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रूढ़िवादी संकीर्ण विचारों को बढ़ा रहा तालिबान, लखनऊ के इस्लामिक विद्वान खुलकर करें विरोध- डॉ. राजेश्वर सिंह

रूढ़िवादी संकीर्ण विचारों को बढ़ा रहा तालिबान, लखनऊ के इस्लामिक विद्वान खुलकर करें विरोध- डॉ. राजेश्वर सिंह
रूढ़िवादी संकीर्ण विचारों को बढ़ा रहा तालिबान, लखनऊ के इस्लामिक विद्वान खुलकर करें विरोध- डॉ. राजेश्वर सिंह
  • डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा- लखनऊ की पहचान न्याय और समानता से, यहां के मुस्लिम स्कॉलर तालिबान के कट्टरपंथ को करें उजागर
  • उन्होंने कहा- हमास और ईरान के समर्थन में जुलूस और अफगान महिलाओं की पीड़ा पर मौन, लखनऊ की यह पहचान ठीक नहीं
  • तालिबान की संकीर्ण नीतियों पर बिफरे डॉ. राजेश्वर, लखनऊ के मुस्लिम धर्मगुरुओं से किया विरोध की अपील

लखनऊ, 07 दिसम्बर 2024: तालिबान शासन द्वारा अफगानिस्तान में महिलाओं की नर्सिंग शिक्षा पर प्रतिबंध लगाए जाने पर डॉ. राजेश्वर सिंह ने कड़ा विरोध व्यक्त किया है। डॉ. सिंह ने इस कदम को रूढ़िवादी और संकीर्ण विचारधारा को बढ़ाने वाला कदम बताया। विधायक ने लखनऊ के मुस्लिम विद्वानों से तालिबान के कट्टरपंथ को उजागर करने की अपील की है।

सरोजनीनगर विधायक ने शनिवार को सोशल मीडिया पोस्ट कर बताया कि अफगानिस्तान में महिलाओं की आबादी करीब 1.7 करोड़ है, तालिबान के शासन में महिलाओं को लगातार उच्च शिक्षा प्राप्त करने, नौकरी करने, अकेले घर से निकलने आदि बुनियादी अधिकारों से वंचित किया जाता रहा है, साथ साथ उनके विरुद्ध हिंसा में भी वृद्धि हुई है।

विधायक ने महिला समानता पर चिंता व्यक्त करते हुए आगे लिखा इन प्रतिबंधों के लिए तालिबान ने जो धार्मिक तर्क दिए हैं, वे रूढ़िवादी संकीर्ण विचारों को बढ़ावा देने वाले हैं। जिनका उद्देश्य केवल महिलाओं की स्वतंत्रता प्रतिबंधित करना है। लगातार समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से अफगानिस्तान में महिलाओं के विरुद्ध अत्याचार की खबरें सामने आती रहती हैं, लेकिन इस विषय पर लखनऊ के इस्लामिक विद्वानों की चुप्पी अत्यंत दुखद, पीड़ादायक है।

डॉ. सिंह ने लखनऊ के मुस्लिम स्कॉलर्स और धर्म गुरुओं से अपील करते हुए आगे लिखा, लखनऊ का ऐतिहासिक योगदान न्याय, मानवाधिकार और समानता के लिए विख्यात रहा है, किंतु आज जब अफगान महिलाएं शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी अधिकारों से वंचित हैं, उनके समर्थन में लखनऊ से कोई आवाज नहीं उठ रही है।

अनेक अंतराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर लखनऊ में हुए प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने आगे लिखा, जहां एक ओर, आज भी लखनऊ में हमास और ईरान के आतंकी संगठनों के समर्थन में जुलूस निकलते हैं, वहीं दूसरी ओर अफगान महिलाओं की पीड़ा पर वही लोग शांत रहते हैं, यह गलत है।उचित तो ये होगा कि, लखनऊ के इस्लामिक विद्वान अफगानिस्तान में महिला अधिकारों के विरुद्ध की जा रही कट्टरपंथी और रूढ़िवादी धार्मिक व्याख्याओं को उजागर करें, सामने लाएं।

