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ट्रंप ने पूर्व सैनिक को नियुक्त किया सैन्य सचिव, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के सहपाठी रह चुके हैं।

वाशिंगटन: अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने शपथ ग्रहण से पहले एक और क्रांतिकारी फैसला लिया है। उन्होंने एक पूर्व सैनिक को सेना के सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद के लिए नामित किया है। ट्रंप ने बुधवार को कहा कि उन्होंने इराक युद्ध में हिस्सा ले चुके पूर्व सैनिक को अपना सैन्य सचिव चुना है। ट्रंप द्वारा एक सैनिक को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देने के फैसले की काफी तारीफ हो रही है। खास बात यह है कि सैन्य सचिव के लिए नामित सैनिक ट्रंप के सहयोगी और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ स्कूली पढ़ाई भी कर चुके हैं।

सैनिक का नाम डेनियल पी.ड्रिस्कॉल है। कहा जा रहा है कि उन्हें जेडी वेंस के साथ स्कूली पढ़ाई करने का भी इनाम दिया गया है। अपने दोस्त डेनियल के लिए जेडी वेंस की सिफारिश को भी अहम माना जा रहा है। डेनियल नॉर्थ कैरोलिना से ताल्लुक रखते हैं। बता दें कि डेनियल पी.ड्रिस्कॉल ने उपराष्ट्रपति पद के लिए चुने गए जेडी वेंस के वरिष्ठ सलाहकार के रूप में काम किया है। डेनियल की जेडी वेंस से मुलाकात तब हुई थी जब दोनों ‘येल लॉ स्कूल’ में साथ-साथ पढ़ रहे थे। उन्होंने 2020 में नॉर्थ कैरोलिना कांग्रेस सीट के लिए रिपब्लिकन प्राइमरी में हिस्सा लिया था, लेकिन असफल रहे थे।

ट्रंप ने डेनियल को बताया योद्धा

ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच पर कहा, ‘‘डेनियल साहसी और जुझारू योद्धा हैं जो अमेरिकी सैनिकों और ‘अमेरिका प्रथम’ के एजेंडे के लिए एक प्रेरणा हैं।’’ अगर डेनियल (38) के नाम की पुष्टि होती है तो वे सैन्य शाखा की उस कमान का जिम्मा संभालेंगे, जो अपने कार्यक्रमों और कर्मियों की संख्या में व्यापक बदलाव के जरिए भर्ती की कमी को दूर करने के लिए संघर्ष कर रही है। सेना अपनी हथियार प्रणालियों को नया रूप देने और आधुनिक बनाने के लिए भी व्यापक प्रयास कर रही है।

अमेरिका लाएगा हर देश के लिए अलग-अलग इमिग्रेशन बिल, जानें इसका भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

वाशिंगटन: अमेरिका (यूएसए) में 20 जनवरी को डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण के बाद नया आव्रजन विधेयक लाया जा सकता है। इसकी तैयारी अभी से शुरू हो गई है। यह आव्रजन विधेयक सभी देशों के लिए अलग-अलग नियम,शर्तों और छूट वाला होगा। डेमोक्रेटिक पार्टी के दो सीनेटरों ने बुधवार को एक संभावित विधेयक पेश किया, जिसका उद्देश्य अप्रवासी परिवारों को फिर से एकजुट करना तथा प्रति देश परिवार-आधारित आव्रजन सीमा को बढ़ाना है, जिससे भारत और चीन जैसे एकल देश में जाने के लिए अधिक वीजा की अनुमति मिल सके। इस नई इमिग्रेशन पॉलिसी में भारत को सबसे ज्यादा रियायत मिलने की उम्मीद की जा रही है।

सीनेट न्यायिक समिति की सदस्य सीनेटर माजी के.हिरोनो और टैमी डकवर्थ द्वारा प्रस्तुत ‘रियूनाइटिंग फैमिलीज एक्ट’ देश की आव्रजन प्रणाली में परिवारों को एकजुट करेगा, परिवार आधारित आव्रजन संबंधी लंबित मामलों को कम करेगा तथा कानूनों को अद्यतन करेगा, ताकि यह पता चल सके कि परिवार किस प्रकार अमेरिका में प्रवास करते हैं। विधेयक में सीनेटर हिरोनो का ‘फिलिपीनो वेटेरन्स फैमिली रीयूनिफिकेशन एक्ट’ भी शामिल है, जो द्वितीय विश्व युद्ध में हिस्सा लेने वाले फिलिपीनी पूर्व सैनिकों के बच्चों के लिए वीजा प्रक्रिया में तेजी लाएगा।

