Home Blog Page 1115

लखनऊ: हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल की फ्लीट शहीद पथ पर हादसे का शिकार, डीसीपी ट्रैफिक की लापरवाही पर उठे सवाल

  • हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल की फ्लीट सोमवार सुबह लखनऊ के शहीद पथ पर एक बड़े हादसे का शिकार हो गई, जिसमें कई सुरक्षाकर्मी घायल हो गए।
  • हादसा तब हुआ जब एक निजी वाहन ने प्रोटोकॉल तोड़ते हुए फ्लीट में घुसने की कोशिश की, जिससे कई गाड़ियां आपस में टकरा गईं।
  • इस घटना ने लखनऊ की खराब यातायात व्यवस्था और डीसीपी ट्रैफिक प्रबल प्रताप सिंह की लापरवाही को उजागर किया है।
  • हादसे के कारण शहीद पथ और आसपास के इलाकों में यातायात पूरी तरह ठप हो गया, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
  • राजनीतिक दलों और जनता ने डीसीपी ट्रैफिक पर सवाल उठाते हुए लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

लखनऊ, 10 दिसम्बर 2024: हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल की फ्लीट सोमवार सुबह लखनऊ के शहीद पथ पर एक बड़े हादसे का शिकार हो गई। यह घटना लुलु मॉल के पास सुबह करीब 9 बजे हुई, जब राज्यपाल की गाड़ियां अमौसी एयरपोर्ट से शहीद पथ की ओर जा रही थीं। हादसे में फ्लीट की कई गाड़ियां आपस में टकरा गईं, जिससे एस्कॉर्ट टीम के सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। वहीं, इस घटना ने लखनऊ की खराब ट्रैफिक व्यवस्था और डीसीपी ट्रैफिक प्रबल प्रताप सिंह की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैसे हुआ हादसा?

घटनास्थल से मिली जानकारी के अनुसार, राज्यपाल की फ्लीट शहीद पथ पर सुरक्षित मार्ग से गुजर रही थी। इसी दौरान एक निजी वाहन ने अचानक प्रोटोकॉल तोड़ते हुए फ्लीट में घुसने की कोशिश की, जिससे कई गाड़ियां आपस में भिड़ गईं। हादसे में फ्लीट में शामिल एस्कॉर्ट टीम के सुरक्षाकर्मी घायल हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया और यातायात को सुचारू करने में जुट गई। हालांकि, अब तक घायलों की स्थिति और उनकी संख्या को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

डीसीपी ट्रैफिक प्रबल प्रताप सिंह की लापरवाही उजागर

इस हादसे ने लखनऊ की ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ी खामी को उजागर किया है। सवाल उठ रहे हैं कि शहीद पथ जैसे व्यस्त मार्ग पर वीआईपी मूवमेंट के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन क्यों विफल हुआ। डीसीपी यातायात प्रबल प्रताप सिंह की जिम्मेदारी के बावजूद इस प्रकार के हादसों को टालने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।

ट्रैफिक प्रोटोकॉल का पालन न होना और हादसे के बाद डीसीपी ट्रैफिक की चुप्पी ने इस मामले को और भी गंभीर बना दिया है। न तो उन्होंने घटना के लिए जिम्मेदारी ली है और न ही अब तक दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई की है।

हादसे के कारण यातायात ठप, जनता को हुई परेशानी

हादसे के कारण शहीद पथ पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई। लुलु मॉल और अहिमामऊ समेत आसपास के इलाकों में भारी जाम लग गया, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन ने जाम हटाने के लिए घंटों मशक्कत की, लेकिन यह सवाल बरकरार है कि बेहतर प्रबंधन से इस स्थिति को टाला क्यों नहीं गया।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और जनता की नाराजगी

राज्यपाल की फ्लीट हादसे के बाद राजनीतिक दलों ने डीसीपी ट्रैफिक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं ने प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि वीआईपी मूवमेंट के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन में लापरवाही ने इस बड़े हादसे को जन्म दिया है।

प्रशासन की जिम्मेदारी और अपेक्षित कार्रवाई

इस घटना ने लखनऊ में ट्रैफिक प्रबंधन और वीआईपी मूवमेंट के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सख्ती की कमी को उजागर किया है। जनता और राजनीतिक दलों की मांग है कि डीसीपी यातायात समेत जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