अपनी बात को समाप्त करते हुए डॉ. सिंह ने अंत में लिखा अब समय है कि हम अफगान महिलाओं के समर्थन में एक साथ अपनी आवाज उठाएं, लखनऊ के मुस्लिम धर्मगुरु तालिबान के अत्याचारों और संकीर्ण व्याख्याओं के विरुद्ध खुलकर सामने आएं।

महाकुंभ 2025: सीएम योगी ने की 25000 बेड क्षमता वाले सार्वजनिक आश्रय स्थलों की शुरुआत, खोया-पाया केंद्र का भी उद्घाटन

महाकुंभ 2025: सीएम योगी ने की 25,000 बेड क्षमता वाले सार्वजनिक आश्रय स्थलों की शुरुआत, खोया-पाया केंद्र का भी उद्घाटन
महाकुंभ 2025: सीएम योगी ने की 25,000 बेड क्षमता वाले सार्वजनिक आश्रय स्थलों की शुरुआत, खोया-पाया केंद्र का भी उद्घाटन
  • 25,000 बेड क्षमता वाले 100 सार्वजनिक आश्रय स्थलों का उद्घाटन: तीर्थयात्रियों के लिए किफायती और सुरक्षित ठहराव की व्यवस्था।
  • आधुनिक सुविधाओं से लैस आश्रय स्थल: प्रत्येक आश्रय स्थल में बेड, गद्दे, तकिए, स्वच्छ चादरें, शौचालय, और स्नानघर उपलब्ध।
  • किफायती शुल्क: सामान्य और स्नान पर्व के दिनों में नाममात्र शुल्क पर ठहरने की सुविधा।
  • कंप्यूटरीकृत खोया-पाया केंद्र: श्रद्धालुओं की गुमशुदगी समस्याओं का त्वरित समाधान।
  • महाकुंभ को दिव्य और भव्य बनाने का संकल्प: योगी सरकार भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता को विश्व मंच पर प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।

प्रयागराज, 7 दिसंबर 2024: योगी सरकार ने महाकुंभ 2025 को दिव्य और भव्य बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। तीर्थयात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को 250 बेड की क्षमता वाले 100 सार्वजनिक आश्रय स्थलों का उद्घाटन किया। इन आश्रय स्थलों में तीर्थयात्रियों को किफायती और सुलभ ठहराव मिलेगा। इसके साथ ही, मेला क्षेत्र में कंप्यूटरीकृत खोया-पाया केंद्र की भी शुरुआत की गई, जिससे श्रद्धालुओं को गुमशुदगी जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी।

सार्वजनिक आश्रय स्थलों की विशेषताएं और उद्देश्य

महाकुंभ क्षेत्र में बनाए गए इन सार्वजनिक आश्रय स्थलों का मुख्य उद्देश्य तीर्थयात्रियों को ठंड के कठोर मौसम में सुरक्षित और आरामदायक ठहराव प्रदान करना है। प्रत्येक आश्रय स्थल आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है, जिसमें 250 बेड, गद्दे, तकिए और स्वच्छ चादरों की व्यवस्था शामिल है। पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग शौचालय और स्नानघर बनाए गए हैं। 24×7 सुरक्षा और स्वच्छ पेयजल की भी व्यवस्था की गई है। तीर्थयात्री इन सुविधाओं का लाभ नाममात्र शुल्क पर ले सकते हैं, जो उनकी यात्रा को सुलभ और किफायती बनाता है।

शुल्क की सरल और पारदर्शी व्यवस्था

सार्वजनिक आश्रय स्थलों के लिए शुल्क बेहद किफायती रखा गया है। सामान्य दिनों में, पहले दिन के लिए 100 रुपये और दो दिन रुकने पर पहले दिन 100 रुपये और दूसरे दिन 200 रुपये का भुगतान करना होगा। मुख्य स्नान पर्व के दौरान यह शुल्क बढ़कर पहले दिन के लिए 200 रुपये और दो दिन के लिए पहले दिन 200 रुपये और दूसरे दिन 400 रुपये हो जाएगा। भुगतान नकद और डिजिटल दोनों माध्यमों से किया जा सकता है।

कंप्यूटरीकृत खोया-पाया केंद्र की शुरुआत

मुख्यमंत्री ने महाकुंभ क्षेत्र में कंप्यूटरीकृत खोया-पाया केंद्र का उद्घाटन भी किया। यह केंद्र अत्याधुनिक तकनीक से लैस है, जो गुमशुदगी की शिकायतों को तुरंत हल करने में सक्षम होगा। यह पहल श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित और संगठित अनुभव प्रदान करेगी।

