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क्या चीन हमले की योजना बना रहा है? ताइवानी रक्षा मंत्रालय के बयान से बढ़ी वैश्विक चिंताएं

ताइपे: ताइवान के रक्षा मंत्रालय के ताजा बयान ने दुनिया की टेंशन बढ़ा दी है। उसने कहा है कि चीन की गुप्त सैन्य टुकड़ी ताइवान के आसपास कुछ करने की प्लानिंग करती दिख रही है, लेकिन यह साफ नहीं है कि ये कोई आर्मी ड्रिल है या कुछ और। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि उसने पिछले 24 घंटे में चीनी नेवी के एक दर्जन जहाज और 47 सैन्य विमानों का पता लगाया है, लेकिन पिछले सैन्य अभ्यासों की तरह गोलाबारी जैसी कोई बात नजर नहीं आई है। रक्षा अधिकारियों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस बार तैनाती ज्यादा बड़े इलाके में की गई है, और अतिरिक्त जहाज ताइवान से आगे प्रशांत क्षेत्र के बाकी के इलाकों में भी जा रहे हैं।

‘उनका मैसेज बिल्कुल साफ है’

लेफ्टिनेंट जनरल हसिह जिह-शेंग ने कहा कि चीन की नेवी 2 दीवारें बना रही है, एक ताइवान की परिधि पर और दूसरी पहली आइलैंड चेन के बाहर, जो जापान से दक्षिण में और ताइवान से होते हुए फिलीपींस तक फैली हुई है। उन्होंने ताइवान और चीन के बीच के जल क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा, ‘उनका मैसेज बिल्कुल साफ है: ताइवान जलडमरूमध्य हमारा है।’ ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते की हाल की विदेश यात्रा, जिसमें हवाई और गुआम भी शामिल थे, के जवाब में चीन की सेना संभावित सैन्याभ्यास के लिए तैयारियों में जुटी है। बता दें कि चीन ताइवान को अपना हिस्सा बताता है और इसके बाकी के देशों, खासकर अमेरिका के साथ आधिकारिक संबंध रखने का विरोध करता है।

चीन के हर कदम पर है नजर

ताइवान के प्रधानमंत्री लाई ने पिछले हफ्ते गुआम में अमेरिकी संसद के नेताओं से फोन पर बात की थी। बता दें कि दुनिया के ज्यादातर देशों की तरह अमेरिका भी ताइवान को औपचारिक रूप से एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता है, लेकिन वह 2.3 करोड़ की आबादी वाले इस देश के लिए हथियारों का सबसे बड़ा सप्लायर है। अभी तक चीन ने सैन्य अभ्यास की कोई घोषणा नहीं की है और यही वजह है कि ताइवान के अधिकारी जारी गतिविधि को ट्रेनिंग बता रहे हैं। बता दें कि चीन ने कई बार कहा है कि वह ताइवान को अपने साथ शामिल करके रहेगा भले ही इसके लिए जंग ही क्योंं न लड़नी पड़े। ऐसे में ताइवान के पास चीन की गुप्त सेना का मौजूद होना खतरे का संकेत है।

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने क्रेमलिन में भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। इस बैठक में रूस के रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलोसोव भी मौजूद थे। यह मुलाकात India-Russia Inter-Governmental Commission on Military and Military Cooperation (IRIGC-M&MTC) की 21वीं बैठक के तहत हुई। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। दोनों ने यह माना कि भारत और रूस के बीच साझेदारी में अपार संभावनाएं हैं और संयुक्त प्रयासों से उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त होंगे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “हमारे देशों के बीच दोस्ती सबसे ऊंचे पहाड़ों से भी ऊंची और सबसे गहरे समुद्रों से भी गहरी है। भारत हमेशा अपने रूसी दोस्तों के साथ खड़ा रहा है और भविष्य में भी खड़ा रहेगा।” रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बैठक को लेकर अपने एक्स पोस्ट में कहा, “मॉस्को में अपने रूसी समकक्ष आंद्रेई बेलोसोव के साथ IRIGC-M&MTC की बहुत ही उपयोगी बैठक हुई। द्विपक्षीय रक्षा संबंधों की पूरी श्रृंखला की समीक्षा करते हुए, हमने दोनों देशों के बीच सहयोग को गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की। हम भारत-रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रूस के कलिनिनग्राद स्थित यांतर शिपयार्ड में भारतीय नौसेना के नवीनतम बहु-भूमिका स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS तुशील के जलावतरण समारोह में भाग लिया। राजनाथ सिंह ने कहा, “मैं INS तुशील के जलावतरण समारोह में शामिल होकर बहुत खुश हूं। यह जहाज भारत की बढ़ती समुद्री ताकत का गर्वित प्रतीक है और भारत-रूस के लंबे समय से चले आ रहे द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।”

इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने पहली बार भ्रष्टाचार मामले में कोर्ट में पेश होकर अपनी गवाही दी

तेल अवीव: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कथित भ्रष्टाचार के मामले में अपने खिलाफ लंबे समय से चल रहे मुकदमे में मंगलवार को पहली बार कठघरे में खड़े होकर गवाही दी। ऐसा उन्होंने तब किया है जब उन्हें युद्ध अपराधों के लिए अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट का सामना करना पड़ा है और गाजा में भी लड़ाई जारी है। यह पहली बार है कि जब किसी मौजूदा इजरायली प्रधानमंत्री ने एक आपराधिक प्रतिवादी के रूप में कठघरे में खड़े होकर गवाही दी।

कोर्ट में क्या हुआ?