शहीद पथ पर हुई यह दुर्घटना न केवल राज्यपाल की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है, बल्कि लखनऊ की यातायात व्यवस्था और प्रशासनिक खामियों को भी उजागर करती है। डीसीपी ट्रैफिक प्रबल प्रताप सिंह की चुप्पी और जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का रवैया प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान है।

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा का 92 वर्ष की आयु में निधन

  • कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा का 92 वर्ष की आयु में 10 दिसंबर की रात करीब ढाई बजे निधन हो गया।
  • 1999 से 2004 तक मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने कर्नाटक में आईटी और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
  • कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे एसएम कृष्णा 2017 में भाजपा में शामिल हो गए थे और महाराष्ट्र के राज्यपाल व विदेश मंत्री जैसे पदों पर भी कार्य किया।
  • उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और जेपी नड्डा समेत कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया।
  • पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए बेंगलुरु में रखा जाएगा और अंतिम संस्कार परिवार की उपस्थिति में संपन्न होगा।

बेंगलुरु/लखनऊ, 10 दिसम्बर 2024: कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा का रविवार रात 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने 10 दिसंबर की रात करीब ढाई बजे अंतिम सांस ली। उनके निधन से राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

राजनीतिक सफर:

एसएम कृष्णा भारतीय राजनीति के उन बड़े चेहरों में से एक थे, जिन्होंने कर्नाटक की राजनीति को नई दिशा दी। वह 1999 से 2004 तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे। उनके कार्यकाल में राज्य में आईटी और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास हुआ, जिससे बेंगलुरु को ‘सिलिकॉन वैली ऑफ इंडिया’ का दर्जा मिला।

इसके अलावा, उन्होंने केंद्रीय विदेश मंत्री और महाराष्ट्र के राज्यपाल जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी अपनी सेवाएं दीं। एसएम कृष्णा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे, लेकिन 2017 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए थे।

जीवन परिचय:

एसएम कृष्णा का जन्म 1 मई 1932 को कर्नाटक के मांड्या जिले के सोलूर गांव में हुआ था। उन्होंने अपनी शिक्षा बेंगलुरु और अमेरिका में पूरी की। कानून में स्नातक करने के बाद, उन्होंने राजनीति में कदम रखा।

यादगार योगदान:

मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल को कर्नाटक के लिए सुनहरे दौर के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने आईटी सेक्टर को प्रोत्साहन देने के लिए कई नीतिगत सुधार किए। बेंगलुरु को एक वैश्विक आईटी हब के रूप में स्थापित करने में उनकी भूमिका अहम रही।

निधन पर शोक व्यक्त:

एसएम कृष्णा के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री ने उन्हें “एक दूरदर्शी नेता और शानदार प्रशासक” बताया।

अंतिम संस्कार:

परिवार के सूत्रों के मुताबिक, एसएम कृष्णा का अंतिम संस्कार बेंगलुरु में उनके आवास पर किया जाएगा। उनका पार्थिव शरीर सोमवार सुबह अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा।

एसएम कृष्णा का जाना न केवल कर्नाटक बल्कि पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके योगदान और नेतृत्व को हमेशा याद किया जाएगा।

सीरिया में असद का पतन: तानाशाहों के लिए चेतावनी का समय- डॉ. राजेश्वर सिंह

  • तानाशाही का भविष्य अस्थिर, लोकतंत्र ही समाधान: सीरिया मुद्दे पर डॉ. राजेश्वर सिंह का बयान
  • दमन विद्रोह को जन्म देता है, तानाशाही की समाप्ति सुनिश्चित है – डॉ. राजेश्वर सिंह
  • कोई भी बल, छल या विदेशी सहायता तानाशाही को सदा बनाए नहीं रख सकती, सीरिया तख्तापलट से दुनिया को सीखने की जरूरत – डॉ. राजेश्वर सिंह
  • असद का पतन सिर्फ एक ऐतिहासिक क्षण नहीं है, बल्कि सभी अधिनायकवादियों के लिए चेतावनी – डॉ. राजेश्वर सिंह
  • लोकतंत्र ही स्थिरता का आधार: असद के पतन पर डॉ. राजेश्वर सिंह ने ट्वीट कर व्यक्त किये विचार

