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महाकुम्भ-2025: सफल संचालन के लिए आईसीसी सेंटर का हो रहा अपग्रेडेशन

mahakumbh 2025महाकुम्भ 2025: पुण्य कमाने के लिए सैकड़ों संस्थाएं, हर श्रद्धालु को मिलेगा भरपेट भोजन
महाकुम्भ 2025: पुण्य कमाने के लिए सैकड़ों संस्थाएं, हर श्रद्धालु को मिलेगा भरपेट भोजन
mahakumbh 2025महाकुम्भ 2025: पुण्य कमाने के लिए सैकड़ों संस्थाएं, हर श्रद्धालु को मिलेगा भरपेट भोजन
  • महाकुम्भ में भीड़ प्रबंधन, पार्किंग व्यवस्था, आपदा प्रबंधन और रेलवे स्टेशन निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा आईसीसीसी
  • 1650 नये सीसीटीवी कैमरे, 40 वीएमडीएस, 100 स्मार्ट पार्किंग और एआई कंपोनेंट की मदद से की जाएगी महाकुम्भ में निगरानी
  • 2019 कुम्भ मेले के आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था उद्घाटन
  • मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने 27 नवंबर को किया था आईसीसी सेंटर का निरीक्षण

प्रयागराज/लखनऊ, 30 नवंबर 2024: विश्व के सबसे बड़े मानवीय समागम महाकुम्भ 2025 में 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। सारे विश्व की निगाह महाकुम्भ के आयोजन पर लगी रहती है। ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार और प्रयागराज मेला प्राधिकरण सीएम योगी के मार्गदर्शन और निर्देशन में तैयारियां भी उसी अनुरूप कर रहा है। इसका स्पष्ट उदाहरण है महाकुम्भ मेले के सफल आयोजन और संचालन के लिए आईसीसी सेंटर को अपग्रेड करना। आईसीसी सेंटर का निर्माण कुम्भ 2019 में किया गया था लेकिन महाकुम्भ 2025 का आयोजन और भी भव्य और विशाल होने के कारण इसका उच्चीकरण किया जा रहा है। जिसका निरीक्षण स्वयं मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने अपने प्रयागराज दौरे में किया और अपग्रेडेशन कार्य को शीघ्र पूरा करने के निर्देश भी दिये।

भीड़ प्रबंधन की करेगा निगरानी

इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, आईसीसीसी का निर्माण कुम्भ 2019 के सफल आयोजन के लिए किया गया था। इसका उद्धाटन स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। प्रयागराज मेला प्राधिकरण और प्रयागराज स्मार्ट सिटी आईसीसी सेंटर के माध्यम से एआई, चैटबॉट, लाईव सर्विलांस, सीसीटीवी कैमरों जैसी अत्याधुनिक तकनीकी की मदद से मेले का सफल संचालन करता है। महाकुम्भ 2025 का आयोजन पिछले सभी कुंभ, महाकुंभ मेलों के आयोजन से भव्य और विशाल होने के कारण आईसीसी सेंटर को अपग्रेड किया जा रहा है। सीएम योगी के विरासत और विकास के विजन के मुताबिक महाकुम्भ की प्राचीनतम परंपरा को अत्याधुनिक तकनीक के प्रयोग से सुगम और सुरक्षित बनाने का प्रयास हो रहा है। सीएम ने स्वयं अपने प्रयागराज दौरे में आईसीसी सेंटर के अपग्रेडेशन का निरीक्षण किया और शीध्र कार्य पूरा करने के निर्देश दिये।