महाकुंभ 2025: योगी सरकार का संकल्प

महाकुंभ 2025 को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता के अद्वितीय आयोजन के रूप में प्रस्तुत करने के लिए योगी सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर को विश्व मंच पर प्रस्तुत करने का एक अवसर है। इस पहल से न केवल तीर्थयात्रियों की सुविधा सुनिश्चित होगी, बल्कि महाकुंभ का आयोजन यादगार भी बनेगा। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी,’ जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, प्रयागराज के महापौर, मेला अधिकारी विजय किरण आनंद और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर महापौर का योगदान और भूतपूर्व सैनिकों का सम्मान

सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर महापौर का योगदान और भूतपूर्व सैनिकों का सम्मान
सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर महापौर का योगदान और भूतपूर्व सैनिकों का सम्मान
  • महापौर का योगदान: महापौर सुषमा खर्कवाल ने सशस्त्र सेना कोष में धनराशि दान कर सैनिक परिवारों के कल्याण हेतु अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की।
  • झंडा बैच का सम्मान: भूतपूर्व सैनिकों ने महापौर को झंडा बैच लगाकर उनका अभिनंदन किया।
  • सशस्त्र सेना झंडा दिवस का महत्व: महापौर ने 7 दिसंबर को वीर जवानों के सम्मान का प्रतीक बताया और शहीदों, विधवाओं और सैनिकों के कल्याण के लिए योगदान की अपील की।
  • कार्यक्रम में अधिकारी: विंग कमांडर मुकेश तिवारी और जिला सैनिक कल्याण बोर्ड अधिकारी ने महापौर का आभार व्यक्त किया।
  • दान हेतु प्रोत्साहन: कार्यक्रम में लखनऊवासियों को भी सैनिक कल्याण कोष में दान देने के लिए प्रेरित किया गया।

लखनऊ, 07 दिसम्बर 2024: सशस्त्र सेना झंडा दिवस के अवसर पर लखनऊ की महापौर श्रीमती सुषमा खर्कवाल ने देश के वीर सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए सराहनीय योगदान दिया। भूतपूर्व सैनिकों ने महापौर को झंडा बैच लगाकर उनका सम्मान करते हुए कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस मौके पर महापौर ने सशस्त्र सेना कोष में दान कर अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की। यह धनराशि सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण में खर्च की जाती है।

महापौर सुषमा खर्कवाल ने कहा कि सशस्त्र सेना झंडा दिवस देश के वीर जवानों के सम्मान का प्रतीक है। हर साल 7 दिसंबर को यह दिवस भारतीय सेना, नौसेना, और वायुसेना के जवानों और उनके परिवारों की भलाई के लिए मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि इस दिन हमें शहीदों, विधवाओं, भूतपूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए खुले दिल से योगदान देना चाहिए।

महापौर ने अपने संबोधन में इस दिवस के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह परंपरा 1949 से चली आ रही है। इस दिन, झंडा बैज बांटकर आम जनता से सैनिक कल्याण के लिए दान एकत्र किया जाता है। महापौर ने सभी नागरिकों से इस पुनीत कार्य में योगदान देने की अपील की।

इस अवसर पर विंग कमांडर मुकेश तिवारी और जिला सैनिक कल्याण बोर्ड अधिकारी राजेश कुमार सैनी ने महापौर का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने लखनऊवासियों को भी सैनिक कल्याण कोष में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री से मिले केशव प्रसाद मौर्य, महाकुंभ 2025 में सम्मिलित होने का दिया निमंत्रण

