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लखनऊ-अयोध्या हाइवे पर भीषण सड़क हादसा: स्कार्पियो कार को अज्ञात वाहन ने मारी टक्कर, महिला की मौत, पति घायल

  • अज्ञात वाहन ने स्कार्पियो को जोरदार टक्कर मारी।
  • स्कार्पियो कार पूरी तरह चकनाचूर हो गई।
  • महिला खुशबू सिंह की मौके पर मौत हुई।
  • पति रवि प्रताप सिंह गंभीर रूप से घायल।
  • घटना तिवारीगंज चौराहे, BBD थानाक्षेत्र, पूर्वी जोन में हुई।

लखनऊ: शुक्रवार तड़के लखनऊ-अयोध्या हाइवे पर तिवारीगंज चौराहे के पास एक दर्दनाक सड़क हादसे में स्कार्पियो कार (UP 53 CB 0023) अज्ञात वाहन की चपेट में आ गई। इस घटना में कार बुरी तरह चकनाचूर हो गई। स्कार्पियो में सवार दंपत्ति में महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पति गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटनास्थल और हादसे का विवरण:
यह दुर्घटना पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ के पूर्वी ज़ोन के BBD थाना क्षेत्र में तिवारीगंज चौराहे पर हुई। भोर सुबह के समय अज्ञात वाहन ने स्कार्पियो कार पर पीछे से जोरदार टक्कर मार दी, जिससे कार का आगे का हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि महिला को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

पीड़ितों की पहचान:
स्कार्पियो कार में गोरखपुर जिले के खजनी क्षेत्र के हरनी गांव निवासी रवि प्रताप सिंह (48 वर्ष) और उनकी पत्नी खुशबू सिंह (45 वर्ष) सवार थे। इस हादसे में खुशबू सिंह की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल रवि प्रताप सिंह को स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।

पुलिस की कार्रवाई:
घटना की जानकारी मिलते ही BBD थाना क्षेत्र की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। फिलहाल पुलिस अज्ञात वाहन और उसके चालक का पता लगाने के लिए आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।

स्कार्पियो कार के बारे में जानकारी:
हादसे का शिकार हुई स्कार्पियो कार का नंबर UP 53 CB 0023 है। यह गोरखपुर के खजनी इलाके से संबंधित है। पति-पत्नी किसी जरूरी काम से गोरखपुर से लखनऊ की ओर जा रहे थे।

स्थानीय पुलिस-प्रशासन का बयान:
पुलिस ने बताया कि हादसा सुबह करीब 4 बजे हुआ। भोर का समय होने के कारण हाइवे पर ट्रैफिक कम था, जिससे अज्ञात वाहन चालक तेज रफ्तार में था। टक्कर के बाद वाहन मौके से फरार हो गया।

यह घटना न केवल सड़क सुरक्षा के प्रति लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि तेज रफ्तार और असावधानी से होने वाले खतरों की ओर भी इशारा करती है।

शिक्षक भर्ती विवाद: SC ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को माना सही, 27,000 रिक्त पदों पर चयन होगा

शिक्षक भर्ती विवाद: SC ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को माना सही, 27,000 रिक्त पदों पर चयन होगा
शिक्षक भर्ती विवाद: SC ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को माना सही, 27,000 रिक्त पदों पर चयन होगा
  • सुप्रीम कोर्ट ने 68,500 शिक्षक भर्ती में 27,000 रिक्त पदों पर चयन के लिए हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।
  • 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों के समायोजन को रद्द कर 1.37 लाख पद रिक्त कर दिए थे।
  • 2018 में राज्य सरकार ने 68,500 और 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती की परीक्षा आयोजित की थी।
  • कुछ अभ्यर्थियों ने कटआफ अंक घटाने और कापी बदलने के आरोप लगाए थे, जिसके बाद हाई कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे।
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब बेसिक शिक्षा विभाग को भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आदेश दिया गया है।

प्रयागराज/लखनऊ, 08 दिसम्बर 2024 – उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती में 27,000 से अधिक रिक्त पदों पर चयन की प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला आया है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के आदेश को यथावत बरकरार रखते हुए राज्य सरकार को इन रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी रखने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद अब बेसिक शिक्षा विभाग को इन पदों पर चयन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना पड़ेगा।