एआई कंपोनेंट की मदद से की जाएगी निगरानी

प्रयागराज स्मार्ट सिटी और मेला प्राधिकरण देश के शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थानों की मदद से आईसीसी सेंटर के अपग्रेडेशन का कार्य करा रहा है। महाकुम्भ 2025 के मद्देनजर लगभग 1650 नये सीसीटीवी कैमरे, 24 एपीएनआर कैमरे, 40 वीएमसीडी, 100 स्मार्ट पार्किंग, क्राउड मैनेजमेंट और व्हीकल काउंट के लिए 268 और 240 एआई कंपोनेट लगाये जा रहे हैं। इसके साथ ही शिकायत निवारण के लिए कॉल सेंटर में 20 सीटें बढ़ाई जा रही हैं। महाकुम्भ 2025 में आईसीसी सेंटर मेला, एमसीआर सेंटर, अरैल और झूंसी व्यूविंग सेंटर से पूरे मेले क्षेत्र का निरीक्षण किया जाएगा। साथ ही एआई कंट्रोल्ड सीसीटीवी कैमरों की मदद से 9 रेलवे स्टेशनों पर क्राउड मैनेजमेंट और निगरानी का कार्य किया जाएगा। 1 दिसम्बर से 1920 हेल्पलाइन का कार्य शुरू हो जाएगा।

डिजिटल उत्तर प्रदेश की ओर एक कदम: कन्नौज पुलिस बनेगी यूपी की पहली डिजिटल पुलिस

kannauj police in uttar pradesh
kannauj police in uttar pradesh
  • दिसंबर 2024 तक कन्नौज जिले के सभी पुलिस थाने ई-ऑफिस प्रणाली पर पूरी तरह काम करेंगे।
  • फाइलों और डेटा का डिजिटल प्रबंधन पारदर्शिता और तेज निर्णय प्रक्रिया सुनिश्चित करेगा।
  • एनआईसी द्वारा तैयार ई-ऑफिस सॉफ्टवेयर के उपयोग की ट्रेनिंग दी जा रही है।
  • लंबित शिकायतों के निपटारे में तेजी आएगी और भ्रष्टाचार की संभावना घटेगी।
  • कन्नौज पुलिस की यह पहल अन्य जिलों के लिए मिसाल बनेगी।

कन्नौज/लखनऊ, 30 नवम्बर 2024: उत्तर प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया मिशन को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए हर क्षेत्र में व्यापक सुधार कर रही है। इसी दिशा में यूपी पुलिस ने एक बड़ा कदम उठाते हुए कन्नौज जिले को दिसंबर 2024 तक पूरी तरह से डिजिटल बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह पहल उत्तर प्रदेश में पहली बार हो रही है, जहां कोई जिला अपने सभी पुलिस थानों और प्रशासनिक कार्यालयों में ई-ऑफिस प्रणाली को पूरी तरह लागू करेगा। इसके तहत कन्नौज पुलिस न केवल मोटी-मोटी फाइलों के पुराने ढर्रे से मुक्त होगी, बल्कि सभी प्रशासनिक कार्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित होंगे।

डिजिटल इंडिया मिशन को मजबूत बनाएगी यह पहल

कन्नौज के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार आनंद ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार प्रदेश में डिजिटल सुधार और आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में कन्नौज पुलिस ने दिसंबर तक ई-ऑफिस प्रणाली को पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए सभी थानों और कार्यालयों को डिजिटल उपकरण जैसे लैपटॉप और अन्य तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इसके साथ ही पुलिसकर्मियों को ई-ऑफिस प्रणाली का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि वे नए सिस्टम को आसानी से समझ और संचालित कर सकें।

ई-ऑफिस प्रणाली से बदलेगी कार्यप्रणाली

ई-ऑफिस प्रणाली लागू होने के बाद कन्नौज जिले के सभी थानों, क्षेत्रीय कार्यालयों और पुलिस मुख्यालयों में फाइलों का ढेर अब अतीत का हिस्सा बन जाएगा। इस डिजिटल परिवर्तन से कागजी कार्यवाही की जटिलता समाप्त होगी और हर काम सुगमता और पारदर्शिता से किया जा सकेगा। फाइलों और डेटा का डिजिटल प्रबंधन, शिकायतों के त्वरित निपटारे, और रिपोर्टिंग प्रक्रिया को तेज बनाएगा। इसके अलावा, ई-ऑफिस प्रणाली से अधिकारियों को मामलों की निगरानी और त्वरित निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