ट्रंप के प्रमुख एजेंडे में थी इमिग्रेशन पॉलिसी

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एजेंडे में नई इमिग्रेशन पॉलिसी प्रमुख रूप से शामिल थी। इसलिए उनके राष्ट्रपति का पदभार ग्रहण करने के बाद इमिग्रेशन पॉलिसी में बड़े बदलाव की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि इस इमिग्रेशन पॉलिसी में भारतीयों का विशेष ख्याल रखे जाने की उम्मीद है। हिरोनो ने कहा, ‘‘वर्तमान में अमेरिकी सीनेट में सेवारत एकमात्र अप्रवासी के रूप में मुझे हमारे देश की पारिवारिक आव्रजन प्रणाली को अद्यतन करने और पारिवार को एकजुट करने संबंधी ‘रियूनाइटिंग फैमिलीज एक्ट’ को प्रस्तुत करते हुए गर्व महसूस हो रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘परिवार-आधारित आव्रजन वीजा के लंबित मामलों को कम करने, करीबी रिश्तेदारों को वीजा सीमा से छूट देने और एलजीबीटीक्यू प्लस (समलैंगिक समुदाय) परिवारों को अलग होने से रोकने के लिए परिवर्तनों को लागू करके, यह विधेयक हमारी आव्रजन प्रणाली में पारिवारिक एकता को बेहतर तरीके से प्राथमिकता देगा।’’

इमिग्रेशन पॉलिसी में होगा व्यापक सुधार

अमेरिका अपने इमिग्रेशन पॉलिसी में व्यापक सुधार की सख्त जरूरत महसूस कर रहा है। सीनेटर माजी के.हिरोनो ने कहा कि परिवारों को फिर से जोड़ने वाला अधिनियम सही दिशा में उठाया गया एक कदम है, जो हमारी आव्रजन प्रणाली में परिवारों को फिर से जोड़ने या एक साथ रखने में मदद करेगा।’’ डकवर्थ ने कहा, ‘‘यह कानून परिवार-आधारित लंबित मामलों को समाप्त करने, अधर में लटके ‘ग्रीन कार्ड’ आवेदनों को स्वीकृति देने में मदद करके व्यावहारिक सुधारों को लागू करेगा तथा अधिक से अधिक परिवारों को एक साथ लाएगा।

गाजा पर इजरायल का फिर कहर, भीषण हवाई हमलों में 21 लोगों की जान गई।

खान यूनिस (गाजा पट्टी):  हमास प्रमुख इस्माइल हानिया और याह्या सिनवार समेत सैकड़ों टॉप कमांडरों की मौत के बाद भी इजरायल का कहर गाजा पर जारी है। बीते 24 घंटे में इजरायल के भीषण हवाई हमलों में दक्षिणी गाजा में विस्थापित फिलस्तीनियों के शिविर में रह रहे कम से कम 21 लोग बुधवार को मारे गए। इजरायल की सेना ने कहा कि उसने क्षेत्र में ‘‘आतंकवादी गतिविधियों में शामिल’’ शीर्ष हमास आतंकवादियों को निशाना बनाया। हालांकि इजरायल की सेना ने कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी और कहा कि उसने इस बात की पूरी सावधानी बरती कि हमले में नागरिक हताहत नहीं हों।

मुवासी तंबू शिविर पर हमला बुधवार को गाजा पट्टी में हुए कई घातक हमलों में से एक था। फलस्तीनी चिकित्सकों के अनुसार, मध्य गाजा में इजराइली हमले में कम से कम 10 और लोग मारे गए, जिनमें चार बच्चे भी शामिल हैं। हमास के अक्टूबर 2023 के हमले के बाद करीब 14 महीनों से जारी गाजा में इजराइल के विनाशकारी युद्ध के खत्म होने के कोई संकेत नहीं हैं। हमास ने अब भी कई इजराइली नागरिकों को बंधक बना रखा है और गाजा की अधिकांश आबादी विस्थापित हो चुकी है और जीवित रहने के लिए अंतरराष्ट्रीय खाद्य सहायता पर निर्भर है।

28 से ज्यादा लोग घायल

दक्षिणी शहर खान यूनिस में नासेर अस्पताल के निदेशक आतिफ अल-हौत के अनुसार, मुवासी में बुधवार को हुए हमले में कम से कम 28 लोग घायल हो गए। मुवासी में सार्वजनिक सेवाएं बहुत कम हैं और जहां लाखों विस्थापित लोग रहते हैं। अस्पताल में मौजूद ‘एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) के एक पत्रकार ने कम से कम 15 शव देखे। हमले के कुछ ही समय बाद अल-अवदा अस्पताल ने कहा कि नुसेरात शरणार्थी शिविर में एक आवासीय ब्लॉक पर हुए हमले में दो लोग मारे गए और 38 घायल हो गए। सेना ने हमले पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन कहा कि मध्य गाजा में पहले किए गए हमलों में ‘‘आतंकवादी ठिकानों’’ को निशाना बनाया गया था।