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री से मिले केशव प्रसाद मौर्य, महाकुंभ 2025 में सम्मिलित होने का दिया निमंत्रण
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री से मिले केशव प्रसाद मौर्य, महाकुंभ 2025 में सम्मिलित होने का दिया निमंत्रण
  • उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को महाकुंभ 2025 में सम्मिलित होने का निमंत्रण दिया।
  • विजयवाड़ा में आयोजित बैठक और रोड शो के माध्यम से महाकुंभ की महत्ता पर प्रकाश डाला।
  • अमरावती के अमरलिंगेश्वर स्वामी मंदिर और बुद्ध स्तूप का दर्शन कर भारतीय सांस्कृतिक विरासत को सराहा।
  • विजयवाड़ा के कनक दुर्गा मंदिर में माता दुर्गा की पूजा कर प्रदेश के सर्वमंगल की कामना की।
  • सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर सेना के बलिदान और सेवाओं को नमन करते हुए देशवासियों से सम्मान व्यक्त करने की अपील की।

    लखनऊ, 7 दिसंबर 2024: उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शनिवार को विजयवाड़ा में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से आत्मीय मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री को प्रयागराज में आयोजित होने वाले महाकुंभ-2025 में सम्मिलित होने का औपचारिक निमंत्रण दिया। महाकुंभ के महत्व पर चर्चा करते हुए उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिक चेतना का अनूठा संगम बताया।

    उप मुख्यमंत्री ने विजयवाड़ा पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के विधायक और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री वाई. एस. चौधरी (सुजाना चौधरी) से भी उनके आवास पर भेंट की। उन्होंने महाकुंभ की भव्यता और उसकी महत्ता को साझा करते हुए आंध्र प्रदेश के लोगों से इस आयोजन में भाग लेने की अपील की। इसके अलावा, उप मुख्यमंत्री ने वहां के नागरिकों के साथ रोड शो करते हुए महाकुंभ में सम्मिलित होने का आह्वान किया।

    विजयवाड़ा में आयोजित एक बैठक के दौरान उप मुख्यमंत्री ने यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री और वर्तमान विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह के साथ जनप्रतिनिधियों और गणमान्य लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि महाकुंभ 2025 में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए उच्च स्तरीय सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। अलग-अलग भारतीय भाषाओं और छह विदेशी भाषाओं में साइनेज लगाकर आगंतुकों को आसान नेविगेशन की सुविधा दी जाएगी।

    आंध्र प्रदेश प्रवास के दौरान उप मुख्यमंत्री ने अमरावती स्थित अमरलिंगेश्वर स्वामी मंदिर में भगवान शिव की पूजा-अर्चना की और देश-प्रदेश के कल्याण की प्रार्थना की। इसके बाद उन्होंने भगवान बुद्ध के प्राचीन स्तूप और उनकी भव्य प्रतिमा का दर्शन किया। उन्होंने इसे भारतीय सांस्कृतिक धरोहर और मौर्य साम्राज्य की गौरवशाली विरासत का जीवंत उदाहरण बताया।

    विजयवाड़ा के कनक दुर्गा मंदिर में उप मुख्यमंत्री ने विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह के साथ माता दुर्गा के दर्शन और पूजन किया। उन्होंने माता से देश और प्रदेश के नागरिकों के सर्वमंगल की कामना की।

    इससे पूर्व, उप मुख्यमंत्री ने सशस्त्र सेना झंडा दिवस के अवसर पर भारतीय सेना के वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने सभी नागरिकों से सेना के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का आह्वान किया।

    लखनऊ: संघ कार्यालय भारती भवन में 8 दिसंबर को गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस का भव्य आयोजन

    लखनऊ: संघ कार्यालय भारती भवन में 8 दिसंबर को गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस का भव्य आयोजन
    लखनऊ: संघ कार्यालय भारती भवन में 8 दिसंबर को गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस का भव्य आयोजन
    • शहीदी दिवस का भव्य आयोजन: गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस पर 8 दिसंबर को भारती भवन, लखनऊ में एक भव्य कार्यक्रम होगा।
    • धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां: पाठ, कीर्तन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और चित्र प्रदर्शनी कार्यक्रम का हिस्सा होंगी।
    • समुदायों की भागीदारी: लखनऊ के विभिन्न धर्मों और समुदायों के 100 से अधिक श्रद्धालु कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।
    • विशिष्ट अतिथि: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अन्य प्रमुख धार्मिक संगठनों के सदस्य, अयोध्या के संत और विद्वान अतिथि होंगे।
    • लंगर सेवा और समापन: कार्यक्रम के अंत में विशेष लंगर सेवा का आयोजन होगा।