पुलिसकर्मियों को मिल रही तकनीकी ट्रेनिंग

एसपी अमित कुमार आनंद ने बताया कि ई-ऑफिस प्रणाली को लागू करने के लिए पुलिसकर्मियों को एनआईसी (नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर) द्वारा तैयार सॉफ्टवेयर के संचालन की ट्रेनिंग दी जा रही है। यह प्रशिक्षण जिला प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें पुलिसकर्मियों को डिजिटल कार्यप्रणाली के लिए तैयार किया जा रहा है। इस दौरान केन्द्रीय सचिवालय नियमावली (CSMeOP) पर आधारित प्रणाली के उपयोग और लाभों को भी समझाया जा रहा है।

लंबित मामलों का तेजी से निपटारा होगा

डिजिटल प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि इससे लंबित शिकायतों और मामलों का निपटारा तेजी से होगा। डिजिटल फाइल मॉनिटरिंग और समयबद्ध रिपोर्टिंग के जरिए पारदर्शिता बढ़ेगी। जनता को त्वरित न्याय मिलेगा, और पुलिस थानों में भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी। ई-ऑफिस प्रणाली से थानों में काम की गति बढ़ेगी और जनता को सेवाएं प्रभावी और सरल तरीके से मिल सकेंगी।

कन्नौज पुलिस की पहल बनेगी प्रेरणा

कन्नौज पुलिस की यह पहल पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बनेगी। अन्य जिलों को भी इसे अपनाने की प्रेरणा मिलेगी। डिजिटल पुलिसिंग का यह कदम न केवल पुलिसकर्मियों के कार्यभार को कम करेगा बल्कि पुलिस और जनता के बीच भरोसे को भी मजबूत करेगा।

ईशान किशन ने शानदार प्रदर्शन किया, जबकि मोहम्मद शमी को एक बार फिर चोट का सामना करना पड़ा

मुंबई।  भारत में इस समय सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी खेला जा रहा है जिसमें कई स्टार खिलाड़ी गेंद और बल्ले से कहर बरपा रहे है। इस बार ईशान किशन का बल्ला बोला जिन्होंने महज 23 गेंद में नाबाद 77 रन की पारी खेल डाली। ईशान किशन की इस पारी की बदौलत झारखंड की टीम सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के ग्रुप सी के मैच में अरुणाचल प्रदेश को 10 विकेट से हराने में सफल रही। इस बीच राजकोट में भारत के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को सौराष्ट्र क्रिकेट संघ स्टेडियम में मध्य प्रदेश के खिलाफ बंगाल के ग्रुप ए मैच के दौरान चोट लग गई। शिवम शुक्ला ने 29 रन देकर चार विकेट चटकाए जिससे मध्य प्रदेश ने बंगाल को नौ विकेट पर 189 रन पर रोककर छह विकेट से मैच जीत लिया।

शमी की चोट से टेंशन में टीम इंडिया

कप्तान रजत पाटीदार (40 गेंद पर 68 रन) और सुभ्रांशु सेनापति (33 गेंद पर 50 रन) ने तेज अर्धशतक जड़े और मध्य प्रदेश ने आसान जीत दर्ज की। हालांकि शमी का गिरने को लेकर चर्चा चलती रही। मध्य प्रदेश की पारी का अंतिम ओवर फेंकते समय शमी गेंद रोकने के प्रयास में गिर गए और ऐसा लगा कि उनके जूते पर गेंद लग गई। चोट के कारण लंबे समय तक बाहर रहने के बाद वापसी करने वाला यह तेज गेंदबाज असहज महसूस कर रहा था। वह जमीन पर लेटे हुए अपनी पीठ के निचले हिस्से को पकड़ रहे थे। ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के मेडिकल पैनल के प्रमुख नितिन पटेल तुरंत गेंदबाज की जांच करने के लिए मैदान में पहुंचे। हालांकि गिरने से कोई गंभीर चोट नहीं आई है।