गवाही देना शुरू करने पर नेतन्याहू ने न्यायाधीशों को ‘हैलो’ कहा। एक न्यायाधीश ने उनसे कहा कि उनके पास अन्य गवाहों के समान विशेषाधिकार हैं और वह अपनी इच्छानुसार बैठ सकते हैं या खड़े रह सकते हैं। तेल अवीव की खचाखच भरी अदालत में कठघरे में खड़े नेतन्याहू ने कहा, ‘‘सच कहने के लिए मैंने इस पल का आठ साल तक इंतजार किया।’’ उन्होंने अपने खिलाफ आरोपों को ‘निरर्थकता का भंडार’ करार दिया और वादा किया कि उनका बयान अभियोजन पक्ष के मामले को खत्म कर देगा।

क्या बोले नेतन्याहू?

नेतन्याहू ने घटनाओं के बारे में बताना शुरू किया तो वह सहज दिखे। उन्होंने अपने जीवन के बारे में व्यक्तिगत विवरण साझा किए। अभियोजन पक्ष द्वारा अपनी छवि चमकाने वाले व्यक्ति के रूप में उन्हें चित्रित करने के प्रयासों के विपरीत नेतन्याहू ने कहा कि मीडिया कवरेज से उनकी नींद उड़ जाती थी, लेकिन उन्हें पता चला कि इसका कोई सार्थक असर नहीं है। उन्होंने कहा कि वह सिगार पीते हैं लेकिन काम के बोझ के कारण वह इसे मुश्किल से ही खत्म कर पाते हैं और उन्हें शैंपेन से नफरत है।

नेतन्याहू पर लगे हैं भ्रष्टाचार के आरोप

बेंजामिन नेतन्याहू पर व्यक्तिगत और व्यावसायिक हितों में सहायता के बदले एक अरबपति हॉलीवुड निर्माता से हजारों डॉलर मूल्य के सिगार और शैंपेन लेने का आरोप है। उन पर अपने और अपने परिवार के अनुकूल कवरेज के बदले में मीडिया के दिग्गज कारोबारियों के लिए लाभकारी विनियमन को बढ़ावा देने का भी आरोप है। नेतन्याहू (75) ने गलत काम करने से इनकार करते हुए कहा कि ये आरोप उनके लंबे शासन को खत्म करने के लिए शत्रुतापूर्ण मीडिया और पक्षपाती कानूनी प्रणाली द्वारा रचित एक साजिश है

सीरिया की सैदनया जेल में हजारों लोग क्यों जा रहे हैं? जानिए इसकी कुख्याति का कारण और इससे जुड़ी पूरी कहानी

दमिश्क: सीरिया में पूर्व राष्ट्रपति बशर असद का शासन खात्म होने के बाद जिस जगह लोग सबसे पहले पहुंच रहे हैं, वह है सैदनया जेल। अपनों की तलाश में सीरिया के कोने-कोने से हजारों की संख्या में लोग इस खौफनाक जेल में पहुंच रहे हैं। यह जेल अपनी भयावहता के लिए बदनाम थी। इसे लंबे समय तक ‘कत्लगाह’ के रूप में जाना जाता था। दमिश्क के बाहर बनी इस जेल में लोग अपनों के निशान तलाशने के लिए उमड़ रहे हैं।

लोगों ने तोड़े भारी दरवाजे

सोमवार को जब लोग यहां पहुंचे तो उन्हें निराश हाथ लगी। लोगों ने गलियारों में लगे लोहे के भारी दरवाजे खोले और पाया कि अंदर की कोठरियां खाली थीं। हथौड़ों, फावड़ों और ड्रिल की मदद से लोगों ने फर्श और दीवारों में छेद कर दिए। वो उन चीजों की तलाश कर रहे थे जो उन्हें लगता था कि गुप्त कालकोठरी में छिपाई गई हैं। वो ऐसी आवाजों का पीछा कर रहे थे जो उन्हें लगता था कि उन्होंने जमीने के नीचे से सुनी हैं। हालांकि, उनके प्रयास असफल रहे और उन्हें कुछ भी नहीं मिला।

लोग पहुंचे तो क्या मिला?