      लखनऊ, 07 दिसम्बर 2024: लखनऊ के राजेंद्र नगर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यालय, भारती भवन के प्रांगण में 8 दिसंबर को सिखों के नौवें गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस के अवसर पर एक भव्य आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन की जानकारी श्री गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस आयोजन समिति, लखनऊ के संयोजक निर्मल सिंह जी ने प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम सायं 6 बजे से शुरू होगा और इसमें धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामुदायिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।

      गुरु तेग बहादुर जी को उनकी साहसिकता और धर्म की रक्षा के लिए किए गए सर्वोच्च बलिदान के लिए “हिंद की चादर” के नाम से जाना जाता है। उन्होंने औरंगजेब के क्रूरतम शासन के दौरान सनातन धर्म, वैचारिक स्वतंत्रता और मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। इस आयोजन का उद्देश्य गुरुजी के बलिदान को स्मरण कर वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को उनके आदर्शों और मूल्यों से प्रेरित करना है।

      कार्यक्रम की प्रमुख गतिविधियां

      शहीदी दिवस के अवसर पर भारती भवन के प्रांगण में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की हजूरी में पाठ और कीर्तन का आयोजन किया जाएगा। दशमेश पब्लिक स्कूल और चढ़दी कला क्लासेस, लखनऊ के बच्चे सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। इसके अतिरिक्त गुरु तेग बहादुर साहिब जी के जीवन और उनके बलिदान पर आधारित एक विशेष चित्र प्रदर्शनी लगाई जाएगी।

      इस आयोजन में लखनऊ के विभिन्न धर्मों, समुदायों और पंथों के लोग शामिल होंगे। कुल 31 विभिन्न मतों और संगठनों से 100 से अधिक श्रद्धालु इस कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे। लखनऊ के गुरुद्वारों, सिंधी समाज, सनातनी महासभा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहयोग से इस भव्य आयोजन की सभी व्यवस्थाएं की जाएंगी।

      प्रमुख वक्ताओं और अतिथियों की भागीदारी

      कार्यक्रम में भाई गुरमीत सिंह जी, भाई दिनेश सिंह जी, गुरमत लेक्चर देने के लिए अमृतसर से सरदार दिलबाग सिंह जी, और बीबी रवनीत कौर जी मुख्य वक्ता होंगे। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अवध प्रांत प्रचारक कौशल जी, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनिल जी और गोपाल जी, गौ सेवा के अखिल भारतीय सह-संयोजक नवल किशोर जी, और राष्ट्रधर्म मासिक पत्रिका के निदेशक मनोज कांत जी सहित कई विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति रहेगी।

      अयोध्या से आने वाले संतों और अन्य धार्मिक गुरुओं का भी इस कार्यक्रम में स्वागत किया जाएगा। सभी वक्ता गुरु तेग बहादुर जी के जीवन और उनके बलिदान के महत्व पर प्रकाश डालेंगे।

      लंगर सेवा और समापन समारोह

      कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं के लिए विशेष लंगर सेवा का आयोजन किया जाएगा। इस लंगर सेवा में सभी धर्म और समुदायों के लोगों को निमंत्रित किया गया है। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ इस भव्य आयोजन का समापन होगा।

      गुरुजी के बलिदान की प्रासंगिकता

      श्री गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान केवल सिख धर्म के लिए नहीं बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके जीवन से यह संदेश मिलता है कि अत्याचारों के खिलाफ खड़े होना, सत्य के लिए संघर्ष करना और मानवता की रक्षा करना, प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।

      आयोजन समिति के संयोजक निर्मल सिंह जी ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन का उद्देश्य समाज में चेतना का प्रसार करना और युवाओं को गुरुजी के बलिदान और उनके आदर्शों से परिचित कराना है। उन्होंने कहा, “गुरु तेग बहादुर जी ने मुगलों के सबसे क्रूर शासक औरंगजेब की नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण और साहसिक प्रतिरोध का अद्वितीय उदाहरण पेश किया। उनका जीवन हमें सिखाता है कि मानवता के लिए धर्म, नैतिकता और स्वतंत्रता का क्या महत्व है।” यह कार्यक्रम न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि गुरुजी के बलिदान को याद करते हुए समाज में धर्म, मानवता और नैतिकता की रक्षा के प्रति जागरूकता का प्रतीक है।