लखनऊ, 09 दिसम्बर 2024: राजधानी लखनऊ की सरोजनीनगर विधानसभा से जनप्रिय विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह ने सीरिया में हुए तख्तापलट को तानाशाही शासन के लिए एक बड़ी चेतावनी बताते हुए अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। विधायक डॉ. सिंह ने सोमवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा, “इस सप्ताह, बशर अल-असद का पतन एक ऐतिहासिक घटना है, जिसने 22 वर्षों तक चल रहे उनके अत्याचारपूर्ण शासन का अंत किया। असद का शासन सीरिया के लिए विनाशकारी साबित हुआ, जिसमें 5,00,000 से अधिक लोगों की जान गई और 1.3 करोड़ से अधिक लोग विस्थापित हुए। यह पतन सिर्फ एक ऐतिहासिक क्षण नहीं है, बल्कि यह तानाशाही शासन का खात्मा और सभी अधिनायकवादियों के लिए एक बड़ा संकेत है।”

डॉ. राजेश्वर सिंह ने असद के पतन से मिलने वाली 6 प्रमुख शिक्षाओं को अपने ट्वीट में साझा किया

हिंसा अतिवाद को जन्म देती है: 2011 में जब असद ने प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक दमन किया, तो यह गृहयुद्ध में बदल गया और आईएसआईएस जैसे आतंकी समूहों के उभरने का कारण बना। आज, अतिवाद को बढ़ावा देना भविष्य में और भी गंभीर परिणाम उत्पन्न करता है।

संक्षिप्तकालिक लाभ दीर्घकालिक अराजकता को जन्म देते हैं: असद ने आतंकवादियों के प्रभाव को अपनी छवि को बचाने के लिए हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। 2015 तक, आईएसआईएस ने सीरिया के 40% से अधिक क्षेत्र पर कब्जा कर लिया, जो यह दर्शाता है कि आतंकवाद का राजनीति में उपयोग खतरनाक हो सकता है।

तानाशाही की समाप्ति सुनिश्चित है: असद ने रूस और ईरान से समर्थन लिया, लेकिन अंततः आर्थ‍िक संकट और आंतरिक असंतोष के कारण उनका शासन कमजोर हो गया। उनके शासनकाल में 300 से अधिक रासायनिक हमले किए गए, जिससे वैश्विक समर्थन में कमी आई। “जो तलवार से जीते हैं, वे तलवार से मरते हैं।”

दमन विद्रोह को जन्म देता है: असद ने विपक्ष से बातचीत करने से इनकार किया, जिससे सीरिया में 12 वर्षों तक खूनखराबा चलता रहा। इसके परिणामस्वरूप सीरिया की अर्थव्यवस्था को 120 अरब डॉलर की क्षति हुई। “आप जितना अपने लोगों को दबाएंगे, उनका विद्रोह उतना ही तीव्र होगा।”

तानाशाह का भाग्य निश्चित है: असद अब उन तानाशाहों की सूची में शामिल हो गए हैं जिनका शासन कभी न कभी समाप्त हुआ, जैसे सद्दाम हुसैन और मुअम्मर गद्दाफी। आज सीरिया की 80% आबादी गरीबी में जीवन यापन कर रही है, जो तानाशाही शासन के अस्थिर होने का संकेत है। “जो शक्ति से जीते हैं, वे शक्ति से मरते हैं।”

लोकतंत्र: स्थिरता की कुंजी: असद का पतन हमें यह याद दिलाता है कि लोकतांत्रिक प्रणालियां क्यों महत्वपूर्ण हैं। लोकतंत्र में नेताओं को जनता के प्रति जवाबदेह ठहराया जाता है और बिना रक्तपात के बदलाव संभव है। इसके विपरीत, सीरिया में तानाशाही के कारण 7 मिलियन से अधिक लोग शरणार्थी बन गए। “जो आप हिंसा से बनाते हैं, वही अंत में हार में बदल जाता है।”

विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने निष्कर्ष के रूप में कहा, “बशर अल-असद का पतन सीरिया के इतिहास का एक काले अध्याय का अंत है। यह सिद्ध करता है कि तानाशाही शासन का कोई स्थायित्व नहीं होता। कोई भी बल, छल या विदेशी सहायता तानाशाही को सदा नहीं बनाए रख सकती। अब सीरिया एक नए अध्याय की ओर बढ़ रहा है, और दुनिया को यह सीखने की जरूरत है: केवल लोकतंत्र, जो जनता की इच्छा और जिम्मेदारी पर आधारित है, स्थायी स्थिरता और आशा प्रदान कर सकता है।”

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना: गरीब बेटियों के लिए वरदान

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना: गरीब बेटियों के लिए वरदान
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना: गरीब बेटियों के लिए वरदान
  • चार लाख से अधिक गरीब बेटियों का विवाह: मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना ने उत्तर प्रदेश में गरीब बेटियों को सम्मानजनक वैवाहिक जीवन की शुरुआत का अवसर दिया।
  • 51,000 रुपये का सरकारी योगदान: हर जोड़े के विवाह पर योगी सरकार 51,000 रुपये खर्च करती है, जिसमें 35,000 रुपये वधू के खाते में सीधे जमा होते हैं।
  • 2024-25 में 25,000 से अधिक जोड़ों का विवाह: चालू वित्तीय वर्ष में 600 करोड़ रुपये के बजट से अब तक हजारों जोड़ों का विवाह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
  • सामाजिक समरसता को बढ़ावा: विवाह समारोह हर धर्म और समुदाय के रीति-रिवाजों के अनुसार आयोजित होते हैं।
  • ‘सबका साथ, सबका विकास’ का प्रतीक: यह योजना समाज में सामाजिक समानता, समर्पण, और सर्वधर्म समभाव को बढ़ावा देने का आदर्श उदाहरण है।

लखनऊ, 09 दिसम्बर 2024: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 2017 में शुरू की गई मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना प्रदेश के गरीब और वंचित परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है। यह योजना अब तक चार लाख से अधिक बेटियों के विवाह का खर्च उठाकर उनके परिवारों को आर्थिक राहत और सामाजिक सुरक्षा प्रदान कर चुकी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब परिवारों को सम्मानजनक तरीके से अपनी बेटियों का विवाह कराने में सहायता करना है।

2024-25 में 25,000 से अधिक जोड़ों का विवाह

चालू वित्त वर्ष 2024-25 में अब तक 25,000 से अधिक जोड़ों का विवाह इस योजना के तहत कराया जा चुका है। राज्य सरकार ने इसके लिए 600 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है, जिसमें से आधे से अधिक धनराशि जिलों में स्थानांतरित हो चुकी है। योजना का लाभ वार्षिक आय सीमा 2 लाख रुपये तक के सभी वर्गों के परिवारों को मिल रहा है।

प्रत्येक जोड़े पर 51,000 रुपये का खर्च

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत प्रत्येक जोड़े पर 51,000 रुपये का खर्च किया जाता है। इसमें:

  • 35,000 रुपये वधू के खाते में सीधे जमा किए जाते हैं।
  • 10,000 रुपये कपड़े, गहने और अन्य जरूरी वस्तुओं की व्यवस्था के लिए खर्च होते हैं।
  • 6,000 रुपये विवाह समारोह की व्यवस्थाओं पर खर्च किए जाते हैं।

गोरखपुर, रामपुर और बिजनौर बने अग्रणी जिले

इस योजना के तहत गोरखपुर, रामपुर और बिजनौर में सबसे अधिक जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ है। गोरखपुर में 1,678, रामपुर में 1,653, और बिजनौर में 1,974 जोड़ों का विवाह योजना के तहत कराया गया। यह कार्यक्रम हर धर्म और समुदाय के रीति-रिवाजों के अनुसार आयोजित किया जाता है, जिससे समाज में सामाजिक समरसता और आपसी सहयोग को बढ़ावा मिलता है।

सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता का उत्सव

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी समावेशिता है। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और अन्य समुदायों के रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह समारोह आयोजित किए जाते हैं। यह पहल समाज में सर्वधर्म समभाव और सामाजिक समानता के आदर्श को प्रोत्साहित करती है।

योजना के लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि

बीते वर्षों में इस योजना के लाभार्थियों की संख्या में निरंतर वृद्धि देखी गई है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में 22,780 जोड़े इस योजना का लाभ उठा चुके थे, जबकि 2023-24 तक यह संख्या 1,04,940 तक पहुंच गई।

