ गए हैं। चीनी विशेषज्ञों का कहना है कि विशाल पांडा का प्रजनन सबसे कठिन प्रक्रिया थी।

बड़ी समस्या थी कृत्रिम प्रजनन 

चीन संरक्षण और अनुसंधान केंद्र के मुख्य विशेषज्ञ ली डेसेंग ने कहा, ‘‘शुरुआती दिनों में विशाल पांडा का कृत्रिम प्रजनन एक बड़ी समस्या थी। 1980 के दशक के दौरान हमने केवल एक शिशु पांडा का प्रजनन किया जो दो साल तक जीवित रहा।’’ ली ने सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ को बताया कि तकनीकी और वैज्ञानिक प्रगति के साथ अब कृत्रिम प्रजनन दर और पांडा शावक के जीवित रहने की दर में उल्लेखनीय सुधार देखा जा रहा है और पांडा के जीवित रहने की औसत अवधि में भी वृद्धि हुई है।

1980 के दशक में 1,100 थी आबादी

आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि विशाल पांडा की आबादी 1980 के दशक में लगभग 1,100 थी जो बढ़कर लगभग 1,900 हो गई है। ‘द इंटरनेशन यूनियन फॉर कंजर्वेशन’ ने विशाल पांडा की आबादी बढ़ने के बाद इसे लुप्तप्राय से संवेदनशील श्रेणी में डाल दिया है।