यह मामला तब शुरू हुआ था जब कुछ अभ्यर्थियों ने परीक्षा के बाद रिक्त रह गए 27,000 से ज्यादा पदों पर चयन की मांग की थी। अभ्यर्थियों का कहना था कि कटआफ अंक को कम किया जाए, ताकि अधिक संख्या में उम्मीदवारों को अवसर मिल सके। इसके साथ ही कुछ अभ्यर्थियों ने परीक्षा में कापी बदलने का भी आरोप लगाया था, और यह मांग की थी कि रिक्त पदों पर भर्ती के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जांच के आदेश दिए थे और सीबीआई को इस मामले की जांच का जिम्मा सौंपा था।

वहीं, उच्चतम न्यायालय में मामला पहुंचने पर सुप्रीम कोर्ट ने इन अभ्यर्थियों की याचिका को खारिज कर दिया। इस निर्णय के बाद अब प्रदेश सरकार को हाई कोर्ट के आदेश के अनुरूप भर्ती प्रक्रिया को जारी रखने का आदेश दिया गया है। यह आदेश उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद लागू हुआ है। इसके साथ ही भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह के बदलाव की संभावना समाप्त हो गई है।

मामला पिछली घटनाओं से जुड़ा है: यह मामला वर्ष 2017 से जुड़ा हुआ है, जब सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में सहायक अध्यापक पद पर कार्यरत शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द कर दिया था। इस निर्णय के परिणामस्वरूप लगभग 1.37 लाख सहायक अध्यापक के पद रिक्त हो गए थे। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 2018 में दो चरणों में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू की। पहले चरण में 68,500 और दूसरे चरण में 69,000 पदों पर भर्ती निकाली गई थी।

भर्ती परीक्षा में कटआफ अंक निर्धारित किए गए थे, जिसमें अनारक्षित श्रेणी के लिए 45 प्रतिशत और ओबीसी तथा अन्य श्रेणियों के लिए 40 प्रतिशत अंक तय किए गए थे। हालांकि, परीक्षा परिणाम के बाद कई पद रिक्त रह गए थे क्योंकि सभी रिक्तियों के लिए पर्याप्त योग्य अभ्यर्थी नहीं मिल सके थे। इन रिक्त पदों की संख्या 27,000 से अधिक थी, जिसे लेकर अभ्यर्थियों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हाई कोर्ट का आदेश और सीबीआई जांच: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई जांच का आदेश दिया था। कोर्ट ने आदेश दिया था कि भर्ती परीक्षा में कापी बदलने के आरोपों की जांच की जाए और परीक्षा प्रक्रिया में हुई किसी भी गड़बड़ी की पुष्टि की जाए। साथ ही, कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर परीक्षा में किसी तरह की अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो उन पर कार्रवाई की जाए और चयन प्रक्रिया को सही तरीके से संपन्न किया जाए। हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य सरकार को आदेश के अनुरूप भर्ती प्रक्रिया जारी रखनी होगी।

अब क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, अब बेसिक शिक्षा विभाग को अपनी भर्ती प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का निर्देश दिया गया है। इसके अंतर्गत वे 27,000 रिक्त पदों पर योग्य उम्मीदवारों का चयन करेंगे। भर्ती प्रक्रिया में अब कोई कटआफ अंक में बदलाव नहीं होगा और कोई नई मांग नहीं मानी जाएगी। इस प्रक्रिया को जल्द ही पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने सभी तैयारियां शुरू कर दी हैं।

यूपी के 9 जिलों की सड़कों के नमूने जांच में फेल: गुणवत्ता पर उठे सवाल

यूपी के 9 जिलों की सड़कों के नमूने जांच में फेल: गुणवत्ता पर उठे सवाल
यूपी के 9 जिलों की सड़कों के नमूने जांच में फेल: गुणवत्ता पर उठे सवाल
  • 9 जिलों की सड़कों के नमूने जांच में फेल: कानपुर नगर, प्रतापगढ़, मुजफ्फरनगर, आजमगढ़ सहित 9 जिलों की सड़कों की गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरी।
  • 36 सड़कों के नमूनों की जांच: इन जिलों में नवनिर्मित सड़कों से कुल 36 नमूने लिए गए थे, जिनमें से अधिकांश फेल हो गए।
  • पीडब्ल्यूडी ने रिपोर्ट सौंपी: लोक निर्माण विभाग ने शासन को सौंपी रिपोर्ट में सड़कों की खराब गुणवत्ता उजागर की।
  • गुणवत्ता सुधार के निर्देश: शासन ने दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई करने और सख्त मापदंड लागू करने के आदेश दिए।
  • जनता की सुरक्षा पर सवाल: खराब सड़कों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा, जो जनता की सुरक्षा और सुविधाओं के लिए चिंताजनक है।