रविवार को जब दमिश्क पर विद्रोहियों का कब्जा हुआ तो उन्होंने सैदनया सैन्य जेल से दर्जनों लोगों को रिहा कर दिया था। तब से अब तक किसी का पता नहीं चल पाया है। यहां पहुंची घादा असद की आंखों में आंसू थे। उन्होंने पूछा, ‘‘सारे लोग कहां हैं? सबके बच्चे कहां हैं। कहां हैं सभी लोग?’’ असद अपने भाई की तलाश में दमिश्क स्थित अपने घर से राजधानी के बाहरी इलाका स्थित जेल पहुंची थीं। उनके भाई को 2011 में हिरासत में लिया गया था जब पहली बार राष्ट्रपति के शासन के खिलाफ विद्रोह भड़का था, जिसके बाद विद्रोह ने गृह युद्ध का रूप ले लिया था। तलाशी में मदद कर रहे नागरिक सुरक्षा अधिकारी भी परिवारों की तरह ही इस बात को लेकर भ्रमित थे कि कोई और कैदी क्यों नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि हाल के हफ्तों में यहां कम कैदी रखे गए हैं।

असद की खिलाफत करना पड़ता था भारी

असद के शासन के दौरान और खासतौर पर 2011 में विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद राष्ट्रपति के प्रति असहमति का कोई भी संकेत व्यक्ति को सैदनया जेल पहुंचा सकता था। बहुत कम लोग ही जेल से बाहर आ सके। वर्ष 2017 में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ के अनुमान के अनुसार, उस समय ‘समाज के हर क्षेत्र से’ 10,000-20,000 लोगों को सैदनया जेल में रखा गया था।

यह भी जानें

रिहा किए गए कैदियों और जेल अधिकारियों की गवाही का हवाला देते हुए एमनेस्टी की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दौरान हजारों लोगों को सामूहिक फांसी दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, कैदियों को लगातार यातना दी जाती, पीटा जाता, उनसे बलात्कार किया जाता। मानवाधिकार संगठन ने कहा कि तकरीबन हर दिन जेल के सुरक्षा गार्ड जेल कोठरियों से उन कैदियों के शवों को एकत्रित करते जिनकी यातना के कारण मौत हुई थी।

नए साल पर यात्रा का प्लान बनाएं, मुंबई से इन 3 टूर पैकेज को आज ही बुक करें,

अगर आप भी न्यू ईयर पर कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो आप इन टूरिस्ट प्लेसिस पर जरुर घूमने जाएं। नववर्ष के दौरान ट्रैवल प्लेसिस पर भीड़ ज्याजा देखने को मिलती है। कई बार तो होटल ढूंढना मुश्किल हो जाता है। नया साल के समय होटल भी काफी महंगे हो जाते हैं। टूर पैकेज से यात्रा प्लान करने से कुछ भी मुश्किल नहीं होता है। आइए आपको बताते हैं इन टूर पैकेज के बारे में-

भुज टूर पैकेज

– इस टूर पैकेज की शुरुआत 1 जनवरी 2025 से हो रही है।

– पहले यह देखले कि पैकेज में क्या सुविधा मिल रही हैं, तभी टिकट बुक करें।

– बता दें कि, पैकेज 4 रात और 5 दिनों का है। इसके बाद आप हर बुधवार टिकट बुक कर सकते हैं।

– पैकेज मे ट्रेन यात्रा करने का मौका मिलेगा।

– अकेले यात्रा करने पर पैकेज फीस 34399 रुपये है।

– वहीं, 2 लोगों के साथ यात्रा करने पर प्रति व्यक्ति पैकेज फीस 21399 रुपये है।

– 3 लोगों के साथ यात्रा करने पर प्रति व्यक्ति पैकेज फीस 18099 रुपये है। वही, बच्चों के लिए पैकेज फीस 11699 रुपये है।

तिरुपति और कोल्हापुर टूर पैकेज

– यह पैकेज 5 रात और 6 दिनों का है।

– इस पैकेज की टिकट आप कल्याण, लोकमान्य तिलक, मुंबई, पुणे, सोलापुर और ठाणे से बुक करें।

– अकेले यात्रा करने पर इस पैकेज की फीस 19375 रुपये है।

– पैकेज फीस- 2 लोगों के साथ यात्रा करने पर प्रति व्यक्ति पैकेज फीस 15575 रुपये है।

– तीन लोगों के साथ यात्रा करने पर प्रति व्यक्ति पैकेज फीस 15175 रुपये है।

– बच्चों के लिए पैकेज फीस 13875 रुपये है।

चंडीगढ़, मनाली और शिमला टूर पैकेज

– इस पैकेज की शुरुआत 12 दिसंबर से हो रही है। इसके बाद आप हर गुरुवार टिकट बुक कर पाएंगे।

– यह पैकेज 7 रात और 8 दिनों का है।

– अकेले यात्रा करने पर पैकेज फीस 48100 रुपये है।

– 2 लोगों के लिए प्रति व्यक्ति पैकेज फीस 35800 रुपये है।

– 3 लोगों के साथ यात्रा करने पर प्रति व्यक्ति पैकेज फीस 34000 रुपये है। वहीं, बच्चों के लिए पैकेज फीस 29300 रुपये है