तालिबान का महिलाओं की नर्सिंग शिक्षा पर प्रतिबंध: मानवाधिकारों पर बड़ा हमला, सरोजनी नगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने जताई घोर चिंता

लखनऊ, 06 दिसम्बर 2024: तालिबान ने महिलाओं की नर्सिंग शिक्षा पर प्रतिबंध लगाकर एक बार फिर से अपने कट्टरपंथी रुख का परिचय दिया है। यह कदम मानवाधिकारों के खिलाफ गंभीर उल्लंघन है और 21वीं सदी में महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई को पीछे धकेलने जैसा है। इस फैसले ने न केवल अफगानिस्तान बल्कि पूरी दुनिया में आक्रोश और चिंता को जन्म दिया है।

सरोजनी नगर के भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने तालिबान के इस फैसले पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इसे सभ्यता को अंधकार में ले जाने वाला और महिलाओं के अधिकारों पर सीधा हमला बताया। डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा, “यह न केवल महिलाओं को शिक्षा और रोजगार से वंचित करने का प्रयास है, बल्कि समाज की प्रगति और विकास के लिए भी खतरनाक है।”

महिलाओं को शिक्षा से वंचित करना: एक वैश्विक चिंता

तालिबान द्वारा महिलाओं को शिक्षा और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी से रोकना आधुनिक समाज के लिए गंभीर चुनौती है। महिलाओं पर लगे इन प्रतिबंधों के कारण वे स्वास्थ्य, शिक्षा, और रोजगार जैसे अहम क्षेत्रों में योगदान नहीं कर पा रही हैं। महिलाओं को घर की चहरदीवारी में सीमित करने और पुरुष संरक्षक के बिना बाहर जाने की मनाही जैसे नियम उनकी स्वतंत्रता को छीन रहे हैं।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने इस फैसले को “सभ्यता के लिए घातक” बताया और कहा कि महिलाओं को उनकी शिक्षा, रोजगार और स्वतंत्रता से वंचित करना पूरी मानवता के लिए शर्मनाक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जहां महिलाएं कल्पना चावला और मलाला यूसुफजई जैसी उपलब्धियां हासिल कर रही हैं, वहीं तालिबान जैसे संगठन उन्हें मूलभूत अधिकारों से वंचित कर रहे हैं।

महिलाओं की उपलब्धियां और तालिबान का विरोधाभास

जहां एक ओर महिलाएं अंतरिक्ष, विज्ञान, राजनीति और साहित्य जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं, वहीं तालिबान का यह फैसला उनके योगदान और क्षमता को अनदेखा करता है। कल्पना चावला, जैसिंडा अर्डर्न, और मलाला यूसुफजई जैसी महिलाओं ने वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाई है। वहीं तालिबान का यह कदम इस बात का विरोधाभास है कि एक ओर महिलाएं ऊंचाइयों को छू रही हैं और दूसरी ओर उन्हें शिक्षा से वंचित किया जा रहा है।

डॉ. राजेश्वर सिंह की अपील: वैश्विक एकजुटता की जरूरत

डॉ. राजेश्वर सिंह ने इस विषय पर वैश्विक समुदाय से एकजुट होकर तालिबान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की अपील की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) जैसे संगठनों से इस कदम की कड़ी निंदा करने और तालिबान पर दबाव बनाने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि यह केवल महिलाओं के अधिकारों का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे समाज के विकास और भविष्य से जुड़ा हुआ है। मुस्लिम धर्मगुरुओं और संगठनों को इस्लाम की प्रगतिशील शिक्षाओं के आधार पर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए।

महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा अनिवार्य

तालिबान का यह कदम पूरी दुनिया को चेतावनी है कि अगर महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए सख्त कदम नहीं उठाए गए तो यह न केवल अफगानिस्तान बल्कि मानवता के लिए भी घातक हो सकता है। यह समय है कि सभी लोकतांत्रिक देश और मानवाधिकार संगठन तालिबान के खिलाफ एकजुट हों और महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने के लिए आवाज उठाएं।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश को इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं के बिना कोई भी समाज प्रगति नहीं कर सकता।

आयुर्वेद के बढ़ते बाजार का बड़ा खिलाड़ी बने यूपी

cmyogi ayurveda
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  • सीएम योगी की मंशा के अनुरूप इस बाबत विकसित की जा रहीं बुनियादी संरचना
  • ऐसा होने पर बिना किसी साइड इफेक्ट के लोगों की सेहत सुधरेगी