लखनऊ, 08 दिसम्बर 2024: उत्तर प्रदेश में नवनिर्मित सड़कों की गुणवत्ता को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। हाल ही में 9 जिलों की सड़कों की जांच के लिए लिए गए नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतर सके। इस जांच में कानपुर नगर, प्रतापगढ़, मुजफ्फरनगर, आजमगढ़, बलरामपुर, बदायूं, जालौन, बस्ती और गाजीपुर जिलों की सड़कों के नमूने फेल पाए गए। इससे पहले हरदोई जिले में भी सड़कों की गुणवत्ता पर सवाल उठे थे। इस रिपोर्ट ने राज्य के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

36 सड़कों के नमूनों की हुई थी जांच

पीडब्ल्यूडी मुख्यालय ने इन जिलों से कुल 36 सड़कों के नमूने जांच के लिए लिए थे। जांच का उद्देश्य सड़कों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना था। लेकिन अधिकांश नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। रिपोर्ट के अनुसार, सड़कों में इस्तेमाल किए गए निर्माण सामग्री की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई। कई जगहों पर सड़क निर्माण में बेसिक मापदंडों का भी पालन नहीं किया गया।

सरकार ने दिए थे जांच के आदेश

प्रदेश सरकार ने हाल ही में नवनिर्मित सड़कों की गुणवत्ता जांच के लिए आदेश दिए थे। इन आदेशों के तहत, सड़कों के निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और प्रक्रिया की जांच की गई। लेकिन रिपोर्ट में सामने आए नतीजों ने राज्य सरकार और पीडब्ल्यूडी विभाग के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यह रिपोर्ट न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग को उजागर करती है, बल्कि ठेकेदारों और अधिकारियों की लापरवाही का भी प्रमाण है।

पीडब्ल्यूडी ने रिपोर्ट सौंपी, कार्रवाई की तैयारी

पीडब्ल्यूडी मुख्यालय ने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। अब राज्य सरकार इस रिपोर्ट का परीक्षण करा रही है। रिपोर्ट में खराब गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार ठेकेदारों और अधिकारियों की पहचान की जाएगी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया है। यह भी निर्देश दिया गया है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए सख्त मापदंड लागू किए जाएं।

लापरवाह अधिकारियों और ठेकेदारों पर गिर सकती है गाज

सरकार इस पूरे प्रकरण को लेकर बेहद सख्त नजर आ रही है। ऐसी संभावना है कि जांच में दोषी पाए गए अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, भविष्य में सड़कों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक सख्त मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किया जाएगा।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

सड़कों की खराब गुणवत्ता सिर्फ एक प्रशासनिक समस्या नहीं है, बल्कि यह आम जनता की सुरक्षा और सुविधाओं से जुड़ा मुद्दा है। खराब सड़कों से न केवल दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है, बल्कि इसका सीधा असर राज्य के विकास और नागरिकों के जीवन स्तर पर पड़ता है। इस मामले ने राज्य सरकार और पीडब्ल्यूडी विभाग के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत को रेखांकित किया है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मौसम बदलने के संकेत, बारिश और ठंड में इजाफा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मौसम बदलने के संकेत, बारिश और ठंड में इजाफा
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मौसम बदलने के संकेत, बारिश और ठंड में इजाफा
  • उत्तर प्रदेश के 40 जिलों में हल्की बारिश की संभावना जताई गई।
  • न्यूनतम तापमान में 3-4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट का अनुमान।
  • तराई के इलाकों में घना कोहरा बढ़ने की संभावना।
  • अगले दो दिनों में सर्दी और कोहरा दोनों में इजाफा होगा।
  • प्रदेश में ठंड के तेज़ प्रभाव के चलते जनजीवन प्रभावित होने की संभावना।

लखनऊ, 08 दिसम्बर 2024: उत्तर प्रदेश में मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में अचानक बदलाव के संकेत दिए हैं। प्रदेश के करीब 40 जिलों में हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। साथ ही, तराई के इलाकों में कोहरा बढ़ने की संभावना है, जिससे न्यूनतम तापमान में गिरावट देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगले दो दिनों में सर्दी और कोहरा दोनों बढ़ सकते हैं, जिससे ठंड का प्रभाव तेज़ हो जाएगा।

मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूनतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट हो सकती है। खासतौर पर तराई क्षेत्र और आसपास के इलाकों में कोहरा घना होने की संभावना है। इस बदलाव का सीधा असर जनजीवन पर पड़ेगा, जहां ठंड और दृश्यता कम होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में पिछले कुछ दिनों से मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। दिन के तापमान में गिरावट के साथ-साथ रातें और अधिक ठंडी हो रही हैं। बारिश की संभावना और बढ़ते कोहरे के चलते किसान और आम नागरिक सतर्क हैं। विभाग ने सभी को मौसम की स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

लखनऊ: बम होने की फर्जी सूचना से मची अफरा-तफरी, तीन स्थानों पर पहुंची पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां

लखनऊ: बम होने की फर्जी सूचना से मची अफरा-तफरी, तीन स्थानों पर पहुंची पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां
लखनऊ: बम होने की फर्जी सूचना से मची अफरा-तफरी, तीन स्थानों पर पहुंची पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां
  • लखनऊ के हुसैनगंज मेट्रो स्टेशन, चारबाग रेलवे स्टेशन, और आलमबाग बस स्टेशन पर बम होने की सूचना मिली।
  • स्थानीय पुलिस, बम निरोधक दस्ता (BDS), और UPSSF की टीम ने तत्काल जांच की।
  • जांच के दौरान सूचना फर्जी पाई गई, किसी भी स्थान पर बम नहीं मिला।
  • पुलिस ने फर्जी सूचना देने वाले कॉलर की तलाश शुरू की, दोषी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
  • प्रशासन ने जनता से अफवाहें न फैलाने और सतर्क रहने की अपील की।

    लखनऊ, 08 दिसम्बर 2024: लखनऊ में बीती रात तीन प्रमुख सार्वजनिक स्थानों— हुसैनगंज मेट्रो स्टेशन, चारबाग रेलवे स्टेशन, और आलमबाग बस स्टेशन—पर बम होने की सूचना ने शहर में सनसनी फैला दी। जैसे ही पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को यह सूचना मिली, उन्होंने तत्काल मामले को संज्ञान में लिया और घटनास्थलों पर पहुंचकर गहन जांच-पड़ताल शुरू कर दी। इस दौरान बम निरोधक दस्ता (BDS), डॉग स्क्वायड, और उत्तर प्रदेश स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स (UPSSF) की टीमें सक्रिय रहीं। जांच के बाद पता चला कि यह सूचना पूरी तरह फर्जी थी।

    घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी

    शनिवार देर रात पुलिस को सूचना मिली कि हुसैनगंज मेट्रो स्टेशन, चारबाग रेलवे स्टेशन और आलमबाग बस स्टेशन पर बम लगाए गए हैं। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत हरकत में आ गई। तीनों स्थानों पर बम निरोधक दस्ते और सुरक्षा एजेंसियों की टीमें पहुंचीं। इन स्थानों को घेरकर संदिग्ध वस्तुओं की खोजबीन शुरू की गई। जांच के दौरान हर कोने को खंगाला गया और यह सुनिश्चित किया गया कि यात्रियों को किसी प्रकार का खतरा न हो।

    एडीसीपी मनीषा सिंह ने बताया कि सूचना को गंभीरता से लिया गया और सभी स्थानों पर व्यापक सुरक्षा जांच की गई। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की फर्जी सूचनाएं न केवल प्रशासन के समय और संसाधनों की बर्बादी करती हैं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा को भी खतरे में डालती हैं।

    फर्जी कॉलर की तलाश जारी

    जांच के दौरान जब यह स्पष्ट हो गया कि यह एक अफवाह थी, पुलिस ने तुरंत सूचना देने वाले कॉलर की पहचान शुरू कर दी। कॉलर के नंबर को ट्रेस किया जा रहा है और जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि इस तरह की हरकतें कानूनन अपराध हैं और दोषियों को सख्त सजा दी जाएगी।

    सुरक्षा जांच का प्रभाव और प्रशासन की सख्ती

    फर्जी सूचना के कारण तीनों स्थानों पर यात्रियों और आम जनता में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल रहा। हालांकि, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी तत्परता से स्थिति को नियंत्रित कर लिया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि योगीराज में किसी भी प्रकार की अफवाह फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां और सतर्क हो गई हैं और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।

    प्रशासन की अपील

    लखनऊ पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की फर्जी सूचना या अफवाह न फैलाएं। यदि कोई संदिग्ध गतिविधि नजर आए तो तुरंत पुलिस को सूचित करें, ताकि समय पर उचित कदम उठाए जा सकें। अफवाह फैलाने वालों को कड़ी सजा देने का आश्वासन भी दिया गया है।