IPL में बने करोड़पति

ग्रुप सी के मैच में सलामी बल्लेबाज किशन आक्रामक खेल रहे थे, उन्होंने अपनी टीम को सिर्फ 4.3 ओवर में 94 रन तक पहुंचाने में मदद की। विकेटकीपर-बल्लेबाज को रविवार को आईपीएल की मेगा नीलामी में सनराइजर्स हैदराबाद ने 11.25 करोड़ रुपये में खरीदा था। झारखंड के गेंदबाजों में अनुकूल रॉय ने 17 रन देकर चार और रवि कुमार यादव ने 12 रन देकर तीन विकेट झटके।

भोजपुरी फिल्मों के साथ-साथ बॉलीवुड में भी धमाल मचाने वाली, 44 साल की उम्र में भी बेहद खूबसूरत लगती हैं

भोजपुरी फिल्मों की क्वीन से बॉलीवुड एक्ट्रेस बनी श्वेता तिवारी किसी पहचान की मोहताज नहीं है। उन्होंने अपने करियर में भोजपुरी, टीवी, ओटीटी और बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में बेहतरीन काम किया है, जिसके लिए वह लोगों के बीच मशहूर हैं। श्वेता अपनी दमदार एक्टिंग के अलावा आए दिन अपने लुक्स को लेकर भी सोशल मीडिया पर चर्चा में रहती हैं। दो बच्चों की मम्मी होने बाद भी वह एकदम फिट लगती है। श्वेता तिवारी 44 साल की होकर भी इतनी खूबसूरत और स्‍टाइलिश हैं कि उनके आगे आज के दौर की हीरोइनों की खूबसूरती भी कम पड़ जाए। अब एक्ट्रेस की बेटी पलक तिवारी भी बॉलीवुड में अपनी फिल्मों के लिए चर्चा में रहती हैं।

मां-बेटी की जोड़ी ने इंडस्ट्री में मचाई धूम

भोजपुरी फिल्मों का अपना एक अलग फैन बेस बना चुकी श्वेता तिवारी अब हिंदी टेलीविजन में काम करती हैं। वह एकता कपूर के सोप ओपेरा ‘कसौटी जिंदगी की’ में प्रेरणा शर्मा का किरदार निभाने के लिए जानी जाती हैं। 2010 में, उन्होंने ‘बिग बॉस 4’ में भाग लिया और विजेता बन गईं, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसके बाद वह रियलिटी शो ‘नच बलिए’, ‘झलक दिखला जा’ और ‘फियर फैक्टर: खतरों के खिलाड़ी’ में नजर आईं। बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा चुकी ये एक्ट्रेस कुछ समय से अपने ओटीटी शोज की वजह से भी चर्चा में है। इतना ही नहीं, श्वेता तिवारी की बेटी पलक भी सलमान खान की ‘किसी का भाई किसी की जान’ से लाइमलाइट में आ गई हैं

44 की उम्र में भी ढाती हैं कहर

बता दें कि, श्वेता तिवारी फिल्म इंडस्ट्री की ग्लैमरस और हाईएस्ट पेड एक्ट्रेस में से एक हैं। श्वेता तिवारी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। आए दिन वो अपनी तस्वीरें शेयर कर चर्चा में बनी रहती हैं। दो तलाक होने के बाद श्वेता अब अपनी बेटी पलक और बेटे रेयांश के साथ रहती हैं। एक्ट्रेस अपनी एक्टिंग के अलावा फैंस के बीच उनके लुक्स की वजह से भी चर्चा में रहती हैं।

साइक्लिस्ट सिंड्रोम: ज्यादा साइकिल चलाने वालों को इस समस्या का सामना होता है, जानें इसके लक्षण

साइक्लिस्ट सिंड्रोम एक क्रोनिक न्यूरोपैथी पेल्विक होता है, जोकि साइक्लिंग करने वालों में ज्यादा देखने को मिलता है। यह दर्द उन लोगों को ज्यादा होता है, जो अधिक साइकिल चलाते हैं। लेकिन इसमें कुछ अन्य कारण भी शामिल हो सकते हैं। ऐसे स्थिति होने पर जेनिटल में दर्द होता है और इस स्थिति को पहचानने में अक्सर लोग गलतियां कर देते हैं। जिसका कारण इसका ठीक से इलाज न मिल पाना भी है। ऐसे में व्यक्ति को अधिक दर्द का सामना लंबे समय तक करना पड़ सकता है।