‘सबका साथ, सबका विकास’ का आदर्श उदाहरण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सामूहिक विवाह योजना राज्य में ‘सबका साथ, सबका विकास’ के विजन का आदर्श उदाहरण है। यह योजना न केवल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत प्रदान करती है, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विविधता को भी मजबूत करती है।

किसान किसी के सामने हाथ न फैलाएं, यह केंद्र व राज्य सरकार का उद्देश्यः सीएम योगी

किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ ही नवाचारों को मिलेगा प्रोत्साहन: सीएम योगी
किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ ही नवाचारों को मिलेगा प्रोत्साहन: सीएम योगी
किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ ही नवाचारों को मिलेगा प्रोत्साहन: सीएम योगी
  • एक समाचार पत्र समूह की तरफ से आयोजित ‘कृषिका- खेती से समृद्धि की ओर’ कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री
  • मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 11 किसानों को किया सम्मानित
  • किसानों के नाम पर राजनीति बहुत लोगों ने की, लेकिन किसान हित पीएम मोदी ने कियाः मुख्यमंत्री
  • किसानों की मेहनत व डबल इंजन सरकार के प्रयास से यूपी फिर से खाद्यान्न की टोकरी के रूप में प्राप्त कर रहा गौरवः योगी
किसान किसी के सामने हाथ न फैलाएं, यह केंद्र व राज्य सरकार का उद्देश्यः सीएम योगी

लखनऊ, 9 दिसंबर 2024: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आजादी के बाद किसानों के नाम पर राजनीति बहुत लोगों ने की, लेकिन किसान राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बन सके, 2014 में ईमानदारी से यह प्रयास पीएम मोदी ने किया। पीएम मोदी ने मृदा परीक्षण कार्ड जारी किया। पीएम कृषि बीमा योजना, पीएम कृषि सिंचाई जैसी योजनाएं चलाई गईं। यूपी में सात वर्ष में 23 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई की अतिरिक्त सुविधा देकर किसानों की आमदनी को कई गुना बढ़ाया गया। 2021 में पीएम ने बुंदेलखंड में अर्जुन सहायक परियोजना का लोकार्पण किया। इसके पहले यहां के किसानों को प्रति बीघा पांच हजार रुपये सालाना मिलता था, लेकिन लोकार्पण के दो वर्ष बाद वहां के किसानों ने बताया कि उन लोगों ने उन्हीं क्षेत्रों में प्रति बीघा 50 हजार रुपये की आमदनी की। पीएम कुसुम योजना के तहत एक लाख किसान को सोलर पैनल देने का कार्य निरंतर प्रगति पर है। 14 लाख से अधिक किसानों के निजी ट्यूबवेल की बिजली माफ की गई। यूपी में 2017 में सरकार आते ही 86 लाख किसानों का 36 हजार करोड़ रुपये का ऋण माफ किया गया। पीएम मोदी के नेतृत्व में किसानों को लागत का डेढ़ गुना दाम मिला। अन्नदाता किसानों को हाथ न फैलाना पड़े। इस उद्देश्य से देश में 12 करोड़ और यूपी में 2.62 करोड़ कृषकों को पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ दिया जा रहा है।

अकेले यूपी भर सकता है देश-दुनिया का पेट

मुख्यमंत्री ने एक समाचार पत्र समूह की तरफ से इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ‘कृषिका- खेती से समृद्धि की ओर’ कार्यक्रम में सोमवार को अपनी बातें रखीं। सीएम ने समाचार पत्र के रचनात्मक कार्यक्रमों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने 11 किसानों को चेक, अंगवस्त्र व स्मृति चिह्न प्रदान किया।