लखनऊ, 5 दिसंबर 2024: नवजोत सिंह सिद्धू के दावे से इतर ये सच है कि वैश्विक महामारी कोविड19 के बाद देश और दुनिया भर में आयुर्वेद का क्रेज बढ़ा है। सरकार से मिले आंकड़ों के अनुसार देश में आयुष का बाजार 2014 से 2023 के दौरान 2.85 डॉलर से बढ़कर 43.4 डॉलर तक पहुंच गया है। साथ इस क्षेत्र से होने वाला निर्यात बढ़कर दोगुने से अधिक हो गया है। इन आंकड़ों से साबित होता है कि पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों की पहचान देश ही नहीं दुनिया में भी और मुकम्मल हो रही है।

योग आयुर्वेद और गोरक्षपीठ की परंपरा
चूंकि योग और आयुर्वेद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर स्थित जिस गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर हैं, योग और आयुर्वेद वहां की परंपरा रही है। योग के मौजूदा स्वरूप को तो गुरु गोरक्षनाथ की ही देन माना जाता है। मंदिर परिसर में ही ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ के नाम से बना आयुर्वेद केंद्र पीठ की पहली चिकित्सा इकाई रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि अपने वैविध्य पूर्ण कृषि जलवायु, प्रचुर जलसंपदा और मानव संसाधन के नाते उत्तर प्रदेश आयुष के बाजार का बड़ा खिलाड़ी बने। साथ ही हेल्थ टूरिज्म का पसंदीदा मंजिल भी। मुख्यमंत्री की इसी मंशा के अनुरूप इस बाबत वैश्विक स्तर की बुनियादी सुविधाएं भी तैयार की जा रहीं हैं

गोरखपुर में योगी सरकार बना रही राज्य का पहला आयुष विश्वविद्यालय
गोरखपुर में महायोगी गुरु गोरक्षनाथ के नाम से बन रहा यूपी का पहला आयुष विश्वविद्यालय, अयोध्या में राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं वाराणसी में राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज का निर्माण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इसी संकल्पना की एक कड़ी है। गोरखपुर में भटहट के पिपरी में 52 एकड़ में बन रहे इस विश्वविद्यालय का शिलान्यास अगस्त 2021 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया था। अब यह बनकर लगभग तैयार है। ओपीडी की सेवाएं शुरू हो चुकीं हैं।

आयुष विश्वविद्यालय में पीजी के अलावा पीएचडी समेत दर्जन भर नए समयानुकूल कोर्स का होगा संचालन
आयुष विश्व विद्यालय में आयुष से जुड़ी सभी चिकित्सा पद्धतियों पर पारंपरिक पाठ्यक्रमों के साथ आज के दौर की आवश्यकताओं के अनुरूप यूनिक कोर्स भी चलाए जाएंगे। इसे लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आयुष विभाग के अफसर देश के अन्य राज्यों में चलाए जा रहे आयुष पाठ्यक्रमों के तुलनात्मक अध्ययन में जुटे हैं। अब तक पीएचडी समेत दर्जनभर पाठ्यक्रमों को चलाने की रूपरेखा तैयार कर ली गई है।

विश्वविद्यालय में संचालित होने वाले पाठ्यक्रम
पाठ्यक्रमों को लेकर आयुष विश्वविद्यालय की अब तक की कार्ययोजना के अनुसार
उसमें पीएचडी, बीएससी नर्सिंग आयुर्वेद, बी फार्मा आयुर्वेद, बी फार्मा होम्योपैथ, बी फार्मा यूनानी, पंचकर्म असिस्टेंट डिप्लोमा, पंचकर्म थेरेपिस्ट डिप्लोमा, विदेशी छात्रों के लिए डिप्लोमा, क्षारसूत्र डिप्लोमा, अग्निकर्म डिप्लोमा, उत्तरवस्ति डिप्लोमा और योग नेचुरोपैथी डिप्लोमा और कुछ सर्टिफिकेट कोर्स शामिल हैं। फिलहाल मरीजों को ओपीडी का लाभ मिलने लगा है।

खेतीबाड़ी का भी होगा कायाकल्प,खुशहाल होंगे किसान, स्थानीय स्तर पर बढ़ेंगे रोजगार के मौके
आयुष चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने से आयुष हेल्थ टूरिज्म में रोजगार की संभावनाएं भी सृजित होंगी। आयुष के बाजार में जिन उत्पादों की मांग होगी स्थानीय स्तर पर किसान उनकी खेती करेंगे। मांग होने से उनको अपने उत्पादों के दाम भी वाजिब मिलेंगे। आय बढ़ने से वह खुशहाल होंगे। इसके अलावा इनकी ग्रेडिंग, पैकिंग और ट्रांसपोर्टेशन में भी स्थानीय लोगों को रोजगार के मौके मिलेंगे।