इसलिए साइक्लिस्ट सिंड्रोम को पहचानने में गलती नहीं करना चाहिए। इस सिंड्रोम को पुड़ेंडल न्यूरेल्जिया के नाम से भी जाना जाता है। जब पुड़ेंडल नर्व प्रभावित होती है, तब इस सिंड्रोम का खतरा अधिक देखने को मिलता है। इस स्थिति में जेनिटल सुन्न हो सकते हैं और 12 या 24 घंटे की साइक्लिंग के बाद दोबारा दर्द हो सकता है।

लक्षण

जेनिटल्स में दर्द होना या फिर उस जगह पर सुन्न हो जाना।

जब आप बैठे होते हैं या फिर साइक्लिंग कर रहे होते हैं, तब दर्द और अधिक बढ़ जाना।

पेल्विक एरिया में दर्द इधर से उधर मूव कर रहा हो।

शरीर के एक या फिर दोनों साइड में दर्द होना।

खुजली, जलन और सुन्नपन महसूस होना।

पेशाब करने में या बाउल मूवमेंट में परेशानी होना।

सेक्सुअल डिस्फंक्शन होना।

कारण

यह नाम देखकर ही आपको लग सकता है कि सिर्फ साइकिल चलाने वाले लोगों को यह स्थिति हो सकती है। लेकिन ऐसा नहीं है। ऐसा पेल्विक की मसल्स के कंप्रेशन की वजह से भी हो सकता है। जब पुड़ेंडव नर्व प्रभावित होती है, तो यह सिंड्रोम देखने को मिलता है। प्रेग्नेंसी, शरीर में एनाटोमिक असामान्यता, बच्चे को जन्म देना या फिर सर्जरी की वजह से होने वाले घावों की वजह से आपको यह स्थिति देखने को मिल सकती है।

रिस्क फैक्टर

बता दें कि जो लोग साइकिल चलाने के दौरान अपने पोस्चर का अच्छे से ध्यान नहीं रखते हैं, या फिर साइकिल का सेटअप अच्छे से नहीं करते हैं। उनको इस सिंड्रोम के होना का अधिक खतरा होता है। अगर आप भी साइक्लिंग करने से पहले स्ट्रेचिंग या वॉर्मअप नहीं करते हैं, तो आपको इस स्थिति का खतरा अधिक होता है। अगर आपकी कोर स्ट्रेंथ इतनी मजबूत नहीं है, तो भी आपको यह हो सकता है। जिन लोगों को पोषण और हाइड्रेशन की जरूरत पूरी नहीं होती है, तो इसका अधिक खतरा होता है।

ऐसे करें सिंड्रोम की पहचान

साइक्लिस्ट सिंड्रोम को पहचानने के लिए कोई खास टेस्ट नहीं बना है। लेकिन इसके कुछ लक्षणों को देखकर आप इसकी पहचान कर सकते हैं। डॉक्टर आपके दर्द के पैटर्न और इसके कारणों को समझकर इसकी स्थिति की पता लगा सकते हैं। बता दें कि न्यूरोपैथी या MRI के इस्तेमाल से भी इस स्थिति की पहचान कर सकते हैं।

ऐसे करें मैनेज

इस दर्द को कम करने के लिए इलाज के कई ऑप्शन मौजूद हैं। फिजियोथेरेपी के अलावा डॉक्टर आपको कई दवाइयां दे सकते हैं। इस नर्व को ब्लॉक करने के बाद आपको राहत मिल सकती है। कई बार इसके इलाज के लिए सर्जिकल नर्व डी कंप्रेशन का भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके साथ ही आपको साइकल को अच्छे से सेटअप करना चाहिए और एक बढ़िया पोस्चर के साथ साइकिल को चलाना चाहिए। वहीं साइकिल चलाने से पहले स्ट्रेचिंग और वॉर्मअप करना चाहिए। इसके अलावा पौष्टिक और हाइड्रेशन की जरूरत को भी पूरा करते हैं और बीच-बीच में आराम करना भी काफी जरूरी होता है।