सीएम योगी ने कहा कि भारत पहले से ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था का देश माना जाता था। उत्तर प्रदेश में आज भी लगभग 30 फीसदी शहरीकरणों को छोड़ दें तो 70 फीसदी भूभाग ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर आधारित है और यह आय-रोजगार का महत्वपूर्ण साधन भी है। देश की 17 फीसदी आबादी यूपी में निवास करती है। यूपी के पास देश की कृषि योग्य भूमि केवल 11 फीसदी है, लेकिन इस पर देश का 20 फीसदी से अधिक खाद्यान्न उत्पादन होता है। यूपी में 235 लाख हेक्टेयर में से 161 लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती-किसानी होती है। इसमें से 86 फीसदी भूमि सिंचित व अत्यंत उर्वरा है, इसलिए 11 फीसदी भूमि होने के बावजूद उप्र का किसान लगभग दोगुना खाद्यान्न उत्पादन करता है। देश और दुनिया की जितनी फर्टिलाइज लैंड, जल संसाधन यूपी के पास है, वह अन्य कहीं भी नहीं है। अगर अन्नदाता किसानों के प्रोत्साहन के लिए थोड़ा सा कार्य कर लें, उन्हें तकनीक से जोड़ लें। समय पर अच्छे बीज उपलब्ध हो जाएं तो 20 फीसदी से तीन गुना अधिक खाद्यान्न उत्पादन का सामर्थ्य यूपी का किसान रखता है और अकेले यूपी देश-दुनिया का पेट भर सकता है।

अब एक सप्ताह के भीतर गन्ना किसानों को होता है भुगतान

सीएम ने कहा कि प्रदेश के अंदर सिंचाई के दायरे को बढ़ाया गया। यूपी में 3500 से अधिक एफपीओ कार्य कर रहे हैं। वेयरहाउस बनाए गए और उनकी संख्या बढ़ाई गई। पहले गन्ने के सीजन में किसान आंदोलन करता था। अब यूपी में 120 चीनी मिलें चल रही हैं। इसमें से 100 मिलें एक सप्ताह के अंदर भुगतान कर रही हैं। आज यूपी गन्ना, चीनी व एथेनॉल उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। देश का 25 फीसदी आलू उत्पादन और 30 फीसदी मक्का उत्पादन यूपी का किसान कर रहा है। धान, गेहूं, दलहन-तिलहन में भी किसानों ने कीर्तिमान स्थापित किया है। अन्नदाता किसानों की मेहनत व डबल इंजन सरकार के प्रयास से यूपी फिर से खाद्यान्न की टोकरी के रूप में गौरव प्राप्त कर रहा है।

देश में सर्वाधिक गोवंश पालने वाला राज्य है यूपी

सीएम योगी ने कहा कि देश में सर्वाधिक गोवंश पालने वाला राज्य यूपी है। यहां सरकारी गोशालाओं में 12 लाख से अधिक निराश्रित गोवंश हैं। सरकार निराश्रित गोवंश की देखभाल कर रही है। उनके लिए तीन प्रकार की योजनाएं भी चला रही हैं। इसका उद्देश्य एक तरफ गोरक्षा तो दूसरी तरफ जहरमुक्त खेती के लिए किए जाने वाला प्रयास है। केंद्र व राज्य सरकार मिलकर यूपी में 1.15 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि में प्राकृतिक खेती कर रही है। गंगा जी के तटवर्ती 27 जनपदों व बुंदेलखंड के सातों जनपदों में इसे प्रोत्साहित कर रहे हैं। इसके एक्सपर्ट गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता का संकल्प ही प्राकृतिक खेती के बारे में लोगों को जागरूक करना है। प्राकृतिक पद्धति से खेती में प्रति एकड़ 12 से 15 हजार की बचत होती है। यदि 161 लाख हेक्टेयर को प्राकृतिक खेती में बदल देंगे तो लाखों करोड़ रुपये बचेंगे।

योगी ने यूपी के किसानों की सफल गाथा भी बताई

सीएम योगी ने यूपी के किसानों की सफलता की कहानी भी बताई। बताया कि बिजनौर का एक किसान 10 एकड़ खेती में एक करोड़ रुपये का वार्षिक नेट प्रॉफिट कमाता है। यूपी के किसानों ने देश के अंदर 86 टन (860 क्विंटल) गन्ना उत्पादन प्रति एकड़ करके दिखाया। एक किसान खुद भी पिपरामेंट की खेती करते हैं और किसानों से एकत्र कर 200 करोड़ का एक्सपोर्ट कर रहे हैं। एक किलो आम का दाम रूस, यूएस, यूरोप में एक हजार रुपये है। इस अवसर पर पशुधन व दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह, कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख, गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिजेंद्र सिंह, चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. आनंद कुमार, राज्य कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह आदि मौजूद रहे।